भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 5.8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जानें इंदौर-ग्वालियर का हाल

भोपाल  ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) में मध्य प्रदेश को ₹26.61 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। यह समिट दो दिन चला। भोपाल को सबसे ज़्यादा ₹5.8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। इंदौर और उज्जैन को लगभग ₹4.7 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। अडानी ग्रुप, टोरेंट पावर, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अवाडा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों ने निवेश का वादा किया। ये निवेश रिन्यूएबल एनर्जी, हॉस्पिटैलिटी, माइनिंग, फ़ूड प्रोसेसिंग, IT, डेटा सेंटर और अर्बन डेवलपमेंट जैसे कई क्षेत्रों में होंगे। भोपाल संभाग में सबसे अधिक दिलचस्पी भोपाल और आसपास के इलाकों में ग्रीन एनर्जी, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स, हेल्थकेयर, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस और अर्बन डेवलपमेंट में निवेश की खास रुचि दिखाई गई। NHAI ने इंदौर-भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने की योजना का ऐलान किया। इस प्रोजेक्ट में ₹1.3 लाख करोड़ का निवेश होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ MoU साइन हुआ है। यह MoU जमीन अधिग्रहण और स्थानीय सहायता के लिए है। केन्स टेक्नोलॉजी ने भोपाल के IT पार्क में SMT मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹352 करोड़ निवेश करने का वादा किया है। इससे करीब 1,650 नौकरियां पैदा होंगी। InAvia Aviation Consultants GmbH और MP सिविल एविएशन के बीच ₹500 करोड़ के निवेश से भोपाल में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल यूनिट बनाने के लिए MoU साइन हुआ। प्रधान एयर के साथ एक और MoU हुआ। इसके तहत ₹150 करोड़ के निवेश से मध्य प्रदेश में उज्जैन एयर नाम की एक छोटी इंट्रा-स्टेट एयरलाइन शुरू होगी। नीतियां कर रहीं आकर्षित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च भोपाल में अपनी एक सुविधा स्थापित करेगा। इससे क्षेत्र के शैक्षणिक और अनुसंधान परिदृश्य को और समृद्ध करेगा। MPIDC के मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रमौली शुक्ला ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि हर सेक्टर पर केंद्रित नई नीतियों से प्रमुख निवेश प्रस्तावों को आकर्षित करने में मदद मिली है। आकर्षक नीतियों और राज्य में भूमि की उपलब्धता के कारण लगभग हर क्षेत्र ने शिखर सम्मेलन में निवेश प्रस्ताव प्राप्त किए हैं। इंदौर क्षेत्र में बहुत सारी पूछताछ हुई थी। शिखर सम्मेलन के दौरान विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, खनन और शहरी विकास ने अधिकतम निवेश के इरादे हासिल किए हैं। यानी हर सेक्टर के लिए नई नीतियां बनाई गई हैं। इससे निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिली है। राज्य में अच्छी नीतियां और ज़मीन उपलब्ध होने के कारण लगभग हर क्षेत्र को निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इंदौर क्षेत्र में निवेशकों ने काफी पूछताछ की। सबसे ज़्यादा निवेश मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, माइनिंग और अर्बन डेवलपमेंट में आए हैं। इंदौर में भी दिलचस्पी इंदौर क्षेत्र ने ₹4.76 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए। इंदौर में टोरेंट पावर और अक्षत ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड ने बड़े निवेश का वादा किया है। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में, इंडो यूरोपियन रिसर्च एंड हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, रुसान फार्मा लिमिटेड, अल्फा लैबोरेटरीज लिमिटेड और मयंक वेलफेयर सोसाइटी इंडेक्स सिटी हॉस्पिटल ने निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह समिट मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इन प्रस्तावों से लाखों नौकरियां पैदा होंगी। यह समिट राज्य के विकास के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है संभाग- निवेश की प्रस्तावित राशि     भोपाल – 5 लाख 82 हजार 93 करोड़     उज्जैन- 4 लाख 77 हजार 506 करोड़     शहडोल – 1 लाख 58 हजार 402 करोड़     जबलपुर – 1 लाख 6 हजार 970 करोड़     रीवा – 68 हजार 475 करोड़     इंदौर– 4 लाख 76 हजार 245 करोड़     नर्मदापुरम– 2 लाख 93 हजार 522 करोड़     सागर – 53 हजार 657 करोड़     चंबल – 52 हजार 92 करोड़     ग्वालियर – 27 हजार 363 करोड़     कुल- 22 लाख 96 हजार 325 करोड़ रुपए गौरतलब है कि एमपी में निवेशकों को लुभाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले रीजनल समिट आयोजित किए गए थे। रीजनल समिट के जरिए सरकार की कोशिश की थी कि हर क्षेत्र में विकास हो। उसका भी प्रभाव देखने को मिला है। recent visitors 52

