मध्य प्रदेश के पांच तीर्थयात्रियों की मौत, गुजरात में बस खाई में गिरी

अहमदाबाद/डांग। गुजरात में एक बड़ा हादसा हुआ है। दरअसल श्रद्धालुओं को लेकर जा रही एक बस खाई में गिर गई, जिसमें पांच श्रद्धालुओं की मौत हो गई। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं। घटना गुजरात के डांग की है। पुलिस ने बताया कि मरने वाले लोग मध्य प्रदेश के निवासी थे। बचाव और राहत कार्य पूरा हो चुका है। पुलिस ने बताया कि गुजरात के डांग जिले में रविवार सुबह तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक निजी बस के गहरी खाई में गिर जाने से पांच लोगों की मौत हो गई और 17 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रभारी पुलिस अधीक्षक एसजी पाटिल ने बताया कि दुर्घटना सुबह करीब 4.15 बजे हुई, जब सापुतारा हिल स्टेशन के पास बस के चालक ने बस पर से नियंत्रण खो दिया। उन्होंने बताया कि बस में 48 तीर्थयात्री सवार थे और हादसे में बस क्रैश बैरियर को तोड़ते हुए करीब 35 फीट गहरी खाई में गिर गई। पुलिस ने बताया कि बस महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर से श्रद्धालुओं को लेकर गुजरात के द्वारका जा रही थी। पुलिस ने बताया कि बस में श्रद्धालु मध्य प्रदेश के गुना, शिवपुरी और अशोक नगर जिलों के थे। अधिकारी ने बताया कि हादसे में मरने वाले पांच लोगों में से दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। इन पांचों की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को आहवा के एक सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। recent visitors 50

माध्‍यमिक शिक्षा मंडल ने जारी किए दिशा-निर्देश, शिक्षक नहीं जा पाएंगे महाकुम्भ, 15 मई तक नहीं मिलेगी छुट्टी

भोपाल अब मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं की परीक्षा में 20 दिन का समय शेष है।ऐसे में अब शिक्षक प्रयागराज में लगे महाकुंभ हो या संतान पालन अवकाश (सीसीएलई) के लिए अवकाश नहीं ले पाएंगे। इसका कारण यह है कि बोर्ड परीक्षाओं को लेकर शासन ने एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस (एस्मा) लगाने का आदेश जारी कर दिया है। शासन ने 15 फरवरी से 15 मई तक के लिए एस्मा लागू कर दिया है।   इस अवधि में परीक्षाओं में नियुक्त कर्मचारी, अधिकारी और अन्य स्टाफ अवकाश नहीं ले पाएंगे और हड़ताल भी नहीं कर सकेगा। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए है। मप्र बोर्ड की परीक्षा अति आवश्यक सेवा घोषित की गई है। इस वजह से परीक्षा की पूरी अवधि में एस्मा एक्ट लागू रहेगा। इस कारण अब शिक्षक छुट्टी पर नहीं जा सकेंगे। हालांकि महाकुंभ में जाने के लिए और संतान पालन अवकाश के लिए जिला स्तर पर शिक्षकों के काफी आवेदन आ रहे हैं। अब तक करीब 150 आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी(डीईओ) के पास आए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने भी शिक्षकों के अवकाश को स्वीकृत नहीं करने का आदेश जारी किए हैं।  मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की 24 फरवरी से शुरू होने वाली बोर्ड परीक्षा अति आवश्यक सेवा घोषित की गई है। इस वजह से परीक्षा की पूरी अवधि में एस्मा एक्ट लागू रहेगा। सीसीएल के कई आवेदन आए परीक्षा के पहले कई शिक्षक व शिक्षिकाओं ने सीसीएल व अन्य तरह की छुट्टी के लिए आवेदन लगा रहे हैं। डीईओ कार्यालयों में कई शिक्षकों के आवेदन पेंडिंग हैं। कमिश्नर व कलेक्टर की पांच फरवरी को होगी बैठक मप्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों को लेकर प्रदेश के सभी संभाग कमिश्नर व कलेक्टरों की वीडियाे कांफ्रेसिंग पांच फरवरी को आयोजित की जा रही है। इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं कि माशिमं द्वारा आयोजित परीक्षाएं वर्ष 2024-25 की व्यवस्थाओं के संबंध में पांच फरवरी को दोपहर 12 से दो बजे तक वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई है।   recent visitors 30

