उत्तराखंड : चमोली हिमस्खलन में मांड़ा गांव में 55 मजदूर में से 47 मजदूरों को रेस्क्यू कर लिया गया,जबकि 8 अभी फंसे हुए

चमोली उत्तराखंड के चमोली में एवलांच को आए 24 घंटे से ज्यादा हो गए. अभी भी 8 मजदूर फंसे हुए हैं. 47 मजदूरों का रेस्क्यू कर लिया गया है. बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन प्रोजेक्ट में कुल 57 लोग काम कर रहे थे, जिसमें से दो लोग छुट्टी पर थे. ये सभी एवलांच की चपेट में आ गए. हालांकि 47 लोगों को निकाल लिया गया है लेकिन 7 अभी भी फंसे हुए हैं. सेना, ITBP, BRO, SDRF और NDRF की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन कर रही है. मौसम चुनौती बना हुआ है. सेना का Mi-17 हेलिकॉप्टर स्टैंड बाय पर है. जैसे ही मौसम ठीक होता हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन तेज हो जाएगा. वहीं, सीएम धामी चमोली में ग्राउंड जीरों पर पहुंच गए हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा ले रहे हैं. फंसे मजदूरों को निकालने के लिए जारी है रेस्क्यू अभियान बचाव अभियान की जानकारी अपडेट करते हुए उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि फंसे हुए मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है. चमोली जिले के ऊंचाई वाले गांव मांड़ा में हिमस्खलन के कारण फंसे कुल 55 बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन) श्रमिकों में से 47 को बचा लिया गया है. 14 मजदूरों को शनिवार सुबह निकाला गया. जबकि 8 मजदूर अभी फंसे हुए हैं. एवलांच शुक्रवार सुबह 6:30 के करीब आया था. गंभीर रूप से घायल 3 श्रमिकों को आर्मी चिकित्सालय में कराया गया भर्ती मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मांड़ा के निकट हुए हिमस्खलन में फंसे हुए श्रमिकों को निकालने के लिए चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान के क्रम में 14 अन्य श्रमिकों को भी सकुशल बाहर निकाल लिया गया है. बाहर निकाले गए श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं. गंभीर रूप से घायल 3 श्रमिकों को आर्मी चिकित्सालय, जोशीमठ में उपचार हेतु भेज दिया गया है. अभी तक कुल 47 श्रमिकों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है. फंसे हुए अन्य श्रमिकों को भी जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कार्य किया जा रहा है. इन राज्यों के हैं मजदूर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी सूची के अनुसार फंसे हुए मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर सहित अन्य राज्यों से हैं. ऋषिकेष-बद्रीनाथ हाइवे पर भी गिरा पहाड़ों का मलबा कर्णप्रयाग के पास ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाइवे पर भी पहाड़ों का मलबा गिर गया. जिससे ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाइवे अवरुद्ध हो गया है.  इसका वीडियो भी सामने आया है. जिसमें देखा जा सकता है कि रास्ते पर बड़े-बड़े पत्थर गिरे हुए हैं. हालांकि, पत्थरों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है. recent visitors 43

बोट क्लब पर 3 मार्च से 7 मार्च तक 42वीं नेशनल रोइंग चैंपियनशिप का आयोजन, CM डॉ. मोहन करेंगे शुभारंभ

