नेशनल लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरण में करायें समझौता: ऊर्जा मंत्री

भोपाल आगामी शनिवार 8 मार्च 2025 को नेशनल लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरण को आपसी समझौतो से निराकृत किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे कानूनी काईवाई से बचने के लिए अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें।  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि धारा 135 के अंतर्गत अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण करने के लिये निम्न दाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 हॉर्स पॉवर भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।   लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। लोक अदालत में छूट नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी आवेदक को निर्धारित छूट के उपरांत शेष बिल आंकलित सिविल दायित्व एवं ब्याज की राशि का एकमुश्त भुगतान करना होगा। उपभोक्ता/उपयोगकर्ता को विचाराधीन प्रकरण वाले परिसर एवं अन्य परिसरों पर उसके नाम पर किसी अन्य संयोजन/संयोजनों के विरूद्ध विद्युत देयकों की बकाया राशि का पूर्ण भुगतान भी करना होगा। आवेदक के नाम पर कोई वैध कनेक्शन न होने की स्थिति में छूट का लाभ प्राप्त करने के लिये आवेदक द्वारा वैध कनेक्शन प्राप्त करना एवं पूर्व में विच्छेदित कनेक्शनों के विरूद्ध बकाया राशि (यदि कोई हो) का पूर्ण भुगतान किया जाना अनिवार्य होगा। नेशनल लोक अदालत में छूट आवेदक द्वारा विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग पहली बार किये जाने की स्थिति में ही दी जाएगी। विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग के प्रकरणों में पूर्व की लोक अदालत/अदालतों में छूट प्राप्त किये उपभोक्ता/उपयोगकर्ता छूट के पात्र नहीं होंगे। सामान्य बिजली बिलों में जुड़ी बकाया राशि पर कोई छूट नहीं दी जाएगी।  नेशनल लोक अदालत में दी जा रही छूट आंकलित सिविल दायित्‍व राशि 10 लाख रूपये तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘ 8 मार्च 2025 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी।   recent visitors 47

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने बाल्यकाल में प्रदेश के ओंकारेश्वर में आकर निवास किया

महाकाल लोक परिसर की तरह एकात्म धाम का करें विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ओंकारेश्वर अंचल के समग्र विकास के लिए समय-सीमा में कार्य करें पूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने बाल्यकाल में प्रदेश के ओंकारेश्वर में आकर निवास किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने बाल्यकाल में प्रदेश के ओंकारेश्वर में आकर निवास किया। उनके दर्शन और शिक्षाओं को आज भी प्रासंगिक माना जाता है। सम्पूर्ण समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करने वाले आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा ओंकारेश्वर में स्थापित है। प्रतिमा स्थल सहित सम्पूर्ण ओंकारेश्वर के समग्र विकास के लिए सभी आवश्यक कार्य सम्पन्न किए जाएं। सिंहस्थ : 2028 तक ओंकारेश्वर भी उज्जैन की तरह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र बने, इस दिशा में सभी प्रयास किए जाएं। यह स्थान प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केन्द्र है। उन्होंने कहा कि एकात्म धाम ओंकारेश्वर में शिव पंचायतन मंदिर परिसर का विकास महाकाल लोक की तरह किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) के सभाकक्ष में एक बैठक में एकात्म धाम, ओंकारेश्वर के विकास के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग द्वारा तैयार प्रजेंटेशन भी देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ओंकारेश्वर में सुविधाओं के विकास से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और अन्य पर्यटकों की संख्या निश्चित ही बढ़ेगी। नागरशैली में अयोध्या के राम मंदिर की तरह इस आस्था स्थल में मंदिर का निर्माण प्रदेश की विशेष पहचान में सहायक होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एकात्म धाम और क्षेत्र में आने-जाने के सुविधाजनक मार्गों के निर्माण और प्रस्तावित रोप-वे की व्यवस्था के लिए समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण किया जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ला, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, पर्यटन विकास निगम के प्रबंध संचालक इलैयाराजा टी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 32

आवासीय संपत्तियों का बाजार उछाल पर बना हुआ, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में 12 प्रतिशत की वृद्धि

