जबलपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पुराने टर्मिनल की जगह कार्गो बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव बनाया

 जबलपुर  शहर के व्यापारी और व्यवसायी कार्गो विमान के जरिए अपना सामान बाहर भेज सकें वहीं बाहर से भी सामान आसानी से आ सके, इसके लिए जबलपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने जबलपुर एयरपोर्ट से कार्गो विमान सेवाएं शुरू करने का प्लान बनाया। एयरपोर्ट के पुराने टर्मिनल की जगह कार्गो बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव बनाया, ताकि विमानों से लोड और अनलोड माल को वहां रखा जा सके। इसके लिए प्लान बनाकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास भेजा भी गया, लेकिन वहां मामला अटक गया। चार से पांच माह बीत जाने के बाद भी वहां से क्लीयरेंस नहीं मिल सका, जिस कारण न तो निर्माण शुरू हो सका और न ही कार्गो विमान सेवाएं। क्लीयरेंस मिलते ही बातचीत कार्गो बिल्डिंग को क्लीयरेंस का इंतजार, हेडक्वार्टर में अटका मामला शहर से भी शुरू होनी है कार्गो विमान सेवाएं, अनुमति मिलते ही शुरू होगा काम इधर जैसे ही क्लीयरेंस मिलता है, तो बिल्डिंग निर्माण के साथ ही एयरपोर्ट के अधिकारियों ने कार्गो विमान कम्पनियों से भी बातचीत की जाएगी। उन्हें जबलपुर में आने और यहां से जाने वाले माल की जानकारी और कार्गो विमान सेवा शुरू होने से विमान कम्पनियों को होने वाले फायदे की जानकारी दी जाएगी, ताकि यह सेवाएं शुरू हो सकें। यहां से आता-जाता है माल ट्रेन से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, कानपुर, आगरा से माल आता है, तो वहीं इलाहाबाद, पटना, लखनऊ, कानपुर, गुजरात समेत अन्य शहरों और प्रदेशों में यहां से माल भेजा जाता है। माल लाने ले जाने के लिए जबलपुर रेल मंडल के पास 14 एसएलआर और एक लीज कंटेनर है। लेकिन ट्रेन से समय अधिक लगता है। वहीं कई बार माल कहीं और जाने की बजाय कहीं और चला जाता है। ऐसे में लम्बे समय से शहर से कार्गो विमान सेवा शुरू करने की मांग की जा रही थी।  प्रदेश के अन्य एयरपोर्ट पर सुविधा प्रदेश के अन्य एयरपोर्ट्स पर कार्गो की सुविधा है। ऐसे में वहां से कार्गो विमान भी उड़ान भरते हैं, लेकिन जबलपुर एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद से अब तक यहां कार्गो सुविधा नहीं थी, जिस कारण व्यपारियों और व्यवसाईयों को हवाई जहाज से सामान भेजने में परेशानी होती थी। यदि कुछ आवश्यक चीजें हवाई जहाज के माध्यम से दूसरे शहर या विदेश भेजनी होती थी, तो लोगों को नागपुर जाना पड़ता था। इन्हें मिलेगा फायदा शहर में गारमेंट क्लस्टर है, वही आईटी सेक्टर का भी बड़ा काम शहर में है। इसके अलावा कई ऐसी कम्पनियां हैं, जो देश के अन्य शहरों और विदेशों तक से सामान बुलवाती है। ऐसे में इन कम्पनियों को फायदा होगा। कार्गो विमान सेवा शुरू होने से माल भी वर्तमान समय से कम समय में पहुंच सकेगा। recent visitors 58

जल्द पूरा होगा भारत का सपना, लॉन्च होने वाला है ISRO का SPADEX मिशन… जानिए क्यों है खास ?

