राजस्थान में हीट स्ट्रोक का जबरदस्त असर, 48 डिग्री पहुंचा तापमान

जयपुर राजस्थान इस वक्त मौसम विभाग के रडार पर लाल नजर आ रहा है। यहां पारा हर रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है। शुक्रवार का दिन सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। जैसलमेर में सर्वाधिक तापमान 48 डिग्री दर्ज किया गया। पश्चिमी राजस्थान इस वक्त धधक रहा है और मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटों तक दिन के साथ यहां रात के समय भी जबरदस्त हीट वेव्स चलेंगी। पाकिस्तान की सीमा से सटे राजस्थान के बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर में शनिवार को हीट वेव्स का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने की संभावना है। इससे यहां पर तापमान में कुछ कमी आ सकती है। पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में आज तेज आंधी व वज्रपात का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां 40 से 60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चल सकती है। बीते 24 घंटों में प्रदेश के 7 शहरों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री से अधिक रहा। इसमें जैसलमेर में सर्वाधिक 48 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। मौसम विभाग का कहना है कि 48 घंटों में बीकानेर, जोधपुर संभाग व शेखावाटी के कुछ भागों में अधिकतम तापमान में राहत मिलने के आसार नहीं हैं और इस दौरान यहां दिन के साथ रात में भी तेज लू चलेगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में धूल भरी हवाएं चलेंगी। राजधानी जयपुर में शुक्रवार के मुकाबले तापमान में दो डिग्री की गिरावट आई है। यहां गुरुवार को अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार राजधानी जयपुर में अगले कुछ दिन तापमान में गिरावट आ सकती है लेकिन पश्चिमी राजस्थान में अगले 4 से 5 दिन जबरदस्त हीट वेव्स चलेंगी। बीते 24 घंटों में प्रदेश के अधिकतम तापमान की स्थिति इस प्रकार रही। अजमेर में 43.1, भीलवाड़ा में  41.1, वनस्थली 46.1, अलवर में 40.5, जयपुर में 43.2, पिलानी में 45.7, कोटा में 42.3, बाड़मेर में 47.5, जैसलमेर में 48, जोधपुर में 44.5, चूरू में 45.6 तथा बीकानेर में 46.4 व गंगानगर में 44.1 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। recent visitors 65

एस-400 ने 300 KM से ज्यादा की दूरी पर हवाई लक्ष्य को मार गिराकर सबसे लंबे समय तक मार करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया

नई दिल्ली  यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों की मीडिया ने रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को बदनाम करने की हर मुमकिन कोशिश की। उसे नाकाम बताया, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ S-400 ने जैसा कमाल किया है, उसे देखकर पश्चिमी देश परेशान है। भारत के रूसी हथियारों ने जिस तरह से पाकिस्तान को धूल चटाया है, वो पश्चिमी देशों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। एक वजह ये भी है कि पश्चिमी देशों की मीडिया ने पाकिस्तान के समर्थन में उसका भोपूं बन जाने का फैसला किया। एस-400 के पराक्रम के बारे में धीरे धीरे खुलासे होने लगे हैं और यूरेशियन टाइम्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की लंबी दूरी की मिसाइलों के खिलाफ एस-400 सौ फीसदी कामयाब और प्रभावी साबित हुआ है। एस-400 ने पाकिस्तान के कई क्रूज मिसाइलों और विनाशकारी ड्रोन को मार गिराया, जिससे भारत को अपने सैन्य ठिकानों को सुरक्षित रखने में मदद मिली। आपको बता दें कि भारत ने 5.4 अरब डॉलर की लागत से रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के