अमेरिका का कर्ज रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जीडीपी का करीब 125% पहुंचा कर्ज

नई दिल्ली. डॉनल्ड ट्रंप के दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से पहले ही देश का कर्ज रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका का कर्ज 36 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है। इस साल इसमें दो ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। पिछले 316 दिन में अमेरिका के कर्ज में रोजाना 6.3 अरब डॉलर यानी करीब 5,31,94,85,78,490 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि अमेरिका के हर नागरिक पर 108,000 डॉलर का कर्ज है। जीडीपी के परसेंटेज के रूप में डेफिसिट स्पेंडिंग दूसरे विश्व युद्ध के स्तर पर पहुंच चुका है। कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से अमेरिका के कर्ज में करीब 16 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। अमेरिका के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि सरकार को इतना कर्ज लेना पड़ा है। अमेरिका का कर्ज पिछले 24 साल में छह गुना बढ़ा है। साल 2000 में अमेरिका पर 5.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था। साल 2010 में यह 12.3 ट्रिलियन डॉलर और 2020 में 23.2 ट्रिलियन डॉलर था। यूएस कांग्रेस के बजट दस्तावेजों के मुताबिक अगले दशक तक देश का कर्ज 54 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है। देश का कर्ज जीडीपी का करीब 125% है। स्थिति यह हो गई है कि अमेरिका को रोज 1.8 अरब डॉलर से ज्यादा ब्याज के भुगतान में खर्च करने पड़ रहे हैं। साफ है कि सरकार की कमाई कम हो रही है और खर्च बढ़ गया है। क्या होगा असर? जानकारों का कहना है कि यह देश की इकॉनमी और नेशनल सिक्योरिटी के लिए अच्छी बात नहीं है। माना जा रहा है कि अगले कुछ साल में अमेरिका का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 200% तक पहुंच सकता है। मतलब देश का कर्ज इकॉनमी से दोगुना पहुंच जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो कर्ज चुकाते-चुकाते ही अमेरिका की इकॉनमी का दम निकल जाएगा। इससे सरकार को रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा पर होने वाले कुल खर्च से ज्यादा पैसा ब्याज चुकाने में देना होगा। चिंता की बात यह है कि अमेरिका का कर्ज ऐसे समय बढ़ रहा है जब देश की इकॉनमी अच्छी स्थिति में है। अमूमन जब इकॉनमी में कमजोरी आती है तो सरकार खर्च बढ़ाती है ताकि ग्रोथ को हवा दी जा सके। बढ़ते कर्ज से देश में एक बार फिर शटडाउन की नौबत आ सकती है। कर्ज को लेकर अक्सर दोनों पक्षों यानी रिपलिकन्स और डेमोक्रेट्स में विवाद रहता है। मगर सच्चाई यह है कि दोनों दलों के कार्यकाल में देश का कर्ज बढ़ा है। देश की क्रेडिट रेटिंग पर भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है। पिछले साल अगस्त में फिच ने अमेरिका के सॉवरेन डेट की रेटिंग AA+ से घटाकर AAA कर दी थी। मूडीज ने भी चेतावनी दी थी कि वह अमेरिका की AAA में कटौती कर सकती है। पिछले साल जून में अमेरिका पहली बार डिफॉल्ट की दहलीज पर पहुंच गया था और एक बार फिर यह स्थिति बन रही है। कैसे घटेगा खर्च? ट्रंप ने सरकारी खर्चों में कटौती करने और सरकार की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए एक नया विभाग डिपार्टमेंट ऑफ गवर्मेंट एफिशिएंसी बनाने की घोषणा की है। इसकी कमान दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क और विवेक रामास्वामी को दी गई है। मस्क ने ट्रंप के लिए चुनाव प्रचार करते हुए कहा था कि वह सरकारी बजट में अरबों डॉलर की बचत कर सकते हैं। उन्होंने सरकारी खर्च में कटौती की बात कही है। इसमें पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग और गर्भपात अधिकार समूहों को दी जाने वाली राशि शामिल है।   recent visitors 196

