भारत में 2014 से लेकर 2024 तक मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी, कॉलेजों की संख्या में 102% और MBBS सीटों में 130% का इजाफा हुआ

नई दिल्ली  भारत में 2014 से लेकर 2024 तक मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 102% और MBBS सीटों में 130% का इजाफा हुआ है। 2014 में जहां देश में केवल 387 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब 2024 में यह संख्या बढ़कर 780 हो गई है। इसी तरह, 2014 में जहां MBBS सीटों की संख्या 51,348 थी, अब यह बढ़कर 1,18,137 हो गई है। इन राज्यों में खुले नए मेडिकल कॉलेज कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पहले कोई मेडिकल कॉलेज नहीं थे, जैसे अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, दादरा और नगर हवेली, मिजोरम, नागालैंड और तेलंगाना। इन राज्यों में अब मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं और तेलंगाना में तो 65 कॉलेज तक स्थापित हो चुके हैं। कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बढ़ी मेडिकल सीटें कर्नाटक में 2014 में 46 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 73 हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 30 से बढ़कर 86 हो गई है। महाराष्ट्र में भी सीटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जहां 5,590 सीटों से बढ़कर 11,845 सीटें हो गईं। तेलंगाना और राजस्थान में हुआ बदलाव तेलंगाना, जो पहले मेडिकल कॉलेजों से पूरी तरह से वंचित था, अब वहां 9,040 MBBS सीटें उपलब्ध हैं। राजस्थान में भी 2013-14 में 10 कॉलेजों और 1,750 सीटों से संख्या बढ़कर 43 कॉलेजों और 6,475 सीटों तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में बढ़ोतरी मध्य प्रदेश ने अपने कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़ाकर 31 और सीटों की संख्या 1,700 से बढ़ाकर 5,200 कर दी है। छत्तीसगढ़ में कॉलेजों की संख्या पांच से बढ़कर 16 हो गई, और सीटों की संख्या 600 से बढ़कर 2,455 हो गई है। दिल्ली में भी कॉलेजों की संख्या 7 से बढ़कर 10 हो गई और सीटों की संख्या 900 से बढ़कर 1,497 हो गई है। गोवा और चंडीगढ़ में कॉलेजों की संख्या पहले जैसी रही, लेकिन इन दोनों राज्यों में सीटों की संख्या में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर हुई है। इस बढ़ोतरी से यह साफ होता है कि सरकार देशभर में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है, जिससे अब अधिक छात्र मेडिकल क्षेत्र में अपना करियर बना सकेंगे।   recent visitors 230

महाराष्ट्र विधानसभा का तीन दिन का सत्र शुरू होने से पहले कालिदास कोलंबकर बने प्रोटेम स्पीकर

मुंबई महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुक्रवार को कालिदास कोलंबकर को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलाई गई। महाराष्ट्र विधानसभा का तीन दिन का सत्र शुरू होने से पहले कोलंबकर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें मुंबई स्थित राजभवन में शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम ग्रोहे और मुख्य सचिव सुजाता सौनिक मौजूद थे। बता दें कि कोलंबकर प्रोटेम स्पीकर के रूप में 288 नवनिर्वाचित विधायकों को विधानसभा में शपथ दिलाएंगे। इसके साथ ही शनिवार, 7 दिसंबर से शुरू होने वाले 15वीं विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी कराया जाएगा। विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 16 से 21 दिसंबर तक नागपुर में आयोजित होगा। विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव 9 दिसंबर को होगा, इसके बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महायुति सरकार विश्वास मत हासिल करेगी। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री पद की शपथ फडणवीस ने गुरुवार शाम को ली, जबकि महायुति गठबंधन में शामिल शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और एनसीपी नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित हुआ। आजाद मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा समेत कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान समेत कई केंद्रीय मंत्री भी समारोह में मौजूद थे। शपथ ग्रहण समारोह में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, सलमान खान, संजय दत्त, रणबीर कपूर, रणवीर सिंह और माधुरी दीक्षित भी पहुंचे थे। दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी समारोह में शामिल हुए थे। recent visitors 153

गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के तहत 5 दिसम्बर तक 20 हजार 199 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके

भोपाल भोपाल गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए राज्य सरकार तत्पर है। गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के तहत 5 दिसम्बर तक 20 हजार 199 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। गैस पीड़ितों और उनके बच्चों के लिए भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के तहत 6 अस्पताल और 9 औषधालय भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां सभी प्रकार की जांच, उपचार और आवश्यक सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध हैं। साथ ही आयुष्मान योजना के अंतर्गत भोपाल गैस राहत विभाग से अनुबंधित सभी अस्पतालों में भी गैस पीड़ितों को आवश्यकतानुसार चिकित्सा सुविधाएँ दी जा रही हैं। गंभीर बीमारियों के विशेष इलाज किडनी, लीवर ट्रांसप्लांट और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित के इलाज के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। कैंसर उपचार के लिए विभाग ने एम्स भोपाल और 3 निजी अस्पतालों के साथ अनुबंध किया है। इसके अतिरिक्त कमला नेहरू अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई है, जहां 13 डायलिसिस मशीनों के जरिये पीड़ित मरीजों का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। अत्याधुनिक आपातकालीन सेवाएं भी जारी भोपाल गैस राहत विभाग के सभी अस्पतालों में 24×7 इमरजेंसी यूनिट संचालित की जा रही है। इन यूनिट्स में गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को तुरंत और उन्नत चिकित्सा सेवाएं, सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। गैस प्रभावित विधवाओं (कल्याणियों) को राज्य सरकार द्वारा विशेष राहत दी जा रही है। इन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अतिरिक्त 1,000 रुपये मासिक पेंशन दी जा रही है। वर्तमान में 4 हजार 406 विधवाओं को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। राज्य सरकार भोपाल गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रमुख लक्ष्य कल्याण योजनाओं के तेज क्रियान्वयन और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से गैस पीड़ितों के जीवन स्तर में त्वरित सुधार लाना है।   recent visitors 66

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डॉक्टर्स की हड़ताल अब नहीं होगी गैरकानूनी, लंबित मांगों का समाधान करेगी हाई लेवल कमेटी प्रदर्शन

इंदौर  अब डॉक्टर्स की हड़ताल गैरकानूनी नहीं मानी जाएगी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टर्स को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है, यह निर्णय चिकित्सा सेवाओं की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए लिया गया। क्योंकि डॉक्टर्स की हड़ताल से मरीजों की देखभाल पर खतरा आ सकता है, इसलिए हड़ताल पर जाने की छूट नहीं दी जाती थी। आमतौर पर, यदि डॉक्टर्स किसी आदेश या घटना से आहत होकर हड़ताल पर जाते थे, तो यह हड़ताल गैरकानूनी मानी जाती थी। कई मामलों में सरकार और विभाग ने हड़ताल पर गए डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई भी की थी। एक मामले की सुनवाई के दौरान, एमपी हाईकोर्ट ने डॉक्टर्स को राहत दी है। डॉक्टर्स को हड़ताल से रोकने के कारण डॉक्टर्स को हड़ताल पर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है, क्योंकि इससे मरीजों के इलाज में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। भारतीय चिकित्सा परिषद (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 के तहत भी डॉक्टरों को हड़ताल से मना किया गया है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि न्यायाधीश और डॉक्टर हड़ताल पर नहीं जा सकते, क्योंकि उनका काम जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों से संबंधित होता है। हड़ताल पर जाने से पहले अनुमति की जरूरत हाई कोर्ट ने डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने की छूट दी है, लेकिन इसके लिए उन्हें पहले कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों के हड़ताल से संबंधित मामले में स्पष्ट किया कि अगर डॉक्टर सरकार के किसी निर्णय से आहत होते हैं, तो वे हड़ताल कर सकते हैं, बशर्ते कोर्ट को पहले सूचित किया जाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को डॉक्टरों की लंबित मांगों को हल करने के लिए 2 सप्ताह में एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का आदेश दिया है। पूरा मामला यह मामला 2023 में प्रदेशभर के डॉक्टरों की हड़ताल से जुड़ा था। 3 मई को चिकित्सक महासंघ के आह्वान पर राज्यभर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएससी और पीएचसी के डॉक्टर हड़ताल पर गए थे। उन्होंने अपनी कार्यकाल, वेतन और सुविधाओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगें राज्य सरकार के सामने रखी थीं, जिनका समाधान न होने पर डॉक्टरों ने हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी रखा। हाई कोर्ट ने चिकित्सक महासंघ को एक हफ्ते का समय दिया है, ताकि वे अपनी सभी लंबित मांगों और सुझावों को राज्य सरकार तक पहुंचा सकें। पहले कोर्ट ने इस हड़ताल को गैरकानूनी करार दिया था और भविष्य में किसी भी हड़ताल के लिए कोर्ट से अनुमति अनिवार्य कर दी थी। 1 हफ्ते में मांग-सुझाव सरकार तक प​हुंचाएं     हाई कोर्ट ने चिकित्सक महासंघ को एक हफ्ते का समय दिया है, ताकि वे अपनी सभी लंबित मांगों और सुझावों को राज्य सरकार तक पहुंचा सकें।     यह मामला 2023 में प्रदेशभर के चिकित्सकों की हड़ताल से जुड़ा था। तब 3 मई को चिकित्सक महासंघ के आह्वान पर राज्यभर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएससी और पीएचसी के डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे।     चिकित्सक महासंघ ने राज्य सरकार से डॉक्टरों के कार्यकाल, वेतन और सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इन मांगों का समाधान न होने पर डॉक्टर लगातार हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।     शासकीय-स्वशासी चिकित्सा महासंघ मप्र के मुख्य संयोजन डॉक्टर राकेश मालवीय के मुताबिक पहले हाई कोर्ट ने प्रदेश के डॉक्टरों की हड़ताल को गैरकानूनी करार दिया था। साथ ही भविष्य में किसी भी टोकन स्ट्राइक के लिए कोर्ट की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद डॉक्टरों ने अपनी आवाज उठाने के लिए अन्य विकल्प तलाशे।   recent visitors 64

