पाकिस्‍तान :बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने ट्रेन को हाईजैक किया, 500 यात्री बंधक, 6 पाकिस्‍तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को एक यात्री ट्रेन को हाईजैक कर लिया गया है। इस ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार हैं। बलूचिस्तान के अलगाववादी गुट बीएलए ने एक बयान जारी कर ट्रेन पर कब्जा करने का दावा किया है। गुट का कहना है कि ट्रेन को हाईजैक करने की कोशिश पाकिस्तान के छह सैन्यकर्मी भी मारे गए हैं। इस संघर्ष के बाद उन्होंने ट्रेन को काबू करते हुए 100 से ज्यादा यात्रियों को बंधक बनाने का दावा किया है। हालांकि बंधकों की सही संख्या की जानकारी नहीं मिल सकी है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार की ओर से अभी तक कोई बयान इस संबंध में नहीं आया है। सेना ने भी इस संबंध में अभी कुछ नहीं कहा है। हाईजैक हुई ट्रेन पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा से खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर जा रही थी, तभी उस पर हमला हुआ। पाक अखबार डॉन के मुताबिक रेलवे नियंत्रक मुहम्मद काशिफ ने बताया कि नौ डिब्बों वाली इस ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार थे। ऐसे में ये स्पष्ट नहीं है कि कितने लोग बंधक बनाए गए हैं। महिला, बच्चों और बलूच लोगों को छोड़ देने का दावा किया जा रहा है। टनल पर रोकी गई है ट्रेन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हथियारबंद लोगों ने जाफर एक्सप्रेस नाम की इस ट्रेन को बलूचिस्चान में टनल 8 पर रोक रखा है। लंबे समय से बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लड़ रहे गुट बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ट्रेन को हाईजैक करने के बाद जारी बयान में कहा गया है कि बंधकों में पाकिस्तानी सेना के जवान और सुरक्षा एजेंसियों के सदस्य शामिल हैं। बीएलए ने कहा है कि उनकी बात ना माने जाने पर इनको नुकसान पहुंचाया जा सकता है। बीएलए ने कहा है कि उन्होंने ट्रेन में महिलाओं, बच्चों और बलूच यात्रियों को रिहा कर दिया है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी बंधक पाकिस्तानी सेना के ही लोग हैं। उन्होंने कहा कि विदेशियों को बंध बनाने का उनका इरादा नहीं है। बलूचिस्तान में अलगाववादी बीएलए और पाकिस्तानी सरकार के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। ट्रेन हाईजैक की ये घटना इस संघर्ष के तेज होने का इशारा करती है। बीएलए लंबे समय से इस क्षेत्र में स्वायत्तता की मांग कर रहा है। बीएलए लड़ाके पहले भी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमले करते रहे हैं। हालांकि ट्रेन को हाईजैक करने का ये अपनी तरह का पहला मामला है। बलूचिस्तान प्रांत में बताया जा रहा है कि बोलान इलाके में ट्रेन सुरंग के अंदर पहुंची, जब यह हमला हुआ. मसलन, ट्रेन सुरंग नंबर 8 में ट्रेन जैसे ही पहुंची और ट्रैक पर धमाका हो गया. ट्रेन रुक गई और हमलावरों ने ट्रेन के इंजन पर फायरिंग की और इसमें ड्राइवर जख्मी हो गया. क्वेटा से पेशावर तक चलती है जाफर एक्सप्रेस जाफर एक्सप्रेस क्वेटा से पेशावर के बीच हर रोज चलती है. यह एक यात्री ट्रेन है. ये ट्रेन रोहरी-चमन रेलवे लाइन और कराची-पेशावर रेलवे लाइन के एक हिस्से के साथ यात्रा करते हुए, 1,632 किलोमीटर (1,014 मील) की दूरी तय करती है. ये दूरी कवर करने में ट्रेन को 34 घंटे 10 मिनट लगते हैं. पाकिस्तानी सेना के 100 से ज्यादा जवान भी बंधक बलूच लिब्रेशन आर्मी ने एक बयान में कहा है कि उनके पास 100 से भी ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवान बंधक हैं. इस बीच बीएलए ने पाकिस्तानी आर्मी के छह जवानों को मौत के घाट उतार दिया है. इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर किसी तरह की कार्रवाई की जाती है तो सभी को मार दिया जाएगा. बलूचिस्तान में लंबे समय से पाकिस्तान का विरोध होता है. recent visitors 35

