मध्य प्रदेश में वन विभाग कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, कर्मचारियों को रिटायरमेंट या मृत्यु पर मिलेगी 10 लाख ग्रेच्युटी

भोपाल  मध्य प्रदेश के वन विभाग के कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। स्थायी और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को अब रिटायरमेंट या मृत्यु पर 10 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी मिलेगी। यह नया नियम गुरुवार, 6 फरवरी 2025 को वन मुख्यालय द्वारा जारी किया गया। यह 2010 के ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत लागू किया गया है। कर्मचारी मंच लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। इस फैसले से अन्य विभागों में भी इसी तरह के बदलाव की उम्मीद है। 14 साल बाद लागू हुआ नियम वन विभाग में काम करने वाले सभी स्थायी और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी इस नए नियम के दायरे में आएंगे। पहले, 1972 के ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत, उन्हें केवल 3.5 लाख रुपये ही मिलते थे। लेकिन अब, केंद्र सरकार के 2010 के नए अधिनियम के अनुसार, उन्हें अधिकतम 10 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी मिल सकेगी। मध्य प्रदेश में 14 साल बाद यह नियम लागू हुआ है। कर्मचारी मंच के पदाधिकारियों ने जताई खुशी मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के प्रांताध्यक्ष अशोक पांडे ने बताया कि वे लंबे समय से इस बदलाव की मांग कर रहे थे। वन विभाग में ग्रेच्युटी अधिनियम 1972 के तहत स्थाई कर्मियों एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति एवं मृत्यु होने पर अभी तक तीन लाख 50 हजार रुपये ग्रेजुएटी भुगतान की जा रही थी। यह नया नियम वन विभाग में लागू होने के बाद, अब उम्मीद है कि जल्द ही अन्य सरकारी विभागों में भी इसे लागू कर दिया जाएगा। अशोक पांडे ने आगे कहा, 'केंद्र सरकार ने ग्रेच्युटी अधिनियम 1972 के स्थान पर नए ग्रेजुएटी अधिनियम 2010 प्रतिस्थापित कर दिए हैं। जिसके तहत कर्मचारियों को ग्रेजुएटी साढे़ तीन लाख के स्थान पर अधिकतम 10 लाख रुपए भुगतान किए जाने की निर्देश है लेकिन मध्य प्रदेश में 14 साल बाद भी नए ग्रेजुएटी अधिनियम लागू नहीं किए गए हैं।' क्या होता है ग्रेच्युटी यह फैसला कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की बात है। इससे उन्हें अपने भविष्य के लिए बेहतर वित्तीय सुरक्षा मिलेगी। ग्रेच्युटी एक तरह का बोनस होता है जो कर्मचारी को लंबी सेवा के बाद मिलता है। यह रिटायरमेंट के बाद जीवन-यापन में मदद करता है या फिर परिवार के सदस्यों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है अगर कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है। केंद्र सरकार लाई थी 2010 का ग्रेच्युटी अधिनियम यह 2010 का ग्रेच्युटी अधिनियम केंद्र सरकार द्वारा लाया गया था। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को बेहतर ग्रेच्युटी लाभ प्रदान करना था। इस अधिनियम के तहत, ग्रेच्युटी की गणना कर्मचारी के अंतिम वेतन और सेवा के वर्षों के आधार पर की जाती है। अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये तय की गई है। recent visitors 49

छतरपुर में शुरू होगा MP का पहला ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर, भोपाल, सतना, सिंगरौली में तेजी से चल रहा काम

