केंद्र में शिवराज सिंह चौहान की सफलता, मध्यप्रदेश के लिए घोषित हुआ सबसे बड़ा बजट

भोपाल   केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 9वां बजट पेश किया। इस बजट में कई राज्यों को बड़ी सौगातें दी गई हैं। इसमें के टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। जिसमें मध्यप्रदेश के 10 शहरों को फायदा मिल सकता है। वहीं, मोदी सरकार की कैबिनेट में शामिल प्रदेश के 6 मंत्रियों में सबसे अधिक बजट शिवराज सिंह चौहान के विभाग को मिला है। केंद्र में शिवराज का जलवा कायम मध्यप्रदेश कोटे से मोदी सरकार की कैबिनेट में 6 मंत्री शामिल हैं। जिसमें शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, डीडी उइके, वीरेंद्र कुमार खटीक और सावित्री ठाकुर लोकसभा सदस्य हैं। वहीं, एल मुरुगन एमपी से राज्यसभा के सदस्य हैं। सभी मंत्रियों के विभाग की तुलना करें तो उसमें शिवराज के कृषि और ग्रामीण को सबसे ज्यादा बजट मिला है। शिवराज के दो विभागों को इतना बजट केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि एवं किसान कल्याण के लिए 130561.38 करोड़ और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग को 9967.40 करोड़। यानी कुल मिलाकर देखें तो कृषि विभाग 140528.78 करोड़ रूपये दिए गए हैं। वहीं, ग्रामीण विकास मंत्रालय का कुल बजट 197023.14 करोड़ है। जिसमें ग्रामीण विकास विभाग को 194368.81 करोड़ और भूमि संसाधन विभाग को 2654.33 करोड़ रूपये दिए जाएंगे। सिंधिया के विभाग पर मेहरबान हुई केंद्र सरकार केंद्रीय संचार और नार्थ ईस्ट मामलों के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के डाक और संचार विभाग को 102267.02 करोड़ रूपये दिए गए हैं। जिसमें डाक विभाग को 130561.38 करोड़ और दूरसंचार विभाग को 73990.94 करोड़ रूपये दिए गए हैं। वहीं, पूर्वोतर क्षेत्र विकास मंत्रालय को 6812.30 करोड़ रूपये दिए जाएंगे। वीरेंद्र कुमार खटीक के विभाग को मिला इतना बजट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक के विभागों को कुल 15357.31 करोड़ दिए गए हैं। जिसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग को 13687.59 करोड़ रूपये मिले और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को 1669.72 करोड़ की राशि दी गई है। यह भी पीछे नहीं एमपी कोटे से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन के विभाग को कुल 4551.94 करोड़ का बजट मिला। जनजातीय कार्य मंत्रालय डीडी उइके को कुल 15421.97 करोड़ का बजट मिला। वहीं, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर को 28183.06 करोड़ का बजट मिला है। recent visitors 29

MP को केंद्रीय बजट में 7500 करोड़ का झटका, सिंहस्थ पैकेज की उम्मीदें टूटीं, 10 शहरों के लिए 5000 करोड़ मंजूर

भोपाल  मध्य प्रदेश की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ने की बजाय कम हो गई है। अब अगले पांच साल( अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक) तक एमपी को हर साल करीब 7500 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। साथ ही इस वित्तीय वर्ष यानी 31 मार्च 2026 तक एमपी को 2,314 करोड़ रुपए कम मिलेंगे।  हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि भले ही केंद्रीय करों में हिस्सेदार कम हो गई लेकिन कैपिटल एक्सपेंडिचर में जो प्रावधान किया है उससे मप्र को फायदा मिल सकता है। केंद्रीय करों की हिस्सेदारी के रुप में इस बार 1.12 लाख करोड़ रु. मिल सकते हैं। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 2 हजार करोड़ रु. मिलने का अनुमान है। बता दें कि रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वां बजट पेश किया। इस बजट में टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इसका फायदा इस कैटेगरी में आने वाले एमपी के 10 शहरों को मिल सकता है। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। हालांकि, मप्र ने इस बजट में सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए 20 हजार करोड़ रु. के स्पेशल पैकेज की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने इस संबंध में ऐसी कोई कोई घोषणा नहीं की। प्रदेश को 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मान लिया है। ऐसे में अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक की अवधि के लिए केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 7.86% से घटाकर 7.34% कर दी गई है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस 0.503% की कटौती का सीधा मतलब है कि राज्य को हर साल लगभग 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। यह नुकसान सिर्फ भविष्य तक सीमित नहीं है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए भी अनुमानों को संशोधित किया गया है। पहले जहां राज्य को 1,11,662 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान था, वह अब घटकर 1,09,348 करोड़ रुपए रह गया है। यानी इसी साल प्रदेश को 2,314 करोड़ रुपए का तत्काल नुकसान होगा। यह कटौती ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार जी राम जी जैसी योजना के लिए अपने हिस्से को 10% से बढ़ाकर 30% करने की तैयारी कर रही है, जिससे उस पर वित्तीय बोझ और बढ़ेगा। 10 शहरों के डेवलपमेंट के लिए मिल सकते हैं 5,000 करोड़ केंद्र ने टियर-2 और टियर-3 श्रेणी के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपए की विशेष पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया है। वित्तीय जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश के लगभग 10 शहर इस कैटेगरी में आते हैं, इस फंड से भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों को 7 हजार करोड़ तो बाकी शहरों को 5 हजार करोड़ तक मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग इन शहरों में सड़क नेटवर्क, जल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन, और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार होगा और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। यहां एयरपोर्ट के पास भौंरी में राज्य सरकार एआई और नॉलेज सिटी विकसित कर रही है। इसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप में बदला जाता है तो केंद्र को पहली यूनिवर्सिटी टाउनशिप का प्रस्ताव तुरंत भेजा जा सकेगा। नगर निगम जारी कर सकेंगे अमृत बॉन्ड एमपी के बड़े नगर निगम भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन 1 हजार करोड़ का बॉन्ड जारी कर केंद्र से 100 करोड़ तक का फायदा ले सकेंगे। बॉन्ड की पहले से जारी व्यवस्था भी प्रभावी है, जिसमें 200 करोड़ तक के बॉन्ड जारी करने पर केंद्र सरकार 18 फीसदी पैसा देती है। अटल नवीनीकरण व शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) 2.0 के तहत केंद्र ने 2025-26 के लिए 7,022 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिनका मुख्य फोकस जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन पर है। भोपाल में 194 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें कोलार और बैरागढ़ में 155 करोड़ की लागत से नया सीवेज नेटवर्क बनाना शामिल है। इस योजना का एक अहम पहलू 'महिला अमृत मित्र' की तैनाती है। इंदौर के भागीरथपुरा कांड जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए, जहां दूषित पानी से कई लोगों की जान चली गई थी, अब सरकार ने पेयजल की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए एक जमीनी पहल की है। मध्य प्रदेश शहरी विकास निगम (MPUDC) के जरिए 10,000 'महिला अमृत मित्र' को तैनात किया जाएगा। ये महिलाएं सामुदायिक स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पीने के पानी की लाइनें किसी भी हाल में सीवरेज लाइनों के संपर्क में न आएं। उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार के बजट को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट से यह साफ हो गया है कि भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने मध्य प्रदेश की जनता की पीठ में छुरा घोंपा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ओर भाजपा विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश का हिस्सा लगभग 7,500 करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। बता दें कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इस बजट में राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी (Vertical devolution) 41 प्रतिशत बरकरार रखी गई है। लेकिन हॉरिजॉन्टल फॉर्मूला (राज्यों के बीच बंटवारा) में बदलाव से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटकर लगभग 7.35 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण सालाना करीब 7500 करोड़ का नुकसान हो सकता है। वहीं, सिंहस्थ के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20,000 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग की थी, लेकिन बजट में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखा है जिसपर विपक्ष हमलावर है। recent visitors 106