नईदिल्ली केयरएज रेटिंग्स द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंडिविजुअल हाउसिंग फाइनेंस मार्केट, जिसका वर्तमान मूल्य 33 लाख करोड़ रुपये है, वित्त वर्ष 25-30 के बीच 15-16 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर 77-81 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। आवासीय संपत्तियों का बाजार उछाल पर बना हुआ है केयरएज रेटिंग्स का मानना ​​है कि यह वृद्धि मजबूत संरचनात्मक तत्वों और अनुकूल सरकारी प्रोत्साहनों की वजह से देखी जाएगी, जिससे ‘हाउसिंग फाइनेंस’ ऋणदाताओं के लिए एक आकर्षक परिसंपत्ति वर्ग बन जाएगा। इसमें कहा गया है कि आवासीय संपत्तियों का बाजार उछाल पर बना हुआ है, जो हाउसिंग फाइनेंस इंडस्ट्री का एक प्रमुख चालक है, जो 2019 से 2024 तक 4.6 लाख यूनिट तक 74 प्रतिशत की वृद्धि देख रहा है। जबकि, 2024 में बिक्री प्रदर्शन सामान्य हो गया। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में 12 प्रतिशत की वृद्धि वित्त वर्ष 2021-24 के दौरान, बैंकों ने हाउसिंग लोन स्पेस में 17 प्रतिशत की सीएजीआर से वृद्धि की है, जबकि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, बैंकों ने हाउसिंग लोन मार्केट ने 31 मार्च, 2024 तक 74.5 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ अपना दबदबा बनाए रखा है। केयरएज रेटिंग्स का मानना ​​है कि हाउसिंग फाइनेंस मार्केट की विकास क्षमता को देखते हुए बैंकों और एचएफसी दोनों के पास बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह है। 31 मार्च, 2024 तक एचएफसी की बाजार हिस्सेदारी लगभग 19 प्रतिशत पर स्थिर थी और यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है। केयरएज रेटिंग्स के 12-14 प्रतिशत विकास अनुमान के अनुरूप वित्त वर्ष 24 में, एचएफसी का लोन पोर्टफोलियो 13.2 प्रतिशत बढ़कर 9.6 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो केयरएज रेटिंग्स के 12-14 प्रतिशत के विकास अनुमान के अनुरूप है। वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के लिए, केयरएज रेटिंग्स ने मजबूत इक्विटी प्रवाह और पूंजी भंडार द्वारा क्रमशः 12.7 प्रतिशत और 13.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि की उम्मीद की है। एचएफसी 30 लाख रुपये से कम के टिकट साइज में काम करती हैं रिटेल सेगमेंट एचएफसी के लिए प्राथमिक विकास चालक बना हुआ है, जबकि थोक क्षेत्र में सतर्क वृद्धि देखी गई है। केयरएज रेटिंग्स की एसोसिएट डायरेक्टर गीता चैनानी ने कहा, “एचएफसी मुख्य रूप से 30 लाख रुपये से कम के टिकट साइज में काम करती हैं, जो मार्च 2024 तक कुल एयूएम का 53 प्रतिशत था। हालांकि, 30-50 लाख रुपये के बीच के टिकट साइज वाले एयूएम के अनुपात में 23 प्रतिशत से 27 प्रतिशत की क्रमिक वृद्धि हुई है और 31 मार्च से 30 सितंबर, 2024 के बीच 30 लाख रुपये से कम एयूएम के अनुपात में गिरावट आई है।” डीप- टेक इनोवेशन से भारत को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में मिलेगी मदद भारत 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर बड़े मान से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही देश सॉफ्टवेयर-लेड टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम से डीप-टेक इनोवेशन द्वारा संचालित इकोसिस्टम- स्ट्रक्चरल बदलाव के दौर से भी गुजर रहा है। गुरुवार को आई एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। थ्रीवनफोर कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार समर्थित पहल जैसे 10,000 करोड़ रुपये के ‘फंड ऑफ फंड्स’, भारत के सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) और नेशनल डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी (एनडीटीएसपी) फ्रंटियर टेक इनोवेशन और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए कमिटमेंट को दर्शाती हैं। भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर डिजाइन स्पेस में एक प्रमुख प्लेयर है, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों, लगभग 125,000 पेशेवरों को रोजगार देता है। राष्ट्रीय शोध कार्यक्रम, विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर और कॉर्पोरेट आरएंडडी निवेश टैलेंट रिटेंशन और विकास को मजबूत कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि रणनीतिक कौशल निर्माण के साथ भारत शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और उद्यमियों की एक मजबूत पाइपलाइन द्वारा समर्थित तकनीकी विकास सुनिश्चित कर रहा है। थ्रीवनफोर कैपिटल के संस्थापक भागीदार और मुख्य निवेश अधिकारी प्रणव पई ने कहा, "भारत का डीप-टेक सेक्टर निवेश के लिए तैयार, नीति-समर्थित और वैश्विक रूप से प्रासंगिक अवसर के रूप में परिपक्व हो रहा है। जबकि नींव मजबूत है, डीप-टेक इनोवेशन को व्यावसायिक रूप से सफल, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी व्यवसायों में बदलने के लिए निरंतर पूंजी, इकोसिस्टम सहयोग और धैर्यपूर्वक निष्पादन की जरूरत होगी।" पई ने कहा कि भारत एक निर्णायक चरण में है, एक ऐसा चरण जहां अनुशासित इनोवेशन और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता अगले दशक में एआई, सेमीकंडक्टर और क्लीन मोबिलिटी में इसकी लीडरशिप को परिभाषित करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2030 तक 70 प्रतिशत नए कमर्शियल व्हीकल 'ईवी' होने का अनुमान है, ऐसे में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी दक्षता को बढ़ाने की मुख्य चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, "सरकारी प्रोत्साहनों और रणनीतिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी में 10 बिलियन डॉलर के साथ, देश अपने फैबलेस डिजाइन और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है। recent visitors 55

