आज तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला अपने नाम करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा भारत

कटक श्रृंखला के शुरूआती मैच में शानदार प्रदर्शन से उत्साहित भारत रविवार को बाराबती स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले दूसरे मैच में रविवार को तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला अपने नाम करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा वहीं मेहमान इंग्लैंड सीरीज को जीवित रखने के लिए पुरजोर कोशिश करेगा। नागपुर में पहले वनडे में आसान जीत हासिल करने के बाद, भारतीय टीम मुकाबले में लय के साथ उतरेगी। हालाँकि, कप्तान रोहित शर्मा की फॉर्म को लेकर चिंता बनी हुई है। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी से पहले केवल दो मैच बचे हैं और सलामी बल्लेबाज अपनी फार्म को वापस पाने के लिये बेकरार होगा। रोहित ने मैच से पहले कहा, “मैं बस यही चाहता हूं कि हम यह सुनिश्चित करते रहें कि हम जितनी बार संभव हो सही चीजें करें। ऐसा कुछ भी खास नहीं है जिसे हम हासिल करना चाहते हैं। हम सिर्फ गेंदबाजी, बल्लेबाजी और अन्य पहलुओं को चुस्त दुरुस्त और अधिक बेहतर रखना पसंद करेंगे।” नागपुर में पदार्पण मैच पर प्रभावित करने वाले युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा अपने प्रदर्शन को आगे बढ़ाना चाहेंगे। हालाँकि इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाजों ने उन्हें शुरू में ही दबाव में डाल दिया था, लेकिन उन्होंने जोरदार वापसी की और तीन महत्वपूर्ण विकेट लेकर मेहमान टीम को 248 रन पर रोक दिया। दूसरे वनडे में इंग्लैंड के शीर्ष क्रम के खिलाफ उनकी भूमिका अहम साबित हो सकती है। रन मशीन विराट कोहली की वापसी से भारत के बल्लेबाजी क्रम में बदलाव देखने को मिल सकता है। अनुभवी बल्लेबाज घुटने में दर्द के कारण पहला वनडे नहीं खेल सके और इस मैच में उनकी भागीदारी की अभी भी साफ नहीं हुई है। यदि वह लौटते हैं, तो टीम प्रबंधन को कठिन निर्णय का सामना करना पड़ेगा कि किसे बाहर रखा जाए, क्योंकि उनकी जगह लेने वाले श्रेयस अय्यर ने सफल रन चेज़ में शानदार अर्धशतक बनाया है। अय्यर ने मैच के बाद कहा था, “हम सभी जानते हैं, दुर्भाग्य से, एक खिलाड़ी चोटिल हो गये और फिर मुझे मौका मिला। लेकिन मैंने खुद को तैयार रखा। मुझे पता था कि किसी भी समय, मुझे मौका मिल सकता है।” दूसरी ओर, इंग्लैंड वापसी के लिए बेताब होगा। श्रृंखला के शुरुआती मैच में उनकी बल्लेबाजी लड़खड़ा गई और उन्हें अपने मध्यक्रम से मजबूत प्रयास की जरूरत होगी। मेहमान भारत की मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को रोकने के लिए अपने गेंदबाजों पर भी भरोसा करेंगे, जिन्होंने नागपुर में आसानी से लक्ष्य का पीछा किया था। दोनों टीमों के बीच बहुत कुछ दांव पर होने के कारण, बाराबती स्टेडियम में क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक रोमांचक मुकाबला इंतजार कर रहा है। भारत की जीत सीरीज पर कब्जा कर लेगी, जबकि इंग्लैंड सीरीज को निर्णायक मुकाबले में धकेलने के लिए बेताब होगा। टीम इंडिया: रोहित शर्मा (कप्तान), शुबमन गिल, श्रेयस अय्यर, यशस्वी जयसवाल, विराट कोहली, ऋषभ पंत, केएल राहुल, रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, कुलदीप यादव, मोहम्मद शमी, वरुण चक्रवर्ती। टीम इंग्लैंड: जोस बटलर (कप्तान), हैरी ब्रूक, बेन डकेट, जो रूट, फिलिप साल्ट, जेमी स्मिथ, जैकब बेथेल, ब्रायडन कार्स, लियाम लिविंगस्टोन, जेमी ओवरटन, जोफ्रा आर्चर, गस एटकिंसन, साकिब महमूद, आदिल राशिद, मार्क वुड।   recent visitors 68

