समाज के विकास में हर संभव सहयोग देने और सहभागिता बढ़ाने की दी सीख: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रीय सेवा योजना व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र प्रेम की सीख देने की जीवंत इकाई है। इसके नाम से ही सेवा का भाव उत्पन्न होता है। यह संगठन विद्यार्थियों के गुणों का संवर्धन कर उन्हें समुदाय विकास की मूल भावना से ओत-प्रोत कर देश के विकास में सहयोग देता है। यह बेहद प्रशंसनीय है कि आज हमारे विद्यार्थी एनएसएस को एक विषय के रूप में पढ़ रहे हैं। युवा ही देश का भविष्य हैं और इनमें सेवा भावना के विकास से देश का विकास और अधिक तीव्र गति से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में गणतंत्र दिवस परेड-2025 नई दिल्ली में मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एनएसएस के समर्पण और सेवा भावना की सराहना करते हुए परेड में शामिल हुए विद्यार्थियों और उनके समन्वयकों को मैडल देकर सम्मानित किया और शुभाशीष भी दिया। इन एनएसएस विद्यार्थियों ने कर्तव्यपथ, नई दिल्ली में 26 जनवरी 2025 को हुई गणतंत्र दिवस परेड में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश का नाम रौशन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं में समाजसेवा, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और साहचर्य की भावना विकसित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों ने इस परेड में बेहतरीन प्रदर्शन कर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को आगे भी समाजसेवा में हरसंभव सहयोग देने और राष्ट्रीय जागरूकता से जुड़े कार्यों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। युवा ऊर्जा को सही दिशा देकर हम सभी युवाओं की प्रतिभाओं को तराशकर प्रदेश के विकास में उनका सहयोग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा देश और प्रदेश के विकास की धुरी हैं। सभी को अपना कॅरियर बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। देश के विकास के लिए युवाओं को राजनीति में भी आना चाहिए। राजनैतिक विकास से ही देश के सामाजिक विकास को बल मिलेगा। युवा सिर्फ रोजगार के पीछे न रहें। वे रोजगार मांगने वाले नहीं, वरन् रोजगार देने वाले बनें। हमारा राष्ट्र वसुधैव कुटुम्बकम की वैश्विक भावना से दुनिया में अच्छाईयां बांटने के लिए जाना जाता है। अच्छाईयां बांटना हमारी संस्कृति है, हमारी जीवनशैली है। इसलिए युवा अपने जीवन के बाकी गुणों के विकास के साथ-साथ सेवा भावना को भी अपनाएं और जीवन में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एनएसएस द्वारा स्वच्छता, शुचिता, रक्तदान, जनजागरूकता कार्यक्रमों में सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन हमें सह अस्तित्व भाव से जीवन पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। एनएसएस से जुड़े हैं 1.60 लाख से अधिक विद्यार्थी अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग श्री अनुपम राजन ने कहा कि एनएसएस शिक्षा द्वारा समाज सेवा और समाज सेवा द्वारा शिक्षा की मूल भावना से कार्य करने वाला राष्ट्रीय संगठन है। प्रदेश के सभी महाविद्यालयों के करीब एक लाख 60 हजार से अधिक विद्यार्थी इस संगठन से जुड़े हैं। जिन महाविद्यालयों में एनएसएस नहीं है, वहां भी एनएसएस यूनिट तैयार करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस परेड-2025 में शामिल हुए मध्यप्रदेश के एनएसएस दल के सभी स्वयंसेवकों को बधाई दी और कहा कि राष्ट्र सेवा से जुड़कर सभी विद्यार्थी एक जिम्मेदार नागरिक बनें। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का एनएसएस बैच लगाकर स्वागत किया तथा प्रतीक चिन्ह देकर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री ओमप्रकाश सखलेचा, उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक और भोपाल के विभिन्न महाविद्यालयों के एनएसएस स्वयंसेवक भी उपस्थित थे। आभार आयुक्त उच्च शिक्षा श्री निशांत वरवड़े ने माना। मध्यप्रदेश एनएसएस दल ने दिखाया अनुशासन और सेवा भावना मध्यप्रदेश से चयनित एनएसएस विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस परेड में अनुशासन और समर्पण का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया। मध्यप्रदेश का दल पूरे देश से चुने गए एनएसएस के विद्यार्थियों के बीच अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहा। कार्यक्रम में सम्मानित विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से चर्चा करते हुए अपने अनुभव साझा किए और इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने पर हर्ष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एनएसएस के विद्यार्थियों के साथ समूह चित्र खिंचवाकर उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामना दी।   recent visitors 41

सुप्रीम कोर्ट ने ‘डेड बॉडी के साथ यौन संबंध बनाना ‘बलात्कार’ अपराध की दलील खारिज की

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि दंड कानून नेक्रोफीलिया को अपराध नहीं मानते, इसलिए वह हाईकोर्ट के आंशिक बरी करने के आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, जिसमें आरोपी ने मृतक की हत्या करने के बाद उसके शव के साथ यौन संबंध बनाए थे। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी को मृत शरीर के साथ यौन संबंध बनाने के लिए बलात्कार के आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन हत्या के अपराध के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी। यहां राज्य सरकार ने वर्तमान एसएलपी दायर की।  हाई कोर्ट ने शख्स को रेप के आरोप से बरी कर दिया था, लेकिन हत्या की सजा कायम रही। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) में नेक्रोफिलिया (Necrophilia) यानी शव के साथ कामुकता को अपराध नहीं माना गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में कर्नाटक सरकार की ओर से अडिशनल एडवोकेट जनरल अमन पंवार ने तर्क दिया कि IPC की धारा 375(c) में 'शरीर' शब्द को मृत शरीर भी शामिल माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि रेप की परिभाषा के तहत प्रावधान में कहा गया है कि यदि कोई महिला सहमति नहीं दे सकती है तो इसे बलात्कार माना जाएगा। इसी तर्क के आधार पर मृत शरीर भी सहमति नहीं दे सकता, इसलिए यह अपराध बलात्कार की श्रेणी में आना चाहिए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि नेक्रोफिलिया भारतीय दंड संहिता के तहत कोई अपराध नहीं है, इसलिए वह हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने क्या कहा था? कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मृत शरीर के साथ यौन संबंध को बलात्कार नहीं माना जा सकता, क्योंकि IPC की धारा 375 और 377 केवल जीवित मनुष्यों पर लागू होती है। धारा 375 और 377 का गहराई से अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि मृत शरीर को 'व्यक्ति' या 'मानव' नहीं माना जा सकता। इसलिए, इन धाराओं के तहत कोई अपराध नहीं बनता और आरोपी को IPC की धारा 376 के तहत सजा नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि नेक्रोफिलिया एक गंभीर समस्या है और संसद को इसे अपराध घोषित करने के लिए कानून बनाना चाहिए। एक मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी दिसंबर में कहा था कि किसी मृत महिला या बच्ची के साथ यौन अपराध किया जाता है तो उसे IPC की धारा 375 (बलात्कार) या POCSO अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। कानून में बदलाव की दरकार अस्पतालों और मुर्दाघरों में युवतियों के शवों के साथ यौन संबंध की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन भारत में ऐसे मामलों के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। नेक्रोफिलिया एक मनो-यौन विकार (psychosexual disorder) है। यह सही समय है कि केंद्र सरकार मृत व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए IPC की धारा 377 में संशोधन करे और नेक्रोफिलिया को अपराध घोषित करे, जैसा कि यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में किया गया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता में संशोधन की आवश्यकता को उजागर करता है ताकि मृत व्यक्ति की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की जा सके। recent visitors 72

