मध्यप्रदेश में 8500 पुलिसकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी मिली, 8 साल बाद एसआई की भर्ती होगी

भोपाल मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया का इंतजार खत्म हुआ। सरकार ने 8500 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इसमें 7500 सिपाही (Constable), 500 सब-इंस्पेक्टर (Sub-Inspector) और 500 ऑफिस स्टाफ (Office Staff) शामिल हैं। मध्यप्रदेश में 8 साल बाद एसआई पदों पर भर्ती होने जा रही है। पुलिस मुख्यालय (Police Headquarters) ने गृह विभाग (Home Department) को प्रस्ताव भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है। सिपाही के 7500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू प्रदेश में 18,000 सिपाही पद रिक्त हैं। इनमें से 7500 पदों पर भर्ती को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए एक प्रक्रिया पहले से चल रही है। ऑफिस स्टाफ के 500 पद पिछले 8 वर्षों से रिक्त थे। इनमें स्टेनो (Steno) और एएसआई (ASI) पद शामिल हैं। 30 जनवरी को शासन ने इन पदों पर भर्ती की अनुमति दी है। राज्य शासन ने 30 जनवरी को ऑफिस स्टाफ की भर्ती की अनुमति भी जारी कर दी। 7500 सिपाहियों की भर्ती को भी जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने पद संभालने के बाद समीक्षा में पाया कि मप्र पुलिस के पास वर्तमान बल सिर्फ एक लाख है, जबकि 25 हजार पद रिक्त हैं। हर साल 500-700 पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे यह संख्या बढ़ती जा रही है। गृह विभाग ने एसआई पदों की भर्ती लिए नियमों में संशोधन किया है। इनमें एसआई रेडियो, आयुध व फोटो /फिंगर प्रिंट शामिल हैं। इन पदों के लिए 36 की बजाय 38 वर्ष की उम्र तक परीक्षा दे पाएंगे। 7500 पद पर सिपाही भर्ती होंगे: मप्र के सभी जिलों में 18,000 सिपाही पद रिक्त हैं, जिनमें से 7,500 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। वर्तमान में एक भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसमें लिखित परीक्षा के परिणाम लंबित हैं। एसआई-सूबेदार के 500 पद: मप्र में आठ साल पहले एसआई-सूबेदार पदों पर भर्ती हुई थी। वर्तमान में 1200 से ज्यादा पद रिक्त हैं। भर्ती नियमों में संशोधन लंबित था, लेकिन अब नोटिफिकेशन जारी होने के बाद 500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। ऑफिस स्टाफ के 500 पद: स्टेनो और एएसआई (एम) पदों पर पिछले आठ साल से भर्ती नहीं हुई थी। पुलिस मुख्यालय ने 1 जनवरी को प्रस्ताव भेजा, जिसके बाद 30 जनवरी को शासन ने मंजूरी दी। अब 100 स्टेनो और 400 एएसआई (एम) पदों पर भर्ती होगी। रिक्त पदों पर जल्द होगी भर्ती मप्र पुलिस में रिक्त पदों की संख्या काफी ज्यादा है। शासन इन पदों पर भर्ती की मंजूरी दे रहा है। जल्द ही रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -कैलाश मकवाणा, डीजीपी recent visitors 45

मध्यप्रदेश में केंद्र की विशेष सहायता से वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी, केंद्रीय सहायता मिलने से खजाने पर बोझ कम होगा