अगले महीने लगने वाला है सूर्य ग्रहण, पहला सूर्यग्रहण 29 मार्च को और दूसरा 21-22 सितंबर को होगा

इंदौर साल 2025 में चार बड़ी खगोलीय घटनाएं होने वाली हैं- दो सूर्य ग्रहण (सूर्य ग्रहण) और दो चंद्र ग्रहण (चंद्र ग्रहण)। साल का पहला सूर्य ग्रहण, एक गहरा आंशिक ग्रहण, 29 मार्च, 2025 को होगा। हालांकि, यह घटना भारत में दिखाई नहीं देगी। 29 मार्च को होने वाला सूर्य ग्रहण आंशिक होगा, जिसका मतलब है कि चंद्रमा सूर्य की सतह के केवल एक हिस्से को ही ढकेगा। खगोलविदों के अनुसार, चंद्रमा की केंद्रीय छाया पृथ्वी को नहीं छुएगी, जिसका मतलब है कि कोई पूर्ण ग्रहण नहीं होगा। जबकि यूरोप के अधिकांश हिस्से आंशिक सूर्य ग्रहण देखेंगे, भारत इस खगोलीय घटना को नहीं देख पाएगा। यह घटना यूरोप, एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी।   इस साल होंगे दो सूर्यग्रहण वर्ष 2025 में दो सूर्यग्रहण होंगे, लेकिन जनवरी में कोई भी नहीं होगा। पहला सूर्यग्रहण 29 मार्च को और दूसरा 21-22 सितंबर को होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण को अशुभ माना जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने से परहेज़ किया जाता है।   ग्रहण कब शुरू होगा? नासा के अनुसार, 29 मार्च को आंशिक सूर्य ग्रहण इस समय शुरू होगा: 4:50 AM EDT (पूर्वी डेलाइट टाइम) 8:43 AM GMT (ग्रीनविच मीन टाइम) सूर्य ग्रहण क्या है? सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, जिससे हमारे ग्रह पर छाया पड़ती है। यह संरेखण केवल अमावस्या के चरण के दौरान होता है, जो इसे एक आकर्षक घटना बनाता है। 2025 में, पृथ्वी दो सूर्य ग्रहण देखेगी, जिनमें से दोनों आंशिक ग्रहण होंगे। वर्ष का दूसरा सूर्य ग्रहण सितंबर 2025 में बाद में होने की उम्मीद है। खुली आंखों से देखना आंखों के लिए घातक विशेषज्ञ सूर्य ग्रहण देखते समय सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। ग्रहण के दौरान नंगी आँखों से सूर्य को देखना आपकी आँखों को नुकसान पहुँचा सकता है। इस खगोलीय घटना का सुरक्षित रूप से आनंद लेने के लिए धूप का चश्मा, दूरबीन या सोलर व्यूअर जैसे सुरक्षात्मक गियर का उपयोग करना आवश्यक है। recent visitors 39

भोपाल में जीआईएस आगंतुकों के लिए 1500 कमरे तैयार, 50 देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल होंगे

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट समिट के लिए तैयार है। कई देशों से आने वाले मेहमानों के लिए 50 होटलों में 1500 कमरे बुक किए गए हैं। साथ ही 100 टेंट वाली एक खास टेंट सिटी भी बनाई गई है। एमपी टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन मेहमानों की ठहरने की व्यवस्था देख रहा है। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भोपाल में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में दुनिया भर के 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन मेहमानों के स्वागत के लिए भोपाल पूरी तरह से तैयार है। ठहरने के लिए वीआईवी और वीवीआईपी कमरे बुक किए गए हैं। इसके अलावा टेंट सिटी भी मेहमानों को एक अनोखा अनुभव प्रदान करेगी। एमपी टूरिज्म देख रहा रहने की व्यवस्था मेहमानों के ठहरने की पूरी जिम्मेदारी एमपी टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के पास है। कॉर्पोरेशन के एमडी इलया राजा ने कहा कि किसी भी तरह की कमी नहीं होने देंगे। मेहमानों के स्वागत के लिए राजधानी पूरी तरह तैयार है। यह कथन दर्शाता है कि प्रशासन मेहमान नवाजी के लिए कितना तत्पर है। होटलों की किया जा रहा अपग्रेड चुने गए होटलों को सभी मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जा रहा है। सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक अनुभवों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सम्मेलन के दौरान बुकिंग और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने एक समर्पित समन्वय प्रकोष्ठ स्थापित किया है। मेहमानों के लिए जगह जगह हेल्प डेस्क होटल, टेंट सिटी और समिट स्थल के बीच परिवहन की व्यवस्था अंतिम रूप दे दी गई है। सभी जगहों पर पर्यावरण के अनुकूल उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिनिधियों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर सूचना कियोस्क और हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे। यादगार समिट बनाने की तैयारी कॉर्पोरेशन सेवाओं के सुचारू समन्वय को सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके अलावा, अंतिम समय की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आवास विकल्पों की भी पहचान की गई है। पर्यटन विभाग ने मेहमानों के लिए शहर के विस्तृत गाइड भी तैयार किए हैं। इससे मेहमान शहर की खूबसूरती का आनंद ले पाएंगे। सब मिलकर इस सम्मेलन को यादगार बनाने के लिए प्रयासरत हैं। भोपाल में 24 और 25 फरवरी को ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस) होगी। इसमें देश-विदेश से करीब 20 हजार मेहमान आएंगे। अंबानी, अडाणी, महिंद्रा, टाटा समेत देश के 50 बड़े उद्योगपति भी आएंगे। VVIP के लिए फाइव स्टार होटल्स में 1 लाख रुपए के रूम भी बुक हो रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजभवन में रुक सकते हैं। जीआईएस में आ रहे मेहमानों के रुकने के लिए व्यवस्था की जिम्मेदारी मप्र राज्य पर्यटन विकास को सौंपी गई है। एमपी टूरिज्म और प्राइवेट समेत कुल 48 होटल्स में प्रीमियम, सुइट और डीलक्स स्तर के 1397 कमरे 23, 24 और 25 फरवरी के लिए ब्लॉक किए गए हैं। इन रूम्स का रोज का किराया ही एक लाख रुपए है। इनमें अंबानी-अडाणी जैसे बड़े उद्योगपतियों को रुकवाया जा सकता है। हालांकि, अभी कौन किस होटल में रुकेगा, यह तय नहीं हुआ है। उद्योगपतियों के आने का 'ओके' होते ही यह तय हो जाएगा। मेहमानों के लिए इन होटल्स में बुकिंग 5 स्टार होटल ताज लेक फ्रंट, कोटयार्ड बाय मेरियट और होटल रेडिशन में प्रेसिडेटिंयल सुइट, लग्जरी सुइट, एक्जीक्यूटिव सुइट, डीलक्स लेक व्यू, लग्जरी, डीलक्स रूम, कोटयार्ड सुइट, क्लब रूम, जूनियर सुइट, विंटरग्रीन जैसे रूम हैं। जिनका एक दिन का किराया 12 हजार से 1 लाख रुपए तक है। 