प्रदेश पर्याप्त बिजली उपलब्धता के साथ आगे बढ़ रहा, उपलब्ध क्षमता 23788 मेगावॉट हुई

भोपाल प्रदेश हर बिजली उपभोक्ता को सतत एवं निर्वाध विद्युत आपूर्ति करने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश पर्याप्त बिजली उपलब्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश की रिकार्ड विद्युत उपलब्ध क्षमता 23 हजार 788 मेगावॉट है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में विभाग लगातार उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के साथ ही उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण भी कर रहा है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि दिसम्बर-2023 से नवंबर-2024 तक कुल 10136 करोड़ यूनिट बिजली दी गई, जो कि विगत वर्ष इस अवधि में प्रदाय की गई बिजली से 1.67 प्रतिशत अधिक है। गत 20 दिसम्बर को इतिहास में आज तक की सर्वाधिक 18913 मेगावॉट बिजली आपूर्ति सफलतापूर्वक की गई। मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा ड्रोन की सहायता से लाइनों की पेट्रोलिंग तथा अति उच्च दाव उप केन्द्रों का रिमोट ऑपरेशन किया जा रहा है। प्रदेश के घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को विगत वर्षों की तरह वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिये लागू टैरिफ दरों में राहत देने के लिये बिजली कंपनियों को अनुमानित 24 हजार 420 करोड़ 8 लाख रूपये की सब्सिडी देने का निर्णय राज्य शासन द्वारा लिया गया है। यह सब्सिडी अटल गृह ज्योति योजना, अटल कृषि ज्योति योजना, टैरिफ सब्सिडी और नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना में दी जायेगी। अटल गृह ज्योति योजना में दिसम्बर-23 से नवंबर-24 तक लगभग 5482 करोड़ रूपये की, अटल कृषि योजना में 13042 करोड़ रूपये और नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना में 4710 करोड़ रूपये की राहत दी गई है। अटल गृह ज्योति योजना में प्रति माह एक करोड़ से अधिक, अटल कृषि ज्योति योजना में 26 लाख 59 हजार और नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना में 9 लाख 3 हजार कृषि उपभोक्ता प्रति माह लाभान्वित हो रहे हैं। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृहों द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में अब तक का सर्वाधिक 28627 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन का नया रिकार्ड बनाया गया है। यह पॉवर जनरेटिंग कंपनी के इतिहास का सर्वाधिक ताप विद्युत उत्पादन है। ताप विद्युत गृहों द्वारा विभिन्न मापदंडों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया गया। ताप विद्युत गृहों का इस दौरान प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) 60.3 प्रतिशत रहा, जो वर्ष 2019-20 के पश्चात् सर्वाधिक है। वित्तीय वर्ष 23-24 के दौरान 13 थर्मल इकाइयों ने लगातार 100 दिनों एवं अधिक सतत् व निर्बाध विद्युत उत्पादन किया, जिनमें से दो इकाइयों ने 200 दिनों से अधिक समय तक विद्युत उत्पादन किया। प्रदेश में बिजली अधोसंरचना का लगातार विकास हो रहा है। वर्तमान में 33 के.वी. लाइंस 61 हजार 162 किलोमीटर हो गई है। 33 के.वी. लाइंस वर्ष 2003 में 29 हजार 70 किलोमीटर, वर्ष 2008 में 33 हजार 913 , वर्ष 2011 में 38 हजार 867, वर्ष 2013 में 41 हजार 528, वर्ष 2014 में 43 हजार 910 और वर्ष 2024 में 61 हजार 162 किलोमीटर हो गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में मार्च 2024 तक 3165 किलोमीटर 11 केव्ही लाइन का विस्तार किया गया है। यह क्रम लगातार जारी है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई ने 210 मेगावाट स्थापित क्षमता की यूनिट को लगातार 300 दिन तक संचालित करने में सफलता हासिल की है। यह विद्युत यूनिट की स्थापना के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसी तरह श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया (एसएसटीपीपी खंडवा) के अभियंताओं और कार्मिकों ने एक बार फिर कमाल दिखाते हुए 660 मेगावाट स्थापित क्षमता की यूनिट नंबर 3 को 200 दिन तक संचालित करने में सफलता हासिल की है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिये अधोसंरचना निर्माण के उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। ट्रांसमिशन व्यवस्था मजबूत करने के लिये वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14 अति उच्चदाब उप केन्द्रों की स्थापना की गई है। साथ ही 26 अति उच्चदाब पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत किये गये हैं। कुल 818.170 सर्किट किलोमीटर अति उच्चदाब लाइन का निर्माण भी किया गया है। यही नहीं 25 अतिरिक्त अति उच्चदाब पॉवर ट्रांसफार्मर की स्थापना एवं 40 अति उच्चदाब पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कर अति उच्चदाब उप केन्द्रों की क्षमता में 4630 एमव्हीए की वृद्धि भी की गई है। किसानों को शीघ्र स्थायी सिंचाई पंप कनेक्शन दिये जाने के उद्देश्य से स्वयं का ट्रांसफार्मर लगाये जाने की योजना लागू की गई है। योजना में किसान स्वयं अथवा समूह में निर्धारित मापदंड के अनुसार ट्रांसफार्मर स्थापित कर सकते हैं। योजना में नवंबर 2024 तक एक लाख 40 हजार 101 ट्रांसफार्मर स्थापित किये जा चुके हैं। प्रदेश में औद्योगिक व उच्च दाब (एचटी) विद्युत उपभोक्ताओं, निम्न दाब (एलटी) औद्योगिक और गैर घरेलू उपभोक्ताओं (जिनका लोड 10 किलोवाट से अधिक है) के लिए नये विद्युत टैरिफ में दिन के समय में (सौर ऊर्जा अवधि के घंटों के दौरान) सुबह 9 से शाम 5 बजे तक की गयी खपत पर ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट तथा शाम 5 से रात्रि10 बजे के दौरान की गयी ऊर्जा खपत पर 20 प्रतिशत का सरचार्ज लागू किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को दिन के समय खपत करने पर उनके विद्युत देयकों में कमी आयी है, साथ ही उच्चतम मांग अवधि के दौरान कोयला आधारित विद्युत की मांग पर नियंत्रण हो रहा है। उन्होंने बताया है कि विद्युत वितरण कंपनियों की इस योजना से प्रदेश के कुल 10025 औद्योगिक एवं उच्च दाब उपभोक्ता लाभान्वित हुए हैं। इनको प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा अप्रैल से अब तक 310 करोड़ 66 लाख रूपए का रिबेट प्रदान किया गया है। recent visitors 58

भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में

मुंबई  भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में हैं। हिंदू बिजनसलाइन की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अंबानी ने रिलायंस जियो के आईपीओ की तैयारियां शुरू कर दी है। कंपनी का आईपीओ 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक इसमें ऑफर ऑफ सेल के साथ-साथ ताजा शेयर भी जारी किए जाएंगे। यह आईपीओ साल की दूसरी छमाही में आ सकता है। हुंडई मोटर इंडिया पिछले साल 27,870.16 करोड़ रुपये का आईपीओ लाई थी जो देश में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस जियो के आईपीओ के लिए प्री-आईपीओ प्लेसमेंट पर शुरुआती बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है। इनवेस्टमेंट बैंकर्स का कहना है कि यह इश्यू बड़ा हो सकता है और इसमें सब्सक्रिप्शन की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। प्री-प्लेसमेंट की राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि इसमें फ्रेश इश्यू का साइज क्या होगा। ओएफएस और फ्रेश इश्यू का हिस्सा कितना होगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इस बारे में रिलायंस को भेजे ईमेल का कोई जबाव नहीं आया। किस-किस की है हिस्सेदारी सूत्रों का कहना है कि रिलायंस जियो के आईपीओ में ओएफएस कंपोनेंट अहम होगा क्योंकि इससे कई मौजूदा निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका मिलेगा। कंपनी में विदेशी निवेशकों की 33 फीसदी हिस्सेदारी है। रिलायंस ने साल 2020 में अबू धाबी इनवेस्टमेंट फंड, केकेआर, मुबादला और सिल्वर लेक जैसे विदेशी फंड्स से 18 अरब डॉलर जुटाए थे। कई ब्रोकरेज का कहना है कि रिलायंस जियो की वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर हो सकती है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कंपनी की नजर 120 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर है। अंबानी एआई सेक्टर में भी बड़ा दांव खेल रहे हैं। एआई लेंग्वेज मॉडल विकसित करने के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में एनवीडिया से हाथ मिलाया है। टेक के साथ-साथ एआई पुश से रिलायंस जियो दूसरी स्टार्टअप कंपनियों से आगे निकल सकती है। कंपनी को सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज शुरू करने के लिए भी रेगुलेटरी मंजूरी मिल गई है। रिलायंस ने अपने टेलीकॉम, इंटरनेट और डिजिटल बिजनस को मजबूत करने के लिए पिछले पांच साल में अधिग्रहण पर 3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है। अक्टूबर के अंत तक कंपनी के 46 करोड़ सब्सक्राइबर थे। पिछले साल जून में कंपनी ने टैरिफ बढ़ाया था जिसके कारण उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या में गिरावट आई है। लेकिन इसके बावजूद वह नंबर 1 बनी हुई है। टैरिफ बढ़ाने से सितंबर तिमाही में कंपनी के मुनाफे में काफी तेजी आई है। इसे लिस्टिंग से पहले 5जी सर्विसेज को मॉनीटाइज करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। recent visitors 82

इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी अब आखिरी दौर में, मेट्रो का परिचालन शुरू होते ही शहर की ट्रैफिक व्यवस्था एक नई उपलब्धि हासिल कर लेगी

इंदौर  इंदौर में जल्द ही मेट्रो ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। मेट्रो रेल परियोजना के वाणिज्यिक परिचालन को अब मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की हरी झंडी का इंतजार है और सब कुछ ठीक रहा, तो शहर में इस महीने या अगले महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू कर सकती है। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। सीएमआरएस की हरी झंडी का इंतजार उन्होंने बताया कि एमपीएमआरसीएल द्वारा सीएमआरएस को जरूरी दस्तावेज जमा किए जाने का काम अंतिम दौर में है और इसके बाद सीएमआरएस का दल मेट्रो रेल के डिपो और स्टेशनों के निरीक्षण की तारीख तय करके सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेगा। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद सीएमआरएस की हरी झंडी मिलने की स्थिति में शहर में मेट्रो रेल का वाणिज्यिक परिचालन इस महीने या फरवरी से शुरू हो सकता है। शुरुआत में चलाई जाएगी तीन डिब्बों की मेट्रो ट्रेन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआत में तीन डिब्बों की मेट्रो ट्रेन चलाई जाएगी. यात्रियों की संख्या बढ़ने पर मेट्रो में तीन अतिरिक्त डिब्बे जोड़ दिए जाएंगे. डिब्बों को बढ़ाने का फैसला यात्रियों की तादाद पर निर्भर होगा. बताया जा रहा है कि मेट्रो ट्रेन के एक डिब्बे में 300 यात्री सफर करेंगे और सीट पर बैठने वाले 50 यात्री शामिल हैं. इंदौर में 7500 करोड़ की लागत वाली मेट्रो ट्रेन परियोजना के पहले चरण नींव 14 सितंबर 2024 को रखी गई थी.  शहर में गोल आकार वाला करीब 31.50 किलोमीटर लंबा मेट्रो ट्रेन का गलियारा का बनाया जाना है. मेट्रो ट्रेन के चलने की खबर से इंदौर वासी उत्साहित हैं. अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में शहर के गांधी नगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-तीन के बीच 5.90 किलोमीटर के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कॉरिडोर पर मेट्रो रेल चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस कॉरिडोर पर मेट्रो रेल प्रायोगिक परीक्षण (ट्रायल रन) सितंबर 2023 में किया गया था। बहरहाल, जानकारों का कहना है कि इस मार्ग पर छितराई आबादी के कारण मेट्रो रेल को शुरुआत में यात्रियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। छह डिब्बों की ट्रेन दौड़ेगी एमपीएमआरसीएल अधिकारी ने कहा, ‘‘शहर में एक बार मेट्रो रेल शुरू हो जाने और इसके मार्ग की लम्बाई बढ़ने के बाद यात्रियों की कोई कमी नहीं होगी।" अधिकारी ने बताया कि शहर में मेट्रो रेल के स्टेशन इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि इनके जरिये छह डिब्बों की रेल चलाई जा सकती है। उन्होंने हालांकि बताया,‘‘शुरुआत में हम तीन डिब्बों की रेल चलाएंगे। यात्रियों की तादाद बढ़ने पर इसमें तीन और डिब्बे जोड़े जा सकते हैं।’’ अधिकारी ने बताया कि मेट्रो रेल के एक डिब्बे में करीब 300 यात्री सफर कर सकते हैं जिनमें सीट पर बैठने वाले 50 लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर में 7,500. 80 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण की नींव 14 सितंबर 2019 को रखी गई थी। इसके तहत शहर में गोल आकार वाला करीब 31.50 किलोमीटर लम्बा मेट्रो रेल गलियारा बनाया जाना है। recent visitors 107

