मोहन सरकार ने बजट में दी बड़ी सौगात, उद्योगों में 3 लाख नौकरियां मिलेंगी, सीएम किसान योजना के लिए 5220 करोड़ रुपये का प्रावधान

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने अपने बजट में कई बड़ी घोषणाएं की हैं. वित्त मंत्री ने जगदीश देवड़ा ने कहा कि 2025-26 को उद्योग वर्ष के तौर पर मनाया जाएगा. अत्याचार अधिनियम के लिए 180 करोड़ का प्रावधान. एससी के विकास के लिए 32 करोड़ का प्रावधान किया जा रहा है. आहार अनुदान योजना में हर महिला को 1500 रुपये देने का प्रावधान. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण के तहत 1 करोड़ 33 लाख परिवार को निशुल्क राशन दिया जा रहा है. प्रदेश के नागरिक को बीमा समिति का गठन किया जाएगा. लाडली बहना को केंद्र की योजना से जोड़ने का काम किया जाएगा. माना जा रहा है कि इस बार के बजट में किसानों, महिला और गरीबों पर फोकस हो सकता है. सरकार युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों को लेकर भी बड़े ऐलान कर सकती है. शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्टर के क्षेत्र में भी बड़ी सौगात मोहन सरकार की ओर से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. आम बजट 4 लाख करोड़ से ज्यादा का हो सकता है. बुधवार को भी सदन के हंगामेदार होने के आसार हैं. विपक्ष लगातार अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बजट में किसानों को आर्थिक मदद, बीमा सुरक्षा और सौर ऊर्जा जैसी योजनाओं का लाभ मिलेगा। श्रीअन्न उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा प्रदेश में श्रीअन्न (मोटे अनाज) के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नई योजना लागू की गई है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और प्रदेश में पोषण सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। कृषि अनुसंधान को बढ़ावा, ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय को 40 करोड़ कृषि अनुसंधान और उन्नत तकनीकों के विकास को गति देने के लिए सरकार ने ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा- हमने 2025-26 का बजट जीरो वेस्ट बजटिंग प्रक्रिया से तय किया है। सरकार का लक्ष्य है विकसित मध्यप्रदेश। इसका अर्थ है कि जनता का जीवन खुशहाल हो। महिलाओं का आत्मगौरव मिले। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी बजट भाषण सुनने के लिए विधानसभा में मौजूद हैं। बजट की बड़ी बातें…     1 अप्रैल 2025 से सातवें वेतनमान के महंगाई भत्ते का पुनरीक्षण किया जाएगा।     मुख्यमंत्री किसान सहायता के लिए 5220 करोड़ का प्रावधान।     लाड़ली बहनों की राशि नहीं बढ़ेगी। पेंशन योजना से जोड़ी जाएंगी।     प्रदेश के 39 नए औद्योगिक क्षेत्रों में 3 लाख नौकरियां मिलेंगी।     प्रदेश सरकार ने कोई नया टैक्स नहीं लगाया।     22 नए आईटीआई खोले जाएंगे।     सीएम युवा शक्ति योजना के तहत प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में सर्व सुविधायुक्त स्टेडियम खोला जाएगा।     प्रदेश में डिजिटल यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय खुलेगा।     धार में डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान और डिंडोरी में जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान शुरू होंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में निरंतर वृद्धि हो रही है और पीएम मोदी ने 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है. इसी संकल्प के तहत मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 'विकसित प्रदेश 2047' का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है. सरकार का लक्ष्य साल 2047 तक राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) को 250 लाख करोड़ तक बढ़ाना है.   इसके लिए 18 नई नीतियां जारी की गई हैं और उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है. पिछले एक साल में संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया गया. फरवरी 2025 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 26 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए, जिनमें से 21 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावित हैं. अब तक 1880 से अधिक भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं. 'एक जिला एक उत्पाद' और टियर-2 शहरों का विकास प्रदेश के प्रत्येक जिले के परंपरागत कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए 'एक जिला एक उत्पाद' योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसमें रतलाम का नमकीन, सीहोर के लकड़ी के खिलौने, चंदेरी और महेश्वर की साड़ियां, बाग प्रिंट, मुरैना की गजक, शरबती गेहूं और कौन चित्रकला जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें भौगोलिक संकेतक (GI टैग) प्राप्त हुए हैं. इसके अलावा, टियर-2 शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, कॉमिक्स, सेमीकंडक्टर निर्माण और ड्रोन उद्योग के विस्तार के लिए नई नीतियां बनाई गई हैं. स्टार्टअप और युवा सशक्तिकरण मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत इस वर्ष 5675 लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई है. साथ ही, स्टार्टअप नीति 2025 लागू की गई है, जिसके तहत नए स्टार्टअप्स की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार औद्योगिक विकास के साथ-साथ युवाओं, किसानों, गरीबों और महिलाओं के कल्याण के लिए संतुलित रूप से काम कर रही है. PM मोदी और CM यादव की सराहना जगदीश देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्य प्रदेश भी विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है. यह बजट प्रदेश को औद्योगिक और सामाजिक रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. बजट सत्र के दौरान विधानसभा में इस प्रस्तुति को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रिया और आगे की चर्चा पर सभी की नजरें टिकी हैं. सीएम किसान योजना के लिए 5220 करोड़ रुपये का प्रावधान वहीं, राज्य सरकार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए सीएम किसान योजना के तहत 5220 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे लाखों किसानों को लाभ होगा। फसल बीमा योजना के लिए 2000 करोड़ का बजट फसल क्षति की भरपाई के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकेगी। वहीं किसानों को अतिरिक्त आय के साधन उपलब्ध कराने और उनके आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए 850 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सौर ऊर्जा योजनाओं के लिए 447 करोड़ रुपये किसानों को सौर ऊर्जा से लाभ दिलाने के लिए … Read more