छत्तीसगढ़ में मतांतरण विरोधी विधेयक पर कानूनी संकट, बजट सत्र में पास होने की संभावना कमजोर

रायपुर  विष्णु देव साय सरकार के कड़े मतांतरण विरोधी कानून लाने के संकल्प पर फिलहाल कानूनी अड़चनों के बादल मंडरा रहे हैं। शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने की घोषणा के बाद अब 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में भी इसके पेश होने की उम्मीद कम नजर आ रही है। मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसने विधेयक की राह कठिन कर दी है। दरअसल, देश के विभिन्न राज्यों में लागू मतांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सहित उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, झारखंड और राजस्थान को नोटिस जारी करके जवाब दाखिल करने कहा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी तक टाल दी है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार चूंकि मूल कानून की वैधता पर ही सवालिया निशान है, इसलिए राज्य सरकार नए संशोधन विधेयक को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। प्रस्तावित कानून: 10 साल की सजा का प्रविधान सूत्रों के अनुसार साय सरकार जिस नए विधेयक पर काम कर रही है, वह ''छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968'' का स्थान लेगा। इसमें सजा के कड़े प्रावधान शामिल हैं। प्रलोभन या जबरन मतांतरण पर 10 साल तक की कैद, मतांतरण से 60 दिन पहले जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होना, वर्तमान में मात्र 5,000 रुपये जुर्माने का प्रविधान है, जिसे कई गुना बढ़ाने की तैयारी है। राज्य सरकार का कहाना है कि जबरन मतांतरण और प्रलोभन की परिभाषा को और अधिक व्यापक बनाया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा में बढ़े मामले एक अनुमान के मुताबिक राज्य में पिछले दो वर्षों में मतांतरण से जुड़ी 100 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। हिंदू संगठनों का आरोप है कि विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों (बस्तर और सरगुजा) में भोले-भाले ग्रामीणों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का कहना है कि मंत्रिमंडलीय उप-समिति इस पर काम कर रही है, लेकिन उन्होंने विधेयक पेश करने की निश्चित तिथि पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालिया घटनाएं: राज्य में तनाव की स्थिति     केस 01: राजनांदगांव में प्रार्थना सभा पर हंगामा एक फरवरी 2026 को राजनांदगांव के मोतीपुर में एक घर के भीतर चल रही ईसाई प्रार्थना सभा को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप था कि वहां मतांतरण कराया जा रहा है। पुलिस के दखल के बाद मामला शांत हुआ।     केस 02: सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर गिरफ्तार 29 जनवरी 2026 को सरगुजा पुलिस ने चंगाई सभा की आड़ में मतांतरण कराने के आरोप में रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो को गिरफ्तार किया। उनके निवास पर 50-60 लोग मौजूद थे, जहां कथित तौर पर मतांतरण की प्रक्रिया चल रही थी।     केस 03: कांकेर में प्रलोभन का आरोप पांच जनवरी 2026 को कांकेर में एक प्रार्थना सभा को लेकर ग्रामीणों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का दावा था कि आर्थिक प्रलोभन देकर लोगों का मतांतरण कराया जा रहा है, जिससे इलाके में तनाव व्याप्त हो गया था।   recent visitors 36

जनता दर्शन :बच्ची ने किया सैल्यूट तो सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो

जनता दर्शन :बच्ची ने किया सैल्यूट तो सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर निरंतर करें कड़ी कार्रवाईः मुख्यमंत्री  एक-एक कर सभी प्रार्थियों से मिले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समस्याओं के उचित निस्तारण का दिया आश्वासन  जनपदों में प्रशासन, पुलिस व राजस्व के अधिकारी मामलों को गंभीरता से लेते हुए करें कार्रवाई: मुख्यमंत्री बच्ची ने किया सैल्यूट तो सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। एक-एक कर सभी प्रार्थियों से उन्होंने मुलाकात की, उनका प्रार्थना पत्र लिया और समस्याओं के उचित निस्तारण का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों, राजस्व से जुड़े अधिकारियों व पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए लोगों की समस्याएं सुनें और जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करें। ‘जनता दर्शन’ में पहुंची एक बच्ची ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सैल्यूट किया। इस पर सीएम योगी ने उसे आशीर्वाद देते हुए खूब मन लगाकर पढ़ाई करने को कहा। जनपदों में समस्याएं सुन दोषियों पर करें कार्रवाई  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष ‘जनता दर्शन’ में अवैध कब्जे से जुड़े कुछ प्रकरण भी आए। सीएम ने सभी लोगों की बातें सुनीं,  फिर प्रार्थना पत्र लेते हुए उचित कार्रवाई का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने जनपदों में तैनात अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे वहां भी समस्याएं सुनते हुए प्रार्थियों को न्याय दिलाएं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें।  बच्चे के इलाज के लिए सीएम ने दिया आर्थिक मदद का आश्वासन ‘जनता दर्शन’ में एक महिला अपने बच्चे के साथ पहुंचीं। उनके बच्चे का केजीएमयू में इलाज चल रहा है। महिला ने मुख्यमंत्री से इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने इलाज के लिए आर्थिक सहायता दिलाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ प्रदेशवासी मेरा परिवार हैं। सरकार सभी के सुख-दुख में खड़ी है। पहले दिन से ही इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। आगे भी यह क्रम चलता रहेगा। धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा।  बच्ची ने किया सैल्यूट, सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी पहुंचे। प्रार्थियों से मिलने के क्रम में मुख्यमंत्री एक महिला के पास पहुंचे और उनका प्रार्थना पत्र लिया। महिला के साथ आई बच्ची ने सीएम योगी को देख उन्हें सैल्यूट किया। इस पर सीएम योगी ने मुस्कुराते हुए बच्ची से उसका नाम और पढ़ाई के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को चॉकलेट दी और कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करो। बच्ची ने सुनाई सीएम को कविता ‘जनता दर्शन’ में मां के संग आई एक बच्ची ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कविता सुनाई। बच्ची की कविता सुनकर मुख्यमंत्री ने उसकी खूब तारीफ की। सीएम ने बच्ची से पूछा कि स्कूल जाएगी, मेहनत से पढ़ेगी? बच्ची के हां कहने पर सीएम ने एडमिशन कराने का आदेश दिया। बच्ची ने सीएम योगी को कविता भी सुनाई- “हम शेर बच्चे, शेर बच्चे, शेर बच्चे हैं। हम छोटे हैं तो क्या हुआ, हम दिल के सच्चे हैं। हम बड़े होकर देश की शान बढ़ाएंगे। जय हिंद।” कविता सुनकर सीएम ने बच्ची का उत्साहवर्धन भी किया। recent visitors 33

मध्यप्रदेश में बारिश और कोहरे का प्रभाव, 25 जिलों में अलर्ट, ग्वालियर में बूंदाबांदी, सीहोर-मुरैना में 50 मीटर विजिबिलिटी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। प्रदेश में अगले तीन दिन तक मावठे की बारिश सक्रिय रहने के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को ग्वालियर से लेकर विंध्य क्षेत्र तक 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। सुबह के समय कई इलाकों में घना कोहरा भी देखने को मिला, जिससे ठंड और बढ़ गई है। रविवार को भी मौसम ने जमकर रंग दिखाया। नीमच और मंदसौर में तेज आंधी-बारिश के साथ ओले गिरे, वहीं ग्वालियर, धार, मुरैना और उज्जैन सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मध्य प्रदेश में एक बार फिर से आंधी, ओले और बारिश वाला मौसम है। सोमवार सुबह अशोकनगर, आगर-मालवा, टीकमगढ़ में बारिश हुई। वहीं, कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा। हालांकि, ठंड का असर कम है और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से ऊपर ही चल रहा है। मौसम विभाग ने सोमवार को 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, श्योपुर, मुरैना, भिंड, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इससे पहले दतिया, ग्वालियर, नर्मदापुरम, उज्जैन, खजुराहो, रीवा, सतना, भोपाल, गुना, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, श्योपुर, जबलपुर, दमोह, मंडला, नरसिंहपुर, नौगांव, मलाजखंड, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में कोहरे का असर भी देखा गया। अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम     3 फरवरी– ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में बारिश होने के आसार है।     