रतलाम-महू-खंडवा-अकोला रूट पर डाली जा रही नई लाइन के साथ ही एक और लाइन डाली जाएगी, सर्वे की मंजूरी

 रतलाम मध्यप्रदेश में रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट में एक और लाइन का प्रस्ताव रेलवे ने किया है। इस रूट पर डाली जा रही नई लाइन के साथ ही एक और लाइन डाली जाएगी। इसके सर्वे की मंजूरी रेलवे ने दे दी है।  इंदौर से खंडवा के बीच अब डबल लाइन होगी। इससे इंदौर का रेल नेटवर्क और मजबूत होगा। मुख्य लाइन का काम पहले से ही चल रहा है। डबल ट्रैक के सर्वे लिए रेलवे ने 2.24 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। 2 हजार करोड़ से ज्यादा लागत मालूम हो, रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट के जरिए इंदौर का डेड एंड खत्म हो सकेगा। महाराष्ट्र से सीधा जुड़ाव होगा। इससे 13 गांव कनेक्ट होंगे। बजट में पिछले साल इस प्रोजेक्ट को 910 करोड़ मिले थे। 2008 में प्रोजेक्ट को विशेष दर्जा मिला है। इसकी लागत 2 हजार करोड़ से ज्यादा है। रेलवे ने पातालपानी से बलवाड़ा तक डायवर्टेड रेल लाइन के 468.65 करोड़ के टेंडर जारी किए हैं। इसमें सबसे प्रमुख दो बड़ी सुरंगें भी हैं। इसके पहले 4 किमी की टनल का टेंडर भी किया जा चुका है। मिलेंगी ज्यादा ट्रेनें वन विभाग की जमीन को छोड़कर कई हिस्सों में काम चल रहा है। सांसद शंकर लालवानी ने इंदौर से खंडवा तक एक लाइन और डालने की मांग रेलवे से की थी। सर्वे के बाद ही आगे की प्रक्रिया हो सकेगी। डबल लाइन होने से इंदौर को ज्यादा ट्रेनें मिल सकेंगी। 2 हजार करोड़ से अधिक खर्च ज्ञात होता है कि रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज परियोजना से इंदौर का डेड एंड समाप्त हो सकेगा। सीधा महाराष्ट्र से जुड़ाव होगा। इससे 13 गांव जुड़ेंगे। पिछले साल बजट में इस परियोजना को 910 करोड़ रुपये मिले थे। 2008 में योजना को विशिष्ट दर्जा दिया गया है। इसका खर्च दो हजार करोड़ से अधिक है। पातालपानी से बलवाड़ा तक विस्तृत रेल लाइन के 468.65 करोड़ के टेंडर रेलवे ने बनाए हैं। इसमें दो सबसे महत्वपूर्ण सुरंगें भी हैं। इससे पहले चार किमी की एक टनल भी टेंडर की गई है। अतिरिक्त लाइन बनाने की मांग वन विभाग की जमीन के अलावा कई स्थानों पर काम चल रहा है। सांसद शंकर लालवानी ने रेलवे से इंदौर से खंडवा तक एक अतिरिक्त लाइन बनाने की मांग की थी। सर्वे के बाद ही अगले कदम उठाया जा सकेगा। डबल लाइन बनाने से इंदौर अधिक ट्रेनें पा सकेगा। recent visitors 61

पत्थरबाजों को ट्रैक करने रतलाम पुलिस का हाईटेक प्लान, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर ड्रोन से निगरानी

