MP में बेची जाएंगी IVF से पैदा हुईं गाय, देंगी 10 लीटर दूध रोजाना, कीमत बस इतनी

भोपाल मप्र की मोहन सरकार अब गो-पालन को बढ़ावा देने के लिए अच्छी नस्ल की गाय की बछिया बेचेगी। सीएम के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। गो पालकों को भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक और आईवीएफ से पैदा हुई उन्नत नस्ल की बछिया उपलब्ध कराई जाएंगी। मप्र के पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों में करीब 300 बछिया बिक्री के लिए चिह्नित की गई हैं। देश का दूसरा ब्रीडिंग सेंटर एमपी में नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर के देश में दो सेंटर हैं। इसमें से एक मध्यप्रदेश में हैं, जहां 13 नस्ल की गायों और 4 नस्ल की भैंसों का संरक्षण होता है।  वहीं, देसी गायों की नस्ल में सुधार के लिए अच्छी नस्ल के बच्चे, भ्रूण और सीमन पशुपालकों को उपलब्ध कराए जाते हैं। अभी साल में सिर्फ एक बार होती है नीलामी पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बेसहारा गौवंश सरकार और समाज दोनों के लिए बड़ी चुनौती है। सबसे जरूरी है कि गौपालक के लिए गाय लाभकारी हो। यानी गाय ज्यादा दूध देगी, तो लोग उसे बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। अब तक पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों से साल में एक बार बछिया और बछड़ों की नीलामी होती थी। अब इसे बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा। दो तकनीक से पैदा हो रही बछिया भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक: देसी नस्ल की गाय की बच्चेदानी में अच्छी नस्ल का भ्रूण तैयार किया जाता है। आईवीएफ तकनीक: कृत्रिम तरीके से भ्रूण तैयार कर उसका देसी गाय की बच्चेदानी में प्रत्यारोपण किया जाता है। देश का दूसरा ब्रीडिंग सेंटर एमपी में नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर के देश में दो सेंटर हैं। इसमें से एक मध्यप्रदेश में हैं, जहां 13 नस्ल की गायों और 4 नस्ल की भैंसों का संरक्षण होता है। वहीं, देसी गायों की नस्ल में सुधार के लिए अच्छी नस्ल के बच्चे, भ्रूण और सीमन पशुपालकों को उपलब्ध कराए जाते हैं। अभी साल में सिर्फ एक बार होती है नीलामी पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बेसहारा गौवंश सरकार और समाज दोनों के लिए बड़ी चुनौती है। सबसे जरूरी है कि गौपालक के लिए गाय लाभकारी हो। यानी गाय ज्यादा दूध देगी, तो लोग उसे बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। अब तक पशु प्रजनन प्रक्षेत्रों से साल में एक बार बछिया और बछड़ों की नीलामी होती थी। अब इसे बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा। दो तकनीक से पैदा हो रही बछिया भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक: देसी नस्ल की गाय की बच्चेदानी में अच्छी नस्ल का भ्रूण तैयार किया जाता है। आईवीएफ तकनीक: कृत्रिम तरीके से भ्रूण तैयार कर उसका देसी गाय की बच्चेदानी में प्रत्यारोपण किया जाता है। तकनीक का इस्तेमाल बता दें कि, प्रदेश में मौजूद नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर में एक दर्जन से ज्यादा नस्ल की गायों और 4 नस्ल की भैंसों को पाला जा रहा है। यहां देशी गायों की नस्ल में सुधार के लिए भ्रूण ट्रांसफर तकनीक और आईवीएफ तकनीक(IVF Technology) का इस्तेमाल किया जाता है। भ्रूण ट्रांसफर तकनीक में देसी नस्ल की गायों के बच्चेदानी में उन्नत नस्ल(Advanced Breed Cow) का भ्रूण तैयार किया जाता है। जबकि आईवीएफ तकनीक के अंतर्गत, आर्टिफिशियल भ्रूण तैयार करके उसे गाय की बच्चेदानी में ट्रांसफर किया जाता हैं। इतनें में खरीद सकेंगे पशुपालक यहां गिर, साहिवाल, थारपारकर, कांकरेज, मालवी, निमाडी जैसी नस्लों को संरक्षण मिला हुआ है। बता दें कि ये गाय रोजाना 6 से 10 लीटर दूध देती है। 6 से 12 महीने की बछिया को सिर्फ 6 से12 हजार रुपए देकर पशुपालक खरीद सकेंगे। वहीं 2 से 3 साल की बछिया को 15 से 20 हजार रुपए में खरीद सकेंगे। यहां होती है नीलामी जानकारी के मुताबिक राजधानी भोपाल के भदभदा, टीकमगढ के मिनौरा, पन्ना के पवई, सागर के रतौना, छिंदवाड़ा के इमलीखेडा, बालाघाट के गढ़ी, आगर मालवा और खरगोन के रोडिया में इन बछियों की नीलामी होती है। recent visitors 97

बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों की ढील कड़ी से पंप रहा साइबर ठगी का मकड़ जाल

भोपाल  साइबर ठगी के जाल में लोग हर पल फंस रहे हैं। ऑनलाइन बिजली का बिल भरने से लेकर होटल की बुकिंग तक में साइबर ठगों का जाल फैला हुआ है। जांच में सामने आया है कि ठगी का यह जाल बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों की ढील से फैल रहा है, क्योंकि बैंक नियमों को ताक में रखकर बिना सत्यापन किए ही खाते खोल रहे हैं। साथ ही एसटीआर की जांच भी नहीं हो रही है। टेलीकॉम कंपनियां भी बिना संपूर्ण सत्यापन के सिम जारी कर रही हैं। खाते और नंबर के इन्हीं हथियारों का फायदा उठाकर ठग वारदात करते हैं। वहीं लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस भी संख्या बल की कमी से जूझ रही है। बीते एक साल में ऐसे केस में 93 गिरफ्तारियां हुईं बीते एक वर्ष में भोपाल साइबर क्राइम सेल में साढ़े पांच हजार से अधिक शिकायतें पहुंची हैं। इनमें महज 61 एफआईआर ही दर्ज की गई हैं और इन मामलों में 93 गिरफ्तारियां हुई हैं। जिस सेल में रोजाना करीब 30 शिकायतें पहुंच रही हैं, वहां तीन महीने से एक भी इंस्पेक्टर नहीं है। जिन चुनिंदा मामलों में पुलिस हस्तक्षेप कर अपराधियों को पकड़ने का प्रयास करती है, उनमें क्राइम ब्रांच के ही इंस्पेक्टरों को कमान सौंप दी जाती है। बैंक और टेलीकॉम कंपनियों की चूक बैंक : कई निजी बैंकों के कर्मचारी लक्ष्य पूरा करने के लिए बिना केवाईसी और फिजिकल वेरीफिकेशन के खाते खुलवा देते हैं, जबकि आरबीआई की एडवाइजरी के अनुसार ई-केवाईसी आवश्यक है। ठगी के लिए उपयोग किए जाने वाले फर्जी बैंक खातों के लेनदेन के लिए आरबीआई ने एसटीआर (सस्पीशियस ट्रांजेक्शन रिपोर्ट) की व्यवस्था शुरू की है। यदि बैंक खातों में अचानक बढ़ते हुए लेन-देन की जानकारी पुलिस से साझा की जाए तो इस पर भी लगाम लगाई जा सकती है। फर्जी दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाने का एक बड़ा मामला हाल ही में भोपाल में सामने आया था, जहां एक गिरोह दो साल से देशभर में 1800 से अधिक खाते खुलवा चुका था। उसे भोपाल पुलिस ने पकड़ा था। टेलीकॉम कंपनी : साइबर अपराध की पहली कड़ी फोन काल से ही जुड़ी है। टेलीकॉम कंपनियां बिना पुख्ता सत्यापन के सिमें उपलब्ध कराती हैं। इन्हीं सिमों का उपयोग कर लोग ठगी को अंजाम देते हैं। फर्जी तरीके से सिमों की खरीदी बंद होने से अपराध में आएगी कमी     साइबर अपराध रोकने के लिए बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यदि फर्जी तरीके से सिमों की खरीदी बंद हो और बैंक भी लेनदेन की जानकारी उपलब्ध कराएं तो अपराध में निश्चित ही कमी आएगी। हमारे पास पुलिस बल सीमित हैं। एक दिसंबर से थानों में साइबर डेस्क शुरू होगी तो साइबर क्राइम सेल का भार कम हो सकेगा। हरिनारायणाचारी मिश्र, पुलिस आयुक्त   recent visitors 71

