अमरीन का बड़ा खुलासा: अहमदाबाद में फ्लैट से स्पा सेंटरों के सहारे चला रही थी देह व्यापार

भोपाल  राजधानी भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में स्थित सागर रॉयल विला में किराये का मकान लेकर गरीब हिंदू युवतियों का धर्मांतरण कराने और देह व्यापार में धकेलने वाली अमरीन का गिरोह अहमदाबाद में भी फैला हुआ है। अमरीन ने जिस तरीके से भोपाल में अपरा रैकेट चलाने के लिए पुराने व विश्वसनीय ग्राहक चंदन यादव का धर्म परिवर्तन कराकर उसे लिवइन पार्टनर बनाया था। उसी तरह अहमदाबाद के पुराने ग्राहक यासिर को मंगेतर बनाकर उसे वहां देह व्यापार का काम सौंप रखा था।  अमरीन के देह व्यापार को अहमदाबाद में यासिर ही संभाल रहा था। अमरीन ने यासिर के साथ मिलकर अहमदाबाद में जुहापुरा क्षेत्र में राजदरबार होटल के पीछे एक फ्लैट किराये पर लिया था। इसी फ्लैट से वह अहमदाबाद में देह व्यापार का रैकेट चला रही थी। अहमदाबाद में रैकेट चलाने के लिए उसी शहर के आधा दर्जन से अधिक बड़े स्पॉ सेंटर में अमरीन और यासिर ने सांठगांठ की थी। इन्हीं स्पॉ सेंटर से देह व्यापार के लिए लड़कियां और ग्राहकों को सौदा तय करके यासिर अपने किराये के फ्लैट पर लाता और देह व्यापार कराता था। देह व्यापार के कारण टूट चुका है आफरीन का निकाह अमरीन की बहन आफरीन भी भोपाल में संचालित गिरोह का मुख्य किरदार है। आफरीन की शादी जमालपुर में हुई थी, लेकिन ससुराल वालों को जब पता चला कि अमरीन और आफरीन गलत धंधे में लिप्त हैं तो ससुराल वालों का आए दिन आफरीन से विवाद होने लगा। इसके बाद आफरीन ससुराल छोड़कर वापस भोपाल अपने बहन अमरीन के पास आ गई और धंधे में हाथ बंटाने लगी। हालांकि आफरीन के तलाक का केस अभी अदालत में विचाराधीन है। आफरीन के ससुराल वालों के जरिए ही यासिर का संपर्क अमरीन से हुआ था। इसके बाद यासिर भी इस गिरोह का ग्राहक बन गया। बाद में अमरीन का विश्वस्त बना। अमरीन ने उसे अपना मंगेतर बनाकर अहमदाबाद में देह व्यापार को संचालित करने का बड़ा काम सौंप दिया। इस केस में एक बात कॉमन मिली है कि अमरीन ने भोपाल में देह व्यापार का धंधा चलाने के लिए पुराने ग्राहक चंदन यादव को प्रेमी और लिवइन पार्टनर बनाया। वहीं अहमदाबाद में रैकेट चलाने पुराने ग्राहक यासिर को मंगेतर बनाकर काम सौंप दिया। पुलिस पहुंचने से पहले फरार हो गया यासिर भोपाल में अमरीन के गिरोह पर प्रकरण दर्ज होने की भनक लगते ही यासिर अहमदाबाद से फरार हो गया था। भोपाल पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम जब अहमदाबाद स्थित अमरीन-यासिर के किराए के फ्लैट पर पहुंची तो वहां यासिर नहीं मिला। धर्मांतरण, दुष्कर्म, देह व्यापार के इस मामले में भोपाल निवासी अमरीन के भाई बिलाल, रिश्ते का भाई चानू और अहमदाबाद निवासी यासिर फरार हैं। पुलिस संजना उर्फ जन्नत की भी तलाश कर रही है। अहमदाबाद गई भोपाल पुलिस की टीम वापस आ गई है। पुलिस का कहना है कि अमरीन भोपाल में भी इसी मॉडल पर देह व्यापार करती थी। भोपाल में सागर रॉयल विला कॉलोनी में प्रेमी चंदन के साथ मिलकर और अहमदाबाद में मंगेतर यासिर के साथ। आरोपियों के कबूलनामे और सबूतों के बाद अब पुलिस मामले में देह व्यापार की धारा बढ़ाकर कार्रवाई करने की तैयारी में है। recent visitors 25