रतलाम  एमपी के रतलाम-झाबुआ क्षेत्र से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर लगातार पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए अब रतलाम पुलिस नाइट विजन ड्रोन का सहारा ले रही है. 8 लेन पर पत्थरबाजी कर भाग जाने वाले बदमाशों को अब नाइट विजन ड्रोन की मदद से ट्रैक किया जा सकेगा और धरपकड़ भी की जाएगी. इससे पूर्व पुलिस ने इन क्षेत्रों में कैंप लगाकर और रेंडम पेट्रोलिंग कर स्थानीय ग्रामीणों से पत्थरबाजी रुकवाने में मदद करने की अपील भी की थी. जिसका कुछ असर भी देखने को मिला था. लेकिन बीते दिनों फिर से पत्थर बाजी की घटनाएं हुई हैं. एसपी ने ड्रोन उड़ाकर की टेस्टिंग वहीं, अब पुलिस पत्थरबाजी करने वाले बदमाशों को टेक्नोलॉजी की मदद से ट्रैक करने का प्रयास कर रही है. रतलाम एसपी ने पुलिस अधिकारियों के साथ पत्थरबाजी वाले क्षेत्र में ड्रोन उड़ाकर इसका परीक्षण भी किया है. वहीं, हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाने के साथ 90 किलोमीटर के इस हिस्से में पुलिस चौकियां भी बनाई जाएंगी. बीते कुछ महीनों में पत्थर बाजी की करीब दर्जन भर घटनाएं सामने आई हैं. इसके बाद पुलिस पेट्रोलिंग भी इस क्षेत्र में बढ़ाई गई है. एक्सप्रेस वे पर पुलिस चौकियां खोलने का प्रस्ताव भेजा दरअसल, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर जब से आवागमन शुरू हुआ है, तब से ही झाबुआ के थांदला, रतलाम के शिवगढ़, रावटी और औद्योगिक थाना क्षेत्र में पत्थरबाजी की घटनाओं की कई शिकायत दर्ज हुई हैं. कई मामलों में तो राहगीर शिकायत किए बिना ही आगे रवाना हो जाते हैं. जिसकी वजह से पत्थरबाजी की घटनाओं के लिए दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा बदनाम होने लगा है. रतलाम पुलिस प्रशासन ने करीब 90 किलोमीटर के इस हिस्से पर पुलिस चौकियां खोलने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा है. ड्रोन से ट्रैक होंगे पत्थरबाज वहीं, पुलिस पेट्रोलिंग के साथ ही नाइट विजन कैमरों से निगरानी भी करेगी. एनएचएआई के साथ मिलकर पुलिस ड्रोन उड़ाकर पत्थरबाजी करने वाले लोगों को ट्रैक करेगी. पूर्व में अंधेरे का फायदा उठाकर पत्थरबाजी करने वाले बदमाश भाग जाया करते थे, जिन्हें ढूंढना और पकड़ना मुश्किल होता था. लेकिन अब हाई क्वालिटी के नाइट विजन ड्रोन के फुटेज के आधार पर पत्थरबाजी करने वाले और 8 लेन पर चोरी, तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर पकड़ा जा सकेगा. सामाजिक तत्वों पर लगेगा अंकुश रतलाम एसपी अमित कुमार ने बताया कि, ''एक्सप्रेस वे पर पुलिस चौकियां खोलने के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है. वहीं, इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के साथ संवाद कर ऐसा करने वाले और सामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जाएगा.'' बहरहाल रतलाम पुलिस अब दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे पर पत्थरबाजी रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है. जिससे यहां से रात में गुजरने वाले यात्री सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे. recent visitors 64

नड्डा के बाद कौन संभालेगा BJP की कमान?होली से पहले बीजेपी को मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष!

