IPL 2025: पहले ही मैच में हिट विकेट कॉन्ट्रोवर्सी, स्टंप्स पर सुनील नरेन का बल्ला लग, फिर भी क्यों नहीं हुए OUT?

 नई दिल्ली IPL 2025 की शुरुआत शनिवार 22 मार्च को हो गई। पहला मुकाबला कोलकाता में केकेआर और आरसीबी के बीच खेला गया। इस मैच में आरसीबी ने जीत दर्ज की, लेकिन टूर्नामेंट के पहले मैच में एक कॉन्ट्रोवर्सी भी देखने को मिली। बल्लेबाजी कर रहे कोलकाता नाइट राइडर्स के ओपनर सुनील नरेन का बल्ला स्टंप्स पर लग गया था, लेकिन अंपायर ने उनको हिट विकेट आउट नहीं दिया था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कप्तान रजत पाटीदार, बल्लेबाज विराट कोहली और अन्य खिलाड़ी भी हैरान थे। बल्लेबाज को हिट विकेट आउट क्यों नहीं दिया गया? ये सवाल हर किसी के दिमाग में है, लेकिन जान लीजिए कि इसको लेकर नियम क्या कहते हैं। आमतौर पर देखा जाता है कि बल्लेबाजी करते समय बल्लेबाज का बल्ला, कोई क्रिकेटिंग गियर या शरीर का कोई अंग स्टंप्स पर लग जाता है तो बल्लेबाज को हिट विकेट आउट दिया जाता है। हालांकि, इस केस में ऐसा नहीं हुआ। केकेआर की पारी के 8वें ओवर की चौथी गेंद सुनील नरेन के ऊपर से चली गई। सुनील नरेन ने गेंद को खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद को ऊपर से जाते देख उन्होंने अपना बल्ला नीचे कर लिया। इस दौरान उनका बल्ला काफी पीछे चला गया स्टंप्स पर लग गया। ऐसे में बल्लेबाज को हिट विकेट आउट दिया जाना चाहिए था। हालांकि, यहां नियम अलग लागू हुआ। दरअसल, जब सुनील नरेन का बल्ला स्टंप्स से टकराया तो उससे ठीक पहले स्क्वायर लेग अंपायर ने गेंद को वाइड करार दे दिया था। इस तरह गेंद उसी समय डेड हो गई। इसके बाद कुछ भी हो अंपायर का फैसला ही मान्य होता। आईपीएल की प्लेइंग कंडीशन्स भी यही कहती हैं कि अगर गेंद डेड है तो फिर स्टंप्स से शरीर लगे या बल्ला हिट विकेट बल्लेबाज को नहीं दिया जाएगा। नियम 35 यही दर्शाता है। यहां तक कि विराट कोहली, टिम डेविड और रजत पाटीदार ने थोड़ी बहुत अपील की, लेकिन गेंद वाइड हो गई तो फिर वे हिट विकेट होने से बच गए। अगर गेंद वाइड नहीं होती तो निश्चित तौर पर सुनील नरेन को पवेलियन लौटना पड़ता। recent visitors 37

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन से अन्य देशों में असामयिक रथ यात्रा का आयोजन नहीं करने को कहा