पांच यूनिट खरीदे थे। जिनमें से रूसे ने अभी तक तीन एस-400 की ही डिलीवरी दी है। दो एस-400 की डिलीवरी मिलना अभी बाकी है। रूस से एस-400 खरीदने की वजह से अमेरिका ने CAATSA के तहत प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी थी, लेकिन भारत एस-400 खरीदने के फैसले से पीछे नहीं हटा। S-400 ने कैसे गिराया पाकिस्तानी AWACS एयरक्राफ्ट? यूरेशियन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारतीय S-400 ने 314 किलोमीटर की दूरी पर किसी हवाई लक्ष्य को भेदकर एक रिकॉर्ड बनाया है। अधिकारी ने कहा कि एस-400 ने 300 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर हवाई लक्ष्य को मार गिराकर SAM (सरफेस टू एयर मिसाइल) द्वारा सबसे लंबे समय तक मार करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान एस-400 ने पाकिस्तान वायु सेना की आंख माने जाने वाले SAAB Erieye-2000 फ्लाइंग रडार, यानि AWACS एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। ऐसा करके भारतीय एस-400 ने एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। अधिकारी का नाम नहीं छापने की शर्त पर यूरेशियन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि SAAB Erieye-2000 का ये दूसरा नुकसान था। इससे पहले, पाकिस्तान के एयर मार्शल मसूद अख्तर (सेवानिवृत्त) ने खुलासा किया था, कि 9-10 मई की रात को भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान वायु सेना के एक AWACS विमान को मार गिराया था। लेकिन भारतीय अधिकारी ने कहा है कि AWACS को ब्रह्मोस से नहीं, बल्कि एस-400 से मारा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक किसी भी SAM ने इतनी ज्यादा दूरी से किसी हवाई लक्ष्य को नष्ट नहीं किया है। लेकिन एस-400 ने 314 किलोमीटर से पाकिस्तानी AWACS एयरक्राफ्ट को मार गिराकर पूरी दुनिया में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। एस-400 की वजह से बाद में पाकिस्तान के फाइटर जेट्स ने उड़ान भरना ही बंद कर दिया था। जिसकी वजह से भारतीय वायुसेना के विमानों ने एक के बाद एक पाकिस्तानी वायुसेना के एयरबेस को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमले किए थे और भारी नुकसान पहुंचाया था। एस-400 के नये ऑर्डर दे सकता है भारत भारत के पास फिलहाल एस-400 के तीन यूनिट्स हैं। जिनमें से दो को भारत ने पश्चिमी मोर्चे पर जबकि एक को पूर्वी मोर्चे पर तैनात कर रखा है। भारत अभी भी रूस से 2 और यूनिट की डिलीवरी का इंतजार कर रहा है। लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस डिलीवरी देने में देरी कर रहा है। इस बीच भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल जल्द ही मॉस्को का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान वो रूस से बाकी बचे 2 यूनिट्स की डिलीवरी के अलावा कुछ और एस-400 डिफेंस सिस्टम का भी ऑर्डर दे सकते हैं। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि एस-400 की जगह भारत एस-500 'प्रोमेथियस' को खरीदने का भी फैसला कर सकता है, जिसकी क्षमता धरती के लोअर ऑर्बिट तक मार करने की है। S-500 प्रोमेथियस रूस की अगली पीढ़ी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है। अल्माज़-एंटे ने इसे डेवलप किया है और इसका ऑपरेशनल रेंज 600 किमी तक है। यह हाइपरसोनिक हथियारों, बैलिस्टिक मिसाइलों और यहां तक कि लोअर-ऑर्बिट में स्थिति सैटेलाइट्स को भी मार गिराने की क्षमता रखता है। हालांकि इसकी कीमत काफी ज्यादा होने की संभावना है। रूस ने अभी तक एस-500 की कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसकी कीमत 4 से 5 अरब डॉलर के बीच होने की संभावना है। एस-500 खरीदकर भारत, चीन और पाकिस्तान के स्टील्थ फाइटर जेट को न्यूट्रल कर सकता है। recent visitors 61

