आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमत में भी बड़ी गिरावट आएगी : एक्सपर्ट

नई दिल्ली  कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। यह अक्टूबर के बाद पहली बार हुआ है जब तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। विदेशी बाजारों में कमजोर मांग को देखते हुए कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। अभी कई संकेत और ऐसे मिल रहे हैं जिनसे पता चलता है कि कच्चे तेल की कीमत में और कमी आ सकती है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत भी गिर सकती है। बुधवार को तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.3 फीसदी गिरकर 70.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.9 फीसदी गिरकर 67.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को फायदा हो सकता है। और कम हो सकती है कच्चे तेल की कीमत दुनियाभर में ऐसे कई संकेत मिल रहे हैं जिनके चलते आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत और कम हो सकती है। तीन मुख्य संकेत इस प्रकार हैं: 1. रूस पर लगे बैन में ढील इस समय अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने पर लगा है। ऐसे में अमेरिका ने रूस पर जो बैन लगाए हैं, उनमें वह कुछ ढील दे सकता है। अमेरिका ने विदेश और वित्त मंत्रालयों से उन बैन की लिस्ट तैयार करने को कहा है जिनमें रूस को ढील दी जा सकती है। ऐसा होने पर रूस की ओर से तेल की सप्लाई बढ़ सकती है। ऐसे में तेल की कीमत में कमी आ सकती है। 2. OPEC+ ने बढ़ाया प्रोडक्शन OPEC+ ने अपने तेल प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला लिया है। रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक OPEC+ ने अप्रैल में तेल प्रोडक्शन को 138,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। ऑयल प्रोडक्शन में यह वृद्धि साल 2022 के बाद पहली बार हो रही है। OPEC+ ग्रुप का कहना है कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ओपेक और सऊदी अरब पर कीमतें कम करने के लिए दबाव बढ़ाने के बाद उठाया गया है। 3. ट्रंप के टैरिफ का भी पड़ेगा असर डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। जानकारों के मुताबिक ये टैरिफ ग्लोबल इकोनॉमिक एक्टिविटी और फ्यूल डिमांड को प्रभावित कर सकते हैं। इसके चलते तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। यानी इसकी कीमत कम हो सकती है। क्या कम होगी पेट्रोल-डीजल की कीमत? कच्चे तेल की कीमत कम होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय तेल कंपनियां भी इस बारे में कुछ निर्णय ले सकती हैं। चूंकि अभी कच्चे तेल की कीमत कम हो चुकी है और आने वाले समय में इसमें और गिरावट के संकेत हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत में भी कमी आ सकती है। हो सकता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में बड़ी गिरावट आए। अगर ऐसा होता है तो इससे देश में महंगाई पर भी कुछ काबू पाया जा सकता है। recent visitors 69

