मुख्यमंत्री डॉ. यादव जीआईएस में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा पर आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में हुए शामिल

सबसे सस्ती बिजली बनाने में मध्यप्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेज गति से हो रहे हैं कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव जीआईएस में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा पर आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में हुए शामिल भारतीय रेल के साथ हुआ पीपीए अनुबंध संपादित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में गत वर्षों में नवीन और नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तेज गति से वृद्धि हुई है। अब यह हमारी कुल ऊर्जा उत्पादन का 15% हो गई है। साथ ही मध्यप्रदेश ने सबसे सस्ती बिजली बनाने का रिकॉर्ड भी बनाया है। प्रदेश के नीमच जिले में स्थापित सोलर परियोजना में 02 रुपए 14 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उत्पादन किया जा रहा है और यह सस्ती बिजली हमारी सरकार भारतीय रेलवे को बेच रही है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के अंतर्गत नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा पर आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत दुनिया के सामने हर क्षेत्र में सीना तान के खड़ा है। आज जहां विश्व में उथल-पुथल मची हुई है, बहुत से देश आपस में बात भी नहीं करते। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी का सभी से निरंतर संवाद है और वे भारत की प्रगति के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। सोमवार को भोपाल में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट आयोजित की गई है, जिसमें दुनिया भर से मध्यप्रदेश में निवेश प्रस्ताव आ रहे है। देश-विदेश के निवेशकों ने मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर भरोसा जताया है। हमारे लिए छोटा से छोटा निवेश भी बहुत बड़ा है और हर निवेशक महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी संस्कृति सूर्य पर केन्द्रित है। सूर्य देव की हम पूजा करते हैं और वह हमें ऊर्जा प्रदान करते हैं। सूर्य के सारथी अश्विन है। वैसे ही हमारे मार्गदर्शक केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव हैं। मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के साथ ही तेज गति से रेलवे नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा विशेष रूप से सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से कार्य हो रहा है। रीवा में 750 मेगावाट क्षमता का अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क स्थापित किया गया है। इसी प्रकार नीमच में 500 मेगावाट का सोलर पॉवर प्लांट और भारत का सबसे बड़ा पम्पड हाइड्रो पॉवर स्टोरेज प्रोजेक्ट लगाया गया है। यह सबसे सस्ती बिजली का उत्पादन कर रहा है। ओंकारेश्वर में भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किया गया है। नर्मदापुरम जिले के मुहासा बाबई में भारत का पहला पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन बनाया गया है। पहले इसके क्षेत्र को बढ़ाकर 884 एकड़ किया गया था, अब इसमें 1000 एकड़ क्षेत्र और बढ़ाया जा रहा है। मध्यप्रदेश भारत के 500 गीगावॉट के नवकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में निवेश का अच्छा माहौल बना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक भारतीय रेल ऊर्जा के क्षेत्र में "नेट जीरो" हो जाएगी, अर्थात शत-प्रतिशत बिजली पर चलेगी। अभी 97% रेलवे लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन कर लिया गया है। आज मध्यप्रदेश के साथ 170 मेगावाट का पावर परचेज एग्रीमेंट किया गया है, जो अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश जितनी भी अतिरिक्त बिजली उत्पादित करेगा हम खरीदेंगे। वैष्णव ने कहा कि मध्य प्रदेश में रेलवे नेटवर्क का ऐतिहासिक कार्य चल रहा है। इस क्षेत्र में 01 लाख 4 हजार करोड रुपए का निवेश किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2014 के बाद 2456 किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क तैयार किया गया है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। आज हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री स्वयं ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव निरंतर प्रदेश में निवेश बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। चरैवेति, चरैवेति के आदर्श वाक्य को लेकर वे निरंतर इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में 10 वर्ष पहले मात्र 500 मेगावाट नवकरणीय ऊर्जा उत्पादित होती थी जो अब 7000 मेगावाट हो गई है। प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाया गया है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश में भरपूर जल, जमीन, वायु और सूर्य का प्रकाश है, वे यहां इन्वेस्ट करें। शिखर सम्मेलन में सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन के आर.