प्रदेश की 18 यूनेस्को विश्व धरोहर में 15 टेंटेटिव और 3 स्थाई सूची में शामिल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है कि यूनेस्को ने प्रदेश की चार ऐतिहासिक धरोहरों को सीरियल नॉमिनेशन के तहत टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया है। सम्राट अशोक के शिलालेख, चौसठ योगिनी मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेला शासकों के महल और किलो को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में घोषित होना प्रमाणित करता है कि मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश में विशेष स्थान रखता है। पिछले वर्ष भी यूनेस्को ने प्रदेश की 6 धरोहरों, ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खुनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, मंडला स्थित रामनगर के गोंड स्मारक और धमनार का ऐतिहासिक समूह को टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया था। मध्यप्रदेश में अब यूनेस्को द्वारा घोषित 18 धरोहरों है। जिसमें से 3 स्थाई और 15 टेंटेटिव सूची में है। यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में प्रदेश के खजुराहो के मंदिर समूह, भीमबेटका की गुफाएं एवं सांची स्तूप यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल स्थायी सूची में शामिल है। वहीं यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में मांडू में स्मारकों का समूह, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, नर्मदा घाटी में भेड़ाघाट-लमेटाघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और चंदेरी भी शामिल है। यह उपलब्धि हमारी धरोहरों के संरक्षण तथा संवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर एमपी टूरिज्म बोर्ड, संस्कृति विभाग, पुरातत्वविदों, इतिहास प्रेमियो, संस्थाओं और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी है जिन्होंने ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में अमूल्य योगदान दिया हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मध्यप्रदेश को विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक नए आयाम तक पहुंचाएगी और हमारे गौरवशाली अतीत को नई पहचान दिलाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आव्हान किया कि हम सब मिलकर अपनी धरोहरों के संरक्षण के लिए संकल्पबद्ध रहें और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। मौर्य कालीन अशोक के शिलालेख मौर्य कालीन अशोक के शिलालेख स्थल भारत के प्राचीनतम लिखित अभिलेख हैं। इन शिला और स्तंभ लेखों में सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म, शासन और नैतिकता से संबंधित संदेश अंकित हैं, जो 2,200 से अधिक वर्षों से संरक्षित हैं। मध्य प्रदेश में पर्यटक साँची स्तंभ अभिलेख, जबलपुर में रूपनाथ लघु शिलालेख, दतिया में गुज्जरा लघु शिलालेख और सीहोर में पानगुरारिया लघु शिलालेख को शामिल किया गया हैं। चौंसठ योगिनी मंदिर प्रदेश में 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच निर्मित चौंसठ योगिनी मंदिर तांत्रिक परंपराओं का प्रतीक हैं। इन मंदिरों की गोलाकार, खुले आकाश के नीचे बनी संरचनाएँ, जटिल शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय हैं। इसमें खजुराहो, मितावली (मुरैना), जबलपुर, बदोह (जबलपुर), हिंगलाजगढ़ (मंदसौर), शहडोल और नरेसर (मुरैना) के चौसठ योगिनी मंदिर को शामिल किया गया है। उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिर प्रदेश में सांची, उदयगिरि (विदिशा), नचना (पन्ना), तिगवा (कटनी), भूमरा (सतना), सकोर (दमोह), देवरी (सागर) और पवाया (ग्वालियर) में स्थित गुप्तकालीन मंदिर को यूनेस्को द्वारा शामिल किया गया है।  गुप्तकालीन मंदिर भारतीय मंदिर वास्तुकला में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाते हैं। मंदिर उत्कृष्ट नक्काशी, शिखर शैली और कलात्मक सौंदर्य को प्रदर्शित करते हैं। बुंदेला काल के किला-महल बुंदेला काल के गढ़कुंडार किला, राजा महल, जहाँगीर महल, दतिया महल और धुबेला महल, राजपूत और मुगल स्थापत्य कला के बेहतरीन संगम को दर्शाते हैं। ये महल बुंदेला शिल्पकला, सैन्य कुशलता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अद्भुत मिसाल हैं। recent visitors 19