2, 3 और 4 स्टार होटल्स में भी 1600 से 4 हजार रुपए प्रतिदिन तक के कमरे हैं। सांची, उदयगिरी में भी ठहरेंगे मेहमान भोपाल की 5 सितारा होटलों में बड़े उद्योगपति, केंद्रीय मंत्रियों को रुकवाने का प्लान है। इसलिए यहां सुरक्षा का कड़ा घेरा रहेगा। विदेशी मेहमानों के लिए भी यहां रुकने की व्यवस्था हो सकती है। हालांकि, बड़े होटल्स में करीब 2 हजार कमरे ही हैं। ऐसे में सांची, उदयगिरी और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद बड़े होटल या रिसोर्ट में भी मेहमानों का इंतजाम किया जा रहा है। कुछ होटलों में शादियों की बुकिंग दरअसल, 24 फरवरी को कई शादियां भी होंगी। इसके लिए प्राइवेट होटलों में पहले से बुकिंग हो चुकी है। इस कारण भी शहर से बाहर बड़े होटलों की लिस्ट बनवाई गई है। इन प्रमुख उद्योगपतियों को आमंत्रण जीआईएस में जिन प्रमुख उद्योगपतियों को आमंत्रित किया जा रहा है, उनमें मुकेश अंबानी, गौतम अडाणी, एन. चंद्रशेखरन, नोएल एन. टाटा, आनंद महिंद्रा, जमशेद एन. गोदरेज, संजीव पुरी, संजीव बजाज, सतीश रेड्‌डी, नादिर गोदरेज, पवन मुंजाल, एसएन सुब्रह्मण्यम, रिशद प्रेमजी, अजीज प्रेमजी, सलिल एस. पारेख, दिलीप संघवी, वेणु श्रीनिवासन, सुनील भारत मित्तल, बाबा एन. कल्याणी, उदय कोटक शामिल हैं। कुछ की सहमति मिल गई है, जबकि बाकी की आ रही है। इसके अलावा, कई विदेशी मेहमान भी भोपाल पहुंचेंगे। इनमें से कई 23 फरवरी को ही आ जाएंगे, जिनके स्वागत के लिए खास तैयारियां की जा रही हैं। प्लान के अनुसार, 23 फरवरी की रात में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भोपाल में आ सकते हैं। वे और सीएम डॉ. मोहन यादव रात में इन मेहमानों के साथ डिनर करेंगे, जबकि 24 और 25 फरवरी को लंच और डिनर का आयोजन होगा। मेहमानों के लिए खास मेन्यू तैयार किया जा रहा है, जिसमें भारतीय, इंटरनेशनल और मध्यप्रदेश की पारंपरिक डिशेज़ को शामिल किया गया है। खास मेहमानों को परोसेंगे 50 स्पेशल डिश अब तक यह समिट इंदौर में होती आई थी, लेकिन इस बार भोपाल को इसकी मेजबानी का मौका मिला है। इसे लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं, और खासतौर पर मेहमानों के खानपान को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुल 50 तरह के व्यंजन परोसे जाएंगे। खास मेन्यू को लेकर अधिकारियों-शेफ्स में चर्चा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में भारत के प्रमुख उद्योगपतियों समेत जापान, स्पेन और अन्य देशों से विदेशी निवेशक भी आएंगे। उनके स्वागत के लिए एमपी टूरिज्म बोर्ड एक अनोखा और बहुआयामी मेन्यू तैयार कर रहा है, ताकि विदेशी और भारतीय मेहमानों को मध्य प्रदेश के स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजन परोसे जा सकें। खास मेन्यू को लेकर संबंधित अधिकारियों और शेफ्स के बीच चर्चा … Read more

प्रदेश में अब किसान, किसान समूह या निजी व्यक्ति लैंड पुलिंग करके टाउनशिप बना सकेंगे

 भोपाल मध्य प्रदेश में शहरों के आसपास किसान, किसानों के समूह या निजी व्यक्ति लैंड पुलिंग करके टाउनशिप बना सकेंगे यानी यदि उनके पास एकीकृत टाउनशिप बनाने के लिए आवश्यक भूमि नहीं है तो वे आसपास के किसान या निजी भूमि को मिलाकर परियोजना बनाएंगे। इसके लिए भूमि दिलाने के लिए डेवलपर या विकासकर्ता विकास प्राधिकरण या अन्य एजेंसियों से अनुरोध कर सकेंगे। वह आपसी सहमति के आधार पर भूमि दिलाने में भूमिका निभाएगी। यदि परियोजना क्षेत्र में सरकारी भूमि आती है तो अधिकतम आठ हेक्टेयर सीमा की छूट दी जा सकेगी। टाउनशिप नीति तैयार की इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने एकीकृत टाउनशिप नीति तैयार की है। इसमें लैंड पुलिंग का प्रावधान रखा गया है। नियम सरल बनाए गए हैं। यह प्रावधान विकास प्राधिकरण सहित अन्य हाउसिंग प्रोजेक्ट