4 फरवरी- ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है।     5 फरवरी- आंधी-बारिश का अलर्ट नहीं है। ठंड का असर बढ़ सकता है। कई जिलों में बारिश का दौर, कोहरा भी छाया इससे पहले रविवार को प्रदेश में बारिश, आंधी और घने कोहरे वाला मौसम रहा। ग्वालियर, उज्जैन, धार और मुरैना में रात और सुबह बारिश हुई। वहीं, सुबह कई शहरों में घना कोहरा छाया रहा। दतिया और खजुराहो में विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर तक रही। खजुराहो, राजगढ़ और नौगांव में ही पारा 10 डिग्री से नीचे रहा। भोपाल में सुबह 9 बजे तक कोहरे का असर देखा गया। शाम को नीमच और मंदसौर में मौसम बदल गया। तेज आंधी-बारिश के साथ ओले गिरने लगे। इससे कई गांवों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। बारिश की वजह से गेहूं की फसलें आड़ी हो गई। इससे नुकसान होने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, दतिया, खजुराहो, ग्वालियर, नौगांव, सतना, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन, श्योपुर, राजगढ़, रतलाम, गुना, दमोह, मंडला, टीकमगढ़, मलाजखंड में कोहरे का असर अधिक रहा। बड़े शहरों में रात का तापमान 12 डिग्री से ऊपर ही रहा।   recent visitors 28

इंदौर: दूषित पानी से 32वीं मौत, भागीरथपुरा की महिला पहले से थी दूसरी बीमारियों से पीड़ित

इंदौर इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महीना बीत जाने के बाद भी यहां मौतों का सिलसिला जारी है। रविवार को बस्ती में 32वीं मौत दर्ज की गई, जिसने इलाके में दहशत और बढ़ा दी है। ताज़ा मामला 65 वर्षीय अनिता कुशवाह का है, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान बिगड़ी हालत अनिता को कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था। शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा, जिसके बाद उनकी स्थिति और बिगड़ती चली गई और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। बेटे नीलेश ने बताया कि उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त के कारण भाग्यश्री हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। दो दिन बाद डिस्चार्ज होकर घर पर लाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद फिर हालत बिगड़ी। उन्हें 1 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। अरबिंदो हॉस्पिटल से उन्हें 4 जनवरी को बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया था। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर किडनी फेल हो गई, जिसके चलते लगातार हेमोडायलिसिस किया जा रहा था। फिर वेंटिलेटर पर भी लिया गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शासन की ओर से हायर सेंटर पर इलाज करवाया गया, लेकिन दुर्भाग्य से मरीज को बचाया नहीं जा सका। महिला के पति मिल से रिटायर्ड हैं। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार आज होगा। भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में अब तक 32 मौतें हो चुकी हैं। इस मामले में 450 से ज्यादा मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, लेकिन दूसरी ओर तीन मरीज अब भी एडमिट हैं। इनमें से 2 आईसीयू में हैं। उनकी हालत काफी क्रिटिकल बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि बस्ती में अब तक 32 लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 16 मौतें ही दर्ज हैं। विभाग इन मौतों की मुख्य वजह डायरिया (उल्टी-दस्त) मान रहा है। बाकी की अन्य मौतों का अभी तक कोई डेथ ऑडिट नहीं किया गया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल बस्ती के दो और मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। राहत की बात बस इतनी है कि अब नए मरीजों के मिलने की रफ्तार कम हुई है और मामूली लक्षण वाले लोगों का घर पर ही इलाज चल रहा है। बस्ती में पानी का संकट अभी भी गहराया हुआ है। नगर निगम अब तक केवल 30 प्रतिशत इलाके में ही नई नर्मदा लाइन बिछा पाया है। बाकी पूरी बस्ती अब भी टैंकरों के भरोसे है। दूषित पानी के खौफ की वजह से लोग नल या टैंकर का पानी पीने से डर रहे हैं। जो लोग सक्षम हैं, वे पीने के लिए बाहर से पानी खरीद रहे हैं। 