RDA ने दिया ऑफर, 50 प्रतिशत छूट पर फ्लैट्स, 30 प्रतिशत पर मिलेंगी दुकान

रायपुर. रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने मध्यवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए बकाया राशि के भुगतान पर शानदार छूट का प्रस्ताव रखा है। अब यदि बकायादार एकमुश्त भुगतान करते हैं, तो उन्हें आवासीय योजनाओं में 50% और व्यावसायिक योजनाओं में 30% की विशेष छूट मिलेगी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाले फ्लैट्स पर रखरखाव और जलकर के सरचार्ज की राशि पर 100% छूट भी दी जाएगी। यह ऑफर 31 मार्च 2025 तक वैध रहेगा। इस अहम फैसले का निर्णय आवास व पर्यावरण सचिव और रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अंकित आनंद की अध्यक्षता में आयोजित संचालक मंडल की बैठक में लिया गया। बैठक में रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रतीक जैन, वित्त विभाग की विशेष सचिव शीतल सारस्वत, नगर और ग्राम निवेश संचालनालय के अपर संचालक संदीप बागंडे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। निरस्त फ्लैट्स की बहाली: पुराने आवंटियों को मिलेगी दूसरी मौका संचालक मंडल की बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि 2007 में न्यूनतम आय वर्ग के लिए आवंटित किए गए फ्लैट्स, जो बाद में निरस्त कर दिए गए थे, अब उन्हें पुनः मूल आवंटियों को बहाल किया जाएगा। इस योजना के तहत, जिन फ्लैट्स की बकाया राशि लंबित है, उनके आवंटन को बहाल करने के लिए बकाया राशि पर 12% सरचार्ज के साथ एकमुश्त भुगतान करने पर फ्लैट्स पुनः आवंटित किए जाएंगे। नया कदम: हस्त शिल्प बोर्ड का मुख्यालय न्यू राजेंद्र नगर जाएगा संचालक मंडल की बैठक में यह भी तय किया गया कि छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड का मुख्यालय अब न्यू राजेंद्र नगर स्थित गोविंद सारंग व्यावसायिक परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा। इस नए मुख्यालय के लिए 21,847 वर्गफुट का कार्यालय भवन मासिक किराए पर लिया जाएगा, जो केंद्रीय माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के आर्बिट्रेशन बैंच और आर्बीट्रेशन सेल के कार्यालय के रूप में कार्य करेगा। साथ ही, देवेंद्रनगर पीएम एकता माल बनने के कारण, हस्तशिल्प बोर्ड के मुख्यालय को न्यू राजेंद्र नगर के भक्त माता कर्मा व्यावसायिक परिसर और गोविंद सारंग परिसर के दूसरे तल पर आवंटित किया जाएगा। इसके तहत कुल 4,781 वर्गफुट का क्षेत्र मासिक किराए पर लिया जाएगा। recent visitors 62

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव आज से 30 नवंबर तक छह दिवसीय विदेश दौरे पर जाएंगे, MP में निवेशकों को करेंगे आमंत्रित