जन्म के समय लिंगानुपात में हुआ सुधार, 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 हो गया: केन्द्र सरकार

नई दिल्ली स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार देश में लिंगानुपात (एसआरबी)  2014-15 में 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 हो गया है। साथ ही, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई +) के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर स्कूल में लड़कियों का राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात 2014-15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 में ग्रामीण क्षेत्रों सहित 79.4 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी। आपको बता दें, देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना 22 जनवरी, 2015 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर शुरू की गई थी। यह लिंग-पक्षपाती लिंग-चयनात्मक प्रथाओं को रोकने, बालिकाओं के अस्तित्व और सुरक्षा को सुनिश्चित करने और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। वहीं, योजना के प्रभाव का आकलन करने और प्रगति का मूल्यांकन करने के प्रमुख मानदंड जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में सुधार और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं के सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार एसआरबी 2014-15 में 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 हो गया है। साथ ही, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई +) के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर स्कूल में लड़कियों का राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात 2014-15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 में ग्रामीण क्षेत्रों सहित 79.4 प्रतिशत हो गया है। इस तथ्य की पहचान करते हुए कि बीबीबीपी के तहत बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस सहित गतिविधियों में कम भागीदारी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए, मंत्रालय ने बीबीबीपी के लिए एक संचालन नियमावली जारी किया है। इसमें बालिकाओं, उनके परिवारों और समुदायों की साल भर की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विकसित जिलों के लिए एक विस्तृत और अच्छी तरह से सुझाया गया गतिविधि कैलेंडर शामिल है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के आधार पर धनराशि जारी की जा रही है, जिसने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) की एकल नोडल एजेंसी (एसएनए) के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। इसके अलावा, वर्ष 2020-21 के लिए एचएमआईएस डेटा के अनुसार जिलों की अलग-अलग एसआरबी स्थिति के आधार पर, बीबीबीपी के तहत धनराशि जारी करने के लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं – जिन जिलों का एसआरबी 918 या उससे कम है, उन्हें प्रति वर्ष 40 लाख रुपये आवंटित किए जाते हैं। एसआरबी 919 से 952 वाले जिलों को 30 लाख रुपये प्रति वर्ष आवंटित किए जाते हैं। 952 से अधिक एसआरबी वाले जिलों को 20 लाख रुपये प्रति वर्ष आवंटित किए जाते हैं। गौरतलब हो, बीबीबीपी एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका मिशन शक्ति के संबल वर्टिकल के तहत देश के सभी जिलों में केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्त पोषण किया जाता है। बावजूद इसके पश्चिम बंगाल सरकार बीबीबीपी को लागू नहीं कर रही है।   recent visitors 81

नि-क्षय शिविर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्चुअली करेंगे अभियान का शुभारंभ

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि टीबी, जिसे कभी लाइलाज माना जाता था, अब सघन और समर्पित प्रयासों से समाप्ति के करीब है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए 7 दिसंबर 2024 से 25 मार्च 2025 तक "100 दिवसीय निक्षय शिविर" आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक गति देना और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अभियान का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य कर्मियों और आमजन से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैसे हमने कोविड महामारी में एकजुट होकर हर व्यक्ति तक जाँच और उपचार सुनिश्चित किया, वैसे ही इन 100 दिनों में हमें टीबी की व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जाँच, उपचार और जन-जागरूकता को सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आह्वान किया कि पूर्ण समर्पण से अभियान को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने आमजन से स्वास्थ्य कर्मियों को सहयोग प्रदान करने की अपील की है, जिससे समाज का सशक्त और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अंतर्गत गतिविधियाँ प्रदेश में क्षय रोग (टी.बी.) के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों नरसिंहपुर, दतिया, सिंगरोली, डिन्डौरी, खण्डवा, कटनी, अनुपपूर, अलिराजपुर जबलपुर, नीमच, रतलाम, मंदसौर, छतरपुर, उज्जैन, सीधी, श्योपुर, बैतूल, छिन्दवाडा, विदिशा, दमोह, मंडला, सीहोर और सिवनी में 7 दिसंबर से प्रारंभ होगा। इस शिविर का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच, और उचित उपचार प्रदान करना है। इस अभियान के अंतर्गत समस्त आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी/ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक) के माध्यम से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों और टी.बी. के मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच की जाएगी। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रमुख रूप से मधुमेह पीड़ित, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब सेवन करने वाले, पूर्व टीबी मरीज, संपर्क व्यक्ति और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी। शिविरों का आयोजन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे और बस स्टेशनों, सामूहिक स्थानों, छात्रावास, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाएगा। नि-क्षय शिविरों का आयोजन कारखानों, उद्योगों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, पत्थर क्रशरों और अन्य ऐसे कार्यस्थलों पर भी किया जाएगा, जिससे श्रमिक वर्ग और अन्य संवेदनशील वर्गों तक इस अभियान का लाभ पहुँच सके। शिविरों का आयोजन पंचायत संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, स्वसहायता समूहों, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति, और ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जायेगा। नए निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस/विजेताओं की पहचान की जाएगी, जिससे उनकी सहभागिता से अभियान को और गति दी जा सके। त्यौहारों और मेलों के दौरान धार्मिक गुरुओं के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रैलियाँ आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों में "नि-क्षय सप्ताह" के आयोजन के अन्तर्गत जागरूकता सत्र, निक्षय शिविर, टीबी शपथ एवं प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएंगी।   recent visitors 58

मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए खुशियों की घंटी फिर बजने वाली, 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में योजना की अगली किस्त की राशि जल्द आने वाली

भोपाल  मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए खुशियों की घंटी फिर बजने वाली है. प्रदेश की 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त की राशि आने वाली है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि साल के आखिरी किस्त तय तारीख से पहले भी आ सकती है. माना जा रहा है कि इस बार तय तारीख 10 दिसम्बर के पहले लाड़ली बहनों को इस योजना की 19वी किस्त के रुप में 1250 रुपए की धनराशि भेजी जा सकती हैं. वहीं संभावना ऐसी भी है कि जनवरी 2025 से मोहन सरकार लाड़ली बहनों की किस्त में इजाफा भी कर सकती है. तारीख से पहले आ सकती है लाड़ली बहना की किस्त ! लाड़ली बहना योजना की दिसंबर महीने की किस्त क्या 10 दिसम्बर से पहले भी आ सकती है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. 1250 की ये किस्त समय से पहले भी लाड़ली बहनों के खाते में डाली जा सकती है. ये लाड़ली बहना योजना की 19वी किस्त होगी. त्योहार के समय में जिस तरह से नियत समय से पहले ये राशि लाड़ली बहनों के खाते में डाली गई, क्या इस बार भी ऐसा होगा. हालांकि इस बारे में सरकार की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है. क्या अगले महीने से बढ़ जाएगी लाड़ली बहना की राशि चर्चा ये भी है कि जनवरी 2025 से लाड़ली बहना योजना की राशि में इजाफा हो सकता है. असल में बुधनी और विजयपुर विधानसभा चुनाव के दौरान सीएम डॉ मोहन यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि वे लाड़ली बहना योजना की राशि में वादे के मुताबिक किस्त की राशि बढ़ाई भी जा सकती है. सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा था कि जो वादा किया गया है. लाड़ली बहनों से पूरा किया जाएगा. उसी के बाद से ये अटकलें तेज हो गई कि क्या नए वर्ष की शुरुआत से सरकार लाड़ली बहनों की राशि बढ़ा सकती है. बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल कहते हैं, "इसमें दो राय नहीं कि लाड़ली बहन-बेटियों के लिए समर्पित है. हमारी सरकार और उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर उन्हें हर तरह का संबल देने के प्रयास सरकार की ओर से किए जा रहे हैं. सरकार ने लाड़ली बहनों से जो वादा किया है. वो भी पूरे होंगे. बीजेपी की सरकार ने पूर्व में भी अपने वचन पूरे किए हैं और इस बार भी सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है." कब शुरु हुई थी योजना, लाड़ली बहनों का कितना बजट एमपी में लाड़ली बहना अकेली ऐसी योजना है. जिसके लिए सरकार ने बजट में हमेशा विशेष प्रावधान किए हैं. 2023 में शुरु की गई योजना में पहले साल 12 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया था. 23 से साठ वर्ष की महिलाओं के लिए हर महीने हजार रुपए की धनराशि का प्रावधान शुरुआत में किया गया, जो बढ़कर 1250 रुपए का प्रावधान कर दिया गया. पांच वर्षों लक्ष्य में इसे 60 हजार करोड़ इसका बजट माना गया था. जब किस्त की धनराशि 1250 कर दी गई, तो बजट में भी प्रावधान किया गया. अब तैयारी ये है कि 2025 के बजट में महिला बाल विकास विभाग के साथ महिलाओं पर केन्द्रित योजनाओं के लिए धनराशि बढ़ाई जाए.   recent visitors 72