भोपल आम बजट के बाद अब राज्य में बजट की माथापच्ची तेज होगी। केंद्रीय करों में मिलने वाले हिस्से और आर्थिक सहायता को बड़ी राहत मानते हुए वित्त विभाग के अफसर बजट को तैयार कर रहे हैं। सीएम 15 फरवरी से मंत्रियों और वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठकों का दौर शुरू करेंगे। इन्हीं बैठकों में बजट को अंतिम रूप दिया जाएगा। बजट में गरीब, नारी, युवा और किसानों के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे। बजट का आकार बढ़कर चार लाख करोड़ तक होने का अनुमान है।  मध्यप्रदेश में केंद्र की विशेष सहायता से वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। लाड़ली बहना योजना जैसी योजनाओं के चलते सरकार को हर माह करीब डेढ़ हजार करोड़ का खर्च करने पड़ रहे हैं। केंद्रीय सहायता मिलने से खजाने पर बोझ कम होगा। केंद्र ने 50 साल के लिए ब्याज मुक्त ऋण पर अतिरिक्त कर्ज लेने की सुविधा भी दी है। कर्ज एफआरबीएम की तीन प्रतिशत की लिमिट से 0.5 फीसदी ज्यादा होगा। केंद्रीय बजट में सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना की घोषणा की गई है। योजना आकांक्षी जिलों में शुरू होगी। इसमें एमपी के 8 जिले शामिल हैं। खासतौर पर किशोरी बालिकाओं के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी। राज्य में युवा, नारी, किसान और गरीब मिशन पर काम हो रहा है। बजट की कमी नहीं आने दी जाएगी। इसलिए इस वर्ग के लिए बजट बढ़ाया जा रहा है। मेडिकल को विस्तार केंद्रीय बजट में मेडिकल सीटें बढ़ाने की बात कही गई है। अगले एक साल में मध्यप्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 21 हो जाएगी। 12 नए कॉलेज खुलने से 2,000 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। अगले तीन सालों में हर जिले में कैंसर सेंटर खोलने की योजना की घोषणा की गई है, जिससे मध्य प्रदेश को भी एक कैंसर सेंटर मिलने की संभावना है। देश में 200 डे केयर सेंटर खोले जाएंगे। एमपी को भी कुछ सेंटर मिल सकते हैं। नल से जल होगा सुगम जल जीवन मिशन की मियाद 2028 तक कर दी गई है। इससे मप्र को अतिरिक्त 20 हजार करोड़ मिल सकते हैं। यह राशि जल आपूर्ति योजनाओं को तेजी से लागू करने में सहायक होगी। 36 लाख घरों में नल से जल पहुंचाने की उम्मीद अब और बढ़ गई है। बजट की कमी के चलते बाधा आ रही थी। recent visitors 27

गाजियाबाद में एक स्कूल को बम से उड़ाने की मिली धमकी, खाली कराई गई बिल्डिंग

गाजियाबाद गाजियाबाद के शालीमार गार्डन थाना इलाके में एक स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। साथ ही डॉग व बॉम स्कवाड की टीम भी पहुंची। आनन-फानन बच्चों को स्कूल मैदान में भेजा गया और जांच की गई। जानकारी के अनुसार, शालीमार गार्डन थाना इलाके में स्थित सेंट मैरी स्कूल को ईमेल पर सोमवार सुबह करीब सात बजे धमकी भरा मैसेज पहुंचा। स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। एसीपी शालीमार गार्डन सलोनी अग्रवाल ने बताया कि ईमेल में स्कूल को खाली करने और बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। सुरक्षा के लिहाज से तुरंत सभी बच्चों को स्कूल मैदान में भेज दिया गया। साथ ही डॉग व बॉम स्कवाड की टीम ने जांच शुरू की। छानबीन व तलाश करने फर्जी धमकी होने का पता चला। स्कूल प्रबंधक की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही जो ईमेल आया था उसकी जांच के लिए भी साइबर टीम लगाई गई है। recent visitors 36

सौरभ शर्मा मामले में चौंकाने वाला खुलासा, 50 से अधिक बेनामी संपत्ति का राज… 30 लोगों को भेजा गया नोटिस