पी. गुप्ता, साउथ एशिया रीजनल डायरेक्टर इमाद फारुकी, अवाडा ग्रुप के विनीत मित्तल, एलएलपी समूह के सुनील जैन, उद्योगपति पराग शर्मा, पिनाकी भट्टाचार्य, पवन अग्रवाल, नवीन खंडेलवाल, राजीव जैन, जिग्नेश मेहता, गुरदीप सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अपर प्रमुख सचिव एमएसएमई मनु श्रीवास्तव ने शिखर सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की और स्वागत भाषण दिया। एमडी अमनवीर सिंह बैंस ने आभार व्यक्त किया। पीपीए अनुबंध हुआ संपादित, निवेशकों ने किये निवेश अनुबंध मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में शिखर सम्मेलन में दो पावर परचेज एग्रीमेंट अनुबंध पहला भारतीय रेल, नीमच सोलर प्रोजेक्ट, रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड और वारी के बीच तथा दूसरा एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी, वारी और रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड के बीच संपादित हुए। इसके साथ ही नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विभिन्न निवेशकों के साथ निवेश अनुबंध भी सम्पादित हुए।   recent visitors 55

टेक-इन्वेस्ट-मध्यप्रदेश-विभागीय-शिखर-सम्मलेन-का-आयोजन-मुख्यमंत्री-डॉ-यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का भोपाल में आयोजन हुआ है और इसका लाभ सभी क्षेत्रों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की राजधानी भोपाल की बदलती पहचान का ज़िक्र करते हुए कहा कि अब यहां की पहचान निवेश, उद्योग और व्यापार से हो रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पहले दिन सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के शिखर सम्मेलन "टेक इन्वेस्ट मध्यप्रदेश'' में आईटी और टेक क्षेत्र के उद्योगपतियों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आईटी एक अलग प्रकार की दुनिया है और इस क्षेत्र में निवेश और विस्तार की अनंत संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने आईटी के क्षेत्र में बनाई गई नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि बाकी राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश ने सबसे अच्छी पॉलिसी बनाई है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों का लाभ निवेशकों को मिलेगा। आईटी सेक्टर के विस्तार के लिए मध्यप्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन जगहों पर आईटी के क्षेत्र में चुनौतियां आती थीं, आज वहां भी आईटी हब बन रहे हैं। विभागीय शिखर सम्मेलन में भारत को अगली प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनने के मध्यप्रदेश के दृष्टिकोण पर चर्चा की गई। विभिन्न संस्थाओं से निवेश प्रस्ताव प्राप्त किये एवं एमओयू साइन किये गये। सत्र में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) के लिए मध्यप्रदेश को वैश्विक केंद्र पर आयोजित सत्रों में विभिन्न पेनालिस्ट ने अपने विचार साझा किये। शिखर सम्मेलन में विभिन्न प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कुल 25 हजार 640 करोड़ का निवेश प्राप्त हुआ, जिससे लगभग एक लाख 83 हजार 400 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। आईटी और आईटीएस क्षेत्र में 5500 करोड़ का निवेश प्राप्त हुआ। इससे अनुमानित 93 हजार रोजगार सृजित होंगे। ईएसडीएम क्षेत्र में 14 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ, जिससे लगभग 14 हजार रोजगार सृजित होंगे। डेटा सेंटर के लिये 6800 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ, जिसमें 2900 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। जीसीसी में 700 करोड़ का निवेश प्राप्त हुआ, जिससे 40 हजार 500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। एबीजीसी-एक्सआर में 110 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ, जिसमें 3000 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। ड्रोन