करने वाली एजेंसियों के लिए भी लागू होंगे। प्रस्तावित नीति पर अंतिम निर्णय 11 फरवरी को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में होगा। सुविधाओं का विकास नहीं हो पाता अभी कॉलोनाइजर नियम में कॉलोनी बनाने के लिए न्यूनतम क्षेत्र की कोई आवश्यकता नहीं है इसलिए शहरों में छोटे-छोटे समूहों में कॉलोनियों का निर्माण हो रहा है, लेकिन इसमें सुविधाओं का विकास नहीं हो पाता है। इसके लिए एकीकृत टाउनशिप नीति तैयार की गई है। एक निश्चित स्थान पर कॉलोनी बनेगी इसमें नगर निगम सीमा या योजना क्षेत्र के भीतर पांच लाख से कम जनसंख्या वाले शहर में न्यूनतम दस हेक्टेयर में कॉलोनी का विकास किया जाएगा। पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर में भूमि की यह सीमा दस हेक्टेयर और नगर निकाय सीमा या उसके बाहर न्यूनतम 40 हेक्टेयर रहेगी। इसका मतलब यह हुआ कि अब छोटे-छोटे समूह के स्थान पर एक निश्चित क्षेत्र में कॉलोनी बनेगी। परियोजना क्षेत्र निर्धारित होगा इसके लिए किसान या निजी व्यक्ति के पास आवश्यकता के अनुरूप भूमि नहीं है तो वह समूह बनाकर काम करेगा। लैंड पुलिंग करके परियोजना क्षेत्र निर्धारित होगा। डेवलपर प्रस्तावित टाउनशिप की सीमा के अंदर 80 प्रतिशत भूमि प्राप्त कर चुका है और शेष भूमि प्राप्त करने में विफल रहता है तो वो संबंधित प्राधिकरण से भूमि अधिग्रहित करने का अनुरोध करेगा। सीमा में छूट दी जाएगी आपसी सहमति के आधार पर भूमि की व्यवस्था कराई जाएगी। सरकारी भूमि के परियोजना क्षेत्र में आने पर अधिकतम आठ हेक्टेयर तक छूट दी जा सकती है। कृषि भूमि खरीदने पर उच्चतम जोत सीमा में छूट दी जाएगी क्योंकि भूमि उद्देश्य विशेष के लिए ली जा रही है। 50 प्रतिशत का उपयोग जनसुविधा के लिए स्टांप ड्यूटी और अतिरिक्त फ्लोर रेशियो एरिया में छूट दी जाएगी। इसके साथ ही विकास प्राधिकरण या अन्य निर्माण एजेंसी अधिग्रहित की गई जमीन में से 50 प्रतिशत का उपयोग जनसुविधा के लिए कर सकेंगी। recent visitors 59

इस बार उज्जैन सिंहस्थ 2028 कुछ हटकर होगा, सिंहस्थ की जमीन पर हाईटेक और स्थायी कुंभ नगरी बसाने की योजना

उज्जैन  सिंहस्थ क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप देने की बड़ी योजना पर काम शुरू हो गया है. सिंहस्थ की भूमि पर स्थायी कुंभ नगरी बसाने की तैयारी है. इसमें हाईटेक अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी. इस प्रोजेक्ट के तहत उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) लैंड पूलिंग स्कीम के तहत लगभग 2378 हेक्टेयर क्षेत्र में कुंभ नगरी विकसित करेगी. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है. स्थायी संरचनाओं के साथ आधुनिक सुविधाएं अब तक सिंहस्थ मेले के दौरान अस्थायी निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते थे, जो सिंहस्थ के पूरा होते ही हटा दिए जाते थे. लेकिन इस बार स्थायी सड़कें, बिजली, सीवरेज सिस्टम, जल आपूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा. इस हाईटेक धार्मिक नगरी की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं. देश में पहली बार स्थायी कुंभ नगरी उज्जैन में     इंटरकनेक्टेड सड़कों का नेटवर्क : 60 से 200 फीट चौड़ी सड़कें बनाई जाएंगी, जो मेला क्षेत्र को सुव्यवस्थित तरीके से जोड़ेंगी.     