आज अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल, भारत की नजरें लगातार दूसरे खिताब पर होगी, कहां और कैसे देखें लाइव

नई दिल्ली अंडर-19 वर्ल्ड कप 2025 में जीत की डबल हैट्रिक लगाकर फाइनल में पहुंची टीम इंडिया की नजरें खिताब को डिफेंड करने पर होगी। भारत ने पिछला अंडर-19 टी20 वर्ल्ड कप शेफाली वर्मा की अगुवाई में जीता था। इस बार भी भारत की नजरें लगातार दूसरे खिताब पर होगी। वहीं साउथ अफ्रीका की टीम भी खिताब को अपने नाम करने के इरादे से उतरेगी। प्रोटियाज टीम का भी इस वर्ल्ड कप में विजय रथ जारी है, उन्होंने भी अभी तक टूर्नामेंट में एक भी हार का स्वाद नहीं चखा है। भारत सेमीफाइनल में इंग्लैंड को तो साउथ अफ्रीका ऑस्ट्रेलिया को हराकर यहां पहुंचा है। आइए इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका अंडर-19 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल से जुड़ी कुछ अहम जानकारियों पर एक नजर डालते हैं- फाइनल में रविवार, 2 फरवरी को खेला जाएगा। कहां खेला जाएगा? इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका आईसीसी अंडर-19 वुमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल कुआलालंपुर के बयूमास ओवल में खेला जाएगा। कितने बजे शुरू होगा? भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कैप्टन आधा घंटे पहले मैदान पर उतरेंगी। इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका आईसीसी अंडर-19 वुमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल की लाइव स्ट्रीमिंग आप डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर देख सकते हैं। recent visitors 68

मध्य प्रदेश के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, सरकार Time Scale Pay Grade का फार्मूला लागू कर सकती

भोपाल हाई कोई कोर्ट के पदोन्नति में आरक्षण नियम को निरस्त करने के आदेश के बाद से मध्य प्रदेश में नौ वर्ष से पदोन्नतियां बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने की व्यवस्था दी है। कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए सरकार ने नए नियम का प्रारूप भी बनवाया और मंत्री समूह का गठन भी किया पर अब तक कोई रास्ता नहीं निकला है। अब सरकार नए विकल्प पर विचार कर रही है। इसमें समयमान वेतनमान को आधार बनाया जा सकता है। समयमान वेतनमान की यह योजना 2008 में इसलिए बनाई गई थी ताकि जिन पात्र अधिकारियों को पदोन्नति नहीं मिल पाती है, उन्हें कम से कम उच्च पद का वेतनमान मिल जाए। 60 हजार कर्मचारी बिना पदोन्नत हुए रिटायर हो गए इसमें आरक्षण व्यवस्था नहीं रहती है। इसे ही पदोन्नति के लिए भी लागू किया जा सकता है। इससे किसी को कोई नुकसान भी नहीं होगा। पदोन्नति नियम नहीं होने के कारण बीते आठ वर्ष में 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नत हुए बिना ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हाईकोर्ट में नियम को चुनौती दी थी निर्माण विभागों के सामान्य श्रेणी के इंजीनियरों ने पदोन्नति नहीं मिलने के कारण हाई कोर्ट में दिग्विजय सरकार के समय बने मध्य प्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम 2002 को चुनौती दी थी। लंबी सुनवाई के बाद मई 2016 में ये नियम निरस्त करते हुए पदोन्नति में आरक्षण के प्रविधान समाप्त कर दिए गए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी, जहां याचिका अभी भी विचाराधीन है। इस बीच कर्मचारी आंदोलन हुए तो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज गोरकेला को नए नियम का प्रारूप बनाने का दायित्व दिया। उन्होंने सभी पहलुओं पर विचार कर प्रारूप भी दे दिया लेकिन सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया। अनुशंसा पर कोई निर्णय नहीं हुआ पदोन्नति के विकल्प के रूप में उच्च पद का प्रभार देने की व्यवस्था बना दी पर यह अभी तक सभी विभागों में लागू ही नहीं हो पाई। विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता में मंत्री समूह का गठन किया था, उसने भी सभी पक्षों से चर्चा के बाद अपनी अनुशंसा भी दे दी पर कोई निर्णय नहीं हुआ। पात्रता में आने पर दिया जाता है अब सरकार ने इस मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने के लिए विकल्प पर काम प्रारंभ कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि अभी समयमान वेतनमान योजना को पदोन्नति का आधार बनाने पर विचार किया जा रहा है। सेवा की एक निश्चित अवधि पूरी होने और पदोन्नति की पात्रता में आने पर समयमान वेतनमान दे दिया जाता है। सभी पक्षों से चर्चा होगी विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सेवा में आने के समय और गोपनीय चरित्रावली के आधार पर समयमान मिलता जाता है। इस व्यवस्था को पदोन्नति के विकल्प के रूप में अपनाया जा सकता है पर इसके लिए पहले सभी पक्षों से चर्चा होगी। कानूनी पहलुओं का अध्ययन करके सरकार के स्तर से नीतिगत निर्णय होगा। चार बार मिलता है समयमान वेतनमान प्रदेश में जो समयमान वेतनमान योजना लागू है, उसमें चार बार वेतनमान दिए जाते हैं। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को आठ, 16, 24 और 34 वर्ष की सेवा पूरी होने पर समयमान वेतनमान मिल जाता है। इसी तरह तृतीय और चर्तुथ श्रेणी के कर्मचारियों को 10, 20, 30 और 35 वर्ष की सेवा पूरी होने पर समयमान वेतनमान दिया जाता है। recent visitors 34

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर पुलिस ने गश्त बढ़ाई, जल्द ही ड्रोन से निगरानी होगी शुरू, पुलिस कानवाय से वाहनों को छोड़ रही

