मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भेजा 20 करोड़ का मानहानि नोटिस, नेता प्रतिपक्ष बोले- न डरे हैं, न डरेंगे

 भोपाल मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को 20 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है. मंत्री पर जमीन खरीद घोटाले और परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद यह नोटिस जारी किया गया है. राजपूत ने सिंघार पर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए नोटिस में 15 दिनों के भीतर जवाब देने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गोविंद सिंह राजपूत पर आरोप लगाया था कि उन्होंने परिवहन मंत्री रहते हुए परिवहन विभाग के भ्रष्टाचार से प्राप्त धन से 1250 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी. इसके अलावा, सिंघार ने पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा के मामले को उठाते हुए परिवहन घोटाले में राजपूत की संलिप्तता का दावा किया था. इन आरोपों को राजपूत ने सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की साजिश करार दिया. सिंघार ने कहा था-राजपूत ने खरीदी 400 करोड़ की जमीनें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 15 फरवरी को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर कई आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था "2019 से 2024 तक गोविंद सिंह राजपूत और परिवार के लोगों के लोगों ने करोड़ों की जमीन खरीदी. उन्होंने रजिस्ट्री के कागजात दिखते हुए कहा था कि मंत्री गोविंद सिंह, पत्नी सविता सिंह, पुत्र आकाश सिंह, आदित्य सिंह के नाम पर सागर शहर में तिलीमाफी, बशियाभान्या, कनेरादेव, भापेल, जैसीनगर, झिला, नरयावली सहित कई क्षेत्रों में 150 एकड़ से ज्यादा जमीन की खरीदारी का रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने पूछा था कि आखिर क्यों सौरभ शर्मा और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद भी डायरी में छिपे नाम सामने नहीं आ रहे हैं." नोटिस से बढ़ी सिंघार की मुश्किलें उनके आरोपों के बाद मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने 20 करोड़ के मानहानी का नोटिस उमंग सिंघार को भेज दिया है. वकील के माध्यम से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि छवि खराब करने के लिए झूठे आरोप लगाए गए हैं. नोटिस में 15 दिनों में नेता प्रतिपक्ष से जवाब देने के लिए कहा गया है. वहीं मानहानि नोटिस मामले में उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रिया दी है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि "नोटिस का जवाब भी देंगे और कोर्ट भी जाएंगे. न डरे हैं, न डरेंगे! नोटिस के जवाब में उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ट्वीट किया, "नोटिस का जवाब भी देंगे और कोर्ट भी जाएंगे. न डरेंगे, न झुकेंगे." सिंगार ने अपने आरोपों पर कायम रहते हुए कहा कि वे इस मामले को कानूनी रूप से लड़ेंगे. गोविंद सिंह राजपूत ने नोटिस में स्पष्ट किया कि उमंग सिंघार के 'बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण' आरोपों ने उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया है. नोटिस में सिंगार से माफी मांगने के साथ-साथ 20 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है. यह विवाद भोपाल की सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह मामला कोर्ट में क्या मोड़ लेता है. recent visitors 47

सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर धुआंधार ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके

बेलग्रेड यूरोपीय देश सर्बिया की संसद में विपक्षी सांसदों ने भारी बवाल मचाया है. विपक्षी सांसदों ने संसद में एक के बाद एक कई स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके जिससे संसदीय सत्र में भारी अव्यवस्था फैल गई. संसद में हाथापाई भी देखने को मिली. संसदीय सत्र के लाइव टेलीविजन प्रसारण में दिखाया गया कि सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. इसके बाद पूरे संसद में काला और गुलाबी धुआं फैल गया. विपक्षी सांसद सरकार से नाराज प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी समर्थन कर रहे थे. किस बात पर नाराज विपक्ष ने संसद में मचाया उत्पात चार महीने पहले सर्बिया में रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए जो अब सरकार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं. विधान सभा सत्र में, सर्बियाई प्रगतिशील पार्टी (एसएनएस) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन ने सत्र के एजेंडे को