चेन्नई भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वर्ष 2024 शानदार  विदाई देने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुये अपने दोहरे रिकॉर्ड कायम करने वाले ‘स्पैडेक्स’ अंतरिक्ष मिशन के लिए उलटी गिनती काम आज से शुरू करेगा। इसके तहत पहली अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक पर – स्पैडेक्स उपग्रह से जुड़ी डॉकिंग और अनडॉकिंग श्रृंखला है और दूसरा पीएसएलवी-सी60 प्रक्षेपण यान पर पीओईएम-4 के हिस्से के रूप में 24 वैज्ञानिक प्रयोगों का पीएसएलवी का चौथा चरण शामिल है। पीएसएलवी-सी60 स्पैडेक्स मिशन का प्रक्षेपण 30 दिसंबर को श्रीहरिकोटा के पहले अंतरिक्ष बंदरगाह पर पैड से 2158 बजे निर्धारित है। पीएसएलवी मिशन के लिए उलटी गिनती का काम जो आम तौर पर 24 से 25 घंटे का होता है, कल से शुरू होने की उम्मीद है, जिसके दौरान चार चरण वाले वाहन में प्रणोदक भरने का कार्य किया जाएगा। इसरो ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, प्रक्षेपण के करीब एक कदम और बढ़ाते हुये स्पैडेक्स के प्रक्षेपण यान के साथ दो उपग्रह एकीकृत हो गए है। कहा गया, “एकीकरण मील का पत्थर है, एसडीएससी शार ‘लिफ्टऑफ़’ के एक कदम और करीब स्पैडेक्स उपग्रहों को पीएसएलवी-सी60 के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है।” बताया गया,“ पीएसएलवी-सी60 पर पहली बार पीआईएफ सुविधा में पीएस 4 (चौथे चरण इंजन) तक पूरी तरह से एकीकृत कर इसे पहले लॉन्च पैड पर ले जाया गया।” इसरो अपने पहले सफल अंतरिक्ष डॉकिंग प्रदर्शन के साथ वर्ष 2024 की शानदार विदाई करने के लिए उत्सुक है, क्योंकि यह अग्रणी मिशन भारत को चौथा देश बनने के लिए प्रेरित करेगा। इससे दुनिया को पता चलेगा कि देश जटिल अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक में महारत हासिल कर रहा है” इसरो के लिए यह एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मिशन होगा जिसके तहत अंतरिक्ष डॉकिंग प्रदर्शन के लिए दो उपग्रह चेज़र और टारगेट वाले स्पैडेक्स लॉन्च के अलावा, स्पैडेक्स मिशन के साथ पीएसलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंट मॉड्यूल-4 (पीओईएम-4) पर अंतरिक्ष में रिकॉर्ड 24 वैज्ञानिक प्रयोग किये जायेंगे।  क्या है यह मिशन? अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक तब बहुत जरूरी होती है जब साझा मिशन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए कई रॉकेट लॉन्च करने की जरूरत होती है। इसरो के अनुसार, स्पेडेक्स मिशन में दो छोटे अंतरिक्ष यान (प्रत्येक लगभग 220 किग्रा) शामिल हैं, जिन्हें पीएसएलवी-सी60 के जरिये स्वतंत्र रूप से और एक साथ, 55 डिग्री झुकाव पर 470 किमी वृत्ताकार कक्षा में प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसका स्थानीय समय चक्र लगभग 66 दिन का होगा। अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग का प्रदर्शन के लिए मिशन इस मिशन के माध्यम से, भारत अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक रखने वाला दुनिया का चौथा देश बनने की ओर अग्रसर है। 9 दिसंबर को पीएसएलवी-सी59/प्रोबास-3 मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद, इसरो के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव, एस सोमनाथ ने कहा कि दिसंबर में ही पीएसएलवी-सी60 के प्रक्षेपण के साथ एक समान मिशन आने वाला है। सोमनाथ ने कहा, 'यह (पीएसएलवी-सी60 मिशन) स्पैडेक्स नामक अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग का प्रदर्शन करने जा रहा है। रॉकेट अब तैयार है और हम प्रक्षेपण की ओर ले जाने वाली गतिविधियों के अंतिम चरण के लिए तैयार हो रहे हैं, संभवतः दिसंबर में ही।' बताया जाता है कि अंतरिक्ष में डॉकिंग की यह प्रक्रिया सबसे कठिन होती है और इसमें जरा सी चूक बड़ी मुसीबतें पैदा कर सकती है।   गोलाकार कक्षा में लॉन्च किया जाएगा मिशन इसरो के अनुसार, स्पेडेक्स मिशन को दो छोटे अंतरिक्ष यानों (एसडीएक्स01, जो कि चेजर है और एसडीएक्स02, जिसका नाम टारगेट है) के पृथ्वी की निचली वृत्ताकार कक्षा में तेज गति में मिलन, डॉकिंग और अनडॉकिंग को प्रदर्शित किया जाएगा। पीएसएलवी कक्षीय प्रयोग मॉड्यूल (पीओईएम) अंतरिक्ष में विभिन्न प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करने के लिए 24 प्रयोग करेगा। इनमें 14 प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की विभिन्न प्रयोगशालाओं से और प्रयोग 10 निजी विश्वविद्यालयों तथा ‘स्टार्ट-अप’ से संबंधित हैं। डॉकिंग प्रक्रिया से ही बने हैं अमेरिका और रूस के स्पेस स्टेशन गौरतलब है कि अमेरिका और रूस धरती पर एक-दूसरे के दुश्मन हैं, हालांकि अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) स्थापित करने में दोनों देशों ने साथ काम किया है। जहां नासा के स्पेस शटल ने आईएसएस के एक भाग का निर्माण किया है, वहीं रूस ने भी अपने कई स्पेस शटल्स का इस्तेमाल किया। नासा के पा मौजूदा समय में कोलंबिया, चैलेंजर, डिस्कवरी, अटलांटिस, एंडियेवर जैसे स्पेस शटल हैं, वहीं रूसी स्पेस एजेंसी रॉस्कॉस्मोस ने अपने स्पेस शटल का नाम बुरान रखा है।   recent visitors 55