भोपाल परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. अब हाल ही में लोकायुक्त पुलिस की गिरफ्त में आए सौरभ शर्मा और उसके साथी चेतन सिंह और शरद जायसवाल से पूछताछ में 50 से ज्यादा बेनामी संपत्तियों का खुलासा हुआ है. इन संपत्तियों के नाम पर 30 से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनसे जल्द ही पूछताछ की जाएगी. सौरभ शर्मा केस में चौंकाने वाला खुलासा दरअसल लोकायुक्त ने सौरभ शर्मा की 50 से ज़्यादा संपत्तियों का खुलासा किया है, जिसमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर शामिल हैं. जांच में पता चला कि सौरभ ने अपने करीबियों के नाम पर कई संपत्तियां रजिस्टर्ड करवा रखी थीं. लोकायुक्त ने 30 से ज़्यादा लोगों को नोटिस भेजा है, जिनसे पूछताछ की जाएगी. सौरभ शर्मा की रिमांड 4 फरवरी को खत्म हो रही है, ऐसे में जांच में और भी पेचीदगियां सामने आने की उम्मीद है. यह मामला अब एक बड़ी जांच और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है. भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में मिले दस्तावेज छापेमारी के दौरान सौरभ के घर और दफ्तर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में स्थित संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं. इनमें से ज्यादातर संपत्तियां उसके रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर हैं, हालांकि इनकी असली रजिस्ट्रियां सौरभ के पास ही मिलीं. कई संपत्तियों की पावर ऑफ अटॉर्नी भी दूसरे लोगों के नाम पर की गई थी. 4 फरवरी को खत्म हो रही सौरभ की रिमांड बता दें कि लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ से इन संपत्तियों के बारे में पूछताछ की, लेकिन उसने इनमें अपना नाम होने से इनकार किया. जांच में सहयोग न करने पर 30 लोगों को नोटिस भेजा गया है. 4 फरवरी को सौरभ की रिमांड खत्म होने के बाद लोकायुक्त फिर से रिमांड की मांग कर सकता है. क्या है मामला दरअसल लोकायुक्त ने सौरभ शर्मा की 50 से ज्यादा संपत्तियों का खुलासा किया है। इनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर शहरों की संपत्तियां शामिल हैं। जांच में पता चला है कि सौरभ ने कई संपत्तियां अपने करीबियों के नाम पर रजिस्टर्ड करवा रखी हैं। इस लिस्ट में 30 से ज्यादा करीबियों के नाम हैं। मामले में सभी को नोटिस भेजा गया है। इन सभी से पूछताछ की जाएगी। बता दें कि सौरभ शर्मा की रिमांड कल 4 फरवरी मंगलवार को खत्म हो जाएगी। लेकिन सौरभ इन संपत्तियों को लेकर जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। जिसके बाद लोकायुक्त ने 30 लोगों को नोटिस भेजा है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में मिले दस्तावेज बता दें कि छापेमारी के दौरान सौरभ के घर और दफ्तर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में स्थित संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनमें से ज्यादातर संपत्तियां उसके रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर हैं। लेकिन ऑरिजनल रजिस्ट्री सौरभ के पास ही मिली हैं। सौरभ की कई संपत्तियों की पावर ऑफ अटॉर्नी भी दूसरे लोगों के नाम पर की गई थीं। कल खत्म हो जाएगी या बढ़ेगी सौरभ की रिमांड? बता दें कि सौरभ शर्मा की 7 दिन की रिमांड कल 4 फरवरी मंगलवार को खत्म हो जाएगी। जिसके बाद तीनों सौरभ, चेतन और शरद को कोर्ट में पेश किया जाएगा। मामले में लगातार हो रहे खुलासे के बाद संभावना यही है कि लोकायुक्त पुलिस सौरभ, चेतन और शरद की रिमांड और बढ़ा सकती है। प्रॉपर्टी की बिक्री पर लग चुकी है रोक  सौरभ शर्मा के ठिकानों से जब्त हुए प्रॉपर्टी को खुर्द-बुर्द करने से बचाने के लिए लोकायुक्त ने जिला पंजीयकों को पहले ही पत्र लिख दिया है। दस्तावेजों में मिली प्रत्येक प्रापर्टी की जानकारी पंजीयकों को उपलब्ध करवा दी गई है ताकि उनकी दोबारा से रजिस्ट्री नहीं करवाई जा सके। शरद जायसवाल और चेतन सिंह ने किसी प्रकार के खुलासे नहीं किए हैं। हर महीने आता था 4 लाख किराया लोकायुक्त पुलिस सूत्रों ने बताया कि सौरभ शर्मा के पास हर महीने 4 लाख रुपये किराया आता था। यह जानकारी सौरभ ने पूछताछ के दौरान पुलिस को दी है। यह किराया उसकी प्रापर्टियों से मिल रहा था। ग्वालियर में स्थित प्रापर्टी का किराया लेने के लिए उसने कर्मचारी नियुक्त कर रखा था। यह कर्मचारी किराया वसूल कर सौरभ को भेजता था।  सौरभ की बढ़ सकती है रिमांड  सौरभ शर्मा समेत उसके तीनों सहयोगियों की रिमांड अवधि 4 फरवरी तक है। पूछताछ के दौरान सौरभ ने प्रापर्टी खरीदने के लिए फायनेंस करने वालों के नामों का खुलासा नहीं किया है। इसके साथ ही लोकायुक्त के ऐसे दर्जनों सवाल हैं, जिनके जवाब उसने नहीं दिए हैं। इसलिए अब लोकायुक्त पुलिस उसकी रिमांड अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन लगा सकती है।  recent visitors 49