स्थानीय कारीगरों को मिलेगा ग्लोबल-वोकल सपोर्ट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 'एक जिला-एक उत्पाद' हमारे कारीगरों और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में आयोजित 'एक जिला-एक उत्पाद' (ओडीओपी) एक्सपो ने स्थानीय कारीगरों और किसानों के उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान किया। जीआईएस-भोपाल में 38 जिलों के विशिष्ट ओडीओपी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिला। जीआईएस-भोपाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओडीओपी को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त पहल बताया। उन्होंने कहा कि हर जिले का एक खास उत्पाद उसकी सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान बन सकता है। ओडीओपी कार्यक्रम से लोकल प्रोडक्ट्स को ग्लोबल ब्रांड बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस-भोपाल में ओडीओपी-एक्सपो से हमारे स्थानीय उत्पादों, विशेष रूप से हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहचान बनाने का अवसर मिला है। कला , हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों का हुआ सजीव प्रदर्शन एक्सपो में ओडीओपी के लिए विशेष स्टॉल लगाए गए, जिन्हें लाइव काउंटर और प्रोसेस काउंटर में विभाजित किया गया। लाइव काउंटर में बाग प्रिंट, जरी जरदोजी, बटिक प्रिंट, कालीन, चंदेरी साड़ी, बांस, बलुआ पत्थर और कपड़े की जैकेट जैसे आठ प्रमुख उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया को कारीगरों ने लाइव प्रदर्शित किया। जीआईएस-भोपाल में आयोजन के दौरान विदेशी निवेशकों और उद्योगपतियों ने स्थानीय कारीगरों के हुनर को करीब से देखा और उनकी कार्यशैली को समझा। एक्सपो के ‘कुम्हार पुरा’ और ‘टेक्निकल ज़ोन’ के लाइव काउंटर भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र बने रहे।  खाद्य और कृषि उत्पादों को मिली नई पहचान ओडीओपी-एक्सपो में खाद्य, मसाले और फलों से जुड़े 38 जिला विशिष्ट उत्पादों को उनके निर्माण प्रक्रिया के साथ प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों की खरीद और निर्यात के अवसर भी उपलब्ध कराए गए। साथ ही, निवेशकों ने विशिष्ट उत्पादों के सेंपल लिए, जिससे भविष्य में व्यापारिक संबंध स्थापित होने की संभावना बढ़ी। मध्यप्रदेश के विशिष्ट ओडीओपी उत्पाद मध्यप्रदेश में ओडीओपी के तहत विभिन्न जिलों के पारंपरिक, वस्त्र और कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इनमें बुरहानपुर का केला, ग्वालियर के आलू आधारित उत्पाद और स्टोन टाइल्स, खरगोन की मिर्च उत्पाद, मंदसौर के लहसुन उत्पाद, नीमच के धनिया उत्पाद, सतना के टमाटर आधारित उत्पाद, मुरैना की गजक और सरसों उत्पाद, इंदौर के आलू आधारित उत्पाद, भोपाल के अमरूद उत्पाद, चंदेरी की साड़िया, महेश्वर की साड़ियां और हथकरघा उत्पाद, टीकमगढ़ के मिट्टी शिल्प और हस्तशिल्प उत्पाद और धार के बाग प्रिंट शामिल है। राज्य के इन उत्पादों को मिला है जीआई टैग बाग प्रिंट, बालाघाट का चिन्नौर चावल, दतिया और टीकमगढ़ बेल धातु का कार्य, चंदेरी साड़ी, गोंड पेन्टिंग, ग्वालियर के हैन्डमेड कारपेट, जबलपुर का पत्थर शिल्प, झाबुआ का कड़कनाथ, इंदौर के चमड़े के खिलौने, माहेश्वरी की साड़ी, मुरैना की गजक, रतलामी सेव, रीवा का सुन्दरजा, उज्जैन का बटिक प्रिंट, सीहोर का शरबती गेहूँ, वारासिवनी की हेण्डलूम साड़ी, डिण्डोरी के मेटल वर्क को जीआई टैग मिला है। एक्सपो में हुआ निवेशकों और स्थानीय उद्यमियों में संवाद एक्सपो में निवेशकों और स्थानीय उद्यमियों के बीच संवाद का अवसर मिला, जिससे प्रदेश के कारीगरों और उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने की नींव रखी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा "विदेशी निवेशकों से हुए मेल-मिलाप ने प्रदेश के उत्पादों को ग्लोबल व्यावसायिक मंच देने की आधारशिला रखी गई है।" जीआईएस, भोपाल में ओडीओपी-एक्सपो ने यह साबित कर दिया कि मध्यप्रदेश के पारंपरिक उत्पादों में वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है। यह आयोजन स्थानीय उत्पादों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।   recent visitors 33

भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का विस्तार अब वर्ष 2028-29 तक कर दिया गया