सेक्टर में 180 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ, जिससे लगभग 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। मध्यप्रदेश भारत की डिजिटल क्रांति में सबसे आगे : दुबे अपर मुख्य सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने राज्य को आईटी क्षेत्र में अग्रणी बनाने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भारत की डिजिटल क्रांति में सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश लोक सेवाओं की गांरटी प्रदान करने वाला देश में पहला राज्य है। यहां भूमि के पंजीकरण एवं नामांतरण की व्यवस्था ऑनलाइन है। राष्ट्रीय सेवा वितरण मूल्यांकन 2025 में देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। देश का सबसे स्वच्छतम शहर इंदौर एवं स्वच्छतम राजधानी भोपाल स्थित है। यहा के टियर टू शहर राज्य की स्थिति को तकनीकी गंतव्य के रूप में मजबूत कर रहे है। एसीएस दुबे ने भारत में जीसीसी इण्डस्ट्री के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मध्यप्रदेश की जीसीसी नीति के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डाला। मध्यप्रदेश में दी जा रही निवेश सुविधाओं के बारे में अवगत कराया। अपर मुख्य सचिव दुबे ने कहा कि राज्य ने प्रभावशाली आईटी, आईटीएस और ईएसडीएम निवेश प्रोत्साहन नीति-2023, जीसीसी नीति-2025, एबीजीसी एक्सआर नीति-2025, ड्रोन प्रमोशन और उपयोग नीति 2025 और समीकंडक्टर नीति 2025 लांच की है। यह नीतियाँ वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने एवं राज्य में विकसित पारिस्थितिक तंत्र बनाने में सहयोग प्रदान कर रही है। नीतियों में कैपेक्स, भूमि और ब्याज छूट, प्लग-एंड-प्ले सुविधा आदि का प्रावधान किया गया है। भारत को उत्पाद पॉवर हाउस बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिये : डॉ. चौधरी पद्म भूषण पुरस्कार विजेता, सह-संस्थापक और पूर्व एमडी एचसीएल, संस्थापक ईपीआईसी फाउंडेशन डॉ. अजय चौधरी ने कहा कि ने कहा कि डिजाइन केन्द्रों, स्टार्ट-अप्स, शिक्षाविदों और ग्लोबल मार्केटिंग को एकीकृत कर भारत को उत्पाद पॉवर हाउस बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिये। हमें यह कोशिश करना चाहिये कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कम्पनी भारत में स्थापित हों। भारत को उत्पाद राष्ट्र बनाना चाहिये। मध्यप्रदेश में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन क्षमता बढ़ाने की असीम संभावनाएँ हैं। डॉ. चौधरी ने तकनीकी निवेश और दीर्घकालिक रणनीतियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अगले 20 वर्षों में भारत की कंपनियों को दुनिया की शीर्ष पांच कंपनियों में शामिल करने की दिशा में सोचना चाहिए। डॉ. चौधरी ने 'मेक इन इंडिया' पहल को और ज़्यादा सुदृढ़ करते हुए इसे 'डिज़ाइन एंड मेक इन इंडिया' में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सेमीकंडक्टर, ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों पर केंद्रित नीतियों को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में यदि भारत को वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में अग्रणी बनाना है, तो प्रौद्योगिकी निर्माण में अधिक निवेश करना होगा। शासकीय सेवाओं का लाभ प्रदान करने में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य : कृष्णन टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए सचिव सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार एस. कृष्णन ने कहा कि हमें डिजिटल टेक्नोलॉजी पर अधिक जोर देना जरूरी है, क्योंकि अर्थव्यवस्था अब तकनीक के आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि 10 साल पहले डिजिटल टेक्नोलॉजी का भारत की जीडीपी में योगदान मात्र 6-7 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 13 प्रतिशत हो गया है और वर्ष 2030 तक इसके 20प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज भारत में 90 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन असेंबल किए जा रहे हैं, जिससे देश टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था द्वारा भारत वर्ष 2047 तक विकसित देश बन जायेगा। विश्व की 70 प्रतिशत से अधिक डिजाइन कम्पनियाँ भारत में स्थापित हैं। हम डिजाइन के क्षेत्र में भारत को वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित कर सकते हैं। मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक कृषि उत्पादक राज्य है, यहाँ बाइब्रेंट टेक ईको सिस्टम है। राज्य में सेमी-कंडक्टर डिजाइन के लिये टियर-टू शहर हैं। शासकीय सेवाओं का लाभ प्रदान करने में मध्यप्रदेश देश … Read more