मंजूरी दी जिसके बाद कुछ विपक्षी नेता अपनी सीट से उठकर संसद के अध्यक्ष की तरफ दौड़े. इस दौरान सुरक्षा गार्ड्स से उनकी हाथापाई देखने को मिली. वहीं, कुछ विपक्षी सांसदों ने स्मोक ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. लाइव प्रसारण में संसद की इमारत के अंदर काला और गुलाबी धुआं उठता दिखाई दिया. स्पीकर एना ब्रनाबिक ने कहा कि इस दौरान दो सांसद घायल हुए हैं, जिनमें से एक, एसएनएस पार्टी की जैस्मिना ओब्राडोविक को स्ट्रोक हुआ है और उसकी हालत गंभीर है. उन्होंने सत्र में कहा, 'संसद काम करना और सर्बिया की रक्षा करना जारी रखेगी.' मंगलवार को सर्बियाई संसद को देश की यूनिवर्सिटीज के लिए धनराशि बढ़ाने वाला कानून पारित करना था. इस कानून की मांग को लेकर दिसंबर से ही सर्बिया के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. संसद में देश के प्रधानमंत्री मिलोस वुसेविक के इस्तीफे पर भी चर्चा होनी थी लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन ने सत्र के एजेंडे में कई ऐसे मुद्दों को रखा जिससे विपक्ष बुरी तरह भड़क गया.   संसदीय सत्र के लाइव टेलीविजन प्रसारण में दिखाया गया कि सर्बियाई विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को सरकार की नीतियों के विरोध में संसद के अंदर धुआंधार ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले फेंके. इसके बाद पूरे संसद में काला और लाल धुआं फैल गया. विपक्षी सांसद सरकार से नाराज प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी समर्थन कर रहे थे. recent visitors 59

ट्रंप ने यूक्रेन की आर्मी मदद पर लगाई रोक, अब पुतिन से कैसे लोहा लेंगे जेलेंस्की

न्यूयॉर्क रूस और यूक्रेन के बीच लगभग तीन साल से युद्ध चल रहा है। इस दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को हर तरह से मदद दी है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका का दौरा किया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की थी। लेकिन इस दौरान दोनों के बीच जमकर बहस हुई, जिसके बाद जेलेंस्की व्हाइट हाउस से बिना प्रेस वार्ता के निकल गए। अब राष्ट्रपति ट्रम्प ने जेलेंस्की को झटका देते हुए यूक्रेन को मिलने वाली मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति निवास व्हाइट हाउस ने इस संबंध में जानकारी दी है। व्हाइट हाउस का कहना है कि पिछले सप्ताह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की केसाथ तीखी बहस के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को मिलने वाली सभी तरह की मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अमेरिका अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ तौर पर कह दिया है कि उनका ध्यान शांति पर है। हमें चाहिए कि हमारे साझेदार भी उस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हों। हम अपनी सहायता रोक रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह समाधान में योगदान दे रही है। ट्रंप का यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इसके मुताबिक ऐसी मदद से जो अमेरिका से अभी तक यूक्रेन नहीं पहुंची है, उसे भी रोक दिया गया है। इसमें पोलैंड तक पहुंच चुका सामान भी शामिल है। यूक्रेन और अमेरिका ने नहीं दिया जवाब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, यूक्रेन को रोकी गई मदद तब तक बहाल नहीं की जाएगी। जब तक राष्ट्रपति ट्रंप को यह यकीन नहीं हो जाता कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की वास्तव में शांति चाहते हैं। यूक्रेन को सैन्य मदद रोके जाने को लेकर फिलहाल अमेरिकी रक्षा विभाग और न ही राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई टिप्पणी आई है। वहीं अमेरिकी सहायता रोके जाने पर यूक्रेन राष्ट्रपति जेलेंस्की की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि इस सहायता पर रोक लगाना पूरी तरह से स्थाई नहीं है। यह एक विराम है। एक अरब डॉलर की मदद रुकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे एक अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद संबंधी मदद पर असर पड़ सकता है। इन्हें जल्द ही यूक्रेन को डिलीवर किया जाना था। इधर यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि उसके पास सिर्फ गर्मियों तक रूस से लड़ने के लिए आपूर्ति है। ऐसे में रूस से लडाई के लिए यूक्रेन संसाधनों की कमी से जूझ सकता है। यूरोपीय देशों पर बढ़ेगा यूक्रेन की मदद का दबाव रूस के खिलाफ युद्ध में अब अमेरिका के यूक्रेन की मदद नहीं करने से यूरोपीय देशों पर यूक्रेन की मदद का दबाव बनेगा। अब तक कई यूरोपीय देशों ने इस युद्ध में यूक्रेन की मदद की है, लेकिन उतनी नहीं जितनी अमेरिका ने की है। अमेरिका ने इस युद्ध की शुरुआत से ही यूक्रेन को वित्तीय सहायता के साथ ही सैन्य सहायता भी मुहैया कराई है। लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है। जिससे यूरोपीय देशों पर इस युद्ध में यूक्रेन को कमजोर न पड़ने देने का दबाव बनेगा। रूस को मिलेगा अमेरिका का सीधा समर्थन ट्रंप और जेलेंस्की की बहस के बाद अमेरिका और यूक्रेन में तकरार आ गई है। इस बहस का सीधा फायदा रूस को मिलेगा। ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अच्छे दोस्त हैं। ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति बनने के बाद से ही उनका झुकाव रूस की ओर रहा है। अब इस युद्ध में अमेरिका की तरफ से रूस को सीधा समर्थन मिल सकता है। हालांकि अमेरिका, रूस की इस युद्ध में कोई मदद नहीं करेगा, लेकिन अमेरिका की तरफ से रूस को समर्थन जरूर मिलेगा। व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप का मकसद शांति स्थापित करना है। हम चाहते हैं कि हमारा सहयोगी भी शांति के लिए प्रतिबद्ध हो। आज हम अपनी सहायता को रोक रहे हैं और उसकी समीक्षा कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह समाधान में सहयोग दे रही है। इधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन की मदद करने पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके प्रशासन की भी जमकर आलोचना की है। अमेरिका और यूक्रेन के बीच खनिज सौदे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, '…यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है क्योंकि बाइडेन ने बहुत ही मूर्खतापूर्ण तरीके से एक देश को युद्ध लड़ने के लिए 350 बिलियन डॉलर दे दिए… हमें कुछ नहीं मिला… हम 350 बिलियन डॉलर से अपनी पूरी अमेरिकी नौसेना का पुनर्निर्माण कर सकते थे…' recent visitors 52

‘किसी को मियां-टियां या पाकिस्तानी कहना गलत, पर अपराध नहीं’, आरोपी को दोषमुक्त करते हुए कोर्ट की टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय से जुड़ी टिप्पणी को लेकर अहम बात कही। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' कहना गलत होगा, लेकिन इससे उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं माना जाएगा। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 298 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना) के तहत आरोप से एक व्यक्ति को मुक्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पर उसे 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' कहकर उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है। अदालत ने कहा कि निस्संदेह, दिए गए कथन गलत है। हालाँकि, इससे याचिकाकर्ता की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुचती है। झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती जस्टिस बी वी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच झारखंड उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर विचार कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता को आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया गया था। मामला उप-विभागीय कार्यालय, चास में एक उर्दू अनुवादक और कार्यवाहक क्लर्क (सूचना का अधिकार) की तरफ से दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जब वह आरटीआई आवेदन के संबंध में जानकारी देने के लिए अपीलकर्ता से मिलने गया, तो आरोपी ने उसके धर्म का हवाला देकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया। साथ ही आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन को रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल किया। अदालत ने 11 फरवरी को दिए अपने फैसले में कहा, "निस्संदेह, दिए गए बयान सुनने में ठीक नहीं लगते हैं। लेकिन, इससे सूचना देने वाले की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचती। इसलिए, हमारा मानना है कि अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 298 के तहत आरोपमुक्त किया जाना चाहिए।" शिकायतकर्ता, जो एक उर्दू अनुवादक और सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कार्यवाहक क्लर्क है, ने अपीलीय प्राधिकारी के आदेश के बाद आरोपी सिंह को व्यक्तिगत रूप से कुछ जानकारी दी थी। सिंह ने शुरू में दस्तावेज स्वीकार करने में अनिच्छा दिखाई, लेकिन अंततः उन्होंने दस्तावेज स्वीकार कर लिए, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने शिकायतकर्ता के धर्म का हवाला देते हुए उसे अपशब्द कहे। यह भी आरोप लगाया गया कि सिंह ने शिकायतकर्ता