GIS में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 60,000 करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए, राजगढ़ जिले को मिलेगा लाभ

भोपाल मध्य प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 60,000 करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए हैं। इस निवेश का लाभ राजगढ़ जिले को भी मिल सकता है, क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि बायोगैस प्लांट के लिए जमीन की मांग कर चुके हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो राजगढ़ में जल्द ही कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित हो सकता है, जिससे जिले के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी। रिलायंस के अधिकारियों की जिले में रुचि 10 अक्टूबर 2024 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों ने राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा से मुलाकात कर बायोगैस प्लांट के लिए भूमि आवंटन की मांग की थी। इस मुलाकात के बाद, कलेक्टर ने संबंधित विभागों को लैंड बैंक तैयार करने और इस परियोजना को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। रिलायंस इंडस्ट्रीज का विजन रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी अनुपम जैन ने बताया रिलायंस का उद्देश्य है कि भारत को क्लीन और ग्रीन एनर्जी में लीडर बनाना चाहिए। नई पीढ़ी के लिए सस्टेनेबल यूचर क्रिएट करना हमारा लक्ष्य है। मध्य प्रदेश सरकार की नीति इस दिशा में सहायक है, इसलिए राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। औद्योगिक विकास की नई उमीदें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में साइन हुए एमओयू से राजगढ़ जिले में औद्योगिक निवेश की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। यदि कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित होता है, तो इससे न केवल रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि यह जिला ग्रीन एनर्जी सेक्टर में प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल हो सकता है। राजगढ़ में बायोगैस प्लांट की संभावनाएं क्यों ? भूमि उपलब्धता: जिले में पहले से ही 2000 हेक्टेयर भूमि का लैंड बैंक तैयार है, जो औद्योगिक निवेश के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सुविधाजनक लोकेशन: राजगढ़ का भौगोलिक स्थान, बेहतर आवागमन सुविधा, जल संसाधन और मानव संसाधन की उपलब्धता इसे औद्योगिक परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बनाती है। सरकार की नीतियां: मप्र सरकार रिन्यूएबल एनर्जी और बायोगैस प्लांट के विस्तार के लिए अनुकूल नीतियां बना रही है, जिससे ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा मिल रहा है। विभाग को जमीन आवंटन करेंगे अभी आईडीसी से आधिकारिक पत्र नहीं आया है, लेकिन हमें जैसे ही पत्र मिलेगा, हम संबंधित विभाग को जमीन आवंटन करेंगे। राजगढ़ में उद्योगों की स्थापना की अपार संभावनाएं हैं और हम इसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। -डॉ. गिरीश मिश्रा, कलेक्टर, राजगढ़ recent visitors 59

आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश और ज्यादा चमकेगाम, मोहन सरकार राज्य को मिनी मुंबई इंदौर का रूप देगी

