कोई उपचुनाव नहीं लड़ेगी बसपा, मायावती की करारी हार के बाद बड़ा एलान

लखनऊ. यूपी में नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने अब कोई भी उपचुनाव नहीं लड़ने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव आयोग फर्जी मतदान रोकने के लिए कोई सख्त निर्णय नहीं उठाता है तब तक बसपा किसी भी उपचुनाव में भाग नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि पहले बैलेट से फर्जी मतदान होते थे अब यह ईवीएम से भी होने लगा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिर्फ उपचुनाव ही नहीं लड़ेंगे। बाकी चुनाव में भाग लेंगे। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती के इस बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अब यूपी में उपचुनाव होने भी नहीं हैं। हालांकि, अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर कोर्ट का फैसला होने के बाद उपचुनाव हो सकते हैं। recent visitors 68

आईपीएल 2025 मेगा ऑक्शन में श्रेयस अय्यर के ऊपर हुई धनवर्षा, 26.75 करोड़ रुपये में खरीदा

नई दिल्ली आईपीएल 2025 मेगा ऑक्शन के पहले ही दिन इंडियन प्रीमियर लीग के ऑक्शन के सारे रिकॉर्ड टूट गए। आईपीएल 2025 मेगा ऑक्शन के पहले दिन के दूसरे खिलाड़ी श्रेयस अय्यर थे। आईपीएल 2024 के विजेता कप्तान श्रेयस अय्यर को कोलकाता नाइट राइडर्स ने रिटेन नहीं किया था। इसके बाद वे ऑक्शन में आए और वे आईपीएल के सबसे महंगे क्रिकेटर बन गए। आईपीएल 2025 मेगा ऑक्शन में उनके ऊपर धनवर्षा और वे ऑक्शन में सबसे महंगे खिलाड़ी के तौर पर मिचेल स्टार्क का रिकॉर्ड तोड़ दिया। उनको पंजाब किंग्स टीम ने 26.75 करोड़ रुपये में खरीदा। केकेआर को 2024 में उन्होंने ट्रॉफी जिताई थी। पिछले साल मिनी ऑक्शन में मिचेल स्टार्क को कोलकाता नाइट राइडर्स ने 24.75 करोड़ रुपये में खरीदा था। श्रेयस अय्यर को अब 26.75 करोड़ रुपये में पंजाब किंग्स ने खरीदा है। आखिर तक दिल्ली कैपिटल्स ने श्रेयस पर बोली लगाई, लेकिन पंजाब के पास पर्स ज्यादा है। ऐसे में उन्होंने श्रेयस अय्यर को चुना, जो कप्तानी भी करेंगे। वे दिल्ली कैपिटल्स की टीम की कप्तानी पहले कर चुके हैं और फाइनल तक का सफर तय करा चुके हैं। केकेआर को तो उन्होंने इसी साल चैंपियन बनाया है। ऐसे में ये अच्छी डील पीबीकेएस के लिए है। recent visitors 148

विधायक के स्वागत में गुलाल उड़ाया जा रहा था और इसी दौरान लगी आग, आसपास अफरा-तफरी मची, महिला और पाटिल घायल