को डराने और लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग किया। इसके परिणामस्वरूप सिंह के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिनमें धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान करना), 506 (आपराधिक धमकी), 353 (लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) शामिल हैं। मजिस्ट्रेट ने मामले की समीक्षा करते हुए धारा 353, 298 और 504 के तहत आरोप तय किए, जबकि साक्ष्य के अभाव में धारा 323 और 506 के तहत आरोपों को खारिज कर दिया। सिंह की आरोपमुक्ति की याचिका को पहले सत्र न्यायालय और बाद में राजस्थान उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया, जिसके बाद उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 353 के तहत आरोप को कायम रखने के लिए हमले या बल प्रयोग का कोई सबूत नहीं है। अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस प्रावधान के तहत आरोपी को आरोपमुक्त न करके गलती की है। शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 504 भी लागू नहीं होती, क्योंकि सिंह की ओर से ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया, जिससे शांति भंग हो सकती हो। धारा 298 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सिंह की टिप्पणी अनुचित थी, लेकिन आईपीसी के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए कानूनी तौर पर पर्याप्त नहीं थी। नतीजतन, सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। आईपीसी 504 के तहत आरोप नहीं लगा सकते आखिरकार, अपीलकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, 298 और 504 के तहत आरोप तय किए गए। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि शिकायत में अपराध के तत्व नहीं बताए गए थे। कोर्ट ने कहा कि जाहिर है, अपीलकर्ता ने धारा 353 आईपीसी को आकर्षित करने के लिए कोई हमला या बल का प्रयोग नहीं किया था। कोर्ट ने आगे कहा कि अपीलकर्ता पर धारा 504 आईपीसी के तहत आरोप नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि उसकी ओर से ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया जिससे शांति भंग हो सकती हो। recent visitors 50

कैबिनेट में विकास योजना के लिए नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 66 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया

भोपाल मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उज्जैन में महाकाल मंदिर में होमगार्ड स्वयंसेवी सैनिकों के 488 पद स्वीकृत करने की मंजूरी दी गई। इस पर सालाना 17 करोड़ रुपये का व्यय आएगा। एक वर्ष के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। मोहन कैबिनेट के अन्य अहम फैसले     विकास योजना के लिए नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 66 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया। अब विशेष क्षेत्र के बाहर यदि किसी विभाग को परियोजना लेकर आनी है तो उसे शासन द्वारा अनुमति दे दी जाएगी।     यह परियोजना किसी भी सूरत में 500 करोड़ रुपये से कम की नहीं होगी। इसके साथ ही गेहूं के समर्थन मूल्य के ऊपर 175 रुपये प्रति क्विंटल और 2024 में उपार्जित धान के लिए कृषकों को चार हजार रुपये प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन राशि देने के निर्णय का अनुसमर्थन किया गया।     प्रदेश में 30 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलेगा। इसमें समस्त जल संरचनाओं की संरक्षण और संवर्धन का काम होगा। आंगनबाड़ी के कार्यकर्ताओं को बच्चों को सामान्य ज्ञान देने के लिए प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। किसानों के लिए फैसले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार, 15 मार्च से शुरू होने जा रही गेहूं की एमएसपी दर पर खरीदी के तहत सरकार 175 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस देने का फैसला किया है। ये बोनस एमएसपी की दर 2425 रुपए के अतिरिक्त दिया जाएगा। यानी समर्थन मूल्य पर किसानों को 2600 रुपए प्रति क्विंटल के भाव मिलेंगे। यही नहीं धान पर 4 हजार प्रति हैक्टेयर प्रोत्साहन राशि देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। सीमांकन-बटांकन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन डिजीटाइलेशन के लिए बैठक में 138.41 करोड़ का प्रावधान करने का फैसला लिया गया। कैबिनेट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मास्टर टीचर का प्रशिक्षण देने का भी फैसला लिया गया। इसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सिखाया जाएगा कि आंगनवाड़ी आने वाले बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान के साथ सामान्य ज्ञान कैसे पढ़ाया जाए। एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए सरकार ने तय किया है कि प्लानिंग एरिया के बाहर भी उद्योग स्थापित हो सकेंगे। प्रस्ताव आने पर बड़े उद्योग प्लानिंग एरिया के बाहर स्थापित करने का फैसला सरकार ले सकेगी। सीएम का अभिनंदन बैठक की शुरुआत से पहले कैबिनेट के सदस्यों ने सफल जीआईएस को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का अभिनंदन किया। बैठक में 30.77 लाख करोड़ के निवेश जमीन पर उतारने की प्लानिंग साझा की गई। मुख्यमंत्री का फॉर्मूला तय किया गया कि सभी विभागों के प्रमुख सचिव हर सप्ताह निवेश प्रस्तावों की समीक्षा करेंगे। मुख्य सचिव हर महीने समीक्षा करेंगे और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हर दो महीने में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। जल संरचनाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए 30 मार्च से पूरे प्रदेश में जय गंगा जल संवर्धन अभियान चलेगा। 30 जून तक चलने वाले इस अभियान के तहत वॉटर रिचार्ज को लेकर भी काम होंगे। कैबिनेट ने फैसला लिया है कि भारतीय नया साल यानी गुड़ी पड़वा का पर्व सरकार धूमधाम से मनाएगी। गुड़ी पड़वा पर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम होंगे, तो उज्जैन में चल रहे विक्रमोत्सव के दौरान 30 मार्च को बड़ा आयोजन होगा। जनजातीय देवलोक की स्थापना और बजट सत्र की तैयारियां बैठक में एक और महत्वपूर्ण विषय जनजातीय देवलोक की स्थापना पर चर्चा होगी, जो राज्य के जनजातीय समुदाय के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके अलावा, 10 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र में पेश होने वाले बजट पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री इस सत्र में की जाने वाली नई घोषणाओं और योजनाओं को लेकर कैबिनेट के समक्ष अपनी राय रखेंगे। 15000 करोड़ रुपए से अधिक का होगा बजट बैठक में द्वितीय अनुपूरक बजट का भी अनुमोदन किया गया। यह 15000 करोड़ रुपये से अधिक होगा। 16 वें वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश की वित्तीय स्थिति और 2026 से 2031 तक के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त की जाने वाली राशि के संबंध में प्रस्तुतीकरण छह मार्च को होगा। इसमें सभी मंत्री उपस्थित रहेंगे। बजट सत्र के सवालों और सरकार की हाजिर जवाबी पर चर्चा मंत्रालय में हो रही इस बैठक में मंत्रियों को बजट सत्र के दौरान उठाए गए सवालों का समय पर जवाब देने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इस सत्र में सरकार की हाजिर जवाबी को लेकर भी चर्चा होगी, जिससे सरकार के संवाद कौशल और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। अनुपूरक बजट पर भी मंजूरी मिली बैठक में दूसरे अनुपूरक बजट के प्रस्तावों पर भी चर्चा की जाएगी। इस बजट में सड़क, बिजली, इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य विकास योजनाओं पर फोकस किया जाएगा। इसके अलावा, ब्याज की देनदारी से संबंधित बड़ी रकम को भी अनुपूरक बजट में शामिल किया जा सकता है। यह सरकार की वित्तीय स्थिति और विकास कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। recent visitors 53

Bhopal gas tragedy: यूका का 10 टन कचरा 75 घंटे में भस्म, मानक सीमा में उत्सर्जन का दावा

इंदौर  मध्यप्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे में से 10 टन अपशिष्ट को परीक्षण के तौर पर भस्म किए जाने की करीब 75 घंटे चली प्रक्रिया सोमवार को खत्म हो गई और इस दौरान पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), कार्बन और अलग-अलग गैसों का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने के कचरे के निपटान के पहले दौर के परीक्षण को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर एक निजी कंपनी के संचालित अपशिष्ट निपटान संयंत्र में अंजाम दिया गया। इस कचरे के निपटान की प्रक्रिया शुरू होने के बीच पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। इंदौर संभाग के आयुक्त दीपक सिंह ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘हमने पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र के भस्मक में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को परीक्षण के तौर पर जलाने की प्रक्रिया शुक्रवार (28 फरवरी) को शुरू की थी जो सोमवार को खत्म हो गई।’’ उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दल ने परीक्षण की पूरी निगरानी की और इस दौरान पीथमपुर और इससे करीब 30 किलोमीटर दूर इंदौर की वायु गुणवत्ता ‘‘सामान्य’’ बनी रही। सिंह ने बताया कि पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में दूसरे दौर के परीक्षण की तैयारी की जा रही है और इस चरण में भी यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को भस्म किया जाएगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक कचरे के निपटान के दौरान पिछले 24 घंटे में इस संयंत्र से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोजन क्लोराइड, हाइड्रोजन फ्लोराइड और टोटल ऑर्गेनिक कार्बन का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर पाया गया। विज्ञप्ति के मुताबिक पहले दौर के परीक्षण के दौरान हुए इन उत्सर्जनों का विश्लेषण किया जा रहा है और दूसरे दौर का परीक्षण चार मार्च (मंगलवार) से शुरू किया जाना प्रस्तावित है। रिपोर्ट आते ही शुरु होगा दूसरे चरण का ट्रायल वहीं आज यानी 4 मार्च से दूसरे चरण का ट्रायल शुरू होगा। श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि, पहले चरण में कचरे को 135 किलोग्राम प्रति घंटे की दर से जलाया गया था। अब दूसरे चरण में कचरे की जलाने की दर को बढ़ाकर 180 किलोग्राम प्रति घंटे किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि, पहले चरण की रिपोर्ट आज ही आ जाएगी, जिसके बाद ये फैसला लिया जाएगा कि, कचरे को आज कब जलाया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर ही दूसरे चरण के कचरे को जलाने की तैयारी शुरू की होगी। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर से हो रहा निष्पादन वहीं मामले में धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि "पीथमपुर में हाईकोर्ट के दिशा निर्देश पर ही कचरा जलाया जा रहा है. इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया है. उसी के अनुसार कचरे का निष्पादन होना है. उन्होंने बताया कचरे को अनलोड किए जाने और अलग-अलग पैकेट में तैयार करने के बाद अब वास्तविक रूप से कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है. 72 घंटे में जलेगा 10 टन कचरा इस प्रक्रिया के दौरान लगातार 72 घंटे तक करीब 10 टन कचरा जलाया जाएगा. जिसकी लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है. कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया जिन कर्मचारियों की ड्यूटी संयंत्र के अंदर है. वह भी प्रदूषण से सुरक्षा के तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए काम कर रहे हैं. वही शहर भर में लोगों को विश्वास में लेकर उन्हें कचरे की लाइव मॉनिटरिंग की भी सुविधा दी गई है. उन्होंने बताया कचरा जलाए जाने के दौरान पूरे पीथमपुर में कहीं कोई विरोध नहीं है." रामकी एनवायरो में जलेगा 10 टन कचरा दरअसल यूनियन कार्बाइड कचरे को लेकर लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुंचाने का परिणाम है. उन्होंने कहा इसके अलावा जो लोग विरोध कर रहे थे. उन्होंने भी कोर्ट के समक्ष अपना तर्क रखा, हालांकि कोर्ट ने ही अब कचरे के निष्पादन के आदेश दिए हैं, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था और तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कचरा जलाया जा रहा है. 900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में जलेगा कचरा परिसर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को अनलोड करने के बाद मिक्सिंग और जलाने की प्रक्रिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की देखरेख में की जा रही है. पहले कंटेनर से कचरा अलग किया गया. फिर संयंत्र के इंसीनरेटर में 900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में कचरे को जलाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे में नेपथॉल सेमी प्रोसैस्ट पेस्टिसाइड 47 समेत यूनियन कार्बाइड से इकठ्ठा मिट्टी के भी अवेशष हैं. यूनियन कार्बाइड में प्लांट के अंदर स्थित अन्य सामग्री भी कचरे में शामिल है, जिसे इंसीनरेटर में चूना मिलकर जलाया जा रहा है. 9-9 किलो के बनाए गए पैकेट 10 टन के कचरे को 72 घंटे यानि 3 दिन में जलाया जाएगा. जिसके लिए सबसे पहले 9-9 किलो के पैकेट बनाए गए हैं. हर पैकेट में साढ़े 4 किलो कचरा और इतनी ही मात्रा में चूना है. जिससे रासायनिक प्रभाव को न्यूट्रल किया जा सके. कचरा जलाने के लिए गुरुवार रात से ही इंसीनरेटर को चालू कर दिया गया था. जिसे 900 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रखने के लिए चालू रहना जरूरी है. शुक्रवार सुबह यह तापमान 850-900 डिग्री पहुंचा. फिर उसमें कचरे के पैकेट डालना शुरू किया गया. कचरे के जलने पर जो धुआं या गैस या तत्व निकलेगा, उस पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी नजर बनाए हुए हैं. विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाए जाने के दौरान पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र के आस-पास पांच स्थानों पर परिवेशीय वायु गुणवत्ता माप रहा है जिनमें तीन गांव शामिल हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाने का पहला परीक्षण करीब 75 घंटे चला और इस दौरान संयंत्र के भस्मक में हर घंटे 135 किलोग्राम कचरा डाला गया। उन्होंने बताया कि दूसरे दौर के परीक्षण के दौरान भस्मक में हर घंटे 180 किलोग्राम कचरा डाला जाएगा। द्विवेदी ने बताया कि पहले दौर के परीक्षण को करीब … Read more

