खजुराहो में 25 दिसम्बर को केन-बेतवा लिंक परियोजना कार्यक्रम के लिए किया आमंत्रित

टीकमगढ़ के माथे पर लग रहा है विकास का तिलक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना से टीकमगढ़ के साथ पूरे बुन्देलखण्ड की बदलेगी तस्वीर और तकदीर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 105 करोड़ रूपये से अधिक के विकास कार्यों दी सौगात खजुराहो में 25 दिसम्बर को केन-बेतवा लिंक परियोजना कार्यक्रम के लिए किया आमंत्रित मुख्यमंत्री जतारा में जनकल्याण पर्व सह किसान सम्मेलन कार्यक्रम में शामिल हुए भोपाल जन-कल्याण पर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि टीकमगढ़ के माथे पर विकास का तिलक लग रहा है। जिले में अब कभी सूखे की समस्या नहीं होगी। देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना से टीकमगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे बुन्देलखण्ड की तस्वीर और तकदीर बदलेगी। बहुप्रतीक्षित केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना से वृहद स्तर पर सिंचाई एवं पेयजल सुविधा मिलेगी। साथ ही बिजली उत्पादन, फसलों की पैदावार एवं पर्यटन क्षेत्र में विकास से नागरिकों का जीवन खुशहाल होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को टीकमगढ़ जिले की जतारा तहसील में आयोजित जन-कल्याण पर्व सह किसान सम्मेलन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीकमगढ़ जिले के लिये 105 करोड़ 63 लाख रूपए की लागत के 120 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को लड्डू खिलाकर 25 दिसम्बर को खजुराहों में आयोजित होने वाले केन-बेतवा लिंक परियोजना के भूमि-पूजन कार्यक्रम के लिये आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश उन्नति के पथ पर अग्रसर है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए एक लाख करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ने की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 दिसम्बर को राष्ट्रीय महत्व की केन-बेतवा लिंक परियोजना का छतरपुर जिले के खजुराहो में भूमिपूजन करेंगे। परियोजना के साकार रूप लेने पर बुन्देलखण्ड हरा-भरा और समृद्धशाली बनेगा और इससे क्षेत्र में होने वाला पलायन भी रूकेगा। मुख्यमंत्री ने आमजनों को वृहद परियोजना के शुभारंभ अवसर पर खजुराहो में आमंत्रित किया और सभी उपस्थितजनों को मुट्ठी बांधकर परियोजना के भूमिपूजन कार्यक्रम में आने का संकल्प दिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर केन-बेतवा लिंक परियोजना का मॉडल और जन-कल्याण एवं विकास पर केन्द्रित प्रदर्शनी और विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का अवलोकन किया। महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली और पुष्प-वर्षा कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, विधायक जतारा हरिशंकर खटीक, अमित नुना, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उमिता राहुल सिंह, पूर्व मंत्री राहुल सिंह, जन-प्रतिनिधि, लाड़ली बहनें और बड़ी संख्या में कृषक बंधु उपस्थित रहे।   recent visitors 69