स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट : भीड़ नियंत्रण के लिए सड़कों को इस तरह डिज़ाइन किया जाएगा कि सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को सुगमता से डायवर्ट किया जा सके.     अत्याधुनिक सीवरेज और जल निकासी प्रणाली : अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम और वॉटर मैनेजमेंट से सफाई बनी रहेगी.     भव्य प्रवेश द्वार : धार्मिक महत्व को दर्शाने वाले शानदार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे.     हरे-भरे सार्वजनिक स्थल : पार्क, वॉकिंग पाथवे, ओपन जिम, और प्लांटेशन का विशेष ध्यान रखा जाएगा. उज्जैन के लोगो के साथ ही किसानों को लाभ मिलने का दावा सरकार का दावा है कि यह योजना सिर्फ सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि उज्जैन के किसानों और स्थानीय लोगों के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर बनाई गई है.     लैंड पूलिंग स्कीम के तहत 50% भूमि किसानों के पास ही रहेगी, जिससे उन्हें अपनी जमीन पर बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.     25% भूमि सड़क निर्माण में जाएगी, जिसमें बिजली, पानी, और सीवरेज जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी.     5% भूमि हरित क्षेत्र, उद्यान, और सार्वजनिक पार्कों के लिए आरक्षित होगी.     5% भूमि पर अस्पताल, स्कूल, पुलिस स्टेशन, और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. स्थायी कुंभ नगरी पर खर्च होंगे 2 हजार करोड़ रुपए इस परियोजना पर करीब 2000 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य है. पहली बार सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी विकास होगा, जिससे हर 12 साल में बार-बार अस्थायी निर्माण की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे भविष्य में खर्च भी कम होगा और उज्जैन को एक सुनियोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी के रूप में पहचान मिलेगी. उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी का कहना है "मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदृष्टि यह है कि उज्जैन को धार्मिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए. इसके तहत सिंहस्थ 2028 के लिए तैयार होने वाली यह कुम्भ नगरी न केवल श्रद्धालुओं के लिए सहूलियत लाएगी, बल्कि स्थानीय किसानों, व्यापारियों और निवासियों के लिए भी वरदान साबित होगी." 1806 किसानों की जमीन होगी लैंड पूलिंग स्थायी कुंभ सिटी तैयार करने उज्जैन विकास प्राधिकरण 1806 किसानों की करीब 5000 सर्वे वाली जमीन की लैंड पूलिंग करेगा। ऐसा पहली बार होगा जब सिंहस्थ भूमि पर स्थायी सड़कें, बिजली के पोल और अन्य निर्माण कार्य किए जाएंगे। यहां 60 से 200 फीट तक की सड़कें बनेगी। ये सभी इंटर कनेक्ट रहेंगी। इसका फायदा यह होगा कि श्रद्धालु सुगमता से कुंभ में आ-जा सकेंगे। प्रशासन भी भीड़ बढ़ने पर क्राउड को समय रहते शिफ्ट कर सकेगा। दरअसल, अब तक सिंहस्थ भूमि पर स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं थी। जिससे मंगलनाथ क्षेत्र और शिप्रा नदी से मुरलीपुरा तक के आसपास की सिंहस्थ भूमि पर विकास नहीं हो पाया था। लेकिन, उज्जैन विकास प्राधिकरण की इस योजना से यह पूरा क्षेत्र स्थायी तौर पर विकसित हो सकेगा। recent visitors 59

दुष्यंत गौतम भी सीएम पद की रेस में साथ ही मनजिंदर सिंह सिरसा, विजेंद्र गुप्ता के नाम पर भी चर्चा