मध्यप्रदेश के गौरवशाली इतिहास को फिर से जीवंत करेगा नया प्रवेश द्वार: मुख्यमंत्री यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ी घोषणा की है कि राजधानी भोपाल के प्रमुख मार्गों पर महापुरुषों के नाम से द्वार बनाए जाएंगे, जिससे भोपाल और मध्यप्रदेश के गौरवशाली इतिहास को संजोया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि एमपी की पहचान यहां के वीर शासकों से रही है और इस विरासत को सहेजने के लिए सरकार द्वारा ये निर्णय लिया गया है। भोपाल का इतिहास परमार राजाओं, गोंड शासकों और नवाबों से जुड़ा रहा है। वहीं, पूरे मध्य प्रदेश में सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज, चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, रानी दुर्गावती जैसे कई महान शासकों ने शासन किया है। सरकार की इस पहल से इन महापुरुषों की विरासत को और अधिक मजबूती मिलेगी। सीएम मोहन यादव की घोषणा ‘महापुरुषों के नाम पर बनेंगे द्वार’ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक गौरव को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा कि ‘भोपाल और पूरे मध्य प्रदेश की पहचान वीर शासकों से रही है। सम्राट विक्रमादित्य ने चक्रवर्ती सम्राट की तरह शासन किया। उनका न्याय, ज्ञान, वीरता, दानशीलता, धैर्य, पराक्रम, पुरुषार्थ कई गुणों से उनकी अलग पहचान रही है। उनके एक हजार साल बाद राजा भोज भी अद्वितीय शासक रहे हैं। राजा भोज के कारण भोपाल की विशेष पहचान है। ऐसे में हमारी सरकार ने तय किया है कि हमारी राजधानी का गौरवशाली अतीत है। उस अतीत को सामने लाने की आवश्यकता है। इसलिए राजधानी के प्रमुख मार्गों पर ऐसे महापुरुषों के नाम से द्वार बनाए जाएंगे, जिससे भोपाल और मध्यप्रदेश का गौरवशाली इतिहास संजोया जा सके। मध्यप्रदेश की विरासत को संजोने का फैसला प्रदेश सरकार का यह कदम भोपाल को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान देने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे न सिर्फ शहर की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि युवाओं और आने वाली पीढ़ी को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में परिचय मिलेगा। इस फैसले के तहत भोपाल के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐतिहासिक महत्व रखने वाले राजाओं, सम्राटों और अन्य महापुरुषों के नाम पर प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। इससे भोपाल में आने वाले पर्यटकों को भी राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी मिलेगी। ऐतिहासिक महत्व के द्वार भोपाल, जो पहले से ही ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है, अब इन विशेष स्मारक द्वारों के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपरा को और अधिक मजबूती से प्रदर्शित करेगा। इन द्वारों का निर्माण शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और प्रवेश स्थलों पर किया जाएगा। हर द्वार का नाम किसी महान नेता, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक या ऐतिहासिक शख्सियत के नाम पर रखा जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को जान सकें। पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा सरकार के इस फैसले से न केवल शहर की खूबसूरती बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। भोपाल आने वाले पर्यटक जब इन भव्य द्वारों को देखेंगे, तो उन्हें राज्य के गौरवशाली इतिहास की झलक मिलेगी। साथ ही, यह योजना प्रदेश के अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगी। इस निर्णय से राजधानी के नागरिकों को अपने राज्य के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर गर्व महसूस करने का अवसर मिलेगा। ये द्वार न केवल स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण होंगे, बल्कि वे राज्य की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक भी बनेंगे। recent visitors 54