साल 2024 :12 महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में नौ से लेकर 100 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई

भोपाल वर्ष 2024 में जैसे-जैसे दिन बीते रसोई पर खर्च बढ़ता रहा। यह खर्च उन्हीं वस्तुओं को खरीदने में हुआ, जिससे कुछ दिनों पहले तक कम दरों में खरीदा जाता रहा था। आटा, दाल, तेल, मसालों सहित ड्रायफ्रूट में लगी महंगाई की आग सब्जियों तक में पहुंच गई। इन 12 महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में नौ से लेकर 100 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। दिसंबर 2023 में सोयाबीन, सरसों सहित अन्य खाद्य तेलों के भाव 120 से 130 रुपये प्रतिलीटर थे। दिसंबर 2024 में इनकी कीमतें बढ़कर 140-150 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। सब्जियों ने भी साल भर रुलाया     जो सब्जियां 30 से 40 रुपये प्रति किलो मिलती थीं, जो बढ़कर 60 से 80 रुपये प्रति किलो इस दिसंबर में मिल रही हैं। इससे हर घर की रसोई का एक महीने का बजट 500 से 1000 रुपये तक बढ़ गया है।     भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू बताते हैं कि सरकार ने विदेश में गेहूं का निर्यात बढ़ाया। इससे अनाज मंडियों में गेहूं की आवक कम होने लगी और आटा महंगा हुआ।     सोयाबीन, सूरजमुखी के कच्चे तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने के कारण और पाम आयल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 137 रुपया प्रति लीटर हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम आइल महंगा होने से खाद्य तेलों के दाम बढ़ते गए।     करोंद सब्जी मंडी थोक विक्रेता कल्याण समिति के अध्यक्ष मोहम्मद नसीम बताते हैं कि इस वर्ष बिन मौसम वर्षा से फसल व सब्जियों की पैदावार 25 से 30 प्रतिशत कम रही। एक साल में ऐसे महंगा हुआ किराना दिसंबर 2023 से 29 दिसंबर-2024 तक किराना सामग्री में नौ प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई। वहीं, सबसे महंगा मखाना व बड़ी इलायची हुई। एक वर्ष में ऐसे महंगी हुईं सब्जियां सब्जी सब्जियों के भाव सब्जी विक्रेताओं से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिकिलो रुपये में दिए गए हैं। थोड़ा-बहुत अंतर संभव है। ..और ऐसे बढ़ गया हर घर की रसोई का बजट अर्थशास्त्री आरजी द्विवेदी बातते हैं कि बीते एक वर्ष में किराना व सब्जियों के दाम बढ़े हैं। महंगाई धीरे-धीरे बढ़ती रही। रोजमर्रा की आवश्यक खाद्य सामग्री 50 प्रतिशत तक बढ़ गई। इससे हर घर की रसोई का 20 से 25 प्रतिशत तक बजट बढ़ा है। उदाहरण के तौर पर एक चार से पांच सदस्यीय परिवार में हर महीने किराने की सामग्री 2500 से 3000 हजार रुपये तक आती थी। अब 3500 से 4000 रुपये तक सामग्री आने लगी है। वहीं हर महीने 1200 से 1800 तक सब्जियां आती थीं, जिसका बजट दोगुना हो गया है। recent visitors 74

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गर्भ ग्रह में पहुंचकर बाबा महाकाल का किया पूजन और अभिषेक

उज्जैन भारत के केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे जहां उन्होंने गर्भ ग्रह में पहुंचकर बाबा महाकाल का पूजन अभिषेक किया और उनका आशीर्वाद लेने के साथ ही मनोकामना भी की। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित घनश्याम शर्मा ने बताया कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने थल सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी के साथ मिलकर विश्वशांति हेतु श्री महाकालेश्वर भगवान का गर्भगृह में पहुंचकर पूजन अर्चन किया। इस दौरान संजय पुजारी, दिलीप पुजारी, प्रमोद पुजारी ने रूद्र मंत्रो से बाबा महाकाल का अभिषेक पूजन करवाया। नंदी हॉल में हाथ जोड़कर की प्रार्थना इसके बाद वे नंदी हॉल में पहुंचे और हाथ जोड़कर बाबा महाकाल से मनोकामना करते हुए दिखाई दिए। बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद आपने मीडिया से कहा कि मैं लंबे समय से यह प्रतीक्षा कर रहा था कि बाबा महाकाल के दर्शन हो जाएं। आज मुझे यह अवसर प्राप्त हुआ। बाबा महाकाल के दर्शन कर आज मेरा जीवन धन्य हो गया। इस दौरान प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सदस्य उमेश नाथ महाराज व अन्य लोग उपस्थित थे। मध्यप्रदेश दौरे पर हैं रक्षा मंत्री देश के रक्षा मंत्री इन दिनों दो दिवसीय दौरे पर मप्र में आए हैं। जहां वे इंदौर और महू के कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी के साथ उज्जैन पहुंचे। recent visitors 86

