Parvati-Kali Sindh-Chambal Link Project में पूर्व में बनाई गई कार्ययोजना में बदलाव

भोपाल   पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से मालवा रीजन में अगले विधानसभा चुनाव के पहले सिंचाई और पेयजल के लिए पानी दिलाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसके चलते दूसरे फेज में शामिल मालवा रीजन के कामों को अब पहले फेज में पूरा कराने का फैसला लिया है। इसके लिए पूर्व में बनाई गई कार्ययोजना में बदलाव मंत्री स्तरीय बैठकों में किया है। इसके बाद अब संशोधित पार्वती-काली सिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के किसानों को फायदा मिलेगा। किसानों को न केवल सिंचाई और पेयजल के लिए पानी मिलेगा बल्कि संबंधित क्षेत्र में पर्यटन और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के संबंधित जानकारी     पार्वती काली सिंध चंबल लिंक परियोजना में एमपी की 17 परियोजनाएं एवं राजस्थान की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना शामिल हैं। इस परियोजना की कुल लागत 72 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है।     परियोजना के क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश के लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर नवीन क्षेत्र में सिंचाई एवं पेयजल मिलेगा।     उद्योगों के लिए लगभग 172 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध होगा। परियोजना से लगभग 40 लाख परिवारों को फायदा होगा। एमपी में 35 हजार करोड़ होंगे खर्च संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना में मध्यप्रदेश से पार्वती, कूनो, कालीसिंध, चंबल, क्षिप्रा एवं सहायक नदियों के जल का अधिकतम उपयोग किया जायेगा। प्रदेश में इन परियोजनाओं की कुल लागत 35 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है। एमपी में यहां बनेंगे बांध     परियोजना के अंतर्गत श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्प्लेक्स में 4 बांध (कटीला, सोनपुर, पावा एवं धनवाड़ी) बनाए जाएंगे।     यहां 2 बैराज (श्यामपुर, नैनागढ) में बनेंगे।     कुम्भराज कॉम्प्लेक्स में 2 बांध (कुंभराज-1 एवं कुंभराज-2) बनेंगे। रणजीत सागर, लखुंदर बैराज एवं ऊपरी चम्बल कछार में 7 बांध (सोनचिरी, रामवासा, बचेरा, पदुनिया, सेवरखेड़ी, चितावद तथा सीकरी सुल्तानपुरा) बनाए जाएंगे।     गांधी सागर बांध की अप स्ट्रीम में चंबल, क्षिप्रा और गंभीर नदियों पर छोटे-छोटे बांधों का निर्माण भी प्रस्तावित है। इन 13 जिलों को मिलेगा पानी इस परियोजना से राज्य के 13 जिलों मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड, श्योपुर, इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास एवं राजगढ़ को सिंचाई, पेयजल, मत्स्य पालन एवं औद्योगिक प्रयोजन के लिए पानी मिलेगा। केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाली इस परियोजना का कार्य आगामी 5 वर्ष में पूर्ण कर लिया जाएगा। 21 बांध बैराज, रिजर वायर बनाए जाएंगे परियोजना अंतर्गत कुल 21 बांध, बैराज एवं बैलेंसिंग रिजरवायर आदि का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना में मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के मध्य मौजूदा चंबल दायीं मुख्य नहर (CRMC) एवं मध्य प्रदेश क्षेत्र में CRMC सिस्टम को अंतिम छोर तक नवीकरण एवं आधुनिकीकरण का प्रावधान रखा गया है, इससे मध्य प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिंड जिलों को सिंचाई एवं पेयजल के लिए आवंटित जल मिलेगा। ऐसे चली परियोजना डीपीआर बनाने की प्रक्रिया     केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, मध्य प्रदेश, राजस्थान के मुख्यमंत्री और दोनों राज्यों के अपर मुख्य सचिव एवं सचिव की मौजूदगी में 28 जनवरी 2024 को परियोजना की डीपीआर तैयार करने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।     संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश की श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्प्लेक्स की 6 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कर राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण, भारत सरकार को प्रेषित की जा चुकी है।     शेष परियोजनाओं की डीपीआर विभिन्न स्तरों पर प्रक्रियाधीन है।     संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना सह पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का भारत सरकार से प्राप्त ड्राफ्ट समझौता अनुबंध को मध्य प्रदेश शासन द्वारा संशोधन के बाद भारत सरकार को 25 अक्टूबर 2024 को भेजा है।   recent visitors 213