भुवनेश्वर  श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने इस्कॉन से अन्य देशों में असामयिक रथ यात्रा का आयोजन नहीं करने को कहा है. असामयिक रथ यात्रा को लेकर उठे विवाद को सुलझाने के लिए भुवनेश्वर के स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक हुई. गजपति महाराज दिव्य सिंह देब की अगुवाई में हुई इस बैठक में मायापुर इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन-अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) मुख्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए. एजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने कहा कि इस्कॉन ने 2021 में भारत में अन्य तिथियों पर रथ यात्रा का आयोजन न करने का निर्णय लिया था. उन्होंने कहा, "हम इस निर्णय के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं, लेकिन उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अन्य देशों में भी अन्य तिथियों पर यात्रा का आयोजन न हो." बैठक में पुरी गजपति, एसजेटीए सदस्य और इस्कॉन प्रतिनिधि पाधी ने कहा कि, इस्कॉन के प्रतिनिधियों से कहा गया कि शास्त्रों के अनुसार हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ महीने में शुक्ल पक्ष की द्वितीया से दशमी तिथि के बीच रथ यात्रा आयोजित की जानी चाहिए. एसजेटीए प्रमुख ने कहा कि, इस साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 27 जून को है और इस्कॉन से अनुरोध किया गया है कि वह दुनिया भर में इसी दिन रथ यात्रा का आयोजन करे. उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि इस्कॉन भक्तों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करेगा." मंदिर के सेवादारों और जगन्नाथ पंथ के अनुयायियों ने इस बात पर चिंता जताई है कि इस्कॉन ने अभी तक विदेशों में असामयिक रथ यात्रा को रोकने के लिए कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है. उन्होंने कहा कि, केंद्र सरकार को अन्य देशों में रथ यात्रा को रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए. बैठक में मायापुर इस्कॉन के प्रतिनिधि उन्होंने पूछा कि, अगर दुनिया भर में अन्य धर्मों के त्यौहार एक ही दिन मनाए जाते हैं, तो करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक रथ यात्रा दुनिया भर में एक ही दिन क्यों नहीं मनाई जा सकती? श्रीमंदिर के वरिष्ठ सेवादार गौरहरि प्रधान ने कहा कि, इस्कॉन ने भारत में असामयिक रथ यात्रा का आयोजन बंद कर दिया है, लेकिन उसने अन्य देशों में ऐसा करने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है. उन्होंने कहा, "इस्कॉन के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे आने वाले दिनों में इस मामले पर चर्चा करेंगे. केंद्र और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए कि विदेशों में असामयिक रथ यात्रा का आयोजन न हो." वहीं, पुरी निवासी हेक्टर मिश्रा ने कहा कि, इस्कॉन पूरी दुनिया में मशहूर है और इस्कॉन को सोचना चाहिए कि विदेशों में बेमौसम रथ यात्रा आयोजित करना कहां तक उचित है. अगर वे भगवान जगन्नाथ को अपना भगवान मानते हैं, तो उन्हें महाप्रभु की परंपराओं का पालन करना चाहिए. क्या दुनिया भर में अन्य धार्मिक त्योहार एक ही दिन या अलग-अलग दिनों में मनाए जाते हैं? इसलिए, अगर इस्कॉन जगन्नाथ को अपना पसंदीदा देवता मानता है और इस तरह की बेमौसम रथ यात्रा आयोजित करता है, तो यह निंदनीय है." उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को दुनिया भर के हर राष्ट्राध्यक्ष को पत्र भेजकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके देशों में बेमौसम रथ यात्रा आयोजित न की जाए. 1966 में न्यूयॉर्क शहर में स्वामी प्रभुपाद द्वारा इसकी स्थापना के बाद से इस्कॉन का व्यापक विस्तार हुआ है. दुनिया भर में इस्कॉन के 400 से ज्यादा मंदिर हैं. इस्कॉन गौड़ीय-वैष्णव संप्रदाय से संबंधित है, जो वैदिक या हिंदू संस्कृति के भीतर एकेश्वरवादी परंपरा है. दार्शनिक रूप से यह संस्कृत ग्रंथों भगवद गीता और भागवत पुराण या श्रीमद्भागवतम् पर आधारित है. ये भक्ति योग परंपरा के ऐतिहासिक ग्रंथ हैं, जो सिखाते हैं कि सभी जीवित प्राणियों के लिए अंतिम लक्ष्य भगवान या भगवान कृष्ण, जो "सर्व-आकर्षक" हैं, के प्रति अपने प्रेम को फिर से जागृत करना है. recent visitors 52

पिछले एक वर्ष में, डिवीजन के कई माओवादियों को सुरक्षाबलों ने खत्म किया, सुरक्षा बल इलाके में शांति बहाल होने तक अपना अभियान जारी रखेंगे