बांग्लादेश में भागवत कथा करने वाले को मिलेगी 1 करोड़ दक्षिणा : सैम वर्मा

बैतूल बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का भारत में पुरजोर विरोध जारी है. इस बीच मध्य प्रदेश के बैतूल में स्थित बालाजीपुरम मंदिर के संस्थापक ने एक बड़ा ऐलान किया है. सैम वर्मा ने कहा है कि जो भी कथावाचक बांग्लादेश में जाकर भागवत कथा करेगा, उसे एक करोड़ रुपये दक्षिणा के रूप में दी जाएगी. इतना ही नहीं, उस कथावाचक और उनके दल को बांग्लादेश आने-जाने के लिए बोइंग चार्टर विमान की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी. देश के पांचवें धाम के नाम से मशहूर बैतूल के बालाजीपुरम मंदिर संस्थान ने ऐतिहासिक घोषणा की है. संस्थान के संस्थापक एनआरआई सैम वर्मा ने बताया कि कोई भी भारतीय कथावाचक, जो बांग्लादेश में जाकर भागवत कथा आयोजित करने की हिम्मत दिखाएगा, उसे मंदिर प्रबंधन न केवल एक करोड़ रुपये की दक्षिणा देगा, बल्कि बांग्लादेश आने-जाने के लिए बोइंग चार्टर प्लेन की सुविधा भी उपलब्ध कराएगा. इस घोषणा के पीछे बालाजीपुरम मंदिर संस्थान ने अपनी मंशा भी स्पष्ट की है. सैम वर्मा के अनुसार, सनातन धर्म सभी धर्मों, मानवता, और प्राणियों की रक्षा करना सिखाता है. आज बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के हालात ऐसे हैं कि उन्हें भागवत कथा के ज्ञान की सबसे ज्यादा जरूरत है. इसके अलावा, भागवत कथा दल को बांग्लादेश भेजने के लिए सरकारी स्तर पर जो भी प्रयास जरूरी होंगे, वह भी बालाजीपुरम मंदिर संस्थान खुद उठाने को तैयार है. बालाजीपुरम मंदिर के संस्थापक सैम वर्मा का कहना है कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह मानवता और शांति का संदेश देती है. बांग्लादेश में मौजूदा परिस्थितियों में सनातन धर्म का यह संदेश पहुंचाना बेहद जरूरी है. हम हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं. हम चाहते हैं कि बांग्लादेश में सनातन धर्म का संदेश पहुंचे. इसके लिए जो भी सरकारी अनुमति या प्रक्रियाएं होंगी, हम वह सुनिश्चित करेंगे. बता दें कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. ऐसे में वहां भागवत कथा आयोजित करना न केवल एक चुनौती है, बल्कि इसके लिए साहस भी चाहिए. हालांकि, अब सवाल यह है कि क्या भारत के नामचीन कथावाचक बांग्लादेश जाने के लिए तैयार होंगे? और अगर कोई कथावाचक इस चुनौती को स्वीकार करता है, तो क्या भारत सरकार उसे वहां जाने की अनुमति देगी? बालाजीपुरम मंदिर का यह प्रस्ताव कई सवाल खड़े करता है. क्या कोई कथावाचक इस साहसिक कदम के लिए आगे आएगा? और क्या यह प्रयास बांग्लादेश में सनातन धर्म का संदेश पहुंचाने में सफल होगा? आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा.   recent visitors 50

पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर भारी और अत्याधुनिक हथियारों से हमला कर रहा तालिबान