केन्द्रीय कर्मचारियों पेंशनरों के डीए में 3 फीसदी की वृद्धि होना तय, अंतिम फैसला मोदी सरकार को लेना

नई दिल्ली एक करोड़ केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए खुशखबरी है।नए साल में एक बार फिर महंगाई भत्ता बढ़ने वाला है। हालांकि डीए में कितनी वृद्धि होगी यह AICPI इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करेगा।इसका लाभ केंद्र सरकार ने 50 लाख से ज्यादा कर्मचारी और 65 लाख से ज्यादा पेंशनरों को मिलेगा।यह बढ़ोतरी 7th Pay Commission के तहत की जाएगी। श्रम विभाग द्वारा जारी जुलाई से सितंबर के आंकड़ों की बात करें तो AICPI Index अंक 141.5 पर पहुंच गया है और DA स्कोर 54.49% पहुंचा है, हालांकि अभी अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के आंकड़े आना बाकी हैं। इसके बाद तय होगा डीए में कितनी वृद्धि होगी। अगर दिसंबर 2024 तक इंडेक्स में 144-145 अंक तक पहुंचता है और डीए स्कोर 55% से ज्यादा होता है तो डीए में 3 फीसदी की वृद्धि होना तय है। हालांकि अंतिम फैसला मोदी सरकार को लेना है। जनवरी 2025 से बढ़ेगा Dearness Allowance     दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा साल में 2 बार केन्द्रीय कर्मचारियों पेंशनरों के डीए/डीआर की दरों में संशोधन किया जाता है, जो AICPI इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करता है। यह वृद्धि जनवरी/जुलाई से होती है। जनवरी 2024 से 4% तो जुलाई में 3 फीसदी डीए बढ़ाया गया था, जिसके बाद डीए 53% हो गया है।     अब अगला डीए जनवरी 2025 से बढ़ाया जाना है, जो कि AICPI इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करेगा। अबतक के आंकड़ों पर गौर करें तो नए साल में फिर 3 फीसदी डीए बढ़ सकता है, चुंकी नई दरें जनवरी 2025 से लागू होंगी ऐसे में एरियर का भी लाभ मिलने की उम्मीद है।सुत्रों की मानें तो बजट के पहले या बाद में कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका ऐलान कर सकते है। ऐसे होगी महंगाई भत्ते की गणना     डीए और डीआर में बढ़ोतरी का कैलकुलेशन औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के 12 महीने के औसत में हुई प्रतिशत वृद्धि के आधार पर की जाती है। सरकार अमूमन हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को इन भत्तों में संशोधन करती है।     केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए DA ऐसा होता है कैलकुलेट- DA% = [(Average of AICPI (Base Year 2001 = 100) पिछले 12 महीने के लिए – 115.76)/115.76] x 100     पब्लिक सेक्टर कर्मचारियों के लिए DA ऐसा होता है कैलकुलेट- DA% = [(Average of AICPI (Base Year 2001 = 100) पिछले 3 महीने के लिए – 126.33)/126.33] x 100 recent visitors 74

प्रयागराज महाकुंभ को इस वर्ष दिव्य और भव्य बनाने की योजना तैयार, 92 लाख में कचौड़ी की दुकान