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में गुरुवार को सुरक्षाबल के जवानों ने बड़ी कार्रवाई की। मुठभेड़ में सुरक्षाबल के जवानों ने 26 नक्सलियों को मार गिराया है। वहीं, एक अन्य एनकाउंटर में 4 नक्सली मारे गए हैं। बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ दो मुठभेड़ों में मारे गए 30 नक्सलियों में से 19 की अब तक पहचान कर ली गई है, जिनमें 15 महिलाएं शामिल हैं। माओवादियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी को भारी नुकसान पहुंचाया है। पश्चिमी डिवीजन पर सख्त कार्रवाई पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बस्तर की पश्चिमी डिवीजन कई नक्सली घटनाओं को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाती रही है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में इस वर्ष नक्सलियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए सुरक्षाबलों ने बीजापुर जिले में 14 महिलाओं समेत 26 नक्सलियों को मार गिराया जबकि कांकेर जिले में एक महिला समेत चार अन्य को ढेर कर दिया गया। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि बीजापुर में मारे गए 26 नक्सलियों में से 18 की पहचान कर ली गई है और अन्य की पहचान कराई जा रही है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि बीजापुर मुठभेड़ में मिली सफलता के साथ ही सुरक्षा बलों ने माओवादियों के पश्चिम बस्तर डिवीजन को काफी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में, डिवीजन के कई माओवादियों को सुरक्षाबलों ने खत्म कर दिया है। सुरक्षा बल इलाके में शांति बहाल होने तक अपना अभियान जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि बीजापुर अभियान में मुठभेड़ स्थल से एक एके-47 राइफल, एक एसएलआर (सेल्फ लोडिंग राइफल), एक इंसास राइफल, तीन .303 राइफल और कई अन्य बैरल ग्रेनेड लांचर (बीजीएल), 12 बोर राइफल और 315 बोर राइफल, गैजेट और हथियारों का जखीरा बरामद किया गया है। 14 महीने में 37 नए शिविर पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिछले 14 महीनों में बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के 37 नए शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से अधिकतर बीजापुर जिले में सुरक्षा की कमी को पूरा करने और विकास कार्यों को सुविधाजनक बनाने के लिए स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बीजापुर में तर्रेम और पामेड़ के बीच सड़क संपर्क स्थापित किया गया है, जिसे पहले माओवादियों का गढ़ माना जाता था। अधिकारी ने बताया कि इस क्षेत्र में सड़क संपर्क स्थापित होने से एक बड़ा बदलाव आयेगा। बस्तर में लगातार एक्शन छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता मिली है। बस्तर में सुरक्षाबल के जवान लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। सुरक्षाबल के लगातार एक्शन के कारण नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। recent visitors 49

बांग्लादेश की सेना ने राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहनों और बड़ी संख्या में सैनिकों को बुलाया