मोहन सरकार देगी मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, नए साल में 3 प्रतिशत तक महंगाई भत्ता बढ़ेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के करीब 7 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए साल (New Year 2025) पर मोहन सरकार (Mohan Government) बड़ा तोहफा देने जा रही है. दरअसल, प्रदेश में DA यानी महंगाई भत्ता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. यहां कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3 से 4 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है. इसे लेकर वित्त विभाग तैयारी कर रहा है. वहीं दिसंबर महीने में प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के अकाउंट में एरियर की पहली किस्त की राशि भी आएगी. 3 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है महंगाई भत्ता जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 में 3 प्रतिशत तक महंगाई भत्ता बढ़ाया जा सकता है. इससे पहले राज्य सरकार ने जनवरी 2024 में यह 46 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया था. हालांकि केंद्रीय कर्मचारियों (Central employees) को जुलाई 2024 से 53 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं  केंद्र सरकार जनवरी 2025 से महंगाई भत्ता में फिर वृद्धि करने जा रही है. ऐसे में मोहन सरकार भी अपने कर्मचारियों को नए साल में तोहफा देने की तैयारी में हैं. राज्य सरकार ने की देरी बताते चलें कि अब तक मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार भी अपने कर्मचारियों का भत्ता बढ़ाती थी, महंगाई भत्ते व राहत में वृद्धि की जाती थी, लेकिन अब इसमें विलंब हो रहा है। फिलहाल केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत का अंतर है। केंद्रीय कर्मचारियों का जुलाई 2024 से महंगाई भत्ता 53 प्रतिशत किया जा चुका है, लेकिन राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को इसका लाभ नहीं मिला है। केंद्र सरकार फिर बढ़ाएगी महंगाई भत्ता सूत्रों का कहना है कि मप्र सरकार नए साल में 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है, क्योंकि केंद्र सरकार फिर इसमें वृद्धि कर सकती है। राज्य सरकार के बजट में भी 56 फीसदी महंगाई भत्ते का प्राविधान है। ऐसे में महंगाई भत्ता बढ़ाने में बजट की भी कोई समस्या नहीं आएगी। दिसंबर में मिलेगी एरियर की पहली किस्त इससे पहले मप्र सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि जनवरी 2024 से की थी, लेकिन इसका भुगतान अक्टूबर के वेतन यानी नवंबर से किया गया। ऐसे में जनवरी से सितंबर के महंगाई भत्ते के अंतर की राशि का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाना है। पहली किस्त दिसंबर में दी जाएगी। दूसरी जनवरी, तीसरी फरवरी और चौथी किस्त की राशि खातों में मार्च 2025 में आएगी। दिसंबर में मिलेगी एरियर की पहली किस्त इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि जनवरी 2024 से की थी, लेकिन इसका भुगतान अक्टूबर के वेतन यानी नवंबर से किया गया. ऐसे में जनवरी से सितंबर के महंगाई भत्ते के अंतर की राशि का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाना है. पहली किस्त दिसंबर में मिलेगी, जबकि दूसरी किस्त जनवरी में दी जाएगी. वहीं तीसरी किस्त फरवरी और चौथी किस्त की राशि मार्च 2025 में कर्मचारियों के खातों में आएगी. बता दें कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत का अंतर है. दरअसल, केंद्रीय कर्मचारियों का जुलाई 2024 से महंगाई भत्ता 53 प्रतिशत दिया जा रहा है, जबकि राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को इसका लाभ अभी तक नहीं मिला है.   recent visitors 72

महाराष्ट्र में फरवरी में बीएमसी समेत 14 नगर निगमों में चुनाव, अलग होने पर निकाय चुनाव में अलग-थलग पड़ सकते हैं उद्धव