उत्तर बस्तर कांकेर भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का विस्तार अब वर्ष 2028-29 तक कर दिया गया है, इसके तहत सर्वे का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत नए पात्र हितग्राहियों के चयन हेतु सर्वे का कार्य प्रारंभ हो गया है। उन्होंने बताया कि इसमें ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा, जिनके नाम वर्ष 2011 और 2018 की सर्वे सूची से छूट गए हैं। सीईओ श्री मंडावी ने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों का सर्वेक्षण आवास प्लस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक तथा आवास मित्रों को प्रगणक के तौर पर नियुक्त किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि कोई पात्र परिवार सर्वे से छूट जाता है तो वे अपने ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक तथा आवास मित्र से सम्पर्क कर सर्वे का कार्य पूर्ण करा सकते हैं। जिला सीईओ ने बताया कि आवास प्लस 2024 सर्वे के लिए आवेदक स्वयं अपना पंजीयन करा सकते हैं। इसके लिए किसी भी एंड्रायड मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर का उपयोग करके  AawaasPlus 2024  नामक एप को डाउनलोड किया जा सकता है। पीएमएवाय की पात्रता के लिए निर्धारित मापदंड :- प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण हेतु सर्वे कार्य प्रारंभ हो चुका है, इसके लिए परिवार/हितग्राही की पात्रता के लिए शासन द्वारा निर्धारित मापदंड इस प्रकार हैं- परिवार/हितग्राही के पास मोटरयुक्त तिपहिया/चौपहिया वाहन न हो। मशीनीकृत तिपहिया/चौपहिया कृषि उपकरण न हो। 50 हजार रूपए अथवा इससे अधिक ऋण सीमा वाले किसान क्रेडिट कार्ड न हो। ऐसे परिवार जिनका कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी न हो, सरकार के पास पंजीकृत गैर कृषि उद्यम वाले परिवार न हो। ऐेसे परिवार जिनका कोई सदस्य 15 हजार रूपए से अधिक प्रतिमाह न कमा रहा हो। आयकर देने वाले परिवार न हो, व्यवसाय कर (टैक्स) देने वाले परिवार न हो। साथ ही ऐसे परिवार जिनके पास 2.5 एकड़ या इससे अधिक सिंचित भूमि न हो तथा वे परिवार जिनके पास 05 एकड़ या इससे अधिक असिंचित भूमि नहीं होना चाहिए। recent visitors 26

हाईकोर्ट का आदेश बिना मान्यता के छात्रों को एडमिशन देने वाली यूनिवर्सिटी-कॉलेज पर केस दर्ज करो

जबलपुर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के अंतर्गत सेंट्रल लॉ कॉलेज के छात्रों को मान्यता न होने के चलते बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन ना होने के मामले में अब कॉलेज सहित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय पर भी गाज गिर सकती है। हाईकोर्ट ने इसे छात्रों के साथ धोखाधड़ी करार देते हुए भोपाल कमिश्नर को जांच के लिए आदेशित किया है। बार काउंसिल में एनरोलमेंट ना होने का मामला जबलपुर हाईकोर्ट में व्योम गर्ग,रागिनी गर्ग, शिखा पटेल एवं अन्य के ने स्टेट वॉर काउंसिल में होने वाले स्टूडेंट्स के एनरोलमेंट नहीं किए जाने पर याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में बताया कि स्टेट वॉर काउंसिल और यूनिवर्सिटी ने एफिलेटेड कॉलेज से लॉ की डिग्री प्राप्त किए जाने के बावजूद भी एनरोलमेंट नहीं किए। साथ ही याचिकार्ताओं ने हाईकोर्ट से मामले में दखल दिए जाने की गुहार लगाई। कोर्ट के द्वारा पिछली सुनवाई के दौरान लगाई गई थी फटकार इस याचिका में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की मुख्य बेंच ने राज्य सरकार को याचिका में मौजूद कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी समेत उन सभी कॉलेजों पर जो बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं उन पर कार्रवाई कर उसकी रिपोर्ट को अगली सुनवाई में पेश करने के निर्देश दिए गए थे। जिस पर राज्य सरकार के द्वारा रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने फटकार लगाई। राज्य सरकार में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना का नोटिस भी कोर्ट ने जारी किया। राज्य सरकार ने अपना पल्ला झाड़ा इस याचिका में हुई पूर्व की सुनवाई में सभी प्रतिवादियों की ओर से जवाब दाखिल किया