मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन हमारी संस्कृति रही है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन हमारी संस्कृति रही है। कई जन्मों के पुण्य के बाद देवता हमारे यज्ञ की आहुति स्वीकारते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बालाघाट के सरदार पटेल विश्वविद्यालय में आयोजित 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार द्वारा नवीन शिक्षा नीति में भारत की गौरवशाली इतिहास एवं हमारी संस्कृति तथा आदर्शो को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि नवीन शिक्षा नीति में किये गये प्रावधान अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति अब गायत्री मंत्र के मर्म एवं महिमा में पीएचडी करना चाहे तो कर सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गायत्री परिवार के नशामुक्ति, नारी सशक्तिकरण जैसे जनजागृति अभियानों से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का आहवान किया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पाण्ड्या ने आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य मंत्री श्री लखन पटेल, सांसद श्रीमती भारती पारधी, विधायक श्री गौरव पारधी, विधायक राजकुमार कर्राहे, पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे, पूर्व मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल, पूर्व सांसद श्री ढालसिंह बिसेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गायत्री परिवार के पदाधिकारी की उपस्थिति रहीं।   recent visitors 41

मुख्यमंत्री बालाघाट में स्वदेशी मेले में हुए शामिल, कहा- उद्यमशीलता के संवर्धन का सशक्त माध्यम हैं मेले

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी स्टार्ट-अप, मेक-इन-इंडिया और वोकल-फॉर-लोकल के प्रेरणादायक आह्वान ने देश में उद्यमिता के पुनर्जागरण की अलख जगाई है। भारत आज इंग्लैंड को पीछे छोड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव  मंगलवार को बालाघाट में स्वदेशी मेले को संबोधित कर रहे थे। डॉ. यादव ने मेले में शासकीय विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। साथ ही युवाओं को ऑफर लेटर और दिव्यांगता प्रमाण-पत्र प्रदान किए और उपस्थित युवाओं से संवाद किया। स्वदेशी विचारक श्री भैया जी जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने स्वदेशी मेले में आने के लिए श्री भैयाजी जोशी का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेला का अर्थ मेल-जोल है और इसमें व्यापार के साथ ही सांस्कृतिक मेलजोल को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी मेले का प्रारंभ वर्ष 1999 से निरंतर विभिन्न स्थानों पर किया जा रहा है। मुम्बई से प्रारंभ स्वदेशी मेले में स्वदेशी उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय से छोटे-बड़े उद्योगों को बल मिला है। यह केवल मेला ही नहीं स्वदेशी मेले के रूप में मिनी इंडिया का स्वरूप देखने को मिल रहा है। यहाँ अलग-अलग प्रांतों की लोककला और कारीगरी को एक स्थान और एक मंच पर देखने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले हमारा देश सोने की चिड़िया हुआ करता था, हम दुनिया की शीर्षस्थ अर्थव्यवस्था थे और हमारे उद्योग, धंधे, मसाले, रेशम और मलमल जैसे चमत्कारी वस्त्र दुनिया भर में मशहूर थे। कहा जाता है कि ढाका का बना मलमल अंगूठी के छल्ले से निकल जाता था। अंग्रेजों ने हमारी इसी स्वदेशी ताकत को कमजोर बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री के प्रोत्साहन और प्रेरणा से देश के साथ ही प्रदेश के युवा ने भी नौकरी मांगने नहीं, देने वाले बनने के गंभीर और दूरदर्शी संदेश को समझा। आज हमारे यहां 37 हजार से भी अधिक स्वदेशी स्टार्ट-अप सक्रिय हैं। हमारा युवा उद्यमशील होकर नौकरी देने वाला बन रहा है। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से आगे बढ़ रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के कंसेप्ट को आगे बढ़ाने में हमें प्रधानमंत्री का प्रोत्साहन भी मिला है। हमारे प्रयास सफल रहे, हमने सागर, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में भी सफलतापूर्वक रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया और अब जल्द ही नर्मदापुरम में भी करने जा रहे हैं। नर्मदापुरम में इंडस्ट्री के लिए पूर्व में आरक्षित 250 हेक्टेयर भूमि को बढ़ाकर 500 हेक्टेयर कर दिया गया है। इसे हम 750 हेक्टेयर तक बढ़ायेंगे। इसमें नवकरणीय ऊर्जा पार्क और अन्य दूसरे उद्योगों की स्थापना के प्रस्ताव भी मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अब तक हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से 2.