भारत से टकरा सकता है विनाशकारी एस्टेरॉयड 2024 YR4, वैज्ञानिकों ने खतरे को बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया

वॉशिंगटन  एस्टेरॉयड 2024 YR4 के पृथ्वी से टकराने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिकों ने पहले अनुमान लगाया था कि एस्टेरॉयड 2024 YR4 के पृथ्वी से टकराने की आशंका करीब 1 प्रतिशत है। लेकिन अब खतरे को बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया गया है। खतरे की संभावना का लगातार बढ़ना वैज्ञानिकों को भी लगातार परेशान कर रहा है। सबसे परेशान करने वाली बात ये है कि कि इसकी स्पीड क्या है और वास्तविक आकार क्या है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका आकार 200 मीटर तक हो सकता है। हालांकि नासा के वैज्ञानिकों ने एस्टेरॉयड 2024 YR4 के संभावित असर वाले क्षेत्रों की पहचान करनी शुरू कर दी है ताकि अगर वास्तव में टक्कर अवश्यंभावी हो जाए, तो पहले से ही लोगों को बचाने की कोशिशें शुरू की जा सकें। नासा के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि अगर एस्टेरॉयड 2024 YR4 पृथ्वी से टकराता है तो ये पूरे शहर को नष्ट कर सकता है। लिहाजा नासा ने एस्टेरॉयड के गिरने को लेकर जो संभावित रास्ता तैयार किया है, उसमें भारत समेत कई घनी आबादी वाले देश आते हैं। वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि अगर ये एस्टेरॉयड पृथ्वी पर गिरता है तो ये 500 परमाणु बमों से ज्यादा शक्तिशाली ऊर्जा का निर्माण कर सकता है। लिहाजा विनाश का स्तर क्या हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। एस्टेरॉयड 2024 YR4 के टकराने की आशंका बढ़ी नासा के कैटालिना स्काई सर्वे प्रोजेक्ट के इंजीनियर डेविड रैंकिन ने उत्तरी दक्षिण अमेरिका से लेकर प्रशांत महासागर, दक्षिणी एशिया, अरब सागर और उप-सहारा अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक इस एस्टेरॉयड के गिरमे के जोखिम गलियारे की पहचान की है। इसके अलावा जिन देशों में एस्टेरॉयड के गिरने की संभावना सबसे ज्यादा जताई गई है उनमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इथियोपिया, सूडान, नाइजीरिया, वेनेजुएला, कोलंबिया और इक्वाडोर शामिल हैं। वैज्ञानिक रैंकिन ने कहा है कि "हालांकि प्रभाव की संभावना कम है, लेकिन अगर 2024 YR4 पृथ्वी से टकराता है, तो हम संभावित परिणामों को नजरअंदाज़ नहीं कर सकते।" एस्टेरॉयड 2024 YR4 को पिछले साल दिसंबर में खोजा गया था। जिसके बाद नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के वैज्ञानिकों के लिए ये एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। शुरुआती अनुमानों में टकराव की संभावना 1% थी, जो अब बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गई है। जिसे काफी खतरनाक कैटोगिरी में रखा गया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इसके आकार और स्पीड के बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं है। सबसे ज्यादा खतरनाक कैटोगिरी में रखा गया एस्टेरॉयड 2024 YR4 से संभावित खतरे को देखते हुए इसे टोरिनो स्केल पर तीन की रेटिंग दी गई है। टोरिनो स्केल पृथ्वी के पास होने वाले जोखिम को मापता है। एस्टेरॉयड 2024 YR4 को इतिहास में उस स्तर तक पहुंचने वाले एस्टेरॉयड के साथ रखा गया है, जिसने सबसे ज्यादा जोखिम पैदा की थी। वो है कुख्यात 'गॉड ऑफ कैओस' एस्टेरॉयड 99942 अपोफिस। डेटा यह भी संकेत मिले हैं, कि अगर ऐस्‍टरॉयड वाकई पृथ्वी से टकराता है, तो इसके स्तर स्थानीय हो सकते हैं। इस ऐस्‍टरॉयड का व्यास उस ऐस्‍टरॉयड के बराबर है, जो साल 1908 में साइबेरिया में तुंगुस्का घटना का कारण बना था। उस वक्त जब ऐस्‍टरॉयड टकराया था, तो करीब 2 हजार वर्ग किलोमीर का जंगल नष्ट हो गया था। उस टक्कर में 80 मिलियन से ज्यादा पेड़ उखड़ गये थे। विस्फोट का बल 10-15 मेगा टन टीएनटी के बराबर होने का अनुमान लगाया गया था। अभी तक जो आंकड़े उपलब्ध हो पाएं हैं, उससे पता चलता है, कि ये ऐस्‍टरॉयड 22 दिसंबर 2032 को पृथ्वी के करीब एक लाख 6 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जिसमें मार्जिन ऑफ एरर 1.6 मिलियन किलोमीटर हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दूरी पर, यह पश्चिमी मध्य अमेरिका से लेकर उत्तरी दक्षिण अमेरिका, फिर मध्य अटलांटिक महासागर और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होते हुए भारत तक पहुंचने वाली एक संकीर्ण पट्टी में पृथ्वी से टकरा सकता है। recent visitors 39