काबुल पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और अफगानिस्तान इस समय खूनी जंग लड़ रहे हैं. अफगानिस्तान के तालिबानी लड़ाके डूरंड लाइन क्रॉस कर पाकिस्तान पर कहर बरपा रहे हैं. भारी मशीनगन और आधुनिक हथियारों से लैस तालिबानी लड़ाकोंने पाकिस्तानी चौकियों पर धावा बोल दिया है.   अफगानिस्तान के पूर्वी पक्तिका प्रांत में प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के कैंपों पर पाकिस्तानी बमबारी के बाद से दोनों ओर हमले जारी हैं. गुलाम खान क्रॉसिंग पर तालिबानी लड़ाके धड़ाधड़ा हमले कर रहे हैं. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि तालिबान बॉर्डर के पास उनकी चौकियों पर भारी और अत्याधुनिक हथियारों से हमला कर रहा है. वही, तालिबान का कहना है कि वह पाकिस्तान से सटी सीमा पर अराजक तत्वों को निशाना बना रहा है. टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि डूरंड लाइन पर दोनों ओर से हिंसक झड़प हो रही है. तालिबान ने पाकिस्तानी सेना की दो चौकियों पर कब्जा कर लिया है. तालिबानी सैनिकों ने भारी हथियारों का इस्‍तेमाल कर डूरंड लाइन पर मौजूद पाकिस्‍तानी सेना की कई चौकियों को आग के हवाले कर दिया. इस दौरान पाकिस्तानी सेना के 19 सैनिकों की मौत हो गई और बाकी भाग खडे़ हो गए. तालिबानी लड़ाके गोजगढ़ी, माटा सांगर, कोट राघा औऱ तरी मेंगल इलाकों में घुस गए हैं और जमकर गोलीबारी कर रहे हैं. इस बीच पाकिस्तानी सेना ने कहा कि उसने खुर्रम और उत्तरी वजीरिस्तान में घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम कर दिया है. क्या है तालिबान की रणनीति? अफगान तालिबान लंबे समय से यह दिखाता आया है कि वह किसी भी बड़े सैन्य शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को उसने वर्षों तक चुनौती दी और आखिरकार उन्हें अफगानिस्तान से लौटने पर मजबूर कर दिया. पाकिस्तान के पास न तो वैसी सैन्य ताकत है और न ही आर्थिक क्षमता, जिससे वह तालिबान का सामना कर सके. मीर अली बॉर्डर पर बढ़ती गतिविधियों के चलते पाकिस्तान ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है. सीमाई इलाकों में सैनिकों की तैनाती तेज कर दी गई है. स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और स्थिति किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रही है. तनाव बढ़ने के साथ ही यह देखना होगा कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह टकराव किस ओर बढ़ता है. तालिबान का उभार अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ था. पश्तो भाषा में तालिबान का मतलब होता है छात्र खासकर ऐसे छात्र जो कट्टर इस्लामी धार्मिक शिक्षा से प्रेरित हों. कहा जाता है कि कट्टर सुन्नी इस्लामी विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से पाकिस्तान में इनकी बुनियाद खड़ी की थी. तालिबान पर देववंदी विचारधारा का पूरा प्रभाव है. तालिबान को खड़ा करने के पीछे सऊदी अरब से आ रही आर्थिक मदद को जिम्मेदार माना गया. शुरुआती तौर पर तालिबान ने ऐलान किया कि इस्लामी इलाकों से विदेशी शासन खत्म करना, वहां शरिया कानून और इस्लामी राज्य स्थापित करना उनका मकसद है. शुरू-शुरू में सामंतों के अत्याचार, अधिकारियों के करप्शन से आजीज जनता ने तालिबान में मसीहा देखा और कई इलाकों में कबाइली लोगों ने इनका स्वागत किया लेकिन बाद में कट्टरता ने तालिबान की ये लोकप्रियता भी खत्म कर दी लेकिन तब तक तालिबान इतना पावरफुल हो चुका था कि उससे निजात पाने की लोगों की उम्मीद खत्म हो गई.   recent visitors 78

