कौन होगा दिल्ली का नया मुख्यमंत्री? ‘दावेदारों’ के नाम पर चर्चा तेज

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आ चुके हैं, और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) को बड़े अंतर से हराकर 70 में से 48 सीटें जीत ली हैं. आप को केवल 22 सीटों पर संतोष करना पड़ा. अब सवाल यह है कि दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन बनेगा? भाजपा के पास कई विकल्प हैं, और पार्टी के भीतर इसको लेकर चर्चा तेज है. सबसे आगे प्रवेश वर्मा प्रवेश वर्मा, जो पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं, इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली विधानसभा सीट से हराकर चर्चा में आए हैं. उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है. प्रवेश ने न केवल केजरीवाल को हराया, बल्कि पार्टी के भीतर भी उनकी पकड़ मजबूत है. अशीष सूद और पवन शर्मा अशीष सूद, जो जनकपुरी सीट से जीते हैं, भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं. उन्हें दक्षिण दिल्ली नगर निगम में प्रशासनिक अनुभव है और वर्तमान में वे गोवा और जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रभारी भी हैं. दूसरी ओर, पवन शर्मा ने उत्तम नगर सीट से 1,03,613 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की है. वे असम इकाई के सह-प्रभारी हैं और मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम भी चर्चा में है. इन नामों पर भी चर्चा भाजपा के पूर्व दिल्ली अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं. गुप्ता ने रोहिणी सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है, जबकि उपाध्याय ने मालवीय नगर सीट से 39,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की. उपाध्याय का आरएसएस के साथ मजबूत रिश्ता है, जो उनकी दावेदारी को और मजबूत करता है. ये महिला उम्मीदवार भी दावेदार भाजपा केंद्रीय नेतृत्व महिला उम्मीदवार को भी मौका दे सकता है. रेखा गुप्ता और शिखा रॉय दो ऐसे नाम हैं जो इस रेस में शामिल हो सकते हैं. शिखा रॉय ने ग्रेटर कैलाश सीट पर आप के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज को 3,188 वोटों के अंतर से हराया है. वहीं, रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग सीट पर आप की बंदना कुमारी को 29,000 से अधिक वोटों के अंतर से पराजित किया. क्या कहते हैं सीनियर लीडर? अगर भाजपा विधायक दल से बाहर किसी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करती है, तो पूर्वी दिल्ली के सांसद और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी का नाम भी चर्चा में है. तिवारी पूर्वांचल के प्रमुख चेहरे हैं और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें भी मौका मिल सकता है. हालांकि, भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश के पिछले अनुभवों को देखते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए अटकलें लगाना मुश्किल है. पार्टी का फैसला अक्सर आखिरी पल में ही सामने आता है. recent visitors 86

वैश्विक टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार की म.प्र. में हैं अपार संभावनाएँ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला राज्य बन चुका है। राज्य की समृद्ध कृषि पृष्ठभूमि, पारंपरिक बुनकर समुदायों की उत्कृष्ट कला, आधुनिक औद्योगिक आधार और निवेशक-अनुकूल नीतियाँ प्रदेश को इस क्षेत्र में अग्रणी बना रही हैं। सरकार के सुविचारित प्रयासों से मध्यप्रदेश तेजी से भारत के प्रमुख टेक्सटाइल और गारमेंट हब के रूप में उभर रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 इस औद्योगिक यात्रा को और गति देने का माध्यम बनेगा, जहाँ दुनिया भर के निवेशकों को प्रदेश में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का