बस एक फूंक मारो और जान लो अपना शुगर लेवल, बालाघाट के प्रोफेसर और छात्रों ने निकाली ऐसी अनोखी तरकीब

बालाघाट शुगर के मरीजों के लिए अच्छी खबर. फूंक मारकर पता कीजिए शरीर का शुगर लेवल. अब बार बार सुई चुभाने और खून निकालने की जरूरत नहीं है, बस एक फूंक मारो और जान लो अपना शुगर लेवल. बालाघाट के प्रोफेसर और छात्रों ने निकाली ऐसी अनोखी तरकीब. सेकंडों में पता करें अपना सुगर लेवल बालाघाट के शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज के प्रोफेसर और छात्रों ने मिलकर एक ऐसी मशीन बनाई है, जिससे आप उस मशीन में फूंक मारकर सेकंडों में पता कर सकेंगे कि आपके शरीर का शुगर लेवल कितना है. अब आपको बार बार डॉक्टर के पास जाने के झंझट से छुटकारा मिल जायेगा साथ ही आप अपने शरीर का ध्यान भी रख सकेंगे. प्रोफेसर और कॉलेज के छात्रों के द्वारा बनाई गई इस मशीन की तारीफ अब हर तरफ हो रही है. भोपाल में आयोजित सृजन कार्यक्रम में बालाघाट के इस प्रोजेक्ट ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से 150 प्रोजेक्ट चयनित हुए थे. बालाघाट के शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 प्रोजेक्ट को पहला स्थान बता दें कि भोपाल में आयोजित सृजन कार्यक्रम के लिए पूरे प्रदेश से 150 प्रोजेक्ट चयन किये गये थे, जिसमें इस शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 नाम के प्रोजेक्ट का भी चयन हुआ था. बालाघाट के इस शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 नाम के प्रोजेक्ट को पहला स्थान मिला. शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 मशीन क्या है? यह एक ऐसी डिवाइस है, जिसमें बिना सुई चुभाए यानी शरीर से बिना खून निकाले ही शुगर लेवल का पता लगाया जा सकता है. इस डिवाइस में सिर्फ फूंक मारना होता है. इसके बाद ये मशीन चंद सेकंड में ही आपका शुगर लेवल बता देती है. इसमें एकदम इग्जैक्ट शुगर लेवल की मात्रा तो नहीं पता चलती, लेकिन ये तीन तरह से शुगर की रीडिंग दिखाती है, इसमें 'लो' का मतलब शुगर लेवल कम है. वहीं, 'मॉडरेट' यानी शुगर लेवल सामान्य है, जबकि मशीन में जब 'हाई' दिखाता है, तो शुगर लेवल ज्यादा है, यानी कि डायबिटीज होने की आशंका है. एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन गौरतलब हो कि शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे इस प्रोजेक्ट पर पिछले 8 सालों से काम कर रहे थे तब कहीं जाकर यह डिवाइस बन पाई है. प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे ने बताया कि "2017 में उन्होंने इस प्रोजेक्ट को बनाना शुरू किया था. शुगर के मरीजों में कीटोजेनिक मेटाबॉलिज्म शुरू हो जाता है. उनकी बॉडी के अंदर कीटोन का निर्माण होने लगता है. फिर कीटोन में उपस्थित एसिटोन उनकी सांस में आने लगता है. ऐसे में एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन किया गया. फिर इस आधार पर इस मशीन का आविष्कार हो पाया है. इसका पेटेंट साल 2023 में किया गया. इस मॉडल में इंजीनियरिंग की अहम भूमिका रही, क्योंकि एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन और इसके अनुपात को स्पष्ट करने के लिए कोडिंग की गई. दोनों के संबंध को स्थापित करने के लिए फिर प्रोग्रामिंग की गई. ऐसे में इंजीनियरिंग की मदद से यह प्रोजेक्ट पूरा हो पाया." ब्रेथ एनलाइजर डिवाइस, एसिटोन पर करती है काम जनरल फिजिशियन डॉ. वेदप्रकाश लिल्हारे ने चर्चा में बताया कि "प्रोफेसर और बच्चों के द्वारा यह एक अच्छा नवाचार है, जिस तरह से खून निकाल कर शुगर की जांच होती थी उससे छुटकारा मिलेगा. वहीं, डॉक्टर ने बताया कि प्रोफेसर अगासे का जो ब्रेथ एनलाइजर है वो एसिटोन पर काम कर रहा है और एसिटोन हर शुगर के मरीजों में नहीं बनता है. मैं उनसे लगातार चर्चा में हूं, वे और क्या अपडेट कर रहे हैं इसकी चर्चा भी लगातार हो रही है." recent visitors 52