फिर 6000 करोड़ का कर्जा लेने की तैयारी मोहन सरकार, 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज तले दबा प्रदेश

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से ठीक पहले एक बार फिर 6000 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने जा रही है। यह कर्ज तीन अलग-अलग हिस्सों में 20 फरवरी को लिया जाएगा। जिसकी भरपाई 12, 15 और 23 वर्षों की अवधि में की जाएगी। इससे पहले, 1 जनवरी 2025 को सरकार ने 5,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। नए कर्ज के बाद, चालू वित्त वर्ष में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 41,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।बता दें कि पिछले साल 4 महीने में चार बार लगातार सरकार ने 20 हजार करोड़ का कर्ज़ लिया था। मध्य प्रदेश सरकार पर अब तक 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज़ हो चुका है। बता दें कि प्रदेश सरकार, अभी 24 और 25 फरवरी को आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारी कर रही है। इस समिट के आयोजन के लिए विशेष तैयारियां की हैं। इस समिट में देश-विदेश से निवेशक भाग लेंगे, जिनके लिए सरकार ने यात्रा, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं की योजना बनाई है। इन तैयारियों में करोड़ों रुपए खर्च होने का अनुमान है। recent visitors 44

पीएम मोदी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में मरने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त

नई दिल्ली नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात मचे भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई तो दर्जनों लोग घायल हो गए। घटना में जान गंवाने वाले अधिकतर लोग बिहार के हैं। 7 साल के बच्चे से लेकर 79 साल के बुजुर्गों तक ने घटना में अपनी जान गंवाई है। मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया गया है। मृतकों में 12 महिलाएं शामिल हैं तो 4 बच्चों को भी जान चली गई। भगदड़ में मारे गए बच्चों की उम्र 7 साल से लेकर 15 साल तक की है। 18 मृतकों में से 9 की पहचान बिहार निवासी के रूप में हुई है। बक्सर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और पटना के कई लोगों ने हादसे में अपनी जान गंवा दी। इनकी गई जान 1. आहा पत्नी पति रविंदे नाथ, निवासी बक्सर, उम्र- 79 साल 2. पिंकी पत्नी पति उपेंद्र शर्मा, निवासी संगम विहार दिल्ली, उम्र- 41 साल 3. शीला पत्नी पति उमेश गिरी, निवासी सरिता विहार दिल्ली, उम्र 50 साल 4. व्योम पुत्र धर्मवारी, निवासी बवाना दिल्ली, उम्र- 25 साल 5. पूनम देवी पत्नी मेघा नाथ, निवासी सारन बिहार, उम्र- 40 साल 6. ललिता देवी पत्नी संतोश, निवासी- पटना बिहार, उम्र- 35 साल 7. सुरुचि पुत्री मनोज शाह निवासी मुजफ्फरपुर बिहार, उम्र- 11 साल 8. कृष्णा देवी पत्नी विजय शाह, निवासी- समस्तीपुर बिहार, उम्र- 40 साल 9. विजय शाह पुत्र राम स्वरूप शाह निवासी- समस्तीपुर बिहार, उम्र- 15 साल 10. नीरज पुत्र इंद्रजीत पासवान, निवासी वैशाली बिहार, उम्र- 12 साल 11. शांति देवी पत्नी राज कुमार मांझी, निवासी- नवादा बिहार, उम्र 40 साल 12. पूजा कुमार पुत्री राज कुमार मांझी, नवादा बिहार, उम्र- 8 साल 13. संगीता मलिक पत्नी मोहित मलिक, निवासी- भिवानी हरियाणा, उम्र 34 साल 14. पूनम पत्नी वीरेंद्र सिंह, निवासी महावीर एनक्लेव उम्र 34 साल 15. ममता झा पत्नी विपिन झा, निवासी- नांगलोई दिल्ली, उम्र 40 साल 16. रिया सिंह पुत्री ओपिल सिंह, निवासी- सागरपुर दिल्ली, उम्र 7 साल 17. बेबी कुमारी पुत्री प्रभु शाह, निवासी- बिजवासन दिल्ली, उम्र- 24 साल 18. मनोज पुत्र पंजदेव कुशवाहा, निवासी नांगलोई दिल्ली, उम्र 47 साल प्रयागराज होते हुए बिहार जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी भी थी लेट शनिवार रात महाकुंभ जाने वाले यात्रियों की रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। प्लेटफॉर्म 14, 15 के बीच पुल पर भीड़ के अनियंत्रित हो जाने से सीढ़ियों पर खड़े लोग हादसे का शिकार हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस देरी से चल रही थीं और इन ट्रेन के यात्री भी प्लेटफार्म नंबर 12, 13 और 14 पर मौजूद थे। स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस प्रयागराज होते हुए बिहार जाती है। बड़ी संख्या में लोग स्वतंत्रता