प्रदेश के शासकीय विभागों के लिए तकनीकी प्रगति का ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है

 सोनिया परिहार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में, आईटी और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में मध्यप्रदेश हर दिन नए आयाम स्थापित कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करते हुए, प्रदेश ने अपने शासकीय विभागों और नागरिकों के लिए तकनीकी प्रगति और डिजिटल सुविधाओं का ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है। राज्य डिजिटल भारत के सपने को साकार करते हुये डिजिटल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। इसमें मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रोनिक विकास निगम (एमपीएसईडीसी) और मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। म.प्र. में विकसित सॉफ्टवेयर ने देश में बनाई पहचान मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) की अगुवाई में प्रदेश ने डिजिटल प्रौद्योगिकी में कई उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। संपदा 2.0 और साइबर तहसील जैसे प्लेटफॉर्म नागरिक सेवाओं को सरल बना रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की पहचान को भी मजबूत कर रहे हैं। संपदा 2.0 ने संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर ई-पंजीकरण, ई-स्टाम्प, स्टाम्प शुल्क की गणना और दस्तावेज़ खोज जैसे कार्यों को घर बैठे संभव बनाया गया है। साइबर तहसील ने राजस्व न्यायालयों की प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सुव्यवस्थित करते हुए भ्रष्टाचार को कम करने और जनता को त्वरित सेवाएं प्रदान करने का सफल प्रयास किया गया है। निवेश और स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाएँ (आईटीईएस), इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम) और डेटा केंद्रों की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हुए, राज्य में दूरदर्शी "आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम निवेश प्रोत्साहन नीति 2023" बनाई गई है। राज्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए यह नीति डिज़ाइन की गई है। जबलपुर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस पॉलिसी के दिशा निर्देश लॉन्च किए थे। नीति में निवेशकों को वित्तीय और गैरवित्तीय सहायता प्रदान करने के प्रावधान किए गए है। सभी वित्तीय सहायता, आवश्यक अनुमतियाँ, अनुमोदनों, आवेदनों और किसी भी अन्य संबंधित प्रक्रियाओं के लिए पूर्ण रूप से डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम भी बनाया गया है। राज्य के युवाओं को स्वरोजगार के लिये प्रोत्साहित करने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप नीति-2022 लागू है। राज्य में एवीजीसी नीति-2024 भी लागू की जा रही है, जिससे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार खुला है। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा आदि को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति 2024 भी तैयार की गई है। विकसित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर वर्तमान में प्रदेश में 2 हजार से अधिक आईटी/आईटीईएस एवं ईएसडीएम इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें एमपीएसईडीसी में पंजीकृत 650 इकाइयां हैं, जिन्हें राज्य की नीतियों का लाभ मिला है। इन इकाइयों का टर्न ओवर 10 हजार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष से अधिक है। देश की 50 से अधिक बड़ी आईटी एवं आईटीईएस इकाइयां मध्यप्रदेश में स्थापित हैं। प्रदेश से हर वर्ष 500 मिलियन डॉलर का निर्यात आईटी से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से होता है। राज्य में 5 आईटी स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं। राज्य सरकार द्वारा 15 आईटी पार्क बनाए गए हैं, जिनसे डेढ़ लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। राज्य में 1200 से अधिक तकनीकी स्टार्ट-अप स्थापित हैं, जिनमें से दो "नीव क्लाउड और शॉप किराना" यूनिकॉर्न कंपनी हैं। आईटी/आईटीएस/ईएसडीएम और डेटा सेंटर क्षेत्र में बढ़ता निवेश राज्य में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव और इंटरैक्टिव सेशन में आईटी/आईटीएस/ईएसडीएम और डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेशकों ने विशेष उत्साह दिखाया। इस क्षेत्र में निवेश से रोजगार से नए अवसर सृजित होंगे। सागर में 1700 करोड़ से अधिक निवेश से डेटा स्थापित किया जा रहा है। बेंगलुरु में आयोजित इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट के दौरान, एमपीएसईडीसी ने भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर संघ,, इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसोसिएशन ऑफ जिओस्पेशल इंडस्ट्रीज और टाई ग्लोबल जैसे प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उद्योग संघों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। जबलपुर, नर्मदापुरम, मुंबई, कोयंबटूर, बेंगलुरु में कई बड़ी कंपनियों से करोड़ों के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। यूके-जर्मनी से एसआरएएम-एमआरएएम ग्रुप द्वारा 25000 करोड़ रूपये निवेश से सेमी कंडक्टर और साइंस टेक्नोलॉजी पार्क विकसित करने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ। जीआईएस तकनीक का बढ़ता उपयोग राज्य में जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक का भी व्यापक उपयोग हो रहा है। 5G के लिए योजना, अनुमोदन और जीआईएस आधारित सेवाएं प्रदान करने के लिए "गति-शक्ति संचार पोर्टल" विकसित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए सर्वेक्षण, निगरानी और कार्यान्वयन के लिए "जल रेखा" जैसे पोर्टल कार्य कर रहे है। जीआईएस द्वारा तैयार किये गये लोकपथ मोबाइल ऐप और वेब एप्लिकेशन से पूरे राज्य में सड़कों से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने एवं उनके निराकरण को मॉनिटर करने की सुविधा दी जा रही है। शोध और शिक्षा के क्षेत्र में नया अध्याय मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) के अंतर्गत राज्य में विज्ञान और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उज्जैन तारामंडल में 3डी-4K प्रोजेक्शन सिस्टम का अपग्रेडेशन और वराह मिहिर खगोलीय वेधशाला डोंगला का ऑटोमेशन इस दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हैं। प्रशासनिक डिजिटलीकरण और पारदर्शिता सरकार ने ई-एचआरएमएस पोर्टल और अन्य डिजिटल मंचों के जरिए मानव संसाधन और सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटाइज्ड किया है। मुख्यमंत्री प्रगति पोर्टल ने विभिन्न योजनाओं और निर्माण कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग को सुगम बनाया है। आईटी क्षेत्र में विगत एक वर्ष में प्राप्त उपलब्धियों ने डिजिटल प्रौद्योगिकी से प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई है और नागरिकों के जीवन को भी सरल और सुविधाजनक बनाया है। इन नवाचारों ने राज्य को आईटी निवेशकों के लिए एक आदर्श स्थान बना दिया है। प्रदेश डिजिटल भारत के सपने को साकार करते हुये वैश्विक आईटी मानचित्र पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है।   recent visitors 59

