भोपाल में मनाया गया एनसीसी का 76वां स्थापना दिवस

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि भारत को शक्तिशाली राष्ट्र बनाने में नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। एनसीसी संगठन स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों और युवाओं को अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बनाने का लगातार काम कर रहा है। एनसीसी ने विद्यार्थियों के मन में राष्ट्रीय एकता, अखण्डता, साम्प्रदायिक सौहार्द, समाज सेवा, अनुशासन के साथ देशभक्ति के संस्कार विकसित किये हैं। मंत्री सिंह आज भोपाल के शौर्य स्मारक में एनसीसी के 76वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि देश में उच्च पदों पर अनेक विभूतियां हैं, जो देश निर्माण में अपना योगदान दे रही हैं। इन सबका संबंध अपने युवा काल में एनसीसी से रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्कूल शिक्षा के दौरान एनसीसी से जुड़े रहे। एनसीसी के आयोजन 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत करने में अहम कार्य कर रही है। एनसीसी से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़कर हम प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने को पूरा कर सकते हैं। एनसीसी के अपर महानिदेशक मेजर जनरल विक्रांत एम दुमने ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि भारत में एनसीसी का गठन 1948 में हो गया था। एनसीसी हमारे देश की वह संस्था है, जो समाज को एक सकारात्मक दिशा देने में भरपूर योगदान कर रही है। एनसीसी विद्यार्थियों में नेतृत्व की क्षमता विकसित करने और सामाजिक सेवा की भावना को मजबूत करने का भी लगातार काम कर रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की हुई प्रस्तुतियां एनसीसी के स्थापना दिवस पर कैडेटस् ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ अंचल की जनजातीय लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां दी। भोपाल के कॉर्मेल कान्वेन्ट की छात्राओं ने अनुशासित तरीके से ब्रास बैण्ड पर मधुर ध्वनि प्रस्तुत की। इसी के साथ कैडेटस् ने एनसीसी गान और राष्ट्रगान भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समापन पर डिप्टी डायरेक्टर जनरल मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ ब्रिगेडियर रजनीश सिंह गौर ने बताया कि प्रदेश में युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिये कैडेट ट्रेनिंग अकादमी की स्थापना प्रस्तावित है। वहां भूमि आवंटित हो गयी है। शीघ्र ही वहां भवन निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा। इसके साथ ही कैडेटस् के स्वल्पाहार भत्ता और कैम्प में शामिल कैडेटस् के आवासीय भत्ते में भी वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में एनसीसी कैडेटस् की संख्या को बढ़ाने के प्रयास लगातार किये जा रहे हैं। इस मौके पर एनसीसी कैडेटस् ने शिविर में रक्तदान किया।   recent visitors 75

PM Modi को Dominica के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया

नईदिल्ली पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) डोमिनिका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी को कैरेबियाई देश डोमिनिका ने ‘द डोमिनिका अवॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया है। राष्ट्रपति सिल्वेनी बर्टन (Sylvanie Burton) ने पीएम मोदी को इस सम्मान से नवाजा। डोमिनिका ने पीएम मोदी को कोविड काल में किए गए उनके कार्यों के लिए अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया है। अवार्ड मिलने के बाद नरेंद्र मोदी ने कहा, “डोमिनिका द्वारा सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मैं इसे भारत के 140 करोड़ लोगों को समर्पित करता हूं। कोविड-19 महामारी के दौरान फरवरी 2021 में पीएम ने डोमिनिका को कोरोना वैक्सीन एस्ट्राजेनेका की 70 हजार डोज की आपूर्ति की थी। पीएम की इसी उदारता को देखते हुए डोमिनिका की सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने का फैसला किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति बर्टन, आप मुझे यह पुरस्कार देने के लिए व्यक्तिगत रूप से गुयाना आई हैं। मैं इस विशेष भाव के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। भारत और डोमिनिका दो लोकतंत्र हैं। इसके साथ ही, हम पूरी दुनिया के लिए महिला सशक्तिकरण के आदर्श हैं, दोनों देशों में महिला राष्ट्रपति हैं। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं। इसी तरह, राष्ट्रपति बर्टन भी डोमिनिका की पहली स्वदेशी राष्ट्रपति हैं। उन्होंने आगे कहा कि आप दोनों दुनिया की सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। भारत और डोमिनिका के बीच सदियों पुराने, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। 19वीं शताब्दी में, कई भारतीयों ने डोमिनिका को अपना घर बनाया। उनके द्वारा रखी गई नींव हमारे संबंधों को एक मजबूत आधार प्रदान करती है। प्रधानमंत्री के अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की कुल संख्या 19 पहुंची बता दें कि प्रधानमंत्री को गुयाना और बारबाडोस से भी टॉप अवार्ड मिलेंगे, जिससे उनके अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की कुल संख्या 19 हो जाएगी। गुयाना, प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘द ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस’ देगा, जबकि बारबाडोस उन्हें प्रतिष्ठित ‘ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस’ से सम्मानित करेगा। गुयाना दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी इसके अलावा दो दिवसीय गुयाना यात्रा में PM मोदी ने कैरेबियाई देशों के प्रतिनिधियों के साथ दूसरे इंडिया-कैरिकॉम समिट में भी हिस्सा लिया।समिट के इतर PM ने कैरेबियाई देशों के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय चर्चाएं की। गुयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान के अलावा PM मोदी ने डोमिनिका के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट और सूरीनाम के राष्ट्रपति चान संतोखी से औपचारिक बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) गुयाना दौरे पर हैं. जॉर्जटाउन पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें उनके प्रभावशाली नेतृत्व और विकासशील दुनिया में योगदान के लिए ‘नेताओं के बीच चैंपियन’ कहा। recent visitors 73

सिंहस्थ के पहले इंदौर-उज्जैन के बीच मिल सकती है मेट्रो की सौगात, 3 साल में पूरा हो जाएगा प्रोजेक्ट

इंदौर/उज्जैन दि सब ठीक रहा और अगले साल मार्च-अप्रैल तक मंजूरी मिल गई तो सिंहस्थ (2028) से पहले इंदौर और उज्जैन के बीच मेट्रो दौड़ने लगेगी। फिलहाल डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बनाई जा रही है। मेट्रो अफसरों की माने तो दिसंबर तक रिपोर्ट बनकर तैयार हो जाएगी। इंदौर-उज्जैन के बीच प्रस्तावित मेट्रो के लिए दिल्ली मेट्रो डीपीआर बना रहा है। फिजिबिलिटी स्टडी पहले ही हो चुकी है। डीपीआर में ही लागत, स्टेशनों की संख्या तय होगी। इंदौर-उज्जैन के बीच सड़क मार्ग की दूरी करीब 55 Km है। इसके आसपास से ही मेट्रो गुजर सकती है। दिल्ली मेट्रो ने ही की थी फिजिबिलिटी स्टडी इंदौर-उज्जैन के बीच मेट्रो चलाने के लिए साल 2022-23 में फिजिबिलिटी स्टडी दिल्ली मेट्रो ने ही की थी, जो सरकार को