भोपाल राजधानी भोपाल के बड़े तालाब स्थित मध्यप्रदेश राज्य वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी, बोट क्लब पर 3 मार्च से 7 मार्च तक 42वीं नेशनल रोइंग चैंपियनशिप का आयोजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 3 मार्च को प्रतियोगिता का शुभारंभ करेंगे। प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ी रोइंग, क्याकिंग-केनोइंग, सेलिंग और स्लालम खेलों की विशेष प्रस्तुति देंगे। इस अवसर पर खेल प्रेमियों को जल क्रीड़ा का अद्भुत नज़ारा देखने को मिलेगा। चैंपियनशिप में 25 राज्यों से लगभग 500 प्रतिभागी भाग लेंगे। जिसमें रोइंग के कुल 14 इवेंट होंगे। यह चैंपियनशिप देश के शीर्ष रोवर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करेगी। इन कैटेगरी में होगी प्रतियोगिताएं 42वीं नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में सीनियर पुरूष, सीनियर महिला और पैरा रोइंग स्पर्धाओं के अंतर्गत विभिन्न प्रतिस्पर्धाएँ आयोजित की जाएँगी। सभी स्पर्धाएं 2000 मीटर की दूरी पर आयोजित की जाएँगी। सीनियर मेन्स वर्ग में सिंगल स्कल्स (M1X), डबल स्कल्स (M2X), कॉक्सलेस पेयर्स (M2-), कॉक्सलेस फोर्स (M4-), लाइटवेट मेन डबल स्कल्स (LM2X), ओपन डबल स्कल्स (M2X – सिविलियन), कॉक्सलेस फोर्स (M4- – सिविलियन), क्वाड्रपल स्कल्स (M4X) और कॉक्स्ड ईट्स (M8+) शामिल हैं। सीनियर महिला वर्ग में सिंगल स्कल्स (W1X), डबल स्कल्स (W2X), कॉक्सलेस पेयर्स (W2-), कॉक्सलेस फोर्स (W4-), लाइटवेट वुमन डबल स्कल्स (LW2X), क्वाड्रपल स्कल्स (W4X) और कॉक्स्ड ईट्स (W8+) की स्पर्धाएं होंगी। पैरा रोइंग स्पर्धाओं में पैरा मेन सिंगल स्कल (PR3M1X) और पैरा वुमन सिंगल स्कल (PR3W1X) प्रतियोगिताएँ होंगी। recent visitors 60

भारत के आर्थिक भविष्य की राह, 2047 तक ‘विकसित’ हो पाएगा भारत: World Bank

नई दिल्ली विश्व बैंक की  जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए औसतन 7.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि करनी होगी। विश्व बैंक ने पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को वित्तीय क्षेत्र के साथ-साथ भूमि और श्रम बाजार में भी सुधार की आवश्यकता होगी। विश्व बैंक की रिपोर्ट का शीर्षक है – 'एक पीढ़ी में उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनना'। भारत की पिछली उपलब्धियां भविष्य की महत्वाकांक्षाओं का आधार वर्ष 2000 से 2024 के बीच भारत की औसत 6.3 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि दर को मान्यता देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की पिछली उपलब्धियां उसकी भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के लिए आधार प्रदान करती हैं। "हालांकि, 2047 तक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंचना सामान्य स्थिति में संभव नहीं होगा… भारत को 2047 तक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के लिए, इसकी प्रति व्यक्ति जीएनआई (सकल राष्ट्रीय आय) को वर्तमान स्तरों से लगभग 8 गुना बढ़ाना होगा; विकास को और तेज करना होगा और अगले दो दशकों तक उच्च रहना होगा, एक ऐसी उपलब्धि जिसे कुछ ही देश हासिल कर पाए हैं। सुधारों को विस्तारित कर तेज करने की जरूरत विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, "इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, कम अनुकूल बाह्य वातावरण को देखते हुए, भारत को न केवल चल रही पहलों को जारी रखना होगा, बल्कि सुधारों को विस्तारित और तीव्र करना होगा।" हाल के वर्षों में, भारत ने देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदलने, बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने, मानव पूंजी में सुधार करने और डिजिटलीकरण का लाभ उठाने के लिए कई संरचनात्मक सुधार शुरू किए हैं, जबकि इसके साथ ही व्यापक आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ावा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है, "वर्ष 2047 तक उच्च आय तक पहुंचने के लिए, भारत की विकास दर को आने वाले दशकों में वास्तविक रूप में औसतन 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने की आवश्यकता है… केवल 'त्वरित सुधार' पैकेज ही भारत को वर्ष 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के मार्ग पर ला सकता है।" चिली, कोरिया और पोलैंड से मिले सबक के साथ आगे बढ़ सकता है भारत विश्व बैंक के भारत निदेशक ऑगस्टे तानो कोउमे ने कहा कि चिली, कोरिया और पोलैंड जैसे देशों से प्राप्त सबक यह दर्शाते हैं कि किस प्रकार उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपने एकीकरण को गहन करते हुए मध्य आय वाले देशों से उच्च आय वाले देशों में सफलतापूर्वक परिवर्तन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशकों में भारत ने उस पैमाने और गति से विकास किया है जिसके बारे में बहुत कम लोगों ने सोचा होगा। वर्ष 2000 से लेकर आज तक, वास्तविक अर्थों में, अर्थव्यवस्था लगभग चार गुना बढ़ी है, और प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद लगभग तीन गुना हो गया है। चूँकि भारत बाकी दुनिया की तुलना में तेज़ी से बढ़ा है, इसलिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी वर्ष 2000 में 1.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023 में 3.4 प्रतिशत हो गई है। भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, "इस उल्लेखनीय विकास की कहानी में अत्यधिक गरीबी में भारी गिरावट, तथा सेवा वितरण और आवश्यक बुनियादी ढांचे का व्यापक विस्तार भी शामिल है। इन उपलब्धियों के आधार पर, भारत ने 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।" विश्व बैंक ने 22 वर्षों में भारत की विकास गति का किया मूल्यांकन कौमे ने कहा कि भारत सुधारों की गति बढ़ाकर तथा अपनी पिछली उपलब्धियों के आधार पर अपना रास्ता स्वयं बना सकता है। रिपोर्ट में अगले 22 वर्षों में भारत की विकास गति के लिए तीन परिदृश्यों का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के सह-लेखक एमिलिया स्क्रोक और रंगीत घोष ने कहा, "भारत मानव पूंजी में निवेश करके, अधिक और बेहतर नौकरियों के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करके और 2047 तक महिला श्रम बल भागीदारी दर को 35.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक बढ़ाकर अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठा सकता है।" इसमें कहा गया है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में भारत ने अपनी औसत वृद्धि दर को बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर लिया है।   recent visitors 53