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 15 मार्च तक अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है. राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है और यह राज्य इकाइयों में पार्टी के चुनाव के बाद होगा.राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है और यह जनवरी में पूरा हो जाना चाहिए था. हालांकि, दिल्ली विधानसभा चुनाव और लंबित राज्य इकाई चुनावों ने जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के चुनाव में देरी हो रही है. भाजपा के संविधान के अनुसार, आधे राज्यों में चुनाव से पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया जा सकता है. अब तक भाजपा ने 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में से 12 में चुनाव पूरे कर लिए हैं. अभी तक 12 राज्यों में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया गया है. यूपी प्रदेश अध्यक्ष का जल्द होगा ऐलान बीजेपी 2 से 3 दिन में यूपी के जिलाध्यक्षों की घोषणा करेगी. उसके बाद यूपी के बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव होगा. एक हफ्ते से दस दिन में यूपी बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा. बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा जल्द ही की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक यह ऐलान अगले दो हफ्ते के भीतर हो सकता है। पार्टी के संगठनात्मक चुनाव 12 राज्यों में पूरे हो चुके हैं और माना जा रहा है कि अध्यक्ष का नाम 15 मार्च से पहले घोषित किया जा सकता है। उसके बाद हिन्दू कैलेंडर के अनुसार अशुभ अवधि शुरू हो जाती है। चुनाव वाले राज्यों पर बीजेपी की नजर बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम से कम आधे राज्यों में संगठनात्मक चुनाव होना जरूरी है। इससे पहले, बूथ, मंडल और जिला स्तर पर चुनाव होते हैं। अभी 36 राज्यों में से सिर्फ 12 में ही चुनाव पूरे हुए हैं। इसलिए कम से कम 6 और राज्यों में चुनाव कराने की जरूरत है। बीजेपी उन राज्यों में इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जैसे तमिलनाडु, बंगाल, असम और गुजरात। बिहार में कोई बदलाव नहीं होगा, जहां इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं। किन बातों पर है पार्टी का फोकस? बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार का चयन कई बातों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सबसे जरूरी है कि उम्मीदवार को सभी का समर्थन हासिल हो, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी शामिल है। साथ ही उम्मीदवार को संगठनात्मक मूल्यों से ओतप्रोत होना चाहिए। पार्टी जातिगत समीकरण, उत्तर-दक्षिण भाषा विवाद, परिसीमन और सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में अपने जनाधार को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी को झटका लगा था, जिससे उसे सदन में पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया था। जेपी नड्डा ने 2019 से संभाली है जिम्मेदारी जेपी नड्डा ने 2019 में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पार्टी की जिम्मेदारी संभाली थी। जनवरी 2020 में, उन्हें सर्वसम्मति से बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया और उन्होंने वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पदभार ग्रहण किया। लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनका कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था। सरकार में शामिल होने के साथ, पार्टी उनके उत्तराधिकारी के लिए संभावित उम्मीदवारों की तलाश कर रही है। लेकिन यह प्रक्रिया धीमी रही है, क्योंकि नेता इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने की उम्मीद कर रहे हैं। कई नामों पर चर्चा हो रही है, लेकिन पार्टी किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है। जेपी नड्डा को पहली बार 17 जून, 2019 को पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया था और वे 20 जनवरी, 2020 तक इस पद पर बने रहे. 20 जनवरी, 2020 को उन्हें पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुना गया और तब से वे इस पद पर हैं. जेपी नड्डा के नेतृत्व में पार्टी ने कई राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है. इसी तरह से लोकसभा चुनाव में भी जीत हासिल कर पार्टी फिर से सत्ता में वापसी की है. अटल बिहारी वाजपेयी 1980 से 1986 तक भाजपा के पहले अध्यक्ष थे. लाल कृष्ण आडवाणी कई कार्यकालों तक इस पद पर रहे. recent visitors 74

