MP में औद्योगिक विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की कवायद शुरू

भोपाल  भोपाल को ग्रेटर केपिटल की तर्ज पर विकसित करने के लिए भोपाल विकास प्राधिकरण को भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन (Bhopal Metropolitan Region)का नोडल एजेंसी बनाया है। इंदौर में भी आइडीए का यह जिमा सौंपा गया है। भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन में भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम व राजगढ़ शामिल हैं। प्रमुख सचिव शहरी आवास एवं विकास संजय शुक्ला के अनुसार बीडीए कंसलटेंट तय कर आगामी प्लानिंग बनाएगा। यह उच्चाधिकारियों की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी। ऐसे होगा काम ● सीहोर- भोपाल की प्लानिंग कर तालाब व कैचमेंट संरक्षण का काम होगा। ● मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र को भोपाल से जोडकऱ काम किया जाएगा। ● अन्य जिलों में स्थित भोपाल के पास की वैश्विक धरोहरें सांची, भीमबैठका और अन्य पर भोपाल से काम तय हो जाएगा। ● मेट्रो का नेटवर्क भी पास के क्षेत्रों तक बढ़ाने की राह खुलेगी। एमपी में 9 शहरों को मिलाकर बनेंगे 2 मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र, 6 संभागों का होगा डेवलपमेंट  मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नगरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की कवायद शुरू हो गई है। पहला मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र इंदौर-उज्जैन-देवास और धार को मिलाकर और दूसरा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भोपाल-सीहोर, रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर विकसित किया जाएगा।  केंद्र के विजन के मुताबिक राज्य के प्रमुख संभाग मुख्यालय ग्वालियर, सागर, रीवा, जबलपुर, नर्मदापुरम और शहडोल को रीजनल इकोनॉमिक ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सरकार का यह प्रयास अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ रोजगार, व्यापार और निवेश के नये अवसरों को भी बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। सुविधाओं में होगा सुधार जानकारी के तहत इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर का 100 प्रतिशत क्षेत्र शामिल किया जाएगा, जबकि उज्जैन का 44 प्रतिशत धार और नागदा का भी कुछ हिस्सा इसमें जोड़ा जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक और शहरी विकास को संगठित तरीके से आगे बढ़ाना है, जिससे आधारभूत सुविधाओं में सुधार हो और निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। 5 जिलों की बदल जाएगी सूरत, जानिए कैसे मेगा रोड प्रोजेक्ट से 80 लाख को होगा फायदा  मध्य प्रदेश के पांच जिलों – भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन और नर्मदापुरम की सूरत अब जल्द ही बदलने वाली है। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में मेगा रोड प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य इन जिलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करना है। इस परियोजना के तहत, आने वाले समय में इन क्षेत्रों के लोग 80 लाख की आबादी तक को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इन जिलों को भोपाल से बेहतर कनेक्ट करने के लिए सड़क नेटवर्क पर काम तेज कर दिया गया है और कंसल्टेंट तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अगले एक महीने में इन पांच जिलों से जुड़े रोड नेटवर्क का सर्वे भी पूरा कर लिया जाएगा। सीएम का ग्रेटर राजधानी की बात करना हाल ही में भोपाल में आयोजित आंबेडकर ब्रिज