2023-24 में लड़कियों के स्कूली नामांकन में 16 लाख की कमी, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज

नई दिल्ली भारत में स्कूलों जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2023-24 में करीब 37 लाख छात्रों ने स्कूली पढ़ाई छोड़ी दी है, जिनमें 16 लाख लड़कियां शामिल हैं. साल 2022-23 के मुकाबले 2023-24 में स्कूली छोड़ने वाली छात्रों की संख्या अधिक है. शिक्षा मंत्रालय की एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE) की एक रिपोर्ट में यह डेटा में सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में कुल 25.17 करोड़ छात्र स्कूलों में नामांकित थे, जबकि 2023-24 में यह संख्या घटकर 24.80 करोड़ रह गई और 2021-2022 में करीब 26.52 करोड़ था. इसके अनुसार, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के नामांकन में 37.45 लाख की गिरावट आई है. इस तरह2023-24 में लड़कियों के नामांकन में 16 लाख की कमी आई, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज की गई. अल्पसंख्यकों की भागीदारी UDISE 2023-24 ने पहली बार छात्रों का व्यक्तिगत डेटा और स्वैच्छिक आधार पर उनके आधार नंबर जुटाए. 2023-24 तक 19.7 करोड़ छात्रों ने अपने आधार नंबर शेयर किए. कुल नामांकन में 20% छात्र अल्पसंख्यक समुदायों से थे. इनमें 79.6% मुस्लिम, 10% ईसाई, 6.9% सिख, 2.2% बौद्ध, 1.3% जैन और 0.1% पारसी समुदाय से थे. जातीय वर्गीकरण रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल लेवल पर पंजीकृत (UDISE डेटा के अनुसार), 26.9% छात्र सामान्य वर्ग से, 18% अनुसूचित जाति से, 9.9% अनुसूचित जनजाति से और 45.2% अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों में स्कूलों, शिक्षकों और नामांकित छात्रों की उपलब्धता अलग-अलग है। 'घोस्ट स्टूडेंट्स' की पहचान व्यक्तिगत डेटा से फर्जी छात्रों ('घोस्ट स्टूडेंट्स') की पहचान और सरकार की योजनाओं का लाभ सही छात्रों तक पहुंचाने में मदद मिली. इससे सरकारी खर्च में बचत और बेहतर प्रबंधन संभव हुआ. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तिगत छात्र डेटा जुटाया गया. इसलिए, यह डेटा 2021-22 या उससे पहले के आंकड़ों से तुलनात्मक नहीं है. यह प्रक्रिया स्कूल-वार डेटा से अलग है, जिससे शिक्षा प्रणाली की वास्तविक स्थिति सामने आती है. राज्यों में स्कूल और छात्रों का अनुपात उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान में स्कूलों की संख्या छात्रों की तुलना में अधिक है. वहीं, तेलंगाना, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और बिहार में छात्रों की संख्या स्कूलों से ज्यादा है. यह रिपोर्ट बताती है कि नई डेटा प्रणाली से छात्रों के ड्रॉपआउट और शिक्षा में प्रगति को सटीकता से ट्रैक किया जा सकेगा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा. recent visitors 191