स्पेसएक्स को बचाने के लिए एलन मस्क ने बेच दी थी अपनी गाड़ी, उसने किया कमाल

नई दिल्ली. दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क की ऑटो कंपनी टेस्ला के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है। यह दुनिया की सबसे वैल्यूएबल ऑटो कंपनी है। इसकी वैल्यू करीब $1.4 ट्रिलियन है जो ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री का करीब आधी है। लेकिन मस्क की एक और कंपनी स्पेसएक्स दुनिया की सबसे वैल्यूएबल स्टार्टअप कंपनी बन गई है। इसकी वैल्यू $350 अरब पहुंच गई है। मस्क ने इंसान को मंगल पर पहुंचाने का सपना देखा है और इसी मिशन के साथ उन्होंने साल 2002 में स्पेसएक्स की स्थापना की थी। मस्क रॉकेट बिजनस का ऐपल बनना चाहते हैं और यह काफी हद तक इसमें सफल रही है। इस कंपनी के नाम कई रेकॉर्ड दर्ज हैं और यह स्पेस इंडस्ट्री में बड़ा नाम बनकर उभरी है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा आज अपने अंतरिक्षयात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुंचाने के लिए स्पेसएक्स के रॉकेट्स का सहारा ले रही है। लेकिन इसके लिए सफर आसान नहीं था। कंपनी को एक के बाद एक कई नाकामियों का सामना करना पड़ा। एक समय मस्क ने अपनी सारी जमा पूंजी इसमें झोंक दी थी। उन्होंने रूस से भी रॉकेट खरीदने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। मस्क का सारा पैसा खत्म हो गया था और उन्हें अपनी गाड़ी भी बेचनी पड़ी। लेकिन मस्क ने कभी हार नहीं मानी। रूस में सहना पड़ा अपमान अमेरिकी बिजनस कॉलमनिस्ट और लेखक एश्ली वेंस ने अपनी किताब 'Elon Musk: How the Billionaire CEO of SpaceX and Tesla is Shaping Our Future' में स्पेसएक्स से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया है। यह उस समय की बात है जब स्पेसएक्स का गठन नहीं हुआ था। मस्क रॉकेट लॉन्च पर दो से तीन करोड़ डॉलर खर्च करना चाहते थे। लेकिन जानकारों का कहना था कि यह संभव नहीं है। रॉकेट लॉन्च पर कितना खर्च आता है, इसका पता लगाने के लिए मस्क ने रूस जाने की योजना बनाई। वह रूस से आईसीबीएम खरीदकर उसे अपने लॉन्च वीकल के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते थे। रॉकेट और मिसाइल में एक ही तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। इस काम के लिए मस्क ने जिम कैंट्रेल नाम के एक शख्स की मदद ली। कैंट्रेल पर जासूसी के आरोप लगे थे और साल 1996 में उन्हें रूस में हाउस अरेस्ट पर रखा गया था। इस कारण वह रूस नहीं जाना चाहते थे लेकिन मस्क ने उन्हें मना लिया। अक्टूबर 2001 में मस्क, कैंट्रेल और मस्क के कॉलेज के दोस्त एडियो रेसी मॉस्को पहुंचे। मस्क और उनकी टीम ने तीन बार रूसियों से बात की। लेकिन बात बन नहीं पा रही थी। एक मीटिंग के दौरान रूस के एक चीफ डिजाइनर ने कैंट्रेल और मस्क पर थूक दिया। कैंट्रेल कहते हैं, 'रूस के एक चीफ डिजाइनर ने मुझ पर और एलन पर थूक दिया था क्योंकि उसे लग रहा था कि हम बकवास लोग हैं।' कैसे किया कमाल दरअसल मस्क ने रॉकेट के लिए दो करोड़ डॉलर रखे थे। उनको लगता था कि इससे तीन आईसीबीएम खरीदी जा सकती हैं। एक मीटिंग में मस्क ने रूसियों से पूछा कि एक आईसीबीएम की कीमत क्या होगी, इस पर जबाव मिला, 80 लाख डॉलर। मस्क ने कहा कि इतने में तो दो आ जाएंगी। रूसियों ने इस कीमत पर मिसाइल देने से साफ इनकार कर दिया। मस्क को लग गया था कि रूसी इस डील को लेकर गंभीर नहीं हैं या उनसे ज्यादा से ज्यादा पैसा ऐंठना चाहते हैं। यह फरवरी 2002 की बात है। मस्क बड़ा सपना लेकर रूस गए थे लेकिन वहां से खाली हाथ लौट आए। वह मायूस थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। मस्क ने इसके बाद खुद ही रॉकेट बनाने का फैसला किया। मस्क ने जून 2002 में स्पेसएक्स की स्थापना की। लेकिन सफलतापूर्वक अपना रॉकेट उड़ाने में कंपनी को छह साल लग गए। स्पेसएक्स साल 2008 में उस समय सुर्खियों में आई जब उसके रॉकेट ने सैटेलाइट को ऑर्बिट में पहुंचाया। वह ऐसा कारनामा करने वाली दुनिया की पहली निजी कंपनी थी। साल 2010 में उसके रॉकेट ने एक पेलोड को ऑर्बिट में स्थापित किया और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आया। स्पेसएक्स की सफलता की वजह यह है कि वह रॉकेट में इस्तेमाल होने वाला 80% साजोसामान खुद बनाती है। इससे कंपनी को लागत कम करने में मदद मिलती है। recent visitors 93

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रदेश में मिलेट्स उत्पादन को किया जाए प्रोत्साहित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप प्रदेश में मोटे अनाज अर्थात मिलेट्स के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विशेषज्ञ और विभागीय अधिकारियों की समिति बनाकर कार्य-योजना विकसित की जाए। समिति में कृषक प्रतिनिधियों को भी अनिवार्यत: शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में रविवार को कृषि विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। कृषकों की आय में होगी वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मोटे अनाजों के उत्पादन से फसल लेने की लागत में कमी आएगी और कृषकों की आय में वृद्धि होगी। यह पहल किसानों के सामाजिक आर्थिक स्तर में सुधार लाने और खेती को लाभ के व्यवसाय के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी। उत्पादन बढ़ाने कृषकों का करें सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में तिलहन और दालों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी कृषकों को प्रेरित किया जाए। इसके लिए कृषकों को नवीन कृषि तकनीक, उन्नत बीज, उपयुक्त उर्वरक और कीटनाशक के संबंध में मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। बैठक में जानकारी दी गई की प्रदेश में धान का क्षेत्राच्छादन साधन 36 लाख 33 हजार हेक्टर क्षेत्र में है और उपार्जन के लिए 7 लाख 76 हजार किसान पंजीकृत हैं। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 60