 छतरपुर छतरपुर में शुरू होगा मध्य प्रदेश का पहला ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर, जानें विशेषताएं। मध्य प्रदेश में सबसे पहला ड्राइविंग सेंटर छतरपुर जिले में शुरू होगा। इस माह सेंट्रल इंस्टिट्यूट आफ रोड, ट्रासपोर्ट (सीआईआरटी)पुणे से तकनीकी, फाइनेंस, सुपरविजन की तीन अलग-अलग टीम सेंटर की जांच करने आएंगी। सेंटर से मिलेगा प्रमाण पत्र सीआईआरटी से हरी झंडी मिलने के बाद परिवहन विभाग की देखरेख में तपस्या साई बाबा जन कल्याण शिक्षा प्रसाद समिति ट्रेनिंग सेंटर का संचालन शुरू करेगी। इसके बाद से सेंटर से प्रमाण पत्र के अधार पर आरटीओ की ओर से परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाएंगे। लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया बेहतर होगी इस नई व्यवस्था से ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया और बेहतर व पारदर्शी होगी। समिति के संचालक डॉ. आरके चतुर्वेदी ने बताया कि छतरपुर में सेंटर का काम पूरा हो चुका है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप(पीपीपी)मोड पर छतरपुर में रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर(आरडीटीसी)बनकर तैयार है। सड़क हादसों को कम करना है उद्देश इसमें साढ़े पांच एकड़ जमीन व छह करोड़ रुपये से अधिक खर्चा आया है। केंद्र सरकार के सहयोग से सड़क हादसों को कम करने के उद्देश्य से सेंटर शुरू किए जा रहे हैं। जिससे कुशल ट्रेनिंग लेने वालों के ही ड्राइविंग लाइसेंस बन सकें। संचालन शुरू करने के लिए पुणे से सीआईआरटी की अनुमति मिलनी है। संभवत: दो महीने में सेंटर का संचालन शुरू होने की उम्मीद हैं। भोपाल में 60 प्रतिशत काम पूरा भोपाल में भी रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर(आरडीटीसी)का निर्माण हो रहा है। बंगरसिया में साढ़े पांच एकड़ जमीन में सेंटर बन रहा है। इसके लिए शासन से 5.5 करोड़ और 92 लाख संबंधित एजेंसी पैसा लगा रही है। इस वर्ष में भोपाल का सेंटर भी शुरू हो सकता है। इसके अलावा बैतूल में भी आरडीटीसी का काम शुरू होना है। तीन जिलों में बनेंगे डीटीसी उज्जैन सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन के लिए रेलवे के तीन से चार सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे, स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगीउज्जैन सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन के लिए रेलवे के तीन से चार सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे, स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी मध्य प्रदेश के तीन जिलों में डिस्ट्रिक्ट ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर(डीडीटीसी)बनेंगे। इनमें सतना, दमोह, सिंगरौली को शामिल किया गया। पन्ना में भी डीटीसी बनना है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह व्यवस्था सफल होने पर प्रदेश के सभी जिलों में भविष्य में आरडीटीसी व डीडीटीसी शुरू होंगे। फिर क्षेत्रीय व जिला परिवहन अधिकारी सेंटरों से मिलने वाले ट्रेनिंग प्रमाण पत्रों के आधार पर परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया करेंगे। भोपाल,  इंदौर, बैतूल में खुलेगा ड्राइविंग स्कूल बता दें कि ये ड्राइविंग स्कूल मध्य प्रदेश के छतरपुर, भोपाल,  इंदौर, बैतूल, सिंगरौली में खोला जा रहा है। छतरपुर प्रदेश का पहला ड्राइविंग स्कूल होगा।  जहां पर अभी तक 35 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। एक-एक करके प्रदेश के हर जिले में ड्राइविंग स्कूल बनाने की तैयारी की जा रही है।  जिसकी जिम्मेदारी निजी एजेंसियां को सौंपी गई है। प्रशासन की इस नई व्यवस्था से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में पारदर्शित आएगी। 5.5 एकड़ जमीन पर बनेगा ड्राइविंग स्कूल जिला स्तर पर 3.5 एकड़ जमीन और संभागीय स्तर पर 5.5 एकड़ जमीन पर ड्राइविंग स्कूल बनाए जाने के कार्ययोजना है। इसमें ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक बनेगा। इसमें सीसीटीवी लगाए जाएंगे। एक यार्ड में आधुनिक मशीनें भी लगेंगे। साथ ही वाहनों की पार्किंग की सुविधा सहित बैठने व पीने के पानी की व्यवस्था होगी। नियमों के दिशा-निर्देश भी अंकित किए जाएंगे। इसमें मोटर सइकिल, मोपैड, भारी वाहन, व्यवसायिक वाहन भी रहेंगे। इन वाहनों से लोगों का टेस्ट लिया जाएगा। यहां खुलेगा ड्राइविंग सेंटर मध्यप्रदेश में मैसर्स वक्रतुंड क्रियेटिव सोशल वेलफेयर सोसायटी छतरपुर, तपस्या साईं बाबा जन कल्याण शिक्षा प्रसार समिति भोपाल, बैतूल मल्टी ट्रेड कंपनी बैतूल को 3 रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (आरडीटीसी) खोलने की मंजूरी दी गई है. साथ ही 3 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (डीटीसी) सार्थक वेलफेयर सोसायटी सतना, आर्यन मोटर्स सिंगरौली, मालवा ड्राइविंग सेंटर धार में खोले जाएंगे।     recent visitors 31