मुख्यमंत्री यादव ने कहा मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2024-25, विकास पथ पर तीव्र गति से बढ़ रहे मध्यप्रदेश के कदमों का प्रमाण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2024-25, विकास पथ पर तीव्र गति से बढ़ रहे मध्यप्रदेश के कदमों का प्रमाण है। विभिन्न सूचकांक प्रदेश की उत्तरोत्तर प्रगति के प्रतीक हैं। प्रदेश की प्रगति में सरकार के प्रयासों के साथ नागरिकों के सहयोग सकारात्मक दृष्टिकोण का भी योगदान शामिल है। मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्र "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहाँ एक ओर वर्ष 2023-24 में प्रचलित भावों पर मध्यप्रदेश का सकल घरेलू उत्‍पाद 13 लाख 53 हजार 809 करोड़ रूपए था, वहीं इसमें 11.05% की वृद्धि हो गई है। सकल घरेलू उत्पाद अब बढ़कर 15 लाख 03 हजार 395 करोड़ रूपए पहुँच गया है। यह प्रगति प्रदेश की सशक्त अर्थव्यवस्था और समग्र विकास को दर्शाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राज्य को आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित बनाने के लिए निरंतर कार्यरत है। इसी दिशा में हमने वर्ष 2028-29 तक सकल घरेलू उत्‍पाद को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2024-25 प्रदेश की आर्थिक सुदृढ़ता और समग्र प्रगति का द्योतक है। वर्ष 2023-24 में स्थिर भावों पर मध्यप्रदेश का सकल घरेलू उत्‍पाद 6 लाख 71 हजार 636 करोड़ रूपए था, जो 6.05% की वृद्धि के साथ वर्ष 2024-25 में बढ़कर 7 करोड़ 12 लाख 260 करोड़ रूपए हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नव शक्ति प्रदान कर विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को पूर्ण करने की दिशा में कार्यरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सर्वेक्षण नागरिकों की समृद्धि को परिभाषित करने वाला है। मध्‍यप्रदेश की प्रति व्‍यक्ति आय का उल्लेख करें तो यह वर्ष 2024-25 में प्रचलित भावों पर 1 लाख 52 हजार 615 रूपए हो गई है। स्थिर भाव पर भी वर्ष 2024-25 में प्रति व्‍यक्ति आय 70 हजार 434 रूपए है। प्रदेश सरकार आर्थिक समृद्धि और जनकल्याण के संकल्प के साथ प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने के लिए निरंतर कार्यरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सर्वेक्षण प्रदेश सरकार की सशक्त आर्थिक नीतियों और निरंतर विकासशील अर्थव्यवस्था का प्रतिबिंब है। मध्‍यप्रदेश के सकल मूल्यवर्धन में प्रचलित भावों पर वर्ष 2024-25 में क्षेत्रवार हिस्‍सेदारी क्रमश: प्राथमिक क्षेत्र में 44.36 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र में 19.03 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 36.61 प्रतिशत रही है। यह आंकड़े मध्यप्रदेश की संतुलित और निरंतर प्रगतिशील अर्थव्यवस्था को दर्शाते हैं, जहाँ सरकार के प्रयासों से प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में समुचित विकास हो रहा है।   recent visitors 35

एमपी के 2,383 स्कूलों में अभी व्यावसायिक शिक्षा, शिक्षकों को भी प्रशिक्षण देने की तैयारी में सरकार