के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वृहद राजधानी के निर्माण की बात की थी। इस घोषणा के बाद से ही इस दिशा में कार्य शुरू हो गया था और अब वृहद राजधानी के रूप में भोपाल और आसपास के इलाकों का विकास एक संगठित तरीके से किया जाएगा। यह परियोजना वृहद और समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। भोपाल का मास्टर प्लान रोका जाएगा ग्रेटर भोपाल के मास्टर प्लान को रोकने की योजना बनाई गई है, ताकि भोपाल और उसके आसपास के पांच जिलों को एक ही क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा सके। टीएंडसीपी (Town and Country Planning Department) के अधिकारियों को शासन की ओर से यह निर्देश दिए गए हैं। अब भोपाल सहित पांच जिलों का समग्र विकास एक ही योजना के तहत किया जाएगा। इन जिलों में सीहोर, भोपाल-नरसिंहगढ़, ब्यावरा-राजगढ़, भोपाल-नर्मदापुरम, भोपाल-विदिशा और भोपाल-रायसेन तक की योजनाएं शामिल की जाएंगी। संरक्षण कार्यों में सुधार वर्तमान में, भोपाल और सीहोर अलग-अलग विकास योजनाओं के तहत काम करते हैं, जबकि दोनों में बड़ा तालाब और उसका कैचमेंट एरिया साझा है। अलग-अलग योजनाएं होने के कारण संरक्षण कार्य आधे-अधूरे होते हैं। अब वृहद राजधानी योजना के तहत दोनों क्षेत्रों को एकजुट करके संरक्षण कार्यों में अधिक प्रभावशीलता लाई जा सकेगी। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र का विकास मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र भोपाल के पास स्थित है, लेकिन यह रायसेन जिले में आता है। इससे पहले, भोपाल के साथ इसके विकास के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई जा सकती थी। अब इसे वृहद राजधानी में शामिल किया जाएगा, जिससे यह वैश्विक नक्शे पर भी नजर आएगा और इसके विकास की दिशा में योजनाएं बनाई जा सकेंगी। वैश्विक धरोहरों का संरक्षण और विकास भोपाल से सांची और भीम बेटिका जैसी वैश्विक धरोहरों का संरक्षण और विकास पहले संभव नहीं था। इन धरोहरों का संबंध अब भोपाल के विकास से सीधे जुड़ जाएगा, जिससे इनका संरक्षण और प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। भोपाल में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार भोपाल में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार लगातार हो रहा है। फिलहाल, मेट्रो का नेटवर्क मंडीदीप तक बढ़ाया जा रहा है। भविष्य में, बड़े बजट से मेट्रो को भोपाल के 100 किमी दायरे के बाहर भी विस्तार दिया जाएगा, जिससे भोपाल के आसपास के इलाकों में मेट्रो की आवाजाही आसान हो जाएगी और इससे शहर के यातायात में भी सुधार होगा। नई प्लानिंग से बढ़ेगी गति और स्तर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि इस नई योजना में 80 लाख लोगों की आबादी को ध्यान में रखते हुए प्लानिंग का स्तर पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा और इस पर काम की गति भी तेज होगी। अब इस वृहद परियोजना का उद्देश्य महानगरीय स्वरूप में नगरों का विकास करना है, ताकि यह योजना और उसके परिणाम पूरी तरह से एक बड़े शहर के विकास के अनुरूप हो। उन्होंने आगे कहा, "अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सुधार होगा तो निश्चित रूप से भोपाल शहर में आबादी का दबाव घटेगा। इस दिशा में काम शुरू हो चुका है और अब इसे तेज गति से पूरा किया जाएगा।" समग्र योजना के तहत विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से सर्वे ग्रेटर राजधानी के विकास के लिए टीएंडसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट) के संचालक सह आयुक्त श्रीकांत बनोठ ने भी इस योजना को लेकर बयान दिया। उनका … Read more