15 अगस्त से एम्स से सुभाष नगर तक मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी, ट्रायल रन में पहली बार प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो दौड़ी

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रहवासियों के अच्छी खबर है। भोपाल में 15 अगस्त से मेट्रो ट्रेन दौड़ेगी। इसके लिए मेट्रो रेल कम्पनी ने समय सीमा तय कर दी है। इसी कड़ी में 15 अगस्त से एम्स से सुभाष नगर तक मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी है। सबसे पहले 6.22 किमी में मेट्रो चलेगी।  ट्रायल रन हुआ था। कल सुभाष नगर से एम्स के बीच बने सभी स्टेशन पर मेट्रो रुकी थी। कल पहली बार प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो दौड़ी थी। सभी रूट पर मेट्रो ट्रेन शुरू होने में दो से तीन साल का समय लगेगा। यह रहेगा रूट विधायक भगवानदास सबनानी ने मेट्रो का निरीक्षण किया. उसके बाद उन्होंने कहा कि एम्स से सुभाष नगर तक 6.225 किमी के रूट पर जल्द मेट्रो दौड़ने वाली है. मेट्रो का काम तेज गति से चल रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि रूट का कई चरणों में ट्रायल रन पूरा हो चुका है. इस दिन से दौड़ेगी मेट्रो उन्होंने आगे कहा कि ऐसी उम्मीद जता रहे हैं कि बचा हुआ जितना भी काम है उसे 15 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा. इसके बाद मेट्रो को यात्रियों के हवाले कर दिया जाएगा. मेट्रो की सुविधा 15 अगस्त से यात्रियों को मिलने लगी है. बाकी रूट्स पर भी जल्द काम पूरा हो जाएगा. ट्रायल रन ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर का हिस्सा भोपाल में मेट्रो सेवा का विस्तार होता दिख रहा है। मंगलवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई जब मेट्रो पहली बार रानी कमलापति (RKMP) रेलवे स्टेशन से एम्स तक दौड़ी। यह ट्रायल रन ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर का हिस्सा है, जो सुभाषनगर से एम्स तक लगभग 7 किमी लंबा है। इस ट्रायल में मेट्रो ने 10 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 3 किमी की दूरी मात्र 12 मिनट में पूरी की। इस दौरान मेट्रो डीआरएम, अलकापुरी और एम्स स्टेशन पर रुकी। हर स्टेशन पर मेट्रो ने 2-2 मिनट का स्टॉपेज लिया। यह ट्रायल शाम को किया गया। पहली बार ROB से गुजरी मेट्रो मेट्रो का यह ट्रायल रन इसलिए भी खास था क्योंकि इसमें मेट्रो पहली बार हाल ही में बने रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) से गुजरी। RKMP स्टेशन से शुरू होकर, मेट्रो ROB, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी स्टेशन से होते हुए एम्स स्टेशन पहुंची। ROB का निर्माण कुछ महीने पहले ही पूरा हुआ है और उसके बाद ट्रैक बिछाने का काम किया गया। रेलवे ट्रैक और डीआरएम तिराहे पर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं। 3 अक्टूबर को था पहला ट्रायल सुभाषनगर से आरकेएमपी तक का पहला ट्रायल रन 3 अक्टूबर 2023 को हुआ था। तब से लेकर अब तक टेस्टिंग का दौर जारी है, जिसमें मेट्रो पास भी हो चुकी है। आरकेएमपी से एम्स के बीच के ट्रायल के सफल होने के बाद अब मेट्रो सेवा के विस्तार की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब मेट्रो की स्पीड बढाने पर काम मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारियों के अनुसार, RKMP से एम्स के बीच मेट्रो की स्पीड अब धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी। अधिकतम गति 90 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। कमिश्नर, मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम से कमर्शियल रन की मंजूरी मिलने के लिए रात में भी टेस्टिंग की जाएगी। मेट्रो ट्रेन के एक कोच की लंबाई लगभग 22 मीटर और चौड़ाई लगभग 2.9 मीटर है। ट्रेन में 3 कोच हैं और इसकी डिज़ाइन स्पीड 90 किमी प्रति घंटा है।   recent visitors 61