भोपाल में बनेगा आचार्यश्री विद्यासागर स्माकर और शोध संस्थान यह घोषणा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्मृति दिवस कार्यक्रम में की

भोपाल भोपाल में जैन संत आचार्यश्री विद्यासागर जी की स्मृति में एक स्मारक स्थल का निर्माण किया जाएगा, यह घोषणा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विधानसभा में आयोजित स्मृति दिवस कार्यक्रम में की। मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज और अन्य संसघ जैन संतों के सान्निध्य में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का प्रथम स्मृति दिवस मनाया गया। सीएम बोले- आचार्यश्री साक्षात देवता थे अपने संबोधन में सीएम डॉ. यादव ने आचार्य श्री का पुण्य स्मरण करते कहा कि इसी विधानसभा में उनके अलौकिक स्वरुप के दर्शन किये तो ऐसा लगा था कि साक्षात देवता हमारे बीच पधारे थे। ये कहना गलत होगा कि आचार्यश्री हमारे बीच नहीं हैं, वे हमारे ही बीच हैं बस उन्हें स्मरण करने की देर है। आचार्यश्री ने सच्चे अर्थों में मानव सेवा के साथ प्रकृति सेवा की। उनके सामने तप, संयम, त्याग, सेवा ये शब्द छोटे पड़ जाते हैं। आचार्यश्री भले ही कर्नाटक में जन्मे लेकिन आज हर कोई उन्हें अपना मानता है। आचार्यश्री ने गौसंरक्षण के लिए चलाया था अभियान सीएम डॉ. यादव ने कहा कि आचार्यश्री ने गौपालन, गौसंरक्षण और गौसंवर्धन पर भी जोर दिया। उन्होंने गौमांस निर्यात का विरोध करने कई वर्षों पर पहले अभियान शुरू कर दिया था। आज जैन समाज की ओर से पूरे देश में कई गौशालाएं संचासलित की जा रही है। क्योंकि गोमाता के माध्यम से पूरी प्रकृति बदल सकती है। गोमाता के भीतर वह भाव है जो अपने बच्चों का ख्याल रखती है और मनुष्य के बच्चों का भी ख्याल रखती है।   भोपाल में बनेगा स्मारक स्थल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन के अंत में एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री की स्मृति में भोपाल में भी एक स्मारक स्थल बनाया जाएगा जहां उनसे जुड़ी स्मृतियां संजोई जाएंगी। स्थान चयन बाद में किया जाएगा। सीएम डॉ. यादव की इस घोषणा का जैन समाज के हजारों लोगों ने काफी देर तक तालियां बजाकर जोरदार स्वागत किया।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुनिश्री के किये पादप्रक्षालन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कार्यक्रम की शुरुआत में मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज के पादप्रक्षालन (चरण पखारकर) उनका आशीर्वाद लिया। साथ ही आचार्यश्री के जीवन पर आधारित 25 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इस कार्यक्रम में भोपाल सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, भोपाल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष मनोज जैन बांगा समेत कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे। संयम, ज्ञान, सेवा, समर्पण, न्याय का आदर्श हैं विद्यासागर जी महाराज जिस तरह दृश्य बदलते हैं, उसी तरह महा पुरुष शरीर बदलते हैं। विद्यासागर जी महाराज ने अपने जीवन आदर्शों से वह आदर्श प्रस्तुत किए, जिससे वे जीते जी देवता की तरह पूजे गए, पूजे जाते रहेंगे। वे सिर्फ आंखों से ओझल हुए हैं, लेकिन वे, उनके आदर्श, उनके बताए गए सद्मार्ग हमेशा हमारे साथ रहने वाले हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गुरुवार को जैन मुनि विद्यासागर जी महाराज की पहली समाधि स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कहीं। उन्होंने कहा कि मुनि विद्यासागर जी महाराज ने अपने जीवनकाल में उन सभी आदर्शों और नियमों का पालन किया, जो एक सफल जीवन के लिए आवश्यक है। recent visitors 33

मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा बीते 10 साल के दौरान मोबाइल फोन के कॉल दरों में 94 फीसदी तक की गिरावट आई

नई दिल्ली  संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार कहा कि दूरंसचार कंपनियों ने 5 जी सेवाओं के लिए 4.50 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है और इस निवेश की भरपाई के लिए दूरसंचार टैरिफ में 10 प्रतिशत की वृद्धि किये जाने के बावजूद भारत पूरी दुनिया में अब भी सबसे किफायती टेलीकॉम सेवाएं दे रहा है। श्री सिंधिया ने प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि वर्ष 2014 में एक मिनट कॉल की कीमत औसतन 50 पैसे थी, जबकि 2025 में यह 94 प्रतिशत कम होकर तीन पैसे प्रति मिनट है। इसी तरह से वर्ष 2014 में एक जीबी डेटा की कीमत 270 रुपये थी, जबकि 2025 में यह 93 प्रतिशत कम होेकर 9.70 रुपये प्रति जीबी है। ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि साल 2014 से मोबाइल फोन कॉल दरों में 94 फीसदी की कमी आई है। सिंधिया ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा कि देश में पहले 90 करोड़ मोबाइल फोन उपभोक्ता थे जो अब बढ़कर 116 करोड़ हो गए हैं। इंटरनेट की पहुंच बढ़ी और दर घटी उन्होंने कहा, ‘‘…इंटरनेट पहुंच की बात करें तो 2014 में 25 करोड़ उपभोक्ता थे और आज यह संख्या 97 करोड़ है।’’ मंत्री ने कहा कि जब उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ती है तो आवश्यक है कि शुल्क दरों की निगरानी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साल 2014 में जहां एक मिनट की कॉल की दर 50 पैसे थी, वहीं आज यह घट कर तीन पैसे रह गई है। इस प्रकार दर में 94 फीसदी की गिरावट आई है। सिंधिया ने कहा कि कि 2014 में डेटा यानी इंटरनेट 270 रुपये प्रति जीबी थी जो अब घटकर 9.70 रुपये प्रति जीबी हो गई है जो ‘टैरिफ’ में 93 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। दुनिया में सबसे किफायती देश उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में इंटरनेट और कॉल दरों के मामले में सबसे किफायती देश है। उन्होंने कहा कि ‘टैरिफ’ में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, ऐसा देश में 5जी सेवा के लिए किए गए निवेश के कारण हुआ है। उन्होंने सदन को बताया कि काफी तेज गति से 5जी सेवा शुरू की गयी है और इसमें करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। शुल्क वृद्धि सही उन्होंने शुल्क दरों में वृद्धि को सही ठहराते हुए कहा कि निवेश पर ‘रिटर्न’ मिलना चाहिए। श्री सुरजेवाला ने कहा था कि दूरसंचार कंपनियों ने टैरिफ में वृद्धि करके 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला है। श्री सिंधिया ने कहा कि पिछले 10 वर्षाें में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचार क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। टेलीकॉम कंपनियां रिकार्ड 22 महीने में देश के 98 प्रतिशत जिलों और 82 प्रतिशत आबादी को 5 जी के दायरे में लायी है। इसके लिए कंपनियों ने 4.50 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। मंत्री ने कहा कि कंपनियों को अपने निवेश पर रिटर्न भी चाहिए होता है। इसके लिए टैरिफ में 10 प्रतिशत की बढोतरी की गयी है। इससे उपभोक्ताओं पर बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 2590 ऐसे गांवों की पहचान की गयी है जहां दूरसंचार सेवाएं पहुंचायी जा रही है। इसके लिए 15 राज्यों में 1716 टावर लगाये जा रहे हैं। 901 गांवों में टावर लगाये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में भी कुछ क्षेत्रों में टावर लगाये जा रहे हैं लेकिन राज्य सरकार का पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है। राज्य सरकार टावर लगाने के लिए भूमि भी उपलब्ध कराने में देरी कर रही है। इसके साथ ही दूरस्थ और पहाड़ी एवं जंगली क्षेत्रों में टावर लगाना कठिन होता है। recent visitors 53

