ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा- बिजली कंपनियों में रिक्त 2573 पदों की भर्ती से कार्यालयीन व्यवस्थाओं में काफी आसानी होगी

भोपाल ऊर्जा विभाग के अधीन तीनों बिजली वितरण कंपनियों, ट्रांसमिशन कंपनी, जनरेशन कंपनी और पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त 2573 पदों के लिए ऑनलाइन परीक्षा कार्यक्रम 20 से 30 मार्च तक घोषित कर दिया गया है। यह परीक्षा इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सतना, सागर में होगी। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि इन भर्तियों से बिजली वितरण, जनरेशन, ट्रांसमिशन कार्यों के अलावा कार्यालयीन व्यवस्थाओं में काफी आसानी होगी। ऊर्जा विभाग में भर्ती के लिए नोडल कंपनी मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि लॉ असिस्टेंट, असिस्टेंट लॉ ऑफिसर के लिए परीक्षा 20 मार्च को सुबह 9 से 11 बजे, स्टोर असिस्टेंट, ड्रेसर, फायर मैन, जूनियर स्टेनोग्राफर, सिक्योरिटी गार्ड के लिए दोपहर 1 से 3 और जूनियर इंजीनियर मैकेनिकल प्लांट के लिए शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। ऑफिस असिस्टेंट ग्रेड 3 के लिए 21 मार्च को तीन सत्रों में सुबह 9 से 11, दोपहर 1 से 3 और शाम 5 से 7 तक, जूनियर इंजीनियर सिविल के लिए 22 मार्च सुबह 9 से 11, प्लांट असिस्टेंट इलेक्ट्रिकल दोपहर 1 से 3, प्लांट असिस्टेंट मैकेनिकल शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। इसी तरह असिस्टेंट मैनेजर एचआर, सिक्योरिटी सब इंस्पेक्टर के लिए 23 मार्च सुबह 9 से 11, असिस्टेंट मैनेजर आईटी, सिविल अटेंडेंट व रेडियोग्राफर के लिए दोपहर 1 से 3, लेब टेक्निशियन के लिए शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। प्रबंध निदेशक ने बताया कि ईसीजी टेक्निशियन, फार्मासिस्ट, पब्लिसिटी ऑफिसर के लिए 24 को 9 से 11, एएनएम, स्टॉफ नर्स, प्रोग्रामर, वेलफेयर असिस्टेंट के लिए दोपहर 1 से 3 बजे तक, जूनियर इंजीनियर इलेक्ट्रॉनिक्स (प्लांट) के लिए शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। लाइन अटेंडेंट के लिए 26 से 29 मार्च 4 दिन सुबह 9 से 11, दोपहर 1 से 3 और शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। इसी तरह जूनियर इंजीनियर डिस्ट्रिब्यूशन, ट्रांसमिशन, प्लांट, इलेक्ट्रिकल के लिए 30 मार्च को सुबह 9 से 11, दोपहर 1 से 3 और शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। प्रबंध निदेशक ने बताया कि इन परीक्षाओं के लिए करीब सवा लाख युवाओं ने एमपी ऑन लाइन के माध्यम से ऑनलाइन फार्म जमा कराए थे। प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने अभ्यर्थियों से ऑन लाइन माध्यम से प्रवेश पत्र लाउनलोड कर प्रवेश पत्र में लिखे नियम, शर्तों के अनुरूप तय समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने का अनुरोध किया है।   recent visitors 36

अप्रैल के पहले सप्ताह में श्रीलंका की यात्रा पर जा सकते हैं पीएम मोदी, राष्ट्रपति दिसानायके दिया निमंत्रण