भोपाल आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश और ज्यादा चमकेगा। प्रदेश की मोहन सरकार पूरे राज्य को मिनी मुंबई इंदौर का रूप देगी। जबकि, इंदौर को दिल्ली-मुंबई तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इतना ही नहीं, मेट्रोपॉलिटन कॉन्सेप्ट के आधार पर कई जिलों को आपस में जोड़कर और बड़ा किया जाएगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब इस योजना पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने राजधानी भोपाल में आयोजित वैश्विक सम्मेलन ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट-2025 में इस योजना पर चर्चा की। जीआईएस के दूसरे दिन यानी 25 फरवरी को 'अनलॉकिंग लैंड वैल्यू इन सिटीज' सेशन आयोजित किया गया। इस सेशन में शहरों के विकास पर मंथन किया गया। इस सेशन में हरियाणा के पूर्व सीएम और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर एवं प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद रहे। सेशन में सीएम मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद हमने कई सेक्टर में काम करने का संकल्प लिया। हमने रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव और इंवेस्टर समिट की। इस दौरान प्रदेश में रोजगार, उद्योग और निवेश का वातावरण बनाने का प्रयास किया। यह प्रयोग बहुत अच्छा रहा। इनकी वजह से हमें कई तरह के लाभ मिले। इन्हीं सबके बीच हमें पता चला कि राज्य के छोटे से छोटे स्थान पर भी इंवेस्टर समिट हो सकती है। इससे हमारा कॉन्फिडेंस बढ़ा। हमें पता चला कि नर्मदापुरम जैसी छोटी जगह पर भी निवेश की उम्मीदें हैं। जगह छोटी पर फायदा बड़ा सीएम यादव ने कहा कि कुछ समय पहले हम रिन्यूएबल एनर्जी के उपकरण निर्माण उद्योग के भूमि पूजन के लिए नर्मदापुरम के मुहासा-बाबई गए थे। यहां जब हम औद्योगिक केंद्र का भूमि पूजन कर रहे थे, तो उस वक्त 200 एकड़ जमीन थी। हमारा कार्यक्रम चालू ही था कि 400 एकड़ और जमीन की मांग आ गई। इस तरह जमीन की 800 एकड़ हो गई। हमने जब इस मांग को पूरा किया, तो पता चला कि 800 एकड़ जमीन की और मांग आ गई। यही छोटी-छोटी जगहों पर इंवेस्टर समिट करने का फायदा है। इस तरह बसाएंगे महानगर     मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इंदौर को दिल्ली-मुंबई की तरह बनाना है और बाकी प्रदेश को इंदौर की तरह बनाना है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने निवेश का और काम करने का माहौल बना दिया है।     हम मेट्रोपॉलिटन कॉन्सेप्ट के आधार पर आसपास के जिलों को जोड़ेंगे। भविष्य में इंदौर-उज्जैन-देवास-शाजापुर-पीथमपुर (धार) को जोड़कर इंडस्ट्रियल सेंटर की कल्पना की है।     इस तरह सब मिलाकर लगभग 8000 किलोमीटर का पूरा क्षेत्र मिलाने की योजना है। मेट्रोपॉलिटन की कल्पना में मामले को कानूनी पेंच में उलझाने की बजाए एक आउट लाइन तय की है।     रोड-रेलवे-बिजली-पानी-सीवर लाइन जैसी सुविधाएं मुहैया कराएंगे।     इस तरह 25 सालों में इस क्षेत्र को महानगर के रूप में विकसित करेंगे। इसी तरह भोपाल-सीहोर-विदिशा-रायसेन-नर्मदापुरम का एक हिस्सा मिलाए जाने की कल्पना है। एमपी का चहुंओर विकास होगा- मंत्री विजयवर्गीय नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जिस तरह प्रदेश में निवेश हो रहा है उससे लग रहा है कि राज्य अग्रणी होगा। शहरीकरण देश की जरूरत है। 2047 तक हमारी जनसंख्या बढ़ेगी। चूंकि, हमें कल का प्रदेश बनाना है, इसलिए उस पर चिंतन करना जरूरी है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सिर्फ दो दिन में 18 नई पॉलिसियों को मंजूरी दी गई। इन पॉलिसियों से प्रदेश का चहुंओर विकास होगा। recent visitors 61