यूनुस और सेना प्रमुख के बीच जुबानी जंग से बांग्लादेश का सियासी माहौल गर्म, यूनुस सत्ता में बने रहने की कोशिश में बनाई रणनीति

ढाका बांग्लादेश एक बार फिर नेतृत्व संकट से घिर गया है. ढाका की राजनीति संवेदनशील मोड़ पर आ खड़ी हुई है. देश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मुहम्मद यूनुस अब खुद को बढ़ते दबावों के बीच घिरा पा रहे हैं. सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान की दो टूक चेतावनी के बाद यूनुस इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं और प्लान B की तैयारी में जुट गए हैं. कहा जा रहा है कि यूनुस अब सत्ता में बने रहने के लिए सड़कों पर ताकत दिखाने जा रहे हैं. वहीं, राजनीतिक गलियारों और सैन्य हलकों में उनकी मंशा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. पिछले साल बांग्लादेश में जनविरोध के बाद सत्ता में उलटफेर हुआ था और 84 साल के यूनुस के हाथों में सत्ता सौंपी गई थी. बांग्‍लादेश के आर्मी चीफ जनरल वकर-उज-जमान ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मुहम्मद यूनुस अगले डेढ़ साल तक सत्ता में रहेंगे. इसी बीच चुनाव कराए जाएंगे और नई सरकार का गठन होगा.उन्होंने आगे कहा था, हम जल्द ही देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आर्मी को मजिस्ट्रेट की पावर सौंपी है, जिसके बाद अंदेशा लगाया जा रहा था कि शायद अब सेना के हाथ में देश की सत्ता होगी और दोनों मिलकर सरकार चलाएंगे. सेना प्रमुख ने साफ किया था कि जब तक अंतरिम सरकार रहेगी, तब तक सेना उसके पीछ रहकर काम करेगी. यह तब तक चलेगा, जब तक कि यूनुस देश में चल रहे सुधारों को पूरा नहीं कर लेते हैं. आर्मी चीफ ने यह भी आश्वासन दिया था कि वे अंतरिम सरकार के साथ हमेशा खड़े रहेंगे, कैसी भी परिस्थिति हो. अब विवाद क्यों भड़का… दरअसल, सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने यूनुस के सुधार एजेंडे को खारिज कर दिया है और दिसंबर 2025 तक चुनाव कराने का आह्वान किया. जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर कहा कि अंतरिम सरकार का काम सिर्फ चुनाव कराना है, नीतिगत निर्णय लेना नहीं. सैन्य मामलों में हस्तक्षेप, आंतरिक सुरक्षा में एकपक्षीय निर्णय और बाहरी शक्तियों के दबाव को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सेना को हर रणनीतिक और सुरक्षा नीति में विश्वसनीय साझेदार की तरह शामिल किया जाना चाहिए. यह बयान यूनुस की सत्ता को खुली चुनौती के रूप में देखा गया. ज़मान ने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरिम सरकार कोई भी ऐसा महत्वपूर्ण निर्णय ना ले, जिससे बांग्लादेश की स्थिरता और संप्रभुता पर असर पड़े. ऐसे मुद्दों को भविष्य में निर्वाचित सरकार पर छोड़ दिया जाए. बुधवार को सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अब और देरी नहीं चलेगी. सेना को नजरअंदाज कर रणनीतिक फैसले नहीं लिए जा सकते हैं. सेना प्रमुख ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वे सैन्य अधिग्रहण के खिलाफ हैं. वे यूनुस से बस यही उम्मीद करते हैं कि वे स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव करवाएं ताकि सत्ता का सुचारू और शांतिपूर्ण हस्तांतरण निर्वाचित सरकार को हो सके, जिसके बाद सेना वापस अपने बैरक में जा सकती है. बुधवार को उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सेना अब भीड़तंत्र और अराजकता, अंतरिम