आज से मध्यप्रदेश सरकार खरीदेगी समर्थन मूल्य पर गेहूं, 3 लाख किसानों ने कराया है पंजीयन

भोपाल मध्य प्रदेश में किसान साथियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य में आज से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद शुरू होने जा रही है। पहले चरण में, इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में खरीद आज से 18 अप्रैल तक चलेगी। अब तक तीन लाख से ज्यादा किसान गेहूं बेचने के लिए पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। खरीद का दूसरा चरण 17 मार्च से 5 मई तक चलेगा। किसानों को सुविधा देने के लिए, प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरुण शमी ने बताया है कि किसान 31 मार्च तक एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी होगी और उन्हें उचित मूल्य मिलेगा। सरकार ने 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का टारगेट तय किया है। इसके लिए प्रदेश में 3600 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। केंद्र सरकार ने 2425 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय किया है। सोमवार से शुक्रवार तक सुबह आठ से रात आठ बजे तक खरीदी होगी। recent visitors 25

आज बालाघाट जिले के प्रवास पर रहेगें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दिव्यांगों को 2.64 करोड़ के बांटेंगे उपकरण

बालाघाट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज बालाघाट जिले के प्रवास पर रहेगें। मुख्यमंत्री इस प्रवास में अलग-अलग 2 स्थानों पर जिसमें बालाघाट मुख्यालय व लांजी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होगें। जिसे लेकर यहां पर तैयारी शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरा कार्यक्रम के अनुसार डॉ. मोहन यादव का पहला कार्यक्रम बालाघाट मुख्यालय में रेंजर कालेज परिसर में होगा। जिसमें वे यहां पर 27 सौ से अधिक दिव्यांगों को उपकरण वितरण और उन्हें बस व रेल्वे पास की सुविधा प्रदाय करेगें। इसके अलावा किसान सम्मेलन में शामिल होगें। साथ ही हॉकी एस्ट्रो टर्फ मैदान का लोकापर्ण, सीएम राइज स्कूल भवन का लोकापर्ण सहित कई कार्यो की आधारशिला रखेगें। कोटेश्वर धाम महोत्सव मेले में होंगे शामिल इस कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री लांजी पहुंचेंगें, जहां वे कोटेश्वर धाम महोत्सव में शामिल होगें। यहां पर प्राचीन शिवलिंग जिसे 108 उपलिंगों में एक गिना जाता हैं, कोटेश्वर धाम स्थल पहुंचकर पूजन करेगें। इसके बाद वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा व भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण करेगें। तत्पश्चात एक जनसभा को संबोधित करेगें। यहां पर पहली बार 8 दिवसीय कोटेश्वर महोत्सव का आयोजन किया गया हैं। मुख्यमंत्री के इस प्रवास को लेकर प्रशासन की ओर से आवश्यक तैयारी की जा रही है व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखे जा रहे हैं। हालांकि अभी मुख्यमंत्री का अधिकृत दौरा कार्यक्रम जारी नहीं हुआ हैं। recent visitors 47