प्रयागराज  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 14 जनवरी से महाकुंभ की शुरुआत हो रही है। इससे पहले प्रशासनिक और सरकार की तैयारियों को पूरा कराया जा रहा है। देश-दुनिया से करीब 40 करोड़ लोगों के महाकुंभ मेला में पहुंचने की उम्मीद है। मेले में आने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए तमाम व्यवसायी अपनी दुकान वहां लगाने की जुगत में हैं। ऐसे में मेला प्रशासन की ओर से भी दुकानों के आवंटन को लेकर स्थिति साफ होती दिख रही है। 30 X 30 फीट के दुकान के किराए को जानकर आप हैरान हो जाएंगे। एक प्लेट कचौड़ी की कीमत भले ही 30 रुपये हो, लेकिन करीब 900 स्क्वायर फीट की दुकान का किराया 92 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। 13 जनवरी से शुरू होगा महाकुंभ प्रयागराज महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा। इसको लेकर जमीनों का आवंटन शुरू हुआ है। यहां पर दुकान लगाने के लिए आवंटित होने वाली जमीन की कीमत कई-कई लाख में मिल रही है। प्राइम लोकेशन पर जमीन के किराए की दर काफी महंगी है। कचौड़ी की दुकान में बगल में लड्‌डू की दुकान के लिए जमीन का आवंटन किया गया है। इसका किराया 75 लाख रुपये रखा गया था। महाकुंभ में लगनी वाली दुकानों पर महाकुंभ के डेढ़ महीने ही भीड़ रहेगी। भव्य महाकुंभ की है तैयारी प्रयागराज महाकुंभ को इस वर्ष दिव्य और भव्य बनाने की योजना तैयार की गई है। 4000 हेक्टेयर यानी 15,840 बीघा क्षेत्र में मेला क्षेत्र को बनाया जाएगा। यहां पर पहली बार 13 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट बन रहा है। इसमें 40 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। भव्य आयोजन के कमाई की अपार संभावनाओं को देखते हुए हर व्यापारी यहां दुकान लगाना चाहता है। मेला क्षेत्र में निर्माण के लिए जगह-जगह जेसीबी से जमीन समतल की जा रही है। गंगा पर पांटून पुल (पीपा पुल) बन रहे हैं। सजने लगी हैं दुकानें मेला क्षेत्र में दुकान भी सजने लगे हैं। दुकानों में अब लोगों की भीड़ भी आने लगी है। संगम किनारे निर्धारित दुकानों के किराए सबसे अधिक हैं। कचौरी और लड्‌डू की दुकानें सबसे महंगी हैं। परेड ग्राउंड में महाराज कचौड़ी एवं प्रसाद भोग के नाम से एक दुकान है। 30 X 30 वर्गफीट की इस दुकान का टेंडर 92 लाख रुपए में फाइनल हुआ है। इस दुकान को पवन कुमार मिश्रा ने लिया है। वे कहते हैं कि कचौड़ी और लड्डू बनाने का काम पहले से करते रहे हैं, लेकिन कुंभ में पहली बार दुकान लगाने के बारे में सोचा। पवन मिश्रा ने कहा कि मेला प्रशासन हमें अपनी दुकान से करीब 200 मीटर दूर जगह देगा। वह भी रोड पर स्थित है। 2 महीने हम वहीं दुकान लगाएंगे। उसके बाद वापस इस जगह पर आ जाएंगे। अभी बताया जा रहा है कि जिस जगह हमारी दुकान है, वहां विश्व हिंदू परिषद को जगह दी गई है। पवन कहते हैं कि भले किराया अधिक लगा हो, लेकिन सामग्रियों के दाम नहीं बढ़ाएंगे। 76 लाख में लड्‌डू की दुकान लेटे हुए हनुमान मंदिर पर इस बार लड्डू की दुकानों में इजाफा हुआ है। जय बजरंग भोग नाम की एक दुकान अब यहां पर खुली है। इस लड्डू की दुकान के लिए टेंडर 76 लाख रुपये में खुला। वहीं, परेड ग्राउंड में ही महाकाल प्रसाद भोग एवं कचौड़ी भंडार दुकान 75 लाख रुपये में बकही है। झूंसी साइड और मेला क्षेत्र के अंदर भी दुकानों की बिक्री हो रही है। वहां भी रेट हाई है। गंगा की तराई में कुंभ के दौरान लगने वाली दुकानों का रेट अन्य जगहों के मुकाबले कम है। 10 हजार दुकानों का टारगेट महाकुंभ के आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने 10 हजार दुकानें बेचने का टारगेट रखा गया है। 2019 के कुंभ में कुल 5721 स्टॉल के आवेदन आए थे। 2012 के महाकुंभ में यह संख्या करीब 2000 हजार थी। उस समय ऑफलाइन टेंडर के जरिए आवंटन होता था। 2019 से टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई। 13 नवंबर से दुकानों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। अब तक 2000 से अधिक दुकानों का टेंडर हो चुका है। गंगा तराई में लगने वाली दुकानों का किराया भी तीन से 5 लाख रुपये तक पहुंच रहा है। recent visitors 155