गुरुग्राम पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई का विशेष अभियान शुरू किया

गुरुग्राम  बिना पुलिस को सूचना दिए गुरुग्राम में विदेशियों को फ्लैट किराये पर दिए जा रहे हैं। पुलिस जांच में पहले इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। एक बार फिर गुरुग्राम पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत, वेरिफिकेशन के बिना रहने वाले किरायेदारों और मकान मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। गुरुग्राम में विशेष अभियान चलाया जाएगा पुलिस प्रवक्ता का कहना है कि सुरक्षा के मद्देनजर गुरुग्राम में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को चेक किया जा रहा है। झुग्गी-झोपड़ियों, कॉलोनियों, होटलों में विशेष रूप से चेकिंग की जा रही है। अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी। यदि किसी ने बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किरायेदार रखा होता तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने बताया कि पुलिस सभी से अपील कर रही है कि किरायेदारों, घरों में काम करने वालों, होटल में काम करने वालों का वेरिफिकेशन जरूर कराएं। रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या बढ़ती जा रहीवहीं सरकार को शक है कि मुस्लिम बाहुल्य मेवात (नूंह) में रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या बढ़ती जा रही है। मेवात में कुछ लोग इन रोहिंग्या मुसलमानों को शरण दे रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद ने भी सरकार के आगे शिकायत की कि यह रोहिंग्या देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। इनके बारे में पूरी जानकारी के बगैर इन्हें रोकना मुमकिन नहीं। ऐसे में इन्हें बाहर निकाला जाना चाहिए और तब तक पूरी सख्ती बरती जानी चाहिए। हरियाणा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे प्रदेश में 600 से 700 परिवार रोहिंग्या मुसलमानों के हैं। अकेले मेवात में करीब दो हजार रोहिंग्या रहते हैं। recent visitors 65

देश में लग्जरी कारों की बिक्री में तेजी , साल 2024 में लग्जरी कारों का नया रेकॉर्ड बनाया

नई दिल्ली  क्या सस्ती कारों के दिन लदने वाले हैं? साल 2024 में लग्जरी कारों की डिमांड कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है। आंकड़े बताते हैं कि इस साल हर घंटे ऐसी 6 लग्जरी कारों की बिक्री हुई जिनकी कीमत 50 लाख रुपये से ज्यादा थी। यानी हर 10 मिनट में एक लग्जरी कार बिक्री है। इन कारों में ऑडी और मर्सिडीज-बेंज जैसे बड़े ब्रांड की कार शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक 5 साल पहले हर घंटे लग्जरी कारों की बिक्री की संख्या मात्र दो थी। ऐसे में इन 5 वर्षों में इसमें तीन गुना की तेजी आई है। इससे पता चलता है कि संपन्न वर्ग का विस्तार हो रहा है। इकॉनमिक टाइम्स के अनुसार साल 2025 में लग्जरी कार निर्माता दो दर्जन से ज्यादा नई गाड़ियां लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। कैसा होगा साल 2025? इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक साल 2025 में लग्जरी कारों की बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि साल 2025 में लग्जरी कारों की बिक्री 50 हजार का आंकड़ा पार कर जाएगी। अगर ऐसा होता है तो यह पहली बार होगा। ऑडी इंडिया के प्रमुख बलबीर सिंह डिलियन ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि 2025 में इंडस्ट्री 8 से 10% की दर से बढ़ेगी।' वहीं मर्सिडीज-बेंज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष अय्यर ने कहा, 'साल 2025 में लग्जरी कारों की बिक्री में तेजी आने की उम्मीद है।' साल 2024 में कैसी रही स्थिति? इस साल भी लग्जरी कारों की बिक्री में काफी तेजी आई है। मर्सिडीज-बेंज कारों की बिक्री की संख्या साल 2024 में 20 हजार हो जाएगी। कंपनी ने सितंबर तक नौ महीनों में बिक्री में 13% की वृद्धि दर्ज की जो 14,379 यूनिट थी। वहीं जनवरी से सितंबर के दौरान BMW इंडिया की बिक्री करीब 5% बढ़कर रेकॉर्ड 10,556 वाहन हो गई। ऑडी इंडिया ने कहा कि वह अगले साल बिक्री को फिर से बढ़ाने के लिए तैयार है। क्यों बढ़ रही लग्जरी कारों की बिक्री? देश में अरबपतियों की संख्या में तेज आ रही है। नाइट फ्रैंक की 'द वेल्थ रिपोर्ट 2024' के अनुसार अल्ट्रा-रिच भारतीयों की संख्या 2023 में 13263 से 2028 में 50% बढ़कर 19908 हो जाने की उम्मीद है। भारत के बाद चीन (47%), तुर्की (42.9%) और मलेशिया (35%) का स्थान होगा। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक देश में अरबपतियों की संख्या बढ़ने से लग्जरी कारों की बिक्री में तेजी आई है। recent visitors 68