मध्य प्रदेश में होली की छुट्टियां दोगुनी, तीन और चार मार्च को रहेगा सार्वजनिक अवकाश

भोपाल  मध्य प्रदेश में होली पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। प्रदेश के हजारों स्थानों पर सोमवार को होलिका दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस बार होली का मुख्य दिन कुछ अलग रहेगा, क्योंकि तीन मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान सूतक काल लागू रहता है और इस अवधि में उत्सव नहीं मनाया जाता है, इसलिए इस साल होली का रंगोत्सव दहन के दूसरे दिन के बजाए चार मार्च बुधवार को तीसरे दिन मनाया जाएगा।  राज्य सरकार ने पहले ही तीन मार्च को होली के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था, लेकिन अब रविवार को जारी नए आदेश के अनुसार, अब तीन और चार मार्च 2026 दोनों दिन सार्वजनिक और सामान्य अवकाश रहेगा। यह आदेश ‘निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881’ के तहत लिया गया है। धार्मिक और खगोलीय कारणों से होली उत्सव का दिन बदलना आवश्यक था, ताकि जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस बार होली उत्सव की शुरुआत दो मार्च की रात से होगी, जब पूरे राज्य में होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद रंग उत्सव चार मार्च को मनाया जाएगा। कन्फ्यूजन खत्म, अब मनाएं जश्न दरअसल, इस बार होली की तारीख को लेकर लोगों में काफी उलझन थी। कोई 3 मार्च को होली मनाने की तैयारी में था, तो कोई 4 मार्च को। दफ्तर जाने वालों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर छुट्टी कब मिलेगी? शासन ने अब इस भ्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया है। मध्य प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब होली के मौके पर लगातार दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। कर्मचारी संगठनों की जिद के आगे झुकी सरकार बता दें कि सरकार ने पहले सिर्फ 3 मार्च यानी कि मंगलवार की छुट्टी घोषित की थी। लेकिन कर्मचारी संगठनों का तर्क था कि चूंकि होली दो दिन मनाई जा रही है, इसलिए 4 मार्च को भी दफ्तर बंद रहने चाहिए। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास भेजा, जिस पर रविवार को मुहर लग गई। बैंक और दफ्तर सब रहेंगे बंद जारी अधिसूचना के मुताबिक, 4 मार्च को 'निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' के तहत छुट्टी घोषित की गई है। इसका मतलब यह है कि उस दिन सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ सभी बैंक भी बंद रहेंगे। यह आदेश पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू होगा। प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी जिलों में होली समारोह को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। बता दें, होली का पर्व धार्मिक रीति-रिवाज और खगोलीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए मनाया जाता है। जनता को रंगों और खुशियों के साथ-साथ सावधानी और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है। यह बदलाव इस पर्व को सुरक्षित और आनंददायक बनाने के लिए किया गया है।  recent visitors 26

सूर्य घर योजना से 60,000 से अधिक रोजगार सृजित, रोजाना ₹20-25 करोड़ का सौर कारोबार