गए। जिसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा कॉलेज(सेंट्रल इंडिया लॉ कॉलेज) के द्वारा मान्यता शुल्क न दिए जाने की वजह से उसे मान्यता नहीं दिए जाने की बात कही गई है। जिस पर सरकार की तरफ से कोर्ट में बताया गया कि इस पूरे मामले में संबंधित यूनिवर्सिटी के द्वारा गलती की गई है। यूनिवर्सिटी ने कॉलेज का वेरिफिकेशन क्यों नहीं किया। जिस पर यूनिवर्सिटी ने यह तर्क दिया गया की बार काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा 2021-22 के लिए जारी कॉलेज की सूची में इस कॉलेज को व्यक्तिगत तौर पर अमान्य नहीं बताया गया था। कोर्ट ने बताया एडमिनिस्ट्रेटिव फैलियर अमान्य घोषित नहीं होने की वजह से इसे पोर्टल पर अपलोड किया गया और कॉलेज के द्वारा खुद को एफिलेटेड बताते हुए बच्चों के एडमिशन किए जाने का जवाब कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के द्वारा सभी तर्कों के आधार पर इस पूरे मामले को एडमिनिस्ट्रेटिव फैलियर माना। हालांकि फिर भी राज्य की तरफ से खुद को गलत ना ठहराते हुए मामले से पल्ला झाड़ता की कोशिश की गई। चीफ जस्टिस की बेंच ने की सुनवाई इस याचिका पर सुनवाई चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने की। जिसमें सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आए कि नियम अनुसार नए कॉलेजों को प्रोविजनल मान्यता 3 सालों के लिए एवं रेगुलर कॉलेज को यह मान्यता 5 सालों के लिए दी जा सकती है। इसके बाद भी वार काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा कई मामलों में 20 साल बाद भी पूर्वाधार पर मान्यता दी गई है। जिसे कोर्ट ने छात्रों के साथ सीधी तौर पर धोखाधड़ी बताया। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कोर्ट में वीसी के माध्यम से प्रस्तुत हुए उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन को भी कोर्ट ने फटकार लगाई। भोपाल कमिश्नर को जांच के आदेश कोर्ट ने कहा कि अब तक आप लोग क्या कर रहे थे। इसके साथ ही को कोर्ट ने भोपाल कमिश्नर को इस मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं और इस जांच में बार काउंसिल को भी भोपाल कमिश्नर की पूरी सहायता करने साथ ही जांच की रिपोर्ट को कोर्ट के समक्ष दो हफ्तों में पेश किए जाने के निर्देश जारी करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को तय की गई है। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज सहित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय पर भी आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है। recent visitors 43

Immigration and Foreigners Bill : अवैध अप्रवास रोकने के लिए सरकार ने नया विधेयक…

नई दिल्ली घुसपैठ और अवैध अप्रवास रोकने के लिए लाेकसभा में मंगलवार को अप्रवासन और विदेशी विधेयक 2025 पेश किया गया है। अमित शाह की तरफ से गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा कि किसी को देश में आने से रोकने के लिए यह बिल नहीं लाया गया है, बल्कि यह विधेयक इसलिए लाया गया है कि विदेशी भारत आएं। वे यहां के नियमों का पालन करके ही आएं। हालांकि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और टीएमसी सांसद सौगत राय ने बिल का विरोध किया है। Immigration and Foreigners Bill 2025 का क्या है उम्मीद इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य भारत के इमिग्रेशन नियमों को आधुनिक बनाना और उन्हें मजूबत करना है। यह बिल भारत में दाखिल होने और यहां से बाहर जाने वाले व्यक्तियों के संबंध में पासपोर्ट या बाकी यात्रा दस्तावेजों की जरूरतों और विदेशियों से संबंधित मामलों को रेगुलेट करने की शक्तियां केंद्र सरकार को देगा। इनमें वीजा और रजिस्ट्रेशन की जरूरत और उससे संबंधित मामलों को शामिल किया गया है। इमिग्रेशन से जुड़ा यह विधेयक देश की सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम है। इस विधेयक में कानूनी स्थिति साबित करने की जिम्मेदारी राज्य के बजाय व्यक्ति पर डाल दी गई है। यह विधेयक स्पष्ट रूप से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता या अखंडता के लिए खतरा माने जाने वाले किसी भी विदेशी