उप मुख्यमंत्री ने कहा-बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में कार्य योजना अनुसार फ्रंट एरिया डेवलपमेंट का कार्य करायें

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में कार्य योजना अनुसार फ्रंट एरिया डेवलपमेंट का कार्य करायें। पूर्व से निर्मित गौ शेड, भूसा शेड सहित अन्य सभी भवनों का रंग रोगन व मेंटीनेंस कराते हुए शेष निर्माणाधीन कार्यों को आगामी 10 दिवस में अनिवार्यत: पूर्ण करें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने रीवा के बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में गौवंश वन्य विहार के विकास कार्यों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार की प्रदेश में अपनी पहचान है। प्रयागराज में आयोजित हो रहे महाकुंभ के दौरान देश के महान मनीषी स्वामी अवधेशानंद गिरिजी, स्वामी रामदेव तथा पूज्य मोरारी बापू भी हेलीकाप्टर से बसामन मामा गौवंश वन्य विहार आयेंगे तथा संपूर्ण वन्य विहार का भ्रमण करेंगे। उन्होंने नियत समय में सभी कार्य पूर्ण करने कके निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने गौवंश वन्य विहार में गोबर व गोमूत्र से निर्मित सामग्री को विक्रय किये जाने के लिये संबंधित संस्थानों से अनुबंध किये जाने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का आर्थिक संसाधन हासिल कर आत्मनिर्भर बनाने के लिये उनकी उत्पाद सामग्री का क्रय कराया जाना सुनिश्चित करायें। उन्होंने गौवंश वन्य विहार के लिये आवंटित चरनोई भूमि में चारा उत्पादन करने व विक्रय करने का दायित्व एफपीओ के माध्यम से कराने की बात कही ताकि इससे भी आमदनी हो सके। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने गौवंश वन्य विहार में सोलर पैनल लगाकर ऊर्जीकृत करने तथा मृत पशुओं के लिये निष्पादन इकाई लगाये जाने के लिये निर्देशित किया। उन्होंने हिनौती गौधाम में चल रहे निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। रीवा जिला चिकित्सालय में अत्याधुनिक मशीनों से होगा नेत्र रोग का उपचार उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि जिला चिकित्सालय रीवा में सर्व-सुविधायुक्त ऑपरेशन थियेटर में अब अत्याधुनिक मशीनों से नेत्र रोगियों का उपचार होगा तथा जटिल नेत्र सर्जरी भी की जायेगी। इस सुविधा के हो जाने से अब नेत्र रोगियों को अन्यत्र नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे जिला चिकित्सालय का भ्रमण किया तथा ऑपरेशन थियेटर की सुविधाओं का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि जिला चिकित्सालय में नेत्र विभाग के ऑपरेशन थियेटर को 76 लाख रूपये की लागत से सर्व-सुविधायुक्त बनाकर अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। उप मुख्यमंत्री ने चिकित्सालय परिसर में निर्माणाधीन ओपीडी तथा चिकित्सालय विस्तार भवन का निरीक्षण कर कार्य को शीघ्र पूर्ण करने को निर्देश निर्माण एजेंसी को दिये। अध्यक्ष नगर निगम श्री व्यंकटेश पाण्डेय, सीएमएचओ डॉ. संजीव शुक्ला, सिविल सर्जन डॉ. एमएल गुप्ता उपस्थित थे।   recent visitors 56