MP में जल्द ही एक और नई रेल लाइन पर भी काम शुरू होगा, नई रेल लाइन बुंदेलखंड और महाकौशल के बीच बिछाई जाएगी

भोपाल मध्य प्रदेश में जल्द ही एक और नई रेल लाइन पर भी काम शुरू हो सकता है. माना जा रहा है कि रेलवे मध्य प्रदेश को एक और नई रेल लाइन की सौगात दे सकता है. यह रेल लाइन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड और महाकौशल के बीच बिछाई जाएगी, फिलहाल प्रदेश में इंदौर-मनमाड और बुधनी इंदौर रेलवे लाइन पर काम किया जा रहा है. वहीं केंद्रीय रेल मंत्री ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही मध्य प्रदेश को एक और रेल लाइन पर काम शुरू हो सकता है. सागर-करेली-छिंदवाड़ा के बीच बिछेगी रेल लाइन दरअसल, सागर-करेली-छिंदवाड़ा के बीच बिछाई जाने वाली बहुप्रतिक्षित रेल लाइन को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री ने घोषणा की है इस प्रोजेक्ट के लिए जल्द ही डीपीआर के सर्वे को स्वीकृति दी जाने वाली है. जिससे अब क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी है कि लंबे समय से हो रही इस रेल लाइन की मांग अब पूरी हो सकती है. क्योंकि डीपीआर सर्वे जल्द पूरा होने के बाद रेल मंत्रालय इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकता है. यह रेल लाइन तीन जिलों में बिछाई जाएगी, जिसमें सागर, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा जिला शामिल रहेगा. बता दें कि इसकी मांग कई बार उठ चुकी है, स्थानीय सांसद भी संसद में इस मांग को उठा चुके हैं. 120 किलोमीटर का सफर होगा कम सागर-करेली-छिंदवाड़ा के बीच रेल लाइन बिछाए जाने के बाद करीब 120 किलोमीटर का सफर कम हो जाएगा. जबकि तीन घंटे से भी ज्यादा समय की बचत होगी. बता दें कि हाल ही में संसद सत्र कै दौरान सागर की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने इस रेल लाइन को बिछाने का प्रस्ताव रखा था. खास बात यह है कि इस रेल लाइन को भविष्य में सागर से ललितपुर तक ले जाने की तैयारी है. सांसद ने कहा यह रेल लाइन कृषि, व्यापार और पर्यटन के नजरिए से भी मध्य प्रदेश के लिए अहम साबित होगी. क्योंकि अब तक सागर और नरसिंहपुर जिले सीधे तौर पर सड़क मार्ग से जुड़े हैं, लेकिन रेल लाइन से जुड़ने के बाद महाकौशल और बुंदेलखंड क्षेत्रों में आर्थिक विकास और तेजी से होगा, जबकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच परिवहन भी आसान होगा. इसके अलावा होशंगाबाद से सांसद दर्शन चौधरी और दमोह से सांसद राहुल सिंह लोधी और छिंदवाड़ा से सांसद विवेक बंटी साहू ने भी इसकी मांग की थी. ऐसे में माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू हो सकता है.  recent visitors 65