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे जारी हो रहे हैं। अब तक के नतीजों और रुझानों से ये साफ हो गया है कि दिल्ली में बीजेपी सरकार बनाने जा रही है। आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेता चुनाव हार गए हैं। इसी के साथ दिल्ली के नए मुख्यमंत्री की कवायद शुरू हो गई है। सीएम पद की रेस में बीजेपी के कई बड़े चेहरे शामिल हैं। लेकिन बीजेपी नेतृत्व किस पर भरोसा जताएगी, ये देखना दिलचस्प होगा। प्रवेश वर्मा का नाम चल रहा आगे नई दिल्ली से अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा का नाम रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। प्रवेश वर्मा पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं। वे नई दिल्ली सीट से सांसद भी रह चुके हैं। लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें लोकसभा में टिकट नहीं दिया। विधानसभा चुनाव में प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल को हराकर पार्टी का भरोसा फिर से जीत लिया है। दुष्यंत गौतम के नाम की भी चर्चा दिल्ली के करोल बाग विधानसभा चुनाव से बीजेपी उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी सीएम रेस में चल रहा है। इस सीट पर उनका मुकाबला आम आदमी पार्टी के विशेष रवि और कांग्रेस के राहुल धानक से था। चुनावों के नतीजों के बीच गौतम ने कहा, 'हम एक विधायक के तौर पर हम शपथ लेगें। मुख्यमंत्री या मंत्री बनने का फैसला पार्टी लेगी। पार्टी जो जिम्मेदारी देगी उसको निभायेगें।" मनजिंदर सिंह सिरसा के नाम की चर्चा इसके अलावा बीजेपी के सीनियर नेता मनजिंदर सिंह सिरसा के नाम की भी चर्चा सीएम पद की रेस में है। उन्हें पार्टी ने राजौरी गार्डन से उम्मीदवार बनाया था। जहां उन्होंने 1800 वोटों से आम आदमी पार्टी की धनवती चन्दीला को हराया। राजौरी गार्डन पंजाबी बहुल सीट है। विजेंद्र गुप्ता भी हो सकते हैं दावेदार बीजेपी के विधायक विजेंद्र गुप्ता भी दिल्ली में मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं। गुप्ता दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में भी जीत हासिल की थी। विजेंद्र गुप्ता विधानसभा में मुखर होकर पार्टी की बात रखते हैं। recent visitors 64

दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का एक बार फिर सफाया, 67 उमीदवार नहीं बचपाये अपनी जमानत

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 70 में से 67 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. वह 70 सदस्यीय विधानसभा में लगातार तीसरी बार अपना खाता खोलने में नाकाम रही है. हालांकि, कांग्रेस के वोट शेयर में 2.1% का मामूली सुधार हुआ है. जबकि उनके कई प्रमुख नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा. वहीं. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि वो लोगों का विश्वास फिर से जीतेंगे और 2030 में अपनी सरकार बनाएंगे. दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का एक बार फिर सफाया गया. पार्टी के अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. कांग्रेस के सिर्फ तीन उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे. जिनमें कस्तूरबा नगर से अभिषेक दत्त जो दूसरे स्थान पर रहने वाले एकमात्र कांग्रेसी नेता हैं. इस लिस्ट में नांगलोई जाट से रोहित चौधरी और बादली से देवेंद्र यादव शामिल हैं. ज्यादातर कांग्रेस