ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन 30.68 करोड़ के पार, फ्री बीमा समेत मिलते हैं ये फायदे, , 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं

नई दिल्ली ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों की संख्या बढ़कर 30.68 करोड़ से अधिक हो गई है। अच्छी बात यह है कि इनमें से 53.68 प्रतिशत (3 मार्च तक) महिलाएं हैं। बताना चाहेंगे केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री, शोभा करंदलाजे ने लोकसभा को यह जानकारी दी। 21 अक्टूबर, 2024 को ई-श्रम-“वन-स्टॉप-सॉल्यूशन” किया गया था लॉन्च असंगठित श्रमिकों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए वन-स्टॉप-सॉल्यूशन के रूप में ई-श्रम को विकसित करने की बजट घोषणा के विजन को ध्यान में रखते हुए, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21 अक्टूबर, 2024 को ई-श्रम-“वन-स्टॉप-सॉल्यूशन” लॉन्च किया। इस पोर्टल पर विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एकीकृत करना शामिल “ई-श्रम-“वन-स्टॉप-सॉल्यूशन” में एक ही पोर्टल पर विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एकीकृत करना शामिल है। यह ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंचने और ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से अब तक उनके द्वारा प्राप्त लाभों को देखने में सक्षम बनाता है। 13 योजनाओं को ई-श्रम के साथ पहले ही किया जा चुका एकीकृत अब तक, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की 13 योजनाओं को पहले ही ई-श्रम के साथ एकीकृत किया जा चुका है, जिनमें प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम-स्वनिधि), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (एनएफबीएस), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी), आयुष्मान भारत योजना शामिल हैं। ई-श्रम पोर्टल को राष्ट्रीय करियर सेवा के साथ किया एकीकृत रोजगार और कौशल विकास के अवसर प्रदान करने के लिए ई-श्रम पोर्टल को राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) और स्किल इंडिया डिजिटल पोर्टल के साथ भी एकीकृत किया गया है। वहीं, पेंशन योजना के तहत नामांकन की सुविधा के लिए, ई-श्रम को प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएमएसवाईएम) के साथ एकीकृत किया गया है। असंगठित श्रमिकों का बड़ा राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए किया था ई-श्रम पोर्टल लॉन्च मंत्रालय ने आधार से जुड़े असंगठित श्रमिकों का एक बड़ा राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए 26 अगस्त, 2021 को ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर एक यूएएन प्रदान करके उनका पंजीकरण करके सहायता करना है। क्या है ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना बेहद आसान है. मजदूर अपना रजिस्ट्रेशन खुद ऑनलाइन कर सकते हैं या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से भी करवा सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट में आधार कार्ड, बैंक अकाउंट डिटेल्स और मोबाइल नंबर की जरूरत होती है. 13 योजनाओं का मिलता है फायदा अब तक विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 13 योजनाओं को ई-श्रम के साथ इंटीग्रेट किया जा चुका है. इन योजनाओं में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), आयुष्मान भारत, पीएम-स्वनिधि, पीएम आवास योजना आदि शामिल हैं. ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड मजदूरों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के तहत 2 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस फायदा मिलता है. इसमें इंश्योरेंस के लिए मजदूरों को प्रीमियम देने की जरूरत नहीं है. किन लोगों को मिल सकता है फायदा? रेहड़ी-पटरी वाले खोमचा लगाने वाले सब्जी और दूध बेचने वाले लोग घर बनाने वाले लोग रिक्शा और ठेला चालक नाई धोबी दर्जी मोची आदि recent visitors 60

देश में मकानों की बिक्री में दिल्ली-एनसीआर में 63% उछाल, मुंबई और हैदराबाद को पीछे छोड़ा.