जम्मू-कश्मीर में सीमा पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे 7 पाकिस्तानियों को किया ढेर, कुख्यात BAT के आतंकी भी थे शामिल

नई दिल्ली इंडियन आर्मी ने जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे 7 पाकिस्तानियों को ढेर कर दिया है. इन घुसपैठियों में पाकिस्तान के कुख्यात बॉर्डर एक्शन टीम के आतंकी भी शामिल हैं. सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने 4-5 फरवरी की रात को नियंत्रण रेखा पर अपनी चौकी पर पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले को नाकाम कर दिया. इस दौरान 7 पाकिस्तानी घुसपैठिए मारे गए. इन घुसपैठियों में 2 से 3 पाकिस्तानी आर्मी के जवान भी शामिल थे. यह घटना जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के कृष्णा घाटी सेक्टर में हुई. सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी घुसपैठिए कुख्यात बॉर्डर एक्शन टीम की मदद से भारत के जवानों पर घात लगाकर हमला करना चाहते थे. बॉर्डर एक्शन टीम LoC पर छिपकर हमला करने के लिए ट्रेंड है. पाकिस्तान की ये एजेंसी पहले भी बॉर्डर पर इंडियन जवानों पर हमला कर चुकी है. इसी अनुभव का फायदा लगाकर ये टीम एक बार फिर से भारत के जवानों को टारगेट करना चाहती थी.  सूत्रों ने बताया कि LoC पर पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखते ही भारतीय जवानों ने ढेर कर दिया. मारे गए आतंकियों में दहशत संगठन अल-बदर के आतंकी भी शामिल हैं. ये घटना उस रोज हुई जब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने प्रोपगेंडा को हवा देता है और 5 फरवरी को कथित रूप से कश्मीर सॉलिडरिटी डे बनाने का ढोंग करता है. बता दें कि पाकिस्तान के कथित कश्मीर सॉलिडरिटी डे के मौके पर ही 5 फरवरी को लाहौर में आयोजित एक रैली में आतंकी हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद ने भारत के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया. रैली को संबोधित करते हुए तल्हा सईद मिमियाता दिखा. उसने कहा कि वो कश्मीर को आजाद कराएगा. उसने मंच पर खूब नौटंकी की और कश्मीर को लेकर कसमें खाई. तल्हा सईद ने यह भी मांग की कि पाकिस्तानी सरकार अपनी नीति की समीक्षा करे और उसके बाप हाफिज सईद को जेल से रिहा करे. recent visitors 32

कुछ लोग शिकायत करते हैं कि मेरा पुलिस से ज्यादा प्रेम है, लेकिन ये सच है कि पुलिस 24 घंटे काम करती है: CM यादव

 भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में IPS मीट का शुभारंभ किया. इस अवसर पर सीएम ने प्रदेश के आला IPS अधिकारियों को संबोधन में कहा कि कुछ लोग शिकायत करते हैं कि मेरा पुलिस से ज्यादा प्रेम है. लेकिन ये सच है कि पुलिस 24 घंटे काम करती है. किसी भी घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया पुलिस को ही देना पड़ती है. परेशानी में पुलिस ही भगवान नजर आती है. पुलिस सबकी आशा का केंद्र बनती जा रही है. जो काम पुलिस के नहीं हैं, उनमें भी पुलिस से मदद की उम्मीद की जाती है. जाति से किसी को अपराधी न समझें CM यादव ने कहा कि कई जातियों को हमने आपराधिक घोषित कर दिया है. लेकिन हमारी ये मानसिकता अंग्रेजों के वजह से हो गई. जबकि ऐसे लोगों का उपयोग सही तरीके से किया जाए तो ये बहुत काम के हो सकते हैं. उन्होंने उदाहरण दिया कि नट जाति के लोगों से पहले गुप्तचर का काम लिया जाता था, अपनी कला-कौशल के बल पर वे बहुत काम आते थे. इसीलिए पुलिस को अपनी मानसिकता में भी परिवर्तन लाना होगा. सबके अधिकारों की रक्षा ही सच्ची पुलिसिंग मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पुलिसिंग की भावना का सही अर्थ समझाने के लिए उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार किसान अपनी फसल में से कई वर्गों को उपज का हिस्सा देता है, उसी प्रकार पुलिस की भी ये भावना होनी चाहिए. जो हमें मिला, केवल वो हमारा नहीं है. पुलिस को मिला पॉवर सबका पॉवर है. सबके अधिकारों के लिए अपने पॉवर का इस्तेमाल करना ही सच्ची पुलिसिंग है. सीएम यादव ने कहा कि पुलिस के सामने चुनौती होती है कि कानून का पालन कराना है, दक्षता दिखानी है लेकिन ये वसंवेदनशीलता के साथ होना चाहिए. मुझे मध्यप्रदेश पुलिस पर गर्व है जिसने कई मामलों में अपनी अच्छी पोजीशन से बनाई है बम्होरीकला थाना प्रभारी का सम्मान टीकमगढ़ के बम्होरीकला थाने को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सर्वश्रेष्ठ थानों की सूची में सम्मिलित किया और एक्सीलेंस अवॉर्ड से पुरस्कृत किया गया था. इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने टीकमगढ़ एसपी मनोहर सिंह मंडलोई और बम्होरीकला थाना प्रभारी रश्मि जैन को सम्मानित किया. CM ने दिए थानों को पुरस्कृत करने के निर्देश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अंत में डीजीपी कैलाश मकवाना से कहा कि प्रदेश में भी पुलिस थानों को पुरस्कृत करने की परंपरा शुरू हो. उन्होने कहा कि जिस प्रकार केन्द्रीय गृह मंत्रालय थानों को पुरस्कृत करता है, इसी प्रकार के पैरामीटर पर मध्यप्रदेश में पुलिस थानों को प्रदेश, संभाग और जिला स्तर पुरस्कृत करने की परंपरा शुरू करें. प्रदेश, संभाग और जिला स्तर पर थानों को पुरस्कृत किया जाए.   recent visitors 57

ट्रंप के ऑर्डर से फिर मची खलबली, अब इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर लगाया बैन; क्या नेतन्याहू है वजह?

