मुख्यमंत्री आज राजगढ़ में करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित 200 बिस्तर वाले नए भवन का लोकार्पण करेंगे

राजगढ़ ख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज विवार को राजगढ़ का दौरा करेंगे। सीएम का हेलिकॉप्टर दोपहर 2 बजे पुलिस लाइन स्थित हेलीपैड पर उतरेगा। वह रोड शो के जरिए जिला अस्पताल पहुंचेंगे।मुख्यमंत्री जिला अस्पताल में करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित 200 बिस्तर वाले नए भवन का लोकार्पण करेंगे। साथ ही 230 बिस्तर वाले रेल बसेरे का भूमि पूजन भी करेंगे। इसके बाद वह स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करेंगे। तैयारियां में जुटे अधिकारी मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारियां जोरों पर हैं। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी महीप कुमार तेजस्वी और जिला विकास समिति सदस्य ज्ञान सिंह गुर्जर ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए आवश्यक निर्देश दिए। recent visitors 41

उज्जैन-गरोठ फोरलेन हाईवे का काम 90 फीसदी पूरा, तीन महीने के अंदर चालू हो जाएगा, 100 KM प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी गाड़ियां

उज्जैन उज्जैन-गरोठ फोरलेन हाईवे पर बड़ा अपडेट सामने आया है। इस फोरलेन हाईवे पर आने वाले महीनों में गाड़ियां 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने लगेंगी। इस परियोजना का 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है, और अब सिर्फ कुछ छोटे-मोटे काम बाकी हैं। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एम.एल. पुरबिया का कहना है कि उज्जैन क्षेत्र में रेलवे ओवरब्रिज और खेड़ा खजुरिया के आसपास कुछ काम बचे हैं, जो अगले तीन महीनों में पूरे हो जाएंगे। यह फोरलेन सड़क उज्जैन को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी, जिससे यात्रा और भी तेज और आसान हो जाएगी। इस परियोजना की कुल लागत 2,660 करोड़ रुपये है, और इसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। मंदसौर जिले की सीमा में काम लगभग खत्म हो चुका है, जबकि उज्जैन से खेड़ा खजुरिया तक के 41 किलोमीटर हिस्से में केवल 10 फीसदी काम बाकी है। परियोजना निदेशक पुरबिया का दावा है कि 160 किलोमीटर लंबा यह मार्ग अधिकतम तीन महीनों में पूरी तरह तैयार हो जाएगा। हालांकि सड़क अभी आधिकारिक रूप से पूरी नहीं हुई है, लेकिन 90 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो जाने के कारण वाहनों की आवाजाही पहले से ही आसान हो गई है। इस मार्ग से सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने से पहले ही यात्रा का अनुभव काफी बेहतर हो गया है। उज्जैन से दिल्ली, मुंबई और वडोदरा जाने वाले लोगों के लिए यह सड़क दूरी को कम करने के साथ-साथ समय और ईंधन दोनों की बचत कर रही है। तीन कंपनियों को सौंपा गया था काम उज्जैन-गरोठ फोरलेन सड़क परियोजना का काम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नवंबर 2022 में शुरू किया था। इसे तेजी से पूरा करने के लिए परियोजना को तीन भागों में बांटकर अलग-अलग निर्माण कंपनियों—जीएचवी, रवि इंफ्रा और एमकेसी इंफ्रा—को सौंपा गया था। अनुबंध के मुताबिक, तीनों फर्मों को जुलाई 2024 तक काम पूरा करना था। रवि इंफ्रा और एमकेसी इंफ्रा ने अपने हिस्से का काम लगभग पूरा कर लिया है, लेकिन जीएचवी का 10 फीसदी हिस्सा अब भी अधूरा है। यह कंपनी 207 दिन की बढ़ी हुई समय सीमा के बावजूद काम पूरा नहीं कर पाई, लेकिन अब इसे अगले एक महीने में पूरा करने की बात कही जा रही है। 89 गांवों से होकर गुजरेगा यह हाईवे फोर लेन की यह सड़क 89 गांवों से होकर गुजरेगी, जिनमें उज्जैन के 13, घट्टिया के 10, महिदपुर के 20, बड़ौद के 11, डग के 3, गंगधार के 11, सुवासरा के 10, शामगढ़ के 7 और गरोठ के 4 गांव शामिल हैं। हाईवे पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगे, जिससे उज्जैन से गरोठ का सफर महज 1 से 1.5 घंटे में पूरा हो जाएगा। recent visitors 89