कोलंबो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके के निमंत्रण पर अप्रैल के पहले सप्ताह में श्रीलंका की यात्रा पर जा सकते हैं। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी। पीएम मोदी की संभावित यात्रा से भारत-श्रीलंका संबंधों में मजबूती आने के साथ ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच जन-केंद्रित साझेदारी को गति मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी थाईलैंड से वापस आते समय कोलंबो पहुंच सकते हैं। बैंकॉक में 2 से 4 अप्रैल तक 'बंगाल की खाड़ी बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) शिखर सम्मेलन' का छठा आयोजन होगा। दिसानायके ने दिसंबर में तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को 'अपनी सुविधानुसार जल्द' श्रीलंका की यात्रा करने के लिए आमंत्रित किया था। सितंबर 2024 में पदभार ग्रहण करने के बाद दिसानायके की यह पहली विदेश यात्रा थी। दोनों नेताओं ने अपनी चर्चाओं के दौरान भारत-श्रीलंका देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने और संबंधों को मैत्रीपूर्ण बनाने पर सहमति जताई। दिसानायके ने अपनी भारत यात्रा को काफी 'सफल' करार दिया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यात्रा के दौरान भारतीय नेतृत्व और व्यापारिक समुदाय के साथ उनकी 'सार्थक चर्चा' हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से अब तक तीन बार श्रीलंका का दौरा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री की श्रीलंका की आखिरी यात्रा जून 2019, में ईस्टर संडे के हमलों के बाद एकजुटता व्यक्त करने के लिए हुई थी। इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च 2015 में श्रीलंका का दौरा किया था, जो 1987 के बाद से भारत के किसी प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। पीएम मोदी मई 2017 में श्रीलंका द्वारा आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय वेसाक दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। recent visitors 62

मध्य प्रदेश की सात स्मार्ट सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग करके नागरिक सेवाओं में सुधार किया जाएगा

 भोपाल  भोपाल सहित प्रदेश की सात स्मार्ट सिटी में एआइ तकनीक से नागरिक सेवाएं बेहतर बनाई जाएंगी। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं सतना का चयन स्मार्ट सिटी के रूप में किया गया है। चिह्नित शहरों में सुशासन और नागरिक सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन चयनित शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) और इंटेलिजेंट ट्रेफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) को लागू किया गया है। रियलटाइम डाटा आईसीसीसी तकनीक स्मार्ट सिटी में नागरिक सेवाओं में डाटा संचालन और निर्णय लेने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आईसीसीसी और आईटीएमएस इन दोनों प्रणालियों में रियलटाइम में डाटा एकत्र कर त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता है। इन प्रणालियों के जरिए स्मार्ट सिटी में जल आपूर्ति, अपशिष्ट प्रबंधन, स्ट्रीट लाइटिंग और सार्वजनिक सुरक्षा जैसी शहर की सेवाओं की लगातार निगरानी संभव है। नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन में एआई को किया शामिल केंद्र सरकार ने नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन (एनडीयूएम) में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को शामिल करने का निर्णय लिया है। आईसीसीसी तकनीक से स्मार्ट सिटी में अपशिष्ट संग्रह वाहनों की वास्तविक समय की ट्रैकिंग से समय पर कचरा निपटान और सफाई सुनिश्चित हो रही है। भविष्य में इन केंद्रों को स्वचलित अलर्ट स्वच्छता संबंधी मुद्दों को तुरंत निराकृत करने में भी सक्षम बनाया जाएगा। स्मार्ट सिटी में जल वितरण और रिसाव का पता लगाने वाली प्रणालियों को कंट्रोल रूम के माध्यम से निगरानी में रखा जा सकेगा। इससे पानी के अपव्यय को काफी हद तक कम करने और शहर में पानी की समान रूप से आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसी के साथ आईसीसीसी के माध्यम से स्मार्टग्रिड और स्ट्रीटलाइट आटोमेशन ऊर्जा की खपत को कम करने और विद्युत वितरण व्यवस्था को और दक्ष बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अपराध की रोकथाम और यातायात प्रबंधन में भी मिल रही मदद वर्तमान में इन सात स्मार्ट सिटी में आईसीसीसी के साथ एकीकृत निगरानी प्रणाली अपराध की रोकथाम और यातायात प्रबंधन में मदद कर रही है। स्मार्ट सिटी में आईटीएमएस द्वारा भीड़-भाड़ को कम करने, दुर्घटनाओं को कम करने और शहरी गतिशीलता को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं। इस प्रणाली के माध्यम से ट्रैफिक सिग्नल और रियल टाइम ट्रैफिक का विश्लेषण भी किया जा रहा है। सातों स्मार्ट सिटी में 303 स्थानों पर 2301 कैमरे लगाए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में इस प्रणाली के माध्यम से करीब 27 लाख 25 हजार ई-चालान की कार्रवाईयां की गई हैं। recent visitors 57