प्रयागराज के महापौर उमेशचंद्र गणेश केसरवानी ने बताया- 20 जनवरी को देशभर के महापौर करेंगे शिरकत

प्रयागराज दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम महाकुंभ में 20 जनवरी को देशभर के महापौर शिरकत करेंगे। प्रयागराज के महापौर उमेशचंद्र गणेश केसरवानी ने रविवार को बताया कि वह पिछले दिनों जयपुर में तीन दिवसीय अखिल भारतीय मेयर समिट में हिस्सा लेने गए थे। समिट में ही श्री केसरवानी ने देश के अलग-अलग शहरों से आए महापौरों को महाकुंभ में भाग लेने के लिए न्योता दिया। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक महाकुंभ की विशेषता पर बोलते हुए राजस्थान के आम लोगों को महाकुंभ के आध्यात्मिक महात्म को समझने के लिए प्रयागराज आने को आमंत्रित किया। श्री केसरवानी ने बताया कि समिट में राजस्थान के उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बेरवा और नगर विकास मंत्री झाबर सिंह भी उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि उपस्थित महापौरों ने हालांकि 20 जनवरी को आने के लिए कहा है लेकिन हो सकता है लोग अपनी सुविधा के अनुसार पहुचे।   recent visitors 67

मोदी ने आज रोजगार मेले में नवनियुक्त कर्मियों को आभासी माध्यम से 71,000 से अधिक नियुक्ति पत्रों का वितरण करेंगे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज रोजगार मेले में केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों तथा संगठनों में नवनियुक्त कर्मियों को आभासी माध्यम से 71,000 से अधिक नियुक्ति पत्रों का वितरण करेंगे। वह इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे। रोजगार मेला रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में एक कदम है। यह युवाओं को राष्ट्र निर्माण और आत्म-सशक्तिकरण में उनकी भागीदारी के लिए सार्थक अवसर प्रदान करेगा। रोजगार मेला देश भर में 45 स्थलों पर आयोजित किया जाएगा। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिए समय समय पर भर्तियां की जा रही हैं। देश भर से चयनित नए कर्मचारी गृह मंत्रालय, डाक विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग सहित विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में तैनात किये जायेंगे।   recent visitors 57

स्पेशल दर्शन टिकट से ही ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट को हुई 4.46 करोड़ की इनकम, 4 लाख से ज्यादा में बिके नारियल

खंडवा देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल ओंकारेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के साथ ही श्रीजी ओंकारेश्वर पब्लिक ट्रस्ट की आय में भी वृद्धि हुई है। गत दिनों हुई ट्रस्ट की बैठक में सालाना आय-व्यय का ब्योरा प्रस्तुत किया गया। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2023-24 के वित्तीय वर्ष में आय में करीब सात करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट जारी किया गया है। वर्ष 2019-20 में ट्रस्ट के पास प्रारंभिक शेष राशि 13 करोड़ 64 लाख 13 हजार 850 रुपये थी, वहीं 2019-20 में ट्रस्ट की आय छह करोड़ 80 लाख 18 हजार 444 रुपये रही। व्यवस्थाओं और मंदिर संचालन में ट्रस्ट द्वारा चार करोड़ 31 लाख 73 हजार 391 रुपये खर्च किए गए।   2021-22 में मंदिर ट्रस्ट की आय 3.95 करोड़ रुपये थी ट्रस्ट की वर्ष 2020-21 में आय दो करोड 52 लाख 94 हजार 42 रुपये थी। ट्रस्ट का व्यय दो करोड़ 50 लाख 85 हजार 529 रुपये था। वर्ष 2021-22 में मंदिर ट्रस्ट की आय तीन करोड़ 95 लाख 91 हजार 65 रुपये और ट्रस्ट का व्यय दो करोड़ 75 लाख 84 हजार 605 रुपये रहा। 2023-24 में 17.96 करोड़ रुपये आय हुई थी वर्ष 2022-23 में ट्रस्ट की आय 10 करोड़ 57 लाख 32 हजार 628 रुपये थी तो वहीं ट्रस्ट के पांच करोड़ 12 लाख 58 हजार 648 रुपये व्यय हुए। श्री ओंकारेश्वर पब्लिक ट्रस्ट को वर्ष 2023- 24 में 17 करोड़ 96 लाख 68 हजार 159 रुपये की आय हुई है, वहीं वित्तीय वर्ष में सात करोड़ 48 लाख 34 हजार 484 रुपये का व्यय रहा। इस प्रकार 33 करोड़ 27 लाख 81 हजार 531 रुपये ट्रस्ट के पास बचत है। श्री ओंकारेश्वर पब्लिक ट्रस्ट की वर्ष 2023-24 में ट्रस्ट की आय के मुख्य मद श्रीजी आय तीन करोड़ 94 लाख 39 हजार 439 रुपये श्रीजी भेंट रसीद से तीन करोड़ 28 लाख 31 हजार 102 रुपये अभिषेक से 20 लाख 56 हजार 330 रुपये, 102 रुपये नारियल बिक्री से चार लाख 86 हजार 750 रुपये कृषि भूमि को खोट से लीज पर देने से तीन लाख 92 हजार 500 रुपये बैंकों से ब्याज एक करोड़ 28 लाख 32 हजार 618 रुपये विशेष दर्शन शुल्क से चार करोड़ 46 लाख 90 हजार   recent visitors 138