सौंपी गई थी। दिल्ली मेट्रो ने यह स्टडी की थी। अब वही डीपीआर भी बना रहा है। डीपीआर में यह बताएंगे इंदौर-उज्जैन के बीच कितनी दूरी, कितने स्टेशन बनेंगे, कितनी संभावित लागत होगी आदि डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में शामिल रहेगा। एक अनुमान के अनुसार, एक से डेढ़ हजार करोड़ रुपए लागत हो सकती है। रैपिड रेल, इसलिए कम लगेगा समय इस प्रोजेक्ट में 2 से 3 मेट्रो स्टेशन ही बनेंगे। इंदौर-उज्जैन के अलावा बीच में एक स्टेशन और बन सकता है। इसलिए रैपिड रेल रहेगी। रैपिड रेल का उद्देश्य 'इंटर सिटी कनेक्टिविटी' को बढ़ाना है। स्टेशन कम रहेंगे तो लागत भी कम आएगी भोपाल में प्रायोरिटी कॉरिडोर के सुभाष नगर से एम्स के बीच कुल 8 मेट्रो स्टेशन बन रहे हैं। एक स्टेशन की लागत 50 करोड़ रुपए से अधिक है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन के बीच मेट्रो के कम स्टेशन रहेंगे। इससे राशि बचेगी और लागत भी कम आएगी। 3 साल में पूरा हो जाएगा प्रोजेक्ट मेट्रो से जुड़े एक अफसर की माने तो अगले साल मार्च-अप्रैल तक सारी प्रोसेस पूरी करने पर फोकस है, क्योंकि इसके बाद 3 साल मिलेंगे। सिंहस्थ अप्रैल-मई 2028 में है। यदि समय पर काम शुरू हो गया तो मेट्रो चलाने में कोई अड़चनें नहीं आएगी। सर्वे कर चुका DMRC सरकार ने सिंहस्थ से पहले इंदौर-उज्जैन के बीच मेट्रो चलाने के लिए तैयारी की है। इसके चलते दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) इंदौर के लवकुश चौराहा से उज्जैन महाकाल तक रूट का मौका मुआयना कर चुकी है। टीम ने स्टेशन, डिपो और अन्य सुविधाओं के लिए जगह देखी थी। दोनों शहरों के बीच एलिवेटेड ट्रैक बनाने की योजना है। एक तिहाई रह जाएगा ट्रैफिक इंदौर और उज्जैन का करीब 75 प्रतिशत ट्रैफिक सड़क मार्ग से ही आना-जाना करता है। हजारों लोग इंदौर-उज्जैन में अप-डाउन करते हैं। इससे सड़क पर ट्रैफिक का दबाव बना रहता है। कई बार हादसे भी हो चुके हैं। ऐसे में इंदौर और उज्जैन के बीच मेट्रो बेहतर कनेक्टिविटी का बड़ा विकल्प हो सकता है। दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलने के बाद सड़क मार्ग का ट्रैफिक एक तिहाई रह जाएगा। मेट्रो ट्रेन का सेफ्टी ऑडिट पूरा मेट्रो ट्रेन का सेफ्टी ऑडिट पूरा हो गया है। 7 दिन में इसकी रिपोर्ट आएगी। 9 से 17 नवंबर 2024 तक गांधी नगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर-03 स्टेशन के बीच मुख्य लाइन ट्रैक पर टीम ने टेस्टिंग की। दरअसल, मेट्रो ट्रेन के कॉमर्शियल रन के पहले मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को आरडीएसओ और सीएमआरसी की एनओसी लेना होगी, क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेल मंत्रालय की टीम निरीक्षण के लिए आएगी। हाल ही में रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) ने मेट्रो रोलिंग स्टॉक (ट्रेन) का निरीक्षण किया। ट्रेन की टेस्टिंग की गई। स्पीड, ब्रेक, इमरजेंसी ब्रेक, सॉफ्टवेयर, वायरिंग सहित सारी तकनीकी जांच की गई। अंतिम रिपोर्ट के बाद सीएमआरसी की टीम सिविल वर्क, ट्रेन सहित सभी सेवाओं का मुआयना कर एनओसी जारी करेगी। ऑडिट के दौरान मेट्रो रोलिंग स्टॉक (ट्रेन) के लिए दोलन (ऑसिलेशन) और इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस परीक्षण किया गया। इसके तहत कई महत्वपूर्ण मापदंडों जैसे राइड क्वालिटी, स्थिरता, इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस और सम्पूर्ण रोलिंग स्टॉक का मूल्यांकन रिकॉर्ड किया। यह डेटा इंदौर मेट्रो के वाणिज्यिक संचालन के लिए सुरक्षा प्रमाणन और तकनीकी मंजूरी प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।   recent visitors 76

चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा सुविधा के विस्तार में मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी राज्यों में शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में शीघ्र ही 50 मेडिकल कॉलेज होंगे। वर्तमान में प्रदेश में 17 शासकीय मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, 8 निर्माणाधीन हैं और 13 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज विद्यमान हैं। राज्य शासन ने 12 मेडिकल कॉलेज की निविदाएं आमंत्रित की हैं, जो कि पीपीपी मॉडल पर संचालित किए जाएंगे। चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा सुविधा के विस्तार में मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को उज्जैन रवाना होने से पहले समत्व भवन में मीडिया को यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चिकित्सा सेवा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में केन्द्र सरकार ने बहुत कार्य किया है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेडिसिटी की परिकल्पना दी है। इसके अंतर्गत एक ही कैंपस में स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी विभिन्न सुविधा और समाधान उपलब्ध कराने की व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रदेश में यह परिकल्पना उज्जैन में साकार हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में ऐसे सभी विकास और जन-कल्याण के कार्य जारी रखेगी।   recent visitors 105

‘इंदौर में हटेगा बीआरटीएस…’, CM ने कहा- कोर्ट में रखेंगे पक्ष

 इंदौर भोपाल के बाद इंदौर में बीआरटीएस हटेगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में इसे लेकर गुरुवार (21 नवंबर) को बड़ी घोषणा कर दी है। बीआरटीएस बनने के बाद से ही इसे लेकर लगातार दो धड़े बंटे हुए थे। अधिकारी इसे लगातार चलाए रखने के लिए अडिग थे, तो वहीं जनप्रतिनिधि और समाजसेवी इसके विरोध में रहे। यह बोले सीएम सीएम ने इंदौर एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा में कहा कि भोपाल में हम बीआरटीएस हटा चुके हैं, इसके हटने से वहां यातायात में लोगों को बड़े पैमाने पर सुविधा मिली। यहां भी इंदौर की दृष्टि से भी लगातार शिकायतें मिल रही थी। जनप्रतिनिधियों ने बीती दो विकास संबंधी बैठकों में भी इसे लेकर बोला था। कोर्ट के सामने अब जो सरकार का पक्ष बन रहा है सभी का मिलकर कि जो भी तरीका लगेगा, वह हम यहां लगाकर इस हटाएंगे। कोर्ट में भी पक्ष रखेंगे। चौराहों पर ट्रैफिक समस्या आती है, वहां ब्रिज बनाकर समाधान खोजेंगे। जब ब्रिज बनाएंगे तब भी, कॉरिडोर तो हटाना ही होगा। कुल मिलाकर इससे यातायात सुगम हो, लोगों को कष्ट नहीं हो, यह हम सभी की जवाबदारी है। सभी की परेशानी को देखते हुए ही यह फैसला लिया है। 250 करोड़ में बना था कॉरिडोर इंदौर में 250 करोड़ की लागत से 12 साल पहले यह 11.50 किमी लंबा कॉरिडोर राजीव गांधी चौक से निरंजनपुर तक बना था। इसमें हर दिन 80 हजार से एक लाख यात्री सफर करते हैं और इसमें आईबस चलती है। अहमदबाद के बाद इंदौर के प्रोजेक्ट को ही सबसे सफल माना जाता है। लेकिन हाल के समय में एबी रोड पर कॉरिडोर में पहले एलीवेटेड ब्रिज और अब जगह-जगह चौराहों पर फ्लाइओवर ब्रिज बनाए जाने पर सर्वे हो रहा है। बीआरटीएस पर होता है बसों का संचालन बीआरटीएस पर हर दिन यात्री बसों का संचालन किया जाता है। इन बसों में रोजाना 50 हजार से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। लेकिन बीआरटीएस की वजह से अन्य वाहनों को जगह कम मिलती है और इस पूरे रूट पर कई जगह जाम की स्थिति बन जाती है। दो याचिकाएं चल रही हैं इस कॉरिडोर बनने के बाद से ही एबी रोड पर मिक्स लेन (जहां अन्य आम वाहन चलते हैं) तंग होने और जाम होने की समस्या उठती रही है। समाजसेवी किशोर कोडवानी ने साल 2013 व 2015 में इसे लेकर याचिकाएं भी दायर की। इसमें हाल ही में सितंबर 2024 में याचिका में कॉरिडोर की व्यवहारिकता व उपयोगित को लेकर पांच सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी बनाने के आदेश हाईकोर्ट इंदौर ने दिए और इस पर रिपोर्ट मांगी। इस पर 22 नवंबर को सुनवाई होना थी लेकिन इसके पहले यह केस इंदौर हाईकोर्ट ने जबलपुर बैंच में ट्रांसफर कर दिए। 