रेलवे के नए नियम RAC यात्रियों को पैकेट बंद बेडरोल मिलेगा, जिसमें दो बेडशीट, एक कंबल, एक तकिया और तौलिया

भोपाल ट्रेनों के एसी कोच में आरएसी टिकट के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को रेलवे ने बड़ी सौगात दी है। रेलवे ने रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन (आरएसी) टिकट के नियमों में बदलाव कर इसको लागू कर दिया है। रेलवे के नए नियम के अनुसार अब ट्रेनों में आरएसी टिकट के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को एसी कोच में फुल बेडरोल की सुविधा रेल प्रशासन प्रदान करेगी। नए नियम से पहले तक होती थी ये परेशानी नए नियम से पहले तक आरएसी टिकट वाले यात्रियों को साइड लोअर बर्थ की आधी सीट पर यात्रा करनी पड़ती थी। किसी दूसरे व्यक्ति के साथ में सीट शेयर करनी होती थी। साथ ही एसी में आरएसी टिकट लेकर यात्रा करने वाले दो यात्री को मिला कर एक ही बेडरोल दिया जाता था। लेकिन अब यात्रियों को पूरी एक सीट, पूरे बेडरोल सेट के साथ मिलेगी। रेलवे के इस फैसले के बाद उन सभी यात्रियों को मदद मिलेगी, जो कि टिकट के लिए पैसा तो पूरा देते थे। मगर उनको आधी सीट ही मिलती थी। रेलवे के नए नियम के मुताबिक आरएसी यात्रियों को पैकेट बंद बेडरोल मुहैया कराएगा, जिसमें यात्रियों को दो बेडशीट, एक कंबल, एक तकिया और तौलिया शामिल होगा। पैसा पूरा, फिर भी आधी सुविधा: RAC टिकट वाले यात्री पूरे किराए का भुगतान करते हैं लेकिन उन्हें साइड लोअर बर्थ की आधी सीट पर सफर करना पड़ता है. हालांकि, अब इन यात्रियों को कंफर्म टिकट धारकों की तरह बेडरोल की सुविधा मिलेगी. कोच अटेंडेंट बर्थ पर पहुंचते ही बेडरोल उपलब्ध कराएगा. क्या कहते है अधिकारी: जागरण.कॉम के हवाले से जनसंपर्क अधिकारी (वाराणसी) अशोक कुमार ने बताया कि, "आरएसी यात्रियों को कंफर्म टिकट वालों की तरह सुविधा मिलेगी. कोच अटेंडेंट बर्थ पर पहुंचते ही बेडरोल उपलब्ध कराएगा. यह व्यवस्था यात्रियों की सुविधा और संतोष के लिए लागू की गई है." अब मिलेगी ये सुविधाएं: अब प्रत्येक RAC यात्री को एक पैकेट बंद बेडरोल प्रदान किया जाएगा, जिसमें बेडशीट, पिलो, ब्लैंकेट, और तोलिया शामिल होंगे.     आरएसी यात्रियों को पूरी सुविधा: अब आरएसी (RAC) टिकट पर सफर करने वाले दोनों यात्रियों को अलग-अलग बेडरोल दिए जाएंगे, जिससे असुविधा और कहासुनी खत्म होगी.     ठंड से राहत: एसी कोच में ठंड से बचने के लिए पैकेट में शामिल सभी सामान (बेडशीट, पिलो, ब्लैंकेट, और तोलिया) मिलेगा.     कंफर्म टिकट के बराबर सेवा: आरएसी यात्री भी अब कंफर्म टिकट धारकों की तरह सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे. रेलवे को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर RAC यात्री तक बेडरोल सही समय पर पहुंचे, ताकि यह सुविधा सुचारू रूप से लागू हो सके. ह कदम आरएसी यात्रियों के अधिकारों और उनकी यात्रा को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है. recent visitors 64

झाबुआ मेडिकल कॉलेजअगले तीन साल में शुरू होगा, पहले चरण में एमबीबीएस की मान्यता ली जाएगी