खरगोन वासियों को जल्द ही शहर की सड़कों के किनारों पर अव्यवस्थित खड़े वाहनों से निजात मिलने वाली, 1 अप्रल से नए नियम लागू

खरगोन  मध्य प्रदेश के खरगोन वासियों को जल्द ही शहर की सड़कों के किनारों पर अव्यवस्थित खड़े वाहनों से निजात मिलने वाली है। दरअसल, शहर में जल्द ही अव्यवस्थित खड़े वाहनों पर सख्ती शुरु होने वाली है। एमपी के इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों की तर्ज पर यहां भी सुगम यातायात व्यवस्था के लिए प्रशासन सख्त कदम उठाने वाला है। मुख्य बाजारों में पार्किंग के लिए स्थान चिन्हित किये गए हैं, उन्हीं स्थानों पर अब वाहन खड़ा करना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना चुकाना होगा। बीते दिनों व्यापारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक के दौरान लिए गए फैसले को 1 अप्रैल से शहर में लागू किया जाएगा। दअरसल, शहर में बढ़ते यातायात और उसके कारण लगने वाले जाम की समस्या से निजात दिलाने के नजरिये से स्थानीय प्रशासन की ओर से ये फैसला लिया गया है। क्योंकि, शहर के बड़े और व्यस्ततम राधा वल्लभ मार्केट, सराफा बाजार, जवाहर मार्ग, अंजुमन नजर जैसे इलाकों समेत मुख्य मागों पर लोग बेतरतीब वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है। दुर्घटनाएं होने की गुंजाइश बनी रहती है। लेकिन, अब जल्द ही शहरवासियों को इस समस्या से राहत मिल जाएगी। यहां बने हैं पार्किंग स्थल नगरपालिका सीएमओ एम.आर. निगवाल के अनुसार, एमजी रोड पर कैलाश प्रिंटिंग प्रेस के पीछे, राधावल्लभ मार्केट, किला परिसर और जवाहर मार्ग पर पार्किंग स्थल तय किए गए हैं। दुकानदारों को न्यूनतम शुल्क पर मासिक पार्किंग पास मिलेगा। जबकि ग्राहकों को भी कम शुल्क में पार्किंग सुविधा मिलेगी। फिलहाल, शुल्क तय नहीं हुए हैं। जल्दी ही शुल्क तय किए जाएंगे। पुराने तहसील कार्यालय, जिला चिकित्सालय और पुलिस थाना परिसर को भी पार्किंग स्थल बनाया जाए का सुझाव मिला है, जिसपर विचार जारी है। अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई की तैयारी यातायात प्रभारी रमेश सोलंकी के अनुसार, अवैध पार्किंग के खिलाफ रोजाना चालानी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, मुख्य मार्गो पर ठेले लगाकर व्यवसाय करने वालों को हटाने की भी मांग की गई है। कई दुकानदार अपनी दुकान के आगे 10 फीट तक सामान रख लेते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है। ऐसे दुकानदारों पर भी सख्त एक्शन होगा। यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए कदम बता दें कि, प्रशासन को एमजी रोड स्थित विजय पुस्तकालय के पास से एक नया रास्ता बनाने और इसे सनावद रोड से जोड़ने का प्रस्ताव भी मिला है। साथ ही, गायत्री मंदिर तिराहा से खंडवा रोड तक एक नया चौराहा विकसित करने की मांग आई है। प्रशासन अब इन प्रस्तावों पर भी विचार कर रहा है, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था और बेहतर बनाई जा सके। recent visitors 39