ढाका  बांग्लादेश की सेना ने राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहनों और बड़ी संख्या में सैनिकों को बुलाया है। रिपोर्ट के अनुसार, सेना की हर ब्रिगेड से 100 सैनिकों को ढाका में इकठ्ठा होने को कहा गया है। ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब बांग्लादेश की सेना और हसीना विरोधी आंदोलन की अगुवाई करने वाले संगठन स्टूडेंट अगेंस्ट्र डिस्क्रिमिनेशन के बीच संबंधों में दरार की खबरें आई है। नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि सावर स्थित सबसे महत्वपूर्ण 9वीं डिवीजन के सैनिकों ने क्रमिक तरीके से ढाका में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में बांग्लादेश के सुरक्षा प्रतिष्ठान के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से कहा है कि सेना देश को देश पर अपनी पकड़ मजबूत करने में कुछ और दिन लगेंगे। बांग्लादेश की सेना के पास डिवीजन आकार की 10 क्षेत्रीय कमान है, जिनमें ब्रिगेड की कोई निश्चित संख्या नहीं है। 9वीं इंन्फैंट्री डिवीजन सावर में स्थित है, जबकि एक अन्य महत्वपूर्ण 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन घाटैल में तैनात है। सेना प्रमुख को लेकर छात्र नेताओं का खुलासा बांग्लादेश सेना की सक्रियता छात्र नेता और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय के सलाहकार आसिफ महमूद शाजिब भुइयां के खुलासे के बाद हुई है। भुइयां ने एक वीडियो में दावा किया था कि सेना प्रमुख जनरल वकार उज-जमान ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त करने पर अनिच्छा से सहमति जताई थी। पहले से रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो को शुक्रवार को जारी किया गया था। इससे पहले एक अन्य प्रभावशाली छात्र नेता हसनत अब्दुल्ला ने 11 मार्च को जनरल जमान के साथ एक गुप्त बैठक के बाद सेना प्रतिष्ठान के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी थी। कहा गया था कि जनरल जमान ने सुझाव दिया था कि बांग्लादेश में चुनाव होने पर शेख हसीना की अवामी लीग राजनीति में वापस आ सकती है और चुनाव भी लड़ सकती है। सेना के खिलाफ आंदोलन की धमकी हालांकि, अब्दुल्ला और भुइयां ने यह नहीं बताया कि उन्होंने जनरल जमान के साथ बातचीत को सार्वजनिक करने के लिए दो सप्ताह से अधिक समय का इंतजार क्यों किया, लेकिन अब्दुल्ला ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी का रास्ता खोलने के लिए सेना के अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी दी। भुइयां के खुलासे और अब्दुल्ला की फेसबुक पोस्ट के तुरंत बाद बांग्लादेश की तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने एक वर्चुअल बैठक की, जिसका उद्येश्य निकट भविष्य में छात्रों के एक और विद्रोह की आशंका में कदम उठाना था। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सेना मजबूत कदम उठाएगी या नहीं। इस बीच 26 मार्च से मोहम्मद यूनुस तीन दिनों की चीन यात्रा पर जाने वाले हैं। सेना प्रमुख को बदनाम करने की कोशिश छात्र प्रतिनिधियों और जनरल वकार के बीच 11 मार्च की बैठक के विवरण को सार्वजनिक किए जाने ने बांग्लादेश में अधिकांश लोगों को हैरान कर दिया है। इसे सेना प्रमुख की छवि को खराब करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, यूनुस को यह महसूस होने लगा है कि पिछले साल 8 अगस्त को मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभालने के बाद उनकी स्थिति काफी कमजोर हो गई है। यही वजह है कि उन्होंने नई दिल्ली के सामने शांति का प्रस्ताव रखा है और बिम्सटेक सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की मांग की है। हालांकि, यह मुलाकात संभव नहीं है क्योंकि यूनुस सरकार में शामिल अधिकारियों ने लगातार भारत के खिलाफ उकसाऊ बयानबाजी की है। इसके अलावा भारतीय प्रतिष्ठान जल्द ही एक लोकतांत्रिक-चुनावी प्रक्रिया देखना चाहता है, जिससे एक वैध राजनीतिक दल सत्ता में आए, जिसके साथ वह आगे बढ़ सके। इस बीच जनरल जमान के नेतृत्व में सेना बांग्लादेश में अहम आधार बनी हुई है। recent visitors 52