सेनानी में बैठना चाहते थे। कई गाड़ियों के लेट होने के बीच जब एक स्पेशल ट्रेन की घोषणा हुई तो अधिक से अधिक लोग उसकी तरफ बढ़ना चाहते थे, जिससे यह हादसा हुआ। पीड़ितों के लिए मुआवजे का ऐलान रेलवे ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजन को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने घोषणा की। रेलवे ने कहा कि गंभीर रूप से घायलों को ढाई-ढाई लाख रुपये और मामूली रूप से घायल हुए लोगों को एक-एक लाख रुपए दिए जाएंगे। भगदड़ की पुलिस ने शुरू की जांच दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ की घटना की रविवार को जांच शुरू कर दी जिसके तहत सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि अफरातफरी क्यों मची। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात भगदड़ मचने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 12 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने कहा, 'हमारा मुख्य लक्ष्य भगदड़ के मुख्य कारण की जांच करना है। हम सीसीटीवी फुटेज और उस दौरान की गई घोषणाओं का सारा डेटा एकत्र करेंगे।'  नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात मची भगदड़ में 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में कई लोग घायल हैं, जिनका दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में इलाज चल रहा है। रेलवे ने हादसे की जांच के लिए कमिटी गठित कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, रेलवे की रिपोर्ट में सामने आया है कि स्टेशन पर इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। घंटेभर में 1500 जनरल टिकट बेचे गए रिपोर्ट में सामने आया है कि नई दिल्ली स्टेशन पर प्रयागराज के लिए ट्रेन आने वाली थी। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के लिए भारी संख्या में लोग शाम से ही स्टेशन पहुंचना शुरू हो गए थे। जिन लोगों के पास ट्रेन का कंफर्म टिकट था, उनके अलावा भी हजारों की तादाद में लोग प्लेटफॉर्म पर पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली स्टेशन पर एक घंटे में 1500 जनरल टिकट बेचे गए। ये संख्या बताती है कि स्टेशन पर यात्रियों की कितनी भारी भीड़ थी। अचानक कैसे मची भगदड़? जानकारी के अनुसार, भगदड़ स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर हुई। दरअसल 14 नंबर प्लेटफॉर्म पर प्रयागराज एक्सप्रेस आने वाली थी। वहीं 13 नंबर प्लेटफॉर्म पर बिहार के लिए आने वाली ट्रेन देरी से चल रही थी। इसके बाद अनाउंसमेंट हुआ कि प्लेटफॉर्म नंबर 16 से एक स्पेशल ट्रेन प्रयागराज के लिए चलेगी। घोषणा के बाद ही लोग प्लेटफॉर्म नंबर 14 से 16 की ओर बढ़ने लगे। प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर पहले से ही ओवर क्राउड था। भीड़ सीढ़ियों की मदद से ऊपर की ओर बढ़ी, वहीं सीढ़ियों पर पहले से ही पैर रखने की जगह नहीं थी। ऐसी धक्का-मुक्की में कुछ लोग बेहोश हो गए और नीचे गिर गए। लोगों को कुचलते हुए भीड़ आगे बढ़ने लगी। प्लेटफॉर्म पर भगदड़ की स्थिति हो गई।   रेलवे अधिकारी ने बताई भगदड़ की वजह उत्तर रेलवे के CPRO हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, "कल जब यह दुखद घटना हुई, उस समय नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 14 पर पटना की ओर जाने वाली मगध एक्सप्रेस और प्लेटफार्म नंबर 15 पर जम्मू की ओर जाने वाली उत्तर संपर्क क्रांति खड़ी थी। इसी दौरान फुट ओवर ब्रिज से प्लेटफार्म नंबर 14-15 की ओर आने वाली सीढ़ियों पर यात्रियों के फिसलकर गिरने से उनके पीछे खड़े कई यात्री इसकी चपेट … Read more

सरकार ने नई आबकारी नीति की लागू, POS मशीन के बिना शराब बेचने पर लगेगा जुर्माना

भोपाल मध्य प्रदेश में सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की है। इस नीति के तहत 19 धार्मिक शहरों और गांवों में शराब की दुकानें बंद होंगी। POS मशीन के बिना शराब बेचने पर जुर्माना लगेगा। नई नीति 1 अप्रैल से लागू होगी। धार्मिक क्षेत्र में शराबबंदी के बाद दूसरे जगह पर दुकान खोलने का फैसला लिया गया है। बंद हो चुकी दुकानों की भरपाई के लिए शराब अब महंगी हो जाएगी। 19 पवित्र शहरों और गांव में 1 अप्रैल से शराब की दुकान बंद होगी। ई गारंटी के तहत साइबर ट्रेजरी चालान बैंक खातों में जमा होगा।   