भोपाल फरवरी-2025 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों को आमंत्रित करने और निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव रविवार 24 नवंबर से 30 नवंबर तक छह दिवसीय विदेश दौरे पर जाएंगे। उनके साथ उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारी भी रहेंगे। सीएम के दौरे की शुरुआत लंदन से होगी। यहां से 27 नवंबर को जर्मनी पहुंचकर निवेशकों से चर्चा करेंगे। विदेश यात्रा के दौरान तीन दिन यूनाइटेड किंगडम (यूके) के लंदन, बर्मिंघम और दो दिन जर्मनी के म्यूनिख और स्टटगार्ट शहर का दौरा करेंगे। इन स्थानों पर वह औद्योगिक सहयोग के प्रतिनिधियों और उद्योगपतियों से चर्चा करेंगे। 25 को वेस्टमिंस्टर में ब्रिटिश संसद का दौरा मुख्यमंत्री 25 नवंबर को वेस्टमिंस्टर स्थित ब्रिटिश संसद, किंग्स क्रास और पुनर्विकास स्थलों का दौरा करेंगे। लंदन में फ्रेंड्स आफ मध्य प्रदेश (प्रवासी भारतीयों) द्वारा आयोजित रात्रि-भोज कार्यक्रम में शामिल होंगे। 26 नवंबर को उद्योगपतियों एवं भारत के उच्चायुक्त विक्रम के दोरईस्वामी से संवाद करेंगे। इन्वेस्टमेंट अपार्चुनिटीज इन मध्य प्रदेश, इंटरैक्टिव सेशन में लगभग 120 प्रतिभागियों से चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री राउंट टेबल मीटिंग्स में इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं आटो, एजुकेशन, रिन्युएबल एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर्स में निवेश पर चर्चा करेंगे। उद्योगतियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग भी करेंगे। 27 नवंबर को वारविक यूनिवर्सिटी का भ्रमण करने के बाद वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप के डीन, फैकल्टी मेंबर्स और शोधार्थियों से संवाद करेंगे। इसके म्यूनिख पहुंचेंगे। दो दिन जर्मनी में तलाशेंगे निवेश की संभावनाएं मुख्यमंत्री 28 और 29 नवंबर को जर्मनी प्रवास पर रहेंगे। म्यूनिख और स्टटगार्ट में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। पहली सुबह बवेरिया राज्य सरकार के नेताओं और म्यूनिख में कौंसुल जनरल आफ इंडिया से चर्चा करेंगे। एसएफसी एनर्जी का भ्रमण करेंगे। बेयरलोचर ग्रुप द्वारा आयोजित भोज में शामिल होंगे।एक सत्र में काउंसिल जनरल आफ इंडिया, सीआईआई और इंवेस्ट इंडिया, इंडो जर्मन चैंबर आफ कामर्स के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। फ्रेंड्स आफ एमपी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे, रात्रि भोज काउंसिल जनरल आफ इंडिया द्वारा आयोजित रात्रि भोज में शामिल होंगे। 29 नवंबर को स्टटगार्ट स्थित लेप्प ग्रुप की फैक्ट्री का दौरा करेंगे और अधिकारियों से निवेश संबंधी चर्चा करेंगे। उद्योग प्रतिनिधियों से राउंडटेबल मीटिंग होगी, जिसमें लगभग 20 प्रतिनिधि शामिल होंगे। स्टटगार्ट के स्टेट म्यूजियम आफ नेचुरल हिस्ट्री का भ्रमण भी करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री फ्रैंकफर्ट के लिए रवाना होंगे। फ्रैंकफर्ट से नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। recent visitors 38

