भारत मंडपम में 10 फरवरी को होने वाली परीक्षा पर चर्चा के लिए छात्र भी बेहद उत्साहित, पीएम मोदी देंगे टिप्स

नई दिल्ली 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम नए कलेवर में छात्रों के सामने होगा। सवालों का जवाब सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ही नहीं देंगे, बल्कि देश के कई दिग्गज भी देंगे। पहले पीएम मोदी छात्रों को परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन और तनावमुक्त रहने के टिप्स देते थे, लेकिन इस बार फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, अभिनेता विक्रांत मैसी, अभिनेत्री भूमि पेडनेकर और खेल जगत के कई दिग्गज भी जरूरी टिप्स देते नजर आएंगे। दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में 10 फरवरी को होने वाली परीक्षा पर चर्चा के लिए छात्र भी बेहद उत्साहित हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी), परीक्षा से जुड़े तनाव को सीखने के उत्सव में बदलने की पहल है। इसके 8वें संस्करण में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। वर्ष 2018 में परीक्षा पे चर्चा एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जिसने वर्ष 2025 में अपने 8वें संस्करण के लिए 3.56 करोड़ पंजीकरण प्राप्त किए हैं। ये 7वें संस्करण में 2.26 करोड़ पंजीकरण हुए थे, जो 1.3 करोड़ पंजीकरणों की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। परीक्षा पे चर्चा न केवल एक लोकप्रिय कार्यक्रम बन गया है, बल्कि यह एक "जन आंदोलन" में भी बदल गया है। यह पूरे देश में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ गहराई से जुड़ गया है। परीक्षा के तनाव को दूर करने और छात्रों को परीक्षाओं को एक त्योहार – "उत्सव" के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करता है। परीक्षा पे चर्चा में अधिकतम भागीदारी मानसिक सेहत और समग्र शिक्षा के महत्व के बारे में बढ़ती जागरूकता और स्वीकृति को दर्शाती है। कार्यक्रम का इंटरैक्टिव प्रारूप, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और प्रधान मंत्री के बीच खुला संवाद शामिल है, ने इसकी सफलता में और योगदान दिया है। परीक्षा पे चर्चा को "जन आंदोलन" के रूप में और मजबूत करने के लिए 12 जनवरी 2025 (राष्ट्रीय युवा दिवस) से 23 जनवरी 2025 (नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती) तक स्कूल स्तर पर कई आकर्षक गतिविधियां आयोजित की गईं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को परीक्षा पे चर्चा को एक उत्सव के रूप में मनाने में शामिल करना था। कुल 1.42 करोड़ छात्र, 12.81 लाख शिक्षक और 2.94 लाख स्कूलों ने भाग लिया। ये गतिविधियां तनाव को कम करने, ध्यान केंद्रित करने और परीक्षा के दौरान और उसके बाद प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई थीं। छात्रों को खो-खो और कबड्डी जैसे स्वदेशी खेलों, छोटी दूरी की मैराथन, रचनात्मक मीम प्रतियोगिता, आकर्षक नुक्कड़ नाटक प्रदर्शनों और आकर्षक पोस्टर बनाने सहित विविध प्रकार की गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें छात्र प्रशंसापत्रों के माध्यम से अपने अनुभव साझा करने, छात्र-नेतृत्व वाली चर्चाओं में भाग लेने और विश्राम और मन की शांति विकसित करने के लिए योग और ध्यान सत्रों में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। स्कूलों ने विद्यार्थियों के लिए नाटकों का आयोजन किया, कार्यशालाएं आयोजित कीं तथा अपने विचार साझा करने के लिए विशेष अतिथियों को आमंत्रित भी किया।   recent visitors 55