1 अप्रैल से आम आदमी को बड़ा झटका, नई दरें लागू , इन रूट्स पर 5 से सीधा 65 रूपए हुआ टोल टैक्स, NHAI ने जारी की लिस्ट

भोपाल प्रदेश में अब आपको अपने वाहन से सफर करना अगले महीने से महंगा पड़ेगा। जी हां अब प्रदेश के चार शहरों के लिए टोल टैक्स महंगा होने जा रहा है। जी हां इंदौर-अहमदाबाद, इंदौर-देवास और देवास-ब्यावरा के बीच सफर महंगा होने वाला है। आपको बता दें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि एनएचएआई द्वारा 1 अप्रैल से लागू होने वाले टोल रेट जारी कर दिए गए हैं। 29 जनवरी तक कारों के लिए टोल दरें 65 रुपए थी। इसमें अब 35 रुपए का इजाफा हो गया है। इसी तरह टैक्सी, मिनी बस और अन्य हलके माल वाहनों के लिए भी 105 रुपए का टोल जनवरी में देना होता था, जो बढ़कर 160 रुपए हो गया है। इसके अलावा 225 रुपए का रेट बस और ट्रक के लिए था, जो बढ़कर 340 हो गया है। इसमें भी दो बार वृद्धि हो चुकी है। इंदौर-अहमदाबाद हाईवे पर मप्र में 3 जगह लग रहा टोल इंदौर-अहमदाबाद हाईवे पर तीन जगह मध्यप्रदेश में टोल लगता है। इसके बाद गुजरात बॉर्डर लग जाती है। इन तीन स्थानों में बेटमा के पास मेठवाड़ा, धार के आगे दत्तीगांव और नवनिर्मित माछलिया घाट पर टोल रेट 5 से 10 रुपए तक बढ़ाए गए हैं। वहीं आगरा-मुंबई रोड के देवास-ब्यावरा सेक्शन के दो टोल नाकों रोजवास और छापरा पर टोल की दरों में 5 से 15 रुपए तक वृद्धि हुई है। इस मार्ग पर एक टोल एमपीआरडीसी का भी है, जिसकी अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। इसके अलावा खंडवा और मुंबई तरफ के हाईवे के टोल रेट अक्टूबर में बदलते हैं। इन रूट्स पर नहीं कोई बदलाव जानकारी के मुताबिक वैसे तो एचएचएआई द्वारा कुछ टोल्स पर टैक्स बढ़़ाया गया है। लेकिन इंदौर-देवास रूट पर उन कार चालकों को राहत रहेगी। जो एबी रोड पर बने मांगलिया स्थित टोल से गुजरेंगे। आपको बता दें ये राहत केवल कार या जीप से सफर करने वालों के लिए होगी। क्योंकि इन गाड़ियों पर लगने वाले टोल में एक तरफ की ट्रिप के लिए रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बल्कि यहां से बस या ट्रक के लिए 5 रुपए टोल बढ़ाकर सीधा 65 रुपए कर दिया है। आपको बता दे इस लिस्ट के अनुसार इंदौर-देवास बायपास पर बने टोल पर कार चालकों के लिए 65 रुपए तो वहीं बस या ट्रक वालों को 220 रुपए चुकाने होंगे। इंदौर-अहमदाबाद रूट     आपको बता दें नए रूट में इंदौर-अहमदाबाद रूट पर पड़ने वाले मेहतवाड़ा टोल पर पर भी टैक्स में बदलाव किया गया है। यहां पर आपको यदि कार लेकर निकलना है तो इसके लिए आपको 160, तो वहीं ट्रक और बस चालकों के लिए 505 रुपए चुकाने होंगे।     इसके अलावा दत्तीगांव टोल पर कार या जीप के लिए 140 रुपए तो वहीं ट्रक या बस के लिए 445 रुपए लगेंगे।     आपको बता दें यदि आप देवास होते हुए ब्यावरा जाना चाहते हैं तो आपको अब छपरा और रोजवास दोनों टोल पर मिलाकर कार के 235 रुपए का टैक्स चुकाना होगा। 1 अप्रैल से लागू होंगे नए रेट आपको बता दें इसके लिए जो नए रेट जारी किए गए हैं वे 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे। यानि नए वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2023-24 से आपको अपनी जेब खाली करनी होगी। गौरतलब है जुलाई में इंदौर-खलघाट टोल की दरें बढ़ाई जानी हैं तो इसी के साथ-साथ इसके तीन महीने बाद ही यानि अक्टूबर में इंदौर-उज्जैन दरें बदली जाती हैं। recent visitors 43