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- भगवान श्रीकृष्ण पाथेय के संदर्भ में मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार एकमत है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण पाथेय के संदर्भ में मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार एकमत है। हम राजस्थान सरकार के साथ मिलकर श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे। भगवान श्रीकृष्ण के गुजरात गमन पथ के विकास के लिए हम गुजरात सरकार से सहयोग लेकर इस दिशा में काम करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का ईश्वरीय स्वरूप तो स्तुत्य है ही, हमारी सरकार उनके दूसरे महत्वपूर्ण पक्षों को भी समाज के समक्ष प्रकाश में लाएगी। इसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उज्जैन में शिक्षा ग्रहण करना, सुदामा से मित्रता निभाना, वनवासी से प्रेम और गुरू-शिष्य परम्परा की मिसाल कायम करने जैसे प्रसंग शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को (समत्व भवन) मुख्यमंत्री निवास में श्रीकृष्ण पाथेय के संबंध में विषय विशेषज्ञ समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए सभी समितियों को सक्रिय किया जाए। पुरातत्वविदों, धर्माचार्यों एवं भगवान श्रीकृष्ण साहित्य के अच्छे लेखकों को भी इस समिति में जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए भोपाल में आयोजित इस बैठक के अलावा उज्जैन और राजस्थान के जयपुर या भरतपुर या ब्रज या चौरासी कोस या अन्य किसी विशिष्ट स्थल पर समिति बैठकें की जाएं। इससे दोनों राज्यों में श्रीकृष्ण पाथेय के लिए सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुरा इतिहास में भगवान श्रीकृष्ण का भारत देश (जम्बूद्वीप) के कई क्षेत्रों में आवागमन का उल्लेख मिलता है। समिति भगवान श्रीकृष्ण के उन सभी गमन स्थलों को चिन्हित कर इनका अभिलेखीकरण करें। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम को श्रीकृष्ण पाथेय के विकास एवं विस्तार के लिए केन्द्र बिन्दु बनाया जा सकता है। बैठक में समिति के सदस्यों द्वारा बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा लोक कल्याण के लक्ष्य पूर्ति के लिए यद्यपि मथुरा, उज्जैन, द्वारिका, ब्रज मंडल, मेवात, हाड़ौत, मालवा, निमाड़, गुजरात, राजस्थान, विदर्भ, महाराष्ट्र के अनेक क्षेत्रों की यात्राएं की गईं, तथापि उनकी यात्रा का प्रमुख केन्द्र उज्जैन ही रहा था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक त्यौहारों में सरकार की सहभागिता बढ़ी है। हमने दशहरे में शस्त्र पूजा, दीपावली पर गोवर्धन पूजा और हाल ही में गीता जयंती भी मनाई है। प्रदेश के 17 पवित्र/धार्मिक शहरों में हमने शराबबंदी लागू करने का निर्णय ले लिया है। इससे समाज में एक अच्छे संदेश का संचार हुआ है। बैठक में समिति के सदस्यों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव रखे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार श्रीकृष्ण पाथेय के लिए फोकस्ड होकर काम करेगी। भविष्य में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी अन्य लीलाओं को भी हम इस कार्य से जोड़ेंगे। बैठक में समिति के वरिष्ठ सदस्य राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्री ओंकार सिंह लखावत, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के पूर्व निदेशक पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार डॉ. श्रीराम तिवारी, उज्जैन के डॉ. शैलेन्द्र शर्मा, डॉ. रमन सोलंकी सहित अन्य सभी सदस्यगण, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव श्री संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिवशेखर शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। कमिश्नर और कलेक्टर उज्जैन ने भी बैठक में वर्चुअली सहभागिता की। recent visitors 77

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- आयोग ने कहा मध्यप्रदेश का भविष्य है सुरक्षित हाथों में