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत यूपी में रिकॉर्ड इंस्टॉलेशन, फरवरी में 35,804 रूफटॉप प्लांट स्थापित योजना के तहत ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी डीबीटी से हस्तांतरित, लगभग 4 लाख परिवार लाभान्वित सूर्य घर योजना से 60,000 से अधिक रोजगार सृजित, रोजाना ₹20-25 करोड़ का सौर कारोबार लखनऊ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा विस्तार का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रूफटॉप सोलर को जन-आंदोलन का रूप देते हुए प्रदेश ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार राज्य में अब तक 11,64,038 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3,93,293 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूर्ण हो चुके हैं। इसके माध्यम से 3,98,002 परिवार सीधे लाभान्वित हुए हैं। प्रदेश में कुल स्थापित सौर क्षमता 1,343.5 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।  ₹3,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी हस्तांतरित प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में अग्रणी बन रहा है, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, भूमि संरक्षण और डिजिटल ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक नए युग का नेतृत्व कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत ₹2,663.57 करोड़ की केंद्रीय सरकार की सब्सिडी तथा लगभग ₹920 करोड़ की राज्य सरकार की सब्सिडी लाभार्थियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई है। उत्तर प्रदेश जुलाई 2025 से लगातार देश में इंस्टॉलेशन के मामले में शीर्ष दो राज्यों में बना हुआ है, जो राज्य की निरंतर प्रगति और मजबूत क्रियान्वयन क्षमता को दर्शाता है।        रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि फरवरी माह 2026 में उत्तर प्रदेश के लिए सौर ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियों का माह साबित हुआ। इस एक माह के भीतर रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए। साथ ही 28 फरवरी 2026 को एक ही दिन में 2,211 इंस्टॉलेशन कर उत्तर प्रदेश ने पूरे भारत में किसी भी राज्य द्वारा एक दिन में किए गए सर्वाधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। यह उपलब्धि राज्य की तीव्र कार्यक्षमता और मिशन मोड में चल रहे क्रियान्वयन का प्रमाण है।       60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार इस योजना ने प्रदेश में व्यापक सौर ऊर्जा अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है। वर्तमान में 4,500 से अधिक वेंडर्स सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे 60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। प्रतिदिन औसतन 4 से 5 मेगावाट रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन किए जा रहे हैं, जिससे राज्य में प्रतिदिन लगभग ₹20 से ₹25 करोड़ का व्यवसाय उत्पन्न हो रहा है। रूफटॉप सोलर के माध्यम से प्रतिदिन 60 लाख यूनिट से अधिक मुफ्त बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसका अनुमानित आर्थिक मूल्य लगभग ₹4 करोड़ प्रतिदिन है।    5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत रूफटॉप सोलर मॉडल का एक महत्वपूर्ण लेकिन अप्रत्यक्ष लाभ भूमि संरक्षण के रूप में सामने आया है। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में 5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है। यदि यही क्षमता ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट्स के माध्यम से स्थापित की जाती, तो विशाल भू-भाग की आवश्यकता होती। अब यह भूमि औद्योगिक, वाणिज्यिक, कृषि तथा अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए उपलब्ध रह सकती है।     कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी तेजी से बढ़ते इंस्टॉलेशन ने सौर उद्योग से जुड़े उपकरणों जैसे मॉड्यूल, इन्वर्टर, स्ट्रक्चर और केबल की मांग को भी बढ़ाया है, जिससे प्रदेश में एक मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई है। साथ ही, सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ रही है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश अब सौर ऊर्जा को भविष्य के डिजिटल ऊर्जा व्यापार मॉडल से जोड़ने की दिशा में भी अग्रसर है। यूपीनेडा से जुड़े वेंडर्स ऊर्जा उत्पादन को यूनिफाइड एनर्जी इंटरफेस जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। recent visitors 37