भारत टेक्स एक्सपो में मप्र दिखा रहा टेक्सटाइल की संभावनाएं, मप्र दुनिया का 24% तो देश का 47% आर्गेनिक कॉटन का उत्पादक

धार  मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों से धार जिले में स्थापित किए जा रहे पीएम मित्र पार्क को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। इस पार्क में अब तक 10,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिससे राज्य में औद्योगिक विकास को एक नई गति मिलेगी। इसके अलावा, इस परियोजना से 41,000 युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। टेक्सटाइल निवेश के लिए मजबूत आधार PM Mitra Parks : मध्यप्रदेश देश में कपास के उत्पादन में छठवें स्थान पर है, जो इसे टेक्सटाइल उद्योग के लिए एक उपयुक्त स्थान बनाता है। सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए 1,300 एकड़ का लैंड बैंक विकसित किया है, जिससे निवेशकों को भूमि अधिग्रहण में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। मप्र के प्रेजेंटेशन में जानकारी दी गई है कि प्रदेश आर्गेनिक कॉटन के उत्पादन सहित टेक्सटाइल सेक्टर में परंपरागत रूप से आगे रहा है। आयोजन में मप्र पार्टनर स्टेट के रूप में शामिल हुआ है। आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने किया। एमपी पवेलियन में प्रदेश की टेक्सटाइल सेक्टर की ताकत को दिखाया गया है। मप्र देश भर में कपास के उत्पादन में छठे नंबर पर है और यहां पारम्परिक रूप से टेक्सटाइल उत्पादन क्षेत्र रहे हैं। पवेलियन में बताया गया है कि मप्र आर्गेनिक कॉटन के उत्पादन में देश में 47 % का तो दुनिया में 24 % का योगदान करता है। आयोजन में बताया गया है कि मप्र में टेक्सटाइल सेक्टर में एक दशक में 25 हजार करोड़ का निवेश आ चुका है। धार में 2160 एकड़ में बन रहा पीएम मित्र पार्क आयोजन में मप्र धार में 2160 एकड़ में बन रहे पीएम मित्र पार्क की संभावनाओं का भी प्रदर्शन कर रहा है। टेक्सटाइल सेक्टर को समर्पित इस प्रोजेक्ट में 1265 एकड़ इंडस्ट्रियल प्लाट तो 36 एकड़ एमएसएमई के लिए प्लाट उपलब्ध हैं। लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के लिए 75 एकड़ तो प्लग एंड प्ले (पूर्व विकसित क्षेत्र) के लिए 67 एकड़ क्षेत्र रखा गया है। यहाँ निवेशक सीधे आकर काम शुरू कर सकते हैं। पीएम मित्र पार्क में 1 रुपए में जमीन तो 5 रु. में बिजली पीएम मित्र पार्क में सिर्फ 1 रुपए की लीज रेंट पर जमीन दी जाएगी, निवेशक को सिर्फ विकास शुल्क देना होगा। 40 % कैपिटल सब्सिडी, 50 % सीवेज ट्रीटमेंट पर सब्सिडी, हर एक कर्मचारी को नौकरी देने पर 5 हजार रुपये, एमएसएमई को 50 करोड़ तक सहायता, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में 40 करोड़ तक की बड़ी सहायता मिलेगी। ये बताया गया कि पार्क में 60 किमी अप्रोच रोड बन चुकी है। बिजली -पानी सप्लाई के काम जारी है। प्रोजेक्ट में इंटीग्रेटेड टाउनशिप भी बनेगी। एमपीआईडीसी को 10547 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं जिनसे 41600 से अधिक नौकरियां मिलेंगी। ग्रासिम, रेयमंड, ट्राइडेंट, इंडोरामा, कर्ल ऑन सहित बड़े समुह निवेश करेंगे। धार में पीएम मित्र पार्क: विशेष सुविधाएं  धार जिले में 2,160 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा पीएम मित्र पार्क निवेशकों को कई आकर्षक सुविधाएं प्रदान कर रहा है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित सुविधाएं शामिल हैं:     कम लागत पर भूमि: 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर की लीज रेंट     सस्ती बिजली: 5 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली उपलब्ध     आधुनिक बुनियादी ढांचा: उद्योगों के लिए वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं     सड़क एवं लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी: सुगम परिवहन और निर्यात हेतु बेहतरीन नेटवर्क राज्य सरकार का सहयोग  मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों को आवश्यक अनुमति एवं सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। टेक्सटाइल सेक्टर के विकास के लिए सरकार ने कई प्रोत्साहन योजनाएं भी लागू की हैं, जिससे निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। पीएम मित्र पार्क क्या है और इसका उद्देश्य क्या है? पीएम मित्र पार्क (PM MITRA Park) एक मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क है, जिसे केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर विकसित कर रही हैं। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक टेक्सटाइल हब बनाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। पीएम मित्र पार्क में निवेश करने के क्या लाभ हैं? निवेशकों को 1 रुपये लीज रेंट पर जमीन, 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली, और वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। मध्यप्रदेश टेक्सटाइल उद्योग के लिए क्यों उपयुक्त है? मध्यप्रदेश कपास उत्पादन में देश में छठवें स्थान पर है, जिससे यहां टेक्सटाइल उद्योग के लिए पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध होता है। साथ ही, सरकार निवेशकों को सुविधाजनक नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए समर्थन दे रही है। पीएम मित्र पार्क में कौन-कौन से उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं? इस पार्क में कपड़ा निर्माण, गारमेंटिंग, प्रोसेसिंग, डाइंग, और टेक्सटाइल से जुड़े अन्य उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। पीएम मित्र पार्क में निवेश करने के लिए क्या प्रक्रिया है? निवेश करने के इच्छुक उद्यमी और कंपनियां राज्य सरकार की वेबसाइट या संबंधित विभाग से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर सकती हैं।   recent visitors 60

प्रोजेक्ट चीता’ 3.O से कूनो में बढ़ेगा कुनबा, दक्षिण अफ्रीका से आएंगे 10 चीते

श्योपुर प्रोजेक्ट चीता(Project Cheetah) के तहत आगामी महीनों में दक्षिण अफ्रीका से नई खेप लाई जाएगी। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि इस खेप में कितने चीते लाए जाएंगे, लेकिन बताया रहा है कि गांधीसागर के साथ ही इन चीतों में कुछ चीते श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में भी लाए जाएंगे। यह 8-10 हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि नई खेप लाने के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीकी(South Africa) सरकारों के बीच सकारात्मक चर्चा चल रही है। देश में चीतों का पहला घर कूनो नेशनल पार्क(Kuno National Park) है। मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य को दूसरे घर के रूप में तैयार किया जा रहा है। तैयारियां अंतिम दौर में हैं, लेकिन यहां 20 चीतों को एक साथ रखने की क्षमता अपर्याप्त है। यदि नई खेप में 15-20 चीते लाए गए तो इनमें से कुछ चीते कूनो लाए जाएंगे। यहां पहले से ही छोटे-बड़े बाड़े तैयार हैं। हर साल 10 चीते शिफ्टिंग का है अनुबंध प्रोजेक्ट चीता(Project Cheetah) के तहत दक्षिण अफ्रीका(South Africa) से 8-10 साल तक प्रति वर्ष 10 चीते लाने का अनुबंध है। 18 फरवरी 2023 को 12 चीते लाए गए थे, लेकिन 2024 में चीते नहीं आए, लिहाजा अब 2025 में चीतों की शिफ्टिंग को लेकर चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि 20 चीते लाए जा सकते हैं। इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है। यहां बता दें कि अभी कूनो में 26 चीते हैं। इनमें 12 वयस्क और 14 शावक हैं। दक्षिण अफ्रीका से चीतों की नई खेप के संबंध में भारत सरकार के स्तर पर चर्चा चल रही है। कितने चीते लाए जाएंगे, इसका निर्णय भी वहीं से होगा। हां, इनमें कुछ चीते कूनो में भी लाए जाएंगे। – उत्तम कुमार शर्मा, डायरेक्टर, प्रोजेक्ट चीता, कूनो नेशनल पार्क CITES की अनुमति भी बनी रोड़ा इस परियोजना में एक और रुकावट CITES (कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इंडेंजर्ड स्पीशीज ऑफ वाइल्ड फौना एंड फ्लोरा) से आयात अनुमति मिलने में देरी के कारण आ रही है। CITES लुप्तप्राय जानवरों और पौधों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर नज़र रखने वाली संस्था है। इन चीतों को श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क और मंदसौर के गांधी सागर अभ्यारण्य में लाया जाना है। लेकिन CITES की मंजूरी में देरी से यह काम रुक गया है। 