POS मशीन से होगी निगरानी बता दें कि मध्य प्रदेश में 20 साल में 37% शराब की दुकानें बढ़ चुकी हैं। रेस्टोरेंट और बार में भी जगह बढ़ाने के लिए अब अतिरिक्त शुल्क देना होगा। POS मशीन लगाने का फैसला शराब की बिक्री पर नजर रखने के लिए लिया गया है। इससे सरकार को टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी पता चल सकेगा कि कौन सी दुकान कितनी शराब बेच रही है। यह पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1 अप्रेल से 19 क्षेत्रों में शराबबंदी मध्य प्रदेश सरकार ने 1 अप्रेल से 19 धार्मिक व पवित्र क्षेत्रों में शराबबंदी का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसके तहत उज्जैन नगर निगम, ओंकारेश्वर नगर पंचायत, मंडलेश्वर नगर पंचायत, ओरछा नगर पंचायत, महेश्वर नगर पंचायत, दतिया नगर पालिका, मैहर नगर पालिका, चित्रकूट नगर पंचायत, पन्ना नगर पालिका, मुलताई नगर पालिका, मंदसौर नगर पालिका, मंडला नगर पालिका, अमरकंटक नगर पंचायत, सलकनपुर ग्राम पंचायत, बरमान कला ग्राम पंचायत, लिंगा ग्राम पंचायत, कुंडलपुर ग्राम पंचायत, बांदकपुर ग्राम पंचायत और बरमान खुर्द ग्राम पंचायत शामिल हैं. बिना पीओएस मशीन नहीं चलेगी शराब दुकान नई आबकारी नीति में यह भी कहा गया है कि बिना पीओएस यानी प्वाइंट ऑफ सेल मशीन के शराब नहीं बेची जा सकेगी. वहीं रेस्टोरेंट और बार में सिटिंग स्पेस बढ़ाने पर अतिरिक्त शुल्क भी चुकाना होगा. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पिछले 20 सालों में 37 प्रतिशत शराब दुकानें बढ़ चुकी हैं. शराबदुकानों और रेस्टोरेंट बार की टाइमिंग नई आबकारी नीति 2025 की गाइडलाइन के मुताबिक शराब दुकान खुलने का समय सुबह 9:30 बजे से रात 11:30 बजे तक रहेगा. वहीं रेस्टोरेंट बार, होटल, रिसॉर्ट, क्लब आदि के लिए शराब बेचे जाने की टाइमिंग सुबह 10 बजे से रात 11.30 बजे तक रहेगी. हालांकि, बार-रेस्टोरेंट, क्लब, रिसॉर्ट आदि में 12 बजे तक शराब पी जा सकेगी. बार-क्लब या रेस्टोरेंट ओनर अतिरिक्त शुल्क देकर शराब बेचने और पीने की टाइम लिमिट बढ़वा सकते हैं. गौरतलब है कि शुक्रवार को सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में शराब नीति के साथ कुल 4 नीतियों पर संशोधन हुआ है. recent visitors 42

1 अप्रैल से लागू हो रही यूनिफाइड पेंशन स्‍कीम, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कितना बेहतर, समझें

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने राष्‍ट्रीय पेंशन सिस्‍टम (NPS) के ऑप्‍शन के तौर पर यूनिफाइड पेशन स्‍कीम (UPS) शुरू की है. 24 जनवरी को इस स्‍कीम का अधिकारिक ऐलान हुआ था. इस योजना को 1 अप्रैल 2025 से लागू किया जाएगा. UPS स‍िर्फ और सिर्फ सरकारी कमचारियों के लिए लागू होगा, जो पहले से ही NPS के तहत रजिस्‍टर्ड हैं. सरकारी कर्मचारियों के पास विकल होगा कि वे NPS या UPS में से किसी एक को चून सकते हैं. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि एनपीएस के तहत पात्र केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के पास अब एनपीएस के तहत यूनिफाइड पेंशन योजना में स्विच करने का विकल्प है. यूपीएस योजना को तब शुरू किया गया, जब ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम (OPS) को लेकर खूब मांग उठ रही थी. ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम में रिटायर्ड कर्मचारियों को उनके वेतन का 50 फीसदी पेंशन के तौर दिया जाता था.   क्‍या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)? यूपीएस के तहत अब केंद्रीय कर्मचारियों को एक निश्‍चित पेंशन दिया जाएगा, जो लास्‍ट 12 महीने की ऐवरेज बेसिक सैलरी का 50% होगा. कर्मचारी को यह पेंशन पाने के लिए कम से कम 25 साल तक सर्विस करनी होगी. वहीं अगर कर्मचारी की मौत हो जाती है तो परिवार को भी एक निश्चित पेंशन दिया जाएगा, जो कर्मचारी को मिलने वाले पेंशन का 60 फीसदी होगा. इसके अलावा, मिनिमम एश्‍योर्ड पेंशन भी दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि जो लोग 10 साल तक नौकरी करते हैं तो उन्‍हें कम से कम 10 हजार रुपये की पेंशन मिलेगी. महंगाई के आधार पर बढ़ेगी पेंशन यूनिफाइड पेंशन स्कीम के तहत इंडेक्‍सेशन को भी जोड़ा गया है. इसका मतलब है कि महंगाई के हिसाब से रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन बढ़ती रहेगी. यह बढ़ोतरी महंगाई राहत (Dearness Alloawance) के तौर पर पेंशन में जोड़ी जाएगी. यह ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-W) के आधार कैलकुलेट होगा. वहीं रिटायमेंट पर एकमुश्‍त रकम भी दी जाएगी. इससे करीब 23 लाख कर्मचारियों को लाभ पहुंचने वाला है. किसे मिलेगा इस योजना का लाभ? NPS के तहत कवर होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इस यूनिफाइड पेंशन स्कीम को शनिवार 25 जनवरी 2025 को सरकार की ओर से नोटिफाई किया गया है. यूनिफाइड पेंशन स्कीम केंद्र सरकार के ऐसे कर्मचारियों पर लागू होगी, जो कि NPS यानी नेशनल पेंशन स्कीम के तहत आते हैं और इसके तहत यूपीएस के ऑप्शन को चुनते हैं.  