टेक्सटाइल उद्योग केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर रहा है, जिसमें कच्चे माल के उत्पादन से लेकर परिधान निर्माण और वैश्विक निर्यात तक सभी चरण शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश, भारत के 43% और वैश्विक स्तर पर 24% ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन में योगदान देता है। यह आंकड़ा न केवल प्रदेश की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि इसे पर्यावरणीय रूप से सतत और उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्र निर्माण के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है। कपास, रेशम और आधुनिक फाइबर – मध्यप्रदेश की बुनियादी ताकत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश कपास उत्पादन में अग्रणी है। साथ ही यहाँ का रेशम उद्योग भी लगातार विस्तारित हो रहा है। राज्य प्रतिवर्ष 200 टन से अधिक रेशम उत्पादन करता है, जिससे परंपरागत हथकरघा और आधुनिक सिल्क उत्पाद दोनों को बढ़ावा मिल रहा है। इसके अलावा, मध्यप्रदेश आधुनिक कृत्रिम फाइबर उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे टेक्निकल टेक्सटाइल और स्पेशलिटी फाइबर निर्माण को बल मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार जिले में विकसित किया जा रहा पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क प्रदेश के कपड़ा उद्योग को नया आयाम देगा। 2,100 एकड़ में फैले इस पार्क में टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योगों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा उपलब्ध होगा। यह पार्क न केवल निवेश आकर्षित करेगा, बल्कि प्रदेश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनाएगा। पारंपरिक कला और आधुनिक टेक्सटाइल अनूठा संगम मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि प्रदेश की पहचान केवल बड़े कपड़ा उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ की पारंपरिक कला भी टेक्सटाइल क्षेत्र की एक बड़ी ताकत है। चंदेरी, महेश्वरी, बाग प्रिंट, बाटिक प्रिंट और जरी-जरदोजी जैसे उत्कृष्ट हथकरघा उत्पाद मध्य प्रदेश की विरासत को दर्शाते हैं इन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। महेश्वरी साड़ी, बाग पैटर्न और चंदेरी कॉटन को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिससे इन उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार में स्थिति और मजबूत हुई है। प्रदेश में 60 से अधिक बड़ी कपड़ा मिल्स, 4,000 से अधिक करघे और 25 लाख स्पिंडल्स कार्यरत हैं। इंदौर, भोपाल, उज्जैन, धार, देवास, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और जबलपुर प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित हो रहे हैं। इंदौर का रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर 1,200 से अधिक इकाइयों के साथ प्रदेश में रेडीमेड वस्त्र निर्माण की प्रमुख इकाई बन चुका है। यहाँ स्थित अपैरल डिजाइनिंग सेंटर और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान कर रहे हैं। टेक्सटाइल उद्योग में निवेश को नई ऊँचाइयाँ देने के लिए सरकार की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई आकर्षक नीतियाँ लागू कर रही है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत टेक्सटाइल क्षेत्र में 3,513 करोड़ रूपये का निवेश आकर्षित किया है। यह निवेश प्रदेश को उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्र निर्माण और निर्यात में अग्रणी बनाएगा। सरकार उद्योगों को बिजली और पानी न्यूनतम दरों पर उपलब्ध करा रही है। साथ ही, जीएसटी में छूट, टैक्स रिबेट और अन्य प्रोत्साहनों के माध्यम से निवेशकों को लाभ पहुँचाया जा रहा है। कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विशेष