UPI से जुड़ा नया नियम 1 जनवरी से होगा लागू, ज्यादा पैसे कर पाएंगे ट्रांसफर

नई दिल्ली 1 जनवरी से नियमों में कुछ बदलाव होने वाले हैं। लेकिन एक सबसे बड़ा बदलाव होने वाला है UPI नियमों में। आज हम आपको यूपीआई के नियमों की जानकारी देने वाले हैं। साथ ही बताएंगे कि इसमें क्या नया मिलने वाला है। RBI ने फैसला लिया है कि UPI 123Pay की ट्रांजैक्शन लिमिट में बदलाव किया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने लिमिट में इजाफा करने का फैसला लिया है। UPI 123Pay का इस्तेमाल करके यूजर्स 5 हजार की जगह 10 हजार रुपए की ट्रांजैक्शन कर पाएंगे। क्या होती है UPI 123Pay UPI 123Pay सर्विस यूजर्स को दी जाती है। ये एक ऐसी सर्विस है जिसमें यूजर्स को बिना इंटरनेट कनेक्शन पेमेंट करने का ऑप्शन दिया जाता है। यही वजह है कि आरबीआई की तरफ से ऐसी ट्रांजैक्शन को कंट्रोल करने के लिए पूरा प्रयास किया जाता है। लेकिन अब इसमें भी बदलाव कर दिया गया है। UPI 123Pay में यूजर्स को पेमेंट करने के अधिकतम 4 ऑप्शन दिए जाते हैं। इसमें IVR नंबर्स, मिस्ड कॉल्स, OEM-embedded Apps और साउंड बेस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। क्या है डेडलाइन UPI के नए नियमों को लेकर डेडलाइन जारी हो चुकी है। इसमें यूजर्स को 1 जनवरी 2025 तक का समय दिया जाएगा। यानी यूजर्स आसानी से इसके बाद 10 हजार रुपए तक की ट्रांजैक्शन कर पाएंगे। हालांकि इसके साथ ही OTP बेस्ड सर्विस को ऐड कर दिया गया है। यानी आपको पेमेंट करने के लिए OTP की जरूरत होगी। अगर आप पेमेंट करना चाहते हैं तो OTP का इस्तेमाल करना होगा। क्योंकि सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए इसका फैसला लिया गया है। विदेश में पहुंच चुकी है UPI श्रीलंका समेत कई देशों में भी UPI सर्विस की शुरुआत हो चुकी है। भारतीय सिस्टम ने देखते ही देखते बाहर तक पैर पसार लिए हैं। सरकार की तरफ से इसको लेकर नए फैसले लिए जाते हैं। recent visitors 67