Bhopal Gas Tragedy के 40 साल बाद खत्म होगा जहरीला कचरा, शिफ्टिंग हुई शुरू

भोपाल  भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद जहरीले कचरे को हटाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. गैस त्रासदी के करीब 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से 337 टन जहरीला कचरा हटाया जा रहा है. यह कचरा राजधानी भोपाल से पीथमपुर में ले जाकर जलाया जाएगा. कचरे को ले जाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा. सभी कचरे को 12 हैडार्डस वेस्ट कंटेनर से पीथमपुर ले जाया जाएगा. दरअसल, कोर्ट में सुनवाई के बाद आए निर्णय के बाद से यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से कचरा हटाने की तैयारी की जा रही थी. इसको लेकर बीच में विवाद की भी स्थिति बनी हुई थी. लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के बाद इसे निस्तारण के लिए पीथमपुर ले जाने की तैयारी पूरी हो गई है. इस बीच आज से पुलिस की निगरानी में यह कार्य शुरू हो गया. यह पूरा कचरा पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में नष्ट किया जाएगा. मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट की फटकार के बाद ये एक्शन लिया है. एक सप्ताह पहले ही MP हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने भोपाल में फैक्ट्री साइट से कचरा न हटाए जाने पर सवाल उठाए थे. अदालत ने सरकार से पूछा था कि लगातार निर्देश दिए जाने के बाद भी कचरे का निपटारा क्यों नहीं किया जा रहा है? जबकि इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाई कोर्ट भी निर्देश जारी कर चुका है. सुनवाई के दौरान HC ने कहा था कि 'निष्क्रियता की स्थिति' एक और त्रासदी का कारण बन सकती है. सुबह-सुबह फैक्ट्री पहुंचे GPS से लैस ट्रक जहरीले कचरे को इंदौर ले जाने के लिए रविवार सुबह GPS से लैस आधा दर्जन ट्रक यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री साइट पर पहुंचे. इनके साथ लीक प्रूफ कंटेनर भी थे. मौके पर PPE किट पहने कर्मचारी, भोपाल नगर निगम के कर्मचारी, पर्वायरण एजेंसियों के लोग, डॉक्टर्स और कचरा डिस्पोज करने वाले विशेषज्ञ भी शामिल थे. फैक्ट्री के आसपास पुलिकर्मियों की तैनाती भी की गई थी. एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक प्लान के तहत जहरीले कचरे को इंदौर के पीथमपुरा में जलाया जाएगा. यह इलाका राजधानी भोपाल से करीब 250 किलोमीटर दूर है.   बनाया जा रहा 250 KM लंबा कॉरिडोर मध्य प्रदेश के गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह का के मुताबिक पीथमपुरा तक जहरीला कचरा पहुंचाने के लिए 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने कचरे के परिवहन और उसे डिस्पोज करने की तारीख नहीं बताई. लेकिन सूत्रों का कहना है कि 3 जनवरी तक कचरा पीथमपुरा पहुंच जाएगा. 