1950 के दशक के बाद से भारत में चीते नहीं देखे गए हैं। चीते CITES के 'अपेंडिक्स I' में शामिल हैं। इसका मतलब है कि इनके व्यापार पर कड़ी नज़र रखी जाती है ताकि इन्हें अवैध अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और अति-शोषण से बचाया जा सके। आयात अनुमति के बाद लेनी होगी निर्यात अनुमति CITES से आयात अनुमति मिलने के बाद, दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों को चीतों को भेजने के लिए CITES से ही निर्यात अनुमति लेनी होगी। सूत्रों के अनुसार, परियोजना की योजना बनाते समय CITES की मंजूरी की जरूरत को अनदेखा कर दिया गया था, जिससे अब और मुश्किलें पैदा हो गई हैं। दुनियाभर में बचे हैं 7000 से भी कम चीते इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में चीतों को 'असुरक्षित' श्रेणी में रखा गया है। दुनिया भर में 7,000 से भी कम चीते बचे हैं, जो ज्यादातर अफ्रीका के घास के मैदानों में पाए जाते हैं। दक्षिणी अफ्रीका में चीतों की संख्या अच्छी है, लेकिन उत्तर और पश्चिम अफ्रीका में इनकी संख्या बहुत कम है। ईरान में एशियाई चीतों की एक छोटी आबादी भी विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने दी थी मंजूरी 2019 में, सुप्रीम कोर्ट (SC) ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्ताव में अफ्रीकी चीतों को भारत के राष्ट्रीय उद्यानों में फिर से लाने की बात कही गई थी। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क को इसके लिए चुना गया था। नामीबिया के चीता कंजर्वेशन फंड ने परियोजना के लिए चीते देने का वादा किया था। इसमें सिर्फ परिवहन की लागत ही भारत को वहन करनी थी।   recent visitors 46

इंदौर : प्राधिकरण समिट में निवेशकों के लिए आकर्षक प्रस्ताव पेश करेगा, सुपर कॉरिडोर पर 28 प्लॉट चिन्हित

इंदौर इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा भोपाल में आयोजित की जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में निवेशकों के लिए 28 प्लॉट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन पर कुल 11,000 करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे। इन प्लॉट की सूची को प्राधिकरण ने अंतिम रूप दे दिया है और इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। राज्य सरकार द्वारा आयोजित इस समिट में इंदौर निवेशकों की पहली पसंद रहता है, क्योंकि यहां व्यापारिक संभावनाएं अधिक हैं। इसे ध्यान में रखते हुए एमपीआईडीसी और राज्य सरकार ने रणनीति तैयार की है, और इस बार इंदौर विकास प्राधिकरण को भी इस समिट में विशेष भागीदारी करने के निर्देश दिए गए हैं। सुपर कॉरिडोर पर 28 प्लॉट चिन्हित किए गए हैं प्राधिकरण इस समिट में निवेशकों के लिए आकर्षक प्रस्ताव पेश करेगा। इसके तहत मध्य प्रदेश के पहले अनूठे स्टार्टअप पार्क के लिए भी निवेशकों की रुचि बढ़ाने वाले प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, सुपर कॉरिडोर पर 28 प्लॉट चिन्हित किए गए हैं, जो विभिन्न व्यावसायिक और आवासीय परियोजनाओं के लिए उपलब्ध होंगे। इन सभी प्लॉट का कुल क्षेत्रफल 49 हेक्टेयर है और इनकी न्यूनतम कीमत भी निर्धारित कर दी गई है। यदि कोई निवेशक इन प्लॉटों में निवेश करना चाहता है, तो उसके माध्यम से 11,000 करोड़ रुपये का निवेश इंदौर में आ सकता है, जिससे शहर में बड़े पैमाने पर विकास होगा। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राम प्रकाश अहिरवार ने कल संपदा शाखा और अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस सूची को अंतिम रूप दिया। इसके साथ ही नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला को भी इस योजना की पूरी जानकारी दी गई है। यह भी उल्लेखनीय है कि संजय शुक्ला की विशेष रुचि और प्रयासों के कारण इस बार प्राधिकरण इन्वेस्टर समिट के लिए इतनी व्यापक तैयारी कर रहा है।   recent visitors 71