मुख्यमंत्री मोहन यादव का निवेश पर फोकस- 6 रीजनल इंडस्ट्रियल सम्मिट में करीब 3 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार को आज  13 दिसंबर को एक साल पूरा हो रहा है. सरकार का फोकस समर्पण, सेवा, सुशासन, संस्कृति, त्योहार पर रहेगा. सीएम यादव घोषणापत्र में किए वादे भी बताएं. जानें सीएम मोहन यादव के 12 बड़े फैसले     निवेश पर फोकस- 6 रीजनल इंडस्ट्रियल सम्मिट में करीब 3 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव     स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े कदम- एमपी में 30 मेडिकल कॉलेज, जल्द संख्या 50 होगी     संस्कृति और धर्म से जोड़ा- जन्माष्टमी, गीता जयंती , गोवर्धन पूजा जैसे त्यौहार सरकार ने धूमधाम से मनाए     पर्यावरण के लिए- तेज लाउड स्पीकर, खुले में मांस की बिक्री पर रोक     हरे भरे होंगे खेत खलिहान- बुंदेलखंड क्षेत्र की केन-बेतवा वृहद परियोजना और पार्वती- कालीसिंध-चंबल परियोजना मंजूर     महिला सशक्तिकरण- मध्य प्रदेश में सिविल सेवाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत की जगह 35 प्रतिशत पदों पर आरक्षण मिलेगा     युवाओं को रोजगार- प्रदेश में जल्द अलग-अलग विभागों में करीब एक लाख सरकारी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी, तैयारी पूरी हो चुकी है     दिग्गजों से तालमेल- सीएम बनने के बाद प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय जैसे केंद्र की राजनीति करने वाले दिग्गज सरकार में मंत्री बने, मोहन यादव ने तालमेल बैठाया     सियासत में भी 100% रिजल्ट- 2023 में सरकार बनने के बाद सीएम मोहन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2024 का लोकसभा चुनाव था, सभी 29 सीट जीती     उपचुनाव में परचम लहराया- डॉ मोहन यादव के सीएम बनने के बाद 3 उपचुनाव हुए बुधनी और अमरवाड़ा बीजेपी तो विजयपुर कांग्रेस जीती     महाराष्ट्र-हरियाणा में भी जलवा- मोहन यादव ने जिन 5 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया, उनमें से चार सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की     अफसरशाही पर सख्ती- लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिला तत्काल एक्शन- गुना हादसे के बाद कलेक्टर, एसपी बदले, शाजापुर कलेक्टर को विवादित बयान के बाद हटाया recent visitors 54

सांसद लालवानी ने इंदौर एयरपोर्ट को आगामी 25 सालों को ध्यान में रखकर विकसित करने की योजना भी केंद्रीय मंत्री नायडू से साझा की

इंदौर इंदौर एयरपोर्ट को नई सुविधाएं मिलने वाली है, जिसके बाद हवाई सफर बेहतर और ज्यादा सुरक्षित होगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापू राममोहन नायडू इंदौर में कई सुविधाओं का लोकार्पण करेंगे। इसमें नया फायर स्टेशन एयर ट्रैफिक कंट्रोल प्रमुख है। केंद्रीय मंत्री नायडू के इंदौर आगमन की संभावित तारीख 22 दिसंबर है। नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू से मुलाकात कर उन्हें इंदौर आने का न्योता दिया दरअसल, इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू से मुलाकात कर उन्हें इंदौर आने का न्योता दिया है, जिसे केंद्रीय मंत्री नायडू ने स्वीकार किया। साथ ही सांसद लालवानी ने इंदौर एयरपोर्ट को आगामी 25 सालों को ध्यान में रखकर विकसित करने की योजना भी केंद्रीय मंत्री नायडू से साझा की। केंद्रीय मंत्री ने इंदौर में हवाई सुविधाएं बढ़ाने का भरोसा दिलाया सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू से इंदौर आने का अनुरोध किया था जिस मंत्री नायडू ने सहर्ष स्वीकार किया है। लगातार विकसित होते इंदौर एवं आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखकर एयरपोर्ट के विकास के लिए एक प्लान भी साझा किया है, जिस पर मंत्री नायडू ने विस्तार से बात को सुना है और इंदौर में हवाई सुविधाएं बढ़ाने का भरोसा दिलाया। इंदौर को नई सौगातें मिलने का रास्ता खुल सकता है इससे पहले सांसद लालवानी ने केंद्रीय मंत्री नायडू से मुलाकात कर नए टर्मिनल भवन, टैक्सी बे बनाने तथा इंदौर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा दिलाने की भी मांग की थी। नागरिक उड्डयन मंत्री मंत्री नायडू के इंदौर प्रवास के दौरान इन विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी और इंदौर को नई सौगातें मिलने का रास्ता खुल सकता है।   recent visitors 70