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्यों के सशक्तिकरण में ही राष्ट्र का सशक्तिकरण है, इसलिए केन्द्रीय करों और राजस्व प्राप्तियों में राज्यों की हिस्सेदारी अर्थात् अनुदान बढ़ाया जाना चाहिए। राज्य अपनी क्षमता और सीमित संसाधनों से ही अपने लक्ष्यों की पूर्ति के लिए काम करते हैं। केन्द्र सरकार से अधिक वित्तीय अनुदान मिलने से राज्य अपने दीर्घकालीन लक्ष्यों को अल्पकाल में ही प्राप्त कर सकेंगे। विकसित भारत का निर्माण, विकसित मध्यप्रदेश के बिना नहीं हो सकता, इसलिए केन्द्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत से बढ़ाकर 48 प्रतिशत तक की जाए। इससे राज्य सशक्त होंगे और राष्ट्र को विकास की ले जाने में सहायक होंगे। डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश एक बड़ा राज्य है, इसलिए इसकी जरूरतें भी बड़ी हैं। लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना ही केन्द्र और राज्य सरकारों का लक्ष्य है। केन्द्र और राज्यों के बेहतर तालमेल और आपसी सामंजस्य से यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आयोग के राज्य के दीर्घकालिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता का जिक्र कर वित्त आयोग से प्रदेश की अपेक्षाओं से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक प्रगतिशील राज्य है। प्रदेश कृषि, अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, पर्यटन, नगरीय विकास और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में और अधिक विकास के लिए केन्द्र सरकार से और अधिक वित्तीय सहयोग/अनुदान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत में मध्यप्रदेश को भी योगदान देना है। हम विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभी हमारा बजट करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रूपए है। अगले पांच सालों में हम इस बजट को बढ़ाकर दोगुना कर देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्त आयोग से कहा कि हम नदियों को जोड़कर जल बंटवारे के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो परियोजना में हमने राजस्थान के साथ मिलकर किया जा रहा हैं। केन्द्र सरकार ने इस राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के लिए 90 हजार करोड़ रूपए आवंटित किए। इसी तरह केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए उत्तरप्रदेश सरकार के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों राष्ट्रीय परियोजना का भूमि-पूजन कर मध्यप्रदेश को गौरव प्रदान किया है। अब महाराष्ट्र सरकार के साथ ताप्ती नदी परियोजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज से 20 साल पहले तक प्रदेश में केवल 7 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिचिंत थी, आज प्रदेश की 48 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को हम सिंचित कर चुके हैं। प्रदेश में नदी जोड़ो के लिए एक अभियान चला रहे हैं। किसानों के साथ हमारा आत्मीय संबंध है और खेतों तक पानी पहुंचाना हमारा पहला कर्तव्य है। हमारी नीतियों के कारण किसानों का जैविक खेती की ओर तेजी से रूझान बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी 18 नई औद्योगिक नीतियों के कारण निवेशक भी जुड़ रहे हैं। आरआईसी और जीआईएस-भोपाल के जरिए प्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। यह निवेशकों का मध्यप्रदेश पर बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। हम प्रदेश के हर जिला कलेक्ट्रेट में उद्योग प्रकोष्ठ बना रहे हैं, इससे किसी निवेशकों की जिला स्तर पर भी कठिनाई हल की जा सकेंगी। हम प्रदेश में व्यापार और व्यवसाय को सुगम बना रहे हैं। इसमें सभी का सहयोग लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश में हरसंभव तरीके से दूध उत्पादन को बढ़ावा देंगे। हमारी कोशिश है कि देश का 20 प्रतिशत से अधिक दूध मध्यप्रदेश में उत्पादित हो, इससे हमारे किसान और पशुपालक दोनों सम्पन्न होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा शक्ति की ऊर्जा का भरपूर उपयोग भी हम कर रहे हैं। पंचशील सिद्धांतों का पालन करते हुए जन, जल, जंगल, जमीन और जैविक विविधता का संरक्षण हमारा प्राथमिक लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि जंगल बचेंगे, तो जल बचेगा और जल बचेगा, तो जन-जीवन बचेगा। हम जैविक संपदा को संरक्षित रखने के लिए भी हर जरूरी प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अगले तीन सालों में 30 लाख किसानों को सोलर पम्प दिये जायेंगे। इससे हमारे किसान अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जादाता भी बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार किसानों को मात्र पांच रूपए में बिजली का स्थाई कनेक्शन देने जा रही है, इससे हमारे किसानों को बिजली कनेक्शन के लिए कहीं भी भटकना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्त आयोग को मध्यप्रदेश में बीते एक वर्ष में किए गए नवाचारों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने एयर एम्बुलेंस सेवा प्रारंभ की है। इससे बीते एक साल में कई गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कर बड़े अस्पतालों तक पहुंचाकर उनका जीवन बचाया गया। हमारी इस सेवा को बेहद अच्छा प्रतिसाद मिला है। recent visitors 65

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण 2.0 के लिए अब मोबाइल से करें अप्लाई, दुमका जिले में सर्वे हुआ प्रारंभ