जयपुर और जैसलमेर समेत कई शहरों में सोमवार सुबह विजिबिलिटी 30 मीटर से भी कम रही

जयपुर राजस्थान के कुछ हिस्से शीत लहर से जूझ रहे हैं, जयपुर शहर में कोहरे के कारण दृश्यता कम हो गई है। जयपुर में सोमवार सुबह तापमान नौ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजस्थान के माउंट आबू ने आज फिर बर्फ की चादर ओढ़ ली है। यहां के इस एकमात्र हिल स्टेशन में पिछले दो दिनों से तापमान में लगातार गिरावट आई है। प्रदेश के अधिकांश हिस्से घने कोहरे और शीतलहर की चपेट में हैं। जयपुर, जैसलमेर, चूरू, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, कोटा, अजमेर, अलवर, भरतपुर, दौसा, झुंझुनूं, सवाई माधोपुर, सीकर सहित कई शहरों में कोहरे के कारण गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई है। कड़ाके की ठंड और गलन के साथ मौसम विभाग ने 12 जिलों में कोहरे और शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया है। माउंट आबू का तापमान जमाव बिंदु से चार डिग्री नीचे -4 डिग्री सेल्सियस  माउंट आबू का तापमान जमाव बिंदु से चार डिग्री नीचे -4 डिग्री सेल्सियस था। सोमवार को इसमें एक डिग्री का सुधार जरूर हुआ। लेकिन, फिर भी माउंट आबू बर्फ से ढका हुआ है। माउंट आबू के उद्यान, मैदान और सड़कें सभी जगह बर्फीला मौसम है। नया साल आने में सिर्फ एक दिन पहले पर्यटकों के लिए यह मौसम और भी रोमांचक हो गया है। कश्मीर और हिमाचल का एहसास उन्हें अब माउंट आबू में हो रहा है। नया साल आने में सिर्फ एक दिन पहले पर्यटकों के लिए यह मौसम और भी रोमांचक हो गया है। कश्मीर और हिमाचल का एहसास उन्हें अब माउंट आबू में हो रहा है। प्रदेश के अधिकांश हिस्से घने कोहरे और शीतलहर की चपेट में राजस्थान के अधिकांश हिस्से घने कोहरे और शीतलहर की चपेट में हैं। जयपुर, जैसलमेर, चूरू, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, कोटा, अजमेर, अलवर, भरतपुर, दौसा, झुंझुनूं, सवाई माधोपुर, सीकर सहित कई शहरों में कोहरे के कारण गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई है। कड़ाके की ठंड और गलन के साथ मौसम विभाग ने 12 जिलों में कोहरे और शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया है। 21 दिसंबर को राजस्थान के चुरू जिले में सर्दी ने जमकर कहर बरपाया था बता दें कि इससे पहले 21 दिसंबर को राजस्थान के चुरू जिले में सर्दी ने जमकर कहर बरपाया था। तब रेतीले धोरों और वाहनों पर बर्फ की परत जमने लगी थी। इसके अलावा, खेतों में भी बर्फ की चादर देखने को मिल रही थी, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई थी, फसलों को नुकसान हो रहा था। जिले का तापमान जमाव बिंदु के निकट पहुंच चुका था। रात का न्यूनतम तापमान काफी नीचे गिर गया था। खेतों में सरसों और अन्य फसलों की पत्तियों पर बर्फ की परत जमने से किसानों को भारी नुकसान हुआ था। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। जयपुर और जैसलमेर समेत कई शहरों में सोमवार सुबह विजिबिलिटी 30 मीटर से भी कम रही जयपुर और जैसलमेर समेत कई शहरों में सोमवार सुबह विजिबिलिटी 30 मीटर से भी कम रही। जयपुर शहर में सुबह 7:30 बजे तक घना कोहरा रहा, और विजिबिलिटी 100 मीटर से कम रही। गाड़ियों की लाइट जलाकर लोग वाहन चलाते नजर आए। दुपहिया वाहन चालकों को सर्द हवाओं के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ा। सवाई माधोपुर में सोमवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, विजिबिलिटी 30 मीटर से भी कम रही। मावठ के बाद शीतलहर के चलते यहां तापमान गिरा। रविवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। जोधपुर और उसके आसपास हल्की धुंध के साथ ठंड का असर महसूस हुआ। दौसा में मौसम साफ रहा लेकिन ठंड तेज हो गई। जिले का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले तीन दिनों में तापमान में 9 डिग्री तक की गिरावट आई। टोंक के ग्रामीण इलाकों में लगातार आठवें दिन कोहरा छाया रहा। सोमवार को विजिबिलिटी केवल 20 मीटर रही। अगले तीन-चार दिनों तक इसी तरह के ठंडे मौसम की संभावना आपको बता दें, बीकानेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा संभागों में घना कोहरा रहा। सीकर, झुंझुनूं, चूरू, हनुमानगढ़ और गंगानगर में कोल्ड-वेव के कारण गलन और सर्दी बनी रही। हालांकि कोटा, अजमेर और जोधपुर संभागों में दोपहर बाद धूप निकलने से थोड़ी राहत मिली। फलोदी में दिन का अधिकतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो राज्य में सबसे अधिक था। बाड़मेर में 24.8 डिग्री, जालौर में 24, जैसलमेर और जोधपुर में 23, जबकि जयपुर में अधिकतम तापमान 17.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान में गिरावट जारी है, और अगले तीन-चार दिनों तक इसी तरह के ठंडे मौसम की संभावना जताई गई है। लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं और सरकार और प्रशासन ने गरीब लोगों के लिए रैन बसेरों की व्यवस्था की है। recent visitors 54

Economy में मजबूती, 2024-25 में GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान, आरबीआई रिपोर्ट