3 महीने में जलकर राख हो जाएगा कचरा! डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने एजेंसी को बताया कि शुरुआत में कचरे का कुछ हिस्सा पीथमपुर की कचरा निपटान इकाई में जलाया जाएगा और अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच कर पता लगाया जाएगा कि उसमें कोई हानिकारक तत्व तो नहीं बचा है. डायरेक्टर ने कहा,'अगर सब कुछ ठीक रहा तो 3 महीने में कचरा जलकर राख हो जाएगा. लेकिन अगर जलने की गति धीमी रही तो इसमें 9 महीने तक लग सकते हैं. कचरा जलाने वाली 'भट्टी' से निकलने वाले धुएं को 4 लेयर फिल्टर्स से गुजारा जाएगा ताकि आसपास की हवा प्रदूषित न हो. इस प्रोसेस का हर पल रिकार्ड रखा जाएगा.' डबल लेयर के अंदर किया जाएगा डिस्पोज स्वतंत्र कुमार सिंह के मुताबिक,'एक बार जब कचरे को जला दिया जाएगा और हानिकारक तत्वों से मुक्त कर दिया जाएगा तो राख को दो-परत वाली मजबूत 'झिल्ली' से ढक दिया जाएगा और 'लैंडफिल' में दफना दिया जाएगा. ऐसा इसलिए किया जाएगा कि ताकि सुनिश्चित हो सके कि कचरा किसी भी तरह से मिट्टी और पानी के संपर्क में नहीं आएगा.' पीथमपुरा के आसपास के लोग कर रहे विरोध हालांकि, इस पूरी प्रोसेस का एक दूसरा पहलू भी है. पीथमपुरा के आसपास के लोग और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समूह वहां कचरा जलाने का विरोध कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि 2015 में पीथमपुर में परीक्षण के तौर पर 10 टन यूनियन कार्बाइड का कचरा नष्ट किया गया था. इससे कारण आसपास के गांवों की मिट्टी, जमीन का पानी और पानी के सोर्स प्रदूषित हो गए. हालांकि, स्वतंत्र कुमार सिंह ने इस दावे को खारिज कर दिया. हाई कोर्ट ने सरकार को लगाई थी फटकार बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर को 4 सप्ताह के अंदर जहरीले कचरे को फैक्ट्री से शिफ्ट करने की डेडलाइन दी थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि यह खेदजनक स्थिति है. अदालत ने सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो अदालत की अवमानना के तहत कार्रवाई की जाएगी. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एसके कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजनल बैंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था,'हम समझ नहीं पा रहे हैं कि समय-समय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद भी जहरीले कचरे को हटाने का काम शुरू क्यों नहीं हुआ है, जबकि कचरा हटाने के लिए 23 मार्च 2024 की योजना पर काम किया जाना था.' इस मुद्दे को लेकर अब 6 जनवरी को हाई कोर्ट में अगली सुनवाई होगी. पांच हजार से ज्यादा लोंगों की हुई थी मौत बता दें कि 2 दिसंबर 1984 की रात भोपाल की यूनियन कार्बाइड कीटनाशक फैक्ट्री से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनाइट (MIC) का रिसाव हुआ था. इस हादसे में 5,479 लोगों की मौत हो गई थी. गैस लीक की वजह से पांच लाख से ज्यादा लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ था. जिसका असर आज भी कई लोगों पर नजर आता है. इस हादसे के बाद कई लोग विकलांगता के शिकार हो गए थे. कचरा निपटारा मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? 2004 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई. कोर्ट ने भारत सरकार के रसायन और पेट्रोकेमिकल्स विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के विशेषज्ञों ने 2005 में कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए गुजरात के अंकलेश्वर में भरूच एनवायरो-इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (बीईआईएल) के स्वामित्व वाले एक विश्व स्तरीय भस्मक की पहचान की गई. लेकिन 2007 में गुजरात में विरोध प्रदर्शन और 2009 में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, … Read more