किराने दुकान के रुपए को लेकर था पिता-पुत्र में विवाद, मंगल मालवीय ने अपने बेटे अरविंद मालवीय की हत्या

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक बड़ी घटना घटी है। भाजपा विधायक सतीश मालवीय के बड़े भाई ने अपने बेटे को गोली मार दी है। उन्होंने गोली दोनाली बंदूक से मारी है। बेटे की मौत मौके पर ही हो गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। साथ ही विधायक के भाई को गिरफ्तार कर लिया गया है। मृतक का नाम अरविंद मालवीय है। बड़े भाई ने मारी गोली दरअसल, बीजेपी के विधायक सतीश मालवीय हैं। उनके बड़े भाई मंगल मालवीय ने अपने ही बेटे को गोली मार दी है। गोली बारह बोर की बंदूक से मारी गई है। पुलिस के अनुसार यह घटना उज्जैन जिले के माकड़ौन तहसील की है। सतीश मालवीय घटिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। बताया जा रहा है कि विधायक खुद चार भाई हैं। मंगल मालवीय उनके सबसे बड़े भाई हैं। एडिशनल एसपी पल्लवी शुक्ला ने बताया कि पिता-पुत्र की किराने की दुकान थी। सुबह करीब सवा नौ बजे पिता और पुत्र में किराने की दुकान के पैसे को लेकर विवाद हुआ था। मृतक अरविंद को उसके पिता मंगल सिंह ने गोली मार दी है। पैसे को लेकर विवाद था। एडिशनल एसपी ने कहा कि मंगल मालवीय विधायक के भाई हैं लेकिन इनका करीब 20 सालों से कोई संबंध नहीं है। मंगल मालवीय अलग रह रहे थे। उन्होंने कहा कि दोनों एक-दूसरे अलग रहते थे। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी मंगल मालवीय ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली मारी है। बेटे के सिर में गोली लगी है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। वहीं, शव को पीएम के लिए अस्पताल में लाया गया है। उज्जैन के माकड़ौन थाने का मामला मामला उज्जैन जिले के माकड़ौन तहसील के सुचाई गांव का बताया जा रहा है, जहां करीब सुबह 9 बजे मंगल मालवीय ने अपने बेटे अरविंद मालवीय को जमीन और किराना दुकान से जुड़े विवाद पर गोली मार दी, दोनों के बीच सुबह के वक्त बहर हो रही थी, जहां मंगल मालवीय ने अपनी 12 बोर बंदूक से फायरिंग कर दी, एक गोली सीधे उसके सिर में लगी तो दूसरी गोली सीने में लगी, जिससे अरविंद बुरी तरह घायल हो गया. घर में मौजूद लोगों ने देखा तो सब घबरा गए और आनन फानन में अरविंद को उज्जैन रेफर किया गया, लेकिन उसे बचाया हीं जा सका. अरविंद की पत्नी और बेटा है.   जमीन से जुड़ा था मामला बीजेपी विधायक सतीश मालवीय के बड़े भाई मंगल मालवीय के दो बेटे हैं, उनकी माकड़ौन सात बीघा जमी है, जिसको लेकर मंगल सिंह के परिवार में विवाद चल रहा था, इसके अलावा पिता-बेटे के बीच देवास के सुनवानी गांव में भी जमीन को लेकर कई बार कहा सुनी हो चुकी है. लेकिन आज सुबह विवाद ज्यादा बढ़ गया था, जिससे मंगल सिंह ने फायरिंग कर दी, फिलहाल पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करके पूछताछ शुरू कर दी है. बता दें कि मंगल मालवीय के पिता नागूलाल मालवीय भी क्षेत्र के विधायक रह चुके हैं, जबकि उनके छोटे भाई सतीश मालवीय वर्तमान विधायक हैं, घटना की जानकारी लगते ही पुलिस और बड़ी संख्या में लोग जुट गए. वहीं मामला विधायक से जुड़ा होने की वजह से भीड़ भी जुट गई थी.   इलाके में तनाव घटना के बाद से माकड़ौन और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपी मंगल मालवीय से पूछताछ जारी है और जल्द ही मामले के सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जाएगा। recent visitors 60