नागरिक के प्रवेश या निवास पर पाबंदी लगाता है। साथ ही अनिवार्य करता है कि सभी विदेशी आगमन पर रजिस्ट्रेशन करें और उनकी आवाजाही, नाम परिवर्तन और संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्रों में उनकी एंट्री पूरी तरह बैन हो। इसके अलावा, शैक्षणिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और नर्सिंग होम जैसी संस्थाओं को इमिग्रेशन ऑफिसर को विदेशी नागरिकों की मौजूदगी की जानकारी देनी पड़ेगी। इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन के लिए सख्त सजा का भी प्रावधान प्रस्तावित कानून में इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन के लिए सख्त सजा का भी प्रावधान किया गया है। वैध पासपोर्ट या वीज़ा के बिना भारत में अवैध रूप से एंट्री करने पर पांच साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करने वालों को दो से सात साल तक जेल और एक लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। निर्धारित समय से अधिक समय तक रहना, वीजा शर्तों का उल्लंघन करना या प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने जैसे अपराधों के लिए तीन साल तक की कैद, 3 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। बिना उचित दस्तावेज के व्यक्तियों को लाने और ले जाने वाले ट्रांसपोर्ट को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और भुगतान न करने पर उनके वाहन जब्त किए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में जहां किसी विदेशी को प्रवेश से वंचित किया जाता है। ट्रांसपोर्टर पर उनके तत्काल प्रस्थान को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी। विधेयक में आव्रजन अधिकारियों को ज्यादा शक्तियां भी दी गई हैं। जिसमें बिना वारंट के व्यक्तियों को गिरफ्तार करने का अधिकार तक शामिल है। केंद्र सरकार के पास विदेशी नागरिकों के आवाजाही को लेकर इस कानून के बाद ज्यादा अधिकार आएंगे। इसमें प्रस्थान को रोकने, प्रवेश को प्रतिबंधित करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच को प्रतिबंधित करने की पावर शामिल है। विदेशी नागरिकों को अपने खर्च पर भारत से बाहर निकलना होगा। पहचान के उद्देश्य से बायोमेट्रिक डेटा देना होगा।     प्रस्तावित कानून विदेशी अधिनियम 1946     भारत में प्रवेश के लिए पासपोर्ट अधिनियम 1920     विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939     आव्रजन यानी वाहक दायित्व अधिनियम 2000 समेत कई औपनिवेशिक युग के कानूनों को बदलने की कोशिश है। ये कानून, मूल रूप से विश्व युद्ध के समय युद्धकालीन परिस्थितियों के लिए बनाए गए थे, अब पुराने हो चुके हैं। सरकार ने तर्क दिया कि आव्रजन नियमों को आधुनिक बनाने और गैर जरूरी प्रावधानों को खत्म करने के लिए एक एकीकृत कानून की जरूरत है। गृह राज्य मंत्री ने भी बिल पेश करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह बिल की पूरी तरह संवैधानिक है और सातवीं अनुसूचि में यह विषय आता है। भारत में प्रवेश और निष्कासन विषय के तहत यह बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिहाज से यह बिल बहुत जरूरी है। राय ने कहा कि हम किसी को रोकने के लिए यह बिल नहीं ला रहे बल्कि जो लोग आएं वे भारत के कानून का पालन करें। इसके लिए यह बिल ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी के अस्पताल या फिर शैक्षणिक परिसर में जाने से पहले उसकी जानकारी अब भी मुहैया कराई जाती थी। लेकिन अब तक प्रावधान आदेश के रूप में था। जिसे कानून के रूप में लाया जा रहा है। नित्यानंद राय की ओर से बिल पेश करने के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह मूलभूत अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान के मुताबिक नहीं है और इसमें विदेशी नागरिकों के अस्पताल में भर्ती होने तक का ब्यौरा मांगा गया है जो कि मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है। तिवारी ने मांग करते हुए कहा कि इस बिल को वापस लिया जाए या फिर जेपीसी के पास भेजा जाए।   recent visitors 42

होर्डिंग लगाकर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के खिलाफ FIR दर्ज!