मोहन सरकार ला रही 4 लाख करोड़ से अधिक का बजट, गरीब, किसान, महिला और युवा पर जोर रहेगा

भोपाल  ग्लोबल इंवेस्टर समिट में आए बंपर निवेश प्रस्तावों के बाद राज्य सरकार अब बजट की तैयारियों में जुट गई है. मध्य प्रदेश सरकार का बजट 12 मार्च को पेश होगा. इस बार मध्य प्रदेश का बजट 4 लाख करोड़ से ज्यादा का रहने की उम्मीद है. इसमें राज्य सरकार प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रावधान करेगी, वहीं 2028 में होने वाले सिंहस्थ के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए जाएंगे. मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 10 मार्च से शुरू होने जा रहा है. सत्र की शुरुआत राज्यपाल मंगूभाई पटेल के अभिभाषण से होगी. 11 मार्च को राज्य सरकार अपना आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी, इसके बाद बजट पेश किया जाएगा. सकल घरेलू उत्पाद और आर्थिक वृद्धि की उम्मीद आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 15 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष 2023-24 में 13 लाख 63 हजार करोड़ रुपए था। इससे यह भी संभावना जताई जा रही है कि राज्य को आगामी बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 15 हजार 908 करोड़ रुपए अधिक मिल सकते हैं। नारी, किसान और गरीब कल्याण पर विशेष ध्यान बजट में महिला सशक्तीकरण (Women Empowerment), गरीब कल्याण (Welfare of Poor), युवा कल्याण (Youth Welfare) और किसान कल्याण (Welfare of Farmers) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवास निर्माण (Housing Construction) के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए जाएंगे। साथ ही, जनजातीय कार्य और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग (Scheduled Caste Welfare) के बजट में भी वृद्धि की उम्मीद है। जल जीवन मिशन के लिए विशेष योजनाएं मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास (Industrial Development) के लिए 18 नई नीतियां लागू करने की योजना है। इससे उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, भोपाल (Bhopal) में एक बड़ा कन्वेंशन सेंटर (Convention Center) बनाने का प्रस्ताव है। सरकार इस बार पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए से अधिक करने की योजना बना रही है। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के तहत राज्य को अतिरिक्त 20 हजार करोड़ रुपए मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग जल आपूर्ति योजनाओं (Water Supply Plans) को तेजी से लागू करने में किया जाएगा, जिससे 36 लाख घरों में नल से जल पहुंचाने की उम्मीद है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव केंद्रीय बजट (Union Budget) में मेडिकल सीटों (Medical Seats) की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत अगले साल मध्य प्रदेश में 12 नए मेडिकल कॉलेज (Medical Colleges) खुलेंगे, जिससे 2 हजार अतिरिक्त मेडिकल सीटें उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, अगले तीन सालों में राज्य के हर जिले में एक कैंसर सेंटर (Cancer Center) खोलने की योजना है। इस योजना से मध्य प्रदेश में भी कैंसर सेंटर की स्थापना होने की संभावना है। विधायकों ने पूछे 2939 सवाल, कांग्रेस ने की तैयारी विधानसभा के लिए विधायकों ने भी तैयारियां शुरू कर दी है. अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में सरकार के सामने उठाने के लिए कांग्रेस और बीजेपी विधायकों ने 2939 सवाल विधानसभा में लगाए हैं. इन सवालों पर विभिन्न विभागों ने जवाब लिखकर भेजना शुरू कर दिया है. हालांकि, यह दूसरा मौका है जब विधायकों ने ऑफलाइन सवालों से ज्यादा ऑनलाइन सवाल पूछे हैं. विधायकों ने 1785 सवाल ऑनलाइन और 1154 सवाल ऑफलाइन पूछे हैं. इसमें 1448 तारांकित (वह प्रशन जिसका उत्तर सदस्य सदन में मौखिक रूप में देना चाहता है) और 1491 सवाल अतारांकित (ऐसे प्रशन जिनका उत्तर सदस्य लिखित रूप में सदन में रखे जाते हैं.) हैं. मध्य प्रदेश विधानसभा की पूरी प्रक्रिया को अगले विधानसभा सत्र से ऑनलाइन किया जा रहा है, इसके पहले विधायकों द्वारा भी ज्यादा सवाल ऑनलाइन पूछना शुरू कर दिए हैं. कांग्रेस बोली सड़क से सदन तक घेरेंगे कांग्रेस सदन में सरकार को घेरने के लिए रणनीति बनाने में जुटी है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार सदन में चर्चा से भाग रही है, इसलिए अब तक का सबसे छोटा सत्र बुलाया गया है, लेकिन कांग्रेस जनता से जुड़े एक-एक मुद्दे सदन में उठाएगी और सरकार को इन पर जवाब देने के लिए मजबूर करेगी. कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया के मुताबिक कांग्रेस द्वारा '' आदिवासी, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा.'' अब तक का सबसे छोटा बजट सत्र मध्य प्रदेश विधानसभा का यह बजट सत्र पिछले 25 सालों में अब तक सबसे छोटा सत्र होगा. 10 मार्च से शुरू होने वाले इस सत्र में सिर्फ 9 बैठकें प्रस्तावित हैं. इन 9 दिनों में सरकार बजट पेश करेगी और विभागवार बजट पर चर्चा भी की जाएगी. हालांकि, बजट सत्र छोटा होने के खिलाफ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं. गौरतलब है कि 2024 में मोहन सरकार के बजट सत्र की अवधि 14 दिन की थी, लेकिन इसमें भी सिर्फ 5 बैठकें हुई थी. recent visitors 36