मुंबई  शिवसेना (यूबीटी) महाविकास अघाड़ी से बाहर नहीं जाएगी। पार्टी के सांसद संजय राउत ने इस बयान से यूबीटी के कई नेता नाराज हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे ने उद्धव ठाकरे से महाविकास अघाड़ी से निकलने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि बीएमसी समेत निकाय चुनाव यूबीटी को अकेले लड़ना चाहिए। अब इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे की पार्टी में मतभेद सामने आ गए हैं। संजय राउत ने कहा कि विधानसभा की हार की समीक्षा अघाड़ी की तीनों पार्टियां मिलकर करेंगी। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव से जुड़े फैसले बाद में लिए जाएंगे। पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि अकेले चुनाव लड़ने से उद्धव ठाकरे राजनीति में अलग-थलग पड़ सकते हैं। ऐसे में नया चुनावी प्रयोग करना जोखिम भरा हो सकता है। अंबादास दानवे ने की थी एमवीए से एग्जिट करने की बात विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को सिर्फ 20 सीटें मिलीं। मुंबई में भी पार्टी को तगड़ा नुकसान हुआ। इस हार पर उद्धव ठाकरे तो चुप रहे, मगर उनकी पार्टी के कई नेताओं ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। एमएलसी अंबादास दानवे ने बताया कि जीत की उम्मीद में कांग्रेस नेताओं ने प्रचार में कोताही की। वह मंत्री बनने के लिए सूट-बूट सिलाने में व्यस्त रहे। रणनीतिक तौर पर सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं कर कांग्रेस ने अघाड़ी का नुकसान किया। उन्होंने कहा कि अब निकाय चुनाव में पार्टी को एमवीए से अलग चुनाव लड़ना चाहिए। राज्य की सभी 288 सीटों पर खड़ा करने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद संजय राउत ने सिरे से इस सलाह को खारिज कर दिया। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे अभी जल्दीबाजी में नहीं हैं बल्कि वह निकाय चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। अघाड़ी से बाहर निकले तो नहीं मिलेगा दलित-मुस्लिम वोट उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी के साथ लोकसभा चुनाव भी लड़े थे और उन्हें 9 सीटों पर जीत मिली थी। पार्टी में बंटवारे के बाद यह जीत बड़ी थी। अघाड़ी के साथ होने के कारण उसे परंपरागत मराठा वोटरों के अलावा दलित और मुसलमानों का वोट मिला था। विधानसभा चुनाव में भी मुस्लिम वोटरों ने खुलकर शिवसेना को वोट किया। फरवरी में मुंबई समेत राज्य की 14 म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव होने हैं। अगले तीन महीनों में राजनीति हालात बदल सकते हैं और महायुति की लहर भी सुस्त पड़ सकती है। अगर यूबीटी अघाड़ी से अलग होगी तो पिछले दो चुनाव में वोट देने वाले समर्थकों के बीच गलत मैसेज जा सकता है। गठबंधन से बाहर निकलने का एक मायने और निकल सकता है कि उद्धव ठाकरे एक बार फिर हार्ड हिंदुत्व की राह पर चल पड़े हैं। सिर्फ उद्धव सेना नहीं हारी, अघाड़ी में सब हारे हैं एक नेता ने बताया कि अघाड़ी में जीता कोई नहीं है, मगर हारे सब हैं। विधानसभा चुनाव में न सिर्फ उद्धव सेना बल्कि पूरी महाविकास अघाड़ी को नुकसान हुआ है। शिवसेना यूबीटी सबसे ज्यादा 20 सीटें जीतने में सफल रही है, मगर कांग्रेस 16 और शरद पवार की एनसीपी 10 सीटों पर सिमटी है। निकाय चुनाव में जब सीटों के बंटवारे पर बात होगी, तब उद्धव सेना की पोजिशन मजबूत रहेगी। अघाड़ी से बाहर निकलते ही उद्धव की शिवसेना के वोट और कम हो जाएंगे। जहां तक बीएमसी चुनाव का सवाल है, उद्धव सेना का परफॉर्मेंस कांग्रेस और एनसीपी से बेहतर रहा है। एक्सपर्ट मानते हैं कि उद्धव की नजर सिर्फ निकाय चुनाव पर नहीं है, बल्कि वह विधानसभा में विपक्ष की हैसियत को अपने पास रखना चाहते हैं। recent visitors 62

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को केंद्र सरकार से एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई, राज्य में फिल्म सिटी और सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण होगा