बच्चों के पोषण स्तर में 81 प्रतिशत का सुधार, कुपोषण के खिलाफ उल्लेखनीय उपलब्धि

कुपोषण के खिलाफ जीवनरक्षक ढाल बना योगी सरकार का ‘संभव अभियान’ आंगनबाड़ी केंद्रों में लाखों बच्चों को मिला नया जीवन, कुपोषण पर निर्णायक प्रहार बच्चों के पोषण स्तर में 81 प्रतिशत का सुधार, कुपोषण के खिलाफ उल्लेखनीय उपलब्धि  लखनऊ कुपोषण और भुखमरी दूर करने के लिए योगी सरकार की प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि प्रदेश में लाखों नौनिहालों की जान बचाने में सफलता मिली है। ‘संभव अभियान’ से अति गंभीर कुपोषित (सैम) बच्चों में से 81 प्रतिशत सामान्य स्थिति में आ चुके हैं। यह एक समग्र प्रयास है जो जीवन के पहले 1000 दिनों में कुपोषण की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करता है। बच्चों को मिल रहा है पोषण और जीवनदान प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे तीव्र कुपोषण से जूझ रहे थे, जिससे उनके जीवन और विकास पर खतरा मंडरा रहा था। सरकार ने इस समस्या को बड़ी चुनौती के रूप में लिया और केंद्र सरकार की मदद से इस पर व्यापक रणनीति बनाई। संभव अभियान को मजबूत करने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग और पोषण ट्रैकर का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया गया। पंजीकृत कुपोषित बच्चों का डाटा स्वास्थ्य विभाग के ई-कवच एप्लीकेशन से जोड़ा गया, जिससे उपचार और फॉलोअप में पारदर्शिता आई। 1.7 करोड़ से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर 2.5 लाख कुपोषित बच्चों का पंजीकरण किया गया। एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम को प्रशिक्षित कर जमीनी स्तर पर क्षमता बढ़ाई गई। इस तरह बच्चों को उचित पोषण पहुंचाकर विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है।  मां और शिशु पर विशेष फोकस सम्भव अभियान केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्भावस्था से ही पोषण सुरक्षा की नींव रखता है। कम वजन और एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं की पहचान कर प्रारंभिक पंजीकरण, नियमित वजन निगरानी, आयरन फोलिक एसिड और कैल्शियम सेवन तथा पोषण परामर्श सुनिश्चित किया जा रहा है। 0 से 6 माह तक के शिशुओं में लो बर्थ वेट और प्री-टर्म बच्चों की पहचान कर विशेष निगरानी की जाती है। जटिल मामलों को पोषण पुनर्वास केंद्रों में रेफर कर समुचित उपचार दिया जाता है। यह समन्वित दृष्टिकोण कुपोषण की जड़ पर प्रहार करता है। हर वर्ष जून से सितंबर तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में सघन अभियान चलाकर बच्चों की स्क्रीनिंग, पहचान और उपचार की समग्र व्यवस्था की जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर बना आदर्श मॉडल सम्भव अभियान के परिणाम अब जमीन पर दिख रहे हैं। कुपोषित श्रेणी के बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने की दर में दिनोंदिन वृद्धि हो रही है। यह राज्य के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। सम्भव अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन है जो पोषण के प्रति समुदाय, सेवा प्रदाताओं और नीति निर्माताओं को एकजुट करता है। recent visitors 34

सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति, 86 जनजातीय ग्राम होंगे लाभान्वित

कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़वानी के पानसेमल और वरला में 2 हजार 67 करोड़ रूपये लागत की माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति 86 जनजातीय ग्राम होंगे लाभान्वित मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक हुई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी के नांगलवाड़ी में सोमवार को हुई नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक और नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में 1 हजार 207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत की पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 860 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत की वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता है, जिसे ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जा रही हैं। इन माइक्रो उद्वहन परियोजनाओं से बड़वानी जिले के लाभान्वित होने वाले पानसेमल तहसील के 53 ग्राम और वरला तहसील के 33 ग्राम ऊंचाई में स्थित होने, अल्पवर्षा क्षेत्र होने और भूजल स्तर अत्यंत कम होने से सिंचाई सुविधा से वंचित रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 11 जनवरी 2025 की घोषणा के अनुपालन में पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 14 नवंबर 2025 की घोषणा के अनुपालन में वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना की नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक में प्रशासकीय स्वीकृति की अनुशंसा की गई, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई है। पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में उपलब्ध होगी सिंचाई सुविधा पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से बड़वानी जिले की तहसील पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में लगभग 1,207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत से ग्राम सोंदुल से नर्मदा नदी से 7.20 क्यूमेक (74.65 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा, जिससे 53 जनजातीय ग्राम लाभान्वित होंगे। परियोजना अंतर्गत भूमिगत प्रेशराइज्ड पाइप्ड नहर प्रणाली से पाइपलाइन बिछाकर सिंचाई व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे कृषक सीधे स्प्रिंकलर और ड्रिप इरीगेशन पद्धति से खेतों में सिंचाई कर सकेंगे। परियोजना में कोई डूब क्षेत्र नहीं है। भूमिगत पाइपलाइन, राइजिंग मेन और ग्रैविटी मेन के लिए 48.79 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई भूअर्जन, पंप हाउस और ट्रांसमिशन लाइन निर्माण के लिए 4 हेक्टेयर स्थाई भूअर्जन तथा 18 हेक्टेयर वन भूमि का अर्जन किया जाएगा। परियोजना के तहत 3 पंप हाउस से कुल 339.67 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए 5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा। परियोजना में कुल 34.60 मेगावाट विद्युत की आवश्यकता होगी जिस पर वार्षिक विद्युत व्यय 34 हजार 249 रुपए प्रति हेक्टेयर रहेगा। वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र होगा सिंचित वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना अंतर्गत बड़वानी जिले की तहसील अंजड़ के ग्राम मोहिपुरा से नर्मदा नदी से 4.96 क्यूमेक (51.42 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा जिससे तहसील वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना की कुल लागत 860 करोड़ 53 लाख रुपए प्राक्कलित की गई है, जिसमें 4 पंप हाउस के माध्यम से 390 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है। परियोजना में 30.5 मेगावाट विद्युत आवश्यकता होगी जिस पर 33 हजार 316 रुपए वार्षिक विद्युत व्यय प्रति हेक्टेयर रहेगा। परियोजना के लिए 30 हेक्टेयर वन भूमि, 204.13 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई तथा 7.5 हेक्टेयर निजी भूमि का स्थाई भूअर्जन किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव तथा उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि पानसेमल और वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं से लाभान्वित होने वाले ग्राम जनजातीय बहुल होने के साथ वन से घिरे हुए हैं। इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद बड़वानी जिले में कुल 70 प्रतिशत क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जो वर्तमान में 60 प्रतिशत है। उन्होंने परियोजनाओं के विभिन्न घटकों का तकनीकी विवरण प्रस्तुत किया। बैठक में 10 नवंबर 2025 को आयोजित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 268वीं बैठक तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल की 85वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि भी की गई।   recent visitors 25