भोपाल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किया जा रहा है। नए सत्र से प्रदेश के 700 हायर सेकंडरी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक सत्र में 700 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में नए ट्रेड में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। यह ट्रेड 21वीं सदी के नवीन कौशल उन्नयन पर आधारित है। प्रचार-प्रसार के निर्देश जारी     वर्तमान में 2,383 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के पाठ्यक्रम चल रहे हैं। इन्हें मिलाकर प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा देने वाले स्कूलों की संख्या तीन हजार से अधिक हो जाएगी।     इन पाठ्यक्रमों में कृषि, डेयरी विकास, कंस्ट्रक्शन ट्रेड के तहत मेशन सहायक, कंस्ट्रक्शन पेंटर और फैशन डिजाइनिंग के तहत असिस्टेंट डिजाइनर, फैशन डिजाइनर, हाउसकीपिंग, ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट पढ़ाया जाएगा।     इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रदेश में संचालित व्यावसायिक शिक्षा के संबंध में प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। नौवीं व 12वीं में ये पाठ्यक्रम संचालित वर्तमान में संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में नौवीं व 10वीं में डाटा एंट्री ऑपरेटर, जूनियर फील्ड टेक्नीशियन, असिस्टेंट ब्यूटी थेरेपिस्ट, रिटेल स्टोर, ऑपरेशन असिस्टेंट, प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड, फूड एंड बेवरेज, सर्विस असिस्टेंट, माइक्रो फाइनेंस एग्जीक्यूटिव, असिस्टेंट प्लंबर, सिलाई मशीन ऑपरेटर, फोर व्हीलर सर्विस असिस्टेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्विस असिस्टेंट और फिजिकल एजुकेशन जैसे विषय शामिल हैं। वहीं, 11वीं व 12वीं में जूनियर साफ्टवेयर डेवलपर, सोलर पैनल टेक्नीशियन, ड्रोन सर्विस टेक्नीशियन, सीसीटीवी व फुटेज ऑपरेटर, फ्लोरीकल्चर, सेल्फ एम्प्लॉयड टेलर प्रमुख हैं। शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा प्रदेश में वर्तमान में 2,383 स्कूलों में चार लाख से अधिक विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है। इसके लिए 4700 से अधिक शिक्षकों को विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। recent visitors 34

बजट में आज किसानों को गेहूं, धान, श्रीअन्न के उत्पादन के लिए किया जाएगा प्रोत्साहित, 2025-26 में एक लाख पदों पर होंगी भर्तियां

भोपाल आज 12 मार्च यानी बुधवार को विधानसभा में मोहन सरकार का दूसरा बजट प्रस्तुत होगा। जाहिर है कि मोदी सरकार के बजट की रोशनी में इसे तैयार किया गया है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ज्ञान मंत्र पर आधारित रहेगा। ज्ञान यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी। इसके लिए चार मिशन भी लागू किए जा चुके हैं। अब बजट में पूर्व से संचालित योजनाओं में प्रावधान किए जाएंगे। वहीं, किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषक उन्नति योजना प्रारंभ करने की घोषणा हो सकती है। इसमें गेहूं, धान और श्रीअन्न के उत्पादन पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। 2025-26 में एक लाख पदों पर होंगी भर्तियां     युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अगले दो वर्ष में ढाई लाख सरकारी रिक्त पदों पर भर्ती का रोडमैप भी प्रस्तुत किया जा सकता है। 2025-26 में एक लाख पदों पर राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाएं कराकर भर्तियां की जाएंगी।     मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि और उससे संबद्ध क्षेत्र हैं। एक करोड़ से अधिक खातेदार कृषक हैं, जिनमें 67 प्रतिशत लघु और सीमांत हैं। किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भारत सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य से इतर प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है।     अब इसके लिए जितने भी प्रावधान होंगे, वे सब कृषक उन्नति योजना में किए जाएंगे। कैबिनेट योजना को मंजूरी दे चुकी है। इसके प्रविधान कृषि बजट में किए जाएंगे। उत्पादन में वृद्धि के लिए आवश्यक सिंचाई क्षमता का विस्तार सरकार की प्राथमिकता में है।     इसे ध्यान में रखते हुए केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो योजना के लिए राज्यांश बढ़ाएगी। उल्लेखनीय है कि दोनों नदी जोड़ो परियोजना का हिस्सा हैं, जिसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी।     सिंचाई क्षमता 50 लाख से बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने के लिए जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं के लिए बजट प्रावधान बढ़ाया जाएगा। अधोसंरचना विकास पर रहेगा जोर सरकार को जोर पिछले वर्षों की तरह इस बार भी अधोसंरचना विकास पर रहेगा। दरअसल, अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए औद्योगिकीकरण आवश्यक है। इसके लिए नए औद्योगिक केंद्र विकसित किए जाएंगे तो सड़क, बिजली और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर काम होगा। नगरीय क्षेत्रों में डेढ़ हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग उन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर बनाएगा, जो पूर्व से स्वीकृत हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण तेजी के साथ करने के लिए बजट आवंटित किया जाएगा। विभाग को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक बजट मिल सकता है। इसी तरह स्कूल और कॉलेजों का बजट भी बढ़ाया जाएगा ताकि गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति सुनिश्चित हो सके। आवास के लिए पांच हजार करोड़ रुपये सूत्रों का कहना है कि आने वाले तीन वर्षों में 30 लाख से अधिक आवास शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उल्लेखनीय है कि शहरी क्षेत्रों में आगामी तीन वर्षों में दस लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 लाख आवास बनाए जाने का लक्ष्य है। इसके लिए पांच हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा सकता है। recent visitors 34