निवेशकों और मेहमानों ने जोन में स्थानीय व्यंजनों का अतिथियों ने उठाया लुत्फ

भोपाल ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट-2025 में आए विदेशी और स्वदेशी निवेशकों के लिये मानव संग्रहालय परिसर में "एक जिला-एक उत्पाद" जोन बनाया गया। यह जोन एक जिला-एक उत्पाद योजना में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चयनित उत्पादों के परिचय और निवेश को आकर्षित करने के लिये बनाया गया। समिट में मध्यप्रदेश के एक जिला-एक उत्पाद योजना में स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराने की दृष्टि से "वन ड्रिस्ट्रिक-वन प्रोडक्ट विलेज" की वृहद प्रदर्शनी भी लगाई गई। जीआईएस में शामिल विदेशी निवेशकों और मेहमानों के लिये यह जोन विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। निवेशकों ने ओडीओपी जोन में अलग-अलग जिलों के चयनित उत्पादों को देखा, समझा और सराहा। ओडीओपी जोन में दिखी प्रदेश की रंग-बिरंगी लोक संस्कृति की झलक मानव संग्रहालय परिसर के स्थित ओडीओपी जोन में विदेशी निवेशकों और मेहमानों को प्रदेश की रंग-बिरंगी लोक संस्कृति की झलक दिखाई गई। बुंदेलखंड के बधाई, बैतूल के कोरकू समुदाय का गडली सुसुन नृत्य, बांसूरी की मधुर तान, ढोल और झुंझुरी की थाप ने पूरे माहौल को आनंदित कर दिया। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों ने रंग-बिरंगे परिधानों से सजकर लोक नृत्य की प्रस्तुतियां दी। ओडीओपी जोन देखने आए निवेशकों और मेहमानों ने लोक कलाकारों का तालियों से उत्साहवर्धन किया और सेल्फी भी खिंचवाई। आतिथियों ने स्थानीय उत्पादों को सराहा, व्यंजनों का उठाया लुत्फ ओडीओपी जोन में प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पाद जैसे ग्वालियर सैंड स्टोन, बुरहानपुर केले के प्रोडक्ट, बैतूल मैटल की सजावट सामग्री, शिवपुरी जैकेट, सीहोर लकड़ी के खिलौने आदि उत्पादों का अवलोकन किया। सभी ने उत्पादों की गुणवत्ता और रचनात्मकता की सराहना की। मेहमानों ने बुंदेली, मालवी और परम्परागत जनजातीय व्यंजनों का लुत्फ उठाया। ओडीओपी में शामिल है 52 जिलों के विशिष्ट उत्पाद ओडीओपी योजना के अंतर्गत किसी क्षेत्र विशेष के विशेष उत्पादों को उनके भौगोलिक, जैविकीय, प्राकृतिक या उत्पादन की विशेषताओं के कारण शामिल किया जाता है। योजना में ऐसे उत्पादों का चयन कर उनके संरक्षण और संवर्द्धन के विशेष सरकारी प्रयास किये जाते है। इस समय मध्यप्रदेश के 52 जिलों में ओडीओपी योजना संचालित है, जिनमें हरी सब्जी, मोटे अनाज, क्राफ्टकला हथकरघा, हस्तशिल्प, उपकरण आदि शामिल है। अब तक प्रदेश के 19 उत्पादों को मिला है जीआई टैग प्रदेश सरकार द्वारा स्थानीय कलाकारों और उत्पादों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 19 विशिष्ट उत्पादों को अब तक जीओ-ग्राफिकल इंडीकेशन्स (जीआई) टैग प्रदान किये गये है। इसमें चंदेरी साड़ी, बाग प्रिंट, नागपुरी संतरा, रतलामी सेंव, कड़कनाथ मुर्गा, चिन्नौर चावल, बुटिक प्रिंट, स्टोन क्राफ्ट, लेदर टॉय, बेल मेटल वेअर, महेश्वरी साड़ी, महोबा देशवारी पान, मुरैना गजक, सुंदरजा आम, शरबती गेहूँ, गोंड पेंटिंग, रॉट आयरन क्राफ्ट, हेन्डमेड कारपेट, वारासिवनी की हेंडलूम साड़ी शामिल है। इनमें से 7 उत्पाद ओडीओपी योजना में भी शामिल है।   recent visitors 63