होली और रमजान पर एमपी में सुरक्षा कड़ी, सीएम मोहन यादव ने जारी किए सख्त निर्देश

भोपाल  होली और रमजान समेत आगामी त्योहारों को लेकर मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद राजधानी भोपाल समेत प्रदेश भर में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार हाई अलर्ट मोड में है। सीएम मोहन यादव ने प्रदेशभर के अधिकारियों को सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। VC में दिए स्पष्ट और सख्त निर्देश, एमपी को बताया शांति का टापू वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई इस समीक्षा बैठक में प्रदेश भर के जिलों के एसपी ऑनलाइन शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी अफसरों को कहा कि मध्य प्रदेश शांति का टापू है, इसकी ये छवि बनाए रखना है। वहीं उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि शांति और सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। त्योहार खुशियों के हों, तनाव के नहीं- सीएम सीएम ने समीक्षा बैठक आयोजित कर वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कर उन क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया जाए। इसके साथ ही सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तेज करने और अफवाहों पर तत्काल एक्शन करने और निपटने को कहा है। मोहन यादव ने बैठक में कहा कि त्योहारों का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, समाज को तोड़ना नहीं। प्रशासन प्राथमिकता तय करे कि आम नागरिक सुरक्षित और बेफिक्र होकर त्योहार मनाए। यहां जानें प्रशासन के खास इंतजाम संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च- जिन क्षेत्रों को संवेदनशील माना गया है, जहां पहले तनाव की घटनाएं सामने आई हैं, वहां पुलिस और प्रशासन संयुक्त रूप से फ्लैग मार्च करेगा। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी- भीड़भाड़ वाले बाजार, धार्मिक स्थल और जुलूस मार्गों पर ड्रोन कैमरों के साथ ही अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाएं गए हैं। शांति समितियों की बैठक– स्थानीय स्तर पर धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सामंजस्य की अपील की जा रही है। अफवाहों पर तुरंत कार्रवाई के आदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम आगि पर भ्रामक जानकारी पोस्ट करने पर, अफवाह फैलाने वालों पर साइबर सेल की नजर रहेगी। प्रशासन का फोकस- प्री एम्प्टिव एक्शन जानकारी के मुताबिक इस बार रणनीति केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एहतियात बरतना है। जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी छोटी घटना को हल्के में न लें। रात के समय गश्त बढ़ाई जाए। जुलूस मार्गों पर जुलूस पूर्व जांच की जाए। राजनीतिक और सामाजिक संदेश सीएम मोहन यादव ने यह भी संकेत दिए हैं कि त्योहारों को लेकर किसी तरह की राजनीति या उकसावों की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो, ताकि आमजन में भरोसा कायम रहे। बता दें कि रमजान के बीच होली पर्व आने से प्रशासन के लिए सौहार्द्र और शांति बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। क्योंकि एक तरफ रंग-गुलाल और जुलूसों का माहौल होता है, तो दूसरी तरफ रोजा और इबादत की पाबंदियों का समय। ऐसे में समय, मार्ग और कार्यक्रमों में समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाता है। जन-जन से अपील अफवाहों पर ध्यान न दें संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी का ध्यान रखते हुए कोई भी पोस्ट शेयर करें सांप्रदायिक सौहार्द्र और शांति बनाए रखें recent visitors 23