आज 1 मार्च से गर्मी का सीजन शुरू, होली के बाद तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर पहुंचेगा

भोपाल मध्यप्रदेश में सर्दी का सीजन 28 फरवरी को खत्म गया  और 1 मार्च से गर्मी का सीजन शुरू हुआ । इस बार सर्दी के ट्रेंड में काफी बदलाव देखने को मिला। न पूरे सीजन में शीतलहर चली। दिन में दो दिन ही कड़ाके की सर्दी रही। दिन व रात का तापमान सामान्य से ऊपर रहा और सर्दी भी देर से आई और जल्द विदा हो गई। अब मार्च(MP Weather Update) में गर्मी की शुरुआत होगी। होली के बाद तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर जा सकता है। दरअसल अक्टूबर व नवंबर में कड़ाके की सर्दी नहीं रही और 20 दिसंबर के बाद तापमान में गिरावट दर्ज हुई। दिसंबर में एक कोल्ड डे रहा, जबकि जनवरी में एक सीवियर कोल्ड डे रहा। इस बार ग्वालियर चंबल संभाग कम ठिठुरा है, जबकि प्रदेश के मध्य हिस्से(MP Weather Update) में सबसे ज्यादा सर्दी रही। इस हिस्से में शीतलहर चली, जबकि ग्वालियर में शीतलहर नहीं चल सकी। न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं आ सका। सर्दी के दिन काफी कम रहे। फरवरी में तापमान सामान्य से नीचे नहीं आया।  भारत इस साल मार्च महीने में बहुत ज्यादा गर्मी का सामना कर सकता है. पूरे महीने औसत से अधिक तापमान बने रहना का अनुमान है. इस अधिक गर्मी से पकते हुए गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है, जिससे उसकी उपज कम हो सकती है.  इस साल मार्च के महीने में रिकॉर्ड गर्मी पड़ने की संभावना है. पूरे महीने ज्यादातर दिन और रात के समय तापमान औसत से अधिक रह सकता है. अधिकारी ने बताया कि मार्च के दूसरे हफ्ते से दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने का अनुमान है और महीने के अंत तक कई राज्यों में अधिकतम पारा 40 डिग्री (104°F) के पार जाने की संभावना है रिकॉर्ड गर्मी से गेहूं की उपज होगी प्रभावित दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश होने के नाते भारत 2025 में अच्छी फसल की उम्मीद कर रहा है ताकि 2022 से 2024 तक लगातार तीन सालों की खराब फसल के बाद महंगे आयातों से बचा जा सके. हालांकि, अत्यधिक गर्मी से चौथे साल भी पैदावार कम हो सकती है, जिससे सरकार को आयात पर लगे 40% टैक्स को कम या हटा कर आयात की अनुमति देनी पड़ सकती है, ताकि सप्लाई की कमी को दूर किया जा सके. यह स्थिति 2022 की याद दिलाती है, जब फरवरी और मार्च में अचानक आई गर्मी ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद भारत को घरेलू सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए गेहूं के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी थी. मौसम विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उत्तर और मध्य भारत के गेहूं उत्पादक राज्यों में मार्च के मध्य से तापमान में तेज वृद्धि होने की संभावना है – जो संभवतः सामान्य से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकती है. अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा, "मार्च का मौसम गेहूं, चना और तिलहन के लिए अनुकूल नहीं होगा, जिससे इन पर गर्मी