नई दिल्‍ली  देश में सबसे ज्‍यादा मकान बेचने वाला शहर अब दिल्‍ली-एनसीआर बन गया है. इस शहर ने मुंबई और हैदराबाद को भी पीछे छोड़ दिया है. इस तरह, दिल्‍ली-एनसीआर ने साल 2024 में सबसे ज्यादा घर बेचा है. इस बार सिर्फ गुरुग्राम में ही बिक्री मूल्य में 66% की वृद्धि हुई है. इसके साथ ही, दिल्ली-एनसीआर ने 1 लाख करोड़ रुपये की बिक्री मूल्य की सीमा को भी पार कर लिया है. डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी के अनुसार, 2024 में दिल्ली-एनसीआर में कुल मकानों का बिक्री मूल्य 63% बढ़कर 1.53 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसी दौरान मुंबई का बिक्री मूल्य 13% बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये और हैदराबाद का बिक्री मूल्य 18% घटकर 1.05 लाख करोड़ रुपये रह गया है. साल 2023 में दिल्ली-एनसीआर में बेचे गए घरों की कुल बिक्री मूल्य 94,143 करोड़ रुपये रहा था, जबकि इसी दौरान मुंबई में 1.22 लाख करोड़ रुपये और हैदराबाद में 1.28 लाख करोड़ रुपये के मकान बिके थे. हैदराबाद से आगे निकला गुरुग्राम गुरुग्राम में साल 2023 में कुल बिक्री मूल्य 64,314 करोड़ रुपये था, जो हैदराबाद का लगभग आधा था. लेकिन, 2024 में गुरुग्राम ने हैदराबाद को भी पीछे छोड़ दिया. प्रॉपइक्विटी के संस्थापक और सीईओ समीर जसूजा ने कहा कि गुरुग्राम ने अकेले ही 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री के साथ दिल्ली-एनसीआर की कुल बिक्री मूल्य का 66% से अधिक हिस्सा बेचा है. यह शहर शीर्ष पर उभर कर आया है. गुरुग्राम का बिक्री मूल्य मुंबई के बाद दूसरे स्थान पर है. गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और नई दिल्ली जैसे शहरों में भी 2024 में बिक्री मूल्य में काफी वृद्धि देखी गई है. बस नोएडा में थोड़ी गिरावट आई है. लग्‍जरी मकानों की डिमांड बढ़ी दिल्ली-एनसीआर में औसत बिक्री मूल्य 12,469 रुपये प्रति वर्ग फुट तक बढ़ गया है और 2024 में यूनिट्स का औसत आकार 2,229 वर्ग फुट हो गया है. आधे से अधिक बिक्री 2 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले घरों की हुई है और एक चौथाई बिक्री 1-2 करोड़ रुपये के बीच कीमत वाले घरों की हुई है. इसका मतलब है कि कुल बिक्री में 75 फीसदी हिस्‍सेदारी तो सिर्फ 1 करोड़ से ज्‍यादा की कीमत वाले घरों की है. हैदराबाद में बड़ी गिरावट क्‍यों हैदराबाद के आवासीय बाजार ने साल 2024 में महत्वपूर्ण गिरावट देखी, जिसमें नए लॉन्च 2020 के बाद से सबसे कम और बिक्री 2021 के बाद से सबसे कम रही. इस तरह देखा जाए तो डिमांड और सप्‍लाई में 25% व 49% की वार्षिक गिरावट आई है. लिहाजा तैयार खड़े मकानों की संख्‍या 2023 में 17 महीनों से बढ़कर 2024 में 20 महीनों तक पहुंच गया है. देश में हुई कुल बिक्री मूल्‍य में दिल्‍ली-एनसीआर का हिस्‍सा 2023 के 16% से बढ़कर 2024 में 23% हो गया. मुंबई का हिस्सा 2023 में 20% से बढ़कर 2024 में 21% हो गया, जबकि हैदराबाद का हिस्सा 2023 के 21% से घटकर 2024 में 16% रह गया. 2024 में शीर्ष 9 शहरों का कुल बिक्री मूल्य 12% बढ़कर 6.73 लाख करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 6 लाख करोड़ था. इन शहरों में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, ठाणे, कोलकाता, बैंगलोर, चेन्नई और हैदराबाद शामिल है. recent visitors 49

पीएम मोदी को मॉरीशस सरकार ने अपना सबसे बड़ा नागरिक सम्मान दिया, सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय बने