दीपावली, होली, नवरात्र और गणेश महोत्सव जैसे पर्वों में खुदरा व्यापार में भी हुई उल्लेखनीय वृद्धि

यूपी में ‘फेस्टिवल इकोनॉमी’ बनी आर्थिक इंजन सुरक्षा और सुशासन से बदली तस्वीर, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था से बढ़ा भरोसा, त्योहारों के दौरान कई गुना तक बढ़ा फुटफॉल दीपावली, होली, नवरात्र और गणेश महोत्सव जैसे पर्वों में खुदरा व्यापार में भी हुई उल्लेखनीय वृद्धि कुम्हार, मूर्तिकार और हस्तशिल्प कारीगरों को बड़े ऑर्डर, स्वयं सहायता समूहों का त्योहार आधारित कारोबार तेज भव्य आयोजनों से बढ़ा धार्मिक पर्यटन, अयोध्या-वाराणसी-मथुरा बने आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से आयोजन हुए व्यवस्थित, स्थानीय विकास कार्यों को भी मिली गति लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में पर्व-त्योहारों के आयोजन का स्वरूप बदला है। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक तैयारी और राजनीतिक स्तर पर बढ़ी सक्रियता के चलते प्रमुख पर्वों-त्योंहारों पर सांस्कृतिक आयोजनों का दायरा कहीं ज्यादा व्यापक हो गया है। इसका सीधा असर प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। योगी सरकार के प्रयासों से 9 वर्षों में बदले परिदृश्य ने प्रदेश में इस फेस्टिवल इकॉनमी को जन्म दिया है, जिसके माध्यम से न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी बाजार में कारोबार कई गुना तक बढ़ रहा है। सुरक्षा के भरोसे ने त्योहारों को बनाया आर्थिक इंजन उत्तर प्रदेश में फेस्टिवल इकॉनमी को गति देने में योगी सरकार में सुदृढ़ कानून-व्यवस्था निर्णायक कारक बनी है। प्रमुख पर्व-त्योहारों पर राज्य से लेकर जिला स्तर तक विशेष सुरक्षा प्लान लागू किए जाते हैं। संवेदनशील जिलों और धार्मिक नगरों में अतिरिक्त पुलिस व पीएसी बल की तैनाती, महिला सुरक्षा दल और दंगा नियंत्रण इकाइयों की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित की जाती है। ड्रोन से रियल टाइम निगरानी, प्रमुख बाजारों व आयोजन स्थलों पर व्यापक सीसीटीवी कवरेज और इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के जरिए 24×7 मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। यातायात के लिए पूर्व निर्धारित डायवर्जन प्लान और अतिरिक्त सार्वजनिक परिवहन भी लागू होता है। प्रशासन और व्यापारी संगठनों के अनुसार बेहतर सुरक्षा माहौल का सीधा असर बाजार पर दिखा है। होली, दीपावली और नवरात्र जैसे अवसरों पर कई प्रमुख बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत तक अधिक फुटफॉल दर्ज किया गया। अधिकारियों का मानना है कि भरोसेमंद कानून-व्यवस्था ने न सिर्फ लोगों को खुलकर पर्व-त्योहारों का उत्सव मनाने का अवसर दिया, बल्कि व्यापार व सेवा क्षेत्र में विश्वास का वातावरण भी तैयार किया है, जिससे त्योहार आर्थिक गतिविधियों का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। बाजार गतिविधियों का बढ़ा दायरा व्यापार मंडल पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले नौ वर्षों में त्योहारों के दौरान बाजार गतिविधियों का दायरा स्पष्ट रूप से बढ़ा है। दीपावली, होली और नवरात्र जैसे प्रमुख अवसरों पर खुदरा बाजार में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक कारोबार दर्ज किया जा रहा है। कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सर्राफा, मिठाई, सजावटी सामग्री और पूजा उत्पादों की मांग में लगातार उछाल आया है। व्यापारिक संगठनों का दावा है कि संगठित प्रबंधन और बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है, जिससे बिक्री के आंकड़े मजबूत हुए हैं। त्योहारों ने बढ़ाया फुटफॉल, सेवा क्षेत्र को मिला व्यापक लाभ त्योहारों के सांस्कृतिक आयोजनों के विस्तार का प्रभाव पर्यटन और सेवा क्षेत्र में