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपराध न्यायालय (ICC) पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। ICC की ओर से गाजा में इजरायल के युद्ध अपराध की जांच के चलते अमेरिका ने ये कार्रवाई की है। अमेरिका के प्रमुख सहयोगी इजरायल पर गाजा में नरसंहार के गंभीर आरोप लगे हैं। ICC ने बीते साल इजरायली नेताओं के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। ट्रंप ने ICC की कार्रवाई को खतरनाक मिसाल बताते हुए बैन का ऐलान किया है। इन प्रतिबंधों में ICC अधिकारियों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक शामिल है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में हमलों के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ ICC के गिरफ्तारी वारंट जारी करने के चलते यह कदम उठाया गया है। ट्रंप प्रशासन अमेरिका और सहयोगी देशों की ICC जांच का विरोध कर रहा है। उन्होंने इन जांचों को गलत और राजनीति से प्रेरित बताया है। हालांकि अमेरिका और इजरायल ICC के सदस्य नहीं हैं और दोनों ही देश इसके ऑर्डर नहीं मानते। ट्रंप पर हमलावर रहे हैं ट्रंप ICC को दूसरी बार अमेरिकी प्रतिशोध का सामना करना पड़ा है। साल 2020 में ट्रंप प्रशासन ने तत्कालीन अभियोजक फातौ बेन्सौडा और एक शीर्ष सहयोगी पर प्रतिबंध लगाए थे। ये प्रतिबंध अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के युद्ध अपराधों की ICC की जांच की प्रतिक्रिया में लगाए गए थे। ICC को अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। इससे अदालत के कामकाज पर असर पड़ा है। ICC अध्यक्ष ने कुछ समय पहले चिंता जताई थी कि अमेरिकी प्रतिबंध न्यायालय के कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से न्यायालय की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान किया है। ICC 125 सदस्य देशों वाला ICC एक स्थायी न्यायालय है। यह युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों, नरसंहार और सदस्य देशों या उनके नागरिकों के खिलाफ आक्रामकता के लिए मुकदमा चलाता है। हालांकि कई बड़े देश इसके सदस्य नहीं है। इंटरनेशनल कोर्ट ने पिछले नवंबर में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पूर्व इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट और हमास नेताओं के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। अदालत ने माना था कि नेतन्याहू और गैलेंट ने मानवीय सहायता रोककर गाजा में नागरिकों की भुखमरी को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल किया। हालांकि इजरायल ने आरोपों को झूठा बताकर खारिज कर दिया था। recent visitors 34

मोहन सरकार आयुष्मान योजना में गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई एसओपी बनाने जा रही, गड़बड़ियां रोकने तत्कालिक बदलाव होंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत कई अस्पतालों ने फर्जीवाड़े किए हैं. लगातार गड़बड़ियों की शिकायतें आने के बाद अब मोहन यादव सरकार ने शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है. मरीजों के फर्जी बिल लगाकर सरकारी खजाने को चपत लगा रहे भोपाल के 200 समेत प्रदेश के एक हजार अस्पताल जांच के दायरे में हैं. सरकार आयुष्मान योजना में गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानि एसओपी बनाने जा रही है. गड़बड़ियां रोकने के लिए कुछ तत्कालिक बदलाव भी किए गए हैं. डायलिसिस का क्लैम पाने के लिए नई गाइडलाइन आयुष्मान योजना के मध्यप्रदेश के सीईओ डॉ. योगेश भरसट ने बताया "सरकार आयुष्मान योजना की गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई एसओपी तैयार कर रही है. अभी लोग शिकायत कर रहे थे कि डायलिसस के मामले में अस्पताल संचालक फर्जी बिल बनाकर सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं. ऐसे में हमने इसमें बदलाव किया है. डायलिसिस मरीजों के लिए एक जरूरी बदलाव राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) ने किया है. इसके तहत आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों को डार्यालिसस पर क्लैम तभी मिलेगा, जब डॉक्टर या अस्पताल अधीक्षक मरीज के साथ फोटो टीएसएम पोर्टल पर अपलोड करेगा. यदि टीएसएम पोर्टल पर फोटो अपलोड नहीं हुए तो क्लैम रिजेक्ट कर दिया जाएगा." शिकायत सही मिली तो इंपैनल्ड अस्पताल होंगे बाहर आयुष्मान योजना के तहत भोपाल जिले के 200 और प्रदेश के 1000 से अधिक इम्पैनल्ड अस्पतालों की नए सिरे से जांच की जा रही है. इनमें फर्जी बिलिंग और इलाज में अनियमितता की शिकायत मिल रही थी. यही शिकायतें गली-मोहल्लों में संचालित आरोग्य अस्पतालों के खिलाफ भी मिल रही थीं. अब सरकार शिकायत मिलने वाले इंपैनल्ड अस्पतालों की जांच करेगा. यदि शिकायत सही पाई जाती है तो अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ऐसे अस्पतालों को आयुष्मान योजना की सूची से बाहर किया जाएगा. प्रदेश के एक हजार अस्पतालों की होगी स्क्रीनिंग मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत इंपैनल्ड एक हजार अस्पतालों की स्क्रीनिंग की जाएगी. इसमें उनकी मूलभूत सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के बारे में जानकारी ली जाएगी. यदि ऐसे अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं, तो उनके खिलाफ मान्यता रद्द करने समेत अन्य कार्रवाई होगी. गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं मिलने और जरूरी संसाधन नहीं होने पर ऐसे अस्पतालों को डीलिस्ट किया जाएगा. अस्पतालों के क्लैम सेटलमेंट, मरीजों की शिकायतों और इलाज की गुणवत्ता पर आधारित नए मानक तय किए जाएंगे. अस्पतालों की रैंकिंग बनाई जाएगी, जिससे अच्छे अस्पतालों को फायदा मिलेगा और खराब अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई होगी. recent visitors 39