विशेषज्ञ, नीति निर्माता और निवेशक होंगे एक मंच पर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपने रणनीतिक प्रयासों से औद्योगिक विकास के नए युग की ओर अग्रसर है। निवेशकों को अधिक प्रभावी अवसर देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य के प्रमुख 6 सेक्टर्स पर केंद्रित समिट के आयोजन की महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। यह पहली बार होगा जब हर सेक्टर के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और निवेशक एक मंच पर आकर विशेषज्ञ चर्चाओं, अवसरों और नीतिगत सुधारों पर संवाद करेंगे। इससे निवेश प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकेगा। देश का आकर्षक डेस्टिनेशन बनता मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की अद्वितीय भौगोलिक स्थिति, समृद्ध प्राकृतिक संसाधन, विकसित बुनियादी ढांचा और उद्योग-अनुकूल नीतियां इसे निवेश के लिए देश का सबसे आकर्षक डेस्टिनेशन बनाती हैं। शहरी विकास, पर्यटन, माइनिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी और एमएसएमई, ये सभी क्षेत्र अपनी असीमित संभावनाओं और अनुकूल वातावरण से निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। मध्यप्रदेश न केवल देश का पहला डायमंड प्रोड्यूसिंग स्टेट है, बल्कि ग्रीन एनर्जी हब, विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र और उभरते हुए टेक्नोलॉजी हब के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। इन विभागीय समिट से सरकार निवेशकों को नीतिगत प्रोत्साहन, संसाधनों की उपलब्धता और औद्योगिक ईको सिस्टम की मजबूती से अवगत कराएगी। इससे जीआईएस में होने वाली चर्चाएं वास्तविक निवेश प्रस्तावों में तब्दील हो सकेंगी। शहरी विकास समिट मध्यप्रदेश का शहरी बुनियादी ढांचा तेजी से सुदृढ़ हो रहा है। राज्य की स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, मेट्रो रेल प्रोजेक्ट और लॉजिस्टिक्स हब इसे एक आदर्श रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश डेस्टिनेशन बना रहे हैं। जीआईएस में शहरी विकास समिट के माध्यम से स्मार्ट और सतत् शहरों के निर्माण पर केंद्रित चर्चा होगी, जिससे नवाचार और आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन समिट मध्यप्रदेश को 'भारत का दिल' कहा जाता है और इसके धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौन्दर्य से पूर्ण पर्यटन क्षेत्र पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। खजुराहो, उज्जैन, साँची, पचमढ़ी, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर उपलब्ध कराने के लिये तैयार हैं। पर्यटन समिट में हॉस्पिटैलिटी, थीम-बेस्ड डेस्टिनेशन और एडवेंचर टूरिज्म में निवेश को बढ़ावा देने के लिए गहन चर्चा होगी।  माइनिंग समिट मध्यप्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यह देश में डायमंड, लाइमस्टोन, बॉक्साइट, कोयला, मैंगनीज और तांबे का प्रमुख उत्पादक है। पन्ना स्थित एशिया की एकमात्र डायमंड माइंस और विशाल कोयला भंडार राज्य को माइनिंग इंडस्ट्री के लिए एक आदर्श डेस्टिनेशन बनाते हैं। जीआईएस में माइनिंग समिट से खनन आधारित उद्योगों, मूल्यवर्धित प्र-संस्करण और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा होगी। रिन्यूएबल एनर्जी समिट मध्यप्रदेश ग्रीन एनर्जी हब बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। रीवा सोलर प्लांट, ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और ग्रीन हाइड्रोजन में हो रहे विकास इसे नवकरणीय ऊर्जा निवेशकों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। जीआईएस में आयोजित रिन्यूएबल एनर्जी समिट में सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के लिए ठोस रणनीतियां प्रस्तुत की जाएंगी। आईटी एंड टेक्नोलॉजी समिट मध्यप्रदेश अब टेक्नोलॉजी और डिजिटल इनोवेशन का केंद्र बन रहा है। इंदौर आईटी हब, डेटा सेंटर पॉलिसी, स्टार्ट-अप ईको सिस्टम और उभरते एआई और साइबर सिक्योरिटी क्षेत्रों में तेजी से निवेश आ रहा है। जीआईएस में आईटी समिट के माध्यम से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आईटी पार्क और नई टेक्नोलॉजीज पर निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया जाएगा। एमएसएमई समिट मध्यप्रदेश का एमएसएमई सेक्टर राज्य की आर्थिक रीढ़ है, जहां लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कार्यरत हैं। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना, नए क्लस्टर और निर्यात प्रोत्साहन नीतियां इसे निवेश के लिए एक डेस्टिनेशन बना रही हैं। एमएसएमई समिट में उद्योगों को वित्तीय सहयोग, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और नए बाजारों तक पहुंच को लेकर चर्चा होगी। प्रवासी समिट मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीयों को प्रदेश के उद्योग, स्टार्ट-अप, पर्यटन, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है। यह समिट न केवल राज्य की आर्थिक प्रगति में प्रवासी भारतीयों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा, बल्कि मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीय समिट का उद्देश्य विश्वभर में बसे मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को एक मंच पर लाना और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ ही मध्यप्रदेश के विकास में प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। साथ ही समिट मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी मिलेगा। इन विभागीय समिट से सरकार मध्यप्रदेश में निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। जीआईएस के इस नए स्वरूप से न केवल उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे। मध्यप्रदेश अब सिर्फ निवेश का केंद्र नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक भविष्य का निर्माण करने वाला प्रमुख राज्य बन रहा है।   recent visitors 51

सिंहस्थ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ और हरियाली से आच्छादित रहेंगे, नगर निगम ने ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर काम शुरू किया

 उज्जैन  तीन साल बाद उज्जैन में लगने जा रहे महाकुंभ सिंहस्थ में 22 हजार 200 टन कचरा निकलने का अनुमान नगर निगम ने लगाया है। अनुमान है कि प्रतिदिन औसत 740 टन कचरा (सालिड वेस्ट) निकलेगा। इतने कचरे का बेहतर प्रबंधन करने के लिए सरकार से 15220 सफाई कर्मचारी, 379 वाहन, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट की अपेक्षा की गई है। पिछली बार महाकुंभ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे, इस बार 13 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। ढाई से तीन गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या बता दें कि 92.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले उज्जैन शहर की आबादी सात लाख के करीब है। यहां ‘महाकाल महालोक’ के रूप में ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर का विस्तार होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या ढाई से तीन गुना बढ़ गई है। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड का कहना है कि उज्जैन शहर में रोजाना चार लाख 81 हजार लोगों का आवागमन होता है। रेलवे का कहना है कि वर्तमान में उज्जैन रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन औसत 36946 व्यक्ति ट्रेन से उतरते-चढ़ते हैं। पिछले सिंहस्थ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे सिंहस्थ के दरमियान ये संख्या 66132 हो सकती है। नगर निगम का कहना है कि अभी प्रतिदिन शहर से रोजाना औसत 240 टन (महीने में 7200 टन) कचरा निकलता है। पिछले सिंहस्थ के दौरान महीनेभर में सात करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आए थे, तब महीनेभर में 18700 टन कचरा निकला था। इसकी कीमत 150 रुपये प्रति टन के हिसाब से 28 लाख पांच हजार रुपये थी। इन सब आंकड़ों का अध्ययन, विश्लेषण करने के बाद ही नगर निगम ने सिंहस्थ के दौरान 22200 टन कचरा उत्सर्जित होने का अनुमान लगाया है। इतने कचरे के एकत्रीकरण, परिवहन एवं सड़क-नाली की सफाई के लिए वाहन एवं कर्मचारियों की उपलब्धता का आकलन किया है। प्रारंभिक योजना से अपर मुख्य सचिव डा. राजेश राजोरा को अवगत कराया जा चुका है। ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर होगा काम पिछली बार की तरह इस बार भी यहां ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ अवधारणा पर काम होगा। इसका मतलब है कि महाकुंभ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ तो होगा ही हरियाली से आच्छादित भी होगा। नगर निगम हर संभव प्रयास करेगा कि मेला प्रतिबंधित प्लास्टिक कचरा मुक्त हो। योजना, जीरो वेस्ट सिंहस्थ इवेंट की बनाई जा रही है। इसमें सारे कचरे का बेहतर तरीके से संग्रहण कर वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन किया जाएगा। शहर से 12 किलोमीटर दूर गोंदिया ट्रेचिंग ग्राउंड में भारत सरकार की नवरत्न कंपनी गैस अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा स्थापित किए जाने वाले कम्प्रेस्ड बायोमिथिनेशन प्लांट की इसमें अहम भूमिका होगी। मच्छर मारने तक के होंगे इंतजाम सिंहस्थ में कचरा संग्रहण, सफाई कार्य के साथ मच्छर मारने तक के इंतजाम होंगे। पिछली बार मच्छरों को पनपने से रोकने और मलेरिया की रोकथाम पर सवा करोड़ रुपये खर्च हुए थे। घाट क्षेत्र में शाही स्नान वाले दिन सुगंधित स्प्रे भी किया था। ऐसा इस बार भी किए जाने की योजना है। सिंहस्थ 2028 के लिए बनाया जा रहा प्लान     सिंहस्थ-2028 के लिए कचरा प्रबंधन का विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। अभी आकलन में यह बात सामने आई है कि सिंहस्थ के दरमियान महीनेभर में 22 हजार 200 टन कचरा निकलेगा। कचरा प्रबंधन के लिए 15220 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति, 379 वाहनों की खरीदी, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट बनाने का प्रस्ताव शासन को दिया जा रहा है। – आशीष पाठक, आयुक्त, नगर निगम, उज्जैन   recent visitors 42

मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा, माधव टाइगर अभयारण्य जल्द ही राज्य का 9वां टाइगर रिज़र्व बनेगा

शिवपुरी चंबल रीजन के शिवपुरी में मध्य प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व बनने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि हमारे राज्य में बनने जा रहे एक नए टाइगर रिजर्व के लिए औपचारिकताएं भी लगभग पूरी हो चुकी हैं. CM यादव ने अपने एक बयान में कहा, मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. माधव टाइगर अभयारण्य जल्द ही राज्य का 9वां टाइगर रिज़र्व बनेगा, जिससे चंबल अंचल में वन्यजीवों की समृद्धि बढ़ेगी. बुधवार को कूनो में 5 और चीते छोड़े गए हैं. यह गर्व की बात है कि पहले छोड़े गए चीते न केवल शिकार कर रहे हैं, बल्कि कुशलता से जंगल में विचरण कर रहे हैं. प्रकृति और संतुलन की यह अनमोल झलक हमारे प्रदेश में दिख रही है. बता दें कि पिछले साल राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की तकनीकी समिति ने शिवपुरी जिले के माधव राष्ट्रीय उद्यान को मध्य प्रदेश के 9वें टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. एनटीसीए की तकनीकी समिति ने प्रस्तावित बाघ अभयारण्य का कोर क्षेत्र 375 वर्ग किलोमीटर, बफर क्षेत्र 1276 वर्ग किलोमीटर और कुल क्षेत्रफल 1751 वर्ग किलोमीटर होगा. समिति ने इस राष्ट्रीय उद्यान में एक नर और एक मादा बाघ को छोड़ने की भी मंजूरी दी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजा था. मध्यप्रदेश में हो जाएंगे 9 अभ्यारण्य माधव टाइगर रिजर्व के बाद मध्यप्रदेश में टाइगर रिवर्ज की संख्या 9 हो जाएगी. देश में लगभग 60 टाइगर रिजर्व हैं, इनमें से 9 मध्यप्रदेश में हैं. देश में सबसे ज्यादा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में हैं. पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ एल कृष्णमूर्ति बताते हैं कि, ''इस बाघ अभ्यारण्य का कोर क्षेत्र 375 वर्ग किलोमीटर का और बफर जोन 1276 वर्ग किलोमीटर और कुल क्षेत्रफल 1751 वर्म किलोमीटर का होगा.'' 