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की प्रदेश में उर्वरक प्रबंधन की समीक्षा, की जाएं उपलब्धता सुनिश्चित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यूरिया, डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों की समय रहते उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए गौवंश आधारित जैव उर्वरकों के उपयोग को प्रदेश में प्रोत्साहित किया जाए। कृषक, पारम्परिक अनुभव और स्वयं की पहल पर बड़े पैमाने में जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं। यह मिट्टी की गुणवत्ता और धरती की सेहत के लिए भी लाभप्रद है। उपयोग की जा रही जैविक खाद की मात्रा की गणना और दस्तावेजीकरण की आवश्यकता है। इस आधार पर प्रदेश में जैविक खाद के उपयोग को बढ़ाने के लिए कृषकों को प्रोत्साहित करने का मॉडल विकसित किया जाए। राज्य की यह पहल अन्य प्रदेशों के लिए भी अनुकरणीय होगी। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए जैविक तथा प्राकृतिक खाद जैसे विकल्प किसानों को उपलब्ध कराए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में उर्वरक प्रबंधन की समीक्षा के दौरान यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री के समत्व भवन में हुई बैठक में सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, अपर मुख्य सचिव श्री राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। उर्वरकों के अग्रिम भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को फसल चक्र के अनुसार समय रहते उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए उर्वरक वितरण के प्रमुख केन्द्रों पर अग्रिम भंडारण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए कार्य योजना विकसित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में फसलों की बुवाई लगभग 97 प्रतिशत है। वर्तमान वर्ष में यूरिया, एन.पी.के.,एस.एस.पी और एम.ओ.पी. उर्वरकों की उपलब्धता गत चार वर्षों में सर्वाधिक है। वर्तमान तक उपलब्ध 35 लाख 68 हजार मीट्रिक टन में से 32 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का वितरण हो चुका है। इसी प्रकार 9 लाख 29 हजार मीट्रिक टन एन.पी.के., 10 लाख 58 हजार मीट्रिक टन एस.एस.पी, 91 हजार मीट्रिक टन एम.ओ.पी. वितरित हो चुका है। इसी प्रकार 10 लाख 82 मीट्रिक टन डीएपी और 20 लाख 11 हजार मीट्रिक टन डीएपी + एन.पी.के. वितरित किया जा चुका है। बैठक में विभिन्न जिलों में मासिक उर्वरक व्यवस्था पर चर्चा हुई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।   recent visitors 68

भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बड़ा निर्णय, गहलोत सरकार में बने 9 जिले और 3 संभाग को किया ख़त्म

जयपुर राजस्थान में भजनलाल सरकार ने अशोक गहलोत के 9 नए जिलों को निरस्त कर दिया है। सीएम भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में खाद्य सुरक्षा योजना में नए लाभार्थी जोड़ने का भी निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़ और सांचौर निरस्त कर दिया है। वहीं, गहलोत सरकार में बनाए नए 17 जिलों में 8 नए जिले भजनलाल कैबिनेट ने यथावत रखे हैं। इन जिलों में बालोतरा, ब्यावर, डीग, खैरथल-तिजारा, डीडवाना-कुचामन, कोटपूतली-बहरोड़, फलोदी और सलूंबर शामिल है। ऐसे में राजस्थान में अब 33 और 8 तो कुल 41 जिले रहेंगे। वहीं राजस्थान में अब 7 संभाग होंगे। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि तीन नए संभागों सीकर, पाली और बांसवाड़ा को भी निरस्त कर दिया है। भजनलाल कैबिनेट की बैठक में निरस्त होने वाले जिलों और संभागों पर अंतिम मुहर लगी है। मंत्री सुमित गोदारा और जोगाराम पटेल ने प्रेस ब्रीफिंग करते हुए निरस्त होने वाले जिलों और संभागों के बारे में जानकारी दी है। बता दें कि पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने अंतिम समय में राजस्थान में 17 नए जिले और तीन नए संभाग बनाए थे। इस निर्णय को भजनलाल सरकार ने पलटते हुए 9 जिलों और नए बने तीनों संभागों को निरस्त कर दिया है, जबकि 8 जिले यथावत रहेंगे। वहीं, राज्य में संभाग पहले की तरह सात ही रहेंगे। इन जिलों को किया निरस्तः मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि कैबिनेट बैठक में लिए निर्णय के मुताबिक दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़, सांचौर जिले को निरस्त किया गया है। मंत्री के मुताबिक कैबिनेट बैठक में लिए निर्णय के मुताबिक बालोतरा, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, कोटपूतली-बहरोड़, डीडवाना-कुचामन, फलोदी, डीग और संलूबर जिले यथावत रहेंगे। recent visitors 70