कोल्हापुर महाराष्ट्र के पश्चिमी क्षेत्र के चांदगढ़ तालुक के महागांव में नवनिर्वाचित निर्दलीय विधायक शिवाजी पाटिल के स्वागत के दौरान एक दुर्घटना हो गई। दरअसल, विधायक के स्वागत में गुलाल उड़ाया जा रहा था और इसी दौरान आग लग गई। यह घटना तब हुई जब महिलाएं विधायक की आरती उतार रही थीं और उसी दौरान जेसीबी से गुलाल गिराया जा रहा था। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जब विधायक शिवाजी पाटिल की आरती उतारी जा रही थी, तभी एक जेसीबी मशीन से गुलाल को हवा में उड़ाया गया। लेकिन अचानक, गुलाल और आग के संपर्क में आने से आग लग गई, जिससे आसपास अफरा-तफरी मच गई। आग की चपेट में आकर कुछ महिलाएं और विधायक शिवाजी पाटिल घायल हो गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि घायलों को गंभीर चोट नहीं आई। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का रिजल्ट शनिवार को घोषित किया जा चुका है। जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बहुमत मिला है। वहीं, प्रदेश की चांदगढ़ सीट से निर्दलीय उम्मीदवार शिवाजी पाटिल ने जीत दर्ज की है। शिवाजी पाटिल ने अपनी प्रतिद्वंदी एनसीपी के राजेश पाटिल को 24,134 वोटों से हराया था। इस जीत के बाद उनका स्वागत धूमधाम से किया जा रहा था, इसी दौरान यह हादसा हुआ। राज्य की 288 विधानसभा सीटों के लिए 20 नवंबर को एक चरण में वोटिंग हुई थी। 23 नवंबर को वोटों की गिनती हुई। इस विधानसभा चुनाव में महायुति को बंपर जीत हासिल हुई। वहीं महाअघाड़ी को हार मिली। महायुति को कुल 236 सीटें मिलीं तो महाअघाड़ी के खाते में 48 गईं तो अन्य को महज 4 से संतोष करना पड़ा। recent visitors 88

एमपी में रामनिवास रावत लड़े थे उपचुनाव, मिली हार, अब दिया मंत्री पद से इस्तीफा, कतार में BJP के ये नेता शामिल

भोपाल मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार के वन मंत्री रामनिवास रावत ने उपचुनाव हारते ही मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. अब एक बार फिर मंत्री पद की दौड़ में शामिल कई विधायक सक्रिय हो गए हैं. हालांकि, जब तक किसी और के पास वन मंत्री का प्रभार नहीं जाता है, तब तक यह जिम्मेदारी भी मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के पास रहेगी. कांग्रेस से छह बार विधायक रहे रामनिवास रावत भारतीय जनता पार्टी में आते ही वन मंत्री बना दिए गए थे. अब उन्होंने उपचुनाव लड़ा था, जिसमें उनकी हार हो गई. जैसे ही चुनावी परिणाम सामने आया, वैसे ही वन मंत्री रामनिवास रावत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. वन मंत्री के  को लेकर बीजेपी में उस समय भी घमासान मच गया था, जब रामनिवास रावत को जिम्मेदारी मिली थी. मोहन मंत्रिमंडल में 30 मंत्री डॉक्टर मोहन यादव मंत्रिमंडल में वर्तमान में 31 मंत्री थे जबकि अब एक इस्तीफे के बाद मंत्रियों की संख्या 30 रह गई है. वन मंत्री के इस्तीफा देने के बाद उनका प्रभार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पास पहुंच गया है. अब जब नए वन मंत्री बनाए जाएंगे तब जिम्मेदारी मुख्यमंत्री से अलग हो पाएगी. डॉ मोहन यादव सरकार में दो उपमुख्यमंत्री, 18 कैबिनेट मंत्री, छह राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और चार राज्य मंत्री बनाए गए थे. मध्य प्रदेश विधानसभा सदस्यों की संख्या के मुताबिक, बीजेपी सरकार में 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जबकि वर्तमान में मंत्रियों की संख्या 31 थी. अब वन मंत्री के इस्तीफा देने के बाद मंत्रियों की संख्या 30 ही रह गई है. भारतीय जनता पार्टी के एक दर्जन से ज्यादा विधायक मंत्री पद की दौड़ में शामिल है. इनमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित सिंधिया गुट के विधायक भी शामिल है. इन पूर्व मंत्रियों के नाम पर चर्चा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी में संगठन तय करता है की जिम्मेदारी किसे दी जानी है. अभी तक मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर कोई भी जानकारी नहीं है. वैसे तो भारतीय जनता पार्टी में कई सीनियर विधायक मंत्री पद की दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं, लेकिन प्रमुख रूप से पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, संजय पाठक के नाम की चर्चा है. हालांकि, नागर सिंह चौहान को भी वन मंत्री का प्रभार वापस दिया जा सकता है. नागर सिंह चौहान से ही वन मंत्री का पद लेकर रामनिवास रावत को दिया गया था जिसके बाद नागर सिंह चौहान ने नाराजगी भी जताई थी. इसके अलावा देवास सहित कई ऐसे जिले भी हैं जहां पर सिंधिया गुट के विधायक मंत्री पद की दौड़ में शामिल है.   recent visitors 94

इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ी रफ्तार, आधे हिस्से में बिछाया गया ट्रैक

इंदौर. इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ ली है। टिही से गुणावद तक अर्थवर्क पूरा हो चुका है। वहीं गुणावद से धार के बीच अर्थवर्क का काम चल रहा है। रतलाम मंडल द्वारा प्रोजेक्ट के इस हिस्से को मार्च-2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन इस सेक्शन में बन रहे आरओबी निर्माण में हो रही देरी से मई-2025 तक यह सेक्शन ट्रेन संचालन के लिहाज से तैयार हो पाएगा। उल्लेखनीय है कि साल 2008 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का काम साल 2013 में शुरू हुआ था। वर्तमान में 205 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में अलग-अलग हिस्सों में काम चल रहा है। इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट (205 किमी) को इंदौर-टिही (29 किमी), टिही-गुणावद (28 किमी), गुणावद-नौगाव (14 किमी), धार-अमझेरा (20 किमी), अमझेरा-सरदारपुर (20 किमी), सरदारपुर-झाबुआ (60 किमी) अलग-अगल सेक्शन में बांटकर काम किया जा रहा है। करीब 60 फीसदी हिस्से में पटरी बिछाई गई इंदौर-टिही और दाहोद-कतवारा सेक्शन का काम पूरा हो चुका है। फिलहाल रेलवे टिही-गुणावद-नौगांव (धार) सेक्शन पर तेजी से काम कर रहा है। इस सेक्शन में नौ आरओबी बनने हैं। वर्तमान में टिही के पास टनल का काम तकरीबन पूरा होने को है। टिही से गुणावद तक अर्थवर्क पूरा हो चुका है। करीब 60 फीसदी हिस्से में पटरी भी बिछाई जा चुकी है। मार्च 2025 तक ट्रेन चलाने का लक्ष्य गुणावद रेलवे स्टेशन, यार्ड आदि का काम भी शुरू हो चुका है। वहीं गुणावद से नौगांव के बीच अर्थवर्क का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। रतलाम मंडल ने पूर्व में इंदौर-नौगांव के बीच मार्च-2025 तक ट्रेन संचालन का लक्ष्य रखा था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते यह काम मई-2025 तक पूरा होगा। इधर दाहोद के पास कतवारा से झाबुआ के बीच भी पटरी बिछाने का काम हो रहा है। पूरी परियोजना को 2026 तक पूरा करना है इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी अंचल को रेल सेवाओं से जोड़ेगा। इस लिहाज से यह परियोजना रेलवे के साथ गुजरात और मप्र राज्य के लिए भी काफी अहम है। इसलिए इसे अलग-अलग हिस्सों में बांटकर काम किया जा रहा है। परियोजना में सागौर, गुणावद, नौगांव, झाबुआ, पिटोल में नए रेलवे स्टेशन भवन, प्लेटफार्म आदि का निर्माण शुरू कर दिया है। पूरी परियोजना को 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। recent visitors 64