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में कई प्रमुख बाजारों की सड़कों का चौड़ीकरण जल्द

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में कई प्रमुख बाजारों की सड़कों का चौड़ीकरण होने वाला है, इसे लेकर टेंडर जारी किया जा रहा है. नगर निगम द्वारा एक-दो दिनों में मार्किंग शुरू कर दी जाएगी. इस चौड़ीकरण पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने वाली है. यह चौड़ीकरण लंबे समय से पेंडिंग था. उज्जैन के नगर निगम कमिश्नर आशीष पाठक ने बताया कि उज्जैन में कई प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण किया जा रहा है. इसे लेकर महापौर परिषद ने भी निर्णय लिया है. प्रमुख रूप से निकास चौराहा से कंठाल, गाड़ी अड्डा चौराहे से विक्रमादित क्लॉथ मार्केट, केडी गेट जूना सोमारिया होते हुए शिप्रा नदी की बड़ी पुल तक चौड़ीकरण होगा. इसके अतिरिक्त खजूर वाली मस्जिद से अब्दलपुरा, रविंद्र नाथ टैगोर मार्ग जीवाजी गंज से गणेश चौक तक चौड़ीकरण किया जाएगा.  इसके अलावा कोयला फाटक से छत्री चौक, गोपाल मंदिर तक चौड़ीकरण होगा. इसी तरह गदा पुलिया से रविशंकर नगर, जयसिंहपुरा होते हुए लालपुर ब्रिज तक चौड़ीकरण किया जाएगा.   मार्किंग को लेकर क्या बोले कमिश्नर उज्जैन में होने वाले चौड़ीकरण की मार्किंग को लेकर नगर निगम कमिश्नर आशीष पाठक ने एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत के दौरान कहा कि एक-दो दिनों में मार्किंग शुरू हो जाएगी. पहले चौड़ीकरण की मार्किंग होगी.  इसके बाद टेंडर लगाए जाएंगे. जैसे ही टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होगी, वैसे ही चौड़ीकरण शुरू हो जाएगा. सिंहस्थ 2028 को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय उज्जैन के महापौर मुकेश टेटवाल ने बताया कि सिंहस्थ 2028 को लेकर चौड़ीकरण को काफी महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है. पूर्व में भी चौड़ीकरण की मांग उठती आई है, मगर अब सिंहस्थ के पहले सड़कों का चौड़ीकरण इसलिए भी जरूरी माना जा रहा है क्योंकि उज्जैन में सिंहस्थ में पिछले सिंहस्थ 2016 की तुलना में बड़ी संख्या में अधिक श्रद्धालु आएंगे. recent visitors 110

डीजीपी ने कहा मध्य प्रदेश में बढ़ रहे साइबर अपराध, नशा और यातायात दुर्घटना गंभीर चुनौती

भोपाल  मध्य प्रदेश में साइबर क्राइम का मामला बढ़ता जा रहा है. इस बीच प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने नए साल पर पुलिस विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को एमपी में बढ़ रहे साइबर अपराध, नशा और यातायात दुर्घटना को गंभीर चुनौती बताते हुए साल 2025 में इन पर रोक लगाने की अपील की है. डीजीपी का संदेश सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाणा ने साल 2025 के शुभकामना संदेश में मध्य प्रदेश पुलिस की दिशा तय करने के संकेत दे दिए हैं. डीजीपी ने अपने संदेश में कहा, "साल 2024 मध्य प्रदेश पुलिस के लिए चुनौती पूर्ण रहा है लेकिन कई उल्लेखनीय उपलब्धियां भी पुलिस ने हासिल की हैं. मध्य प्रदेश में साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है". डीजीपी साल 2025 को लेकर पुलिस को टास्क भी दिया है. डीजीपी ने कहा है कि मध्य प्रदेश में बढ़ रहे साइबर अपराध, नशा और यातायात दुर्घटना गंभीर चुनौती है. इन पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस की और अधिक सक्रियता जरूरी है. इसके अलावा आम लोगों में इसके बचाव हेतु "जागरूकता अभियान" भी निरंतर जारी रखने की आवश्यकता है. अपराधों में तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाना चाहिए- डीजीपी डीजीपी ने पुलिस विभाग को दिए अपने संदेश में कहा है कि पुलिस कर्मियों को अपने स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति भी जागरूक रहने की जरूरत है. इसके लिए पुलिस विभाग द्वारा योग और ध्यान केंद्र के कार्यक्रम चलाए जाने की योजना है. डीजीपी कैलाश मकवाणा ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है, "मेरी अपेक्षा है कि महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता बरतते हुए उनके विरुद्ध घटित अपराधों में तत्काल कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए". बता दें, हाल के दिनों में साइबर क्राइम की कई घटनाओं ने पुलिस-प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा था. जिसके बाद डीजीपी का यह कदम अहम माना जा रहा है. recent visitors 112