WhatsApp के 90 अकाउंट हैक, Meta ने Paragon को भेजा कानूनी नोटिस

नई दिल्ली WhatsApp ने रिपोर्ट किया है कि दुनिया भर (दो दर्जन देशों) के यूजर्स के अकाउंट्स को एक इजरायली स्पाइवेयर कंपनी, Paragon Solutions द्वारा निशाना बनाया गया है। Meta अधिकारियों ने खुलासा किया कि यह नया हमला पहले की उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें इजरायली स्पाइवेयर कंपनियों द्वारा इसी तरह के हैकिंग घटनाओं का उल्लेख किया गया था। Meta ने Paragon Solutions को एक "सीज़ एंड डेसिस्ट" (काम रोकने का कानूनी नोटिस) पत्र भी जारी किया है, जिसमें उनकी गतिविधियों को तुरंत बंद करने की मांग की गई है। अपने बयान में, Meta अधिकारियों ने यूजर्स को आश्वस्त किया कि वे उनके अकाउंट्स की गोपनीयता की रक्षा करने और प्लेटफॉर्म पर संचार को सुरक्षित बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। इन हमलों के बावजूद, Meta ने जोर देकर कहा है कि वह यह सुनिश्चित करने के अपने प्रयास जारी रखेगा कि यूजर्स बाहरी हस्तक्षेप के बिना निजी रूप से कॉन्टैक्ट कर सकें। 90 अकाउंट्स पर पड़ा असर इस हमले से लगभग 90 यूजर्स प्रभावित हुए हैं, जो मुख्य रूप से पत्रकार और नागरिक समाज के सदस्य हैं। हालांकि, Meta ने अभी तक उन यूजर्स के बारे में कोई विशिष्ट जानकारी साझा नहीं की है, जिनको निशाना बनाया गया था। WhatsApp के अनुसार, स्पाइवेयर को इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ों के रूप में भेजा गया था, जिनमें मैलिशियस सॉफ़्टवेयर मौजूद था। यह प्रक्रिया बिना किसी प्रत्यक्ष इंटरैक्शन के पूरी की गई, यानी हैकर्स और टारगेट्स के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ। इस हमले के अधिकांश पीड़ित यूरोप में स्थित हैं, लेकिन प्रभावित देशों की सटीक लिस्ट का खुलासा नहीं किया गया है। Meta का दावा है कि वह इस हमले को बीच में ही रोकने में सक्षम रहा, हालांकि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसने Paragon को इस हैकिंग प्रयास के स्रोत के रूप में कैसे पहचाना। पत्रकारों को बनाया गया निशाना फिलहाल, Paragon Solutions ने इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। कनाडा स्थित इंटरनेट निगरानी समूह Citizen Labs के अनुसार, Paragon सरकारों को उन्नत निगरानी सॉफ़्टवेयर बेचने के लिए जाना जाता है, जिसका उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा और अपराध रोकथाम के लिए किया जाता है। हालांकि, इन उपकरणों का उपयोग पत्रकारों और नागरिक समाज के सदस्यों को निशाना बनाने के लिए किया जाना गंभीर चिंताओं को जन्म देता है। यह हालिया घटना एक अन्य विवादास्पद इजरायली स्पाइवेयर कंपनी Pegasus के उपयोग के बाद सामने आई है, जिसने अतीत में पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के WhatsApp अकाउंट्स की हैकिंग को लेकर सुर्खियां बटोरी थीं। यह मुद्दा इस बात को रेखांकित करता है कि स्पाइवेयर उपकरणों की बिक्री और उनके उपयोग को लेकर नैतिक चिंताएं बनी हुई हैं, विशेष रूप से जब इनका उपयोग मीडिया और नागरिक समाज के सदस्यों की गोपनीयता भंग करने के लिए किया जाता है। recent visitors 57