लॉजिस्टिक्स-कनेक्टिंग एमपी टू द वर्ल्ड सेशन में विशेषज्ञों ने किए विचार व्यक्त

भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के दूसरे दिन ‘लॉजिस्टिक्स: कनेक्टिंग एमपी टू द वर्ल्ड’ सत्र में मध्यप्रदेश को लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर विशेषज्ञों और अधिकारियों ने औद्योगिक कॉरिडोर, डिजिटल एकीकरण, निवेश अवसरों और लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर अपने विचार साझा किए। मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स ईज अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स (एलईएडीएस) इंडेक्स में ‘फास्ट मूवर’ के रूप में उभरते हुए इस क्षेत्र में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। नियमों को सरल बनाने, एमएसएमई को बढ़ावा देने और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने से प्रदेश एक लॉजिस्टिक पॉवर हाउस बनाने की ओर अग्रसर है। ऊर्जा दक्षता, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और अत्याधुनिक तकनीकों के समावेश से मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नई संभावनाएं सृजित कर रहा है। लॉजिस्टिक्स पॉवर हाउस में बदलता मध्यप्रदेश सेशन की शुरुआत में एनवीडी विभाग के सचिव, जॉन किंग्सले ने प्रदेश में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के मौजूदा परिदृश्य और नए निवेश अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश मजबूत परिवहन नेटवर्क, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स ईकोसिस्टम के व्यापक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स का पावर हाउस बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य स्थित होने की वजह से रोड रेल और एयर कनेक्टिविटी आसान हो गई है। सीईओ एनआईसीडीसी एवं चेयरमैन एनएलडीएसएल, राजत कुमार सैनी ने लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में औद्योगिक कॉरिडोर और डिजिटल टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन की भूमिका पर विशेष संबोधन दिया। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स की लागत को प्रभावी बनाने और परिवहन सुविधाओं को डिजिटल माध्यमों से अधिक सशक्त करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। डब्ल्यूएआईपीए के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, दुष्यंत ठाकोर ने वैश्विक निवेश परिदृश्य और मध्यप्रदेश के लॉजिस्टिक्स उद्योग में निवेश अवसरों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का रणनीतिक भौगोलिक स्थान और विकसित लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इसे वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है। द चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट इंडिया के सेक्रेटरी जनरल, संजीव गर्ग ने लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नवाचार और आपूर्ति शृंखला की दक्षता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के लॉजिस्टिक्स हब बनने की प्रबल संभावनाएं हैं, जिससे विभिन्न उद्योगों को सुगम और लागत प्रभावी परिवहन सुविधाएं मिल सकेंगी। डीपी वर्ल्ड के वाइस प्रेसिडेंट-ऑपरेशंस, रेल एंड इनलैंड टर्मिनल्स, महेंद्र बिरहाडे ने और वेयरहाउसिंग सेक्टर में अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग और मल्टी-मॉडल परिवहन की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पार्कों और वेयरहाउसिंग सुविधाओं का विस्तार वैश्विक मानकों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। फ्लिपकार्ट ग्रुप के रीजनल डायरेक्टर – वेस्ट एवं साउथ, महेश पंजवानी ने ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स के विकास और सप्लाई चेन मैनेजमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के प्रभाव पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स का विस्तार तेजी से हो रहा है, जिससे उद्योगों को निर्बाध आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित हो सके। हर्ष ट्रांसपोर्ट प्रा. लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर, डिप्पी वांकानी ने लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निजी निवेश की संभावनाओं और सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग में निजी निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीतियों पर काम कर रहा है।   recent visitors 59