ईमानदार और साफ़ छवि है जिनकी पहचान, यह है MP पुलिस के नये कप्तान

भोपाल 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना को मध्यप्रदेश का नया डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) नियुक्त किया गया है। यह आदेश गृह विभाग ने शनिवार देर रात जारी किया। मकवाना 1 दिसंबर 2024 को पदभार ग्रहण करेंगे और वे 32वें डीजीपी के रूप में कार्यभार संभालेंगे। तेजतर्रार अफसरों में होती है मकवाना की गिनती कैलाश मकवाना वर्तमान में मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन हैं। शिवराज सरकार के दौरान मकवाना लोकायुक्त के डीजी भी रहे। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई अहम कदम उठाए और लंबित जांचों को तेज किया।   एसीआर विवाद के बाद सरकार ने लिया निर्णय मकवाना ने लोकायुक्त डीजी रहते हुए अपनी एसीआर (गोपनीय चरित्रावली) खराब किए जाने की शिकायत की थी। उन्होंने सरकार से अपील की थी कि उनकी एसीआर को दुरुस्त किया जाए। वरिष्ठ सचिवों की कमेटी ने नियुक्ति प्रक्रिया से कुछ महीने पहले उनकी एसीआर सुधार दी।   2026 तक रहेंगे डीजीपी जानकारी के अनुसार, नए डीजीपी कैलाश मकवाना का रिटारमेंट 2025 में है, लेकिन डीजीपी बनने के बाद उन्हें 2 साल का कार्यकाल मिलेगा। ऐसे में वह 30 November 2026 तक डीजीपी रहेंगे। 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं सुधीर कुमार   बीते दिनों दिल्ली में यूपीएससी के चेयरमैन की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के दो जॉइंट सेक्रेटरी के अलावा एमपी के मुख्य सचिव अनुराग जैन और मौजूदा डीजीपी सुधीर सक्सेना समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए थे। बैठक में भेजे गए 9 आईपीएस अधिकारियों में से तीन नामों के पैनल पर मोहर लगी थी। अब मुख्यमंत्री मोहन यादव इनमें से कैलाश मकवाना के नाम पर मोहर लगा दी है। आपको बता दें कि मौजूदा डीजीपी सुधीर सक्सेना 30 नवंबर 2024 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सक्सेना को 4 मार्च 2020 को डीजीपी नियुक्त किया गया था। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद कैलाश मकवाना इस पद को संभालेंगे। ये तीन नाम किए गए थे तय नए DGP के पद के लिए यूपीएससी ने तीन नामों के पैनल पर मोहर लगाई थी। ये तीन नाम 1988 बैच के आईपीएस अफसर अरविंद कुमार (DG होमगार्ड), कैलाश मकवाना (पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन) और 1999 बैच के अजय शर्मा (DG EOW)  थे।   ऐसे हैं MP पुलिस के नए मुखिया मकवाना 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना को मध्यप्रदेश का नया डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विदेश यात्रा पर रवाना होने से पहले उनके नाम को मंजूरी दी। मकवाना अपने तेजतर्रार और बेदाग छवि के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। वह भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए भी जाने जाते हैं। उज्जैन के रहने वाले हैं मकवाना जानकारी के अनुसार, कैलाश मकवाना मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के रहने वाले हैं। मकवाना ने भोपाल स्थित मैनिट (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) से पढ़ाई की है। वे पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन के साथ-साथ लोकायुक्त संगठन में डीजी और स्पेशल डीजी (सीआईडी और इंटेलिजेंस) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।   ईमानदार और साफ छवि वाले अधिकारी मकवाना को उनकी ईमानदार और साफ छवि के लिए जाना जाता है। एक कर्मठ और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में, उनकी नियुक्ति से राज्य की कानून व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। कैलाश मकवाना ने पुलिस सेवा में अपने शुरुआती कार्यकाल में विभिन्न जिलों में एसपी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उनकी कड़ी मेहनत और ईमानदारी ने उन्हें तेजी से पहचान दिलाई।   लोकायुक्त में डीजी शिवराज सिंह चौहान सरकार के कार्यकाल में मकवाना को लोकायुक्त संगठन में पुलिस महानिदेशक (डीजी) नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों को तेज किया और कई लंबित मामलों की जांच फिर से शुरू की। हालांकि, वे इस पद पर केवल छह महीने तक रहे। लोकायुक्त के डीजी रहते हुए उन्होंने कई लंबित जांच फाइलों को फिर से खोला और उन पर तेजी से कार्रवाई शुरू की। एनके गुप्ता से विवाद आया था चर्चा में 2022 में कैलाश मकवाना को लोकायुक्त का डीजी बनाया गया था, लेकिन 6 माह के अंदर उन्हें पद से हटाकर मप्र पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन का चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया। बताया जा रहा था कि मकवाना और लोकायुक्त जस्टिस रहे एनके गुप्ता के बीच कई विषयों को लेकर मतभेद थे, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया था। एसीआर विवाद मकवाना ने लोकायुक्त डीजी रहते हुए अपनी एसीआर (गोपनीय चरित्रावली) खराब किए जाने की शिकायत की थी। उन्होंने सरकार से अपील की थी कि उनकी एसीआर को दुरुस्त किया जाए। वरिष्ठ सचिवों की कमेटी ने नियुक्ति प्रक्रिया से कुछ महीने पहले उनकी एसीआर सुधार दी। पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन वर्तमान में, मकवाना मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन के पद पर हैं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने पुलिस आवासीय योजनाओं और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए काम किया।   साढ़े तीन साल में हुए सात बार तबादले कैलाश मकवाना का करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साढ़े तीन साल के भीतर उनका सात बार तबादला हुआ। खासकर, कमलनाथ सरकार के दौरान तीन बार उनकी पोस्टिंग बदली गई।  उनके करियर में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण साढ़े तीन वर्षों में सात बार स्थानांतरण हुआ। इसके बावजूद वे अपने कार्यों में प्रतिबद्ध रहे। recent visitors 72