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए और इनसे 2 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने बताया कि  हम उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी को इंडस्ट्री-फ्रेंडली बनाने के लिये हर स्तर पर जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हम उद्योगों को पारिश्रमिक के रूप में प्रति कर्मचारी 5 हजार रुपए की प्रारंभिक सहायता भी दे रहे हैं। प्रदेश में हुए 17 मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के अंतिम छोर के नागरिक के लिए भी अच्छे स्वास्थ्य और उसे चिकित्सा सुविधाएं सुलभ कराने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पबद्ध है।  प्रदेश में वर्ष 2003-04 में 5 मेडिकल कॉलेज थे, जिन्हें बढ़ाकर हमने 17 कर दिया है। इतना ही नहीं प्रदेश में निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या भी 13 हो गई है। आने वाले वर्ष में 12 और सरकारी कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। साथ ही 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज भी खोले जाएंगे, इनमें से एक बालाघाट में भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वदेशी मेले की सराहना करते हुए कहा कि इसमें आयुर्वेदिक औषधियों को बिक्री के लिए प्रदर्शित किया जाना अच्छी पहल है। कोविड त्रासदी के दौर में हमारी स्वदेशी आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली की जीवन-रक्षक शक्ति की महत्ता पूरे देश ने जानी समझी। आयुर्वेद में असीम संभावनाएं हैं, इसलिए प्रदेश सरकार इसे बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार के प्रयासों से आज प्रदेश का बजट 3.25 लाख करोड़ से बढ़कर 3.5 लाख करोड़ हो चुका है। हमारा लक्ष्य इसे 7 लाख करोड़ रुपए तक ले जाना है, जिससे हम प्रधानमंत्री श्री मोदी के देश को 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। मेला हमारे जीवन का अभिन्न अंग बालाघाट में आयोजित स्वदेशी मेले के शुभारंभ में स्वदेशी विचारक श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि मेले हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं और इनमें स्वदेशी के समावेश से हम आर्थिक रूप से शक्तिशाली बन रहे हैं। श्री जोशी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से भारत सभी क्षेत्रों में विश्व में अग्रणी बन रहा है। चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हमने इतना विकास किया है कि आज विदेशी भी इलाज के लिये भारत आते हैं। स्वदेशी मेले में आयोजक पूर्व मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, आयोजक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। इसमें जनजातीय कलाकारों ने आकर्षक लोकनृत्य की प्रस्तुति दी।   recent visitors 77

मुनगंटीवार ने कहा कि 2025 दीपावली से लड़की बहन योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी

मुंबई महाराष्ट्र में महायुति की जीत में बड़ा फैक्टर मानी जा रही लड़की बहन योजना में विस्तार की तैयारी चल रही है। खबर है कि राज्य की नई सरकार अगले साल से रकम बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने ऐसे संकेत दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुनगंटीवार ने कहा कि 2025 दीपावली से लड़की बहन योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के घोषणापत्र में राशि बढ़ाने की बात कही गई थी, जिसक चलते पार्टी पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए राशि में इजाफा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर वादा पूरा नहीं किया गया, तो इससे पूरे देश में पार्टी की छवि खराब होगी। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखेंगे। उन्होंने कहा, 'हमें अपने वादा पूरा करना चाहिए।' रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार हमारी प्यारी बहनों को 2100 रुपये देने में सक्षम है। हम फैसला करेंगे कि इसे जनवरी, जुलाई या फिर अगले महीने से शुरू किया जाए। हम लोगों से किया वादा पूरा करेंगे।' रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, 'हमने बीते साल भाई दूज पर योजना की शुरुआत की थी और हम अगले साळ भाई दूज से राशि बढ़ा देंगे।' उन्होंने जानकारी दी है कि मुख्यमंत्री की प्यारी बहनों के खाते में पहले ही पांच किश्तें जमा हो चुकी हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को हुआ था जिसके परिणाम तीन दिन बाद घोषित हुए थे, ‘महायुति’ गठबंधन ने 288 विधानसभा सीट में से 230 सीट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा 132 सीट के साथ आगे रही जबकि शिवसेना को 57 और राकांपा को 41 सीट मिली थीं। कब तक सरकार का गठन संभव महाराष्ट्र में बड़ी जीत के बाद भी मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो सका है। खबरें हैं कि बुधवार को भाजपा के पर्यवेक्षक विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे। इसके बाद 5 दिसंबर को शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। सीएम पद भाजपा के खाते में आने के आसार हैं। जबकि, डिप्टी सीएम शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से बनाए जा सकते हैं। recent visitors 85

सीएम साय ने ”नालंदा परिसर” का किया भूमिपूजन, महतारी वंदन योजना की जारी की 10वीं किश्त

रायगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज रायगढ़ में वित्त मंत्री ओपी चौधरी के ड्रीम प्रोजेक्ट हाईटेक लाइब्रेरी नालंदा परिसर के भूमिपूजन समेत 137 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसके अलावा, सीएम ने महतारी वंदन योजना की 10वीं किश्त की राशि ऑनलाइन जारी की। साथ ही रायगढ़ में रिंग रोड बनाने और रामलला दर्शन योजना से लाभ देने की भी घोषणा की है। वहीं कांग्रेस के धान खरीदी निरीक्षण के फैसले का स्वागत करते हुए निशाना भी साधा। बता दें कि रायगढ़ के शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मिनी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने रायपुर की तर्ज पर रायगढ़ के मरीन ड्राइव एरिया में 42 करोड़ की लागत से बनने वाले नालंदा परिसर का भूमिपूजन किया, इसके साथ ही उन्होंने रायगढ़ जिले को 137 करोड़ रुपये की लागत वाले विकास एवं निर्माण कार्यों की सौगात दी, जिसमें 97 करोड़ 51 लाख रुपये की लागत से निर्मित 67 कार्यों का लोकार्पण और 37 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 13 कार्यों का शिलान्यास शामिल है। वहीं रायगढ़ में रिंग रोड की घोषणा भी सीएम साय ने की। रायगढ़ में प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा परिसर गौरतलब है कि रायगढ़ के मरीन ड्राइव में सर्वसुविधायुक्त नालंदा परिसर प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा परिसर होगा। इसके लिए नगर निगम और एनटीपीसी के मध्य 42 करोड़ 56 लाख का करार हुआ है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। बता दें कि नालंदा परिसर एक अत्याधुनिक लाइब्रेरी होगी। इसमें वह सारी सुविधाएं होंगी जो अमूमन बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों की को लाइब्रेरी में देखने को मिलती हैं। इसमें आने वाले समय के मांग और जरूरतों के अनुसार सुविधा संसाधन होंगे। यहां अध्ययन-अध्यापन का एक ऐसा इको सिस्टम छात्रों को मिलेगा, जिससे वे खुद को प्रदेश के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकेंगे। नालंदा परिसर स्मार्ट लाइब्रेरी और स्टडी जोन होगा। कार्यक्रम के बाद रायगढ़ में पत्रकारों से चर्चा करते हुए सीएम विष्णुदेव साय ने कहा- रायगढ़ के बेटा-बेटियों के लिए नालंदा परिसर बनाया जा रहा है। शहर को रिंग रोड की जरूरत थी, वह भी पूरी की जाएगी। रामलला दर्शन योजना का भी रायगढ़ वासियों को लाभ मिल रहा है। सीएम साय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा- कि कांग्रेस के धान खरीदी निरीक्षण का स्वागत है। वह धान खरीदी केंद्रों में जाएं और वस्तुस्थिति की जानकारी लें। recent visitors 53

कल सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक की मौजूदगी में देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लग जाएगी!