संभल जामा मस्जिद का मामला, दोबारा सर्वे हुआ बवाल, पथराव में SP के PRO हुए घायल

संभल. यूपी के संभल में ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा किए जाने के बाद आज यहां दोबारा करीब दो घंटे तक सर्वे किया गया। सुबह-सुबह सर्वे टीम जामा मस्जिद पर पहुंची। मस्जिद के दोबारा सर्वे के बारे में पता चलते ही मस्जिद के पीछे बड़ी संख्‍या में मुस्लिम समाज के लोगों की भीड़ जुट गई। भीड़ ने जमकर हंगामा मचाया और फिर पथराव शुरू कर दिया। पत्‍थर लगने से एसपी के पीआरओ घायल हो गए। भीड़ ने प्रशासन की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। पुलिस ने हल्‍का बल प्रयोग कर स्थिति को काबू में कर लिया है। मौके पर आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े। कई लोग हिरासत में लिए गए हैं। इसके पहले 19 नवम्‍बर को मस्जिद का सर्वे किया गया था। संभल जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर विवाद मामले की अगली सुनवाई 29 नवम्‍बर को होनी है जिसमें प्रारंभिक सर्वे की रिपोर्ट पेश की जानी है। मस्जिद के चारों ओर बैरियर लगाकर पुलिस ने पूरा इलाका सील कर दिया है। मस्जिद के पीछे अब भी भारी भीड़ जुटी है। मौके पर डीएम डा.राजेन्‍द्र पैंसिया, एसपी कृष्‍ण कुमार विश्‍नोई और एडीएम सहित जिले के सभी बड़े अफसर मौजूद हैं। अंदर कोर्ट कमिश्‍नर रमेश राधव की अगुवाई में सुबह साढ़े सात बजे से करीब दो घंटे तक सर्वे का काम चला। सर्वे के बाद टीम यहां से निकल गई है। उधर, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। उधर जामा मस्जिद की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। हालात को देखते हुए शनिवार को ही मस्जिद परिसर के दोनों ओर चार-चार सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर ने बताया कि सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है। सभी कैमरों की रिकॉर्डिंग कोतवाली में स्थापित डीवीआर से जुड़ी हुई है। वहां से इन कैमरों की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जाएगी। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस पूरी तरह से सतर्क है। मस्जिद को लेकर हाल में किए गए दावे और सर्वे के बाद स्थानीय प्रशासन ने मस्जिद की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कदम उठाए हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि क्षेत्र में किसी तरह का तनाव न बढ़े और शांति व्यवस्था बनी रहे। इसके लिए पुलिस ने क्षेत्र में पेट्रोलिंग भी तेज कर दी है। उधर, कैला देवी मंदिर के महंत ऋषि राज गिरी ने कहा है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महंत ऋषि राज गिरी ने दावा किया कि वर्तमान जामा मस्जिद की जगह कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था। इसे साबित करने के लिए उन्होंने सिविल कोर्ट में वाद दायर किया है। उनका कहना है कि उनके पास इस ऐतिहासिक तथ्य को प्रमाणित करने के लिए ठोस साक्ष्य और हजारों सनातनी गवाह हैं। महंत ने कहा यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और इतिहास का प्रतीक है। इस स्थल का सच सामने लाना हर सनातनी का कर्तव्य है। सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने जामा मस्जिद पर वाद दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं को शरारती तत्व कहा था, जिस पर महंत ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे बयान केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत के इतिहास और भूगोल से अनजान हैं, वे धार्मिक स्थलों पर राजनीति करने का प्रयास कर रहे हैं। महंत ने न्यायालय से अपील की है कि जामा मस्जिद की ऐतिहासिकता की जांच पूरी होने तक वहां नमाज पढ़ने पर रोक लगाई जाए। डीजीपी बोले-पथराव करने वालों की पहचान कर ऐक्‍शन लेगी पुलिस संभल में पथराव की घटना पर डीजीपी यूपी प्रशांत कुमार ने एएनआई से कहा कि कोर्ट के आदेश पर संभल में सर्वे कराया जा रहा है। कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव किया है। पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। स्थिति नियंत्रण में है। पुलिस, पथराव करने वालों की पहचान करेगी और उचित कानूनी कार्रवाई करेगी। recent visitors 42

पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की पदयात्रा श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह, विदेशों से‌ भी आ रहे भक्त

छतरपुर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री इन दिनों 'हिंदू जोड़ो पदयात्रा' काफी सुर्खियों में है. इस दौरान बागेश्वर धाम आश्रम का दावा है कि यात्रा में शामिल होने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुयायी आ रहे हैं. खास तौर पर विदेश में भी हिंदू धर्म के प्रति जो आस्था बढ़ी है, वह यात्रा में शामिल होने वाले लोगों में साफ देखी जा सकती है. जाहिर है कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों को जोड़ने के लिए यात्रा निकाल रहे हैं. इस यात्रा में बड़ी संख्या में नेता से लेकर अभिनेता शामिल हो रहे हैं. दूसरी तरफ बागेश्वर धाम आश्रम ने एक दावा किया है कि हिंदू जोड़ो यात्रा में शामिल होने के लिए विदेश से भी लोग आ रहे हैं. बागेश्वर धाम आश्रम में ऑस्ट्रेलिया से आधा दर्जन से ज्यादा लोगों पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू सनातन यात्रा में शामिल होने के लिए आ रहे हैं. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में विदेशी अनुयायी है. ऐसे में हिंदू जोड़ो यात्रा का प्रचार विदेश तक भी पहुंच गया है. पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने दिया नया नारा पर्चियों के माध्यम से लोगों की समस्या का हल करने वाले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री यात्रा के दौरान रोज नया नारा दे रहे हैं. उन्होंने यात्रा के दौरान नारा देते हुए कहा कि, "मैं हिंदू हूं, मैं हिंदू हूं और मैं हिंदुस्तान हूं." धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हिंदुओं को एक करने के लिए लंबे समय से भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग कर रहे हैं. यात्रा में राजनेता भी शामिल पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के द्वारा छतरपुर से ओरछा तक निकाली जा रही यात्रा में बड़ी संख्या में राजनेता शामिल हो रहे हैं. इस यात्रा में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता भी लगातार यात्रा में शामिल हो रहे हैं. इस वजह से भी ये यात्रा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. recent visitors 60