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्यप्रदेश तेजी से एक नए युग में प्रवेश कर रहा है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश तेजी से एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। राज्य के प्रत्येक कोने को आपस में जोड़ने और आर्थिक विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए आधुनिक सड़क अवसंरचना तैयार है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट भोपाल के पहले ही दिन, हमारी सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ 1 लाख करोड़ रूपये के ऐतिहासिक समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये एमओयू राज्य में 4010 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं के निर्माण और विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे। इससे मध्यप्रदेश भविष्य में न केवल देश का, बल्कि दक्षिण एशिया का एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये समझौते केवल सड़कें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन और बेहतर जीवनशैली के लिए आधार स्तंभ साबित होंगे। उन्होंने कहा कि जब कोई राज्य मजबूत सड़क नेटवर्क से जुड़ता है, तो वहां व्यापार, निवेश और उद्योगों की वृद्धि भी स्वाभाविक रूप से होती है। हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को भारत का सबसे विकसित और आधुनिक राज्य बनाना है, और यह समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक सड़क परियोजनाएं जो मध्यप्रदेश के भविष्य को आकार देंगी जीआईएस-भोपाल में हुए इन ऐतिहासिक एमओयू से कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का विकास होगा। जीआईएस-भोपाल में सड़क अवसंरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिये एमओयू पर हस्ताक्षर हुए है। इनमें इंदौर-भोपाल ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर, भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर, प्रयागराज-जबलपुर-नागपुर कॉरिडोर, लखनादौन-रायपुर एक्सप्रेसवे, आगरा-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग, उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग, इंदौर रिंग रोड (पश्चिमी और पूर्वी बायपास), जबलपुर-दमोह राष्ट्रीय राजमार्ग, सतना-चित्रकूट राष्ट्रीय राजमार्ग, रीवा-सिद्धी राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्वालियर शहर के पश्चिमी छोर पर 4-लेन बायपास शामिल है। नवीन सड़क परियोजनाएं न केवल मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों से जोड़ेंगी, बल्कि राज्य के प्रमुख शहरों को भी आपस में बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। इससे यात्रा का समय घटेगा, लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन की लागत कम होगी, तथा कृषि, उद्योग, पर्यटन और व्यापार क्षेत्रों को नए अवसर मिलेंगे। राज्य के आर्थिक विकास में योगदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कोई भी राज्य तभी प्रगति करता है जब वहाँ सशक्त बुनियादी ढांचा, कुशल परिवहन प्रणाली और मजबूत आर्थिक मॉडल उपलब्ध होते हैं। इन समझौतों से मध्यप्रदेश को एक नए औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब सड़कें बेहतर होंगी, तो उद्योगों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में आसानी होगी। इससे मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित होंगे और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। किसान अपने उत्पादों को तेजी से मंडियों और शहरों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। राज्य की पर्यटन स्थलों तक पहुँचने में सुगमता आएगी। इससे पर्यटन उद्योग को भी नया जीवन मिलेगा। इस परियोजना के तहत हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। सड़क निर्माण के दौरान इंजीनियर, श्रमिक, तकनीकी विशेषज्ञ और स्थानीय उद्यमी इससे लाभान्वित होंगे। नई सड़क परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स, होटल, रेस्तरां और अन्य व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। टाइम बाउंड प्रोजेक्ट: समय पर पूरा करने की प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार तेज़ी से परियोजनाओं को लागू करने और समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन सभी परियोजनाओं को विश्व स्तरीय तकनीक, टिकाऊ निर्माण प्रक्रियाओं और उच्च गुणवत्ता वाले मानकों के साथ विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और संबंधित विभागों को हर आवश्यक सहायता प्रदान कर ये परियोजनाएँ तय समय सीमा के भीतर पूरी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत भी कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के “विकसित भारत” मिशन का म.