नई दिल्ली देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को जारी अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलापन और स्थिरता प्रदर्शित कर रही है।  साथ ही कहा है कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 2024-25 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, इसमें कहा गया है कि देश की जीडीपी को ग्रामीण खपत में सुधार, सरकारी खपत और निवेश में तेजी और मजबूत सेवा निर्यात से मदद मिलेगी। शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों की स्थिति हुई है मजबूत खबर के मुताबिक, आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) का दिसंबर 2024 का अंक जारी किया है, जो भारतीय वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन और वित्तीय स्थिरता के जोखिमों पर वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति के सामूहिक मूल्यांकन को दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों (एससीबी) की सुदृढ़ता मजबूत लाभप्रदता, घटती गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) और पर्याप्त पूंजी और तरलता बफर द्वारा मजबूत हुई है। जीएनपीए रेशियो कई वर्षों के निचले स्तर पर रिपोर्ट में कहा गया है कि शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों परिसंपत्तियों पर रिटर्न (आरओए) और इक्विटी पर रिटर्न (आरओई) दशक के उच्चतम स्तर पर हैं, जबकि सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है। मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट से पता चलता है कि ज्यादातर एससीबी के पास प्रतिकूल तनाव परिदृश्यों के तहत भी विनियामक न्यूनतम सीमा के सापेक्ष पर्याप्त पूंजी बफर है। तनाव परीक्षण म्यूचुअल फंड और क्लियरिंग कॉरपोरेशन के लचीलेपन को भी मान्य करते हैं। वास्तविक जीडीपी वृद्धि में गिरावट अर्थव्यवस्था पर, आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट ने कहा कि 2024-25 की पहली छमाही के दौरान, वास्तविक जीडीपी वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) 2023-24 की पहली और दूसरी छमाही के दौरान दर्ज की गई क्रमशः 8. 2 प्रतिशत और 8. 1 प्रतिशत की वृद्धि से 6 प्रतिशत तक कम हो गई। आरबीआई ने कहा कि इस हालिया मंदी के बावजूद, संरचनात्मक विकास चालक बरकरार हैं। घरेलू चालकों, मुख्य रूप से सार्वजनिक खपत और निवेश, मजबूत सेवा निर्यात और आसान वित्तीय स्थितियों में तेजी से समर्थित वास्तविक जीडीपी वृद्धि 2024-25 की तीसरी और चौथी तिमाही में ठीक होने की उम्मीद है।" रिपोर्ट में महंगाई को लेकर कहा गया है कि आगे चलकर, बंपर खरीफ फसल और रबी फसल की संभावनाओं के अवस्फीतिकारी प्रभाव से खाद्यान्न की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। भू-राजनीतिक संघर्ष और भू-आर्थिक विखंडन भी ग्लोबल सप्लाई चेन और कमोडिटी की कीमतों पर उल्टा दबाव डाल सकते हैं। आरबीआई ने कहा, ‘‘इस हालिया सुस्ती के बावजूद संरचनात्मक वृद्धि चालक बरकरार हैं। घरेलू चालक, मुख्य रूप से सार्वजनिक खपत और निवेश तथा मजबूत सेवा निर्यात के कारण 2024-25 की तीसरी और चौथी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर में सुधार होने की उम्मीद है।’’ रिपोर्ट में मुद्रास्फीति के बारे में कहा गया कि बंपर खरीफ फसल और रबी फसल के चलते आगे चलकर खाद्यान्न कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। हालांकि, चरम मौसम की घटनाओं के बढ़ते रुझानों के कारण जोखिम बने हुए हैं। भू-राजनीतिक संघर्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और जिंस कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।   recent visitors 78

82 आईएएस अफसरों को डाॅ. मोहन सरकार ने दिया नए साल का तोहफा, बने दो नए प्रमुख सचिव