1958 में हुई माधव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना माधव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1958 में मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना के बाद ही हो गई थी. यह क्षेत्र कभी ग्वालियर के महाराजाओं और मुगल बादशाहों का शिकारगाह हुआ करता था. ग्वालियर राजघराने द्वारा साल 1918 में मनिहार नदी पर बांध का निर्माण कर माधव तालाब बनाया गया था. यह इस पार्क का सबसे बड़ा जल क्षेत्र है. लाया जाएगा बाघ का जोड़ा माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व बनने के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन के मामले में काफी संभावनाएं बढ़ जाएंगी. इससे शिवपुरी क्षेत्र को विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी. उधर माधव टाइगर रिजर्व में बाधों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. यहां जल्द ही एक बाघ का जोड़ा दिया जाएगा. इसमें एक नर और मादा होगा. अभी माधव टाइगर रिजर्व में तीन टाइगर और दो शावक हैं. वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, ''माधव टाइगर रिजर्व प्राकृतिक रूप से काफी संपन्न क्षेत्र हैं और यह क्षेत्र टाइगर के लिए प्राकृतिक आवास रहा है. इसलिए आने वाले समय में यहां टाइगर की संख्या में अच्छी बढ़ोत्तरी होगी.'' कैसा है ये टाइगर रिजर्व? एनटीसीए की तकनीकी समिति ने प्रस्ताव दिया है कि बाघ अभयारण्य का कोर एरिया 375 वर्ग किलोमीटर, बफर एरिया 1276 वर्ग किलोमीटर तथा कुल क्षेत्रफल 1751 वर्ग किलोमीटर होगा. समिति ने राष्ट्रीय उद्यान में एक नर और एक मादा बाघ छोड़ने की भी स्वीकृति दी है. मुख्यमंत्री डॉ यादव के निर्देश पर माधव राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित करने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को प्रस्ताव भेजा गया था.   recent visitors 50

डोनाल्ड ट्रंप का गाजा का पुनःनिर्माण में निकल जाएंगा पसीना! सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च

गाजा  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पर कब्जा करने और उसे जन्नत बनाने की बात कही है। ट्रंप के बयान ने दुनिया को चौंका दिया है। अरब देशों के साथ साथ अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी उनके प्लान की निंदा की है। डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा को 'मध्य पूर्व का रिवेरा' बनाने और 'गाजा को फिर से महाने बनाने' का अपना प्लान पेश किया है। जिसके तहत गाजा में रहने वाले करीब 23 लाख लोगों को उन्होंने मिस्र, जॉर्डन और अरब देशों में भेजने की पेशकश की है। हालांकि, उनके प्लान को अरब देशों ने फौरन ही खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर विवाद जरूर हो रहे हैं, लेकिन एक सवाल भी उठ रहे हैं कि इजरायली बमबारी में ध्वस्त हो चुके गाजा का फिर से निर्माण कैसे होगा? डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर शक करने वाले लोगों का कहना है, कि असल में ये गाजा में रहने वाले लोगों के सफाए के लिए बनाया गया ये एक फॉर्मूला है। लोगों का कहना है कि ट्रंप का प्लान असल में गाजा पर कब्जा करना है। लेकिन सवाल ये है, कि गाजा को जन्नत बनाने में कितने साल लगेंगे? और गाजा स्वर्ग की तरह दिखे, ऐसा होने में जो खर्च आएगा, उसे कौन वहन करेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए जो प्लान किया है, उसे पूरा करने में कई सालों का वक्त लगेगा और अरबों डॉलर का खर्च आएगा। गाजा को फिर से बनाने में कितने साल लगेंगे? गाजा में जिस तरह की बर्बादी फैली है, उसे देखते हुए एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि पुननिर्माण में कम से कम 20 सालों से ज्यादा का वक्त लगेगा। गाजा को साफ करने में अमेरिका को लाखों टन मलबा पट्टी