पुलिस आयुक्त ने सभी थानों के चार पहिया वाहनों पर ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए

इंदौर रात्रि गश्त और क्षेत्र में भ्रमण का बोलकर होटल या अपने ठिकानों पर जाने वाले पुलिसकर्मियों की निगरानी शुरू हो गई है। पुलिस आयुक्त ने सभी थानों के चार पहिया वाहनों पर ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगाने के निर्देश दिए है। जोन-2 के छह वाहनों पर इसका ट्रायल चल रहा है। डीसीपी जोन-2 अभिनय विश्वकर्मा के मुताबिक जीपीएस का उद्देश्य गश्त को ज्यादा प्रभावी बनाना है। कईं बार पुलिसकर्मी क्षेत्र में भ्रमण करने में लापरवाही करते है। एक स्थान पर घंटों खड़ी रहती है गाड़ी कईं बार एक ही स्थान पर घंटों तक गाड़ी खड़ी रहती है। जीपीएस से डेशबोर्ड पर गाड़ी की लोकेशन देखी जाएगी। गश्त करने वाला पुलिस अधिकारी कहां-कहां गया इसकी पूरी रिपोर्ट अफसरों को मिलेगी। गाड़ी कितने किलोमीटर और कितने समय चली इसका ब्योरा भी मिलेगा। गश्त करने का दावा किया जाता है इससे गड़बड़ी करने वाले पुलिसकर्मियों को चिह्नित करने में सुविधा होगी। डीसीपी के मुताबिक कईं बार वारदात होने पर पुलिसकर्मियों द्वारा विधिवत गश्त करने का दावा किया जाता है। जीपीएस के माध्यम से फ्लैश बैक में जाकर गश्त करने वाले वाहन की लोकेशन निकाल सकते हैं। 6 वाहनों पर प्रयोग शुरू ट्रायल के तौर पर छह वाहनों पर प्रयोग शुरू किया है। इस दौरान कुछ वाहन दूसरे थाना क्षेत्र में जाना पाए गए है। पुलिसकर्मियों द्वारा बताया गया कि वो गश्त के दौरान मुलजिमों को ढूंढने गए थे। पुलिसकर्मियों पर एआई से निगरानी कर रहे डीसीपी डीसीपी के मुताबिक इसके पूर्व जोन-2 में एआई के माध्यम से पुलिसकर्मियों की निगरानी की जा रही है। रात्रि गश्त करने वाले पुलिसकर्मियों से फोटो सहित लोकेशन ली जाती है। इससे पुलिसकर्मी की उपस्थिति सुनिश्चित होती है। गश्त में गलत लोकेशन देने वाले पुलिसकर्मियों को चिह्नित कर लिया जाता है। recent visitors 69

दुर्गाडी किला मंदिर या मस्जिद आया फैसला सब कुछ हुआ साफ, 48 साल पुराने विवाद पर कोर्ट का निर्णय

मुंबई  48 साल बाद कल्याण के ऐतिहासिक दुर्गाडी किले को लेकर बड़ा फैसला आया है। कल्याण सिविल कोर्ट ने दुर्गाडी के अंदर ईदगाह (प्रार्थना स्थल) के स्वामित्व का दावा करने वाले एक मुस्लिम ट्रस्ट के दायर मुकदमे को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन एएस लांजेवार ने कहा कि यह निर्धारित किया गया है कि ट्रस्ट का दावा अमान्य है क्योंकि वह कथित बेदखली के बाद तीन साल की अवधि के भीतर मुकदमा दायर करने में विफल रहा, जो कि सीमा अधिनियम के तहत आवश्यक है। दुर्गाडी किले में स्थित दुर्गाडी मंदिर और ईदगाह के स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई 1976 से चल रही है। मजलिश-ए-मुशावरीन मजीद ट्रस्ट ने मुकदमा दायर किया था। दुर्गाडी नमाज स्थल पर मुस्लिम समुदाय की दायर याचिका को मंगलवार को एक सिविल कोर्ट ने खारिज कर दिया और इसे ठाणे कलेक्टर (महाराष्ट्र सरकार) की भूमि घोषित कर दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट जाएगा मुस्लिम ट्रस्ट ट्रस्ट अधिकारियों ने