कुंभ के लिए स्पेशल वंदे भारत का ऐलान, नई दिल्ली से वाराणसी प्रयागराज होते हुए चलेगी, 17 फरवरी तक संचालित होगी

नई दिल्‍ली  कुंभ जाने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी। रेलवे ने एक स्‍पेशल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का फैसला किया है। कुंभ में भीड़ कम करने में भी ट्रेन मददगार होगी। यह स्‍पेशल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन (ट्रेन नंबर 02252) नई दिल्ली से वाराणसी चलेगी। ट्रेन प्रयागराज में रुकते हुए जाएगी। यह ट्रेन 15, 16 और 17 फरवरी को चलेगी। इसका मकसद वीकेंड पर कुंभ मेले जाने वाले यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को संभालना है। क्‍या होगी टाइम‍िंंग? ट्रेन नई दिल्‍ली (NDLS) से सुबह 5:30 बजे छूटेगी। इसका प्रयागराज (PRYJ पहुंचने का समय दोपहर 12:00 बजे है। दोपहर 2:20 बजे यह वाराणसी (BSB) पहुंचेगी। वापसी में BSB से चलने का समय दोपहर 3:15 बजे है। प्रयागराज पहुंचने का समय शाम 5:20 बजे है। यह रात 11:50 बजे नई दिल्‍ली पहुंचेगी। कुंभ मेले के लिए यात्रियों की सुविधा के लिए स्‍पेशल वंदे भारत ट्रेन 15 फरवरी 2025 से चलेगी। इसके चलने का समय और दिन ऊपर बताए गए समय के अनुसार ही रहेंगे। लाखों लाख श्रद्धालु हर दिन कुंभ में हिस्‍सा लेने के लिए पहुंच रहे हैं। अब तक करोड़ों लोग संगम में डुबकी लगा चुके हैं। कुंभ एक विशाल और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है जो हर 12 साल बाद भारत के चार पवित्र स्थानों में से एक में आयोजित किया जाता है। 2025 में कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित हो रहा है। यह एक ऐसा अवसर होता है जब करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर स्नान करने के लिए जुटते हैं। रेलवे की अन्य तैयारियां: कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए रेलवे अतिरिक्त विशेष ट्रेनों, प्लेटफॉर्म प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटा है. मुख्य रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क, मेडिकल सुविधा और विशेष गाइडेंस केंद्र स्थापित किए गए हैं. प्रयागराज, वाराणसी और अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त रेलवे कर्मियों और आरपीएफ जवानों की तैनाती की गई है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कुंभ के दौरान ट्रेन सेवाओं में किसी भी व्यवधान से बचने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी. टिकट बुकिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त कोच और विशेष ट्रेनें चलाने की योजना भी बनाई गई है. यात्रियों से रेलवे की अपील: रेलवे ने कुंभ मेले में जाने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे टिकट पहले से बुक कर लें और यात्रा के दौरान रेलवे की सुरक्षा एवं स्वच्छता निर्देशों का पालन करें. साथ ही स्टेशनों पर अनावश्यक भीड़ न बढ़ाने और सुविधाओं का सुव्यवस्थित उपयोग करने की सलाह दी गई है. उत्तर रेलवे के इस विशेष वंदे भारत ट्रेन के संचालन से कुंभ यात्रियों को तेज़, सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा, जिससे उनकी यात्रा और भी आसान हो जाएगी. recent visitors 64

मध्यप्रदेश खनिज संसाधन और औद्योगिक समृद्धि, शिक्षा, पर्यटन और हरित क्षेत्र में अग्रणी