से बाहर निकालना होगा। मलबे को निकालने में ही कई सालों का वक्त लग जाएगा। सवाल ये भी हैं, कि आखिर इतना मलबा कहां रखा जाएगा? ब्रिटिश सेना के कर्नल रिचर्ड केम्प ने द सन की रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के प्लान का समर्थन किया है। उन्होंने इसे एक तार्किक योजना बताया है। उन्होंने कहा, कि "गाजा के पुनर्निर्माण में कम से कम एक दशक का समय लगेगा।" केम्प ने द सन की रिपोर्ट में कहा है, कि "गाजा को एक ऐसी जगह में बदलने के लिए, जहां लोग फिर से रह सकें, इसमें शायद कम से कम एक दशक लगने वाला है।" उन्होंने कहा, कि "इसमें शायद अरबों डॉलर खर्च होंगे, लेकिन मध्य पूर्व में कई अरब देश हैं, और वो इस प्रोजेक्ट में मदद दे सकते हैं।" हालांकि, बुधवार को व्हाइट हाउस ने कहा है, कि ट्रंप ने फिलिस्तीनी एन्क्लेव के अपने प्रस्ताव के तहत गाजा पट्टी में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने संवाददाताओं से कहा, कि ट्रंप का मानना है कि "क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए" गाजा के पुनर्निर्माण में संयुक्त राज्य अमेरिका को शामिल होना चाहिए। गाजा पट्टी में कितनी बर्बादी फैली है? यूनाइटेड नेशंस ने अनुमान लगाा है, कि गाजा में करीब 50 मिलियन टन मलबा फैला है, जिसे साफ करने में 21 सालों का वक्त लग सकता है। अनुमान में कहा गया है, कि गाजा पट्टी से सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो सकते हैं। केम्प ने कहा कि, "मेरा मानना है, कि गाजा में लोगों को ट्रंप के प्लान के मुताबिक अलग रखा जाए, सुरंगों को साफ किया जाए, हथियारों को हटाया जाए और फिर एक नये गाजा का निर्माण किया जाए। हवाई अड्डे का निर्माण हो, बंदरगाह का निर्माण हो और ये सभी के लिए बेहतर होगा।" लेकिन असल सवाल ये है, कि क्या गाजा से लोगों को निकालना संभव है? डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया है, कि गाजा के लोगों को निकालकर अस्थाई तौर पर मिस्र और जॉर्डर में बसाया जाए, जिसे दोनों देशों ने खारिज कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, कि "गाजा के लोगों ने मौत और विनाश के अलावा कुछ नहीं देखा है और अगर नये गाजा का निर्माण होगा, तो कौन होगा जो वापस नहीं जाना चाहेगा।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, गाजा "मध्य पूर्व का रिवेरा" होगा। लेकिन, सवाल ये है कि क्या ऐसा संभव है? recent visitors 63

60 साल बाद त्रिग्रही योग में मनेगी महाशिवरात्रि, दूल्हा बनेंगे भोलेनाथ, चार प्रहर की साधना देगी धन, यश, प्रतिष्ठा व समृद्धि

ज्योतिष शास्त्र व पंचांग की गणना के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि का पर्वकाल त्रिग्रही युति योग में मनाया जाएगा। इस योग में की गई शिव साधना मनोवांछित फल प्रदान करने वाली मानी गई है। शिव साधना की दृष्टि से ऐसा शुभ संयोग वर्ष 2025 से पहले सन 1965 में बना था। मकर राशि में तीन ग्रहों की युति रहेगी     ज्योतिषाचार्य  ने बताया कि महाशिवरात्रि 26 फरवरी को बुधवार के दिन श्रवण उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग, वणिज उपरांत शकुनीकरण तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है।     जब भी कोई महापर्व आता है, तो ग्रह योग, नक्षत्र व संयोग देखा जाता है, क्योंकि ग्रहों की साक्षी एवं परिभ्रमण का प्रभाव जीवन पर पड़ता है। ग्रहों के परिभ्रमण का लाभ लेते हुए साधना की दृष्टि से जीवन को कैसे सुखमय बनाया जाए ज्योतिष शास्त्र इसका मार्ग बताते हैं।     महाशिवरात्रि पर मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में सूर्य, बुध व शनि की युति कुंभ राशि में रहेगी। सूर्य व शनि पिता पुत्र हैं और सूर्य शनि की कक्षा अर्थात शनि की राशि कुंभ में रहेंगे।     