24 घंटे चालू हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अभी मरीज आ रहे हैं, लेकिन डायरिया के मरीजों की संख्या एकदम कम हो गई है। रोज एक-दो मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें एडमिट करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि यह केंद्र 24 घंटे खुला है और क्षेत्र में दो एम्बुलेंस भी तैनात हैं। 30 प्रतिशत हिस्से में की जा रही पानी की सप्लाई उधर, इलाके में एक दिन छोड़कर 30% हिस्से में पानी का सप्लाय जारी है। निगम का कहना है कि पानी अब साफ आ रहा है लेकिन रहवासी अभी भी आरओ और टैंकर का पानी ही उपयोग कर रहे हैं। दूसरी ओर बचे हुए 70% हिस्से की मेन पाइप लाइन का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद यहां लीकेज टेस्ट करने के साथ सैंपल लिए जाएंगे। recent visitors 22

सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागिता बढ़ाएं बैंक: मुख्यमंत्री

यूपी का कुल सीडी रेशियो 60.39% के पार, मार्च तक 62% का लक्ष्य ओडीओपी की तरह अब ओडीओसी को ब्रांड बनाने आगे बढ़ें बैंक, छोटे व्यापारियों और गिग वर्कर्स को होगा बड़ा लाभ: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का आह्वान, किसान, एमएसएमई, युवा-उद्यमियों और महिलाओं को ऋण उपलब्धता तेज और सरल की जाएं आवेदन और पात्रता की जांच में अनावश्यक देरी न करें बैंक, लाभार्थीपरक योजनाओं की सफ़लता बैंकों के सहयोग से ही संभव: मुख्यमंत्री प्रदेश का बैंकिंग व्यवसाय 08 वर्ष में ₹12.80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹32.79 लाख करोड़ वित्तीय समावेशन में यूपी देश में नंबर-1, जनधन, जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा और अटल पेंशन योजना में शीर्ष प्रदर्शन ऊर्जा, कृषि, उद्योग और एमएसएमई क्षेत्र में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत 20 फरवरी और 16 मार्च को दो मेगा ऋण वितरण कार्यक्रम; 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक  वितरण का लक्ष्य पीएम स्वनिधि, पीएम सूर्य घर और किसान क्रेडिट कार्ड में यूपी की तेज प्रगति, 50.81 लाख किसानों को मिली 1 लाख करोड़ रुपये की सीमा सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागिता बढ़ाएं बैंक: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक, कहा जिलों में हर माह हो डीएलबीसी कि बैठक लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक प्रदेश में कुल क्रेडिट डिपॉजिट (सीडी रेशियो) 62 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। रविवार को राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी बैंक प्रतिनिधियों से उनके सीडी रेशियो के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए सीडी रेशियो बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास करने पर बल दिया। बैठक में बताया गया कि दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश का कुल सीडी रेशियो 60.39 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले लगभग दस वर्षों का सर्वाधिक स्तर है। जनपद-वार समीक्षा के अनुसार 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले जनपद घटकर केवल पाँच रह गए हैं, जबकि 40-50, 50-60 और 60-80 प्रतिशत की श्रेणी वाले जनपदों की संख्या में भी निरंतर सुधार हुआ है। मार्च 2018 में 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले 20 जनपद थे, जो अब घटकर 5 हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मार्च 2026 तक सभी जनपदों के सीडी रेशियो में लक्षित सुधार सुनिश्चित किया जाए। महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) की सफलता के बाद अब राज्य सरकार एक जिला-एक व्यंजन (ओडीओसी) के माध्यम से छोटे व्यापारियों, पारंपरिक पाक कला से जुड़े कारीगरों और गिग वर्कर्स को नई पहचान देने जा रही है। उन्होंने बैंकों से आह्वान किया कि जैसे ओडीओपी को वित्तीय सहयोग मिला, वैसे ही ओडीओसी को भी प्राथमिकता देते हुए अधिक से अधिक लोगों को ऋण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में पूरा सहयोग दे रही है, और इस मिशन को गति देने में बैंकों की भूमिका निर्णायक होगी।  राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उदाहरण दिया और कहा कि इन योजनाओं की सफलता के केंद्र में बैंकों की सहयोगी भावना है। उन्होंने साफ कहा कि अनावश्यक दस्तावेज़ों की मांग, बार-बार वेरिफिकेशन और प्रक्रिया में देरी जैसी स्थितियाँ लाभार्थियों को हतोत्साहित करती हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बैंकिंग प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे आम नागरिक को वास्तविक सहूलियत मिले और पात्र लाभार्थी बिना किसी दिक्कत के योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक निवेश, उद्यमिता, कृषि और महिला-युवा स्वावलंबन के क्षेत्रों में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इस प्रगति में बैंकिंग तंत्र की सक्रिय साझेदारी अनिवार्य है। उन्होंने सभी बैंक प्रतिनिधियों से कहा कि किसान, सूक्ष्म,लघु, मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप, महिला स्वयं सहायता समूहों और नवउद्यमी युवाओं को ऋण उपलब्धता सरल, सम्मानजनक और समयबद्ध हो। मुख्यमंत्री ने उन जनपदों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए जहाँ सीडी रेशियो 40 प्रतिशत से कम है, और कहा कि बैंकों को गाँवों को लक्षित कर मेगा ऋण मेले आयोजित करने चाहिए। मुख्यमंत्री ने हर माह जिला स्तरीय बैकर्स कमेटी की बैठक सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव को निर्देशित किया। उन्होंने बैंकों से सीएसआर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास में सहभागी बनने का भी आह्वान किया। बैठक में बताया गया कि पिछले 08 वर्षों में प्रदेश का बैंकिंग तंत्र अत्यंत मजबूत हुआ है। मार्च 2017 में प्रदेश की कुल जमा राशि 8.92 लाख करोड़ रुपये थी, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 20.44 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में कुल ऋण वितरण 4.05 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12.34 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गया। मार्च 2017 में प्रदेश का कुल बैंकिंग व्यवसाय 12.80 लाख करोड़ रुपये था, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 32.79 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 के दौरान अकेले जमा में 6.47 लाख करोड़ रुपये, ऋण में 5.03 लाख करोड़ रुपये और कुल बैंकिंग व्यवसाय में 11.50 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि, एमएसएमई और प्राथमिकता क्षेत्रों में ऋण प्रवाह लगातार बेहतर हुआ है। दिसंबर 2024 से दिसंबर 2025 के बीच एमएसएमई क्षेत्र में 23 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय समावेशन अभियान (जुलाई-अक्टूबर 2025) की उपलब्धियों की जानकारी भी बैठक में प्रस्तुत की गई। इस अवधि में प्रदेश ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और आठ प्रमुख सूचकों में से सात पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रदेश में 57,699 वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित हुए, 22.24 लाख जनधन खाते खोले गए, 17.14 लाख लोगों का जीवन सुरक्षा बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) में और 43.35 लाख नागरिकों का दुर्घटना बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) में नामांकन हुआ। अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में 6.90 लाख नए सब्सक्रिप्शन दर्ज किए गए। नामांकन, दावा निपटान, पुनः-केवाईसी और नामांकन अद्यतन जैसे क्षेत्रों में भी प्रदेश का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष रहा। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ऊर्जा, कृषि, बुनियादी ढाँचा, उद्योग, एमएसएमई और एनबीएफसी सह-ऋण मॉडल सहित विभिन्न क्षेत्रों में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत किए गए हैं। यूपीपीसीएफ, यूपीसीयू, पावर ट्रांसमिशन और … Read more