11.5 किमी का है बीआरटीएस इंदौर में राजीव गांधी प्रतिमा से लेकर निंरजनपुर तक करीब 11.5 किमी लंबा बीआरटीएस बना हुआ है। जिसमें केवल बसों का संचालन किया जाता है। इसके साथ ही यहां एंबुलेंस को निकलने की अनुमति है। सीएम के कहने के बाद पक्ष बदलेगा अभी तक शासन, प्रशासन ने हाईकोर्ट में बीआरटीएस के पक्ष में ही बात रखी है। लेकिन अब जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवई होने पर यह पक्ष बदल जाएगा क्योंकि अब खुद सीएम ने ही कोर्ट में इसे हटाने वाली बात रखने का बोल दिया है। recent visitors 68

बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने शुरू की हिंदू जोड़ो यात्रा, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

 छतरपुर बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज, 21 अक्टूबर से सनातन हिंदू एकता पदयात्रा पर निकल गए हैं। 160 किलोमीटर लंबी उनकी ये यात्रा बागेश्वर धाम से ओरछा तक जाएगी। यात्रा को लेकर मध्य प्रदेश के छतरपुर में बागेश्वर सरकार के हजरों भक्त पहले ही इकट्ठा हो गए हैं। 21 से 29 नवंबर तक चलने वाली उनकी इस यात्रा के दौरान धीरेद्र शास्त्री हिंदुओं को एकजुट करने का प्रयास करेंगे। साथ ही हिंदुओं को एकजुट होने का संदेश भी देंगे। पदयात्रा से एक दिन पहले बुधवार की रात को धीरेंद्र शास्त्री ने यात्रा में शामिल होने आए हजार भक्तों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदुओं पर जो अत्याचार हो रहा है। इसे रोकने के लिए सड़कों पर उतरना जरूरी है। साथ ही हमें एकजुट होकर रहना भी जरूरी है। बाबा बागेश्वर ने आगे कहा कि 2005 तक वक्फ के पास कुछ सौ एकड़ की जमीन थी, लेकिन आज साढ़े 7 लाख एकड़ जमीन है। ये संसद पर भी दावा ठोक रहे हैं तो कल को यहां भी दावा ठोंक देंगे।   सनातन हिंदू एकता पदयात्रा पर निकलें धीरेंद्र शास्त्री वहीं, पदयात्रा में शामिल होने आए हजारों की भीड़ ने अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकार बाबा बागेश्वर को अपना समर्थन दिया। हजारों की भीड़ देखकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि ये है हिन्दुत्व की हुंकार है। जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई।  जब एक आवाज में हिंदू एक दिन धर्म विरोधियों के खिलाफ सड़कों पर उतर जाएंगे तो उसी दिन इस देश में हिंदुओं पर होने वाला हिंसा भी रूक जाएगा। हमें बजरंगबली की कृपा पर पूरा भरोसा है। छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं- धीरेंद्र शास्त्री पदयात्रा की शुरुआत में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- "हजारों की भीड़ और फ्लैशलाइट आपको क्या बता रही है, बागेश्वर में यह जगे हुए भारत के 2024 के जगे हुए हिंदू हैं। अब वह हिंदू नहीं बचे हैं कि तुम हमें थप्पड़ मारोगे और यह भाग जाएंगे। यह वह हिंदू है जिन्हें छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं। यह हिंदू हिंसा वादी नहीं अहिंसा वादी है क्योंकि उनके हाथ में तलवार नहीं है, विचार की तलवार है। हम इन हिंदुओं के हाथों में सच्चाई की किताब देना चाहते हैं। इन हिंदुओं के हाथों में रामायण और गीता देना