कहा कि वे इस आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील करेंगे। महाराष्ट्र में यह विवाद सबसे पहले दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने उठाया था। बाद में शिवसेना के पदाधिकारी आनंद दिघे ने यह मुद्दा उठाया। आनंद दिखे से उनके शिष्य एकनाथ शिंदे ने इस मुद्दे को लेकर मुखर थे। महाराष्ट्र सरकार को दिया स्वामित्व मुस्लिम ट्रस्ट के दावों को खारिज किए जाने के बाद, केस लड़ रहे हिंदू संगठनों के नेताओं के साथ-साथ शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना यूबीटी के नेताओं ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई। चूंकि दुर्गाडी किला ऐतिहासिक और प्राचीन है, इसलिए महाराष्ट्र सरकार ने 1971 में इसे विरासत संपत्ति घोषित किया था। इसके साथ ही, दुर्गाडी किले का कब्जा और स्वामित्व राज्य सरकार के पास रहेगा। पट्टे पर लिया था परिसर, बन गए मालिक ट्रस्ट चाहता था कि सरकार दुर्गाडी ईदगाह और मंदिर को अपनी संपत्ति घोषित करे, क्योंकि 1968 तक स्थानीय मुस्लिम समुदाय इसका सक्रिय रूप से नमाज के लिए उपयोग करते थे। मुकदमे के अनुसार, उस समय सरकार ने कल्याण नगर परिषद को परिसर पट्टे पर दिया था। श्री दुर्गाडी देवी उत्सव समिति कल्याण और कल्याण शहर के कुछ हिंदू नागरिकों ने सिविल कोर्ट में एक आवेदन दायर किया था। इस बीच, 2018 में मुस्लिम ट्रस्ट ने कल्याण सिविल कोर्ट में इस दावे को वक्फ बोर्ड, औरंगाबाद (संभाजीनगर) को हस्तांतरित करने के लिए एक आवेदन दायर किया। इस वाद में उन्होंने दावा किया गया कि उनके दावों पर निर्णय लेने का अधिकार वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आता है। 'मंदिर को मुसलमानों ने बनाया मस्जिद' मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उक्त आवेदन पर एक आदेश पारित किया और मामले को वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित करने के उनके दावे को खारिज कर दिया। हिंदू मंच के अध्यक्ष दिनेश देशमुख का दावा है कि उपलब्ध अभिलेखों से पता चलता है कि दुर्गाडी किले पर एक दुर्गा मंदिर है। मुसलमान इसे ईदगाह कहते हैं, वह वास्तव में किले की दीवार है। बालासाहेब ठाकरे को दिया श्रेय भाजपा विधायक रवींद्र चव्हाण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में राज्य सरकार इस मामले पर अदालत के आदेश को लागू करेगी। शिवसेना और सेना यूबीटी के स्थानीय पदाधिकारियों ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि कानूनी लड़ाई के अनुकूल परिणाम का श्रेय दिवंगत बालासाहेब ठाकरे को जाता है। क्‍या है पूरा मामला इस जगह पर 1968 तक मंदिर और मस्जिद दोनों का इस्तेमाल दोनों समुदाय करते थे, लेकिन इसके बाद विवाद हो गया. इसके बाद साल 1967 में यहां पूजा करने पर भी रोक लगा दी गई. महाराष्ट्र सरकार ने 1968 में दुर्गाडी किले को लेकर आदेश जारी क‍िया. राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष को केवल दो दिन रमजान ईद और बकरीद पर नमाज अदा करने का आदेश दिया. फिर 1976 में मजलिस नामक एक मुस्लिम संगठन ने दावा दायर किया कि सदर किला एक मंदिर नहीं बल्कि एक मस्जिद है. दावा कई वर्षों से लंबित था. बाद में मजलिस ने जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया. मजलिस के दावे के खिलाफ अदालत करीब 48 साल से सुनवाई कर रही थी. इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया. recent visitors 65

ईरान के नए हिजाब कानून से हिली दुनिया, सजा सुनकर उड़े महिलाओं के होश!