डीजीपी सुधीर सक्सेना के बाद पद की कमान संभालेंगे कैलाश मकवाना, बने मध्य प्रदेश के नए DGP

भोपाल मध्य प्रदेश डीजीपी के पद पर नए आईपीएस अफसर की नियुक्ति हुई है. सीनियर आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना को डीजीपी नियुक्त किया गया है. मौजूदा डीजीपी सुधीर सक्सेना 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं, जिसके बाद पद की कमान कैलाश मकवाना संभालेंगे. बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के विदेश जाते ही गृह विभाग ने नए डीजीपी की नियुक्ति का आदेश जारी किया है. शनिवार की देर रात यह आदेश जारी किया गया है. आईपीएस कैलाश मकवाना 1 दिसंबर 2024 को प्रदेश के डीजीपी के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे. मकवाना की तेज तर्रार IPS में होती है गिनती 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना वर्तमान में मध्य प्रदेश हाउसिंग कारपोरेशन के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत है. मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव एसएन शर्मा ने बताया कि 1 दिसंबर से मध्य प्रदेश के नए पुलिस मुखिया के रूप में आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यभार संभालेंगे. नए डीजीपी कैलाश मकवाना पूर्व में मुरैना, जबलपुर, मंदसौर, बैतूल आदि जिलों में सेवाएं दे चुके हैं. मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ अलग होने से पहले कैलाश मकवाना मंदसौर, बस्तर, बैतूल और दंतेवाड़ा जैसे जिलों के एसपी भी रह चुके हैं.उनकी नियुक्ति डीआईजी इंटेलिजेंस के पद पर भी हुई थी. वे सीआईडी इंटेलीजेंस में एडीजी के पद पर भी रह चुके है. उनकी गिनती मध्य प्रदेश के तेज तर्रार आईपीएस अधिकारियों में होती है. शिवराज सरकार में भी कैलाश मकवाना कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके हैं. 2 आईपीएस थे डीजीपी की दौड़ में शामिल पुलिस महानिदेशक पद की दौड़ में दो और आईपीएस शामिल थे लेकिन आधी रात को जारी हुए आदेश स्पष्ट रूप से स्थिति साफ हो गई कि अब 1 दिसंबर 2024 से आईपीएस कैलाश मकवाना मध्य प्रदेश की कमान संभालेंगे. वे मध्य प्रदेश के 32 वें डीजीपी के रूप में कार्यभार संभालने वाले हैं. recent visitors 142