हमास की लड़ाकों की संख्या तेजी से बढ़ी, हमास की भर्ती बढ़ाएगी आईडीएफ की टेंशन, गाजा में हमास जारी रखे हुए है अपनी लड़ाई

तेल अवीव  गाजा पट्टी में अक्टूबर, 2023 से हमास और इजरायल के बीच भीषण लड़ाई चल रही है। इसमें फिलिस्तीनी गुट हमास को बीते कुछ समय में काफी नुकसान उठाना पड़ा है। उसके ज्यादातर शीर्ष नेता और कमांडर हालिया महीनों में मारे गए हैं। ऐसे में हमास के खत्म हो जाने के दावे भी कुछ एक्सपर्ट हालिया समय में करने लगे थे लेकिन इस गुट ने एक बार फिर तगड़ी वापसी की है। इजरायली वेबसाइट यरूशलम पोस्ट और चैनल 12 ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमास नए लड़ाकों की भर्ती करके गाजा पट्टी में इजरायली सेना (आईडीएफ) के सामने जोरदार वापसी कर रहा है। ये रिपोर्ट इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की चिंता बढ़ा सकती है। चैनल 12 ने बुधवार रात अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमास के पास अभी भी 20,000 से 23,000 लड़ाके हैं। आईडीएफ का दावा है कि उसने अब तक युद्ध के दौरान 17,000 से 20,000 हमास और इस्लामिक जिहाद के लड़ाकों को अब तक मारा है। आईडीएफ ने युद्ध के दौरान 6,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें से कम से कम 4,300 अभी भी हिरासत में हैं। हमास बढ़ा रहा है लड़ाकों की तादाद युद्ध की शुरुआत में आईडीएफ ने हमास के पास 25,000 लड़ाके होने का अनुमान लगाया था और अभी भी 23,000 तक लड़ाके हमास में होने की बात कही जा रही है। वहीं आईडीएफ 20 हजार लड़ाकों को युद्ध में मारने का भी दावा कर रहा है। ऐसे में साफ है कि बड़े स्तर पर भर्ती हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये साफ है कि हमास नए लड़ाकों को हथियार सौंप रहा है। हालांकि इनकी ट्रेनिंग पर कई तरह के सवाल हैं। ये लड़ाके उस तरह से ट्रैंड नहीं है, जैसे शुरुआती दौर में हमास के पास थे। हमास ने बड़ी संख्या ऐसे लड़ाके भी भर्ती किए हैं, जिनकी उम्र 20 या 18 साल से भी कम है। हमास के पुनरुत्थान और लड़ाकों की संख्या के बारे में परस्पर विरोधी रिपोर्ट भी सामने आई हैं। आईडीएफ और इजरायली अखबारों के दावे भी एक जैसे नहीं है।हालांकि इस सबके बीच इजरायल के उन दावो पर जरूर बड़ा सवाल उठता है, जिनमें बार-बार हमास के गाजा में बेहद कमजोर हो जाने का दावा किया जाता रहा है। साथ ही गाजा में चल रहे संघर्ष की वास्तविक स्थिति के बारे में सवाल उठता है, जहां लाखों लोग अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हो रहे हैं। recent visitors 153