नई दिल्ली दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को झटका देते हुए होर्डिंग लगाने के लिए कथित तौर पर पब्लिक मनी के दुरुपयोग के मामले में FIR दर्ज करने आदेश दे दिया है. बताया जा रहा है कि होली के बाद केजरीवा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी. राउज एवेन्यू कोर्ट ने साल 2019 में द्वारका में बड़े होर्डिंग लगाकर कथित तौर पर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में ये स्पष्ट किया कि केजरीवाल और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बनता है. पुलिस को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 156(3) CRPC के तहत याचिका मंजूर की जाती है. कोर्ट ने द्वारका साउथ पुलिस को इस मामले मे FIR दर्ज कर 18 मार्च तक SHO को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. क्या है मामला दरअसल, 2019 में कोर्ट के समक्ष दाखिल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि केजरीवाल, पूर्व आप विधायक गुलाब सिंह और द्वारका की पार्षद नितिका शर्मा ने इलाके में विभिन्न जगहों पर बड़े आकार के होर्डिंग लगाकर जानबूझकर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया है. इसके बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने सितंबर 2022 में शिकायत को खारिज करते हुए एक आदेश पारित किया था. इसके बाद सत्र न्यायाधीश ने मामले को मजिस्ट्रेट अदालत में वापस भेज दिया था. इस मामले में विशेष न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट अदालत से मामले की नए सिरे से सुनवाई करने को कहा था.   recent visitors 51

फेस्टिवल सीजन के बीच सरकारी अवकाश के चलते कर्मचारियों के लिए होली का उत्साह दोगुना हो जाएगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में होली के साथ आने वाले दिनों में लगातार सरकारी छुट्टियां(Government Holiday) रहेगी। यह अवकाश शनिवार, रविवार के आसपास आ रहे हैं, ऐसे में वर्किंग डे के दौरान एक दो दिन का अवकाश लेकर कर्मचारी लगातार पांच से सात दिन की छुट्टियां मना सकते हैं। लगातार अवकाश के चलते मार्च-अप्रेेल में वर्किंग डे कम रहेंगे, ऐसे में सरकारी कामकाज को लेकर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। एक तरह से यह होली कर्मचारियों के लिए स्पेशल होली के रूप में रहेगी। कर्मचारियों को 13 सीएल और 3 एच्छिक अवकाश पूरे साल में शनिवार, रविवार के अलावा सरकारी कर्मचारियों को 13 सीएल और 3 ऐच्छिक अवकाश मिलते हैं। इस पूरे साल में 68 एच्छिक अवकाश घोषित किए गए है, इसमें से कर्मचारी तीन अवकाश अपनी सुविधा अनुसार ले सकते हैं। शनिवार और रविवार का शासकीय अवकाश फेस्टिवल सीजन के बीच सरकारी अवकाश के चलते कर्मचारियों के लिए होली का उत्साह दोगुना हो जाएगा। इस बार धुलेंडी पर्व 14 मार्च शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसके बाद शनिवार और रविवार का शासकीय अवकाश होगा। इसके बाद दो दिन वर्किंग डे रहेगा और 19 को फिर रंगपंचमी का स्थानीय अवकाश रहेगा। ऐसे में दो दिन की छुट्टी लेकर कर्मचारी पूरे एक सप्ताह तक छुट्टियां ले सकते हैं। इसी प्रकार मार्च में ही 29 से 31 तक फिर छुट्टियां रहेगी। 29 और 30 को शनिवार, रविवार इसके बाद 31 मार्च को हिंदू नववर्ष, चैतीचांद का अवकाश रहेगा। दूसरी ओर होली को लेकर कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। 16 मार्च को रविवार के कारण चार दिन का अवकाश मिलेगा।     13 मार्च (March 13 Holiday) होलिका दहन ऐच्छिक अवकाश     14 मार्च (March 14 Holiday)धुलेंडी अवकाश     15 मार्च (March 15 Holiday)शनिवार     16 मार्च (March 16 Holiday)रविवार     19 मार्च (March 19 Holiday)बुधवार रंग पंचमी वीकेंड अवकाश मार्च के बाद अप्रेल में भी फेस्टिवल सीजन में छुट्टियों की सौगात रहेगी। 10 अप्रेल को महावीर जयंती मनाई जाएगी, इसके अगले दिन शुक्रवार को वर्किंग डे होगा। इसके बाद शनिवार, रविवार के बाद सोमवार को भी आंबेडकर जयंती का अवकाश रहेगा। ऐसे में शुक्रवार का अवकाश लेकर कर्मचारी लगातार पांच दिन छुट्टियां मना सकते हैं। इसके बाद 18 अप्रेल को गुड फ्रायडे और अगले दिन भी शनिवार और रविवार रहेगा। recent visitors 60