प्र प्रमुख केन्द्र प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज़ी से वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश इस योजना का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का सपना भारत को एक $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का है। जीआईएस-भोपाल में हुए एमओयू उसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पहल है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद, मध्यप्रदेश देश की सबसे आधुनिक और कुशल परिवहन प्रणाली वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा। भविष्य की दृष्टि: आत्म-निर्भर और विकसित मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश में इन ऐतिहासिक समझौते (एमओयू) के साथ एक नए युग की शुरुआत हो रही है। ये परियोजनाएँ राज्य के प्रत्येक नागरिक को एक उज्जवल भविष्य देने का मार्ग प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कितेज़, सुरक्षित और विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क, बेहतर लॉजिस्टिक्स और व्यापार के अवसर, उद्योगों के लिए आसान परिवहन और निर्यात के नए मार्ग, सड़क निर्माण से लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर और हर नागरिक के लिए सुगम और सुविधाजनक यात्रा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।   recent visitors 54

पीथमपुर में यूका का कचरा सात स्टेप्स में जलाया जाएगा, पहले चरण में 74 घंटे में नष्ट करेंगे 10 टन कचरा

इंदौर भोपाल गैस त्रासदी के बाद वर्षों से वहां रखे यूनियन कार्बाइड (यूका) के 337 टन कचरे को दो जनवरी तड़के चार बजे पीथमपुर में भस्मक संयंत्र परिसर में 12 कंटेनरों में पहुंचाया गया था। पीथमपुर में यूका का कचरा पहुंचने के 56 दिन 11 घंटे बाद 27 फरवरी (गुरुवार) दोपहर बाद 12 में पांच कंटेनर खोल कचरे को बाहर निकाला गया। हाई डेंसिटी पालीथिन (एचडीईपी) बैग में बंद इस कचरे को मैकेनिक कार्ट (बकेटनुमा ट्राली) में रखकर इंसीनरेबल स्टोरेज शेड में रखा गया। शुक्रवार सुबह इसे भस्मक में डाल भस्म करने की प्रक्रिया शुरू होगी। शुक्रवार को प्रतिघंटा 135 किलो कचरा भस्मक में डाला जाएगा। 74 घंटों में 10 टन कचरे को नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पहला चरण : प्राथमिक दहन कक्ष (रोटरी किल) : तापमान 850-900 डिग्री हर दो मिनट में 4.5 किलो अपशिष्ट का बैग व 4.5 किलो लाइम का बैग डाला जाएगा। इस चैंबर में रखा कचरा घूमेगा। इससे सुनिश्चित किया जाएगा किया कि कचरा पूरी तरह जल जाए। कचरा जलने के बाद राख नीचे आ जाएगी। कचरा जलने के बाद गैस अगले चैंबर में जाएगी। दूसरा चरण : द्वितीय दहन कक्ष (वर्टिकिल सेकंडरी कंबंशन चैंबर) : तापमान 1100-1200 डिग्री डीजल बर्नर की मदद से बचे हुए फ्लू गैस अधजले कणों को 1100 डिग्री तापमान पर जलाया जाएगा। प्राथमिक व द्वितीय दहन कक्ष में यदि निर्धारित मात्रा से तापमान कम होगा तो इसकी सूचना तुरंत मानीटरिंग कक्ष में पहुंचती है और प्लांट व अपशिष्ट को भस्मक के डालने की प्रक्रिया रोक दी जाती है। तीसरा चरण : स्प्रे ड्रायर में गैस फ्लू गैस को स्प्रे डायर में भेजा जाएगा। यहां पानी के फव्वारे से इसे ठंडा कर 240 डिग्री सेल्सियस तक गैस का तापमान लाया जाएगा। तापमान में त्वरित गिरावट इस वजह से की जाती है ताकि गैस में दोबारा किसी तरह के हानिकारक तत्व न बने। चौथा चरण: मल्टीसाइक्लोन मशीन गैस को मल्टीसाइक्लोन मशीन से गुजारा जाएगा। यहां गैस को घुमाकर उसमें जमा भारी कणों को अलग किया जाएगा। पांचवां चरण : ड्राय स्क्रबर गैस ड्राय स्क्रबर से गुजरेगी। वहां चूना, एक्टिवेटेड कार्बन व सल्फर के मिश्रण का स्प्रे गैस पर किया जाएगा। इससे सल्फर डाईआक्साइड, डायक्सीन व मर्करी फ्लू गैस से अलग हो जाएगी। इसके बाद फ्लू गैस बैग फिल्टर से गुजरती है। जहां गैस में इसमें उपस्थित ठोस कण छन जाएंगे। छठा चरण : वेट स्क्रबर वेट स्क्रबर में गैस पर कास्टिक सोडा के घोल को स्प्रे किया जाएगा। इस प्रक्रिया में गैस से सभी एसिटिक तत्व जैसे एसओटू, एसओथ्री और एचसीएल को न्यूट्रलाइज किया जाता है। सातवां चरण : चिमनी से गैस को छोड़ा जाएगा फ्लू गैस को 35 मीटर ऊंची चिमनी से वातावरण में छोड़ा जाएगा। यह गैस पूरी तरह साफ होती है। कंपनी का दावा है कि इसमें हानिकारक तत्व नहीं होते। इस चिमनी में सेंसर लगे होते हैं जिससे गैस की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जाती है। recent visitors 63