भी दिखाई देता है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और मथुरा जैसे शहरों में बड़े आयोजनों के दौरान होटल ऑक्यूपेंसी दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। परिवहन, टूर ऑपरेटर, टैक्सी, ई-रिक्शा और खानपान कारोबार में भी उछाल आया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार संगठित और सुरक्षित आयोजनों के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे अस्थायी और स्थायी दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर बढ़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि कानून-व्यवस्था की सख्ती, प्रशासनिक समन्वय और त्योहारों के योजनाबद्ध विस्तार ने इन आयोजनों को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का सशक्त माध्यम बना दिया है। कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा आर्थिक लाभ त्योहारों के विस्तारित स्वरूप का प्रभाव परंपरागत कारीगरों पर स्पष्ट दिखाई देता है। अयोध्या के दीपोत्सव के दौरान लाखों दीयों की मांग ने आसपास के जिलों के कुम्हारों को बड़े स्तर पर ऑर्डर उपलब्ध कराए। कई स्थानों पर प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों से सीधे खरीद की व्यवस्था की गई, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसी तरह, वाराणसी की देव दीपावली और प्रयागराज के माघ मेले जैसे आयोजनों में हस्तशिल्प, पूजा सामग्री और पारंपरिक सजावटी वस्तुओं की बिक्री में तेज उछाल दर्ज किया गया। मथुरा-वृंदावन की होली के दौरान गुलाल, पारंपरिक परिधान और धार्मिक उपहार सामग्री के कारोबार में बढ़ोतरी देखी गई। नवरात्र और दुर्गा पूजा के समय मूर्तिकारों, पंडाल निर्माताओं, लाइटिंग और साउंड सिस्टम से जुड़े व्यवसायों को बड़े पैमाने पर काम मिला। कई जिलों में स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को प्राथमिकता देने की पहल से क्षेत्रीय रोजगार को बल मिला। महिला स्वयं सहायता समूहों ने भी इस अवसर को आय के स्रोत में बदला। दीपावली पर दीये और मोमबत्ती, नवरात्र में प्रसाद पैकिंग, होली पर हर्बल गुलाल, पापड़-चिप्स जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पाद और त्योहार आधारित गिफ्ट पैक्स तैयार कर समूहों ने शहरी बाजारों और सरकारी मेलों में स्टॉल के माध्यम से उल्लेखनीय बिक्री की। ग्रामीण उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच मिलने से कुटीर उद्योगों को स्थायी बाजार आधार मिला है। पारंपरिक आयोजनों का पुनर्जागरण प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कई ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हुए हैं, जो पहले सीमित दायरे में होते थे, लेकिन अब उनका विस्तार राज्य स्तर तक दिखाई देता है। अयोध्या का दीपोत्सव और वाराणसी की देव दीपावली के अलावा रंगभरी एकादशी का आयोजन अब बड़े पैमाने पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के साथ होता है। इसी प्रकार कृष्ण जन्मोत्सव (मथुरा-वृंदावन) में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यापक प्रबंधन व्यवस्था लागू की गई है। श्रावणी मेले और कांवड़ यात्रा के आयोजन का स्वरूप भी बदला है। गणेश महोत्सव, जो पहले मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर सीमित था, अब कई शहरों में बड़े सांस्कृतिक आयोजनों के रूप में उभरा है। पंडाल निर्माण, मूर्ति निर्माण, लाइटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दायरा बढ़ा है। इसके अतिरिक्त रामोत्सव, कृष्णोत्सव, बुद्ध महोत्सव, महाशिवरात्रि मेले, चित्रकूट दीप महोत्सव जैसे आयोजनों को भी संगठित रूप से बढ़ावा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन आयोजनों को पर्यटन कैलेंडर से जोड़ने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के … Read more