सरकार द्वारा सैन्य मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप और बांग्लादेश की संप्रभुता और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों में सेना को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में सैन्य नेतृत्व से सलाह ली जानी चाहिए और पीठ पीछे कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए. यूनुस आर्मी चीफ के खिलाफ ही रच रहे साजिश, भारत के दुश्मनों के साथ सीक्रेट मीट…  बांग्लादेश में सियासी माहौल फिर से गर्म हो गया है. यूनुस और सेना प्रमुख के बीच जुबानी जंग चल रही है. ऐसे में यूनुस सेना प्रमुख को हटाना चाहते हैं. अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने भारत विरोधी दलों की एक अहम बैठक बुलाई है, लेकिन इस बैठक में क्या बात होगी, यह अभी रहस्य बना हुआ है. ढाका की सड़कों पर चर्चा है कि यूनुस अगले पांच साल तक सत्ता में बने रहना चाहते हैं. इसके लिए उनके समर्थक ‘मार्च फॉर यूनुस’ नाम से एक विशाल जनसभा की तैयारी कर रहे हैं. दूसरी तरफ, सेना प्रमुख की सख्त चेतावनी और राजनीतिक दलों की नाराजगी ने इस ड्रामे को और रोचक बना दिया है. मोहम्मद यूनुस अब सीक्रेट मीटिंग कर रहे हैं. यूनुस ने  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें बुलाई हैं. बीएनपी के एक नेता ने बताया कि यूनुस के दफ्तर ने उन्हें इस बैठक के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन, इन बैठकों का असली मकसद क्या है, यह कोई नहीं जानता. हालांकि उनके इस तरह के मीटिंग करने से माना जा रहा है मोहम्मद यूनुस सत्ता छोड़ने के मूड में नहीं हैं और वह सेना प्रमुख को ही विलेन बनाकर हटाना चाहते हैं. गुरुवार को यूनुस ने NCP नेता नाहिद इस्लाम से मुलाकत की थी. माना जा रहा है कि दोनों मिलकर सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान को हटाने की रणनीति बना रहे हैं. नाहिद वही भारत विरोधी नेता है, जिसने पिछले साल शेख हसीना की सरकार के खिलाफ छात्र आंदोलन को लीड किया था. नाहिद और यूनुस की मुलाकात के बाद ये अटकलें और तेज हो गई हैं. यूनुस पांच साल संभालेंगे सत्ता? यूनुस इस पूरी लड़ाई में अपनी चालें चल रहे हैं. एक तरह वह इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अपने समर्थकें के जरिए प्रदर्शन करवा रहे हैं. यूनुस के समर्थकों ने ढाका के मशहूर शाहबाग चौराहे पर शनिवार को ‘मार्च फॉर यूनुस’ नाम से एक बड़ी रैली की घोषणा की है. शहर में पोस्टर लगाए जा रहे हैं और सोशल मीडिया पर ‘पांच साल तक यूनुस को सत्ता में रखो’ और ‘पहले सुधार, फिर चुनाव’ जैसे नारे ट्रेंड कर रहे हैं. समर्थकों का कहना है कि यूनुस को देश में सुधार लाने के लिए लंबा समय चाहिए. लेकिन इस रैली की टाइमिंग ने सबके कान खड़े कर दिए हैं. आर्मी चीफ की चेतावनी सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने साफ कहा है कि बिना चुनाव के सत्ता में बने रहना गैरकानूनी है. सेना ने यूनुस सरकार को दिसंबर … Read more

देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन अहमदाबाद में बनकर तैयार, 2029 से दौड़ेगी ट्रेन…

 अहमदाबाद  भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अब नई ऊँचाइयों पर पहुंच चुकी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 300 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट लगभग पूरा हो चुका है, जिससे यह प्रोजेक्ट अपनी मंजिल के और करीब आ गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और गुजरात के राज्य परिवहन मंत्री ने हाल ही में इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी फोटो और वीडियो के साथ साझा की है। यह बुलेट ट्रेन का पहला स्टेशन गुजरात