यूपीएस चुनने वाले लोग किसी अन्य पॉलिसी रियायत, पॉलिसी चेंज, फाइनेंशियल बेनिफिट के हकदार नहीं होंगे. सरकार कितना करेगी योगदान? केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बीते 24 अगस्त 2024 को यूपीएस का ऐलान करते हुए इससे जुड़ी तमाम जानकारियां शेयर की थीं. न्यू पेंशन स्कीम (NPS) में कर्मचारी को अपनी बेसिक सैलरी का 10 फीसदी कॉन्ट्रिब्यूट करना होता है और इसमें सरकारी कॉन्ट्रिब्यूशन 14 फीसदी होता है. वहीं 1 अप्रैल 2025 से UPS लागू होने के बाद सरकार का ये कॉन्ट्रिब्यूशन या अंशदान कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 18.5 फीसदी होगा. इस हिसाब से सरकारी खजाने पर बढ़ने वाला अतिरिक्त बोझ पहले साल 6250 करोड़ रुपये होगा. 23 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों को फायदा पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) इसके लिए जरूरी नियम जारी करेगी. यह योजना 23 लाख से ज्यादा केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लाभकारी मानी जा रही है. इस योजना के तहत सरकार का कॉन्ट्रिब्यूशन बेसिक पे और महंगाई भत्ते (DA) की कुल राशि का 18.5 फीसदी हो जाएगा, जो पहले 14 फीसदी था. वहीं, कर्मचारी अपनी पेंशन के लिए 10 फीसदी का कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रखेंगे. UPS के फायदे UPS प्रोग्राम की शुरुआत सरकारी कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने की लगातार मांग के जवाब में की गई है, जिसमें रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी अंतिम वेतन का 50 फीसदी पेंशन के रूप में मिलता था. यूपीएएस के तहत, सरकारी कर्मचारी अपनी मूल सैलरी और महंगाई भत्ते का 10 फीसदी योगदान देंगे, जबकि सरकार 18.5 फीसदी का योगदान करेगी. इसके अलावा, सरकार एक अलग पूल्ड कॉर्पस के लिए एडिशनल 8.5 फीसदी का योगदान करेगी. इस स्कीम में रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को उनकी अंतिम 12 महीनों की औसत सैलरी का 50 फीसदी पेंशन के तौर पर मिलेगा. UPS के लिए एलिजिबिलिटी यूनिफाइड पेंशन स्कीम का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने कम से कम 10 साल की सर्विस पूरी कर ली है. रिटारमेंट पर कर्मचारियों के मिलने वाले फायदे     पेंशन की गारंटी: रिटायरमेंट के बाद हर महीने आपकी पिछली 12 महीनों की औसत सैलरी का 50% पेंशन के तौर पर मिलेगा.     महंगाई के साथ बढ़ेगी पेंशन: पेंशन में समय-समय पर महंगाई के हिसाब से बढ़ोतरी होगी.     फैमिली पेंशन: अगर कर्मचारी की मौत हो जाती है, तो परिवार को पेंशन का 60 फीसदी हिस्सा मिलेगा.     रिटायरमेंट बेनिफिट्स: रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी के साथ एकमुश्त रकम दी जाएगी.     मिनिमम पेंशन: कम से कम 10 साल की नौकरी करने वालों को ₹10,000 महीना पेंशन की गारंटी है.     वॉलंटरी रिटायरमेंट का विकल्प: 25 साल की नौकरी के बाद आप वॉलंटरी रिटायरमेंट ले सकते हैं. आपकी पेंशन उस उम्र से शुरू होगी, जब आप सामान्य रिटायरमेंट की उम्र में पहुंचते हैं. क्या NPS छोड़कर UPS में आ सकते हैं? जो कर्मचारी पहले से NPS में हैं, वे इस नई स्कीम में शिफ्ट हो सकते हैं. हालांकि, UPS में एक बार शिफ्ट करने के बाद आप वापस NPS में नहीं जा सकते. कैसे होगा NPS से UPS में बदलाव? यूपीएस में गारंटीड पेंशन का फायदा उठाने के लिए कर्मचारियों को अपना पूरा एनपीएस फंड यूपीएस में ट्रांसफर करना होगा. अगर आपका एनपीएस फंड यूपीएस के लिए तय न्यूनतम राशि से कम है, तो आपको अंतर की रकम खुद भरनी होगी. अगर आपका फंड तय सीमा से ज्यादा है, तो अतिरिक्त रकम आपको वापस मिल जाएगी. UPS के तहत डीए और डीआर यूपीएस में सरकार का योगदान 14 फीसदी से बढ़कर 18.5 फीसदी हो जाएगा, जबकि कर्मचारी का योगदान बेसिक वेतन और महंगाई भत्ता का 10 फीसदी ही रहेगा. महंगाई राहत (DR) की गणना उसी तरह की जाएगी जैसे वर्तमान कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) की जाती है और यह केवल तब ही दी जाएगी जब भुगतान शुरू होंगे. रिटायरमेंट … Read more

प्रयागराज संगम में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने तोड़ा रिकॉर्ड, US -रूस की जनसंख्या से ज्यादा लोगों ने लगाई डुबकी!