इस दृष्टि से यह विशिष्ट संयोग भी है, यह योग लगभग एक शताब्दी में एक बार बनता है। इस योग में की गई साधना परम पद व आध्यात्मिक धार्मिक उन्नति प्रदान करती है। इस दृष्टि से इन योग संयोग में विशिष्ट साधना अवश्य करनी चाहिए। -महाशिवरात्रि का पूजन रात्रि में करने का है विशेष प्रावधान  इस वर्ष आठ मार्च की महाशिवरात्रि बेहद खास है। ज्योतिषविदों के अनुसार 60 साल के बाद शिव योग एवं सवार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रहों की शुभ युति के त्रिग्रही योग में मनाई जाएगी। इसमें सिद्धि योग एवं श्रवण नक्षत्र का भी संयोग बना है। कुंभ राशि में सूर्य, शनि व शुक्र साथ मिलकर त्रिग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं। ग्रहों की युति के साथ ही शिवयोग, प्रदोष व्रत एवं सवार्थ सिद्धि योग के दुर्लभ बना यह संयोग लगभग तीन सौ साल के बाद आया है। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ऐसा योग बेहद दुर्लभ और अकल्पनीय सुखद संयोग लेकर आता है। इस दिन की भगवान शिव के व्रत एवं अर्चन की तुलना सामान्य दिनों में होने वाले पूजन कार्यों से नहीं की जा सकती है। मेष, वृषभ, तुला, मकर एवं कुंभ राशि के लिए बेहद खास रहेगा यह संयोग। शनिदेव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान है। इसके साथ ही सूर्यदेव अपने पुत्र एवं आदर्श शत्रु शनि की राशि कुंभ में चन्द्रमा के साथ विराजित रहेंगे। ग्रहों की ये स्थिति त्रिग्रही योग का निर्माण कर रही है। जो कि फलदायी है। रात्रि में ही क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि ज्योतिषी महेश गुरु के अनुसार ईषान संहिता में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि रात्रि के द्वितीय पहर में शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था। शिव यानि की रात्रि के प्रतीक हैं, और यह भूतेश्वर या भूतनाथ कहे जाते हैं। भूत आदि रात्रि में ही सक्रिय होते हैं। इस दिन में रात्रि में ही इनका प्रादुर्भाव होने की वजह से ही महाशिवरात्रि मनाई जाती है। शिवरात्रि पर चार प्रहर में यानि की चार बार पूजन का विधान आता है। पहले प्रहर में दूध से शिव के ईशान स्वरूप का, दूसरे प्रहर में दही से अघोर स्वरूप का, तीसरे प्रहर में घी से वामदेव रूप का और चौथे प्रहर में शहद से सद्योजात स्वरूप का अभिषेक कर पूजन करना चाहिए। यदि कन्याएं चार बार पूजन न कर सकें, तो पहले प्रहर में एक बार तो पूजन अवश्य ही करें। महाशिवरात्रि की रात महासिद्धिदायिनी होती है। इस रात्रि को निशा रात्रि भी कहते हैं। यानि की चारों ओर घोर अंधकार की स्थिति में शिवलिंग का उद्भव अंधकार में प्रकाश का भी प्रतीक माना जाता है। पूजा पद्धति सात्विक व शाक्त अलग-अलग विधियों से संपन्न कराई जाती है। इसी दिन शिव एवं पार्वती का पाणीग्रहण भी हुआ था। इस वजह से भी पूरी रात्रि को उत्सव की तरह मनाया जाता है। रात्रि पूजन का है विशेष विधान महाशिवरात्रि पर ऐसे की जा सकती है पूजा पूरी तरह से शुद्ध होने के बाद घर के मंदिर में या शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा की जा सकती र्है। पहले शिवलिंग में चंदन का लेप करने के साथ ही पंचामृत से स्नान कराना चाहिए। इसमें गन्ने के रस, कच्चे दूध, या शुद्ध घी से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इसके पश्चात महादेव को बेलपत्र, धतूरा, जायफल, कमल गट्टे, फल, फूल, मिठाई, मीठा पान, इत्र आदि अर्पित करना चाहिए। अर्चन सदैव पूर्वाभिमुखी या फिर उत्तरामुखी करनी चाहिए। इसके पश्चात शिव पंचाक्षर मंत्र आदि के साथ शिव ताण्डव स्तोत्र आदि का पाठ किया जा सकता है। व्रत रहने वाले को पूरा दिन निराहार रहना चाहिए। रोगी या अशक्त फलाहार कर सकते हैं। व्रत रखने वाले को फल, फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से रात के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए साथ ही भोग भी लगाना चाहिए। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक भी किया जाता है। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती और परिक्रमा करने का विधान है। इसमें पूजन तो चारों पहर में होता है, लेकिन मध्यरात्रि की पूजा को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।   recent visitors 47