एमपी में निजी स्कूलों के लिए बदले फीस के नियम, फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी

 भोपाल  मध्यप्रदेश में निजी स्कूलों में बस किराया और ट्यूशन फीस को लेकर बड़ा अपडेट है। अब निजी स्कूल अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे और इसे भी वार्षिक का ही भाग माना जाएगा। मध्यप्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुहर लगा दी है। नए नियम के तहक बिना अनुमति अब 10% से अधिक फीस नहीं बढ़ेगी। ₹25000 से ज्यादा सालाना फीस लेने वाले स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी। इसी फीस में बस का शुल्क भी शामिल होगा। नई कानून पर राज्यपाल ने मुहर लगाई है। मध्यप्रदेश के 18000 स्कूल इसके दायरे में आएंगे। इस नए नियम से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। फीस नियंत्रण पर अभिभावकों को राहत यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न सिर्फ अभिभावकों के आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि शिक्षा में समानता और सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करेगा। सरकार के इस प्रयास से शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है, जो छात्रों और अभिभावकों के हित में साबित हो सकते हैं। यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश में 16 हजार स्कूल ऐसे आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में करीब 34,652 निजी स्कूल हैं। इनमें से लगभग 16 हजार ऐसे स्कूल हैं, जिनकी किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपये या इससे कम है। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2017 के तहत वर्ष 2020 में नियम बनाए गए हैं। इसके अनुसार सरकार को यह अधिकार दिया गया कि वह निजी स्कूलों की फीस और अन्य विषयों पर निर्णय लेकर फीस विनियमन कर सकेगी। नए प्रवाधानों में क्या नए प्रावधानों के अनुसार 10 प्रतिशत वार्षिक फीस बिना अनुमति के बढ़ाई जा सकती है लेकिन इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला समिति की अनुमति लेना जरूरी होगा। स्कूल 25 हजार रुपये तक फीस लेने वाले स्कूलों को शिक्षकों के वेतन सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन में परेशानी होती है। आपको बता दें कि यदि दस प्रतिशत वृद्धि करते हैं तो अभिभावकों पर अधिक भार नहीं पड़ता है, इसलिए नई उपधारा प्रस्तावित की गई है कि 25 हजार रुपये वार्षिक फीस लेने वाले स्कूल अधिनियम के दायरे से बाहर रहेंगे। साथ ही परिवहन फीस स्कूलों की वार्षिक फीस का भाग होगा। अभी स्कूल इसे वार्षिक फीस से अलग लेते हैं और इसमें वृद्धि भी अधिक होती है। इससे वार्षिक फीस नियंत्रित रहेगी। समिति के अध्यक्ष होंगे शिक्षा मंत्री नए नियमों के अनुसार फीस बढ़ाने पर आपत्ति की अपील सुनने मंत्री की अध्यक्षता में समिति अधिनियम में यह संशोधन भी प्रस्तावित किया गया है कि वार्षिक फीस में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि के आदेश के विरुद्ध अपील सुनने के लिए राज्य स्तरीय समिति होगी। इसके अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री रहेंगे। समिति को यह अधिकार रहेगा कि वह विभागीय समिति द्वारा किसी स्कूल पर लगाए गए अर्थदंड को घटा या बढ़ा सकेगी। अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे प्राइवेट स्कूल मध्यप्रदेश सरकार ने  मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 में संशोधन के लिए प्रस्तुत विधेयक पेश किया। इसमें ये प्रावधान किया गया है कि प्राइवेट स्कूलों के द्वारा बस फीस अलग से वसूली नहीं जा सकेगी और बस फीस को स्कूल की वार्षिक फीस का ही हिस्सा माना जाएगा। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास अनुमति के लिए भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलते ही प्रभावी हो जाएगा। recent visitors 53