दुमका प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण 2.0 (PM Awas Yojana) के लिए दुमका जिले में सर्वे प्रारंभ हो चुका है। आर्थिक तौर पर कमजोर तबके को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए पीएम आवास योजना के तहत लाभुक को 1.20 लाख रुपये की लागत से पक्का मकान बनवाने की योजना है। पीएम आवास के नए सर्वे का इरादा 2024-25 से 2028-29 तक योजना के पात्र परिवारों को पक्के मकान मुहैया कराना है। झारखंड में 31 मार्च 2025 तक इस योजना के लिए नए लोग आवेदन कर सकते हैं। खास बात यह है कि पीएम आवास योजना के लिए अब लाभुक खुद भी मोबाइल एप से आवेदन कर सकते हैं। वैसे प्रशासनिक स्तर पर सर्वे करने की जिम्मेवारी ग्राम पंचायत के सचिव को दी गई है। इतना ही नहीं जिला व प्रखंड स्तर पर इसके सत्यापन के लिए कमेटियां भी गठित की गई है। जिनके पास मकान नहीं है उन्हें मिलेगी प्राथमिकता प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वैसे लाभुकों को प्राथमिकता मिलेगी जिनके पास मकान नहीं है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के परिवार जिनके पास मकान नहीं है उन्हें भी पीएम आवास में वरीयता दी जाएगी। इसके अलावा मिडिल और लोअर-मिडिल श्रेणी के लाभुकों को भी इसका फायदा मिलेगा। आवास प्लस ऐप से लाभुक कर सकते हैं खुद अप्लाई सबसे अच्छी खबर यह है कि अब लोग पीएम आवास के लिए खुद भी अपने मोबाइल से अप्लाई कर सकते हैं। राष्ट्रीय सूचना केंद्र ने एक मोबाइल ऐप तैयार किया है जिसका नाम है आवास प्लस। चूंकि अगले पांच सालों तक पात्र परिवारों को इस योजना के तहत पक्के मकान दिए जाने की योजना है, इसलिए ऐप के जरिए भी अब लाभुक अपना आवेदन कर सकते हैं। सर्वे का काम 31 मार्च 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार से इस योजना के लिए 2024-25 से 2028-29 तक के लिए मंजूरी दे दी गई है। ऐसे कर सकते हैं लाभुक खुद से अप्लाई प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए जरूरी शर्तों को पूरा करने वाले पात्र व्यक्ति खुद अपने मोबाइल से आवेदन कर सकते हैं। लाभार्थी को अपने स्मार्टफोन में आवास प्लस-2024 सर्वे व आधार फेस आइडी एप डाउनलोड करके इंस्टाल करना होगा। एक मोबाइल फोन से एक ही सर्वे किया जाए सकेगा। सर्वे के लिए लाभार्थी का आधार नंबर जरूरी है। यह है पीएम आवास के लिए प्राथमिकताएं पीएम आवास योजना में बेघर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों को प्राथमिकता मिलेगी। यानी जिन लोगों के पास रहने के लिए अपना घर नहीं है उन्हें पक्के घर बनाकर दिए जाएंगे। इसके बाद अन्य लाभार्थियों को घर मिलेंगे। यह है आवेदन के नियम अगर किसी किसान की केसीसी लिमिट 50 हजार से ज्यादा है तो वह योजना के लाभ के लिए अपात्र की श्रेणी में आएंगे। सर्वे में जिले के आवास विहीन और कच्चे घरों में रहने वाले पात्र परिवारों का नाम जोड़ा जाना है। इसके अलावा ऐसे लोग जिनके पास पक्के घर और -तीन पहिया या चार पहिया वाहन हैं, उन ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। मशीन वाले तीन पहिया और चार पहिया कृषि उपकरण रखने वालों को भी पीएम आवास योजना का फायदा नहीं मिल पाएगा। जिन लोगों के पास ढाई एकड़ सिंचित भूमि हैं, उन्हें भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। ढाई एकड़ या इससे ज्यादा सिंचित भूमि और 11.5 एकड़ या इससे ज्यादा असिंचित भूमि वाले किसान इस योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। इसके अलावा परिवार के किसी भी सदस्य के सरकारी नौकरी में होने, गैर कृषि उद्यम वाले परिवार भी आवास योजना के लाभ से वंचित रहेंगे। इनकम टैक्स व बिजनेस टैक्स देने वालों को भी इस योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा।   recent visitors 65

मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश, छात्रों को शारीरिक सजा देना दंडनीय अपराध होगा