मुंबई  पांच साल के सीएम, फिर 72 घंटे के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और फिर ढाई साल के डिप्टी सीएम। पिछले 10 साल तक अलग-अलग रोल में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति की राजनीति के हीरो बने रहे। अब पांच दिसंबर को वह तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में अब पांच साल के मराठा राज के बाद 'पेशवा' की 'पेशवाई' की चलेगी। बीजेपी ने फडणवीस के नाम को सीएम पद के लिए फाइनल कर लिया है। चार दिसंबर को सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमन और विजय रूपाणी की मौजूदगी में उनके नाम पर मुहर लग जाएगी। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण नेता, जो दूसरी बार सीएम बनेंगे मराठा इतिहास में पंतप्रधान यानी 'पेशवा' अपने कूटनीति और युद्धनीति के लिए जाने जाते थे। देवेंद्र फडणवीस के प्रशंसक भी उन्हें 'पेशवा' और देवा भाऊ ही कहते हैं। देवेंद्र फडणवीस पहले भी दो बार महाराष्ट्र के सीएम रह चुके हैं, मगर उनके लिए यह कुर्सी 'लॉलीपॉप' की तरह नहीं मिली। हर बार उन्होंने बड़े चैलेंज को स्वीकार किया और हर दांव से पार्टी को जीत दिलाई। उनकी खासियत यह है कि उन्होंने युवा पार्षद के तौर पर राजनीति में एंट्री ली है, इसलिए वह जनता और कार्यकर्ताओं के नब्ज को पहचानते हैं। देवेंद्र फडणवीस संघ के 'लाडले' हैं और शाह-मोदी के प्रिय भी। काबिलियत के कारण ही वह मराठा राजनीति वाले राज्य में दूसरे ब्राह्मण सीएम बने। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण सीएम शिवसेना के नेता मनोहर जोशी थे, मगर वह पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। कांग्रेस-एनसीपी के 15 साल के शासन का किया था अंत 2014 में पहली बार देवेंद्र फडणवीस जब सीएम बने थे, तब उन्होंने एनसीपी-कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया था। फडणवीस ने विधानसभा से सड़क तक कांग्रेस-एनसीपी शासन में हुए सिंचाई घोटाले को लेकर आवाज बुलंद की। मोदी लहर के बीच प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र ने चुनाव का ताना-बाना बुना और जीत हासिल की। दूसरी बार भी एंटी इम्कबेंसी को दरकिनार कर गठबंधन के साथ बहुमत हासिल किया, मगर सत्ता हासिल नहीं कर सके। 72 घंटे की सरकार बनाई, तब उन्होंने शरद पवार से बातचीत की थी। जब सरकार गिरी, तब फडणवीस ने विधानसभा में चेतावनी के लहजे में पवार और ठाकरे को एक शेर सुनाया था। 'मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं…लौटकर आऊंगा।' ढाई साल बाद ही शिवसेना दो हिस्सों में टूट गई। एनसीपी के दो टुकड़े हो गए। बीजेपी को फडणवीस सत्ता में ले आए। 2024 में एक बार फिर अपनी रणनीति से एंटी इम्कबेंसी की हवा बदल दी। बीजेपी सर्वाधिक 132 सीटें जीती ही, महायुति ने भी इतिहास रच दिया। नरेंद्र मोदी क्यों हुए देवेंद्र फडणवीस के मुरीद ? रिपोर्टस के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में रैली के दौरान नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पर बीजेपी के बड़े नेताओं से बातचीत कर रहे थे। वहां नितिन गडकरी, गोपीनाथ मुंडे और देवेंद्र फडणवीस भी थे। नरेंद्र मोदी ने पूछा कि महाराष्ट्र में बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी? गडकरी और मुंडे 17-18 के आंकड़े तक पहुंच सके। तब देवेंद्र फडणवीस ने 40 सीटें जीतने की भविष्यवाणी की और यह सच साबित हुई। फिर विधानसभा चुनाव के दौरान फडणवीस ने शिवसेना से अलग चुनाव लड़ने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को राजी किया। यह प्रयोग भी सफल हुआ। 