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए 100 करोड़ में सजा भोपाल: 17Km हिस्से में लाइटिंग-पेंटिंग, मेहमानों का वेलकम करने के लिए भोपाल तैयार 

Bhopal is being awarded with 100 crore rupees for Global Investors Summit VIP रोड, गौहर महल-बोट क्लब की तस्वीर ही बदली कमलेश ( सम्पादकीय लेख ) भोपाल। भोपाल में 24 और 25 फरवरी को Global Investors Summit from Bhopal (GIS) होगी। देश के शीर्ष 50 समेत 25 हजार उद्योगपति आएंगे। समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। पीएम और मेहमानों के स्वागत के लिए कुल 33 करोड़ रुपए की लागत से भोपाल सज गया है। कुल 17 किमी हिस्से में लाइटिंग, पेंटिंग की गई है। VIP रोड, गौहर महल, बोट क्लब, एयरपोर्ट रोड, स्मार्ट सड़क की तो तस्वीर ही बदल गई है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी और नगर निगम ने सड़कों के लिए 70 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। उद्योगपति 23 फरवरी यानी, रविवार को ही भोपाल आ जाएंगे। ऐसे में एक दिन पहले सुबह से तैयारियां पूरी की जा रही हैं। सबसे ज्यादा फोकस राजा भोज एयरपोर्ट से लेकर मानव संग्रहालय के 17 किलोमीटर रूट पर है, लेकिन न्यू मार्केट, लिंक रोड नंबर-1, 2 और 3, होशंगाबाद रोड, एमपी नगर, भदभदा रोड, सैर सपाटा, वन विहार, पॉलिटेक्निक चौराहा, राजभवन, लाल परेड ग्राउंड की सड़क भी सज चुकी है। समिट श्यामला हिल्स स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में होगी। माइ सीक्रेट न्यूज़ ने एक दिन पहले शनिवार को 17 किलोमीटर के रूट को देखा। मानो ये रास्ते मेहमानों को ‘वेलकम’ कह रहे हो। सजावट का जिम्मा नगर निगम को समिट से पहले तीन एजेंसियों को अलग-अलग काम सौंपे गए। नगर निगम को सजावट का काम दिया गया, जबकि पीडब्ल्यूडी और स्मार्ट सिटी को सड़क निर्माण का। नगर निगम : एयरपोर्ट से लेकर मानव संग्रहालय, बोट क्लब, एमपी नगर, चार इमली, श्यामला हिल्स समेत कई इलाकों में पेंटिंग और फाउंटेन का काम निगम ने किया है। इसमें 5 करोड़ 76 लाख रुपए खर्च किए गए। लाखों पौधे लगाने के साथ लेक से जुड़े काम में 17.25 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। वहीं, पूरे शहर में करीब 10 करोड़ रुपए में लाइटिंग की गई है। इस तरह कुल 32.74 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। पीडब्ल्यूडी : एयरपोर्ट रोड, वीआईपी रोड, स्मार्ट सड़क, श्यामला हिल्स, बोट क्लब, लिंक रोड नंबर 1, 2 और 3, एमपी नगर, रोशनपुरा, रंग महल, श्यामला हिल्स की प्रमुख सड़कें बनाई गई है। कुछ सड़कों के गड्‌ढे भी भरे गए। इन पर 65 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। स्मार्ट सिटी : स्मार्ट सड़क पर डामरीकरण और सजावट पर करीब 5 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। 10 हजार मजदूर काम में जुटे जीआईएस के दो दिन पहले यानी, शनिवार को करीब 10 हजार कर्मचारी सुबह से कामों को अंतिम रूप देने में लगे रहे। नगर निगम के सफाईकर्मी सफाई में लगे रहे। वहीं, सड़क, पेवर ब्लॉक, सौंदर्यीकरण का काम भी हुआ। पेंटिंग में एमपी की संस्कृति और धार्मिक झलक मालवा का मांडना हो या महाकाल, भोजपुर मंदिर की प्रतिकृति..। हर पेंटिंग मध्यप्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक की कहानी बयां कर रही है। एयरपोर्ट रोड से ही पेंटिंग्स बनाई गई है। इनमें प्रदेश की संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। लालघाटी, एयरपोर्ट रोड स्थित फ्लाईओवर के नीचे छत वाले हिस्से को कई रंगों से सजाया गया है। वीआईपी रोड के एक हिस्से में मांडना समेत सांस्कृतिक और धार्मिक चित्र बनाए गए हैं। सेल्फी पॉइंट से राजा भोज की प्रतिमा, गौहर महल, पॉलिटेक्निक कॉलेज, स्मार्ट रोड, सीएम हाउस, बोट क्लब, लेक व्यू पर भी तरह-तरह की आकृतियां उकेरी गई है। इनमें आदिवासियों से जुड़े चित्र भी शामिल हैं। recent visitors 209