भोपाल शिक्षक महोदय जी सावधान हो जाइए। अगर आपने बच्चों के सामने कड़क बनने की कोशिश की तो आपकी खटिया खड़ी हो सकती है। बच्चों से मारपीट के मामले में मध्यप्रदेश सरकार अब सख्त होती नजर आ रही है। प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में अब छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट या किसी भी तरह की शारीरिक सजा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अगर किसी शिक्षक या अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों ने ऐसी हरकत की तो उन पर कानूनी कार्रवाई हो जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए ऐसी हालत में कार्रवाई के लिए कहा है। साथ ही ऐसे मामलों की रिपोर्ट भी देने के लिए कहा गया है। आयोग की चिट्ठी के बाद एक्शन बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चिट्ठी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने यह दिशा निर्देश जारी किये हैं। आयोग ने इसको लेकर 4 फरवरी 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखा था। लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक रवीन्द्र कुमार सिंह की ओर से जारी निर्देश में अलग-अलग बातें लिखी गई हैं। इस मामले में सख्त एक्शन के निर्देश दिए जा रहे हैं। ऐसा करना दंडनीय अपराध होगा पत्र में लिखा है कि मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 की धारा 17 (1) में शारीरिक मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव पूरी तरह प्रतिबंधित है। साथ ही धारा 17 (2) के तहत ऐसा करना दंडनीय अपराध है। साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत शारीरिक दंड भी प्रतिबंधित है। इस कारण सभी जिलों में संचालित सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों को शारीरिक दंड देने की घटनाओं की त्वरित पहचान करने और इस तरह की स्थितियों पर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश इस पत्र में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को ये निर्देश भी दिए गए हैं कि किसी स्कूल या शिक्षक द्वारा शारीरिक दंड देने के मामले में तत्काल एक्शन लेकर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। recent visitors 59

इंदौर में मंदिरों के बाहर फिर दिखने लगा भिक्षुकों का जमावड़ा, अब भिक्षा मांगने और देने वाले पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा

इंदौर  इंदौर। इंदौर जिले में अब भिक्षा मांगने और देने वाले पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा। इसे लेकर दो जनवरी को जारी किया गया कलेक्टर का आदेश 28 फरवरी का समाप्त हो गया है। इसके बाद एक बार फिर भिक्षावृत्ति नजर आने लगी है। शनिवार, मंगलवार आदि विशेष दिनों में मंदिरों के बाहर भिक्षुकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। भिक्षा मुक्त इंदौर अभियान के तीसरे चरण में भिक्षा मांगने और देने वाले आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने आदेश जारी किया था। दो जनवरी से 28 फरवरी तक हुई सख्ती में तीन लोगों के खिलाफ भिक्षा देने और लेने पर प्रकरण दर्ज हो चुका है। देश-विदेश तक हुई सराहना भिक्षा मुक्त अभियान की सराहना देश-विदेश तक हो चुकी है। महिला व बाल विकास विभाग द्वारा भिक्षा मुक्त इंदौर अभियान की शुरुआत गत वर्ष की गई थी। पहले चरण में जागरूकता अभियान चलाकर भिक्षुकों को समझाइश दी गई। इसके बाद भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों का रेस्क्यू किया गया। इसमें 700 वयस्कों को सेवाधाम आश्रम भेजा गया है। वहीं भिक्षावृत्ति से जुड़े 60 से अधिक बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलवाया गया। अभियान में सख्ती बरतने के लिए कलेक्टर ने दो जनवरी से 28 फरवरी तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया था। इसमें भिक्षुकों को भिक्षा के रूप में कुछ भी देने पर और उनसे किसी तरह की सामग्री क्रय करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत प्रकरण दर्ज की बात कही गई थी। इसका असर यह हुआ कि इंदौर में भिक्षावृत्ति तकरीबन पूरी तरह से बंद हो गई थी। 28 लोग हो चुके सम्मानित इसी अभियान में प्रशासन ने नवाचार किया था। भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों की सूचना देने पर एक हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा भी हुई। इसके बाद प्रशासन को हर दिन काल आना शुरू हो गए। अब तक प्रशासन 28 लोगों को एक हजार रुपये देकर सम्मानित कर चुका है। भिक्षुकों की जानकारी देने वालों को मिले एक हजार रुपए इस अभियान में प्रशासन ने एक नवाचार भी किया। भिक्षावृत्ति से जुड़ी सूचना देने वालों को 1 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की गई, जिसके बाद प्रशासन को हर दिन इस तरह की सूचनाएं मिलने लगीं। अब तक 28 लोगों को प्रशासन ने इनाम देकर सम्मानित किया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी राम निवास बुधौलिया के अनुसार, इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर अब भी भिक्षावृत्ति की सूचना मिल रही है, जिन्हें तुरंत रेस्क्यू किया जा रहा है। भिक्षा मुक्त इंदौर अभियान की सराहना न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी हो चुकी है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पिछले वर्ष इस अभियान की शुरुआत की गई थी। पहले चरण में भिक्षुकों को समझाइश दी गई और उसके बाद उनके पुनर्वास के प्रयास किए गए। इस दौरान 700 वयस्क भिक्षुकों को सेवाधाम आश्रम भेजा गया, जबकि भिक्षावृत्ति से जुड़े 60 से अधिक बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाया गया।  28 फरवरी से खत्म हुई सख्ती इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने 2 जनवरी से 28 फरवरी तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया था। इसके तहत भीख मांगने और देने दोनों को अपराध माना गया और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत प्रकरण दर्ज करने का प्रावधान किया गया। इस सख्ती के चलते इंदौर में भिक्षावृत्ति लगभग पूरी तरह समाप्त हो गई थी। इस अवधि में तीन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई।  हालांकि, 28 फरवरी को आदेश समाप्त होने के बाद भी भिक्षुकों का रेस्क्यू जारी रहेगा। मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और व्यस्त बाजारों में भिक्षुकों की उपस्थिति दिख रही है। प्रशासन लगातार अभियान की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर फिर से सख्ती बरतने की संभावना जताई जा रही है। अभियान से जुड़ी बड़ी बातें     सूचना देने वाले 28 लोग हो चुके सम्मानित     60 से अधिक बच्चे भिक्षावृत्ति छोड़ शिक्षा से जुड़े     700 से अधिक भिक्षुकों का हो चुका है रेस्क्यू     400 से ज्यादा काल आ चुके भिक्षुकों की सूचना वाले   recent visitors 38