मोहन सरकार ने शिक्षकों की छुट्टियों को 15 फरवरी 2025 से 15 मई 2025 तक रद्द कर किया, जाने क्या है वजह

भोपाल मध्यप्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़े सभी शिक्षकों की अगले तीन महीने तक की छुट्टियां रद्द कर दी हैं. राज्य शासन ने आदेश जारी कर इसकी सूचना दी है. शासन ने एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस (एस्मा) लगाने का आदेश किया है, जो 15 फरवरी 2025  से 15 मई 2025 तक लागू किया गया है. इस बीच यानी तीन महीने शिक्षकों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. अगर शिक्षक छुट्टी के लिए आवेदन करता है तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा. बोर्ड परीक्षा के चलते तीन महीने तक छुट्टी नहीं ले पाएंगे शिक्षक यह फैसला मध्यप्रदेश बोर्ड परीक्षा 2025 के मद्देनजर लिया गया है. मध्यप्रदेश में 24 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं. ऐसे में परीक्षाओं की तैयारी को लेकर भी शिक्षकों को मुख्य रूप से निर्देशित किया गया है. इस आदेश के बाद अब शिक्षक छुट्टी के लिए आवेदन देते भी हैं तो उन्हें अवकाश नहीं दिया जाएगा. परीक्षाओं के दौरान जिन शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य स्टाफ की ड्यूटी होगी, वे छुट्टी नहीं ले पाएंगे. कहीं फिर से लीक न हो जाए पेपर… पूरे देश में जहां पेपर लीक एक बड़ी परेशानी बनी हुई है, वहीं मध्यप्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल के लिए बिना पेपर लीक बोर्ड परीक्षाएं करवाना भी एक बड़ी चुनौती है. दो साल पहले 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के पेपर लीक हुई थे. हालाँकि 2024 की परीक्षाओं में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने काफी कड़ी सुरक्षा और निर्देशों के बीच परीक्षाएं आयोजित करवाई थीं. लगातार मीटिंग कर रहे अधिकारी एमपी की बोर्ड एग्जाम की तैयारी को लेकर 5 फरवरी को प्रदेश के सभी संभाग के कमिश्नर और कलेक्टरों की वीडियो कॉन्फ्रेसिंग आयोजित की जा रही है. जिसमें प्रशासन बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों को लेकर निर्देशित किया जाएगा. परीक्षा के दौरान पूरी तरह बैन रहेगा मोबाइल फोन यूज 2024 में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने आदेश जारी कर केंद्राध्यक्ष, सहायक केंद्राध्यक्ष, पर्यवेक्षक सहित किसी भी स्टाफ के लिए मोबाइल परीक्षा केंद्र पर प्रतिबंधित कर दिया था. क्योंकि दो साल पहले पेपर लीक मामले में मोबाइल के उपयोग की बात सामने आई थी. पुलिस थाना से प्रश्न पत्र परीक्षा कक्ष तक पहुंचने के दौरान मोबाइल से फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था. इस बार भी बोर्ड सख्ती करने की तैयारी में है. 2022 में पेपर लीक करने के आरोप में कई एफआईआर भी दर्ज की गई थीं. बता दें कि मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के शिक्षा और कर्मचारियों की छुट्टी रद्द का यह आदेश उनके लिए बुरी खबर है जिन्होंने छुट्टियों के लिए आवेदन दिया हुआ है. भोपाल समेत मध्य प्रदेश के कई ज़िलों में कई शिक्षकों और कर्मचारियों ने छुट्टी के लिए आवेदन दे रखे हैं. अब ये आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. बता दें की शिक्षा विभाग में फिलहाल तबादलों पर भी रोक लगी हुई है. बेहद ही गंभीर परिस्थिति में ट्रांसफर भी मंत्री के अनुमोदन से ही हो सकेंगे.   recent visitors 65