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट: बैठक में निवेश को बढ़ावा देने, औद्योगिक विकास को गति देने पर हुई चर्चा

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिसमें शहर के प्रमुख उद्योगपति, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। बैठक में निवेश को बढ़ावा देने, औद्योगिक विकास को गति देने और इंदौर को निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में इंदौर कलेक्टर, एमपीआईडीसीए के अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट, जिला अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में उद्योगपतियों ने विभिन्न सुझाव दिए, जिसमें निवेश की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और निवेशकों को अधिक प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया। कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि सरकार निवेशकों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।  इंदौर को देश का प्रमुख औद्योगिक हब बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इंदौर कलेक्टर ने भी प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। इस दौरान एमपीआईडीसीए के अधिकारियों ने निवेशकों के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और उनसे इस पहल का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। महिलाओं के  रोजगार पर दिया जोर बैठक में यह भी तय किया गया कि निवेशकों की सुविधा के लिए एक समर्पित हेल्पडेस्क बनाई जाएगी, जहां वे अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही उद्योगपतियों ने प्रशासन का ध्यान महिलाओं की तरफ आकर्षित करवाते हुए कहा कि हम लोग इन्वेस्टमेंट पर तो फोकस कर रहे हैं, लेकिन महिलाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था करना चाहिए । इंदौर में उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन को लेकर उद्योगपतियों और विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि इंदौर में पहले से ही मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो चुका है, लेकिन प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी औद्योगिक विकास के लिए ठोस प्रयासों की जरूरत है। प्रमुख उद्योगपतियों ने सुझाव दिया कि महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मल्टी-मॉडल इंडस्ट्रियल हब और महिला केंद्रित कॉरिडोर बनाए जाएं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें। इसके साथ ही, स्टार्टअप और आईटी कंपनियों के लिए विशेष ज़ोन विकसित करने की भी मांग उठाई गई।   उद्योगपतियों ने सरकार से तेजी से भूमि आवंटन करने की अपील की पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार को लेकर भी उद्योगपतियों ने सरकार से तेजी से भूमि आवंटन करने की अपील की। उनका कहना है कि कई कंपनियां विस्तार करना चाहती हैं, लेकिन जमीन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके अलावा, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार से इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी में सुधार की मांग की गई, जिसमें सब्सिडी और टैक्स से जुड़े प्रावधानों में राहत देने की बात कही गई। होटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी सुझाव दिया कि मध्य प्रदेश में पर्यटन उत्सवों की तारीखें पहले से तय की जाएं, ताकि देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कही ये बात महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए कानूनी और वित्तीय परामर्शदाताओं को इंदौर में स्थापित करने की जरूरत है, ताकि निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके। इंदौर में औद्योगिक विकास को लेकर उद्योगपतियों ने कई अहम सुझाव दिए हैं, जिनमें महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने, औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीतिगत बदलाव की मांग शामिल है। recent visitors 61