मॉरीशस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉरीशस सरकार ने अपना सबसे बड़ा नागरिक सम्मान 'द ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन' से नवाजा है। पीएम मोदी इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय बने हैं। गौरतलब है कि यह पीएम मोदी को किसी देश द्वारा दिया गया 21वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। सम्मान पर क्या बोले पीएम मोदी इस सम्मान को स्वीकार करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "मैं इसे विनम्रता से स्वीकार करता हूं। यह सम्मान भारत और मॉरिशस के गहरे रिश्तों का सम्मान है। यह उन भारतीयों का भी सम्मान है, जिन्होंने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस धरती की सेवा की और इसे ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मैं मॉरिशस की जनता और सरकार का तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूं।" पीएम मोदी ने याद किया कि 10 साल पहले इसी तारीख को वे मॉरिशस आए थे। उन्होंने कहा, "तब भारत में होली बीते हफ्ता भर हुआ था, और मैं अपने साथ भगवा की उमंग लेकर आया था। इस बार होली के रंग अपने साथ लेकर जाऊंगा।" उन्होंने अपने अंदाज में होली का जिक्र करते हुए कहा, "राम के हाथे ढोलक सोहे, लक्ष्मण हाथ मंजीरा, भरत के हाथ कनक पिचकारी, शत्रुघ्न हाथ अबीरा… जोगीरा!" पीएम मोदी ने भारत और मॉरिशस के ऐतिहासिक संबंधों को मिठास से जोड़ा और बताया कि एक जमाने में भारत में मिठाई बनाने के लिए चीनी मॉरिशस से आती थी। इसी वजह से गुजरात में चीनी को मॉरस भी कहा जाता है। उन्होंने कहा, "समय के साथ भारत और मॉरिशस के रिश्तों में यह मिठास और बढ़ती जा रही है।" मॉरिशस में भारत की खुशबू हर तरफ: पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि जब भी वे मॉरिशस आते हैं, उन्हें अपनों के बीच होने का एहसास होता है। उन्होंने कहा, "यहां की हवा, मिट्टी और पानी में अपनापन महसूस होता है। गीत-गवाई में, ढोलक की थाप में और गातो पिमा (मॉरिशस की पारंपरिक डिश) में भारत की खुशबू है।" पीएम मोदी ने मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनराम गुलाम और उनकी कैबिनेट का आभार जताते हुए मॉरिशस की जनता को राष्ट्रीय दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा, "हम सब एक परिवार हैं, और यह रिश्ता हमेशा मजबूत रहेगा।" recent visitors 60