तप, त्याग, सेवा, संयम, समर्पण जैसे शब्द विद्यासागर जी के व्यक्तित्व के सम्मुख छोटे लगते हैं – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की स्मृति में भोपाल में स्मृति स्थल विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर विधानसभा परिसर में आयोजित गुरु गुणानुवाद सभा में गुरु वंदना कर अतिशय पुण्य अर्जित करने पधारे समर्पित भक्तों का राज्य शासन की ओर से अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी ने अपने जीवन में सभी आवश्यक नियमों का पालन किया। संत परंपरा का अनुसरण करते हुए उनके प्रकृति के साथ संबंध, जीवन शैली, मानव सेवा और समाज को मार्गदर्शन के माध्यम से वे अपने जीवन काल में ही देवता के रूप में स्वीकारे जाने लगे। व्यक्तिगत जीवन में तप, संयम, त्याग, सेवा, समर्पण जैसे शब्द उनके व्यक्तित्व के सम्मुख छोटे पड़ जाते हैं। कार्यक्रम में सांसद भोपाल आलोक शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, विधानसभा के प्रमुख सचिव ए.पी. सिंह, जनप्रतिनिधि राहुल कोठारी तथा जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री का मुकुट और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट द्वारा कार्यक्रम में आयोजनकर्ताओं ने मुकुट तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिवादन किया। उनको शॉल भी सम्मानपूर्वक भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत शिरोमणि 108 विद्यासागर जी महाराज जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित किया तथा मुनि108 प्रमाण सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के जीवन और कृतित्व पर आधारित 25 पुस्तकों का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें नेमावर में संत-के सानिध्य का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। साक्षात देवता के दर्शन के समान प्रतीत होता संत-का अलौकिक व्यक्तित्व जीवन को धन्य करने वाला था। जैन और सनातन दर्शन में आत्मा की भूमिका आवागमन की बताई गई है। यह माना जाता है कि वस्त्र बदलने के समान ही पवित्र आत्मा शरीर बदलती है। इस दृष्टि से यह मानना कि महाराज जी हमारे बीच नहीं है, व्यर्थ है। वास्तविकता यह है कि उन्हें स्मरण करने और मन की आंखों से देखने के क्षणिक प्रयास मात्र से ही आचार्य विद्यासागर जी के आस-पास होने की सहज अनुभूति होती है। उनके व्यवहार, स्वरूप और विचार के प्रभाव के परिणाम स्वरूप सभी व्यक्ति उन्हें अपना मानते थे। प्रदेशवासियों में संत-के प्रति इतने अपनत्व और आदर का भाव था कि यह किसी को अनुभूति ही नहीं होती थी कि वे कर्नाटक से हैं। संत-ने जीवन के कई क्षेत्रों में समाज को दिशा दी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी ने अपनी इच्छा शक्ति से जीवन के कई क्षेत्रों में समाज को दिशा दी। स्वरोजगार के क्षेत्र में जेल से लेकर समाज में महिलाओं को रोजगार देने का मार्ग प्रशस्त किया। गौ-माता की भी उन्होंने चिंता की तथा गौ-माता के माध्यम से लोगों के जीवन और प्रकृति में बदलाव के लिए गतिविधियों को प्रोत्साहित किया। इसी प्रकार किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में की गई उनकी पहल अनुकरणीय है। आचार्यने अपने विचार, भाव और कर्म से समाज को प्रकृति व परमात्मा के समान पुष्पित-पल्लवित, प्रेरित करने का कार्य किया। भारतीय जनतंत्र की सांस्कृतिक जड़ें, नई शिक्षा नीति का आधार है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत-का विचार था कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा सभी के लिए सुलभ होना चाहिए। वे भाषाओं की समृद्धि पर विशेष ध्यान देते थे, उनका विचार था कि भाषाओं की विविधता की जानकारी से भारत की आंतरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है और ज्ञान के लिए भाषाओं की समृद्धि आवश्यक है। गुणवत्ता शिक्षा के लिए