2014 में पहली बार शिवसेना से अलग प्रदेश में बीजेपी अकेले चुनाव लड़ी और 125 सीटें हासिल कीं। उनकी इस रणनीति का बीजेपी के बड़े नेताओं ने विरोध किया था, मगर फडणवीस की रणनीति कामयाब रही और बीजेपी को महाराष्ट्र की पहली बार सत्ता मिली। उद्धव ठाकरे के घमंड को तोड़ने वाले 'पेशवा'! यह कहानी महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में सुनाई जाती है। सच या झूठ, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने उद्धव ठाकरे को बातचीत का निमंत्रण दिया था। बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे ने संदेश दिया कि बीजेपी नेता मातोश्री में आकर उनसे चर्चा करे। यह बात बीजेपी को पसंद नहीं आई। तब देवेंद्र फडणवीस ने इसे चुनौती के तौर पर लिया। पहले बीजेपी अकेले चुनाव लड़कर बड़ी पार्टी बनी। 44 साल की उम्र में जब पहली बार सीएम बने, तब फडणवीस ने पहली बार शिवसेना को गठबंधन का जूनियर पार्टनर बनाया। पांच साल तक सरकार चलाई। दूसरी बार बीजेपी और शिवसेना साथ में उतरी। महायुति को बहुमत मिला, मगर उद्धव ठाकरे सीएम पोस्ट पर अड़ गए। देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के क्षणिक बागी अजित पवार के साथ 80 घंटे के लिए सरकार बनाई, मगर चल नहीं सकी। फडणवीस विपक्ष में बैठे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ढाई साल में ही दो हिस्सों में बंट गई। जब चुनाव में उतरे तो ठाकरे की सेना को 20 पर समेट दिया। धीरे-धीरे देवेंद्र बनते गए मराठा राजनीति के सूरमा देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर फडणवीस जनसंघ और बीजेपी के नेता रहे। नागपुर के गंगाधर फडणवीस को नितिन गडकरी भी अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं। 22 साल की उम्र में फडणवीस ने नागपुर के पार्षद से राजनीति शुरूआत की, फिर 27 साल की आयु में युवा मेयर बनने का रेकॉर्ड बनाया। 1999 में दक्षिण पश्चिम नागपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़े और लगातार जीतते रहे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले गोपीनाथ मुंडे के आकस्मिक निधन के बाद नेतृत्व की चर्चा चल रही थी। नितिन गडकरी और एकनाथ खडसे जैसे दिग्गज कतार में थे। चुनाव के दौरान दिल्ली में नरेंद्र, महाराष्ट्र में देवेंद्र का नारा काफी लोकप्रिय हुआ। देखते ही देखते वह बीजेपी के पोस्टर बॉय बन गए। अपनी बेदाग छवि और लोकप्रियता के कारण आरएसएस ने भी उन्हें नेक्स्ट जेनरेशन के नेता के तौर पर चुना, जिसमें वह खरे साबित हुए। उन्होंने गठबंधन की सरकार चलाकर अपने नेतृत्व क्षमता को भी साबित कर दिया। recent visitors 59

रातपानी एमपी का 8वां टाइगर रिजर्व बन गया है. सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया

भोपाल मध्य प्रदेश के बड़ी खुशखबरी है. राज्य को एक और टाइगर रिजर्व मिल गया है. रातापानी प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व होगा. सरकार ने इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. इस टाइगर रिजर्व में 90 बाघ हैं. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी ने साल 2022 में रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने की मंजूरी दी थी. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस साल जून में रातापानी को टाइगर रिजर्व के रूप में नोटिफाई करने के निर्देश दिए थे. सीएम यादव ने इसे पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर कहा है. जानकारी के मुताबिक, रातापानी टाइगर रिजर्व का फोरेस्ट एरिया 1271.465 स्क्वेयर किमी है. इसमें से 763.812 स्क्वेयर किमी कोर और 507.653 स्क्वेयर किमी बफर एरिया होगा. इस टाइगर रिजर्व में 3 हजार से ज्यादा जानवर हैं. इसमें 90 बाघ, 70 तेंदुए, 500 से ज्यादा सांभर, 600 से ज्यादा चीतल, 8 भेड़िये हैं. इसका कोर एरिया भोपाल, रायसेन और सीहोर में होगा. बता दें, इस टाइगर रिजर्व में 9 गांव शामिल होंगे. इसके बनने से गांववालों के अधिकारों में सरकार कोई बदलाव नहीं करेगी. इससे टूरिज्म बढ़ेगा, रोजगार पैदा होंगे. इसके अलावा केंद्र सरकार से बजट मिलने से एनिमल मैनेजमेंट और बेहतर होगा. इसके अलावा यहां ईको सिस्टम डेवलप होगा. इससे भी गांववालों को लाभ मिलेगा. रातापानी टाइगर रिजर्व बनने से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पहचान ही बदल जाएगी. लंबे समय से पेंडिंग था मामला यह फैसला काफी समय से लंबित था। 