2028-29 तक सकल घरेलू उत्पाद दोगुना करने का लक्ष्य : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल मध्‍यप्रदेश का सकल घरेलू उत्‍पाद वर्ष 2024-25 प्रचलित भावों पर रूपये 1503395 करोड़ पहुंच गया है, जो वर्ष 2023-24 में रूपये 1353809 करोड़ था। पिछले वित्‍तीय वर्ष से 11.05 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने वर्ष 2028-29 तक राज्‍य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। मंगलवार को विधान सभा में प्रस्तुत मध्‍यप्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2024-25 के अनुसार मध्‍यप्रदेश का सकल घरेलू उत्‍पाद वर्ष 2024-25 में स्थिर भावों पर जीएसडीपी 712260 करोड़ रूपये है जो वर्ष 2023-24 में 671636 करोड़ रहा। यह 6.05 प्रतिशत की वास्‍तविक वृद्धि दिखाता है। मध्‍यप्रदेश की प्रति व्‍यक्ति आय वर्ष 2024-25 प्रचलित भावों पर रूपये 152615 हो गई है। स्थिर भाव पर वर्ष 2024-25 में प्रति व्‍यक्ति आय रूपये 70434 है । मध्‍यप्रदेश के सकल मूल्य वर्धन में प्रचलित भावों पर वर्ष 2024-25 में क्षेत्रवार हिस्‍सेदारी क्रमश: प्राथमिक क्षेत्र में 44.36 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र में 19.03 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 36.61 प्रतिशत रही है। मध्‍यप्रदेश ने लोक वित्‍त में अपनी मजबूत अर्थव्‍यवस्‍था बनाये रखने के लिये प्रभावी कदम उठाये गये है। वित्‍तीय वर्ष 2024-25 में राजस्‍व अधिशेष रूपये 1700 करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 4.11 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। राजस्‍व प्राप्तियां रूपये 263344 करोड़ तक पहॅुचने का अनुमान है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार कृषि फसल क्षेत्र का प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत योगदान वर्ष 2024-25 में 30.90 प्रतिशत रहा लेकिन प्रचलित भाव पर यह 10.8 प्रतिशत बढ़ा जबकि स्थिर भाव में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी तरह पशुधन क्षेत्र में 7.45 प्रतिशत का योगदान रहा । इसकी वृद्धि स्थिर भाव पर क्रमश: 11.93 प्रतिशत एवं 8.39 प्रतिशत रही। "विकसित भारत" की कल्पना के अनुरूप "विकसित मध्यप्रदेश के रूप में राज्य अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करेगा। प्रदेश की मजबूत बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय समावेश की शक्ति से आर्थिक तंत्र निरंतर सशक्त हो रहा है। कृषि और कृषि प्र-संस्करण के माध्यम से आय के स्रोतों में वृद्धि हो रही है, जबकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, बड़ी अधोसंरचनात्मक परियोजनाएं, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विस्तार, और ऊर्जा उपलब्धता में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण घटक एक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में प्रदेश की प्रगति को दर्शाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आर्थिक और सामाजिक समावेश तथा महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने से आर्थिक और सामाजिक उन्नति में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में गरीब कल्याण, युवा शक्ति, अन्नदाता, और नारी शक्ति जैसे चार प्रमुख मिशनों की शुरुआत की है। ये मिशन क्रमशः समाज के वंचित वर्गों, युवाओं, किसानों और महिलाओं के समग्र विकास एवं आर्थिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने कार्यरत हैं। सरकार का संकल्प है कि राज्य की आर्थिक नीतियां समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास में सहायक हों और व्यापक आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करें। मध्यप्रदेश सरकार ने 'ईज़ ऑफ लिविंग' और 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देने के लिए मानकों के सरलीकरण, जनविश्वास बिल, राजस्व महाभियान और पीएम जनमन कार्यक्रम जैसे प्रभावी उपायों को अपनाया है, जिससे सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि, टाइगर एवं चीता रिजर्व, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें, और पर्यटन स्थलों ने मध्यप्रदेश को पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। मध्यप्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2024-25 प्रदेश की आर्थिक प्रतिबद्धताओं, विकास योजनाओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह सर्वेक्षण राज्य की विकास यात्रा को प्रतिबिंबित करता है और यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश सतत और समावेशी आर्थिक विकास के मार्ग पर अग्रसर है। मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2025 को "उद्योग वर्ष’’ घोषित किया गया है। वित्‍तीय वर्ष 2024-25 में द्वि‍तीयक क्षेत्र में 2.73 लाख करोड़ रूपये के सकल मूल्‍य वर्धन तक पहॅुच गया। राज्‍य में औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी ढॉचे के विकास कार्यो के लिये वर्ष 2024-25 में 145.13 करोड़ रूपये की राशि स्‍वीकृत की गई तथा दिसम्‍बर 2024 तक 4.17 लाख करोड़ के निवेश प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुये। राज्‍य में सामाजिक क्षेत्र के लिये महत्‍वपूर्ण बजटीय आवंटन किये गये है जिसमें पिछले चार वर्षो में 82.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार ने समस्‍त बाल विकास को प्राथमिकता देते हुये राज्‍य के कुल बजट का 21.6 प्रतिशत बजट आवंटित किया है। ‘’ पोषण भी पढाई भी’’ ‘’ स्‍व-सहायता समूह’’ ‘’ सामुदायिक संस्‍थागत विकास’’ ‘’ लखपति दीदी’’ ‘’विकसित मध्‍यप्रदेश विजन 2047’’ आदि इस दिशा में अग्रणी प्रयास है। स्‍वास्‍थ्य क्षेत्र मे राज्‍य का बजट वर्ष 2024-25 में 15744 करोड़ रूपये तक पहॅुच गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 4.85 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किये गये है। वर्ष 2024-25 में शिक्षा का बजट 11.26 प्रतिशत आवंटित किया गया है। सी.एम.राईज स्‍कूल योजना के तहत 274 स्‍कूलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। व्‍यावसायिक शिक्षा में 14 ट्रेडस शुरू किये गये है। उच्‍च शिक्षा के अंतर्गत 1346 महाविद्यालय में 10.5 लाख सीट उपलब्‍ध है। recent visitors 43

मंत्री सिलावट ने कहा- मोदी एवं सीएम यादव का संकल्प है कि हर घर स्वच्छ पेयजल और खेती के लिए हर खेत तक पानी पहुंचे

भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है कि हर घर स्वच्छ पेयजल और खेती के लिए हर खेत तक पानी पहुंचे। इसके लिए प्रदेश में केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजनाओं के बाद ताप्ती मेगा बेसिन परियोजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न सिंचाई योजनाओं के माध्यम से सिंचाई के रकबे में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। प्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए तालाब एवं अन्य जल स्त्रोतों के उन्नयन, विकास, गहरीकरण, जल स्त्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने और उनके आसपास पौधा-रोपण आदि के उद्धेश्य से प्रदेश में 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाया जाएगा। उन्होंने प्रदेश में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का जनता से आहवान किया। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने मंगलवार को प्रमुख अभियंता जल संसाधन कार्यालय के सभाकक्ष में अभियान की तैयारियों के संबंध में बैठक ली। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन विभाग डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता जल संसाधन श्री विनोद कुमार देवड़ा सहित सभी संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि जल संसाधन विभाग में प्रदेश में 32 वृहद, 120 मध्यम एवं 5 हजार 800 लघु जल संरचनाएं हैं। इनमें बनाए गए बांधों की नहर प्रणाली 40 हजार किलोमीटर की है जिनमें 16 हजार किलोमीटर पक्की और 24 हजार किलोमीटर कच्ची नहरें हैं। इन नहरों से सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। अभियान के अंतर्गत जल संरचनाओं की आवश्यक मरम्मत, सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य किया जाना है। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन की समृद्धशाली परंपरा रही है। यहां की चंदेल कालीन जल संरक्षण प्रणाली न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध रही है। जल संसाधन संभाग छतरपुर में 44, टीकमगढ़ में 71 और पन्ना में 5 चंदेल/बुंदेलकालीन तालाब हैं। अभियान के अंतर्गत इन सभी का संरक्षण किया जाना है। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने निर्देश दिए कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए छोटी-छोटी योजनाएं बनाकर कार्य कराया जाए। आगामी बारिश के पूर्व प्रदेश के सभी पुराने बांधों एवं जल स्त्रोतों की मरम्मत सुनिश्चित की जाए। इसके लिए गत वर्ष में जिन-जिन तालाबों/ जल स्त्रोतों में क्षति हुई उनकी सूची बनाई जाए तथा उन जल स्त्रोतों का विशेष ध्यान रखा जाए। बांधों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं। जल संसाधन मंत्री ने विभाग के सभी मुख्य अभियंताओं को निर्देश दिए कि वे अपने बेसिन के अंतर्गत आने वाली जल संरचनाओं के संरक्षण एवं विकास का कार्य सुनिश्चित करें। जल संरक्षण एवं विकास कार्य में जन सहयोग लें। सीएसआर गतिविधि के अंतर्गत तालाबों को रख-रखाव के लिए गोद दिया जा सकता है। जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के इस कार्य में समाज के सभी वर्गों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, धर्म गुरूओं, मीडिया आदि का पूरा सहयोग लिया जाए। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत प्रदेश में 10 रिवर बेसिन (नदी कछार) हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में होने वाली प्रमुख गतिविधियां सभी नहरों को विलेज मेप पर राजस्व विभाग की सहायता से मार्क किया जाना तथा विलेज मेप पर "शासकीय नहर" अंकित किया जाना। बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त किया जाना। नहर के अंतिम छोर पर जहां नहर समाप्त होकर किसी नाले मे मिलती है, उस स्थान पर किलो मीटर स्टोन लगाया जाना। 40 हजार किलोमीटर की नहर प्रणाली में मनरेगा की सहायता से सफाई का कार्य किया जाना। जलाशयों में यदि रिसाव की स्थिति हो तो रिसाव रोकने के लिये पडल तथा आवश्यक हटिंग कार्य किये जा रहे हैं। तालाब के पाल (बंड) की मिट्टी के कटाव अथवा क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पुनः निर्मित किये जाने का कार्य। तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो तथा घाट आदि की मरम्मत का कार्य। स्टॉप-डेम, बैराज, वियर में गेट लगाना तथा मेन-वॉल, साइड-वॉल, की-वॉल, एप्रॉन इत्यादि में मरम्मत/अतिरिक्त निर्माण कार्य। जल संरचनाओं के किनारों पर यथा संभव बफर – जोन तैयार किए जाकर जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण को रोकने के लिये फेंसिंग के रूप में वृक्षारोपण का कार्य किए जाना। फ्लशबार की मरम्मत का कार्य किए जाना। स्लूस वैल की सफाई का कार्य किए जाना।   recent visitors 56