National Science Day :बच्चों व युवाओं को विज्ञान-तकनीकी शिक्षा से जोड़ना होगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर सभी को बधाई दी। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि विज्ञान के प्रति उत्साहपूर्ण भाव रखने वाले लोगों, विशेषकर हमारे युवा अन्वेषकों को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की बधाई। आइए विज्ञान और नवाचार को लोकप्रिय बनाते की दिशा में कार्य करते रहे और एक विकसित भारत के निर्माण के लिए विज्ञान का लाभ उठाते रहें। इस महीने के मन की बात के दौरान, 'एक वैज्ञानिक के रूप में एक दिन' कार्य करने के बारे में बात की थी जहां युवा किसी न किसी वैज्ञानिक गतिविधि में भाग लेते हैं। इससे पहले 23 फरवरी को मन की बात के अपने 119वें एपिसोड में पीएम मोदी ने कहा था कि वह बच्चों और युवाओं में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा करेंगे। आने वाले दिनों में हम राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाएंगे। हमारे बच्चों और युवाओं की विज्ञान में रुचि और जुनून बहुत मायने रखता है। इसके लिए मेरे पास एक विचार है, जिसे आप 'वन डे एज ए साइंटिस्ट' कह सकते हैं।  यानी आपको एक दिन वैज्ञानिक के तौर पर बिताने की कोशिश करनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि आप अपनी सुविधा और पसंद के हिसाब से कोई भी दिन चुन सकते हैं। उस दिन आपको किसी रिसर्च लैब, प्लेनेटेरियम या स्पेस सेंटर में जाना चाहिए। इससे विज्ञान के प्रति आपकी जिज्ञासा बढ़ेगी। बता दें कि 1986 में भारत सरकार ने 'रमन प्रभाव' की खोज की घोषणा के उपलक्ष्य में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में नामित किया। यह पदार्थ द्वारा प्रकाश के अप्रत्यास्थ प्रकीर्णन को संदर्भित करता है, जिसके परिणामस्वरूप प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्ति में बदलाव होता है। सरल शब्दों में, यह प्रकाश की तरंगदैर्घ्य में परिवर्तन है जो तब होता है जब प्रकाश किरण अणुओं द्वारा विक्षेपित होती है। रमन प्रभाव रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का आधार बनता है, जिसका उपयोग रसायनज्ञों और भौतिकविदों द्वारा पदार्थों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है। स्पेक्ट्रोस्कोपी पदार्थ और विद्युत चुम्बकीय विकिरण के बीच परस्पर क्रिया का अध्ययन है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस रोजमर्रा की जिंदगी में विज्ञान के महत्व को बढ़ावा देने और मानवता की बेहतरी के लिए वैज्ञानिक क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों, प्रयासों और उपलब्धियों को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। इस उत्सव का उद्देश्य मुद्दों को संबोधित करना, नवीन तकनीकों को पेश करना और विज्ञान में विकास को बढ़ावा देना है। यह भारत में वैज्ञानिक सोच वाले व्यक्तियों के लिए एक मंच प्रदान करता है,जो जनता के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित और लोकप्रिय बनाता है। बच्चों व युवाओं को विज्ञान-तकनीकी शिक्षा से जोड़ना होगा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकटरामन की खोज रामन प्रभाव को समर्पित है. वर्ष 1928 में उन्होंने प्रकाश किरण के फैलने की एक घटना ‘रामन प्रभाव’ की खोज की थी. दो वर्ष बाद 1930 में इस खोज के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर युवाओं को विज्ञान में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है. इस वर्ष का राष्ट्रीय विज्ञान दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के प्रोत्साहन और विजन से विकसित भारत, 2047 के अंतर्गत युवाओं को विज्ञान शिक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इस बार विज्ञान दिवस का विषय है- विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना. इसके