भोपाल। मध्य प्रदेश के 82 आईएएस अफसरों को डाॅ. मोहन यादव की सरकार ने नए साल का तोहफा दिया है. अलग-अलग बैच के आईएएस का प्रमोशन करते हुए बढ़े हुए वेतनमान का लाभ देने के आदेश जारी किए गए हैं. प्रमोशन की इस लिस्ट में 2001 बैच के दो आईएएस अधिकारी सचिव से प्रमुख सचिव बनाए गए हैं. पर्यावरण विभाग में सचिव नवनीत मोहन कोठारी और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के सचिव पी नरहरि प्रमुख सचिव बनाए गए हैं. मुख्य सचिव अनुराग जैन के अध्यक्षता में हुई विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के बाद पदोन्नति सूची जारी की गई. सभी अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ एक जनवरी 2025 से मिलेगा. 2001 बैच के नवनीत मोहन कोठारी और पी नरहरि प्रमुख सचिव बने 2009 बैच के 16  अधिकारी अपर सचिव से सचिव बनाए गए 2011 बैच के 29 को प्रवर श्रेणी वेतनमान ये अधिकरी उप सचिव से अपर सचिन बने इन श्रेणी में मप्र के जिलों में पदस्थ 13 कलेक्टर के नाम शामिल हैं 2016 बैच के 26 अधिकारियों को कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड 2021 बैच के नौ अधिकारियों को वरिष्ठ समय वेतनमान recent visitors 161

2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 प्लेन हुए क्रैश, 1,473 यात्रियों की मौत, फिर भी सबसे सेफ मानी जाती है हवाई यात्रा!

नई दिल्ली दक्षिण कोरिया और अजरबैजान के पैसेंजर प्लेन के क्रैश होने की घटना ने हिलाकर रख दिया था. कभी पक्षी के टकराने, कभी तकनीकी खराबी या कभी खराब मौसम होने की वजह से दुनियाभर में प्लेन हादसे होते रहे हैं. विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में दुनियाभर में 109 विमान हादसे हुए थे, जिनमें 120 लोगों की मौत हुई थी. इस हिसाब से हर महीने औसतन 9 विमान हादसे हुए जिनमें 10 लोगों की मौत हुई. एविएशन सेफ्टी के मुताबिक, पिछले साल सबसे ज्यादा 34 विमान हादसे अमेरिका में हुए थे. विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 प्लेन क्रैश हो चुके हैं. प्लेन क्रैश की 813 घटनाओं में 1,473 यात्रियों की मौत हो चुकी है. सबसे ज्यादा विमान हादसे लैंडिंग के दौरान होते हैं. इन सात साल में लैंडिंग के दौरान 261 हादसे हुए हैं. उसके बाद 212 हादसे उड़ान के दौरान ही हुए हैं. इसी दौरान भारत में 14 हादसे हुए हैं. एविएशन सेफ्टी की मानें तो सबसे ज्यादा विमान हादसे टेक ऑफ के दौरान और फिर लैंडिंग के दौरान होते हैं. पिछले साल 109 ऐसी दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें से 37 टेकऑफ और 30 लैंडिंग के दौरान हुई थीं.हर साल दुनियाभर में सैकड़ों विमान हादसे होने के बावजूद हवाई सफर को सबसे सेफ माना जाता है. आंकड़े देखें तो बीते 7 साल में हर साल औसतन 200 विमान हादसे हुए हैं. और सालभर में ही सैकड़ों से ज्यादा लोगों की जान गई है. लेकिन इसके बावजूद भी फ्लाइट के सफर को सबसे सुरक्षित माना जाता है. फिर भी सबसे सेफ मानी जाती है हवाई यात्रा! फ्लोरिडा की एम्ब्री-रिडल एयरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंथनी ब्रिकहाउस ने सीएनएन को बताया कि हवाई सफर ट्रांसपोर्टेशन का सबसे सुरक्षित साधन है. उन्होंने कहा, 38 हजार की फीट की ऊंचाई पर उड़ना, जमीन पर ड्राइव करने से ज्यादा सुरक्षित है. इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) की रिपोर्ट की मानें तो 2023 में दुनियाभर में 3.7 करोड़ से ज्यादा विमानों ने उड़ान भरी थी. इसके बावजूद कुछ ही हादसों में लोगों की जान गई. पिछले साल नेपाल में एक विमान क्रैश हुआ था, जिसमें 72 लोग मारे गए थे. बता दें कि आईएटीए हर साल फ्लाइट सेफ्टी पर रिपोर्ट जारी करता है. IATA की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 12.6 लाख विमान उड़ान भरते हैं, तब एक दुर्घटना होती है. IATA का दावा है कि जब कोई व्यक्ति 1,03,239 साल तक हर दिन विमान में सफर करेगा, तब जाकर कोई एक दिन ऐसा आएगा जब उसे घातक दुर्घटना का सामना करना पड़ेगा. कुछ साल पहले मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर अर्नॉल्ड बार्नेट ने भी फ्लाइट सेफ्टी पर एक रिपोर्ट की थी, जिसमें दावा किया गया था कि 2018 से 2022 के बीच अगर 1.34 करोड़ यात्रियों ने हवाई सफर किया है तो उनमें से सिर्फ 1 को ही मौत का खतरा है. कब हुआ था दुनिया का पहला विमान हादसा? एयर ट्रैफिक के इतिहास पर नजर डालें तो 15 जून 1785 को फ्रांस के विमरेक्स के पास रॉजियरे एयर बैलून का हादसा पहली बार जानलेवा साबित हुआ था. इस हादसे में रॉजियरे एयर बैलून के आविष्कारक जीन फ्रैकुआ पिलैत्रे डी रॉजियरे की मौत हो गई थी. जबकि पावर्ड एयरक्राफ्ट का पहला हादसा 17 सितंबर 1908 को हुआ था जब अमेरिका के वर्जिनिया में मॉडल-ए एयरक्राफ्ट क्रैश कर गया था. इसमें इस विमान के सह-आविष्कारक और पायलट घायल हो गए थे जबकि सहयात्री की मौत हो गई थी.   recent visitors 60