‘गाजा में मौतों का आंकड़ा 44 हजार के पार’, इस्राइल-हमास जंग पर फलस्तीनी अधिकारी का दावा

 गाजा  गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध में गाजा पट्टी में मरने वालों की संख्या 44,000 से अधिक हो गई है। बता दें कि 13 महीने से ज्यादा वक्त से जारी युद्ध के दौरान मारे गए लोगों में गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय लड़ाकों और नागरिकों के बीच अंतर नहीं करता है, उसक कहना है कि हताहतों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं। एक लाख से ज्यादा लोग घायल- गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय इधर इस्राइली सेना का कहना है कि उसने बिना सबूत दिए 17,000 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से 44,056 लोग मारे गए हैं और 104,268 घायल हुए हैं। हालांकि मंत्रालय का ये भी दावा है कि वास्तविक संख्या अधिक है क्योंकि हजारों शव मलबे के नीचे या ऐसे क्षेत्रों में दबे हुए हैं जहां चिकित्सक और चिकित्सीय सुविधाएं नहीं पहुंच सकती हैं। नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने गुरुवार को इस युद्ध के लिए इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलंट और हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद डेफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. ICC ने इन्हें युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना है. कोर्ट ने नेतन्याहू के खिलाफ आरोपों की जांच का भी आदेश दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ICC ने कहा कि नेतन्याहू और इजराइल के रक्षा मंत्री ने जानबूझकर फिलिस्तीनी नागरिकों को मारने के आदेश दिए. साथ ही, गाजा में अंतरराष्ट्रीय मानवीय मदद पहुंचने से रोकने के लिए कदम उठाए, जिससे वहां भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हुई. हमास के हमले से शुरू हुआ युद्ध यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ, जब हमास के आतंकवादियों ने दक्षिणी इजराइल पर हमला किया. इस हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए और 250 लोगों का अपहरण कर लिया गया. इनमें से करीब 100 लोग अब भी गाजा में बंधक हैं. रिपोर्ट के अनुसार इनमें से एक-तिहाई की मौत हो चुकी है. 7 अक्तूबर 2023 को शुरू हुआ था युद्ध इस्राइल और हमास में युद्ध तब शुरू हुआ जब 7 अक्तूबर, 2023 को हमास के लड़ाकों ने दक्षिणी इस्राइल में धावा बोल दिया, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे, और 250 अन्य का अपहरण कर लिया गया। एक जानकारी के अनुसार, लगभग 100 बंधक अभी भी गाजा के अंदर हैं, जिनमें से कम से कम एक तिहाई के मारे जाने का अनुमान है। बाकी में से ज्यादातर को पिछले साल संघर्ष विराम के दौरान रिहा कर दिया गया था। अचानक गाजा के दौरे पर पहुंचे थे पीएम बेंजामिन नेतन्याहू वहीं इससे दो दिन पहले 19 नवंबर को इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अचानक गाजा के दौरे पर पहुंचे थे। गाजा से एक वीडियो संदेश जारी करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि हमास अब कभी भी गाजा पर फिर से शासन नहीं कर सकेगा। नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइली सशस्त्र बलों ने हमास को पूरी तरह से तबाह कर दिया है, इस दौरान उन्होंने बंधकों को छुड़ाने की बात भी कही। इस वीडियो में नेतन्याहू बैलिस्टिक हेलमेट और युद्ध की वर्दी पहने दिखाई दिए थे।   recent visitors 75