साइबर क्राइम का नया गढ़ बना भोपाल, पुलिस ने खोली खौफनाक साजिश की परतें

भोपाल झारखंड का जामताड़ा और हरियाणा का नूंह जैसे शहर साइबर अपराध के लिए बदनाम हैं। अब भोपाल भी उसी राह पर चल रहा है। भोपाल अब साइबर अपराध का अड्डा बनता जा रहा है। यहां जामताड़ा और नूंह की तरह ही साइबर अपराधी सक्रिय हैं। वे लोगों को ठगने के लिए फर्जी बैंक खातों और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे कई गिरोहों को पकड़ा है जो साइबर अपराधियों को मदद करते हैं। ये गिरोह उन्हें फर्जी खाते और सिम कार्ड देते हैं। पुलिस इन गिरोहों को खत्म करने के लिए एक खास पोर्टल का इस्तेमाल कर रही है। इस पोर्टल पर कई शिकायतें दर्ज हैं और पुलिस उनकी जांच कर रही है। समन्वय पोर्टल का इस्तेमाल कर रही पुलिस भोपाल पुलिस साइबर अपराध को रोकने के लिए 'समन्वय पोर्टल' (NCCRP JMIS) का इस्तेमाल कर रही है। इस पोर्टल पर भोपाल के फर्जी बैंक खातों के खिलाफ 550 शिकायतें दर्ज हैं। इन खातों से 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी लेनदेन किए गए हैं। पुलिस अब इन गिरोहों को खत्म करने और ऑनलाइन अपराधों को रोकने के लिए काम कर रही है। शहर में संगठित गिरोह चला रहे अपराधी पहले भोपाल के लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करके देश भर के लोगों से पैसे ठगे जाते थे। लेकिन अब पुलिस को पता चला है कि शहर में ही संगठित गिरोह चल रहे हैं। ये गिरोह 'म्यूल' बैंक खाते और पहले से चालू सिम कार्ड साइबर अपराधियों को देते हैं। शहर में कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़ साइबर पुलिस अब इन संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को खत्म करने की कोशिश कर रही है। वे ऑनलाइन वित्तीय अपराधों को रोकने के लिए डिजिटल सुरक्षा उपायों को भी मजबूत कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने प्रभात स्क्वायर, ऐशबाग के पास चल रहे एक साइबर-धोखाधड़ी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। कॉल सेंटर के मालिक का बैंक खाता महाराष्ट्र के एक साइबर-अपराध पीड़ित से ठगे गए पैसे को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। टीकमगढ़ और महाराष्ट्र से निकला कनेक्शन कॉल सेंटर से बरामद एक सिम कार्ड का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति के साथ साइबर अपराध करने में किया गया था। ये दोनों बातें समन्वय पोर्टल के जरिए सामने आईं। कॉल सेंटर का मालिक अपने टीकमगढ़ के एक रिश्तेदार की मदद से सेंटर चला रहा था। टीकमगढ़ पहले से ही साइबर अपराध का एक बड़ा अड्डा बन चुका है। देश के कई राज्यों में ठगी DCP (क्राइम ब्रांच) अखिल पटेल ने बताया कि भोपाल साइबर-क्राइम ब्रांच ने खुद ही फर्जी बैंक खातों को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया है। ये खाते साइबर अपराधियों को दिए जा रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल देश के कई राज्यों में लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था। DCP पटेल ने बताया कि पुलिस ने समन्वय पोर्टल की मदद से इन संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है। शिकायतों का विश्लेषण करता है पोर्टल यह पोर्टल नेशनल साइबर-क्राइम हेल्पलाइन (1930) के जरिए मिली शिकायतों का विश्लेषण करता है। यह साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों को दिखाता है, जिससे पुलिस को उनके इस्तेमाल का पता लगाने में मदद मिलती है। भोपाल साइबर-क्राइम ब्रांच ने इन खातों की जांच करने के लिए बैंकों को नोटिस भेजे और आगे की जांच की। ऐसे चल रह सिंडिकेट DCP ने आगे बताया कि साइबर अपराधी दूसरे राज्यों में धोखाधड़ी करने के लिए भोपाल से फर्जी खाते खरीदते हैं। दूसरे राज्यों की पुलिस ऐसे खातों पर रोक लगा देती है, लेकिन वे अक्सर क्षेत्राधिकार या दूरी की वजह से FIR दर्ज नहीं करते हैं। अब भोपाल साइबर-क्राइम ब्रांच ने न केवल फर्जी खाताधारकों के खिलाफ FIR दर्ज करने का फैसला किया है, बल्कि यह भी जांच करने का फैसला किया है कि क्या बैंकों ने खाते खोलते समय KYC के नियमों का पालन किया था। पुलिस खुद इन मामलों में शिकायतकर्ता बनती है। बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में पुलिस को पता चला कि बैंकों में चालू खाते बिना आवेदक या उसकी दुकान के फिजिकल वेरिफिकेशन के ही खोल दिए गए थे। इसलिए, अगर एक ही ब्रांच से कई फर्जी खाते खोले गए हैं, तो बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बैंक अकाउंट के बाद फर्जी सिम कार्ड वालों पर कसेगी नकेल DCP पटेल ने कहा कि यह कार्रवाई साइबर अपराधियों को बैंक खाते देने वालों पर लगाम लगाने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह की कार्रवाई सभी जिलों और राज्यों में की जाए, तो साइबर अपराध को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि फर्जी बैंक खातों से निपटने के बाद, अगला निशाना साइबर अपराधियों को पहले से चालू सिम कार्ड देने वाले धोखेबाज होंगे। recent visitors 39