तेहरान ईरान सरकार हिजाब को लेकर सख्त होती जा रही है. ईरान के नए शुद्धता और हिजाब कानून की पत्रकारों और एक्टिविस्टों की ओर से अलोचना की जा रही है. जिसके अंदर उल्लंघन करने वालों को मृत्युदंड और कोड़े मारने जैसी कठोर सजाएं दी जा सकती हैं. नए हिजाब कानून को सितंबर 2023 में संसद में पारित किया गया था और एक साल बाद गार्जियन काउंसिल द्वारा इसे अंतिम रूप दिया गया है. इस कानून में हिजाब को अनिवार्य बनाने के लिए कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें भारी जुर्माना, लंबी जेल की सजा और रोजगार और शिक्षा पर प्रतिबंध शामिल हैं. शुक्रवार को मानवाधिकार एडवोकेट शदी सद्र ने नए कानून के चरम प्रावधानों के बारे में बताया, इनमें से एक प्रावधान न्यायपालिका को विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर नग्नता, पर्दा डालने या अनुचित पोशाक पहनने के आरोपी व्यक्तियों को मौत की सजा देने का अधिकार देता है. इसके अलावा ऐसे कृत्यों को ‘धरती पर भ्रष्टाचार” के तौर पर देखता है. हिजाब न पहनने पर हो सकती है मौत की सजा रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स से जुड़ी फ़ार्स न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक नए हिजाब और शुद्धता कानून के एक खंड में लिखा है, “कोई भी व्यक्ति जो विदेशी सरकारों, नेटवर्क, मीडिया आउटलेट, समूहों या राज्य के प्रति शत्रुतापूर्ण संगठनों, या उनसे जुड़े व्यक्तियों के साथ मिलकर, या संगठित तरीके से नग्नता, अनैतिकता, पर्दा हटाने या अनुचित पोशाक को बढ़ावा देने या विज्ञापन देने में संलग्न है, उसे चौथी डिग्री कारावास और तीसरी डिग्री जुर्माने की सजा दी जाएगी, जब तक कि उनका अपराध इस्लामी दंड संहिता के अनुच्छेद 286 के अंतर्गत न आता हो.” इस्लामी दंड संहिता का आर्टिकल 286 ‘पृथ्वी पर भ्रष्टाचार फैलाने’ को परिभाषित करता है, जिसके लिए मृत्यु दंड दिया जा सकता है. यदि अधिकारी हिजाब उल्लंघन को इस अनुच्छेद के अंतर्गत मानते हैं, तो इसके लिए मृत्यु दंड दिया जा सकता है. कोड़े मारने की सजा दूसरा प्रावधान में हिजाब नियमों का पालन न करने पर कोड़े मारना एक दंड शामिल है जो नए कानून में भी बना रहेगा, जिसमें महिलाओं, ट्रांस व्यक्तियों और गैर-बाइनरी लोगों को लक्षित किया जाता है. पत्रकारों और एक्टिविस्टों का विरोध इस कठोर कानून के खिलाफ 140 से ज्यादा पत्रकारों ने आवाज़ उठाई है, इसे नागरिक अधिकारों का उल्लंघन और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है. दूसरी और महिला अधिकारों पर बात करने वाले संगठन पहले से ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं. पत्रकार और महिला अधिकार कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने इस कानून को महिलाओं को कुचलने, उनकी आवाज़ दबाने और समानता की लड़ाई को खत्म करने का सोचा-समझा हथियार” बताया है. उन्होंने कहा, “यह कोई कानून नहीं है; यह आतंक का एक हथियार है.” रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी मीडिया या संगठनों में हिजाब विरोधी विचारों को बढ़ावा देने के आरोपी लोगों को 10 साल तक की जेल की सजा मिलेगी। साथ ही 12,500 पाउंड तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। इसके अलावा कानून का उल्लंघन करने वाली महिलाओं की गिरफ्तारी को रोकने या हस्तक्षेप करने की कोशिश करने वाले लोगों को भी नहीं बख्शा जाएगा। ईरान की सरकार ऐसे लोगों को सीधे जेल में डाल सकती है। ईरान के मुताबिक नए कानूनों का उद्देश्य हिजाब की संस्कृति की पवित्रता को बनाए रखना है। ईरान ने कहा है कि ढंग से कपड़े ना पहनने, नग्नता को बढ़ावा देने या चेहरे को ढकने का विरोध करने पर कठोर से कठोर सजा दी जाएगी। गौरतलब है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान ने महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर बाल ढकने का कानून लागू किया है। 2022 में इन कानूनों के विरोध में देश भर में प्रदर्शन हुए थे। ईरान में 16 सितंबर, 2022 को 22 वर्षीय कुर्द महिला महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। महसा को तेहरान में तैनात मोरल पुलिस ने देश के ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसकी मौत के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इन प्रदर्शनों में कई सुरक्षाकर्मियों सहित सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। तब ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए हजारों प्रदर्शकारियों को गिरफ्तार किया था। अब इसके दो साल बाद पहले से भी ज्यादा सख्त कानून लागू किए गए हैं।   recent visitors 46