रतलाम  दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के रतलाम जिले की सीमा में रावटी व शिवगढ़ थाना क्षेत्र के करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में आए दिन वाहनों पर पथराव व लूट की वारदातें होती रहती है। दो दिन पहले भी लुटेरों ने एक वाहन में सवार लोगों को लूटने का प्रयास किया था। वाहन एक्सप्रेस-वे के गश्ती दल का होने से लुटेरे वारदात नहीं कर पाए। इसके पहले कई बार वाहनों पर पथराव की घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस ने हाईवे पर गश्त बढ़ा दी है। वहीं पथराव व लूट की वारदातों पर अंकुश लगाने तथा बदमाशों को पकड़ने के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। नाइट विजन के हाई क्वालिटी ड्रोन से होगी निगरानी नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने दो ड्रोन खरीदने की स्वीकृत दी है। पुलिस एक-दो सप्ताह में नाइट विजन के हाई क्वालिटी के ड्रोन खरीदकर उनसे निगरानी शुरू करेगी। मंदसौर के बाद रतलाम होकर झाबुआ होते हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे मुंबई की तरफ जाता है। 15 किमी क्षेत्र में होती हैं पथराव और लूट की वारदातें रतलाम जिले का करीब 90 किलोमीटर का एरिया आता है। मंदसौर व रतलाम एरिया का काम लगभग पूरा होने के साथ ही करीब डेढ़ वर्ष पहले इस पर आवागमन भी शुरू कर दिया गया है। जिले में रावटी व शिवगढ़ थाना क्षेत्र के करीब 15 किलोमीटर के एरिया में बदमाश पथराव व लूट की वारदातों को अंजाम देते हैं। पुलिस की गश्त का नहीं दिखता असर हाईवे पर कई बार वाहनों पर पथराव व लूट की वारदातें हो चुकी है। यात्रियों के सुरक्षा देने के लिए एनएचएआई के दल गश्त करते हैं। वहीं पुलिस भी गश्त करती हैं। गश्ती दल के आने के पहले या गश्त कर जाने के बाद बदमाश वाहनों पर पथराव कर वारदातें करते हैं। सात लाख रुपये से खरीदे जाएंगे ड्रोन रात के अंधेरे में वारदात कर बदमाश भाग जाते हैं। हर जगह सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से कई बार बदमाशों की पहचान भी नहीं हो पाती है। इसलिए अब बदमाशों की पहचान करने के लिए ड्रोन की मदद ली जाएगी। जानकारी के अनुसार पुलिस करीब सात लाख रुपये की लागत से हाई क्वालिटी के दो ड्रोन खरीदेगी। मोबाइल फोन पर भी देखे जा सकेंगे ड्रोन उच्च क्वालिटी के होंगे तथा उनमें वीडियो-फोटो एचडी में ही बनेंगे। फोटो की क्वालिटी ऐसी होगी कि उनमें जमीन पर दिखने वाले व्यक्ति को नाइट विजन कैमरा झूम करके रात में भी स्पष्ट रूप से देखकर पहचाना जा सकेगा। कैमरों की उच्च गुणवत्ता होने से उन्हें वाईफाई से जोड़कर अधिकारियों के मोबाइल फोन से कनेक्ट किया जाएगा तथा वे गतिविधियों को दो किलोमीटर तक की रेंज में देख सकेंगे। ड्रोन पुलिस कंट्रोल रूम से भी जोड़ा जाएगा। नाइट विजन कैमरों से निगरानी के लिए एक्सपर्ट को बुलाया जाएगा। वे स्थानीय पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे तथा कुछ समय उनके साथ रहेंगे। नाइट विजन कैमरे से लैस होंगे ड्रोन नाइट विजन कैमरे से लैस होंगे। वे ऊपर उड़ने के बावजूद जमीन पर होने वाली पत्थरबाजी के बदमाशों की गतिविधियों को थर्मल इमेज के जरिये कैप्चर कर लेंगे। वैसे ज्यादातर घटनाएं रावटी व शिवगढ थाना क्षेत्र के करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में होती हैं। वहीं नामली व सैलाना थाना क्षेत्र के भी कुछ स्थानों पर लूट व मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस ने नामली के पास से लेकर झाबुआ जिले की सीमा तक सात स्थानों को चिह्नित किया है, जहां विशेष निगरानी की जाएगी। पुलिस ने कानवाय शुरू किया     कानवाय शुरू की, शीघ्र ड्रोन शुरू करेंगे एक्सप्रेस-वे पर वाहनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक छोड़ने के लिए कानवाय शुरू कर दी गई है। गश्त बढ़ाई गई है। जल्द ही ड्रोन से निगरानी भी शुरू की जाएगी। – राकेश खाखा, एएसपी   recent visitors 60

मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत अब शराब की बोतल पर लगे बार कोड से पता चल जाएगा कि शराब नकली है या असली