झाबुआ देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) का पहला मेडिकल कॉलेज झाबुआ में स्थापित किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने इसके लिए 100 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली है, और इस महीने के अंत तक जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। योजना के अनुसार, 2028-29 से मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू होगी। हालांकि, इससे पहले झाबुआ इंजीनियरिंग कॉलेज की बिल्डिंग में अगले सत्र से अस्थायी रूप से मेडिकल कॉलेज संचालित करने का प्रस्ताव रखा गया है।   डीएवीवी की पिछली कार्यपरिषद बैठक में झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद जमीन की तलाश शुरू की गई। जिला अस्पताल से करीब 5 किलोमीटर दूर डूंगरा लालू क्षेत्र में 100 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। डीएवीवी कुलपति और झाबुआ कलेक्टर के बीच इस जमीन को लेकर सहमति बन गई है। दावा किया जा रहा है कि यहां अगले तीन वर्षों में मेडिकल कॉलेज शुरू कर दिया जाएगा। पहले चरण में एमबीबीएस कोर्स की मान्यता प्राप्त की जाएगी, और बाद में बीडीएस, आयुर्वेदिक तथा होम्योपैथी के कोर्स भी इसी कैंपस में जोड़े जाएंगे। झाबुआ में लंबे समय से मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग की जा रही थी। यहां के स्थानीय लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए गुजरात के दाहोद जाना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज खुलने से स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा सुधार होगा और लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।   1200 करोड़ होगी अनुमानित लागत   झाबुआ मेडिकल कॉलेज की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने पर विचार शुरू हो चुका है। इसकी अनुमानित लागत 1200 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस परियोजना में राज्य सरकार से अनुदान मिलेगा, जबकि शेष राशि विश्वविद्यालय के बजट से खर्च की जाएगी। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की शुरुआत के लिए झाबुआ इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन को विकल्प के रूप में रखा गया है। इस भवन का उपयोग किया जाए तो मेडिकल कॉलेज की शुरुआत के लिए केवल 600 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रस्ताव भेजा है कि यदि इंजीनियरिंग कॉलेज का भवन उपलब्ध हो जाता है, तो 2026-27 सत्र से ही मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई शुरू की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर विचार करने और इसे आरजीपीवी (राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) को भेजने के निर्देश दिए हैं।   डीएवीवी की पिछली कार्यपरिषद बैठक में ही झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद वहां जमीन की तलाश शुरू हुई थी। जिला अस्पताल से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर डूंगरा लालू क्षेत्र में ही 100 एकड़ जमीन मिल गई है। डीएवीवी कुलपति व झाबुआ कलेक्टर के बीच इस जमीन को लेकर सहमति बन गई है। दावा किया जा रहा है कि यहां अगले तीन साल में मेडिकल कॉलेज शुरू कर दिया जाएगा। पहले चरण में एमबीबीएस की मान्यता ली जाएगी। इसके बाद बीडीएस, आयुर्वेदिक और होम्योपैथी के कोर्स भी इसी कैंपस में चलाए जाएंगे। मालूम हो, झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। अभी यहां के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दाहोद जाना पड़ता है। 1200 करोड़ आंकी जा रही है लागत झाबुआ मेडिकल कॉलेज की डीपीआर को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है। इसकी अनुमानित लागत 1200 करोड़ आंकी जा रही है। इसमें राज्य शासन की ओर से अनुदान मिलेगा। बाकी राशि यूनिवर्सिटी के बजट से खर्च की जाएगी। हालांकि, शुरुआत के लिए विकल्प के तौर पर झाबुआ का इंजीनियरिंग कॉलेज भी रखा गया है। यहां 600 करोड़ से ही शुरुआत हो सकेगी। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने सीएम डॉ. मोहन यादव को प्रस्ताव दिया कि अगर इंजीनियरिंग कॉलेज का भवन मिल जाए तो अगले सत्र (2026-27) से ही मेडिकल कॉलेज शुरू हो सकता है। सीएम यादव ने इसे लेकर आरजीपीवी को प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है। कॉलेज के लिए इसी महीने से काम शुरू कर देंगे ^झाबुआ में 100 एकड़ से अधिक जमीन चिह्नित कर ली है। स्थानीय प्रशासन से इसकी सहमति मिल गई है। हमारी कोशिश है कि इसी माह नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर मेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इंजीनियरिंग कॉलेज की बिल्डिंग मिलती है तो 2026 से ही एमबीबीएस कोर्स शुरू कर दिया जाएगा। – प्रो. राकेश सिंघई, कुलपति, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी प्रशासन को जमीन पसंद आ गई है ^जिला अस्पताल से 5 किलोमीटर दूर डूंगरा लालू क्षेत्र में जमीन यूनिवर्सिटी प्रशासन को पसंद आई है। एक और विकल्प इंजीनियरिंग कॉलेज के पास की 12 हेक्टेयर जमीन का भी है। यह मिल जाती है तो इस जगह को एजुकेशन हब के तौर पर विकसित किया जा सकता है। – नेहा मीणा, कलेक्टर, झाबुआ जल्द शुरू होगा कॉलेज का काम   देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश सिंघई ने बताया कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज के लिए 100 एकड़ से अधिक जमीन चिह्नित कर ली गई है और स्थानीय प्रशासन से इसकी स्वीकृति भी मिल चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की योजना है कि इस महीने के अंत तक जमीन का नामांतरण पूरा कर लिया जाए और मेडिकल कॉलेज के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। अगर इंजीनियरिंग कॉलेज की बिल्डिंग मिल जाती है, तो 2026 से ही एमबीबीएस कोर्स शुरू कर दिया जाएगा।   झाबुआ प्रशासन ने दी हरी झंडी झाबुआ की कलेक्टर नेहा मीणा ने बताया कि जिला अस्पताल से 5 किलोमीटर दूर डूंगरा लालू क्षेत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन को जमीन पसंद आई है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग कॉलेज के पास स्थित 12 हेक्टेयर जमीन का भी एक विकल्प है। यदि यह जमीन मिल जाती है, तो इस क्षेत्र को एक प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। इस मेडिकल कॉलेज के निर्माण से झाबुआ और आसपास के क्षेत्रों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी और लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी। recent visitors 63