पीएम मोदी ने मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल मुखवा में पूजा-अर्चना की, कहा- 60-70 साल रहे खाली

देहरादून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को उत्तराखंड के उत्तरकाशी पहुंचे। यहां पीएम ने मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल मुखवा में पूजा-अर्चना की। इसके बाद पीएम ने हर्षिल में एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान अत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई ऐलान किए। पीएम ने चीन सीमा के उन दो गांवों को भी बसाने और वहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों की चर्चा की। पीएम ने कहा कि 1962 में चीन के हमले के बाद खाली कराए गए दोनों गांव 60-70 साल तक खाली रहे। पीएम मोदी ने कहा, 'देशवासियों को पता होगा, शायद नहीं पता होगा। 1962 में जब चाइना ने भारत पर आक्रमण किया तब दो गांव खाली करा दिए गए थे। 60-70 साल हो गए। लोग भूल गए, हम नहीं भूल सकते। हमने उन दो गांवों को फिर से बसाने का अभियान चलाया है। बहुत बड़ा पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।' पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या एक दशक में तेजी से बढ़ी है।' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए बारहमासी पर्यटन पर जोर दिया जिससे हर सीजन 'ऑन सीजन' रहे । प्रधानमंत्री ने कहा, 'अपने पर्यटन क्षेत्र को विविधतापूर्ण बनाना और उसे बारहमासी बनाना उत्तराखंड के लिए बहुत जरूरी है।' उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उत्तराखंड में पर्यटन के लिहाज से कोई भी सीजन 'ऑफ सीजन' न हो और हर सीजन 'ऑन सीजन' रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी पहाड़ों में मार्च, अप्रैल और जून में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं लेकिन उसके बाद इनकी संख्या कम हो जाती है। उन्होंने कहा, 'सर्दियों में होमस्टे और होटल खाली पड़े रहते हैं । यह असंतुलन उत्तराखंड में साल के एक बड़े हिस्से में आर्थिक सुस्ती ला देता है।' मोदी ने कहा कि अगर सर्दियों में देश-विदेश के लोग प्रदेश में आएं तो उन्हें उत्तराखंड की वास्तविक आभा मिलेगी और ट्रेकिंग और स्कींइंग उन्हें रोमांचित कर देगा। उन्होंने कहा कि सर्दियों में उत्तराखंड की धूप खास होती है जब मैदानी इलाकों में कोहरा होता है। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से भी अपील की कि सर्दियों में अपनी मीटिंग-कॉन्फ्रेंस उत्तराखंड में करें। recent visitors 52