रूप से कस्टमाइज्ड इन्सेंटिव पैकेज भी तैयार किया है, जो उद्योगों को उनकी निवेश आवश्यकताओं के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान करता है। वैश्विक टेक्सटाइल कंपनियों की पसंद बन रहा है मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश पहले से ही ट्राइडेंट ग्रुप, रेमंड, आदित्य बिड़ला, वर्धमान टेक्सटाइल, गोकलदास एक्सपोर्ट्स, सागर ग्रुप, नाहर स्पिनिंग मिल्स, AVGOL, इंदोरामा और भास्कर जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इन कंपनियों द्वारा प्रदेश में लगातार हो रहा निवेश, सरकार की नीतियों और उद्योग के अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। इन कंपनियों की सफलता अन्य निवेशकों को भी आकर्षित कर रही है और आने वाले वर्षों में प्रदेश कपड़ा और परिधान क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। जीआईएस औद्योगिक परिवर्तन को देगा नई दिशा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 इस औद्योगिक परिवर्तन को नई दिशा देगा। इस समिट में दुनिया भर के निवेशकों, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं को आमंत्रित किया जा रहा है ताकि वे मध्य प्रदेश की संभावनाओं को देख सकें और यहाँ निवेश के नए अवसर तलाश सकें। मध्य प्रदेश टेक्सटाइल क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक नवाचारों का समावेश करते हुए, एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होने की दिशा में अग्रसर है। सरकार निवेशकों के लिए हर संभव सुविधा उपलब्ध कराकर इस क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। recent visitors 47

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दौरे पर 12-13 फरवरी को जायेंगे, डोनाल्ड ट्रंप से होगी मुलाकात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका दौरा 12-13 फरवरी को होने वाला है, जैसा कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने घोषणा की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने, व्यापार, सुरक्षा और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। विदेश मंत्रालय (एमईए) की एक विशेष ब्रीफिंग में मिसरी ने कहा, "पीएम मोदी 12 और 13 फरवरी को अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी की यह पहली अमेरिका यात्रा होगी। राष्ट्रपति ट्रंप के उद्घाटन के बाद पीएम अमेरिका का दौरा करने वाले पहले कुछ विश्व नेताओं में शामिल होंगे।"   recent visitors 28

वंदे भारत स्लीपर की शुरुआत से नागपुर-मुंबई यात्रा के समय को 10 घंटे किया जा सकता है, जानें पूरी डीटेल

नई दिल्ली नागपुर को पुणे और मुंबई से जोड़ने वाली सेमी-हाई-स्पीड सुपरफास्ट ट्रेन सेवा वंदे भारत स्लीपर शुरू हो सकती है। यह ट्रेन महाराष्ट्र रेल यात्रा में एक बड़ा बदलाव लाएगी। मध्य रेलवे के नागपुर बोर्ड ने रेलवे बोर्ड को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। प्रस्ताव का वर्तमान में मूल्यांकन किया जा रहा है और इसका उद्देश्य यात्रियों की सुविधा को बढ़ाना और इन उच्च मांग वाले मार्गों पर कनेक्टिविटी में सुधार करना है। वर्तमान में, नागपुर से मुंबई की यात्रा में मेल ट्रेनों से लगभग 16 घंटे लगते हैं, जबकि सुपरफास्ट ट्रेनें 12 से 13 घंटे में यात्रा पूरी करती हैं। दुरंतो एक्सप्रेस थोड़ा तेज विकल्प प्रदान करती है, जो 11 से 12 घंटे में दूरी तय करती है। हालांकि, वंदे भारत स्लीपर की शुरुआत से नागपुर-मुंबई यात्रा के समय को 10 घंटे किया जा सकता है। नागपुर से पुणे 3 घंटे वंदे भारत से नागपुर-पुणे यात्रा का समय घटकर महज तीन घंटे हो जाएगा। अभी, नागपुर-पुणे मार्ग पर सुपरफास्ट एक्सप्रेस और गरीब रथ एक्सप्रेस चलती है, दोनों सप्ताह में तीन बार चलती हैं। हमसफर एक्सप्रेस सप्ताह में एक बार चलती है। इसके अतिरिक्त, आजाद हिंद एक्सप्रेस और हटिया-पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस वैकल्पिक यात्रा विकल्प प्रदान करती हैं। हालांकि, बिजी सीजन के दौरान, इन सेवाओं को अक्सर यात्रियों की उच्च मांग को समायोजित करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।   