प्रदेश में निरंतर प्रयास जारी हैं, इस क्रम में 55 एक्सीलेंस कॉलेज आरंभ किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार भारतीय जनतंत्र की सांस्कृतिक जड़ें, नई शिक्षा नीति का आधार है। इसी का परिणाम है की नई शिक्षा नीति में जैन दर्शन सहित भारतीय ज्ञान परंपरा के सभी विचारों को शामिल किया गया है। प्रदेश में खुले में मांस की दुकानों को भी बंद किया गया। तेज ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार संवदेनशील है। प्रदेश में शराब बंदी की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 17 धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू की गई। समाज में इस दिशा में सुधार की आवश्यकता है। देश और समाज के प्रमुख आयोजन तिथियों के आधार पर हों मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय संस्कृति में तिथियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय काल गणना देश के प्राचीन ज्ञान, कौशल के बल पर स्थानीय ऋतुओं और परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई, जिस पर सभी को गर्व है। देश और समाज के प्रमुख आयोजन तिथियों के आधार पर होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी महामुनिराज संत नहीं जीवित देवता हैं, उनका स्नेह, प्रेम, दुलार और आशीर्वाद सब पर बना रहे यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मृति दिवस पर पधारे मुनि-के विचारों का श्रवण भी किया।   recent visitors 33

पीएम मोदी राज्यसभा में चर्चा करते हुए कांग्रेस पर किया हमला, कहा- उनके लिए फैमिली फर्स्ट, हमारे लिए नेशन फर्स्ट

नई दिल्ली पीएम मोदी राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। मोदी ने राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अपने भाषण में देश की दिशा को लेकर विस्तार से बात की और हम सभी के लिए एक मार्गदर्शन दिया। राष्ट्रपति का अभिभाषण प्रेरणादायक और प्रभावी था। यह सबके लिए भविष्य की दिशा को स्पष्ट करता है। मोदी ने कहा कि इसे हर किसी ने अपनी समझ के हिसाब से अलग-अलग तरीके से समझा। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के बारे में भी कहा और इसे हमारा दायित्व बताया। कांग्रेस का मॉडल फैमिली फर्स्ट- पीएम मोदी कांग्रेस पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनसे इस बारे में कोई उम्मीद करना एक बड़ी गलती होगी, क्योंकि उनकी सोच इस दिशा में नहीं जाती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब एक परिवार के लिए समर्पित हो गई है, और उनके लिए ये संभव नहीं है। मोदी ने यह भी बताया कि कांग्रेस का मॉडल "फैमिली फर्स्ट" है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश की जनता ने हमें तीसरी बार लगातार सेवा करने का मौका दिया है, जो यह दिखाता है कि लोगों ने हमारे विकास मॉडल को समझा और उसे समर्थन दिया। उन्होंने अपने मॉडल को एक शब्द में "नेशन फर्स्ट" बताया और कहा कि इसी भावना के साथ हमारी सरकार ने नीतियों और कार्यों को लागू किया है। समाज में जाति का जहर फैलाने की कोशिश हो रही- पीएम मोदी राज्यसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, "आज समाज में जाति का जहर फैलाने की कोशिश की जा रही है… कई सालों से सभी दलों के ओबीसी सांसद ओबीसी पैनल को संवैधानिक दर्जा देने की मांग कर रहे थे। लेकिन उनकी मांग को खारिज कर दिया गया, क्योंकि यह उनकी (कांग्रेस) राजनीति के अनुकूल नहीं था। लेकिन हमने इस पैनल को संवैधानिक दर्जा दिया।" कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न के लायक नहीं समझा राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "यह सर्वविदित है कि कांग्रेस के मन में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति कितना गुस्सा और नफरत थी। उन्होंने कभी भी बाबा साहेब को भारत रत्न के लायक नहीं समझा। लेकिन आज मजबूरी में उन्हें 'जय भीम' का नारा लगाना पड़ रहा है।" recent visitors 40