के सूरत शहर में बनाया गया है। बुलेट ट्रेन के लिए 300 किलोमीटर का मजबूत वायाडक्ट तैयार मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन का मार्ग करीब 500 किलोमीटर का होगा। अब तक इस मार्ग पर 300 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट तैयार हो चुका है। वायाडक्ट एक ऊँचा पुल जैसा ढांचा होता है जो ट्रेन को सड़क, नदियों और अन्य बाधाओं के ऊपर से गुज़रने में मदद करता है। इस 300 किलोमीटर में से 257.4 किलोमीटर का निर्माण फुल स्पैन लॉचिंग तकनीक से किया गया है, जो एक आधुनिक और तेज़ तरीका है। यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में 10 गुना तेजी से काम करती है। इस विधि से गर्डर (लंबे लोहे या कंक्रीट के टुकड़े) को सीधे उसके स्थान पर स्थापित किया जाता है। हर एक गर्डर लगभग 970 टन वजन का होता है। इस वजह से काम तेजी से पूरा हो पा रहा है। अब तक का काम कितना हुआ पूरा? इस बड़े प्रोजेक्ट में अब तक:     383 किलोमीटर पियर्स (उठाए गए खंभे)     401 किलोमीटर फाउंडेशन (नींव)     326 किलोमीटर गर्डर कास्टिंग (गर्डर बनाने का काम) पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा कई नदी पुल, स्टील और पीएससी ब्रिज, और स्टेशन बिल्डिंग भी बनाए जा चुके हैं। इस बुलेट ट्रेन के रास्ते में कुल 12 स्टेशन बन रहे हैं, जिनमें से सूरत में देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन लगभग तैयार है। जापान दो बुलेट ट्रेन गिफ्ट करेगा बीते महीने खबर आई कि जापान भारत को दो शिंकानसेन ट्रेन E5 और E3 गिफ्ट करेगा. जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी डिलीवरी 2026 की शुरुआत में हो सकती है. जापान इस वक्त शिंकानसेन की E10 सीरीज पर काम कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, जापान और भारत 2030 की शुरूआत में एक साथ E10 सीरीज की ट्रेन भी पटरी पर उतारने की योजना बना रहे हैं. भारत में इस प्रोजेक्ट का जिम्मा भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी 'नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRC) को दिया गया है. गुजरात में बिछा दिया गया ट्रैक बेड गुजरात के लगभग 157 किलोमीटर हिस्से में ट्रेन के लिए ट्रैक बेड (रेल पटरी के नीचे की सतह) बिछा दिया गया है। ये एक बड़ा संकेत है कि ट्रेन के ट्रायल रन की तैयारी हो रही है। उम्मीद है कि अगले साल यानी 2026 में ट्रायल रन शुरू हो सकता है। 2029 तक ट्रेन शुरू होने की उम्मीद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि पूरी बुलेट ट्रेन सेवा 2029 तक शुरू हो जाएगी। इसके बाद मुंबई से अहमदाबाद तक की यात्रा केवल 2 से 3 घंटे में पूरी हो सकेगी, जो अभी कई घंटों तक लगती है। यह भारत की यात्रा की दुनिया में एक बड़ी क्रांति होगी। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए जरूरी उपकरण और मशीनरी भारत में ही बनाए जा रहे हैं। लॉन्चिंग गैंट्री, ब्रिज गैंट्री, और गर्डर ट्रांसपोर्टर्स जैसे भारी मशीनें देश में ही निर्मित की जा रही हैं। इससे भारत की आत्मनिर्भरता और टेक्नोलॉजी में भी मजबूती आई है। बुलेट ट्रेन के वायाडक्ट के दोनों ओर कुल 3 लाख से ज्यादा नॉइज़ बैरियर लगाए जा रहे हैं। ये बैरियर ट्रेन के तेज आवाज को कम करते हैं जिससे आसपास के इलाके शांति से रह सकें। महाराष्ट्र और गुजरात दोनों में बुलेट ट्रेन के लिए विशेष डिपो भी बन रहे हैं जहां ट्रेन का रखरखाव और मरम्मत होगी। इसके अलावा जापान से शिंकासेन ट्रेन के कोच आने की उम्मीद है। अगर सब ठीक रहा तो अगस्त 2026 तक सूरत से बिलीमोरा के बीच ट्रेन चलाने की योजना है। क्या खास है फुल स्पैन लॉचिंग तकनीक? फुल स्पैन लॉचिंग तकनीक एक ऐसी नई विधि है जिससे पुल के गर्डर को बड़े पैमाने पर और तेज़ी से स्थापित किया जा सकता है। इस तकनीक से निर्माण की गति बढ़ जाती है, जिससे समय और लागत दोनों बचती हैं। भारत में पहली बार इस तकनीक का इतना बड़ा उपयोग किया जा रहा है। recent visitors 60