सुप्रीम कोर्ट ने कहा लंबे समय से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिला अपने साथी पर रेप के आरोप नहीं लगा सकती क्योंकि यह सहमति से बना संबंध

नई दिल्ली  दो बालिगों में प्रेम संबंध। प्यार परवान चढ़ा। पुरुष बैंक अधिकारी तो महिला लेक्चरर। दोनों दो-चार नहीं, बल्कि 15-16 साल तक प्रेम संबंध में रहे। तमाम बार शारीरिक संबंध बनाए। फिर महिला ने एक दिन पुरुष पर शादी का झांसा देकर रेप का केस दर्ज करा दिया। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पुरुष के खिलाफ चल रहे आपराधिक केस को रद्द करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह यकीन करना मुश्किल है कोई महिला शादी के झूठे वादे पर यकीन करके किसी से 16 साल तक संबंध बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मामला सहमति से संबंध या लिव-इन रिलेशनशिप का है जो बिगड़ गया तो रेप का केस दर्ज करा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई महिला लंबे समय से लिव-इन में रह रही है, तो वो अपने पार्टनर पर सिर्फ शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप नहीं लगा सकती। क्योंकि इतने लंबे समय बाद ये साबित करना मुश्किल है कि संबंध सिर्फ शादी के वादे के कारण ही बने थे। एक बैंक अफसर पर रेप का आरोप लगा था। उसकी लिव-इन पार्टनर, जो एक लेक्चरर हैं, ने कहा कि वो 16 साल तक उससे शादी के वादे के भरोसे संबंध बनाती रही। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने महिला की दलील नहीं मानी और बैंक अफसर के खिलाफ केस खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों पढ़े-लिखे हैं और ये रिश्ता उनकी मर्जी से था। दोनों अलग-अलग शहरों में पोस्टिंग के दौरान भी एक-दूसरे के घर जाते थे। कोर्ट ने कहा कि ये एक प्रेम प्रसंग या लिव-इन रिलेशनशिप का मामला है जो बिगड़ गया। कोर्ट ने कहा, 'यह विश्वास करना कठिन है कि शिकायतकर्ता लगभग 16 वर्षों की अवधि तक अपीलकर्ता की मांगों के आगे झुकती रही, बिना कभी कोई विरोध किए कि अपीलकर्ता शादी के झूठे वादे के बहाने उसका यौन शोषण कर रहा था। 16 वर्षों की लंबी अवधि, जिसके दौरान पार्टियों के बीच यौन संबंध निर्बाध रूप से जारी रहे, यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त है कि रिश्ते में कभी भी बल या छल का तत्व नहीं था।' साफ शब्दों में कोर्ट को लगा कि 16 साल तक बिना किसी विरोध के संबंध बनाना, ये दिखाता है कि इसमें जबरदस्ती नहीं थी। कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे मामलों में भले ही मान लिया जाए कि झूठा वादा किया गया था, लेकिन इतने लंबे समय तक संबंध जारी रहने से महिला की दलील कमज़ोर हो जाती है। महिला का कहना था कि वो इस गलतफहमी में थी कि आरोपी उससे शादी करेगा, लेकिन 16 साल तक बिना किसी सवाल के संबंध जारी रखना, इस दलील को कमजोर बनाता है। कोर्ट ने कहा कि इतने समय तक चुप रहना समझ से परे है। यदि वाकई धोखा हुआ था, तो इतने सालों तक रिश्ते क्यों निभाए गए? ये एक बड़ा सवाल है।   recent visitors 46