यूनियन कार्बाइड के 377 टन जहरीले कचरे को 250 KM दूर भेजने की तैयारी, बनेगा ग्रीन कॉरिडोर, 100 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात

भोपाल  यूनियन कार्बाइड का कचरा भोपाल से पीथमपुर भेजने की तैयारी शुरू हो गया। रविवार से इसके पैकेजिंग की शुरुआत हो गई है। इस बीच भोपाल गैस त्रासदी राहत विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने रविवार को लोगों की चिंता दूर की। उन्होंने बताया कि यूनियन कार्बाइड प्लांट के जहरीले कचरे को पीथमपुर में जलाने से आसपास के गांवों की जमीन और मिट्टी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। यह कचरा 1984 की भोपाल गैस त्रासदी का है। इसे पीथमपुर में सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाएगा। यूनियन कार्बाइड का है कचरा सिंह ने बताया कि पीथमपुर में जो रासायनिक कचरा नष्ट किया जा रहा है, वह यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में बने कीटनाशक का अवशेष पदार्थ है। उन्होंने कहा कि यह मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) जितना खतरनाक नहीं है। MIC का इस्तेमाल कीटनाशक बनाने में होता है। 2-3 दिसंबर, 1984 की रात को भोपाल में MIC गैस का रिसाव हुआ था, जिससे भयानक त्रासदी हुई थी। अलग से लैंडफिल का निर्माण किया गया सिंह ने आश्वासन दिया कि कचरे को जलाने के दौरान यह पानी या मिट्टी के संपर्क में न आए, इसके लिए लैंडफिल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर विशेषज्ञों की निगरानी में 10 टन कचरा पहले ही नष्ट किया जा चुका है। इससे आसपास के इलाके में कोई नुकसान नहीं हुआ है। 337 मीट्रिक टन है कचरा 1984 की त्रासदी का लगभग 337 मीट्रिक टन पैक किया हुआ जहरीला कचरा सुरक्षित निपटान के लिए पीथमपुर ले जाया जाएगा। भोपाल के यूनियन कार्बाइड प्लांट से पीथमपुर के रासायनिक कचरा निपटान केंद्र तक 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। सिंह ने बताया कि अभी सही समय नहीं बताया जा सकता। लेकिन, पैक किए गए कचरे के निपटान के बारे में 3 जनवरी को MP उच्च न्यायालय में एक हलफनामा पेश किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि उससे पहले कचरा पीथमपुर पहुंच जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के अनुसार पैकिंग सिंह ने कहा कि जहरीले कचरे की पैकिंग, लोडिंग, परिवहन और अनलोडिंग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशानिर्देशों के अनुसार की जाएगी। जहरीले कचरे को जलाने के लिए सुरक्षित रूप से उसके गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। लंबे समय से मुआवजे की मांग भोपाल गैस त्रासदी के बाद, ज़हरीले कचरे के निपटान और पर्यावरणीय मुआवजे की मांग लंबे समय से चली आ रही है। 1984 की त्रासदी के बाद, स्वास्थ्य देखभाल और आर्थिक पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया गया था। लेकिन पर्यावरणीय क्षति को अनदेखा कर दिया गया। 2004 में, आलोक प्रताप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें जहरीले कचरे के वैज्ञानिक निपटान की मांग की गई। उनके बेटे अनन्या अब इस लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। एनजीओ ZGKSM, जो त्रासदी पीड़ितों के लिए लड़ रहा था, को हाल ही में उसके परिसर से हटा दिया गया है। मिट्टी भी जहरीली अनुमान है कि फैक्ट्री के नीचे लगभग 1.5 मिलियन टन ज़हरीली मिट्टी दबी हुई है। 