वर्ष 2025-26 के लिए किए गए शराब ठेकों के समूहों की नीलामी से 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिलने की उम्मीद

भोपाल  मध्य प्रदेश में शराब के दाम 10 प्रतिशत बढ़ सकते हैं। वजह यह है कि राज्य सरकार ने शराब पर 10 प्रतिशत वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) बढ़ाने का निर्णय लिया है। उदाहरण के लिए शराब पर वैट 350 रुपये प्रूफ लीटर था, 10 प्रतिशत बढ़ोतरी करने पर यह 385 रुपये प्रूफ लीटर हो जाएगा। बता दें कि एक लीटर के बराबर एक प्रूफ लीटर होता है।     हालांकि, वैट बढ़ाने के साथ ही आबकारी विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शराब निर्माता कंपनी मनमाने तरीके से शराब का मूल्य नहीं बढ़ा सकेंगी।     दरअसल, शराब निर्माता कंपनी का तर्क होता है कि उनकी शराब विभिन्न राज्यों में विक्रय की जाती है।     ऐसे में दूसरे राज्यों से तुलना कर शराब की कीमत में वृद्धि की जाती है।     लेकिन अब शराब की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और (एमआरपी) मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्यों में शराब पर वैट और कीमत की तुलना कर जो राज्य के अनुकूल होगा, उसके आधार पर ही शराब का मूल्य तय किया जाएगा। 31 जिलों में शराब के ठेकों की ई-टेंडरिंग और बिड से होगी नीलामी मध्य प्रदेश में 21 जिलों में शराब ठेकों की 100 प्रतिशत नीलामी की जा चुकी है। 81 समूहों ने शराब के ठेके उठाए हैं। अब 31 जिलों में शराब के ठेके होना है। नीलामी की प्रक्रिया के बावजूद जबलपुर और दमोह सहित अन्य जिलों में ठेके नहीं उठ पा रहे हैं। यहां ई-टेंडरिरंग और बिडिंग से नीलामी की जाएगी। 21 जिलों में नीलामी पूरी अभी तक 21 जिलों में शराब ठेकों की नीलामी पूरी हो चुकी है। 81 समूहों ने ठेके लिए हैं। 31 जिलों में अभी नीलामी होनी बाकी है। कुछ जिलों जैसे जबलपुर और दमोह में ठेके नहीं उठ पा रहे हैं। विभाग ई-टेंडरिंग और बिडिंग पर विचार कर रहा है। राजस्व का लक्ष्य  चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का 15 हजार करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य है, जिसमें से 12,500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। यह लक्ष्य इसी महीने हासिल कर लिया जाएगा। वहीं, वर्ष 2025-26 के लिए शराब ठेकों की नीलामी से 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की उम्मीद है। शराब की कीमतें भले ही हर साल बढ़ती रहे मगर दूसरी तरफ उसकी खपत में कमी होने के बजाय उल्टा बढ़ोतरी हो रही है। इस बार भी शासन ने अपनी आबकारी नीति में वर्तमान शराब ठेकेदारों को ही यह विकल्प दिया कि वे 20 प्रतिशत अधिक दर पर अपनी दुकानों का आगामी वित्त वर्ष के लिए नवीनीकरण करा सकते हैं, जिसके चलते इंदौर जिले में 80 की बजाय 83 फीसदी बढ़ा हुआ राजस्व 139 दुकानों पर प्राप्त हुआ और 1476 करोड़ रुपए की ये दुकानें नीलाम हो गई। अब सिर्फ 13 समूह की 34 दुकानें बची है, जिनका आरक्षित मूल्य 304 करोड़ रुपए आंका गया है। recent visitors 50