मध्य प्रदेश में विधि एवं विधायी विभाग के कर्मचारियों को मिली पदोन्नति, आर्थिक लाभ, महाधिवक्ता कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल

भोपाल  नौ वर्ष से मध्य प्रदेश में बंद पदोन्नतियों की राह विधि एवं विधायी विभाग ने खोल दी है। विभाग ने सवा सौ से अधिक कर्मचारियों को विभागीय भर्ती नियम के अनुसार वरिष्ठताक्रम में एक जनवरी 2024 से पदोन्नति के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी दे दिया। इसमें महाधिवक्ता कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल हैं। ये पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण को लेकर विचाराधीन प्रकरण में पारित होने वाले अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। इसी प्रक्रिया के आधार पर अब अन्य विभागों में भी सशर्त पदोन्नति दी जा सकती है। इसकी ही मांग कर्मचारी लंबे समय से कर रहे थे। मई 2016 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण नियम 2002 को निरस्त कर दिया था। सरकार ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों का मामला विचाराधीन है। इसके कारण पदोन्नतियां बंद थीं। हजारों कर्मचारी बिना प्रमोशन हुए रिटायर हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए। इसका रास्ता निकालने का सरकार ने बहुत प्रयास किया पर कभी एकराय नहीं बन पाई। इस बीच विधि एवं विधायी विभाग के कर्मचारियों ने पदोन्नति न मिलने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति में आरक्षण नियम निरस्त हुए हैं न कि विभागीय भर्ती नियम। इसमें प्रविधान है कि एक निश्चित अवधि के बाद वरिष्ठताक्रम में उच्च पद पर पदोन्नत किया जाएगा। इसे ही आधार बनाते हुए हाई कोर्ट ने आरपी गुप्ता एवं अन्य विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य के प्रकरण में पारित आदेश के अनुसार समिति बनाकर भर्ती नियम 2010 के प्रविधान के अंतर्गत नए पदों को सम्मिलित करते हुए पदोन्नति दी गई। साथ ही विभाग के प्रमुख सचिव नरेंद्र प्रताप सिंह ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ये पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट में लंबित आरक्षण से संबंधित प्रकरण के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। मंत्री समिति भी बनाई उधर, सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार पदोन्नति का रास्ता निकालने को लेकर गंभीर है और काफी समय से प्रयास भी चल रहे हैं। मंत्री समिति भी बनाई गई और विधिक परामर्श भी लिया गया। कर्मचारी संगठनों से भी चर्चा की लेकिन एक राय नहीं बनी। अब सभी परिस्थितियों को देखते हुए आगामी कदम उठाए जाएंगे। बढ़ा हुए वेतन भी मिल जाएगा उधर, मंत्रालयीन अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक का कहना है कि पदोन्नति का सबसे बेहतर विकल्प समयमान वेतनमान देकर पदनाम दे दिया जाए तो सारी समस्या ही समाप्त हो जाएगी। इससे बढ़ा हुए वेतन भी मिल जाएगा और पदनाम भी बदल जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग विधिक अभिमत लेने के बाद इसे लेकर नौ मार्च 2020 को परिपत्र जारी किया था। यही व्यवस्था राज्य प्रशासनिक सेवा, वित्त सेवा सहित अन्य सेवाओं में लागू हो चुकी है। recent visitors 50