IAF ने पाकिस्तान पर चार बड़े हवाई हमले किए थे, जिसके बाद पाकिस्तान अमेरिका से सीजफायर की गुहार लगाने लगा

नई दिल्ली  भारत के ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ पाकिस्तान ने 10 मई को ऑपरेशन बनयान अल-मरसूस चलाया। लेकिन यह ऑपरेशन सिर्फ आठ घंटे ही चला। सूत्रों के मुताबिक 10 मई की रात भारतीय वायुसेना (IAF) ने पाकिस्तान पर चार बड़े हवाई हमले किए थे। इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान के एयर बेस, हवाई जहाज और एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया जिसके बाद पाकिस्तान अमेरिका से सीजफायर की गुहार लगाने लगा। इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान को झुकने पर मजबूर किया भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान पर सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलें दागीं। रफाल विमानों से SCALP मिसाइलें दागी गईं। SU-30 MKI विमानों से ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गईं। इन मिसाइलों ने चकलाल में स्थित नूर खान एयरबेस पर हमला किया। यह पाकिस्तान के उत्तरी एयर कमांड-कंट्रोल नेटवर्क का हिस्सा था। पहले हमले में ही यह तबाह हो गया। आखिरी हमला जैकोबाबाद और भोलारी एयर बेस पर किया गया। लेकिन तब तक पाकिस्तान हार मान चुका था, वह अमेरिका से युद्ध रोकने के लिए कह रहा था। पाकिस्तान ने 10 मई को सुबह 1:00 बजे ऑपरेशन बनयान अल-मरसूस शुरू किया था। उसने कहा कि वह अगले 48 घंटों में भारत के एयर बेस को तबाह कर देगा। लेकिन भारत ने पाकिस्तान पर जोरदार हमला किया। उसने हवा से सतह पर मार करने वाली कई मिसाइलें इस्तेमाल कीं। यह ऑपरेशन सुबह 9:30 बजे ही खत्म हो गया। S-400 ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 11 बार काम किया भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम आदमपुर में है। इसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 11 बार काम किया। इसने पाकिस्तान के SAAB-2000 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम को मार गिराया। यह सिस्टम पाकिस्तान के अंदर 315 किलोमीटर दूर था। S-400 एक ऐसा सिस्टम है जो हवा में आने वाले खतरों को भांप लेता है और उन्हें मार गिराता है। IAF के पास इस बात के सबूत हैं कि उसकी मिसाइलों ने एक C-130J विमान, एक JF-17 और दो F-16 लड़ाकू विमानों को भी मार गिराया। IAF ने SCALP और ब्रह्मोस मिसाइलों को एक साथ इस्तेमाल किया ताकि निशाना चूक न जाए। 7 मई को भारत ने नौ आतंकी कैंपों पर हमला किया था। सात कैंपों को अलग-अलग तरह के गोला-बारूद से निशाना बनाया गया। सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर यह हमला किया था। मुरिदके और बहावलपुर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर SCALP और ब्रह्मोस मिसाइलों से हमला किया गया। ये मिसाइलें सटीक निशाना लगाती हैं। सूत्रों के अनुसार, 10 मई को भारत ने लाहौर में चीन में बने LY-80 एयर डिफेंस सिस्टम को HARPY कामिकेज़ ड्रोन से मार गिराया। इसके अलावा, कराची के मलीर में HQ-9 (S-300 का चीनी वर्जन) को भी एक भारतीय मिसाइल ने तबाह कर दिया। पाकिस्तान के DGMO ने युद्धविराम की गुहार लगाई भारतीय नौसेना 10 मई की सुबह कराची नौसेना बंदरगाह पर हमला करने के लिए तैयार थी। उसका जहाजी बेड़ा मकरान तट से 260 मील दूर था। लेकिन पाकिस्तान के DGMO ने फोन करके कहा कि अगर भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों से बंदरगाह पर हमला किया तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। पाकिस्तान की धमकी से भारतीय सेना और सरकार डरे नहीं। लेकिन 10 मई की दोपहर तक पाकिस्तान के DGMO ने युद्धविराम की गुहार लगाई। recent visitors 62