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद, ZGKSM नाम के एक NGO ने एक मार्मिक लोगो अपनाया। इस लोगो में "नो हिरोशिमा, नो भोपाल" लिखा था। साथ ही एक अज्ञात बच्चे के दफनाने की एक काली और सफेद तस्वीर भी थी। उस समय, पर्यावरण की चिंताएं गौन थीं। ऑर्गेनिक खाने का कोई महत्व नहीं था। इनका ध्यान रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल पर था। भोपाल प्लांट में भी ऐसे ही उर्वरक बनते थे। इनका इस्तेमाल वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए किया जाता था। विशेष पीपीई किट पहने कई कर्मचारी और भोपाल नगर निगम, पर्यावरण एजेंसियों, डॉक्टरों और भस्मीकरण यानी कूड़ा जलाने वाले विशेषज्ञों के अधिकारी साइट पर काम करते देखे गए. फैक्ट्री के आसपास पुलिस भी तैनात की गई थी. सूत्रों ने बताया कि जहरीले कचरे को भोपाल से करीब 250 किलोमीटर दूर इंदौर के पास पीथमपुर में एक भस्मीकरण स्थल पर ले जाया जाएगा. मप्र हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर को फैक्ट्री से जहरीले कचरे को हटाने के लिए चार सप्ताह की समय सीमा तय की थी. अदालत ने कहा था कि गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी अधिकारी 'निष्क्रियता की स्थिति' में हैं, जिससे 'एक और त्रासदी' हो सकती है. इसे 'दुखद स्थिति' बताते हुए उच्च अदालत ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उसके निर्देश का पालन नहीं किया गया तो उसके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही की जाएगी. राज्य के गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने एक न्यूज एजेंसी से कहा, "भोपाल गैस त्रासदी का कचरा एक कलंक है, जो 40 साल बाद मिट जाएगा. हम इसे सुरक्षित तरीके से पीथमपुर भेजकर इसका निपटान करेंगे." उन्होंने कहा कि भोपाल से पीथमपुर तक कचरे को कम से कम समय में ले जाने के लिए यातायात का प्रबंधन करके करीब 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा. स्वतंत्र कुमार सिंह ने कचरे के परिवहन और उसके बाद पीथमपुर में उसके निपटान की कोई निश्चित तिथि बताने से इनकार कर दिया, लेकिन सूत्रों ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के मद्देनजर प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है और कचरा 3 जनवरी तक अपने गंतव्य तक पहुंच सकता है. अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में कचरे का कुछ हिस्सा पीथमपुर की निपटान इकाई में जलाया जाएगा और अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि उसमें कोई हानिकारक तत्व तो नहीं बचा है. सिंह ने कहा, "अगर सब कुछ ठीक पाया गया तो कचरा तीन महीने में जलकर राख हो जाएगा. अन्यथा जलने की गति धीमी कर दी जाएगी और इसमें नौ महीने तक का समय लग सकता है." उन्होंने बताया कि भस्मक से निकलने वाले धुएं को चार परत वाले विशेष फिल्टर से गुजारा जाएगा ताकि आसपास की हवा प्रदूषित न हो और इस प्रक्रिया का हर पल रिकॉर्ड रखा जाएगा. सिंह ने बताया कि जब कचरे को जलाकर हानिकारक तत्वों से मुक्त कर दिया जाएगा, तो राख को दो परतों वाली मजबूत 'झिल्ली' से ढक दिया जाएगा और 'लैंडफिल' में दफना दिया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह किसी भी तरह से मिट्टी और पानी के संपर्क में न आए. उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की देखरेख … Read more

रोहित शर्मा सिडनी में लेंगे संन्यास, इस दिन खेलेंगे करियर का आखिरी मैच?