एमपी के जबलपुर में राष्ट्रीय वायरोलॉजी लैब की स्थापना से मिलेगी बड़ी राहत, खतरनाक वायरस की जांच, शोध के लिए भी मिलेगी सुविधा

 जबलपुर  खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए मध्य भारत में बड़ी सुविधा शुरू करने की घोषणा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने  राज्यसभा में की है।मध्य प्रदेश के जबलपुर में सेंट्रल इंडिया का पहला नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी (एनआईवी) स्थापित किया जाएगा। यह देश के एकमात्र एनआईवी पुणे की तरह होगा। मंत्री ने बताया है कि जबलपुर के साथ बेंगलुरु, डिब्रूगढ़ और जम्मू में इसी तरह की लैब स्थापित की जाएंगी। एमपी में होने लगेगी जांच जबलपुर में यह लैब बनने के बाद घातक वायरसों की भी जांच मध्य प्रदेश में होने लगेगी। लैब प्रारंभ होने में दो से तीन वर्ष लग सकते हैं। हर वर्ष वायरस से होने वाली एक या दो नई बीमारियों का संक्रमण देश-दुनिया में फैलता है। इनकी जांच की सुविधा सिर्फ एनआईवी पुणे में होने से वहां बहुत अधिक मात्रा में देश से सैंपल पहुंचने के कारण बहुत अधिक दबाव रहता है, इस कारण देश के अलग-अलग क्षेत्र में चार और लैब बनाई जा रही हैं। बीसीएल सेफ्टी मानक होता है दरअसल, खतरनाक और बहुत ज्यादा संक्रामक वायरस की जांच के लिए बायोलॉजिकल सेफ्टी लेवल-4 (बीएसएल) लैब की आवश्यकता होती है। बीएसएल सेफ्टी मानक होता है। यह लैब इस तरह से तैयार की जाती हैं कि उनसे संक्रमण फैलने की गुंजाइश न रहे। मध्य प्रदेश के कुछ मेडिकल कालेजों में अभी बीएसएल- 2 स्तर की वायरोलॉजी लैब हैं, इस कारण खतरनाक वायरस की जांच नहीं हो पाती। स्टाफ भी उस तरह से प्रशिक्षित नहीं रहता। लैब में इन बीमारियों की हो सकेगी जांच यह लैब बनने पर जानवरों से इंसान में आने वाली (जूनोटिक) बीमारियां जैसे प्लेग, निपाह वायरस, इबोला, जीका, हंपी वायरस, इबोला, सार्स, एंथ्रेक्स, रिफ्ट वैली फीवर, मंकी पाक्स, काऊ पाक्स आदि की जांच हो सकेगी। वायरोलॉजी लैब में वायरस से होने वाली बीमारियों की ही जांच होती है, पर एनआईवी में ऐसे बैक्टीरियां की जांच और शोध भी किया जा सकता है जिनका उपयोग जैविक आतंकवाद में हो सकता है। साथ ही वायरस की नई-नई बीमारियों पर शोध भी हो सकेगा, जिससे उन्हें फैलने से रोका जा सके। छतरपुर में हनुखेड़ा के जंगल में पुलिस ने बदमाश लक्खू राजपूत को शॉर्ट एनकाउंटर में पकड़ा। बदमाश के पैर में लगी है गोली। recent visitors 54