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार को खुलकर समर्थन दिया

भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार को खुलकर समर्थन दिया है. उनका तर्क है कि बार-बार चुनाव होने से न केवल सरकार के कामकाज में बाधा आती है, बल्कि इसका खर्च भी आसमान छू रहा है. उन्होंने बताया कि 1952 में चुनावों पर 9,000 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा पहुंच गया. चौहान के मुताबिक अगर राज्यों के विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव भी जोड़ लिए जाएं, तो यह खर्च 7 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है. चौहान ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए बताया कि सितंबर 2023 से लेकर जून 2024 तक आचार संहिता लागू रहने के कारण कोई बड़ा काम नहीं हो सका. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अधिकारियों का ध्यान भी चुनावी ड्यूटी में लगा रहता है जिससे योजनाओं की रफ्तार धीमी हो जाती है. ऐसे में एक बार में सभी चुनाव कराना ही बेहतर विकल्प है. कांग्रेस की आशंकाएं: लोकतंत्र पर खतरा? कांग्रेस पार्टी इस विचार का खुलकर विरोध करती रही है. पार्टी का मानना है कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में संघीय ढांचे के खिलाफ है. कांग्रेस का तर्क है कि इससे राज्यों की स्वायत्तता पर चोट पहुंचेगी और केंद्र सरकार को अतिरिक्त राजनीतिक लाभ मिल सकता है. पार्टी यह भी कहती है कि हर राज्य की राजनीतिक परिस्थितियाँ अलग होती हैं, ऐसे में एक साथ चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है. क्षेत्रीय दलों की राय: सत्ता के केंद्रीकरण का खतरा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), वाम मोर्चा, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और अन्य क्षेत्रीय दल भी इस प्रस्ताव पर सवाल उठा चुके हैं. टीएमसी की ओर से कहा गया है कि यह प्रस्ताव भारतीय लोकतंत्र की विविधता को समाप्त करने की दिशा में एक कदम है. वाम मोर्चा इसे चुनावी ‘केंद्रवाद’ करार देता है, जिससे क्षेत्रीय मुद्दे गौण हो जाएंगे. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और राजद ने किया विरोध राजद के नेता भी मानते हैं कि यह एक राजनीतिक चाल है जिसका उद्देश्य विपक्षी दलों को कमजोर करना और केंद्र की सत्ता को मजबूत करना है. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने भी कहा है कि इससे राज्यों की राजनीति दब जाएगी और केवल राष्ट्रीय मुद्दे ही चुनाव में हावी रहेंगे, जिससे स्थानीय जनता की समस्याएं अनसुनी रह जाएंगी. भाजपा की रणनीति और नेता शिवराज सिंह चौहान का बयान भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान का बयान इस दिशा में पार्टी की रणनीतिक सोच को दर्शाता है. भाजपा लगातार इस विषय को उठाती रही है और अब इसे एक प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार इस विचार का समर्थन किया है. सहम‍ति होना मुश्किल, राजनेताओं ने बना दी कठिन राह शिवराज सिंह चौहान का बयान भाजपा के भीतर इस मुद्दे को लेकर एकता और दृढ़ता को दर्शाता है, जबकि विपक्षी दल इससे लोकतंत्र और संघीय ढांचे के लिए खतरा मानते हैं. जहां सरकार इसे खर्च और प्रशासनिक कुशलता के नजरिए से देख रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक संतुलन को बिगाड़ने वाला कदम मानता है.   recent visitors 62