मेपकास्ट प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में पटेंट एंड टेक्नोलाजी सेंटर की स्थापना करने जा रहा

भोपाल बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करने और अपने आविष्कारों को पेटेंट कराने के लिए लोगों को मदद देने के लिए मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) पिछले कई वर्षों से कार्य कर रही है। इसके लिए मेपकास्ट में एक पेटेंट सूचना केंद्र संचालित है। इस कार्य से आगे बढ़ते हुए मेपकास्ट प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में पटेंट एंड टेक्नोलाजी सेंटर (पीटीसी) की स्थापना करने जा रहा है। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों को प्रस्ताव भेजकर दो-दो फैकल्टी तय करने के लिए कहा गया है। योजना है कि 26 अप्रैल को बौद्धिक संपदा दिवस के मौके पर प्रदेश के सभी 64 विश्वविद्यालयों से इस संबंध में समझौता (एमओयू) कर लिया जाए। तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा इस समझौते के आधार पर विश्वविद्यालय से तय प्राध्यापकों को तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा और यही प्रशिक्षित प्राध्यापक अपने- अपने विश्वविद्यालय में (पीटीसी) का संचालन करेंगे। ये लोगों को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराएंगे। मेपकास्ट के प्रधान वैज्ञानिक और पेटेंट सूचना केंद्र के प्रभारी विकास शेंडे ने बताया कि आमतौर पर देखने में आता है कि लोग कोई नवाचार या आविष्कार तो कर लेते हैं, लेकिन पेटेंट कराने से पूर्व ही इसकी जानकारी को सार्वजनिक कर देते हैं। काम मुकम्मल होने के बाद जब वे पेटेंट कराने पहुंचते हैं तो पता चलता है कि उनके आइडिया को चुराकर कोई और व्यक्ति पेटेंट करा चुका है। इसी प्रकार कई ऐसी बौद्धिक संपदाएं भी हैं, जिन्हें लोगों ने पेटेंट तो करा लिया है, लेकिन कोई काम नहीं कर रहे, उनके लिए ये विचार सिर्फ संपत्ति बनकर रह गए हैं। इन संपदाओं से ना तो पेटेंट कराने वालों ने खुद लाभ उठाया और ना ही दूसरों के लिए फायदेमंद साबित हुईं। इसकी वजह यह रही कि पेटेंट को बाजार में लाने के लिए उन्हें उचित प्लेटफार्म कभी मिला ही नहीं। पेटेंट सूचना केंद्र और पीटीसी के माध्यम से मेपकास्ट अब यह जिम्मेदारी निभाएगा। इस वजह से पड़ी जरूरत अधिकारियों का कहना था कि मेपकास्ट का पेटेंट सुविधा केंद्र सभी जानकारी और तकनीकी मदद मुहैया कराता है। लेकिन देखने में आया है कि यहां मदद मांगने बहुत कम लोग आ पाते हैं। इसके पीछे जानकारी का अभाव, दूरी और दूसरी वजहें हो सकती हैं। इसी समस्या को देखते हुए विश्वविद्यालयों में पीटीसी खोलने का फैसला हुआ है। पेटेंट का फायदा दिलाने की योजना अधिकारियों ने बताया कि मेपकास्ट उत्पादों का खरीदार उपलब्ध कराने के लिए नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआइएफ), नेशलन रिसर्च डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनआरडीसी), डेवलपमेंट आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च और उद्योग विभाग की मदद ले रहा है। पेटेंट ग्रांट होने के बाद उद्योग विभाग से पांच लाख रुपये की राशि दी जाती है। यह काम करेंगे पीटीसी यह केंद्र पेटेंट की खोज, आइपीआर को लेकर ट्रेनिंग, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नई तकनीक के बारे में बताना, ओरिएंटेशन प्रोग्राम का संचालन करेगा। इनोवेशन का प्रमोशन, एसएमई के लिए आइपीआर सल्युशन, पेटेंट डाफ्टिंग ट्रेनिंग, स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने का काम करेगा। वहीं प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण और इनोवेटर्स मीट का आयोजन भी करेगा। मध्य प्रदेश, भारतीय पेटेंट कार्यालय मुंबई के क्षेत्राधिकार में आता है। मेपकास्ट के जरिए पेटेंट के आवेदन मुंबई भेजे जाते हैं। यहीं कार्य अब सभी पीटीसी भी कर सकेंगे। क्या है बौद्धिक संपदा अधिकार किसी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा सृजित कोई रचना- संगीत, साहित्यिक कृति, कला, खोज, नाम अथवा डिजाइन आदि उस व्यक्ति अथवा संस्था की बौद्धिक संपदा कहलाती है। अपनी कृतियों पर प्राप्त अधिकार को बौद्धिक संपदा अधिकार कहा जाता है। इसमें पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, डिजाइन, भौगोलिक संदेश (जीआई) आदि शामिल है। पीटीसी की स्थापना तीन महीने में होगी     शासन के निर्देश पर प्रदेश के युवाओं और शोधार्थियों को उनके किए गए कार्यों के लिए पेटेंट एवं तकनीकी कार्य में सहयोग के लिए पीटीसी की स्थापना होनी है। प्रदेश भर के विश्वविद्यालयो में पीटीसी की स्थापना तीन माह के भीतर हो जाएगी। – डॉ. अनिल कोठारी, महानिदेशक मेपकास्ट।   recent visitors 52

PF के पैसे निकलेंगे यूपीआई और एटीएम से, सब्सक्राइबर्स को तुरंत ही अपनी राशि मिल जाएगी