ट्रेन हाइजैक करने वाले बलूच विद्रोहियों ने कर दिया बड़ा ऐलान, सभी 214 बंधकों को मार डाला

इस्लामाबाद पाकिस्तानी यात्री ट्रेन का अपहरण करने वाले बलूच विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सभी 214 सैन्य बंधकों को मार डाला है, क्योंकि बलूच राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के लिए सौदे के लिए उनकी 48 घंटे की समय सीमा समाप्त हो गई थी. बलूच लिबरेशन आर्मी, जिसने पाकिस्तानी सेना के इस दावे को खारिज कर दिया कि बंधकों को रिहा करवा लिया गया है.  बीएलए ने कहा कि पाकिस्तानी सरकार की "जिद" ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया. विद्रोहियों ने सरकार को बलूच राजनीतिक कैदियों और कार्यकर्ताओं को रिहा करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. बलूच विद्रोहियों ने अगवा कर ली थी ट्रेन दरअसल बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की मांग करने वाले अलगाववादी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी ने मंगलवार को रेलवे ट्रैक को उड़ाने के बाद पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था. जिस समय ट्रेन को हाइजैक किया गया उस समय ट्रेन में 400 से ज्यादा लोग मौजूद थे. ट्रेन को कब्जे में लेने के बाद बीएलए के विद्रोहियों ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को जाने दिया था. बीएलए ने एक बयान में कहा, "पाकिस्तान ने अपनी पारंपरिक जिद और सैन्य अहंकार का प्रदर्शन करते हुए न केवल गंभीर वार्ता से परहेज किया, बल्कि जमीनी हकीकत से भी आंखें मूंद लीं. इस जिद की वजह से सभी 214 बंधकों को मार दिया गया." ट्रेन में 400 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकतर सुरक्षाकर्मी थे. बंधकों को छुड़ाने के लिए अभियान चलाने वाली पाकिस्तानी सेना ने कहा कि 30 घंटे के अभियान के बाद बुधवार को घेराबंदी समाप्त हो गई, जिसमें सभी 33 विद्रोही मारे गए. सेना ने दावा किया कि हमले में 23 सैनिक, तीन रेलवे कर्मचारी और पांच यात्री मारे गए. UNSC में जाफर एक्सप्रेस पर हुए हमले की निंदा यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल यानि UNSC में पाकिस्तान को बड़ी कामयाबी मिली है। UNSC में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस पर हुए हमले की निंदा की गई है। सबसे खास बात ये है कि पाकिस्तान को डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का भी साथ मिला है, जिसने अपने पहले कार्यकाल के दौरान बीएलए के हमलों की निंदा करने से परहेज किया था। द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने जाफर एक्सप्रेस पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की तरफ से किए गए "घृणित और कायरतापूर्ण" हमले की कड़ी निंदा की है। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल, जिसमें 15 स्थाई और अस्थाई सदस्य होते हैं, उसकी अध्यक्ष डेनमार्क की क्रिस्टीना मार्कस लासेन की तरफ से जारी बयान में दोषियों को इंसाफ के कटघरे में लाने का आह्वान किया गया है। इसके अलावा उन्होंने आतंकी हमले में मारे गये जवानों और नागरिकों के प्रति "गहरी सहानुभूति और संवेदना" जताई है। वहीं उन्होंने सभी देशों से इस संबंध में इस्लामाबाद के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करने का आग्रह किया है। UNSC में जाफर एक्सप्रेस हमले की निंदा आपको बता दें कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाके बोलन में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के स्वतंत्रता सेनानियों ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना का दावा है कि इस हमले में 440 यात्रियों को बंधक बना लिया गया था, जिन्हें अब रिहा करवा लिया गया है। इस दौरान पाकिस्तान सेना के भी कई दवानों की मौत हो गई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पटरी को उड़ा दिया था। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि हमला करने वाले 33 हमलावरों को मार दिया गया है। लेकिन ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही 26 यात्रियों को मार दिया गया था, जबकि ऑपरेशन के दौरान चार सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। हालांकि बीएलए का दावा है कि अभी भी उसके कब्जे में 150 से ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवान और आम नागरिक हैं। पाकिस्तानी सेना इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि 26 शहीद ट्रेन यात्रियों में सेना और एफसी के 18 सुरक्षाकर्मी, पाकिस्तान रेलवे और अन्य विभागों के तीन अधिकारी और पांच नागरिक शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि 354 यात्रियों में से 37 गंभीर घायल हुए हैं। इस बीच, हमले पर विस्तार से बात करते हुए UNSC ने कहा कि आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के परिणामस्वरूप कई पाकिस्तानी नागरिकों की गंभीर क्षति हुई। UNSC की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि "सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इस बात की पुष्टि की कि आतंकवाद अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।" बयान में आगे कहा गया है कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य आपराधिक और अनुचित है, चाहे उसका मकसद कुछ भी हो, चाहे वह कहीं भी, कभी भी और किसी के द्वारा भी किया गया हो। बलूच विद्रोहियों का दावा हालांकि, बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तान के दावे का खंडन करते हुए कहा कि भीषण लड़ाई जारी है और सुरक्षा बलों को "भारी नुकसान" उठाना पड़ रहा है. अपने ताजा बयान में, बीएलए ने दावा किया कि दर्रा-ए-बोलन नामक ऑपरेशन में उसके 12 कर्मी मारे गए. बीएलए के बयान में आगे कहा गया है, "फ़िदायीन ने कुछ बंधक सैन्य कर्मियों को विशेष बोगियों में बंद कर दिया और अपनी स्थिति संभाल ली, जबकि अन्य बीएलए सैनिक शेष बंधकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में कामयाब रहे. जब पाकिस्तानी कमांडो पहुंचे, तो फ़िदायीन ने उन्हें घेर लिया और उन पर भीषण हमला किया. कमांडो को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जबकि बंधकों को भी मार दिया गया." झूठ बोल रही पाक सरकार- बीएलए पाकिस्तान की सरकार ने बुधवार को ही दावा कर दिया था कि संकट खत्म हो गया है और सभी विद्रोही लड़ाके मारे गए हैं। यह भी दावा किया गया था कि सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है। हालांकि पाकिस्तान की सरकार की तरफ से इसका कोई भी सबूत नहीं जारी किया गया था। अब बीएलए का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार केवल झूठ बोल रही है। बीएलए ने कहा कि पाक सरकार को अपने जवानों की फिक्र ही नहीं है। वह बात करने को तैयार नहीं है। बीएलए ने कहा था … Read more