मुंबई मेलबर्न टेस्ट में टीम इंडिया की हार के बाद बड़ी खबर सामने आ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रोहित शर्मा जल्द टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने वाले हैं. दावा है कि रोहित शर्मा सिडनी टेस्ट के बाद संन्यास ले लेंगे. सिडनी टेस्ट का आगाज 3 जनवरी से होगा. ये मुकाबला अगर पूरे पांच दिनों तक चला तो 7 जनवरी रोहित शर्मा के टेस्ट करियर का आखिरी दिन हो सकता है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के उच्च अधिकारियों और चयनकर्ताओं के बीच रोहित की टीम में जगह को लेकर चर्चाएं चल रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कप्तान चयनकर्ताओं को मनाने की कोशिश करेंगे कि अगर भारत WTC फाइनल में पहुंचता है तो उन्हें खेलने दिया जाए. हालांकि, इसके होने की संभावना कम है, इसलिए सिडनी में उनका आखिरी मैच हो सकता है. रोहित का आखिरी टेस्ट सिडनी में? टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई और चयनकर्ता रोहित शर्मा के संन्यास की बातें करने लगे हैं. लेकिन टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा सेलेक्टर्स को मनाने में जुटे हैं. रोहित शर्मा दरअसल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलना चाहते हैं, अगर टीम इंडिया पहुंची तो वो मुकाबला उनका आखिरी मैच हो सकता है. वैसे इसकी संभावना कम है, ऐसे में सिडनी रोहित का आखिरी टेस्ट मैच हो सकता है. बड़ी बात ये है कि रोहित शर्मा पर ये रिपोर्ट मेलबर्न टेस्ट में हार के तुरंत बाद आई है. मेलबर्न टेस्ट में टीम इंडिया को 184 रनों से हार मिली. एक समय ऐसा था जब टीम इंडिया ये टेस्ट ड्रॉ करा सकती थी. टी ब्रेक तक भारतीय टीम के 3 ही विकेट गिरे थे लेकिन इसके बाद ऋषभ पंत एक खराब शॉट खेलकर आउट हुए और फिर भारतीय पारी ताश के पत्तों की तरह ढह गई. यशस्वी जायसवाल ने 84 रनों की पारी खेली उनके अलावा कोई और बल्लेबाज विकेट पर टिकने की ज़हमत नहीं दिखा सका. ढलान पर रोहित का टेस्ट करियर कप्तान रोहित शर्मा का खेल टेस्ट क्रिकेट में लगातार नीचे की तरफ जा रहा है. घर पर न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 मैचों सीरीज में टीम इंडिया के क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा. इस सीरीज की 3 मैचों में कप्तान के बल्ले से महज 91 रन निकले थे. मौजूदा सीरीज में रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने तीन मैच खेला है और दो में हार मिली. 3 मैच की 5 पारी में उन्होंने सिर्फ 31 रन बनाए हैं. उन्होंने 3, 6, 10, 3 और अब 9 रन बनाए हैं. रोहित शर्मा के बल्ले से 15 रन तक का स्कोर नहीं आया. रोहित शर्मा का शर्मनाक प्रदर्शन रोहित शर्मा का ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बुरा हाल है. ये खिलाड़ी इस सीरीज में 3 मैचों में 31 ही रन बना सका है. रोहित का बैटिंग एवरेज 6.20 है. रोहित क्रीज पर टिकने के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं. मेलबर्न टेस्ट में तो उनका एक फैसला टीम इंडिया पर बहुत भारी पड़ा. उन्होंने केएल राहुल को ओपनिंग से हटाकर खुद वो जगह ली और ना तो वो चले और ना ही केएल राहुल रन बना पाए. केएल राहुल तीसरे नंबर पर खेलते हुए दोनों पारियों में फेल रहे. रोहित शर्मा की बैटिंग देखकर ऐसा लग रहा है कि अब टेस्ट क्रिकेट में उनके दिन ज्यादा बचे नहीं हैं. इसीलिए अब उनके संन्यास की खबरें आने लगी हैं.   recent visitors 60