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उन लोगों की जांच कर रहा है जो खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं

नई दिल्ली  अगर आप खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं तो आपके ऊपर कार्रवाई हो सकती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (IT विभाग) उन लोगों की जांच कर रहा है जो खेती के नाम पर गलत तरीके से इनकम टैक्स बचा रहे हैं। बता दें कि खेती की आमदनी पर इनकम टैक्स और जीएसटी दोनों ही नहीं लगता। दरअसल, कई दशकों से खेती की आमदनी और जमीन बेचने का इस्तेमाल ब्लैक मनी को सफेद करने और टैक्स बचाने के लिए होता रहा है। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पूरे देश में छानबीन कर रहा है। कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोगों और कंपनियों ने बिना जमीन के ही 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की खेती की आमदनी दिखाई है। विभाग की किन मामलों पर नजर? इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कई ऐसे मामलों पर भी नजर रखे हुए है जहां 5 लाख रुपये प्रति एकड़ की फर्जी खेती की आमदनी दिखाई गई है। ये आंकड़े आम चलन और सरकारी आंकड़ों से बिलकुल मेल नहीं खाते। अगर विभाग इस मामले की गहराई से जांच करता है तो कई जगहों पर बवाल हो सकता है। क्योंकि कई बड़े नेता और रसूखदार लोग सीधे-सीधे या परोक्ष रूप से जमीन के मालिक हैं। ये जांच उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। जयपुर से शुरू हुई जांच इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक यह जांच जयपुर के कुछ मामलों से शुरू हुई है। इन मामलों में कुछ लोगों ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में 50 लाख रुपये से ज्यादा की खेती की आमदनी दिखाई थी। 'हाई-रिस्क केस' के तौर पर चिन्हित इन मामलों में विभाग टैक्स भरने वालों के दावों की जांच करेगा। ये मामले साल 2020-21 के हैं। आशीष करुंडिया एंड कंपनी के फाउंडर आशीष करुंडिया बताते हैं कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जिन लोगों की पहचान की है उन्हें ये साबित करना होगा कि उन्होंने अपनी जमीन खेती के लिए इस्तेमाल की है। खासकर जब पहले भी सैटेलाइट इमेज से खेती की जांच की जाती रही है। ये आमदनी में शामिल नहीं जमीन की प्लॉटिंग और बिक्री, शहर की जमीन बेचना, कमर्शियल इस्तेमाल के लिए फार्महाउस किराए पर देना, मुर्गी पालन और ऐसी ही दूसरी गतिविधियों से होने वाली आमदनी खेती से मिलने वाली आमदनी में शामिल नहीं है। इस पर टैक्स देना होगा। अगर किसी ने अपनी गैर-खेती जमीन स्टांप ड्यूटी वैल्यू से कम दाम पर बेची है तो उन पर भी टैक्स लग सकता है। ये शामिल हो सकता है खेती की आमदनी में फसल बेचने से होने वाली कमाई या जमीन का किराया शामिल हो सकता है। ये जमीन नगर निगम की सीमा से बाहर होनी चाहिए और कानून में तय न्यूनतम आबादी वाले इलाके में होनी चाहिए। खेती की जमीन बेचने से होने वाला मुनाफा भी टैक्स से छूट सकता है। ये तब होगा जब जमीन इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 की धारा 2(14)(iii) में दी गई 'कैपिटल असेट' की परिभाषा में नहीं आती हो। इन मामलों में टैक्स 'कैपिटल असेट' के तौर पर पहचान के लिए, खेती की जमीन गांव की या शहरी, दोनों ही हो सकती है। जब गांव की जमीन बेची जाती है तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। लेकिन शहरी खेती की जमीन बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है। सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि दूसरे लोग भी खेती की जमीन खरीदते हैं। वो इसका इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए करते हैं। इसके लिए जरूरी मंजूरियां और शुल्क चुकाना पड़ता है। खेती की आमदनी के मामले में खेती की उपज के सबूत दिखाए जा सकते हैं। लेकिन अगर किसी के पास इतनी आमदनी है जिसके लिए उपज या बिक्री का कोई सबूत नहीं है तो गलत तरीके से छूट का दावा करने पर जुर्माना लग सकता है। recent visitors 40