पाकिस्तान की हुई फिर किरकिरी अमेरिका में नहीं मिलेगी एंट्री! ट्रंप तैयार कर रहे 41 देशों की ऐसी लिस्ट

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोलान्ड ट्रंप अपने फैसलों से पूरी दुनिया को चौंका रहे हैं. टैरिफ विवाद के बीच अब ट्रंप एक और बड़ी योजना बना रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट की माने तो आने वाले समय में ट्रंप दर्जन भर से ज्यादा देशों की यात्रा पर बैन लगाने का विचार कर रहे हैं. एक ज्ञापन मे 41 देशों की सूची सौंपी गई है. जिन पर प्रतिबंध लगाने की संभावना जताई गई है. मीडिया रिपोर्ट की माने तो प्रतिबंध लगाने वाले देशों को तीन अलग-अलग समूहों में विभाजित किया गया है. जिन पर आने वाले समय में बेन लगाया जा सकता है. इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना बताया जा रहा है. इस प्रतिबंध का सबसे अधिक प्रभाव भारत के पड़ोसी देशों पर देखने को मिल सकता है. विशेष रूप से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नागरिकों के लिए अमेरिका में प्रवेश करना कठिन हो सकता है. अफगानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण के बाद से वहां से शरण लेने वाले लोगों के लिए यह फैसला एक बड़ा झटका हो सकता है. तीन ग्रुप ने बांटे गए देश     पहले समूह में 10 देश शामिल हैं, जिनमें अफगानिस्तान, ईरान, सीरिया, क्यूबा और उत्तर कोरिया जैसे देश प्रमुख हैं. इन देशों के नागरिकों के वीजा पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी.     दूसरे समूह में पांच देश इरिट्रिया, हैती, लाओस, म्यांमार और दक्षिण सूडान शामिल हैं. इन देशों को आंशिक निलंबन का सामना करना पड़ेगा, जिससे पर्यटक और छात्र वीजा साथ ही अन्य आप्रवासी वीजा प्रभावित होंगे, हालांकि कुछ मामलों में अपवाद भी हो सकते हैं.     तीसरे समूह में 26 देश शामिल हैं, जिनमें बेलारूस, पाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देश शामिल हैं. इन देशों के नागरिकों के लिए वीजा जारी करने पर आंशिक प्रतिबंध लगाया जा सकता है. हालांकि, इन देशों को 60 दिनों के भीतर सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने का अवसर दिया जाएगा. कमियां दूर नहीं हुईं तो वीजा निलंबन हो सकता है अमेरिका के सुरक्षा अधिकारियों ने अपनी सिफारिशों से जुड़ा एक ड्राफ्ट तैयार किया है. इसमें पाकिस्तान को उन 26 देशों में शामिल किया गया है, जिन्हें अमेरिकी वीजा जारी करने पर आंशिक निलंबन का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार अगर 60 दिन के भीतर कमियों को दूर कर देती है तो बड़ी कार्रवाई से बचा जा सकता है. वानुअतु भी लिस्ट में शामिल जिन देशों पर एक्शन लिए जाने की तैयारी है, उनमें तुर्कमेनिस्तान, बेलारूस, भूटान और वानुअतु शामिल हैं. इनमें वानुअतु हाल ही में तब चर्चा में आया, जब भगोड़े और आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने दावा किया था कि उन्होंने वहां की नागरिकता हासिल कर ली है. इससे पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने यात्रा प्रतिबंध की खबरों को अटकलें बताकर खारिज कर दिया था. विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा था कि पाकिस्तान को ऐसे प्रतिबंधों का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है. खान का कहना था कि फिलहाल यह सब अटकलें हैं और इसलिए इस पर कोई प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है. जब पाकिस्तानी राजदूत को नहीं मिली थी अमेरिका में एंट्री अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हाल में तब तनाव गहराया, जब तुर्कमेनिस्तान में तैनात पाकिस्तानी राजदूत केके अहसान वागन को इस सप्ताह अमेरिका में एंट्री नहीं करने दी गई और लॉस एंजिल्स से निर्वासित कर दिया गया. हालांकि, अमेरिका ने कोई विशेष कारण नहीं बताया, लेकिन रिपोर्टों में कहा गया है कि वागन को इसलिए निर्वासित किया गया क्योंकि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम ने विवादास्पद वीजा संदर्भों का पता लगाया था. नए ड्राफ्ट के अनुसार, 10 देशों को रेड लिस्ट में रखा गया है, जिनके नागरिकों का वीजा पूरी तरह से निलंबित कर दिया जाएगा. ये देश हैं- अफगानिस्तान, क्यूबा, ​​ईरान, लीबिया, उत्तर कोरिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया, वेनेजुएला और यमन. पांच देशों के दूसरे समूह में इरीट्रिया, हैती, लाओस, म्यांमार और दक्षिण सूडान को रखा गया. इन देशों पर भी कुछ शर्तों के साथ प्रतिबंध प्रस्तावित हैं. पांचों देशों में पर्यटक और छात्र वीजा के साथ-साथ अन्य आप्रवासी वीजा भी प्रभावित हो सकते हैं. बताते चलें कि 20 जनवरी को पद्भार ग्रहण करने के पहले ही दिन ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कहा गया था कि सुरक्षा खतरों का पता लगाने के लिए अमेरिका में एंट्री करने वाले किसी भी विदेशी नागरिक की व्यापक जांच की जरूरत पर जोर दिया जाए. ट्रंप ने पहले ही किया था वादा डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद, 20 जनवरी को एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसमें अमेरिका में प्रवेश चाहने वाले विदेशी नागरिकों की सुरक्षा जांच को और अधिक सख्त करने की बात कही गई थी. आदेश में कैबिनेट के कई सदस्यों को 21 मार्च तक उन देशों की लिस्ट देने को कहा गया था. अमेरिका इस लिस्ट में अभी बदलाव कर सकता है. मतलब कई देशों को इसमें जोड़ा तो कई देशों को इससे बाहर किया जा सकता है. इसके बाद लिस्ट प्रशासन की मंजूरी के बाद ही जारी होगी.   recent visitors 45