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सात करोड़ से भी ज्यादा सब्सक्राइबर्स या लाभार्थी को बड़ी आसानी होने जा रही है। सरकार अब इस तरह की व्यवस्था कर रही है कि लाभार्थी घर बैठे यूपीआई के जरिए अपना पैसा निकाल सकते हैं। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है क्योंकि कई बार कर्मचारियों को PF की राश निकालने में दिक्कत आती है। उनके दावे रद्द हो जाते हैं। तीन में से एक क्लेम नहीं मिलते साल 2024 में EPFO ने EPF final settlement claims रिपोर्ट जारी की थी। यह साल 2023 के लिए थी। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ईपीएफओ में दावा किया गए हर तीन फाइनल सेटलमेंट क्लेम में से एक पास नहीं हुए बल्कि डिनाई (Denied) कर दिए गए। इसलिए सरकार UPI के ज़रिए EPF निकासी शुरू करने की योजना बना रही है। इससे प्रक्रिया आसान और तेज़ हो जाएगी। तुरंत पैसे आएंगे अकाउंट में इस नए तरीके से, EPF मेंबर GPay, PhonePe और Paytm जैसे UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके तुरंत पैसा निकाल पाएंगे। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) इस सुविधा को शुरू करने के लिए नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ बातचीत कर रहा है। यह योजना मई या जून 2025 तक शुरू हो सकती है। कई सुविधाएं शुरू हो रही हैं केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इसी साल जनवरी में बताया था कि EPFO 3.0 पहल, जिसमें ATM से निकासी भी शामिल है, इस साल जून तक लागू हो जाएगी। EPFO 3.0 के ज़रिए और भी कई सुविधाएं मिलेंगी। देखा जाए तो UPI से EPF निकासी के कई फायदे होंगे। इससे पैसे तक तुरंत पहुंच मिलेगी। अभी EPF निकासी में 23 दिन लगते हैं, लेकिन UPI से यह कुछ ही मिनटों में हो जाएगा। यह नई प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी होगी। और निकासी प्रक्रिया को बेहद आसान बना देगी। जरूरतमंद को आसानी यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी जिन्हें पैसे की तत्काल ज़रूरत होती है। मान लीजिये किसी मेडिकल इमरजेंसी में आपको पैसे की ज़रूरत है, तो आप तुरंत अपने EPF से पैसे निकाल सकेंगे। इससे आपको किसी से उधार मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। या फिर अगर आपको कोई बड़ी खरीदारी करनी है, तो आप आसानी से अपने EPF से पैसे निकाल सकते हैं। यह सुविधा आपके लिए एक वरदान साबित होगी। recent visitors 58

इसी महीने से रोड एक्सीडेंट में घायलों को मिलेगा फ्री इलाज, प्राइवेट-सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल को देना होगा कैशलेस