प्रदेश में आईजीएसटी के रूप में प्री सेटलमेंट और पोस्ट सेटलमेंट के रूप में राजस्व में वृद्धि हुई

भोपाल दीपावली की रौनक थमने के बाद नवम्बर महीने में जीएसटी से राज्य सरकार को होने वाली ग्रोथ घटी है। दीपावली के कारण अक्टूबर में जहां राज्य सरकार को बाजार में खरीददारी बढ़ने से 554 करोड़ रुपए का अधिक राजस्व सितम्बर के मुकाबले मिला था। वहीं नवम्बर में यह घट गया और अक्टूबर के मुकाबले सिर्फ 166 करोड़ रुपए ही अधिक रेवेन्य राज्य शासन के खाते में जमा हो सकी है। हालांकि यह ओवरआल पांच प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा प्रदेश में इंटर स्टेट जीएसटी (आईजीएसटी) के रूप में प्री सेटलमेंट और पोस्ट सेटलमेंट के रूप में राजस्व में वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार ने एक दिसम्बर को सभी राज्यों के हिस्से में आए और केंद्र को मिले जीएसटी का राज्यवार ब्यौरा जारी किया है। इसकी पड़ताल करने पर यह बात सामने आई है कि एमपी में अक्टूबर महीने में दीपावली और नवरात्र पर्व के कारण बढ़ी खरीददारी के चलते सरकार को जीएसटी से खासा मुनाफा हुआ था जो नवम्बर में कम हो गया है। एमपी सरकार को नवम्बर 2023 में जीएसटी से होने वाली आमदनी 3646 करोड़ रुपए थी जो नवम्बर 2024 में बढ़कर 3812 करोड़ हो गई है। इस तरह एक साल में ग्रोथ 5 प्रतिशत बढ़ी है। आईजीएसटी से ऐसे जुटता है राजस्व जीएसटी की आईजीएसटी कैटेगरी में सरकार को जो राजस्व मिला है, उसके अनुसार प्री-सेटलमेंट एसजीएसटी के रूप में साल 2023-24 में एमपी को 8496 करोड़ मिले थे। जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 9043 करोड़ रुपए हो गए हैं। इसमें ग्रोथ 6 प्रतिशत रही है। इसी तरह पोस्ट सेटलमेंट एसजीएसटी से मिलने वाला राजस्व वर्ष 2023-24 में 20673 करोड़ था। जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 23674 करोड़ हो गया है। इसमें ग्रोथ 15 प्रतिशत रही है। ऐसे लगती है आईजीएसटी इंटरस्टेट सप्लाई होने पर आईजीएसटी लगती है। आईजीएसटी बच जाती है उसे पोस्ट सेटलमेंट कहते हैं। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर पंजाब से एमपी के लिए कोई माल सप्लाई होता है तो वहां का व्यापारी 18 प्रतिशत जीएसटी वसूली करता है। इसे आईजीएसटी कैटेगरी में शामिल किया जाता है। ऐसी स्थिति में माल सप्लाई करने वाले पंजाब को जीएसटी की राशि अलग से नहीं दी जाती है। इसके बाद जब माल का कंजप्शन एमपी में हो जाता है तो एमपी की सरकार को एसजीएसटी मिलता है। इसमें केंद्र के हिस्से की राशि केंद्र सरकार को चली जाती है। recent visitors 94