मध्यप्रदेश में 40 हजार km लंबी नहरें होंगी पक्की, पंचायतें बनाएंगी 1 लाख जलदूत

भोपाल  मध्यप्रदेश को 90 लघु व मध्यम सिंचाई परियोजनाएं मिलेंगी, 50 हजार खेत तालाबों का निर्माण होगा। जबकि पंचायतें 1000 नए तालाबों का निर्माण करेंगी। साथ ही एमपी में 40 हजार किलोमीतर लंबी नहरों को पक्का करने का काम भी जल्द शुरू होगा। प्रदेश(MP News) के सभी 55 जिलों की वाटर बॉडीज का डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे इनके संरक्षण के प्रयास शुरू हो सकेंगे। इसके लिए हर गांव से दो-तीन महिला-पुरुषों का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे। प्रदेश को पानीदार बनाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, नगरीय विकास सहित 12 से अधिक विभागों ने मिलकर एक योजना बनाई है, जिसमें ये काम शामिल किए गए है। इन पर 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत काम शुरू होंगे, जो 30 जून तक जारी रहेंगे। धरती और पानी बचाने हर हाथ बनेगा जगन्नाथ सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि "इस अभियान में जागरुकता कार्यक्रम तो चलाए ही जाएंगे, इनके अलावा आम लोगों को जलसंक्षण के प्रति जागरुक करने नदियों और तालाब पर छोटे बांधों का निर्माण और आस पास छोटे फलदार पौधे लगाए जाएंगे. इसके अलावा प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक जन आंदोलन बनाएं." ऐसा है अभियान जल गंगा संवर्धन अभियान के 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा। नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशेंगे। लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा। प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे। नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा। नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रत्येक गांव से 2 से 3 महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे। सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोख पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा। नहरों को मार्क कर विलेज-मेप पर ष्शासकीय नहरष् के रूप में अंकित किया जाएगा। बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। करीब 40 हजार किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के सफाई कार्य। फ्लशबार की मरम्मत कार्य किए जाएंगे। स्लूस-वैल की सफाई कार्य भी इसी अभियान के दौरान होंगे। सदानीरा फिल्म समारोह, जल सम्मेलन, प्रदेश की जल परंपराओं पर आख्यान, चित्र प्रदर्शनी समेत विभिन्न आयोजन किये जायेंगे। कार्ययोजना में इन कार्यों पर भी रहेगा जोर -नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी जाएगी। -ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्रोतों का संरक्षण होगा। -50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के काम होंगे। -नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम के काम भी होंगे। -नर्मदा परिक्रमा पथ का चिह्नांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की तैयारी की जाएगी। -ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल लगेंगी, लोगों को जल संरचनाओं की जिमेदारी सौंपी जाएगी। -सीवेज का गंदा पानी जल स्रोतों में न मिले, इसके लिए सोक पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। -नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन के काम भी होंगे। – बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। – सदानीरा फिल्म समारोह, जल समेलन, प्रदेश की जल परंपराओं पर आयान, चित्र प्रदर्शनी समेत विभिन्न आयोजन होंगे। recent visitors 25

MP में जल्द एक और बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 32 अफसरों को मिलेगी नई जिम्मेदारी, कलेक्टर भी बदलेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में आने वाले कुछ महीनों में एक बार फिर बड़ी प्रशासनिक सर्जरी होना तय है। इसमें करीब 32 आइएएस को सरकार नई जिम्मेदारी देने की तैयारी में है तो प्रभार में टिके मंत्रालय के कई विभागों को स्वतंत्र अफसर भी मिलेंगे। सरकार ने इस फेरबदल में बीते एक साल के दौरान एसीएस, पीएस, सचिव, संभागायुक्त व कलेक्टरों के कामों को आधार बनाने की योजना रखी है।  इसमें ऐसे अफसर जिनके काम के नतीजे अच्छे रहे हैं और सरकार को केंद्र स्तर पर, 16वें वित्त आयोग की प्रजेंटेशन बैठक में व अन्य स्तरों पर सराहना मिली, उनको बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। वहीं किरकिरी कराने वालों की कुर्सी खिसकना तय है। 12 बड़े विभागों का काम प्रभार सूत्रों की मानें तो सरकार प्रदेश को जल्द ही स्वतंत्र कृषि उत्पादन आयुक्त और कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष देने की तैयारी में है। वर्तमान में कृषि उत्पादन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल व कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष का अतिरिक्त जिमा सामान्य प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे के पास है तो पीडब्ल्यूडी जैसे 12 बड़े विभागों का काम भी प्रभार पर चल रहा है। जिले और संभागों में भी बदलाव संभव प्रदेश के कुछ जिलों के कलेक्टर व संभागों के संभागायुक्त भी बदले जाने हैं। इस बदलाव के कई आधार होंगे। जिनमें जिलों में घटित होने वाली बड़ी घटनाओं को नहीं संभाल पाना, प्रशासनिक चूक के कारण घटना होना, नेताओं की वास्तविक नाराजगी का बार-बार सामने आना, खनिज माफिया व अपराधियों की करतूतें उजागर होना, अलग-अलग स्तर पर कमियों के कारण विपक्ष को मुद्दा मिलना, जैसे बिंदू अहम हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने ऐसे कुछ बिंदुओं के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्द इन बड़े पदों व विभागों में पदस्थापना को लेकर काम के आधार पर ग्रेडिंग सिस्टम अपनाएगी। recent visitors 50

पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक अस्पताल अपनी जरूरत की दवाएं खुद बनाने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा

भोपाल  कलियासोत पहाड़ी स्थित पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक अस्पताल अपनी जरूरत की दवाएं खुद बनाने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। यहां प्रदेश की पहली आधुनिक आयुर्वेदिक फार्मेसी का निर्माण कार्य जारी है, जिसे इस साल के अंत तक शुरू करने की योजना है। यह फार्मेसी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी और इसमें जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण, औषधियों की गुणवत्ता परीक्षण, स्वच्छ भंडारण तथा प्रत्यक्ष वितरण की सुविधा होगी। ऐसे पहुंचेगी दवा आम लोगों तक यह आयुर्वेदिक फार्मेसी अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों को प्रत्यक्ष रूप से औषधियां उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा अस्पताल के माध्यम से प्रदेशभर के सरकारी आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों और दवा वितरण केंद्रों में भी दवाएं भेजी जाएंगी, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को लाभ मिल सके। प्रचार-प्रसार की रणनीति अस्पताल प्रशासन आयुर्वेदिक दवाओं के लाभ और उपयोगिता को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाएगा। इसमें निश्शुल्क स्वास्थ्य शिविर, सामाजिक संगठनों के सहयोग से जनसभाएं और इंटरनेट मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म्स के माध्यम से प्रचार किया जाएगा। इसके अलावा आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक कार्यशालाओं और सेमिनारों का भी आयोजन होगा। दवाओं की कीमत और सुलभता     अस्पताल प्रशासन के अनुसार यहां बनने वाली आयुर्वेदिक दवाएं बाजार दर से काफी सस्ती होंगी। चूंकि दवाएं अस्पताल में ही बनाई जाएंगी, इसलिए मध्यस्थता शुल्क बचेगा, जिससे मरीजों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण औषधियां मिल सकेंगी।     दवा निर्माण की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों की निगरानी में उत्पादन होगा। इसके लिए विदेशी उपकरण मंगाए जाएंगे। इनका कहना है फार्मेसी भवन निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके बाद उपकरणों की स्थापना और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। हमारा लक्ष्य इस साल के अंत तक फार्मेसी शुरू करना है। इस पहल से प्रदेश में आयुर्वेदिक चिकित्सा को नया बल मिलेगा, जिससे न केवल मरीजों को शुद्ध और प्रभावी औषधियां मिलेंगी, बल्कि आयुर्वेदिक चिकित्सा का अनुसंधान और विकास भी तेज होगा। डॉ उमेश शुक्ला, डीन, शासकीय पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक कॉलेज। recent visitors 30

पिछले 20 साल में देश में करोड़पति सांसदों की संख्या 153 से बढ़कर साल 2024 में 504 पहुंच गई