प्रयागराज प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 ने इतिहास रच दिया है। 13 जनवरी से शुरू हुए इस विराट समागम में अब तक 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं। महाकुंभ के इस आयोजन का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि पूरी दुनिया में केवल भारत और चीन की जनसंख्या ही इस संख्या से अधिक है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से महाकुंभ ने अपनी दिव्यता और भव्यता से दुनिया को आकर्षित किया है। सीएम योगी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या एक नया रिकॉर्ड स्थापित करेगी, जो अब सच साबित हो चुका है। शुरुआत में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान था, जो 11 फरवरी को ही पूरा हो गया था। 14 फरवरी तक यह संख्या 50 करोड़ को पार कर गई है, और आगामी स्नान पर्वों के साथ यह संख्या 55 से 60 करोड़ तक जा सकती है। यूएस सेंसस ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया के 200 से अधिक राष्ट्रों में जनसंख्या के दृष्टिकोण से टॉप 10 देशों में क्रमश: भारत (1,41,93,16,933), चीन (1,40,71,81,209), अमेरिका (34,20,34,432), इंडोनेशिया (28,35,87,097), पाकिस्तान (25,70,47,044), नाइजीरिया (24,27,94,751), ब्राजील (22,13,59,387), बांग्लादेश (17,01,83,916), रूस (14,01,34,279) और मैक्सिको (13,17,41,347) शामिल हैं. वहीं महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अब तक की (50 करोड़) हो चुकी है. अमेरिका, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, नाइजीरिया, ब्राजील, बांग्लादेश, रूस और मैक्सिको की जनसंख्या इससे कहीं पीछे है. सीएम योगी ने अनुमान जताया था कि इस बार कुंभ में लोगों की संख्या का नया रिकॉर्ड बनेगा. शुरुआत में ही 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया था. उनका यह आकलन बीते 11 फरवरी को ही सच साबित हो गया था. वहीं शुक्रवार 14 फरवरी को यह संख्या 50 करोड़ के ऊपर पहुंच चुकी है. अभी महाकुंभ में 12 दिन और एक महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष हैं. स्नान करने वालों की यह संख्या 55 से 60 करोड़ के ऊपर जा सकती है. विभिन्न स्नान पर्वों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अब तक के कुल श्रद्धालुओं की संख्या का विश्लेषण करें तो सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति पर अमृत स्नान किया था. एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ के पार और पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई थी. इसके अलावा बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई थी. माघी पूर्णिमा के महत्वपूर्ण स्नान पर्व पर भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पावन स्नान किया था. दुनिया के प्रमुख देशों की जनसंख्या से अधिक श्रद्धालु ने लगाई डुबकी यूएस सेंसस ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के टॉप 10 देशों की जनसंख्या में केवल भारत और चीन की जनसंख्या महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या से अधिक है। भारत की जनसंख्या 1.41 अरब और चीन की 1.40 अरब है, जबकि अमेरिका (34.2 करोड़), पाकिस्तान (25.7 करोड़), नाइजीरिया (24.3 करोड़) जैसे देशों की जनसंख्या महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं से काफी कम है। पर्वों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़  महाकुंभ के दौरान विभिन्न स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति पर अमृत स्नान किया था। एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई थी, वहीं पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया था। बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और माघी पूर्णिमा पर भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पावन स्नान किया। आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की संख्या महाकुंभ में अभी 12 दिन और एक महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष है, जिसमें और श्रद्धालु संगम में स्नान करने के लिए पहुंच सकते हैं। इस बार के महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों से कहीं अधिक रही है, जो एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड है।   recent visitors 77