भारतीय नौसेना की बढ़ती परमाणु ताकत को देखते हुए पाकिस्तान में भी नेवी को मजबूत करने की मांग उठने लगी

इस्लामाबाद भारतीय नौसेना की बढ़ती परमाणु ताकत को देखते हुए पाकिस्तान में भी नेवी को मजबूत करने की मांग उठने लगी है। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक और भारत में उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े में परमाणु चालित पनडुब्बी शामिल करने की मांग की है। पाकिस्तान के पास वर्तमान में एक भी परमाणु चालित पनडुब्बी नहीं है। अब्दुल बासित ने भारतीय नौसेना की परमाणु हमला करने की क्षमता का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर सबमरीन की आवश्यकता पर जोर दिया। बासित ने कहा कि भारत ने हाल की न्यक्लिर सबमरीन से के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो बहुत बड़ी कामयाबी है। इसकी क्षमता 3500 किलोमीटर है। भारत के वर्तमान में अरिहंत और अरिघात श्रेणी की परमाणु चालित पनडुब्बियां हैं। एक दिन पहले सोमवार को ही भारतीय नौसेना प्रमुख ने भारत की पूर्ण स्वदेशी निर्मित पनडुब्बी को शामिल करने की योजना का खुलासा किया है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने बताई भारत की बढ़त अब्दुल बासित ने कहा कि भारत रक्षा पर भारी खर्च कर रहा है और जवाबी हमला करने की क्षमता की तरफ जा रहा है। पाकिस्तान के पास सबमरीन तो हैं, लेकिन न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन नहीं हैं। उन्होंने कहा, हम कोशिश कर रहे हैं कि हमारे पास जो पारंपरिक मिसाइल हैं, वे परमाणु मिसाइल फायर कर सकें। लेकिन सेकंड स्ट्राइक क्षमता के लिए पाकिस्तान को न्यूक्लियर पावर सबमरीन की आवश्यकता होगी।' पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक ने आगे बताया कि परमाणु चालित पनडुब्बी का फायदा ये है कि वह बिना ऊपर आए तीन से चार महीने तक समंदर के नीचे रह सकती है। जवाबी हमला करने की क्षमता के लिए यह एक बुनियादी जरूरत है। उन्होंने कहा, 'मान लीजिए कि भारत हमारे ऊपर पहला हमला करता है और सारी परमाणु सुविधाओं को नष्ट कर देता है। तो हमारे पास वो क्षमता बची होनी चाहिए कि हम सेकंड स्ट्राइक करें।' पाकिस्तान के लिए बताई जरूरत बासित ने कहा कि भविष्य में हमें भी परमाणु पनडुब्बी लेनी होंगी। भारत जिस तरह से अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ा रहा है, पाकिस्तान इससे दूर नहीं रह सकता है। हमें अपनी रक्षा के लिए वो तमाम उपाय करने होंगे, जो जरूरी हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि दोनों देशों के बीच हालात सुधरें। बासित का ये बयान पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठान में उस मजबूत नैरेटिव को दिखाता है, जो भारत की सेना के आधुनिकीकरण को एक बढ़ते खतरे के रूप में देखता है और इसके लिए जवाबी उपाय की आवश्यकता पर जोर देता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने पाकिस्तान द्वारा अल्प से मध्यम अवधि में परमाणु ऊर्जा पनडुब्बी क्षमता हासिल करने की व्यवहार्यता पर चिंता जताई है, क्योंकि इसके लिए पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी। recent visitors 131