5 साल बाद RBI से आई गुड न्यूज, रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती

नई दिल्ली  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक आज (7 फरवरी 2025) खत्म हो गई है और आरबीआई के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा आज सुबह 10 बजे कमेटी के फैसले का ऐलान कर दिया। तीन दिन तक चली इस मीटिंग में उम्मीद के मुताबिक रेपो रेट में कटौती का ऐलान किया गया। 2020 में COVID-19 के बाद आज आरबीआई रेपो रेट में 25bps की कटौती कर दी है। आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले मई, 2020 में कोविड-19 महामारी के समय रेपो दर को 0.40 प्रतिशत घटाकर चार प्रतिशत किया गया था। फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के जोखिमों से निपटने के लिए आरबीआई ने मई, 2022 में दरों में बढ़ोतरी करनी शुरू की थी और यह सिलसिला फरवरी, 2023 में जाकर रुका था। रेपो दर दो साल से 6.50 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। आरबीआई के गवर्नर ने संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन की बैठक में लिए गये निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि छह सदस्यीय समिति ने आम सहमति से रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत करने का निर्णय किया है। गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि बैठक में इकोनॉमी डेवलपमेंट को लेकर चर्चा की गई. गवर्नर ने आगे कहा कि हमने बैठक में फैसला किया है कि रेपो रेट को घटाया जा रहा है. अब रेपो रेट 6.50 से घटाकर 6.25 किया जा रहा है. रेपो रेट में कटौती के बाद अब आपके लोन की ईएमआई कम हो जाएगी. गवर्नर ने कहा कि ग्‍लोबल इकोनॉमी चुनौतियों से गुजर रही है. साथ ही वैश्विक स्‍तर पर महंगाई भी बढ़ रही है. वहीं फेडरल रिजर्व बैंक ने रेट में कई बार कटौती की है. साथ जियो पॉलिटिकल टेंशन भी बढ़ रहा है. जिस कारण दुनिया भर की इकोनॉमी पर असर पड़ रहा है. भारतीय रुपया अभी प्रेशर में है. रिजर्व बैंक के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए देश की विकास दर 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है. वित्त वर्ष 2026 के लिए रियल GDP ग्रोथ 6.75%, अप्रैल-जून 2025 तिमाही 6.7%, जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही में 7% रहने का अनुमान है. वहीं अक्टूबर-दिसंबर 2025 और जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में इसके 6.5-6.5% रहने का अनुमान है. महंगाई को और कम करने का लक्ष्‍य गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि इस वित्त वर्ष 4.8 फीसदी महंगाई रहने का अनुमान है. वहीं आगे महंगाई दर और कम हो जाएगी. दिसंबर में रिटेल महंगाई दर और थोक महंगाई दर, दोनों में बदलाव हुआ. रिटेल महंगाई दर 4 महीने के निचले स्तर 5.22% पर है. वहीं थोक महंगाई दर बढ़कर 2.37% पर पहुंच गई है. नवंबर में यह 1.89% थी. गवर्नर ने कह कि रिजर्व बैंक ने कहा कि सेकेंड्री मार्केट में गवर्नमेंट सिक्‍योरिटीज में ट्रेडिंग करने के लिए निवेशक सेबी द्वारा रजिस्‍टर्ड आरबीआई के प्‍लेटफॉर्म का उपयोग कर स‍कते हैं. recent visitors 61