2008 में NTCA से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद भी राज्य सरकार ने टाइगर रिजर्व बनाने में देरी की थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से राज्य सरकार को अधिसूचना प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। उन्होंने इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष और बाघों की आबादी की रक्षा की जरूरत का हवाला दिया था। इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए अजय दुबे ने कहा कि मैं सरकार के फैसले से बहुत खुश हूं। इस अधिसूचना को खनन माफिया और क्षेत्र में निहित स्वार्थ रखने वाले लोग रोक रहे थे। रायसेन और सीहोर जिले में है स्थित रातपानी वन्यजीव अभ्यारण्य रायसेन और सीहोर जिलों में स्थित है। यह मध्य प्रदेश में बाघों के एक महत्वपूर्ण आवास का हिस्सा है। हाल के वर्षों में, सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला से बाघ इस अभ्यारण्य और आसपास के वन क्षेत्रों में आने लगे हैं। बाघों के इन इलाकों में आने के बाद, 2007 में राज्य सरकार ने रतपानी और सिंघोरी अभ्यारण्यों को टाइगर रिजर्व घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। 2008 में मिल गई थी मंजूरी NTCA ने 2008 में रिजर्व के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी थी। राज्य वन विभाग को रिजर्व की सीमाओं और कोर क्षेत्रों के लिए विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद, अंतिम अधिसूचना प्रक्रिया में कई देरी हुई। 2012 में, NTCA ने राज्य सरकार को रिमाइंडर जारी किए, जिसमें तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया था। देरी की वजह से बढ़ रहे थे बाघ और इंसानों के संघर्ष PIL में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि रतपानी टाइगर रिजर्व को अंतिम रूप देने में देरी के कारण बाघ-मानव संघर्ष में वृद्धि हुई है। बाघ भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों में भटक रहे हैं। अतिक्रमण और आवास क्षरण के कारण अभ्यारण्य के भीतर पर्याप्त शिकार की कमी ने इस स्थिति को और बदतर बना दिया है। 2011 में, स्थानीय रिपोर्टों ने भोपाल के बाहरी इलाके में बाघों और तेंदुओं की उपस्थिति पर प्रकाश डाला था। बढ़ती मांसाहारी आबादी का समर्थन करने के लिए 'शिकार आधार' की मांग की गई थी। संघर्ष तब एक दुखद मोड़ पर पहुंच गया जब 2012 में, एक बाघ भोजन की तलाश में मानव बस्तियों में भटक गया और ग्रामीणों द्वारा उसे बेरहमी से मार डाला गया। NTCA ने तुरंत इस स्थिति का संज्ञान लिया, लेकिन राज्य द्वारा रिजर्व अधिसूचना को पूरा करने में विफलता ने इस क्षेत्र को असुरक्षित छोड़ दिया। बफर जोन में कई बुनियादी परियोजनाओं को मंजूरी दी इस मुद्दे को और जटिल बनाते हुए, मध्य प्रदेश के राज्य वन्यजीव बोर्ड (SWB) ने रिजर्व के प्रस्तावित बफर ज़ोन में कई बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंज़ूरी दे दी। इनमें कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट, 765kV ट्रांसमिशन लाइन और एक रेलवे लाइन शामिल हैं। ये मंजूरियां बाघों के आवास पर संभावित प्रभाव पर विचार किए बिना दी गई थीं। उच्च न्यायालय में दायर PIL ने इन मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया। अदालत से राज्य सरकार को तुरंत रिजर्व को अधिसूचित करने का निर्देश देने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं ने SWB द्वारा अनुमोदित परियोजनाओं को निलंबित करने की भी मांग की जो प्रस्तावित टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। याचिका के जवाब में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि NTCA की वैधानिक मंज़ूरी और संरक्षण की ज़रूरत के बावजूद, राज्य के अधिकारियों ने अभ्यारण्य के नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए पर्याप्त तेज़ी से काम नहीं किया। अदालत ने राज्य सरकार से टाइगर रिजर्व की अधिसूचना को अंतिम रूप देने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया था। प्रबंधन एक चुनौती है उन्होंने कहा है कि अधिसूचना एक महत्वपूर्ण पहला कदम है, लेकिन अब असली चुनौती रिजर्व के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करने में है। इसमें स्पष्ट सीमाएं स्थापित करना, शिकार को रोकना और वन्यजीव-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ना शामिल है। सीएम यादव ने कही ये बात इस टाइगर रिजर्व के बनने के बाद सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और कुशल मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर स्थापित किया है. रायसेन जिले में स्थित रातापानी को अब प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है. यह निर्णय न केवल बाघों की सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भी नई दिशा देगा. recent visitors 75

प्रदेश का आठवां टाइगर रिजर्व क्षेत्र बना रातापानी – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रातापानी सैंक्चुअरी टाइगर रिजर्व बफर एरिया घोषित होने से मध्यप्रदेश अब वास्तविक रूप में टाइगर स्टेट बन गया है। मध्यप्रदेश के लिये यह बहुत बड़ी सौगात है। केन्द्र सरकार के अनुमोदन के बाद रातापानी, मध्यप्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मध्यप्रदेश को हमेशा प्राथमिकता दी है, जिसके परिणामस्वरूप श्योपुर के कूनो में चीते और उसके बाद रातापानी को टाइगर बफर क्षेत्र का अनुमोदन मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रातापानी सैंक्चुअरी टाइगर रिजर्व बफर जोन की विशेष बात यह है कि यह देश का एकमात्र ऐसा टाइगर रिजर्व है जो राजधानी (भोपाल) के बेहद नजदीक है। इससे यह माना जा सकता है कि राजधानी इस अभयारण्य का हिस्सा है। इस अभयारण्य के दायरे में रायसेन, भोपाल और सीहोर जिले का क्षेत्र भी आएगा। यहां लगभग 90 से ज्यादा बाघ और अन्य वन्य जीव भी हैं। उन्होंने कहा कि रातापानी को टाइगर रिजर्व घोषित करने से पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। टाइगर रिजर्व का संपूर्ण कोर क्षेत्र रातापानी अभयारण्य की सीमा के भीतर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीणों के वर्तमान अधिकार में कोई परिवर्तन नहीं होगा बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को पर्यटन से रोजगार के नये अवसर मिलेंगे और उन्हें आर्थिक रूप से लाभ भी मिलेगा। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा टाइगर भी हैं और टाइगर पार्क भी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रातापानी टाइगर रिजर्व घोषित होने से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, केंद्र सरकार एवं राज्य द्वारा आवंटित बजट से वन्य-प्राणियों का और बेहतर ढंग से प्रबंधन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे रातापानी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी तथा राजधानी भोपाल की पहचान टाईगर कैपिटल के रूप में होगी।   recent visitors 74