सौरभ ने राजदारों के नाम पर पूछताछ में साध ली चुप्पी, 54 किलो सोना, क्विंटलों चांदी के बारे में नहीं मिली जानकारी, अब नार्को टेस्ट

भोपाल  54 किलो सोना, ढाई क्विंटल चांदी और करोड़ों रुपए की काली कमाई का 'मालिक' परिवहन विभाग का पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा लोकायुक्त के लिए समस्या बना हुआ है। वह मुंह खोलने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब तक की पूछताछ में लोकायुक्त पुलिस उससे कुछ खास जानकारियां नहीं निकाल पाई है। अब सूत्रों ने नवभारतटाइम्सडॉट.कॉम से दावा किया है कि लोकायुक्त पुलिस कोर्ट में आवेदन देकर सौरभ का नार्को टेस्ट करवाने का सोच रही है। दरअसल, सौरभ शर्मा से सात दिन की पूछताछ में लोकायुक्त पुलिस कोई भी जानकारी निकालने में सफल नहीं हो पाई। इसलिए विधि विशेषज्ञों की सलाह के बाद नार्को टेस्ट कराया जा सकता है। कई नेताओं और अधिकारियों की खुल सकती है पोल आरोप हैं कि सौरभ के पास मिला माल कई नेताओं और अधिकारियों का है। ऐसे में सौरभ जानबूझकर मुंह नहीं खोल रहा है। सौरभ ही नहीं, उसके पार्टनर चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल भी मुंह नहीं खोल रहे हैं। अब लोकायुक्त पुलिस के सामने प्रश्न यह है कि कार में मिला 54 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नकद किसके हैं? यह सोना कहां से आया? खरीदी के लिए भुगतान किसने और किस माध्यम से किया? 18 दिसंबर को मारा था सौरभ के घर छापा बता दें कि लोकायुक्त पुलिस ने 18 दिसंबर को सौरभ और चेतन सिंह गौर के आवास पर छापा मारा था। इसके बाद देर रात आयकर विभाग को इनोवा कार में करीब 57 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नकद मिले थे। इसके 40 दिन बाद कोर्ट में सरेंडर के लिए आते समय सौरभ को पुलिस ने 28 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। उसके साथी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 17 फरवरी तक हिरासत उधर, तीनों आरोपितों की पुलिस रिमांड अवधि पूरी होने पर लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम राम प्रताप मिश्र की विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया। यहां से तीनों को 17 फरवरी तक की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सौरभ के साथ दो और साथी गिरफ्तार लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ और चेतन सिंह गौर के आवास पर 18 दिसंबर को छापा मारा था। इसके 40 दिन बाद कोर्ट में सरेंडर के लिए आते समय सौरभ को पुलिस ने 28 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। उसी दिन सौरभ के करीबी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जीनकारी नहीं उगलवा सकी पुलिस पुलिस हिरासत में लेकर तीनों से एक सप्ताह तक पूछताछ की पर सौरभ की संपत्तियों के बारे में पुलिस खास जानकारी नहीं उगलवा सकी। मंगलवार को सौरभ सहित तीनों आरोपितों को जेल भेजने के न्यायालय के आदेश के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी आरोपितों से पूछताछ के लिए कोर्ट में आवेदन लगाया। कोर्ट ने दी पूछताछ की इजाजत कोर्ट ने ईडी को जेल में आरोपितों से पूछताछ की अनुमति दे दी है। बता दें कि लोकायुक्त पुलिस में आय से अधिक संपत्ति के मामले में सौरभ सहित तीनों आरोपितों के विरुद्ध दर्ज एफआइआर के आधार पर ईडी ने प्रकरण कायम किया था। इसके बाद ईडी ने भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और पुणे में सौरभ के रिश्तेदार व करीबियों के यहां दो अलग-अलग दिन छापा मारकर संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए थे। सौरभ की मां उमा शर्मा, पत्नी दिव्या तिवारी और चेतन सिंह गौर से जांच एजेंसी पहले ही पूछताछ कर चुकी है।   recent visitors 66