नागपुर-मुंबई रूट पर सीमित ट्रेनें इसी तरह, नागपुर-मुंबई मार्ग के पास सीमित विकल्प हैं, केवल विदर्भ एक्सप्रेस (गोंदिया-मुंबई मार्ग पर चलने वाली) और सेवाग्राम एक्सप्रेस (नागपुर-मुंबई मार्ग पर चलने वाली) के कारण यात्रियों के लिए प्रतीक्षा समय बढ़ जाता है। डीआरएम विनायक गर्ग ने रेलवे नेटवर्क में नागपुर के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रतिदिन 125 से अधिक ट्रेनों के संचालन के साथ, नागपुर एक महत्वपूर्ण जंक्शन के रूप में कार्य करता है। वंदे भारत स्लीपर की मांग वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत से यात्रियों की सुविधा और कनेक्टिविटी में काफी वृद्धि होगी। वंदे भारत नई सेवा के जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। इन हाई-स्पीड स्लीपर ट्रेनों को तेज और अधिक आरामदायक यात्रा विकल्पों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में, नागपुर-पुणे और नागपुर-मुंबई मार्गों पर यात्री यातायात मौजूदा ट्रेनों की क्षमता से अधिक बढ़ गया है, जिससे कई यात्रियों को सड़क परिवहन पर निर्भर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। लंबी दूरी की यात्रा होगी शानदार वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें कम यात्रा समय, उन्नत सुरक्षा उपायों और बढ़ी हुई दक्षता के साथ एक बेहतर विकल्प प्रदान करेंगी। अत्याधुनिक तकनीक के लिए प्रसिद्ध वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के आराम और विश्वसनीयता को प्राथमिकता देती हैं। स्लीपर वेरिएंट की शुरुआत लंबी दूरी की यात्रा के अनुभव को और बेहतर करेगी। इन ट्रेनों का शुभारंभ महाराष्ट्र के रेलवे बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यात्रियों को यात्रा का एक तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक साधन प्रदान करता है। बिजनेस यात्राओं ने बढ़ाया रूट पर ट्रैफिक नागपुर-पुणे और नागपुर-मुंबई रूट पर यात्रियों की संख्या बढ़ने की एक वजह बिजनेस से जुड़ी यात्राएं हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाल ही में दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में जाने से इस इलाके में बिजनेस गतिविधियों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे भी इन रूट्स पर यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है। नागपुर सिकंदराबाद वंदे भारत के डिब्बे होंगे कम नागपुर-इंदौर और नागपुर-बिलासपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेनें पूरी तरह भरी रहती हैं। लेकिन नागपुर-सिकंदराबाद वंदे भारत ट्रेन में केवल 40%-45% सीटें ही भर पाती हैं। इसके 20 डिब्बे हैं। कम यात्रियों की वजह से रेलवे बोर्ड जल्द ही इसके डिब्बों की संख्या घटाकर आठ करने पर विचार कर रहा है। वेटिंग लिस्ट होगी खत्म! नागपुर-मुंबई और नागपुर-पुणे रूट पर वंदे भारत ट्रेनों की काफी मांग है। मुंबई और पुणे जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट होती है। त्योहारों के समय तो और भी ज्यादा भीड़ होती है। इसलिए इन रूट्स पर दो और प्रीमियम ट्रेनें चलाना यात्रियों और रेलवे दोनों के लिए फायदेमंद होगा। हालांकि, मौजूदा ट्रेनों के समय में बदलाव और परिचालन में कुछ समायोजन करना होगा। अधिकारी ने यह भी कहा कि इन लंबी दूरी की प्रीमियम ट्रेनों के लिए स्लीपर कोच वाली ट्रेनें सबसे उपयुक्त रहेंगी। recent visitors 49

महाकाल मंदिर में अग्नि और सूर्य की साक्षी में 17 फरवरी से शिव नवरात्र