चाहते हैं। इन हिंदुओं के हाथों में हम तर्क वादी सोच देना चाहते हैं। इन हिंदुओं के हाथों में हम हक के लिए लड़ने का अधिकार देना चाहते हैं। हम चाहते हैं हिंदू हक की बात बोलें, संविधान की बात बोलें, देश की एकता की बात बोलें। इनको कोई छेड़े तो यह किसी को छोड़े नहीं।" आप कहते हो- करो या मरो की बारी है, भारत पर संकट भारी है? अब इससे बड़ा संकट क्या हो सकता है कि हमारे ही देश में रहकर हमारे ही मंदिरों पर कब्जा हो। राम के राज्य में राम का खाते हैं फिर भी राम के होने का सबूत मांगते हैं। अपने ही राम जिनको मानने के लिए हमारे दादा परदादा को शबरी ने बेर खिलाए, निषाद राज ने मित्रता की, वाल्मीकि ने रामायण लिखी, तुलसीदास ने रामायण लिखी। इतने के बावजूद भी देश में राम मंदिर के लिए हमें 500 सालों तक लड़ना पड़ा। जहां शंकर जी बैठे हैं इनके बाबर आए। बाबर के जमाने में और अकबर के जमाने में इन लोगों ने काशी विश्वनाथ में मंदिर को मस्जिद बता दिया। भगवान कृष्ण जहां प्रकट हुए वहां मस्जिद बना दी। उन्होंने जगह-जगह पर देश पर हक जताया। हिंदू समाज से कह रहे हैं करो या मरो के बारी है, भारत पर संकट भारी है। कल के दिन यह बागेश्वर धाम में मजार बना ले तो हम तो मर ही जाएंगे। इसलिए हम हिंदुओं को एक होने के लिए जात-पात को मिटाने के लिए ये कर रहे हैं। बाबा हिंदुओं को जगा रहे हैं लेकिन विरोधी कह रहे हैं कि बाबा की कौन सी पार्टी है? बाबा की पार्टी है बजरंगबली की पार्टी, उसका निशान है मुगदर, उसका नारा है जो राम का नहीं वह किसी काम का नहीं और उसका सीधा सा खतरनाक शब्द है ठठरी बरे। इस नारे से सारे हिंदुओं की पार्टी बना रहे हैं। हम कोई पार्टी नहीं बना रहे हैं, हमें राजनीति में नहीं जाना है। राजनीति में जाकर हम करेंगे क्या? हनुमान जी के चरणों में प्रण लिया यही जीवन बिताना है हिंदुओं के लिए जीना और हिंदुओं के लिए मरना।  भारत में अब हिंदू जाग गए हैं-धीरेंद्र शास्त्री पदयात्रा की शुरुआत से पहले हुंकार भरते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत में अब हिंदू जाग गए हैं। अब हिंदू वो हिंदू नहीं है जो कि तुम हमें थप्पड़ मारोगे और हम भाग जाएंगे। यह वो हिंदू है जिन्हें जिन्हें छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं। यह हिंदू हिंसा वादी नहीं है, अहिंसा वादी है क्योंंकि उनके हाथ में तलवार नहीं, विचार की तलवार है। बाबा बागेश्वर ने आगे कहा कि हिंदुओं के हाथों में हम हक के लिए लड़ने का अधिकार देना चाहते हैं। हम चाहते हैं हिंदू हक की बात बोलें, संविधान की बात बोलें, देश की एकता की बात बोलें। इनको कोई छेड़े तो यह किसी को छोड़े नहीं। recent visitors 149

अडाणी 2 अरब डॉलर के रिश्वत कांड में फंसे! पिछले हफ्ते ही अमेरिका में इन्वेस्टमेंट करने का किया था ऐलान, वारंट जारी

नई दिल्ली  अडानी ग्रुप के चेयरमैन और देश के दूसरे सबसे अमीर उद्योगपति गौतम अडानी बड़ी मुसीबत में घिरते नजर आ रहे हैं। अडानी और सात अन्य लोगों पर अमेरिका में अरबों डॉलर की रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। इस मामले में अमेरिका की कोर्ट में सुनवाई हुई। अडानी और उनके भतीजे के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं। इस मामले में नाम आने के बाद अडानी ग्रुप ने अमेरिका में 600 मिलियन डॉलर का बॉन्ड रद्द कर दिया। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार अभियोजकों ने बुधवार को आरोपों की घोषणा की। इसमें आरोप लगाया गया है कि अडानी ग्रुप ने सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी थी। अडानी ने बुधवार को ग्रीन एनर्जी में निवेश की घोषणा की थी। यह घोषणा तब की गई जब कंपनी के अध्यक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति-चुनाव डोनाल्ड ट्रंप को उनकी चुनावी जीत पर बधाई दी। ट्रंप ने किया था वादा रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी ने निवेश की घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति-चुनाव डोनाल्ड ट्रंप को उनकी चुनावी जीत पर बधाई भी दी। यहां यह ध्यान देने योग्य है कि ट्रंप ने ऊर्जा कंपनियों के लिए नियमों को सरल बनाने का वादा किया है। इससे उनके लिए संघीय भूमि पर ड्रिलिंग करना और पाइपलाइनों का निर्माण करना आसान हो जाएगा। क्या है अडानी का मामला? अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग की ओर से बनाए गए मामले के अनुसार, गौतम अडानी पर कथित रूप से अमेरिकी निवेशकों को धोखा देने और अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप लगाया गया है। अडानी और अन्यों पर आरोप है कि उन्होंने झूठे और भ्रामक बयानों से अमेरिकी निवेशकों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों से फंड लिया। इसके बाद उस रकम का इस्तेमाल रिश्वतखोरी में किया। अभियोग में कहा गया है कि अडानी और अन्य ने लगभग 265 मिलियन डॉलर (करीब 2237 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी। उन्हें उम्मीद थी कि इन कॉन्ट्रैक्ट से दो दशकों में 2 बिलियन डॉलर (करीब 16882 करोड़ रुपये) का मुनाफा होगा। अभियोक्ताओं का दावा है कि इस योजना में शामिल कुछ लोगों ने गौतम अडानी को संदर्भित करने के लिए 'न्यूमेरो यूनो' और 'द बिग मैन' जैसे कोड नामों का इस्तेमाल किया। भतीजे पर भी लगा आरोप अभियोग में यह भी आरोप लगाया गया है कि अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और एक अन्य कार्यकारी विनीत जैन ने अडानी ग्रीन एनर्जी के लिए 3 बिलियन डॉलर से अधिक के लोन और बॉन्ड हासिल करने के लिए ऋणदाताओं और निवेशकों से रिश्वत की बात छिपाई। ये आरोप विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम के अंतर्गत आते हैं, जो विदेशी व्यापार सौदों में रिश्वतखोरी के खिलाफ एक अमेरिकी कानून है। जारी हुए गिरफ्तारी वारंट रिपोर्ट में कहा गया है कि गौतम अडानी और सागर अडानी के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने दोनों व्यक्तियों और एक अन्य व्यक्ति सिरिल कैबनेस के खिलाफ संबंधित नागरिक आरोप दायर किए हैं। हालांकि अमेरिकी सरकार ने अभी तक अडानी और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ विशिष्ट आरोपों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है। अभियोग से कुछ घंटे पहले ही बॉन्ड बेचे अभियोग की खबर से कुछ घंटे पहले ही अडानी ग्रुप की एक इकाई ने 600 मिलियन डॉलर की पेशकश के लिए अमेरिकी कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में प्रवेश किया। इस पेशकश को 3 गुना से अधिक ओवरसब्सक्राइब किया गया। बाद में इन बॉन्ड को बेच भी रद्द भी कर दिया गया। अडानी ने एक महीने पहले भी इसी तरह की पेशकश की थी। हालांकि, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, मूल्य निर्धारण को लेकर निवेशकों के विरोध के बाद उस पेशकश को स्थगित करना पड़ा। प्रतिवादियों के नामों और विवरणों की पूरी सूची अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय (न्यूयॉर्क) के अनुसार, रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के मामले में शामिल लोग हैं: 1. गौतम एस. अदानी उम्र: 62, भारत 2. सागर एस. अडानी उम्र: 30, भारत 3. विनीत एस. जैन उम्र: 53, भारत 4. रंजीत गुप्ता उम्र: 54, भारत 5. सिरिल कैबनेस उम्र: 50, फ्रांस/ऑस्ट्रेलिया 6. सौरभ अग्रवाल उम्र: 48, भारत 7. दीपक मल्होत्रा उम्र: 45, भारत 8. रूपेश अग्रवाल उम्र: 50, भारत recent visitors 106