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जायमाल्या बागची की नियुक्ति, 17 मार्च को शपथ लेंगे

नई दिल्ली  कलकत्ता उच्च न्यायालय के जस्टिस जॉयमाल्य बागची को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस नियुक्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम ने उनका नाम 6 मार्च को भेजा था। केंद्र सरकार को कॉलिजियम ने जस्टिस बागची को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्त करने के लिए सिफारिश की थी।जस्टिस जॉयमाल्या बागची 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। 6 साल से अधिक का कार्यकाल कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया के जरिय एक्स हैंडल से उनकी नियुक्ति के बारे घोषणा की है। जस्टिस बागची सुप्रीम कोर्ट में छह वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा करेंगे। इस दौरान वे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में भी कार्य करेंगे। 3 अक्टूबर, 1966 को जस्टिस बागची का जन्म हुआ था। जस्टिस बागची 2 अक्टूबर, 2031 को रिटायर होंगे और इससे पहले वह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी बनेंगे। जस्टिस केवी विश्वनाथन 25 मई 2031 को चीफ जस्टिस के पद से जब रिटायर होंगे उसके बाद जस्टिस बागची भारत के चीफ जस्टिस बनेंगे। 2011 में कलकत्ता हाई कोर्ट में बने जज जस्टिस बागची को 27 जून, 2011 को कलकत्ता उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 4 जनवरी, 2021 को उनका तबादला आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में किया गया था।बाद में 8 नवंबर, 2021 को वे फिर से कलकत्ता उच्च न्यायालय में लौट आए और तब से वहीं कार्यरत हैं। जस्टिस बागची ने 13 वर्षों से अधिक हाई कोर्ट में सेवा दी है। जस्टिस बागची के शपथ लेने के बाद, सुप्रीम कोर्ट में कुल 33 जस्टिस हो जाएंगे, जबकि कुल सेंक्शन पद 34 हैं।   चर्चा में क्यों ?     हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस जायमाल्या बागची को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की है।      चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया। कलकत्ता हाई कोर्ट का प्रतिनिधित्व     18 जुलाई 2013 को जस्टिस अल्तमस कबीर के सेवानिवृत्त होने के बाद से कलकत्ता हाई कोर्ट से कोई भी न्यायाधीश भारत के मुख्य न्यायाधीश नहीं बने हैं।     वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की बेंच में कलकत्ता हाई कोर्ट का केवल एक प्रतिनिधित्व है। जजों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली     उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण करने वाली संस्था     ना तो संवैधानिक संस्था है और ना ही वैधानिक         उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के माध्यम से स्थापना प्रथम न्यायाधीश मामला (1981)     उच्चतम न्यायालय  ने कहा कि जजों की नियुक्ति के लिये उच्चतम न्यायालय  के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गयी अनुशंसा को राष्ट्रपति ठोस कारणों के आधार पर अस्वीकार कर सकता है दूसरा न्यायाधीश मामला (1993)     जजों की नियुक्ति के लिए अनुशंसा मुख्य न्यायाधीश की व्यक्तिगत राय से नहीं होगी         उच्चतम न्यायालय के दो अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श लेने के बाद भेजी जाएगी     इस अनुशंसा पर कार्यपालिका अपनी आपत्ति दर्ज करा सकती है     मुख्य न्यायाधीश, कार्यपालिका की आपत्ति को स्वीकार करे या अस्वीकार, उनका निर्णय कार्यपालिका पर बाध्यकारी तीसरा न्यायाधीश मामला (1998)-     उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण के मामले में अनुसंशा करने से पहले उच्चतम न्यायालय  के 4 अन्य वरिष्ठतम जजों से परामर्श करना होगा उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति     उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य जजों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।     मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से सम्बंधित कई विवादों के बाद अब मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर होती है।     उच्चतम न्यायालय में अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिये मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के 4 अन्य वरिष्ठतम जजों से परामर्श करने के बाद राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजता है।     यदि 5 में से 2 न्यायाधीश किसी व्यक्ति की नियुक्ति का विरोध करें तो उसके नाम की सिफारिश राष्ट्रपति को नहीं भेजी जाएगी।     सभी न्यायाधीशों की सलाह लिखित रूप में होनी चाहिये, मौखिक नहीं।   recent visitors 45