उज्जैन शिव आराधना का महापर्व शिव नवरात्र 17 फरवरी को आरंभ होगा। मंगलवार के दिन गण्ड उपरांत वृद्धि योग की संयुक्त बेला में शुरू हो रहा पर्व नौ के बजाय 10 दिस दिन का रहेगा। विशेष यह है कि गण्ड योग के अधिपति अग्नि तथा वृद्धि योग के देवता सूर्य कहे गए हैं। अग्नि व सूर्य शिव के नेत्र कहे गए हैं। इसलिए इनकी साक्षी में देवाधिदेव की पूजा मनोवांछित फल प्रदान करने वाली मानी गई है। नवरात्र के 10 दिन विशिष्ट योग नक्षत्र में पार्थिव शिवलिंग की पूजा भी शुभ मानी गई है। पंचांगीय गणना व धर्मशास्त्र के निर्देशों का पालन कर शिव पूजा का लाभ लिया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया फाल्गुन कृष्ण पंचमी से त्रयोदशी तक नौ दिन शिवनवरात्र उत्सव मनाया जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में महाकाल एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, जहां शिवनवरात्र के रूप में महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इसलिए अवंतिका तीर्थ में शिव नवरात्र के पूजन की विशेष मान्यता है। इन नौ दिनों में विधि विधान से शिव पूजा करने से मनुष्य के मानसिक, कायिक व वाचिक पापों का नाश होकर सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस बार 17 से 26 फरवरी तक शिवनवरात्र उत्सव मनाया जाएगा। इन 10 दिनों में विशेष योग संयोग की साक्षी रहेगी। इसमें पूजन तथा साधना उपासना का संपूर्ण उल्लेख शिव महापुराण में दिया गया है। तिथि वृद्धि के चलते 10 दिन के नवरात्र भगवान शिव की विशिष्ट व काम्य पूजा रात्रि में की जाती है। इसलिए शिव नवरात्र में तिथि की गणना अहोरात्र के अनुसार की जाती है। यही कारण है, इस बार नवरात्र 10 दिन के रहेंगे। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस कालखंड में अगर रात्रि के समय मात्र 24 मिनट भी साधना कर ली जाए तो ईश्वर की कृपा हो जाती है। वर्ण अनुसार बनाएं मिट्टी के शिवलिंग सांसारिक जीवन में दुख, कष्ट, व्याधि, पीड़ा अपमृत्यु के दोष से मुक्त होने के लिए पार्थिव शिवलिंग की पूजा करना चाहिए। इसका उल्लेख शिव महापुराण की विद्येश्वर संहिता में मिलता है। अगर चार वर्ण के अनुसार अलग-अलग रंग की मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण कर पूजा अर्चना की जाए तो अधिक फल प्राप्त होता है। अर्थात ब्राह्मण को सफेद मिट्टी, क्षत्रियों को लाल मिट्टी, वैश्य को पीली मिट्टी और अन्य को काली मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करके पूजन करना चाहिए। पूजा तीर्थ, शिवालय अथवा देवालय या पवित्र स्थान पर ही की जानी चाहिए। recent visitors 49

भारत के तीन बड़े मिशन, 2026 में गगनयान व समुद्रयान और 2027 में Chandrayaan-4 होगा लॉन्च : मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली भारत सरकार ने तीन बड़े वैज्ञानिक मिशनों – गगनयान, समुद्रयान और चंद्रयान-4 की लॉन्चिंग की तारीखों का ऐलान कर दिया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि गगनयान और समुद्रयान मिशन साल 2026 में और चंद्रयान-4 मिशन 2027 में लॉन्च किया जाएगा। चंद्रयान-4 मिशन: चांद से पहली बार सैंपल लाने की तैयारी इससे पहले भारत चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च कर चुका है। चंद्रयान-3 ने 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग की थी। अब चंद्रयान-4 मिशन का मकसद चांद की सतह से मिट्टी और चट्टानों के सैंपल इकट्ठा कर उन्हें पृथ्वी पर लाना है। इस मिशन को दो भारी-भरकम LVM-3 रॉकेट के जरिए भेजा जाएगा। इसमें कुल 5 अलग-अलग मॉड्यूल होंगे जो इसरो के वैज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह का गहराई से अध्ययन करने में मदद करेंगे। गगनयान मिशन: पहली बार भारतीयों की अंतरिक्ष यात्रा गगनयान भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है। इस मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा तक भेजा जाएगा और फिर उन्हें सुरक्षित वापस लाया जाएगा। गगनयान का पहला मानव रहित मिशन इसी साल 2024 में लॉन्च होगा। इस मिशन में रोबोट ‘व्योममित्र’ शामिल होगा जो अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग करेगा। भारत में तीसरा लॉन्च पैड बनाया जा रहा है और छोटे सैटेलाइट्स के लिए तमिलनाडु के तूतीकोरिन में एक नया लॉन्च स्टेशन भी तैयार किया जा रहा है। समुद्रयान मिशन: महासागर की गहराइयों में खोज भारत अब अंतरिक्ष के बाद समुद्र की गहराइयों में भी खोज करने जा रहा है। समुद्रयान मिशन के तहत तीन वैज्ञानिकों को 6,000 मीटर की गहराई तक समुद्र में भेजा जाएगा। यह मिशन दुर्लभ खनिज, कीमती धातु और नई समुद्री जैव विविधता खोजने में मदद करेगा। यह मिशन भारत के पर्यावरण संतुलन और आर्थिक विकास के लिए बहुत फायदेमंद होगा। भारत के लिए क्यों खास हैं ये तीन मिशन? चंद्रयान-4 से भारत पहली बार चांद की मिट्टी और चट्टानों के सैंपल लाकर उनका गहराई से अध्ययन करेगा। गगनयान से भारत अंतरिक्ष में इंसान भेजने वाले देशों (अमेरिका, रूस और चीन) की लिस्ट में शामिल हो जाएगा। समुद्रयान से समुद्र की गहराइयों में मौजूद खनिज और संसाधनों की जानकारी मिलेगी जिससे देश को आर्थिक रूप से लाभ होगा। अंत में बता दे कि ये तीनों मिशन भारत को विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में और आगे ले जाएंगे और देश के विकास में बड़ा योगदान देंगे।   recent visitors 55

आज प्रयागराज पहुंच महकूम में डुबकी लगाएंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

महाकुंभ नगर प्रयागराज महाकुंभ में देश और दुनिया के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। आज गुजरात के सीएम भूपेंद्र भाई पटेल, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और राज्यपाल अजय कुमार भल्ला संगम नगरी पधार रहे हैं। इसी बीच खबर आ रही है कि 10 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रयागराज जाएंगी। इस दौरान राष्ट्रपति महाकुंभ मेला का भ्रमण करेंगी और त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगी। गुजरात सीएम आज लगाएंगे संगम में डुबकी बताया जा रहा है कि गंगा स्नान करने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अक्षयवट और बड़े हनुमान जी के दर्शन करेंगी। सुबह 11 बजे राष्ट्रपति प्रयागराज पहुंचेगी और उसके बाद मेला क्षेत्र के लिए रवाना होंगी। महाकुंभ में अब तक पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, अखिलेश यादव, रवि किशन, सीएम योगी और उनका पूरा मंत्रिमंडल, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, सीएम नायब सिंह सैनी, मणिपुर सीएम, कवि कुमार विश्वास, 73 देशों के प्रतिनिधिमंडल, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक समेत कई बड़ी हस्तियां संगम में स्नान कर चुकी हैं। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश के लिए देवताओं और असुरों के बीच 12 दिन घमासान युद्ध हुआ। अमृत को पाने की लड़ाई के बीच कलश से अमृत की कुछ बूंदें धरती के चार स्थानों पर गिरी थीं। ये जगह हैं प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नासिक। इन्हीं चारों जगहों पर कुंभ का मेला लगता है। जब गुरु वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं तब कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित किया जाता है। जब गुरु और सूर्य सिंह राशि में होते हैं, तब कुंभ मेला नासिक में आयोजित होता है। गुरु के सिंह राशि और सूर्य के मेष राशि में होने पर कुंभ मेला उज्जैन में आयोजित होता है। सूर्य मेष राशि और गुरु कुंभ राशि में होते हैं, तब हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। recent visitors 64