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने शराब की कालाबाजारी रोकने के लिए नई व्यवस्था की है। नई आबकारी नीति के तहत अब शराब की बोतल पर लगे बार कोड से पता चल जाएगा कि शराब नकली है या असली। कागज की सील यानी एक्साइज लेबल (ईएल) पर बार कोड होगा, जिसे स्केन करते ही शराब की शुद्धता भी पता चलेगी। इतना ही नहीं शराब की बोतल किस गोदाम की है और किस दुकान से बेची गई है, यह जानकारी भी मिल जाएगी। नकली शराब की मिलावट को रोका जा सकेगा इससे मप्र के बाहर से आने वाली शराब की खपत और खाली बोतल में नकली शराब की मिलावट को रोका जा सकेगा। इसके अलावा शराब की दुकानों को कैशलेस भी किया जाएगा। केवल पीओएस मशीन से ही बिलिंग की जाएगी। वेयरहाउस भी स्मार्ट बनाए जाएंगे। वन क्षेत्रों के रिजार्ट में भी बार का मिल सकेगा लाइसेंस पहले व्यवस्था थी कि वन क्षेत्र के रिजार्ट में बार का लाइसेंस नगर से 30 किलोमीटर दूर और वन क्षेत्र से 20 किलोमीटर के अंदर सीमा में निर्धारित किया गया था, लेकिन इससे व्यावहारिक कठिनाई आ रही थी। कई क्षेत्रों में बार के लाइसेंस नहीं दिए जा सकते थे। ऐसे में यह दूरी भी घटाई जा रही है। अब शहर से सटे जंगलों में भी रिजार्ट में बार के लाइसेंस दिए जा सकेंगे। दरअसल, जंगल के रिजार्ट की लाइसेंस फीस कम होती है और इसके दुरुपयोग की संभावना बनी हुई थी, नई व्यवस्था इसका भी ध्यान रखा गया है। 16 हजार करोड़ का लक्ष्य, 13941 हजार करोड़ का मिला राजस्व प्रदेश में शराब की खपत लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही सरकार की राजस्व अय भी बढ़ रही है। साल 2024-25 में 16 हजार करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य रखा गया है। इसके विरुद्ध शराब दुकानों के नवीनीकरण और नीलामी से अब तक 13941 हजार करोड़ रुपये राजस्व मिलना सुनिश्चित हुआ है। इसके अलावा अन्य शुल्कों से भी राजस्व आय होनी है। वित्तीय वर्ष खत्म होने में अभी कुछ महीने बाकी हैं। इससे साफ है कि शराब बिक्री से सरकार को अच्छा खासा मुनाफा होगा। recent visitors 42

फाइटर विमान उड़ाने में मास्टर… शुभांशु शुक्ला जो स्पेस में रचने जा रहे इतिहास, मिशन कमांडर के रूप में काम करेंगे