तीर्थ दर्शन स्पेशल ट्रेन की समय सारणी घोषित, आज 300 यात्रियों को लेकर रवाना होगी तीर्थ दर्शन जगन्नाथ पुरी स्पेशल ट्रेन

जबलपुर मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत जगन्नाथपुरी तीर्थ यात्रा करने का इंतजार कर रहे वरिष्ठजनों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत जगन्नाथ पुरी जाने वाली स्पेशल ट्रेन जबलपुर से आज रात 11:30 बजे मुख्य रेलवे स्टेशन आएगी और रात 11:45 बजे रवाना हो जाएगी। तीर्थ दर्शन स्पेशल ट्रेन की समय सारणी घोषित कर दी गई है। हालांकि शिर्डी दर्शन के लिए जाने वाले वरिष्ठजनों को अभी और इंतजार करना होगा। ये ट्रेन फरवरी में रवाना होगी। 300 तीर्थ यात्रियों को लेकर होगी रवाना कलेक्टर कार्यालय की धर्मस्व शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार जगन्नाथ पुरी स्पेशल ट्रेन जबलपुर से 300 तीर्थ यात्रियों को लेकर रवाना होगी। धर्मस्थ शाखा के मुताबिक योजना के तहत पात्र चयनित वरिष्ठ जनों को टिकट प्राप्त करने के लिए उसी शासकीय कार्यालय में संपर्क करना होगा, जहां उन्होंने आवेदन किया था। तीर्थयात्रा के दौरान वरिष्ठजनों को मूल आधार कार्ड साथ रखना भी आवश्यक होगा। अन्य जानकारी के लिए तीर्थयात्री अनुरक्षक यात्रा प्रभारी से संपर्क कर सकते हैं। विदित हो कि ये ट्रेन 15 दिसंबर को रवाना होने वाली थी जिसे बाद में रद कर दिया गया था। ट्रेन में महिला को प्रसव पीड़ा, जबलपुर स्टेशन में हुई डिलेवरी इस बीच जबलपुर से मिली रेलवे से जुड़ी एक अन्य खबर में मुंबई से रीवा जा रही एक महिला को चलती ट्रेन में प्रसव पीड़ा हुई। महिला के पति ने रेल मदद पोर्टल के माध्यम से सहायता मांगा। मामले की जानकारी लगते ही जबलपुर रेल मंडल के चिकित्सकीय दल को सक्रिय किया गया। ट्रेन पहुंचने के पहले चिकित्सक दल जबलपुर स्टेशन पहुंच गया। जहां, ट्रेन के आने के बाद महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक डॉ. मधुर वर्मा ने बताया कि शनिवार को सुबह गाड़ी संख्या 02188 के एस-टू कोच की 58 नंबर सीट पर यात्री करुणा साकेत (20) सवार थी। वह गर्भवती थी। पति एवं देवर के साथ कल्याण से रीवा के लिए यात्रा कर रही थी। गर्भवती को चलती ट्रेन में अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी। तेज दर्द होने पर स्वजन ने रेलवे से चिकित्सा सहायता मांगा। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक के निर्देश पर उप स्टेशन प्रबंधक (वाणिज्य) हेमंत पेंद्रे की सहायता से तुरंत रेलवे अस्पताल में सूचना दी गई। गाड़ी आगमन पर रेलवे डॉ. रसिका के साथ महिला यात्री को अटेंड किया गया। डाक्टर ने परिचारिका के सहयोग से प्रसव कराया। महिला यात्रा ने पुत्री को जन्म दिया। जांच में प्रसूता एवं नवजात, दोनों स्वस्थ्य मिले। दोनों को अग्रिम उपचार के लिए एल्गिन हास्पिटल में भेजा गया। recent visitors 77