भोपाल भारत का हृदय मध्यप्रदेश, समृद्ध अर्थव्यवस्था, विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, राज्य सरकार की निवेशक-अनुकूल नीतियों और विशेष प्रोत्साहन योजनाओं के साथ निवेश के असीमित अवसरों की उपलब्धता से देश-विदेश के उद्यमियों के लिए निवेश का प्रमुख स्थल बन गया है। देश-विदेश के उद्यमियों को निवेश के अवसरों से रूबरू कराने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में दो दिवसीय जीआईएस-2025 का आयोजन किया जा रहा है। इसका शुभांरभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। इस 'महाकुंभ' में दुनिया भर से आने वाले निवेशकों का समागम होगा। व्यापार और उद्योग अनुकूल माहौल बनाने के लिये प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश सभी उद्यमियों के लिए निवेश के अपार अवसर और उसके बाद दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के प्रति संकल्पित है। मध्यप्रदेश पर्यटन, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल, खनन, डेयरी और खाद्य प्र-संस्करण जैसे क्षेत्रों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास की असीमित संभावनाएं मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट प्रिपेअर्डनेस इंडेक्स में देश के शीर्ष़-10 राज्यों में और विश्व बैंक द्वारा आयोजित ईज़-ऑफ-डूइंग बिज़नेस में चौथे स्थान पर है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आने से मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास के असीम अवसर उपलब्ध हैं। मजबूत रेल और सड़क नेटवर्क के अलावा राज्य में 6 व्यावसायिक एयरपोर्ट हैं, जहां से 100 से अधिक उड़ानें संचालित होती हैं। इससे यहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आवागमन सुगम हुआ है। खनिज संसाधन और औद्योगिक समृद्धि मध्यप्रदेश में कोयला, हीरा, तांबा, लौह अयस्क और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों का भण्डार है। प्रदेश तांबा, मैंगनीज, मोलिब्डेनम और हीरे का देश का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य सरकार कृषि और खाद्य प्र-संस्करण, आईटी, आईटीईएस, पर्यटन, वस्त्र उद्योग, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल, दवाइयां एवं फार्मास्युटिकल्स और रक्षा एवं एयरोस्पेस सेक्टर पर प्रमुखता से ध्यान दे रही है। राज्य में 8 फूड पार्क, लगभग 15 मिलियन मीट्रिक टन की वेयरहाउसिंग क्षमता और 3 लाख 54 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र कवर करने वाले कोल्ड-स्टोरेज के साथ मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए एक आकर्षक निवेश स्थल बनता जा रहा है। शिक्षा, पर्यटन और हरित क्षेत्र में अग्रणी मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। यहां देश भर के सबसे बड़े क्षेत्र में जैविक खेती की जाती है। भारत के कुल जैविक उत्पादन का 27% मध्यप्रदेश में होता है। भारत के सबसे स्वच्छ राज्य मध्यप्रदेश का इंदौर शहर लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है और भोपाल स्वच्छतम राजधानी। राज्य की बड़ी जनसंख्या इसे विशाल उपभोक्ता बाजार भी बनाती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए 1.25 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की औद्योगिक भूमि-बैंक है। इसमें से 19,011 हेक्टेयर क्षेत्र उद्योगों के लिए पहले ही विकसित किए जा चुके हैं। राज्य में 76 विकसित, 19 विकासाधीन और 13 प्रस्तावित भूमि-बैंक हैं, जो 5 ग्रोथ सेंटर्स में फैले 79 भूखंडों में वितरित हैं। राज्य में 6 प्रमुख ड्राई इनलैंड कंटेनर डिपो हैं, इनकी वेयरहाउसिंग क्षमता 240 लाख मीट्रिक टन है। मध्यप्रदेश ऊर्जा सरप्लस राज्य है, जहां 31 गीगावाट विद्युत का उत्पादन होता है, जिसमें 20 प्रतिशत क्लीन एनर्जी है। मध्यप्रदेश किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति करने में सक्षम है। सड़क नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स मध्यप्रदेश ने अपने सड़क नेटवर्क के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राज्य में 5 लाख किलोमीटर से अधिक लंबाई का सड़क नेटवर्क है, जिसमें 46 राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। यह देश के राष्ट्रीय राजमार्गों का 6.6% और राज्य-राजमार्गों का लगभग 6.4% है। राज्य में प्रतिदिन 550 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। इसके साथ ही 2,32,344 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों के साथ, मध्यप्रदेश 5वां सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला राज्य है। राज्य में अटल प्रोग्रेस-वे और नर्मदा एक्सप्रेस-वे के साथ ही दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा, पीथमपुर-धार-महू, रतलाम-नागदा, शाजापुर-देवास, और नीमच-नयागांव जैसे औद्योगिक एवं निवेश क्षेत्रों का निर्माण किया गया है। औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में 4 निवेश गलियारों का विकास किया जा रहा है। इनमें भोपाल-इंदौर, भोपाल-बीना, जबलपुर-कटनी-सतना-सिंगरौली और मुरैना-ग्वालियर-शिवपुरी-गुना शामिल हैं। मध्यप्रदेश ईज़-ऑफ-डूइंग बिजनेस रैंकिंग में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक है। यहां व्यापार संचालन और निवेश के लिये माहौल को अत्यधिक अनुकूल बनाया गया है। इसके साथ ही नियामकीय प्रक्रियाओं को अत्यंत सरल किया गया है। इससे आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रदेश में किये गए मुख्य सुधारों में ऑनलाइन पंजीकरण, लाइसेंसिंग और अनुमति स्वीकृति जैसी व्यावसायिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और इन्वेस्ट मध्यप्रदेश विंडो प्रमुख हैं। इन्वेस्ट पोर्टल को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम के साथ एकीकृत किया गया है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है। प्रमुख सेक्टर्स और उद्योग प्रोत्साहनकारी नीतियां राज्य में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक नीतियां बनाई गई हैं। इनमें संयंत्र और मशीनरी में निवेश पर 40% तक इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन सहायता, रोजगार सृजन पर 1.5 गुना पूंजी सब्सिडी, निर्यात पर 1.2 गुना पूंजी सब्सिडी और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए 1.2 गुना पूंजी सब्सिडी शामिल है। ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन असिस्टेंस जैसी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की स्थापना के लिए सहायता, पॉवर, जल और सड़क इन्फ्रास्ट्रक्टर के निर्माण के लिए प्रति यूनिट एक रुपया की दर से टैरिफ रिबेट और पेटेंट शुल्क की प्रतिपूर्ति भी प्रमुख प्रोत्साहन नीतियों में शामिल हैं। वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में ब्याज सब्सिडी, रोजगार सृजन और प्रशिक्षण प्रोत्साहन दिया जा रहा है। फार्मा सेक्टर में ग्रॉस सप्लाई वेल्यू के लिए एक वर्ष का स्टॉक पीरियड और खाद्य प्र-संस्करण सेक्टर में 50% अतिरिक्त पूंजी सब्सिडी और मंडी कर (कृषि व्यापार कर) में 5 वर्षों के लिए छूट दी गई है। स्टार्टअप और एमएसएमई नीति नवाचार-आधारित उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति-2022 जारी की है। एमएसएमई इकाइयों के विस्तार और राज्य में स्व-रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना प्रारंभ की गई है। निवेश को आकर्षित करने के लिए, राज्य सरकार ने एमएसएमई विकास नीति और औद्योगिक प्रोत्साहन नीति प्रारंभ की है। डिजिटल गवर्नेंस के तहत, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं ने इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर्स के कार्यान्वयन से नागरिक-केन्द्रित ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करने और सूचना के एकत्रीकरण और निगरानी को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नवाचार, संसाधन, और अवसंरचना के मेल से मध्यप्रदेश न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों के लिए एक आदर्श स्थल बनकर उभर रहा … Read more