मुख्यमंत्री ने कहा – बस्तर ओलंपिक का आयोजन यह सिद्ध करता है कि शांति, विकास और सामूहिक प्रयासों से प्रत्येक चुनौती का सामना किया जा सकता है

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की 'मन की बात' में  बस्तर ओलंपिक आयोजन की प्रशंसा बस्तर ओलंपिक एक ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का हो रहा संगम: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों की ओर से जताया आभार मुख्यमंत्री ने कहा – बस्तर ओलंपिक का आयोजन यह सिद्ध करता है कि शांति, विकास और सामूहिक प्रयासों से प्रत्येक चुनौती का सामना किया जा सकता है रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात की 117वीं कड़ी में देश को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित बस्तर ओलंपिक-2024 की प्रशंसा की। मोदी ने कहा पहली बार हुए बस्तर ओलंपिक से बस्तर में नई क्रांति जन्म ले रही है। मेरे लिए यह बहुत ही खुशी की बात है कि बस्तर ओलंपिक का सपना साकार हुआ है। यह ओलंपिक उस क्षेत्र में हो रहा है जो जगह कभी माओवादी हिंसा का गवाह रहा है। मोदी ने कहा कि बस्तर ओलंपिक का शुभंकर है वनभैंसा और पहाड़ी मैना – इसमें बस्तर की समृद्ध संस्कृति की झलक दिखती है। इस बस्तर खेल महाकुंभ का मूलमंत्र है, ‘करसाय ता बस्तर, बरसाय ता बस्तर’ यानी खेलेगा बस्तर, जीतेगा बस्तर।   प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर ओलंपिक-2024 की सराहना करते हुए कहा कि पहली ही बार में बस्तर ओलंपिक में बस्तर संभाग के 7 जिलो के एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं युवाओं के संकल्प की गौरव गाथा है। एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो और बॉलीवॉल हर खेल में हमारे युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में बस्तर ओलंपिक के प्रतिभागियों के उत्साह का भी जिक्र किया। उन्होंने बस्तर की कारी कश्यप का जिक्र करते हुए कहा कि एक छोटे से गांव से आने वाली कारी जी ने तीरंदाजी में रजत पदक जीता है, वे कहती हैं बस्तर ओलंपिक ने हमें खेल का मैदान नहीं जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सुकमा की पायल कवासी जी की बात भी कम प्रेरणादायक नही है, जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतने वाली पायल जी कहती हैं कि अनुशासन और कड़ी मेहनत से जीवन में कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर के दोरनापाल में रहने वाले पुनेम सन्ना की कहानी को नए भारत की प्रेरक कथा बताते हुए कहा कि एक समय नक्सलियों के प्रभाव में आए पुनेम जी आज व्हीलचेयर पर दौड़कर मेडल जीत रहे हैं, उनका साहस और हौसला हर किसी के लिए प्रेरणा है। कोंडागांव के तीरंदाज रंजू सोरी जी को बस्तर यूथ आइकॉन चुना गया है, उनका मानना है बस्तर ओलंपिक दूरदराज के युवाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का अवसर दे रहा है। बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं यह ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है, जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर ओलंपिक के आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने आह्वान किया कि ऐसे खेल आयोजन को प्रोत्साहित करें और स्थानीय खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर दें। खेल से न केवल शारीरिक विकास होता है, बल्कि यह खेल भावना के विकास के द्वारा समाज को जोड़ने का भी एक सशक्त एवं प्रभावकारी माध्यम है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार बस्तर में बदलाव और यहां के लोगों के जीवन में खुशहाली लाने दृढ़संकल्पित है। बस्तर ओलंपिक में 1.65 लाख से अधिक लोगों का प्रतिभागी होना ओलंपिक की सफलता को दर्शाता है। बस्तर में अब बंदूक की आवाज नहीं, खेलों का शोर सुनाई देता है, हंसते-खेलते लोगों के चेहरे दिखाई देते हैं। निश्चित ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस प्रोत्साहन और विश्वास से हमारी सरकार को बस्तर की प्रगति के लिए कार्य करने की नई ऊर्जा मिलेगी, साथ ही बस्तरवासियों का मनोबल बढ़ेगा। लोगों के उत्साह ,ऊर्जा और सहभागिता ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। यह आयोजन भविष्य में भी खेल और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को और मजबूती प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक का आयोजन यह सिद्ध करता है कि शांति, विकास और सामूहिक प्रयासों से प्रत्येक चुनौती का सामना किया जा सकता है। recent visitors 45

अब प्रदेश सरकार अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी से देगी जनपद व ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों को सैलरी, कबसे होगा लागू, जाने

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने जनपद और ग्राम पंचायतों के अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन-भत्ते और मानदेय का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी की राशि का उपयोग करने के नए नियम जारी किए हैं। यह कदम पंचायत राज संस्थाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा। यह नियम 20 जनवरी से अमल होना शुरू हो जाएगा। मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 75 के तहत स्टाम्प ड्यूटी पर एक प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है। इस राशि का उपयोग पंचायती राज संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन-भत्तों और मानदेय का भुगतान करने के लिए किया जाएगा। यह कदम पंचायत संस्थाओं को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया है, जिससे पंचायतों के कार्यों में किसी भी तरह की कोई रुकावट न आ सके। राशि का उपयोग कैसे किया जाएगा? नए नियमों के तहत अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी से प्राप्त राशि का प्रमुख उपयोग जनपद पंचायत के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा जनपद पंचायत के पदाधिकारियों के मानदेय का भी भुगतान इसी राशि से किया जाएगा। ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायकों, सचिवों और पदाधिकारियों के मानदेय और वेतन का भुगतान भी इसी राशि से होगा। बचत राशि का होगा उपयोग अतिरिक्त राशि बचती है, तो उसे जनपद और ग्राम पंचायतों के अवसंरचना कार्यों में खर्च किया जाएगा। यह राशि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जनसंख्या के आधार पर पंचायतों को अंतरित की जाएगी, जिससे पंचायतों को बेहतर वित्तीय सहायता मिल सकेगी। recent visitors 54