बेंगलुरु बैठक में भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगने की उम्मीद

भोपाल आरएसएस के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बड़ी बैठक करने जा रही है। बेंगलुरु में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 18 से 20 अप्रैल 2025 के बीच होने की संभावना है। जानकार सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का अनुमोदन किया जाएगा। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि बेंगलुरु में बैठक आयोजित कर भाजपा राजनीतिक दृष्टि से देश में परिसीमन और भाषा को लेकर उत्तर-दक्षिण के नैरेटिव को तोड़ने की कोशिश करेगी। साथ ही, दक्षिण भारत में यह संदेश देने का प्रयास होगा कि भाजपा उत्तर भारत की तरह इस क्षेत्र को भी समान महत्व देती है।  तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके परिसीमन के बहाने उत्तर बनाम दक्षिण का नैरेटिव खड़ा कर रही है। डीएमके का आरोप है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से दक्षिण भारत की लोकसभा सीटें कम होंगी, जबकि उत्तर भारत में सीटें बढ़ेंगी। इसके जवाब में भाजपा लगातार कहती रही है कि परिसीमन से दक्षिण भारत को कोई नुकसान नहीं होगा। डीएमके हिंदी और हिंदुत्व के मुद्दे पर भी भाजपा पर हमलावर रही है। हालांकि, भाजपा ने अभी आधिकारिक तौर पर बेंगलुरु बैठक की घोषणा नहीं की है, लेकिन 18 से 20 अप्रैल को इस आयोजन को लगभग तय माना जा रहा है। नए हिंदू नववर्ष में नए अध्यक्ष की घोषणा बेंगलुरु बैठक में भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इससे पहले 30 मार्च 2025 से शुरू होने वाले नए हिंदू नववर्ष में पार्टी कभी भी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा कर सकती है। तब तक आधे से अधिक राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो जाएंगे, जिससे निर्वाचक मंडल का कोरम भी पूरा हो जाएगा। चूंकि 6 अप्रैल को भाजपा का स्थापना दिवस है, इसलिए सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पार्टी को नया अध्यक्ष स्थापना दिवस के मौके पर मिलेगा या इसके बाद। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए कई नामों की चर्चा जोरों पर है। इनमें से कुछ प्रमुख संभावित उम्मीदवार इस प्रकार हैं: दग्गुबाती पुरंदेश्वरी (Daggubati Purandeswari) – दक्षिण भारत से एक मजबूत महिला चेहरा, जो भाजपा की आंध्र प्रदेश इकाई की अध्यक्ष हैं। उनकी उम्मीदवारी से दक्षिण में पार्टी की पैठ मजबूत करने की रणनीति को बल मिल सकता है। शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) – मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता, जिनके पास संगठन और शासन का व्यापक अनुभव है। मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) – हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री, जो आरएसएस के करीबी माने जाते हैं और संगठनात्मक कौशल के लिए जाने जाते हैं। भूपेंद्र यादव (Bhupender Yadav) – केंद्रीय मंत्री और राजस्थान से आने वाले नेता, जिन्हें संगठन और सरकार में समन्वय का अच्छा अनुभव है। धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) – केंद्रीय मंत्री और ओडिशा से प्रमुख चेहरा, जो पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में पार्टी को मजबूत कर सकते हैं। वनाथि श्रीनिवासन (Vanathi Srinivasan) – तमिलनाडु से एक और महिला नेता, जो दक्षिण भारत में भाजपा की उपस्थिति बढ़ाने में मददगार हो सकती हैं। इन नामों के अलावा कुछ अन्य नेताओं की भी चर्चा है, लेकिन अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व और आरएसएस के बीच सहमति पर निर्भर करेगा। बेंगलुरु बैठक इस दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है। recent visitors 49