नई दिल्ली  देश में करोड़पति सांसदों की संख्या बढ़ रही है। पिछले बीस साल के दौरान देश की संसद में करोड़पति सांसदों की संख्या में बंपर इजाफा हुआ है। साल 2004 में जब से एडीआर ने सांसदों की संपत्ति से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण शुरू किया है तब इससे जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 साल में देश में करोड़पति सांसदों की संख्या 153 से बढ़कर साल 2024 में 504 पहुंच गई है। कुल सांसदों में से करीब 93% करोड़पति एडीआर की तरफ से विश्लेषण किए गए आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में कुल सांसदों में 92.8 फीसदी सांसद करोड़पति हैं। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले 504 सांसद करोड़पति थे। यह संख्या पिछले साल के 479 के मुकाबले 29 अधिक थी। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद करोड़पति सांसदों की संख्या कुल सांसदों का 88.4 फीसदी थी। आंकड़ों को देखें तो 2004 से लेकर 2024 तक संसद में करोड़पति सांसदों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। 2004 में महज 29% सांसद करोड़पति साल 2024 में सांसदों की संपत्ति के विश्लेषण के अनुसार कुल 153 सांसद ही करोड़पति थे। वहीं, इसके बाद 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में करोड़पति सांसदों की संख्या 153 से बढ़कर 312 हो गई। इस तरह करोड़पति सांसदों में 29.8 फीसदी वाली हिस्सेदारी बढ़कर 57 फीसदी तक पहुंच गई। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद करोड़पति सांसदों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई। इस चुनाव के बाद करोड़पति सांसदों की हिस्सेदारी 57 से बढ़कर 81.9 फीसदी पहुंच गई। खास बात है कि 2014 में सांसदों को अपनी संपत्ति को मार्केट वैल्यू के आधार पर घोषित करने की बात कही गई थी। recent visitors 49

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- आने वाले समय में सभी विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से समर्थ और सक्षम होंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के विश्वविद्यालय निरंतर सशक्त बन रहे हैं। आने वाले समय में सभी विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से समर्थ और सक्षम होंगे। परंपरागत संकायों के साथ-साथ वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कोर्सेज संचालित करने के लिए विश्वविद्यालयों को प्रेरित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय अपने-अपने क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज आरंभ करें, राज्य सरकार अस्पतालों को उनके साथ संबद्ध करने की व्यवस्था करेगी। इन अस्पतालों के वेतन-भत्तों का भार राज्य सरकार वहन करेगी, विश्वविद्यालय पठन-पाठन-परीक्षा आदि की व्यवस्था करेंगे और परीक्षा की फीस का उपयोग मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय के संचालक-प्रबंधन और विस्तार में किया जा सकेगा। डेयरी टेक्नोलॉजी, कृषि जैसे व्यावसायिक दक्षता के कोर्सेज सहित सभी संकाय विश्वविद्यालय अपने क्षेत्र में संचालित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश विश्वविद्यालयीन संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के ज्ञान विज्ञान भवन में आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार शासकीय कर्मचारियों एवं पेंशनधारकों के हितों का ध्यान रखते हुए आगे बढ़ रही है। प्रदेश के शासकीय विश्वद्यालयों के कर्मचारी एवं पेंशनर्स भी वेतन एवं भत्तों में वृद्धि से लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब निजी और शासकीय केवल दो श्रेणियों के विश्वविद्यालय हैं। सरकार उच्च शिक्षा को नए आयाम देने के लिए नवाचारों के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए नए-नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व में प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए प्रदेशवासी प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्मदिवस की शुभेच्छाओं एवं अभिनंदन के लिए विश्वविद्यालय के समस्त कर्मचारियों एवं पेंशनधारकों का आभार माना और सभागार में उपस्थित सभी लोगों को वर्ष प्रतिपदा गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शासकीय विश्वविद्यालयों की दो पेंशनर्स समितियों को एक-एक लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कर्मचारियों के कल्याण के लिए राज्य सरकार संवेदनशीलता के साथ सक्रिय है। राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के हित में कई निर्णय लिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स, अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और इनसे संबंधित सभी संघों ने सामूहिक रूप से सम्मान और अभिवादन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मध्यप्रदेश विश्वविद्यालयीन संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा वृहद पुष्पहार, अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र भेंट किए गए। अभिनंदन समारोह में मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री अशोक कड़ैल, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. एस.के जैन, कुल सचिव प्रो. मंसूरी, प्रो. कालिका यादव, प्रो. गोपाल शर्मा आदि उपस्थित थे। recent visitors 71