भारत काsoftware and IT services exports 2023-24 में 200 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा: रिपोर्ट

 नई दिल्ली भारत का सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विस निर्यात वित्त वर्ष 2023-24 में लगातार बढ़ता रहेगा और 200 बिलियन तक पहुंच गया। हाल ही में जारी एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईएससी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले वर्ष दर्ज किए गए 193 बिलियन डॉलर से 3.63 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह स्थिर वृद्धि इस क्षेत्र की फ्लेक्सिबिलिटी और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। रिपोर्ट भारत भर में सॉफ्टवेयर निर्यात में क्षेत्रीय योगदान पर भी प्रकाश डालती है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी क्षेत्र सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है, जिसका योगदान 131.1 बिलियन डॉलर है, जो कुल निर्यात का लगभग 65.55 प्रतिशत है। पश्चिमी क्षेत्र 34.1 बिलियन डॉलर (17.05 प्रतिशत) के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि उत्तरी क्षेत्र 30.78 बिलियन डॉलर (15.39 प्रतिशत) का योगदान देता है। पूर्वी क्षेत्र का योगदान सबसे कम है, जिसकी हिस्सेदारी 4.02 बिलियन डॉलर (2.01 प्रतिशत) है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने शानदार वृद्धि दर्ज की है, जिसने अपने कुशल वर्कफोर्स, लागत लाभ और अनुकूल कारोबारी माहौल के कारण प्रमुख वैश्विक कंपनियों को आकर्षित किया है। एआई, मशीन लर्निंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी नई टेक्नोलॉजी का आना ग्लोबल डिजिटल लीडर के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत कर रहा है। ईएससी के चेयरमैन वीर सागर ने कहा, "भारत का कुशल प्रबंधकीय और तकनीकी कार्यबल वैश्विक मानकों को पूरा कर रहा है, खासकर आईटी क्षेत्र में, जो देश को दुनिया के आउटसोर्सिंग हब में बदल रहा है।" उन्होंने कहा कि आईटी सॉफ्टवेयर और सर्विस, सॉफ्टवेयर उत्पाद विकास और बीपीओ सेवाओं में वृद्धि इस ट्रेंड की एक प्रमुख वजह है। ईएससी के चेयरमैन, ग्लोबल आउटरीच, संदीप नरूला ने कहा, "2023-24 में भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए प्रमुख देश अमेरिका है, जो 54.70 प्रतिशत, 109.40 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ सबसे आगे है, उसके बाद यूके 14.35 प्रतिशत, 28.70 बिलियन अमेरिकी डॉलर, सिंगापुर 3.50 प्रतिशत, 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर और चीन 2.75 प्रतिशत 5.50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ आगे बने हुए हैं।" recent visitors 46