पशुओं की बीमारियों के समुचित इलाज के लिए वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग भी आवश्यक: मंत्री लखन पटेल

भोपाल पशु पालन एवं डेयरी राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार श्री लखन पटेल ने कहा है कि पशुओं की बीमारियों के समुचित इलाज के लिए वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग भी आवश्यक है। वर्तमान में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के कारण मनुष्यों एवं पशुओं में जीवाणु रोधी दवाइयां के प्रति प्रतिरोधकता का बढ़ना महामारी का रूप ले रहा है, जो एक भयानक वैश्विक खतरा बनता जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति से एवं एंटीबॉयोटिक के दुरुपयोग से इसका दुष्प्रभाव मनुष्य एवं पशुओं में देखा जा रहा है, जिसके कारण एएमआर (एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस) की वैश्विक समस्या उत्पन्न हो गई है। अल्टरनेट वेटरिनरी प्रैक्टिस जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी, पारंपरिक चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा इत्यादि का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है, जिससे कम खर्च पर आसानी से पशुओं की बिना किसी दुष्प्रभाव के चिकित्सा की जा सकती है। पशु पालन राज्यमंत्री श्री पटेल ने मंगलवार को होटल पलाश रेसीडेंसी में “पशुओं की वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति” पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश श्री महेंद्र सिंह, दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के श्री अभय महाजन, अध्यक्ष, वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया डॉ. उमेशचंद शर्मा, संचालक, पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पी एस पटेल आदि उपस्थित थे। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों के 13 विषय विशेषज्ञ और लगभग 100 से अधिक विभागीय अधिकारी शामिल हुए। पशु पालन राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि भारत में आदिकाल से पारंपरिक एवं वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धति का उपयोग किया जाता था, जिसे पुनः पशुओं की चिकित्सा में बढ़ावा देने एवं जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दो दिवसीय इस कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों के विचार मंथन से पशु चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुझाव आयेंगे।   recent visitors 52

मॉरीशस में भोजपुरी भाषा की महत्वपूर्ण मौजूदगी पर भी खुशी जाहिर की, पीएम मोदी ने बताया-गौरव की बात

पोर्ट लुईस पीएम मोदी ने कहा कि वह मॉरीशस में अविस्मरणीय स्वागत से बहुत अभिभूत है। उन्होंने मॉरीशस में भोजपुरी भाषा की महत्वपूर्ण मौजूदगी पर भी खुशी जाहिर की। पीएम मोदी ने पोर्ट लुईस पहुंचने के बाद एक्स पर हिंदी और भोजपूरी भाषा में पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, "मॉरीशस में अविस्मरणीय स्वागत से बहुत अभिभूत हूं। यहां की संस्कृति में भारतीयता किस तरह रची-बसी है, उसकी पूरी झलक 'गीत-गवई' में देखने को मिली। हमारी भोजपुरी भाषा मॉरीशस में जिस तरह से फल-फूल रही है, वह हर किसी को गौरवान्वित करने वाली है।" वहीं भोजपुरी भाषा में उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, "मॉरीशस में यादगार स्वागत भइल। सबसे खास रहल गहिरा सांस्कृतिक जुड़ाव, जवन गीत – गवई के प्रदर्शन में देखे के मिलल। ई सराहनीय बा कि महान भोजपुरी भाषा मॉरीशस के संस्कृति में आजुओ फलत-फूलत बा और मॉरीशस के संस्कृति में अबहियो जीवंत बा।" इससे पहले सर शिवसागर रामगुलाम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने पीएम मोदी का माला पहनाकर स्वागत किया। भारतीय समुदाय की तरफ से पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। समुदाय की महिलाओं ने ‘गीत गवई’ नामक पारंपरिक बिहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से उनका सम्मान किया। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, "मॉरीशस में भारतीय समुदाय द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत से मैं बहुत प्रभावित हूं। भारतीय विरासत, संस्कृति और मूल्यों से उनका गहरा जुड़ाव वाकई प्रेरणादायक है। इतिहास और दिल का यह बंधन पीढ़ियों से चला आ रहा है।" प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को देश के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना के एक जहाज के साथ भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी भी समारोह में भाग लेगी। यह प्रधानमंत्री मोदी की 2015 के बाद पहली मॉरीशस यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी की वर्तमान यात्रा से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।   recent visitors 57