उम्मीदवार बीजेपी या आप के बाद तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन कुछ सीटों में कांग्रेस के उम्मीदवार एआईएमआईएम के उम्मीदवारों से भी पीछे रहे. जिसमें मुस्लिम बहुल क्षेत्र शामिल हैं. ये उम्मीदवार रहे तीसरे नंबर पर दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव खुद बादली सीट पर तीसरे स्थान पर रहे, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा कालकाजी में तीसरे स्थान पर रहीं और पूर्व मंत्री हारून यूसुफ बल्लीमारान में तीसरे स्थान पर थे, जिसका उन्होंने 1993 से 2013 के बीच पांच बार प्रतिनिधित्व किया था. कांग्रेस ने बिगाड़ा आप का खेल कांग्रेस के वोट शेयर में मामूली सुधार ने आप आदमी पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया है. कांग्रेस आप के लिए खेल बिगाड़ने में कामयाब रही, जिसे अनुसूचित जाति और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ा, जहां कांग्रेस ने आप की कीमत पर मामूली बढ़त हासिल की और भाजपा को फायदा हुआ. चुनाव में आप के वोट शेयर में 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. आम आदमी पार्टी को 43.19 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि 2020 के चुनाव में 53.6 प्रतिशत वोट शेयर मिला था. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर में 2.1 प्रतिशत का सुधार हुआ है, लेकिन ये वोट शेयर सीट में तब्दील नहीं हो पाया. पार्टी को 2020 के विधानसभा चुनावों में 4.3 प्रतिशत के मुकाबले 2025 के चुनाव में 6.39 प्रतिशत वैध वोट मिले हैं. साल 2008 में कांग्रेस का वोट शेयर 40.31 प्रतिशत (पिछली बार जब कांग्रेस ने दिल्ली में सरकार बनाई थी) था. कांग्रेस का ये प्रतिशत साल 2013 में गिरकर 24.55 प्रतिशत पहुंच गया, 2015 में 9.7 प्रतिशत और 2020 में 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गया था.वहीं, AAP ने कांग्रेस के वोट शेयर में सेंध लगाकर 2013 में 29.6 प्रतिशत, 2015 में 54.6 प्रतिशत और 2020 में 53.6 प्रतिशत वोट हासिल किया था.   पार्टी के एक नेता ने कहा, 'हमने जो खोया था, उसका कुछ हिस्सा वापस पा लिया है. ये लड़ाई जारी रहेगी.' कांग्रेस नेताओं को लगता है कि अब ये एक लंबी और कठिन लड़ाई है, क्योंकि पार्टी लगभग 5.8 लाख वोट हासिल करने में सफल हो सकती है, जो 2020 में 3.95 वोट से थोड़ा अधिक है. लेकिन 2015 में 8.67 लाख वोट और 2013 में 1.93 करोड़ वोट से बहुत दूर है जब उसने 8 सीटें जीती थीं. 2008 में कांग्रेस को 2.49 करोड़ वोट मिले थे, जब उसने 43 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. इसके इतर कांग्रेस का पतन और उसकी बिगड़ती स्थिति का असर इंडिया ब्लॉक की एकता जुटता पर पड़ेगा, क्योंकि इंडिया ब्लॉक में पहले ही कांग्रेस बैकफुट पर है. कांग्रेस के साझेदार वैचारिक मुद्दों और चुनावी तालमेल को लेकर अलग-अलग राय रखते रहे हैं. बिहार में विधानसभा चुनावों में इंडिया ब्लॉक के साझेदारों के बीच तनातनी दिख सकती है. हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन से विपक्षी गुट में उसकी प्रमुख स्थिति और भी कम हो जाएगी. इसलिए जबकि कांग्रेस और AAP ने दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा में 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए गठबंधन किया था, लेकिन उन्होंने दिल्ली में अकेले लड़ने का फैसला किया. recent visitors 58