नई दिल्ली जहां एक तरफ, भारत में सड़क एक्सीडेंट में इजाफा देखने को मिला है. वहीं इस मामले पर एक खबर के अनुसार, अब रोड एक्सीडेंट में घायलों को इसी महीने यानी मार्च 2025 से ही डेढ़ लाख रुपए तक का फ्री इलाज मिलने लगेगा. वहीं यह नियम प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए भी अनिवार्य होगा. देशभर में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा, इस बाबत NHAI नोडल एजेंसी के रुप में अपनी सेवाएं देगा. कैशलेस इलाज की सुविधा जानकारी दें कि, इस योजना के लिए मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162 में पहले ही जरुरी संशोधन हो चुका है. इस योजना को पूरी तरह से लागू करने से पहले बीते 5 महीनों में पुड्डूचेरी, असम, हरियाणा और पंजाब सहित छह राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, जो कि बहुत ही सफल रहा. इस बाबत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बीते 14 मार्च 2024 को रोड एक्सीडेंट पीड़ितों को कैशलेस इलाज देने के लिए एक जरुरी पायलट प्रोजेक्ट कैशलेस ट्रीटमेंट योजना शुरू किया था. इसके बाद बीते 7 जनवरी 2025 को गडकरी ने योजना को देशभर में ऑफिशियली लॉन्च करने की घोषणा की. प्राइवेट-सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल को देना होगा कैशलेस वहीं मामले पर NHAI ने बताया कि, घायल को पुलिस या कोई आम नागरिक या संस्था जैसे ही हॉस्पिटल पहुंचाएगी, और उसका इलाज तुरंत शुरू हो जाएगा. इसके लिए कोई फीस भी नही जमा करनी पड़ेगी. इसके साथ घायलों के साथ चाहे उनके परिजन हो या नहीं, हॉस्पिटल उसकी समुचीत देखरेख करेंगे. प्राइवेट और सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल को इस बाबत कैशलेस इलाज देना होगा. जिसका पूरा लेखा जोखा NHAI के पास रहेगा. इसके नियम के तहत देश में कहीं भी रोड एक्सीडेंट होने पर घायल व्यक्ति को इलाज के लिए भारत सरकार की ओर से अधिकतम 1.5 लाख रुपए की मदद दी जाएगी, जिससे वह आगामी 7 दिनों तक अस्पताल में इलाज भी करा सकेगा. एक समान टोल नीति पर भी हो रहा काम आपको बता दें कि बीते 3 फरवरी को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सड़क परिवहन मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों को राहत देने के लिए एक समान टोल नीति पर भी काम कर रहा है. तब गडकरी ने यह भी कहा था कि अब भारत का राजमार्ग बुनियादी ढांचा अमेरिका के बराबर है. वहीं बीते 10 साल में अधिक से अधिक खंडों पर टोल संग्रह शुरू होने से टोल शुल्क बढ़ा भी है, जिससे अक्सर यात्रियों में असंतोष बढ़ता है. जहां भारत में कुल टोल संग्रह बीते 2023-24 में 64,809.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो इससे पिछले वर्ष की तुलना में 35 % अधिक है. वर्ष 2019-20 में संग्रह 27,503 करोड़ रुपये था, वहीं तब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी ने भरोसा जताया था कि राजमार्ग मंत्रालय 2020-21 में प्रतिदिन 37 किलोमीटर राजमार्ग निर्माण के पिछले रिकॉर्ड को चालू वित्त वर्ष में पार कर जाएगा. चालू वित्त वर्ष में अबतक करीब 7,000 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण भी हो चुका है. लाज ना मिलने पर होती है मौत सड़क हादसों में इलाज समय पर ना मिलने के कारण सबसे ज्यादा मौत के मामले देखने को मिलते हैं। एक्सीडेंट के बाद बहुत से लोगों को अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जाता है। अगर कोई अस्पताल पहुंच भी जाता है, तो उसे कई तरह की फॉर्मेलिटी पूरी करनी पड़ती है। इस सब में कई बार इलाज मिलने में ही काफी देर हो जाती है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक्सीडेंट में घायल लोगों को 1.5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त देने का फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सुविधा इसी महीने से मिलनी शुरू हो जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की भूमिका इस नए नियम के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अहम भूमिका निभाएगा। इस पूरी मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नोडल एजेंसी की तरह काम करेगा। पहले हरियाणा और पंजाब समेत कुल 6 राज्यों में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसकी सफलता को देखते हुए, इसे लागू करने का फैसला किया गया है। तुंरत मिलेगा इलाज इस फैसले के तहत अगर किसी की एक्सीडेंट होता है, तो उसे तुरंत किसी भी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है। उसके इलाज के लिए उसके परिवार को नहीं खोजा जाएगा। घायल के 1.5 लाख तक का इलाज का खर्च सड़क एवं परिवहन मंत्रालय उठाएगा। अगर खर्च 1.5 लाख से ऊपर आता है, तो इसके आगे का परिवार को बिल पे करना होगा। नितिन गडकरी ने कैशलेस ट्रीटमेंट योजना लॉन्च की थी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 14 मार्च 2024 को रोड एक्सीडेंट पीड़ितों को कैशलेस इलाज देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट कैशलेस ट्रीटमेंट योजना शुरू किया था। इसके बाद 7 जनवरी 2025 को गडकरी ने योजना को देशभर में ऑफिशियली लॉन्च करने की घोषणा की। इससे देश में कहीं भी रोड एक्सीडेंट होने पर घायल व्यक्ति को इलाज के लिए भारत सरकार की ओर से अधिकतम 1.5 लाख रुपए की मदद दी जाएगी। जिससे वह 7 दिनों तक अस्पताल में इलाज करा सकेगा। डेढ़ लाख से ऊपर खर्च पर खुद पैसे देने होंगे अस्पताल को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पताल में रेफर करना है तो उस अस्पताल को सुनिश्चित करना होगा कि जहां रेफर किया जा रहा है, वहां मरीज को दाखिला मिले। डेढ़ लाख तक कैशलेस इलाज होने के बाद उसके भुगतान में नोडल एजेंसी के रूप में NHAI काम करेगा, यानी इलाज के बाद मरीज या उनके परिजन को डेढ़ लाख तक की रकम का भुगतान नहीं करना है। यदि इलाज में डेढ़ लाख से ज्यादा का खर्च आता है तो बढ़ा बिल मरीज या परिजन को भरना होगा। सूत्रों का कहना है कि कोशिश यह हो रही है कि डेढ़ लाख की राशि को बढ़ाकर 2 लाख रुपए तक किया जा सके। दरअसल, दुर्घटना के बाद का एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है। इस दौरान इलाज न मिल पाने से कई मौतें हो जाती हैं। इसी को कम करने के लिए यह योजना शुरू की जा रही है। recent visitors 64