का असर पड़ सकता है." ये शीतकालीन फसलें, जिन्हें आमतौर पर अक्टूबर और दिसंबर के बीच बोया जाता है, अधिक उपज हासिल करने के लिए अपने पूरे विकास साइकिल में ठंडे तापमान पर निर्भर रहती हैं. गर्मी की मौजूदा हालात के कारण इस महीने घरेलू गेहूं की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, और सप्लाई कम हो गई है. एक वैश्विक व्यापारिक फर्म के साथ जुड़े नई दिल्ली स्थित एक व्यापारी ने कहा कि फरवरी असामान्य रूप से गर्म थी, और यदि मार्च और भी अधिक गर्म हुआ, तो गेहूं उत्पादन पर भारी असर पड़ सकता है." दिल्ली में टूटा 74 साल का रिकॉर्ड इस बीच, मौसम विभाग ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में  (गुरुवार, 27 फरवरी) के तापमान ने 74 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और फरवरी में अब तक की सबसे गर्म रात दर्ज की गई है। IMD के मुताबिक, सफदरजंग में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 1951 से 2025 के बीच की अवधि में इस महीने का सबसे अधिक तापमान है। आईएमडी ने कहा, " 27 फरवरी, 2025 को सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1951 और 2025 के बीच सफदरजंग में फरवरी में दर्ज किया गया अब तक का सबसे अधिक न्यूनतम तापमान है।" मौसम विभाग ने यह भी कहा कि 1951 से पहले का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। इस बीच, पिछले रिकॉर्ड के अनुसार, फरवरी का पिछला उच्चतम न्यूनतम तापमान 25 फरवरी, 2015 को 19 डिग्री सेल्सियस था, जो रिकॉर्ड पर दूसरा सबसे अधिक तापमान था। इसके बाद 1973 में 18.6 डिग्री सेल्सियस, 20 फरवरी, 2015 को 18.5 डिग्री सेल्सियस, 1992 में 18.2 डिग्री सेल्सियस और 1988 में 18.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पांचवां सबसे अधिक तापमान था। बादल छाए रहने के कारण, गुरुवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी ने बताया कि यह सामान्य औसत से 1.1 डिग्री कम है। इस कारण नहीं पड़ी सर्दी     इस बार का सर्दी का सीजन पश्चिमी विक्षोभ से प्रभावित रहा। हफ्ते में दो पश्चिमी विक्षोभ आए, जिसकी वजह से उत्तरी हवा नहीं चल सकी। दक्षिण पश्चिमी व पूर्वी हवा का प्रभाव रहा। इस वजह से दिन व रात के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं आई। नमी के कारण कोहरा छाया, लेकिन कोहरे के कारण ठंडक नहीं रही।     फरवरी में भी वैसी ही स्थिति रही। पश्चिमी व दक्षिण से हवा चली। इससे दिन व रात का तापमान सामान्य से ऊपर रहा और फरवरी में सर्दी नहीं पड़ी। 2024 में पड़ी थी कड़ाके की सर्दी दिसंबर 2023 में कोल्ड डे व सीवियर कोल्ड रहे। इस कारण दिसंबर में भी काफी सर्दी पड़ी थी। जनवरी 2024 में 9 सीवियर कोल्ड, 3 कोल्ड रहे, लेकिन शीतलहर नहीं चली। 31 में से 28 दिन दिन का तापमान सामान्य से नीचे रहा है। फरवरी भी सर्दी नहीं पड़ी। अधिकतम व न्यूनतम तापमान से ऊपर रहा। दिन में चटकी तेज धूप गुरुवार को हवा का रुख पश्चिमी दिशा से रहा। इस कारण दिन में तेज धूप निकली और हल्के बादल भी छाए, लेकिन तापमान 34.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 5.2 डिग्री सेल्सियस … Read more