बारिश की कमी ने दिल्ली में प्रदूषण संकट को बढ़ा, वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है: CAQM

नई दिल्ली दिल्ली एक बार फिर गंभीर प्रदूषण स्तर से जूझ रही है, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता खतरनाक श्रेणी में पहुंच गई है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को प्रदूषण की निगरानी करने और विभिन्न राज्यों को उचित उपाय करने के लिए मार्गदर्शन देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. वायु प्रदूषण का मुख्य कारण पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली को माना जाता है, लेकिन इस साल पराली जलाने पर रोक लगाने के बावजूद भी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इस साल रिकॉर्ड तोड़ रहा है. प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि के लिए CAQM द्वारा पहचाने गए प्रमुख कारकों में से एक नवंबर में देखा गया असामान्य मौसम पैटर्न है. इंडिया टुडे से खास बातचीत में, आयोग के एक तकनीकी सदस्य एसडी अत्री ने बताया कि पिछले साल नवंबर में घने कोहरे ने मौसमी गतिविधियों को काफी हद तक बदल दिया है. घना कोहरा, जो पहले इस अवधि में असामान्य था ने वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण का संकट बढ़ गया है. दिल्ली में क्यों घुट रहा है लोगों का दम? पिछले दो हफ़्तों में बढ़े प्रदूषण स्तर ने आयोग के लिए काफी चिंता पैदा कर दी है. जिससे मौसम की स्थिति पर फिर से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है क्योंकि यह एक प्रमुख कारक है. एसडी अत्री ने बताया कि पिछले 20 साल में औसतन नवंबर में आधे दिन तक घना कोहरा दर्ज किया जाता था. हालांकि, इस साल लगातार और तीव्र धुंध ने स्थिति को जटिल बना दिया है, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ी समस्या है. हाल के वर्षों में वैश्विक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां दुनिया भर के शहरी वातावरण में तेजी से देखने को मिल रही हैं. कई दशकों से भारतीय मौसम विभाग से जुड़े एक अनुभवी विशेषज्ञ अत्रेय ने बताया कि कैसे ये वैश्विक घटनाएं दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण स्तर में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. बारिश की कमी के कारण भी बढ़ा प्रदूषण आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर के महीनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण भारत के मैदानी इलाकों में बारिश होती है. हालांकि, इस साल बारिश नहीं हुई है. बारिश ना होने से एक प्राकृतिक तंत्र को नष्ट हो गया है, जो आमतौर पर प्रदूषकों को फैलाने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है. बारिश की कमी ने दिल्ली में प्रदूषण संकट को बढ़ा दिया है, जहां वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है. इंडिया टुडे से बातचीत में अत्री ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सामने प्रदूषण के स्तर की निगरानी और नियंत्रण में आने वाली चुनौतियों पर जोर दिया. हालांकि, आयोग स्थिति पर कड़ी नज़र रखता है, लेकिन मौसम और वायुमंडलीय कारकों को नियंत्रित करना लगभग असंभव है. ये कारक प्रदूषकों के फैलाव और सांद्रता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हवा की गति से लेकर हवा की दिशा तक हर तत्व इस बात को प्रभावित करता है कि प्रदूषक दिल्ली में कैसे पहुंचते हैं और कैसे बसते हैं. दुर्भाग्य से पिछले दो हफ़्तों में ये कारक अनुकूल नहीं रहे हैं, जिससे हवा में स्थिरता बनी हुई है और प्रदूषण में वृद्धि हुई है. सीएक्यूएम द्वारा दी गई जानकारी दिल्ली और इसी तरह के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को संबोधित करने की जटिलता को रेखांकित करती है. चूंकि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन मौसम के पैटर्न को बदलना जारी रखते हैं इसलिए नीति निर्माताओं के लिए वायु गुणवत्ता को प्रबंधित करने के लिए समाधान तैयार करते समय इन कारकों पर विचार करना अनिवार्य है. इन वैश्विक मुद्दों से उत्पन्न प्रदूषण चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों में जलवायु लचीलापन शामिल होना चाहिए.   recent visitors 66