तहत बच्चों और युवाओं को विज्ञान व तकनीकी शिक्षा की ओर उन्मुख करना जरूरी होगा. वर्ष 2023 में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की गयी, जिसका उद्देश्य वैश्विक वैज्ञानिक और तकनीकी उत्कृष्टता हासिल करने के लिए युवाओं को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करना है. इसके तहत युवा शोधकर्ताओं को विज्ञान व प्रौद्योगिकी संस्थान में शोध करियर प्रारंभ करने में मदद के लिए प्रधानमंत्री प्रारंभिक करियर अनुसंधान अनुदान (पीएम इसीआरजी) कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है. वैश्विक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सूचकांक में भारत की रैंकिंग लगातार सुधर रही है. ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स, 2024 में शीर्ष नवोन्मेषी अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने 39वां स्थान हासिल किया है. डब्ल्यूआइपीओ रिपोर्ट 2023 के अनुसार, भारत बौद्धिक संपदा फाइलिंग के मामले में छठे स्थान पर है. नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स, 2024 में भारत 49 वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि 2019 में वह 79वें स्थान पर था. यह इंडेक्स विश्व की 133 अर्थव्यवस्थाओं में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग और प्रभाव पर अग्रणी वैश्विक सूचकांकों में एक है. देश में ‘इंस्पायर कार्यक्रम’ नाम से योजना चलायी जा रही है, जिसका उद्देश्य बुनियादी व प्राकृतिक विज्ञान का अध्ययन करने के लिए मेधावी युवाओं को आकर्षित करना है. वर्ष 2024 में करीब 38,000 इंस्पायर स्कॉलर्स, फेलो और फैकल्टी फेलो को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में चुना गया. विदेश में रह रहे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (वैभव) फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किया गया है. विज्ञान और अभियांत्रिकी में महिलाओं की भागीदारी के लिए किरण योजना और अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में अनुसंधान प्रशिक्षण के लिए महिला अंतरराष्ट्रीय अनुदान सहायता जैसे कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत विश्व के शीर्ष देशों में है. चंद्रयान और आदित्य-एल1 मिशन के बाद इस साल व्योममित्र नामक महिला रोबोट गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री जैसे कार्य करेगी. वर्ष 2026 में पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन शुरू होगा, जबकि 2035 में भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन भारत अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करने और 2047 में चंद्रमा पर पहला भारतीय अंतरिक्ष यात्री उतारने का लक्ष्य है. इसरो एक बार में 104 उपग्रह प्रक्षेपित करने का रिकॉर्ड बना चुका है और पिछले 10 साल में 460 उपग्रह प्रक्षेपित किये गये हैं. भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा अर्जक के रूप में उभरा है. विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण से अर्जित 22 करोड़ यूरो में से 18.7 करोड़ यूरो पिछले आठ वर्षों में अर्जित किये गये हैं. आज अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप 300 से अधिक हैं, जो चार वर्ष पूर्व तीन-चार ही हुआ करते थे. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ एआइ एक्शन शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए कहा कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बहुत-सी चीजों को बेहतर बना कर लाखों लोगों का जीवन बदलने में मदद … Read more

छिंदवाड़ा में बिल्लियों की मौत के बाद जांच, प्रशासन के सख्त आदेश, 40 हजार अंडे नष्ट किए, मटन-चिकन की बिक्री पर पाबंदी लगाई