भारत-चीन संबंध जो 2020 से असामान्य थे, अब कुछ सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत-चीन संबंध जो 2020 से असामान्य थे, अब कुछ सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 'चीन के साथ भारत के संबंधों में हाल के घटनाक्रम' के संबंध में लोकसभा में वक्तव्य देते हुए विदेश मंत्री ने भारत-चीन रिश्तों, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में हाल के घटनाक्रमों पर विस्तृत जानकारी दी। लोकसभा में बोलते हुए जयशंकर ने कहा, "हमारे (भारत-चीन) संबंध 2020 से असामान्य हुए, जब चीनी कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भंग हुई थी। हाल के घटनाक्रम, जो तब से हमारे निरंतर राजनयिक जुड़ाव को दर्शाते हैं, ने हमारे संबंधों को कुछ सुधार की दिशा में आगे बढ़ाया है।" बता दें अक्टूबर में भारत और चीन के बीच सीमा पर सैनिकों की वापसी को लेकर समझौता हुआ था। जयशंकर ने कहा, "सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द के अभाव में भारत-चीन संबंध सामान्य नहीं हो सकते। शांति और सौहार्द की बहाली ही शेष संबंधों को आगे बढ़ाने का आधार होगी।" विदेश मंत्री ने कहा, "हम स्पष्ट हैं कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना हमारे संबंधों के विकास के लिए एक शर्त है। आने वाले दिनों में, हम सीमा क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों के प्रभावी प्रबंधन के साथ-साथ तनाव कम करने पर भी चर्चा करेंगे। विदेश मंत्री वांग यी के साथ मेरी हाल की बैठक में, हम इस बात पर सहमत हुए कि विशेष प्रतिनिधि और विदेश सचिव स्तर के तंत्र जल्द ही बैठक करेंगे।" जयशंकर ने भारत के तीन प्रमुख सिद्धांतों की पुष्टि की- एलएसी के प्रति सख्त सम्मान और उसका पालन, यथास्थिति में एकतरफा बदलाव न करना और पिछले समझौतों का पालन करना। उन्होंने कहा, "सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति पर मजबूत और सैद्धांतिक रुख और संबंधों की समग्रता के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण पिछले चार वर्षों से चीन के साथ हमारे जुड़ाव का आधार रहा है।" 21 अक्टूबर को भारत ने चीन के साथ सीमा समझौते पर पहुंचने की घोषणा की थी, जिससे लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध समाप्त होने की शुरुआत हुई। अगले दिन समझौते की पुष्टि करते हुए बीजिंग ने कहा कि 'प्रासंगिक मामलों' पर समाधान हो गया है और वह समझौते की शर्तों को लागू करने के लिए नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करेगा। recent visitors 65

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिये जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाई जाये

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिये जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाई जाये। उन्होंने नक्सल प्रभावी क्षेत्रों में गश्त बढ़ाते हुए मुखबिर व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 36वीं बटालियन, हॉक फोर्स सहित सभी स्पेशल फोर्स एक्टिव होकर जिम्मेदारी से कार्य करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को बालाघाट में नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर जन-प्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने आईजी श्री संजय सिंह एवं पुलिस अधीक्षक नागेंद्र कुमार द्वारा जिले में नक्सल गतिविधियों के उन्मूलन के उद्देश्य से तैयार की गई योजना के प्रेजेंटेशन का अवलोकन भी किया। बैठक में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा एवं बालाघाट जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री श्री लखन पटेल, सांसद श्रीमती भारती पारधी, विधायक श्री गौरव पारधी, विधायक राजकुमार कर्राहे, विधायक श्री मधु भगत, विधायक श्री विक्की पटेल, पूर्व मंत्री श्री रामकिशोर कावरे, पूर्व मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल, संभागायुक्त श्री अभय वर्मा, कलेक्टर श्री मृणाल मीना सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।   recent visitors 69