 नई दिल्ली Indian Air Force के अनुभवी टेस्ट पायलट और ISRO के गगनयान मिशन के चुने हुए एस्ट्रोनॉट्स ग्रुप कैप्टन शुंभाशु शुक्ला Axiom Mission-4 प्रमुख मिशन पायलट होंगे. यह मिशन SpaceX के फॉल्कन-9 रॉकेट और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए पूरा होगा. इनकी लॉन्चिंग फ्लोरिडा से होगी. शुभांशु शुक्ला को हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के गगनयान मिशन के लिए 'प्राइम' अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया था. वह 1984 के बाद से अंतरिक्ष में जाने वाले भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री होंगे. उनकी यात्रा जून 2006 में लड़ाकू विंग में कमीशन के साथ शुरू हुई. एक अनुभवी परीक्षण पायलट के रूप में उन्होंने विभिन्न विमानों में 2000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव प्राप्त किया है. ग्रुप कैप्टन शुक्ला के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में तीन लोग और जा रहे हैं. ये हैं- अमेरिका से कमांडर पेगी व्हिटसन, पोलैंड से ESA की तरफ से मिशन स्पेशलिस्ट स्लावोश उजानस्की और हंगरी से मिशन स्पेशलिस्ट तिबोर कापू. शुक्ला इनके साथ प्राइम मिशन पायलट होंगे. कई विमान उड़ाने का अनुभव 10 अक्टूबर 1085 में लखनऊ में जन्मे शुभांशु की मिलिट्री ट्रेनिंग एनडीए में हुई है. वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में उन्हें 17 जून 2006 में शामिल किया गया. वो एक फाइटर कॉम्बैट लीडर हैं. साथ ही टेस्ट पायलट भी. उनके पास 2000 घंटे के उड़ान का अनुभव है. उन्होंने सुखोई-30एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर, एन-32 जैसे विमान और फाइटर जेट्स उड़ाए हैं. शुभांशु शुक्ला कौन हैं? 10 अक्टूबर 1985 को शुभांशु का जन्म लखनऊ में हुआ. जून 2006 में लड़ाकू पायलट के रूप में भारतीय वायु सेना (IAF) में कमीशन प्राप्त किया. इसके बाद मार्च 2024 में ग्रुप कैप्टन का बने. शुभांशु Su-30 MKI, MIG-21, MiG-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और An-32 सहित विभिन्न विमानों पर 2,000 से अधिक उड़ान की है. 2019 में रूस के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण लिया. भारत के गगनयान मिशन के लिए इसरो द्वारा चुने गए. ये देश का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है. नासा-एक्सिओम स्पेस सहयोग के तहत आईएसएस की यात्रा करने वाले पहले इसरो अंतरिक्ष यात्री. घर वापस लोगों के लिए फ़ोटो और वीडियो के माध्यम से अपने अंतरिक्ष अनुभव को कैद करने की योजना बना रहे हैं. जब शुक्ला को इसरो से फोन आया एक्स-4 मिशन का नेतृत्व पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन करेंगी, जो Axiom Space की मानव अंतरिक्ष उड़ान की निदेशक हैं. 2019 में शुक्ला को इसरो से एक ऐतिहासिक फोन आया. उन्होंने मॉस्को, रूस में यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कठोर प्रशिक्षण पर काम करना शुरू किया. 27 फरवरी 2024 को पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्ला को गगनयान के लिए अंतरिक्षयात्री घोषित किया.  अगस्त 2024 में, शुक्ला को आगामी इंडो-यूएस मिशन के लिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 'प्राइम' अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया था. मिशन में भारत के अलावा पोलैंड-हंगरी के एस्ट्रोनॉट्स भी कमांडर पैगी व्हिटसन- पैगी ने Ax-2 मिशन की कमांडर के रूप में काम किया है। पैगी ने नासा के एक मिशन में 675 दिन काम किया हैं। वे अमेरिका की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं। पायलट शुभांशु शुक्ला- शुभांशु भारतीय वायुसेना में पायलट हैं। उन्हें इसरो के गगनयान मिशन के लिए चुना गया है। यह भारत का अंतरिक्ष में पहला मैन्ड मिशन है। मिशन स्पेशलिस्ट स्लावोज उज्नान्सकी-विज्निएव्स्की- पोलैंड के स्लावोज CERN के इंजीनियर रह चुके हैं। स्लावोज यूरोपियन स्पेस एजेंसी के एस्ट्रोनॉट रिजर्व क्लास ऑफ 2022 के सदस्य हैं। मिशन स्पेशलिस्ट तिबोर कापू- कापू हंगरी के एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जो स्पेस रेडिएशन प्रोटेक्शन में महारत रखते हैं। 2023 में वे HUNOR (हंगेरियन-टु-ऑर्बिट) के लिए चुने गए थे। शुभांशु बोले- अंतरिक्ष में योग करूंगा, तस्वीरें लाऊंगा नाम के ऐलान के साथ ही एग्जियम मिशन 4 पर नासा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें पायलट शुभांशु ने कहा कि जो मिशन आ रहा है उसमें मैं अपने साथ कुछ इंडियन फूड लेकर जाऊंगा, जो अपने साथियों को भी खिलाऊंगा। अंतरिक्ष में योग भी करूंगा। वहां की तस्वीरें लाऊंगा, ताकि भारतवासियों को गर्व का मौका मिले। 14 दिन ISS पर रिसर्च करेगा AXM-4 ISS का पहला प्राइवेट अंतरिक्ष यात्री मिशन, एग्जियम मिशन 1 अप्रैल 2022 में लॉन्च किया गया था, जो ऑर्बिटिंग लैब में 17 दिनों तक रहा। दूसरा एग्जियम मिशन 2, मई 2023 में भेजा गया था। इस मिशन ने ISS पर आठ दिन बिताए। एग्जियम मिशन 3, जनवरी 2024 में लॉन्च किया गया था। इसने स्टेशन पर 18 दिन बिताए। एग्जियम मिशन 4 के लिए 14 दिन का समय तय किया गया है। अब जानिए पायलट शुभांशु के बारे में… शुभांशु का जन्म 10 अक्टूबर 1985 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। उनकी उम्र 38 साल है। वे एक फाइटर पायलट और कॉम्बेट लीडर हैं। recent visitors 41