छिंदवाड़ा  पिछले कुछ समय से अमेरिका से बर्ड फ्लू (Bird Flu) की खबरें लगातार सामने आ रही थी. अमेरिका में बर्ड फ्लू के मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा था. यहां तक कि इसांनों में भी बर्ड फ्लू के मामले सामने आ रहे थे. मगर, अब भारत के स्वास्थ्य विभाग की नींदें उड़ गई हैं. दरअसल, पहली बार देश में पालतू बिल्लियों में बर्ड फ्लू (H5N1) पाया गया है. इससे चिंता बढ़ गई है. यह वायरस इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है. इस राज्य का मामला मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में बर्ड फ्लू का खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है. जिले में पालतू बिल्लियों में बर्ड फ्लू (H5N1) का पहला मामला सामने आया है. 18 बिल्लियों की मौत के बाद जांच के लिए पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी में सैंपल भेजे गए थे, जिनमें से दो बिल्लियों में बर्ड फ्लू पाया गया. बता दें कि, देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब बिल्लियों में बर्ड फ्लू पाया गया है. प्रशासन ने लगाई पाबंदियां बिल्लियों की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है. उन्होंने 30 दिन के लिए मटन-चिकन और अंडों की खरीदी-बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई है. साथ ही संक्रमित क्षेत्र की सभी मटन और चिकन की दुकानों को सील कर दिया गया है. इसके साथ ही बिल्लियों के संपर्क में आए लोगों की भी जांच की जा रही हैं. सभी 65 व्यक्तियों के सैंपल भेजे गए थे. हालांकि, सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आने से फिलहाल छिंदवाड़ा में H5N1 का खतरा टल गया है. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है. प्रशासन के सख्त आदेश कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत सख्त आदेश जारी किए हैं. इसके तहत संक्रमित पोल्ट्री फॉर्म के एक किलोमीटर के दायरे को संक्रमित क्षेत्र घोषित किया गया है, जहां सभी चिकन शॉप और पोल्ट्री फार्म पूरी तरह से बंद रहेंगे. इसके अलावा 10 किलोमीटर के दायरे को निगरानी क्षेत्र भी घोषित किया गया है. सभी पोल्ट्री फार्म, बैकयार्ड पोल्ट्री, चिकन शॉप और अंडे की दुकानों को हर रोज कीटाणुरहित और सैनिटाइज किया जाएगा. संक्रमित क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी मुर्गियों और उनके उत्पादों को पशु चिकित्सा विभाग और नगर निगम के सहयोग से नष्ट किया जा रहा है. संक्रमित क्षेत्र में चिकन और पोल्ट्री प्रोडक्ट्स की बिक्री और ट्रांस्पोर्टेशन पर एक महीने के लिए पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है. कुछ लोगों के भी सैंपल्स जांच के लिए भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है. सभी 65 व्यक्तियों की रिपोर्ट नेगेटिव शहरी क्षेत्र छिंदवाड़ा में पशु विभाग की ओर से लिए गए सैंपल में 2 बिल्लियों के सैंपल में H5N1 पॉजिटिव पाए जाने के बाद सीएमएचओ ने एक टीम बनाई थी। टीम ने संक्रमित क्षेत्र में बिल्लियों के संपर्क में आए 65 व्यक्तियों के सैंपल H5N1 की जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी, पुणे भेजे गए थे। सभी 65 सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आने से फिलहाल छिंदवाड़ा में H5N1 का खतरा टल गया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। एक महीने के लिए सभी दुकानें बंद 31 जनवरी को बिल्लियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए संक्रमित क्षेत्रों में 30 दिनों के लिए सभी मटन और चिकन दुकानों को सील कर दिया था। जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मटन और चिकन दुकानों और आसपास के इलाकों को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया। नगर निगम के वार्ड नंबर 6, 7, 8, 28, 29, 30, 31, 41 और 45 को संक्रमित घोषित किया गया था। इसके साथ ही नगर निगम क्षेत्र और ग्राम पंचायत लिंगा को निगरानी क्षेत्र में रखा गया है। प्रशासन ने उठाए ये कदम:     सभी चिकन दुकानें और पोल्ट्री फॉर्म तत्काल बंद कर दिए गए।     चिकन और पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री व परिवहन पर रोक लगा दी।     संक्रमित क्षेत्र की सभी मुर्गियों और उनके उत्पादों को नष्ट करने का आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट-चिकन और अंडे न खाएं स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में चिकन दुकान मालिकों और पशुपालकों के परिवारों के सैंपल लेने के बाद नागरिकों से अपील की है कि वे चिकन और अंडों का सेवन न करें। साथ ही अपने पालतू जानवरों को कच्चा मांस न खिलाएं। बीमार या मृत पक्षियों की सूचना तत्काल प्रशासन को दें। बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और लगातार निगरानी रख रहा है। नागरिकों से भी सतर्क रहने और दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। कलेक्टर की अपील- गाइडलाइन का पालन करें छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने बताया कि   recent visitors 40