MP में 18 फरवरी से फिर बदलेगा मौसम, बढ़ेगी सर्दी, दिन-रात के तापमान में होगी गिरावट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने फिर करवट बदली है। शुक्रवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में दिन के तापमान में 1 से 3 डिग्री तक की बढ़ोतरी हुई। मौसम विभाग का कहना है कि 17 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालय की तरफ एक्टिव होने की संभावना है। इस वजह से 18 फरवरी से प्रदेश में दिन-रात के तापमान में फिर से गिरावट होने का अनुमान है, जो अगले तीन से चार दिन तक रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव था। इस वजह से प्रदेश में ठंड का असर देखने को मिला, लेकिन यह सिस्टम अब लौट गया है। इसलिए शुक्रवार से तापमान में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस वजह से धार, नर्मदापुरम, खंडवा, खरगोन, रतलाम, उज्जैन, दमोह, खजुराहो, मंडला में पारा 30 डिग्री के पार पहुंच गया। रतलाम में 2.2 डिग्री की बढ़ोतरी के बाद तापमान 32.2 डिग्री रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 28.4 डिग्री, इंदौर में 29.1 डिग्री, ग्वालियर में 29.5 डिग्री, उज्जैन में 30.5 डिग्री और जबलपुर में तापमान 29.3 डिग्री दर्ज किया गया। 17 फरवरी से नया सिस्टम, प्रदेश में भी असर मौसम वैज्ञानिक रैकवार ने बताया कि, 17 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालय की तरफ एक्टिव होने की संभावना है। इस वजह से 18 फरवरी से प्रदेश में दिन-रात के तापमान में फिर से गिरावट होने का अनुमान है, जो अगले तीन से चार दिन तक रह सकता है। वहीं, अब 17 फरवरी से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालय की तरफ एक्टिव होने की संभावना है। इस वजह से 18 फरवरी से प्रदेश में दिन-रात के तापमान में फिर से गिरावट होने का अनुमान है, जो अगले तीन से चार दिन तक रह सकता है। आज शनिवार को दिन का तापमान 2 से 3 डिग्री तक बढ़ सकता है। रात और सुबह के समय ठंडक बनी रहेगी। 16 फरवरी को भी दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होंगे मौसम वैज्ञानिक रैकवार ने बताया कि, फरवरी में कई वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होते हैं। अबकी बार भी ऐसा ही है। इस वजह से पारे में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी। फिलहाल बारिश होने के आसार नहीं है। अगले 2 दिन ऐसा रहेगा मौसम 15 फरवरी: दिन के तापमान में बढ़ोतरी होगी। 2 से 3 डिग्री तक बढ़ सकता है। रात और सुबह के समय ठंडक बनी रहेगी। 16 फरवरी: दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। फरवरी में 10 साल का ट्रेंड… तीनों मौसम का असर प्रदेश में पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो फरवरी महीने में रातें ठंडी और दिन गर्म रहते हैं। बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री के पार रहेगा, जबकि रात में 10 से 14 डिग्री के बीच रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, फरवरी में सबसे ज्यादा ग्वालियर ठिठुरता है। पिछले साल यहां न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंचा था, लेकिन इससे पहले 5 डिग्री के नीचे ही रहा है। जबलपुर में दिन में गर्मी और रात में ठंड रहती है। इस बार 2 महीने कड़ाके की ठंड, जनवरी में मिला-जुला असर इस बार शुरुआती दो महीने यानी, नवंबर और दिसंबर में कड़ाके की ठंड पड़ी। ठंड ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। नवंबर की बात करें तो भोपाल में 36 साल का रिकॉर्ड टूटा। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा सामान्य से 7 डिग्री तक नीचे रहा। वहीं, दिसंबर में भी ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ा। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जनवरी से भी ठंडा दिसंबर रहा। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 9 दिन शीतलहर चली। भोपाल में दिसंबर की सर्दी ने 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, जबकि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए। भगवान को भी ठंड से बचाने के लिए जतन किए गए। अब बात जनवरी की। शुरुआत 10 से 15 दिन तक कड़ाके की ठंड का दौर रहा, लेकिन फिर तेवर ठंडे हो गए। ठंड के दो दौर आए, जबकि तीन बार मावठा गिरा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. सिंह ने बताया, जनवरी में ठंड का असर जरूर रहा, लेकिन पिछले 10 साल के ट्रेंड के अनुसार तेज सर्दी नहीं पड़ी। पश्चिमी विक्षोभ की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी नहीं होने से तेज बारिश का दौर नहीं रहा। न ही ओले गिरे, जबकि जनवरी में ओला-बारिश का दौर भी रहता है। recent visitors 63