रायपुर छत्तीसगढ़ में पर्यटन (Chhattisgarh Tourism) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है. राज्य में दो प्रमुख पर्यटन परियोजनाओं के लिए 147.66 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है. इन परियोजनाओं में रायपुर के माना तुता में फिल्म सिटी और जनजातीय व सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण शामिल है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल और प्रयासों के कारण यह बड़ी उपलब्धि संभव हो पाई है. उनके निर्देश पर छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के Managing Director विवेक आचार्य ने 15 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की थी. इस दौरान राज्य के लिए 300 करोड़ रुपये के प्रस्ताव दिए गए थे जिसमें से 147.66 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है. 95.79 करोड़ रुपये से बनेगी फिल्म सिटी छत्तीसगढ़ के रायपुर में 95.79 करोड़ रुपये की लागत से चित्रोत्पला फिल्म सिटी बनाई जाएगी. ये फिल्म सिटी प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देगी और यहां फिल्म शूटिंग के लिए देशभर से Producer-Director आ सकेंगे. इससे न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान बढ़ेगी बल्कि फिल्म पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान फिल्म सिटी के साथ ही रायपुर में 51.87 करोड़ रुपये की लागत से जनजातीय और सांस्कृतिक सम्मेलन केंद्र बनाया जाएगा. ये केंद्र छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया के आगे पेश करेगा. यहां लोक कला, संगीत और नृत्य के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिससे पर्यटक और लोगों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो सकेंगे. केंद्र सरकार से मिली बड़ी सौगात CG News: इसके अंतर्गत 95.79 करोड़ रुपए की लागत से माना तूता रायपुर में चित्रोत्पला फिल्म सिटी का निर्माण तथा 51.87 करोड़ रुपए की लागत से माना तूता रायपुर में जनजातीय और सांस्कृतिक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण शामिल है। छत्तीसगढ़ में इन परियोजनाओं के शुरू होने से राज्य में पर्यटन ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी। ये योजनाएं रोजगार सृजन, विकास और छत्तीसगढ़ को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी। 300 करोड़ रुपए का दिया था प्रस्ताव जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से 15 अक्टूबर को नई दिल्ली में मुलाकात कर छत्तीसगढ़ की पर्यटन गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना के तहत राजधानी रायपुर में फिल्म सिटी, कन्वेंशन सेंटर, वेलनेस रिसॉर्ट और नेचर सिटी के लिए लगभग 300 करोड़ रुपए के प्रस्ताव दिए थे। जिसके परिप्रेक्ष में फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 147.66 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। रोजगार के नए अवसर मिलेंगे इन परियोजनाओं से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. फिल्म सिटी और सांस्कृतिक केंद्र के जरिए स्थानीय युवाओं को नई नौकरियां मिलेंगी और प्रदेश का आर्थिक विकास होगा. फिल्म सिटी और सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण से छत्तीसगढ़ को नई पहचान मिलेगी. साथ ही इससे छत्तीसगढ़ एक आइकॉनिक टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में उभर सकता है. recent visitors 122

चीन के चिप उद्योग पर ट्रंप का बड़ा वार, अब तकनीकी दौड़ में पिछड़ जाएगा चीन?

वाशिंगटन ग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 200 चीनी कंपनियों को प्रतिबंधित व्यापार सूची में डालने जा रही है, जिसमें चिप निर्माण उपकरण और सामग्री सप्लाई करने वाली प्रमुख कंपनियां शामिल होंगी। यह कदम चीन के सेमीकंडक्टर उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को और मुश्किल बना सकता है। इस लिस्ट में हुवावे टेक्नोलॉजीज और उससे जुड़े चिप निर्माण प्लांट्स को भी निशाना बनाया गया है। हुवावे 2019 से ही अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। अमेरिका के ये नए प्रतिबंध चीन की चिप सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। इनसे वेंचर कैपिटल और विशेष गैस सप्लाई करने वाली चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने इन प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इन प्रतिबंधों को अनुचित बताते हुए कहा है कि ये कदम अमेरिका-चीन आर्थिक संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी विवाद और गहरा हो गया है। अमेरिका के इन प्रतिबंधों का उद्देश्य चीन को एडवांस तकनीकों तक पहुंच से रोकना है, जिनसे उसकी सैन्य ताकत बढ़ सकती है। पिछले प्रतिबंधों के तहत अमेरिका ने चीन के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उद्योग को Nvidia और ASML जैसी कंपनियों की एडवांस चिप्स और उपकरणों से वंचित कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया कदम चीन के सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए बड़ा झटका होगा। यह तकनीकी विवाद अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा को और तेज कर रहा है, जिसका असर वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग पर गहराई से पड़ सकता है। दुविधा में पड़ा मैक्सिको चीन की यह योजना मैक्सिको को एक दुविधा में डालती हैं, जिसे ट्रम्प की सोमवार को दी गई धमकी ने और भी बदतर बना दिया है. ट्रंप ने साफ कहा है कि वह मैक्सिको के सामानों पर 25% टैरिफ लगाएंगे. देश में पहले से ही एक प्रमुख कार-निर्माण केंद्र है और आमतौर पर विदेशी निवेश का स्वागत करता है क्योंकि इससे रोजगार मिलता है. BYD, जो दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं में से एक है, उसका प्‍लांट लगना सामान्यतः एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती. लेकिन, मैक्सिको के अधिकारियों को डर है कि BYD का प्लांट ट्रम्प और उनके व्यापारिक सलाहकारों को गलत संदेश भेजेगा. चीन तलाश रहा पिछला दरवाजा मैक्सिको के अधिकारियों को लगता है कि अगर चीनी कंपनी उनके यहां आई तो अमेरिकी प्रशासन को यही लगेगा कि मैक्सिको चीनी कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रवेश का पिछला दरवाजा बनना चाहता है. यह हालात इसलिए और भी गंभीर नजर आ रहे हैं, क्‍योंकि अवैध घुसपैठ और ड्रग्‍स को लेकर पहले से ही मैक्सिको अमेरिका के निशाने पर है. recent visitors 75

PF का पैसा अब ATM से आसानी से निकालें, ट्रांसफर करने का झंझट खत्म, ऑटोमेटिक हो जाएगा ये काम, जानें तरीका

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. प्राइवेट सेक्‍टर्स के कर्मचारियों को रिटायमेंट फाइनेंशियल सिक्‍योरिटी देने वाला ये सिस्‍टम जल्‍द ही एक बड़े बदलाव के साथ आ सकता है. यह एक ऐसा बदलाव हो सकता है, जो कर्मचारियों की बड़ी परेशानी को खत्‍म कर देगा. दरअसल, खबर आई है कि सरकार EPFO के तहत एक ऐसे सिस्‍टम पर काम कर रही है, जिससे कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) के सब्‍सक्राइबर्स पैसों की जरूरत पड़ने पर ATM के जरिए डेबिट कार्ड का उपयोग करते हुए PF का पैसा निकाल सकते हैं. एटीएम से पैसा निकालने की लिमिट भी तय की जाएगी, ताकि आपकी रिटायरमेंट पर भी फाइनेंशियल सिक्‍योरिटी बनी रहे और इमरजेंसी पर लिक्विडिटी भी रहे. कहा जा रहा है कि यह पहल सरकार की महत्वाकांक्षी EPFO ​​3.0 योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सेवाओं का आधुनिकीकरण करना और ग्राहकों को उनकी बचत पर अधिक कंट्रोल देना है. ज्‍यादा कंट्रीब्‍यूशन पर भी हो रही चर्चा एटीएम निकासी के साथ-साथ, श्रम मंत्रालय कर्मचारी योगदान पर 12% की सीमा को हटाने पर विचार कर रहा है, जिससे कर्मचारी अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप अधिक सेविंग कर सकेंगे. रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि सब्सक्राइबर्स को जल्द ही किसी भी समय मौजूदा सीमा से ज़्यादा राशि जमा करने की सुविधा मिल सकती है. जबकि नियोक्ता का योगदान स्थिरता के लिए सैलरी बेस्‍ड रहेगा, कर्मचारियों को अपने अकाउंट्स में पैसे जमा करने की आज़ादी मिल सकती है, जिससे बिना किसी प्रतिबंध के उनकी सेविंग बढ़ सकती है. EPS को लेकर भी हो रहा सुधार इसके अतिरिक्त, सरकार कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) में सुधार पर काम कर रही है. वर्तमान में, नियोक्ता के योगदान का 8.33% EPS-95 को आवंटित किया जाता है. प्रस्तावित परिवर्तनों से कर्मचारियों को सीधे योजना में योगदान करने की अनुमति मिल सकती है, जिससे उन्हें अपने पेंशन लाभ को बढ़ाने में मदद मिलेगी. कब से हो सकता है बड़ा बदलाव? EPFO सिस्‍टम में सीमित पहुंच और लचीलेपन के बारे में लंबे समय से चली आ रही चिंताओं से निपटने के लिए, इन उपायों का उद्देश्य लॉन्‍ग टर्म फाइनेंशियल सिक्‍योरिटी के साथ तत्काल तरलता आवश्यकताओं को संतुलित करना है. EPFO 3.0 सुधारों की आधिकारिक घोषणा 2025 की शुरुआत में होने की उम्मीद है, जो भारत के कार्यबल द्वारा अपनी सेविंग के मैनेजमेंट और उपयोग के तरीके में एक परिवर्तनकारी बदलाव कर सकता है. गौरतलब है कि अभी ईपीएफओ प्राइवेट सेक्‍टर के कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट फंड जमा करता है. पीएफ अकाउंट के तहत कर्मचारी और नियोक्‍ता दोनों की तरफ से सैलरी का 12 फीसदी कंट्रीब्‍यूशन दिया जाता है. फिर सरकार की तरफ से इसपर सालाना ब्‍याज दिया जाता है.   recent visitors 121