उज्जैन में 127 करोड़ 63 लाख रूपये लागत की इंगोरिया-उन्हेल सड़क मार्ग की स्वीकृति

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक बुधवार शाम को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियिम 1951 के अंतर्गत "श्रीकृष्ण पाथेय न्यास" का गठन किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी। स्वीकृति अनुसार भगवान श्रीकृष्ण से संबंध क्षेत्रों का साहित्यिक व सांस्कृतिक संरक्षण और संवर्धन किया जायेगा। न्यास द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों एवं संरचनाओं का प्रबंधन, सांदिपनि गुरुकुल की स्थापना के लिए परामर्श, सुझाव, श्रीकृष्ण पाथेय के स्थानों का सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यटन की दृष्टि से विकास, पुस्तकालय, संग्रहालय की स्थापना आदि गतिविधियों का क्रियान्वयन किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित न्यास में कुल 28 सदस्य होंगे। इसमे 23 पदेन न्यासी सदस्य तथा 5 ख्याति प्राप्त विद्वत सदस्य, अशासकीय न्यासी सदस्य के रूप में नामांकित होंगे। अशासकीय न्यासी सदस्यों का कार्यकाल अधिकतम 3 वर्ष होगा। "श्रीकृष्ण पाथेय न्यास" का मुख्यालय भोपाल होगा। इसके लिये 6 पद सृजित किये जायेंगे। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिये शासन अथवा अन्य स्त्रोतों से अनुदान एवं दान प्राप्त कर सकता है। न्यास के संचालन एवं उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये शोध-सर्वेक्षण एवं विकास कार्य के लिये आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ समितियों का गठन किया जा सकेगा। न्यास के लिए श्रीकृष्ण पाथेय न्यास विलेख तैयार किया जायेगा। विलेख मे न्यास के अधिकार, कार्यकारी समिति, सदस्यों, कार्यकारी समिति के अधिकार, न्यासी सचिव के अधिकार, मुख्य कार्यपालक अधिकारी के अधिकार, न्यास के लेखे एवं अंकेक्षण एवं न्यास के कार्यक्षेत्र एवं सीमा से संबंधित विषयों का विस्तारपूर्वक वर्णन होगा। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के उद्देश्यों में मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण के चरण जहाँ-जहाँ पड़े उन स्थानों को तीर्थ के रुप में विकसित तथा संरक्षित करना और हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा के महत्व को समझने के लिए सम्बन्धित क्षेत्रों का प्रलेखन (डाक्युमेंटेशन), अभिलेखन (रिकॉर्डिंग), छायांकन, फिल्मांकन तथा चित्राकंन आदि करना शामिल है। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के अंतर्गत अवस्थित भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों एवं उनमें स्थित जल संरचनाओं, वन सम्पदा, उद्यान आदि की सुरक्षा, संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन किया जायेगा। इन धार्मिक तीर्थ स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इसके साथ ही उज्जैन में 64 कलाओं और 14 विद्याओं की विधिवत शिक्षा के लिए सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना हेतु परामर्श, सुझाव एवं अन्य कार्यवाही की जायेगी। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की अवधारणा के अनुरुप शिक्षा, संस्कृति, कृषि, गौ एवं पशुधन संवर्धन की विरासत का विकास किया जायेगा। मध्यप्रदेश राज्य की सीमा में आने वाले श्रीकृष्ण पाथेय के चिन्हांकित स्थलों के अवलोकन, पुरान्वेषण तथा धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, इतिहास आदि की दृष्टि से रचनात्मक विकास हेतु परामर्श, सुझाव एवं आवश्यकतानुसार कार्यवाही की जायेगी। युवा पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण की जीवन गाथा और उज्जैन को केन्द्र में रखकर की गई उनकी यात्राओं की महत्ता से अवगत कराते हुए गंतव्य स्थलों के साथ भावनात्मक एवं अनुभवात्मक रूप से जोड़ने की योजनाएँ परिकल्पित करना तथा भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित सांस्कृतिक एवं अन्य गतिविधियाँ आयोजित करना इसके उद्देश्यों में शामिल होगा। केन्द्र एवं राज्य शासन के सर्व संबंधित विभागों के समन्वय से श्रीकृष्ण पाथेय के स्थानों का सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यटन की दृष्टि से विकास तथा विभिन्न निर्माण एवं अधोसंरचना का विकास किया जायेगा। साथ ही जन-सामान्य को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक रूप से प्रबुद्ध करते हुए पर्यटकों, शोधार्थियों, युवाओं तथा सभी वर्ग के विद्यार्थियों की जानकारी के लिए पुस्तकालयों, संग्रहालयों तथा सूचना केन्द्रों की स्थापना की जायेगी। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा पौराणिक काल से वर्तमान समय तक भगवान श्रीकृष्ण को जगद्गुरु स्वरुप स्थापित करने में अपना योगदान प्रदान करने वाले अनेक-अनेक तेजस्वी नायकों, दार्शनिकों, मंत्रदृष्टा ऋषियों, संतों, मनीषियों, चिंतकों, कवियों, साहित्यकारों, कलाकारों, वैज्ञानिकों के अवदान का रेखाकंन एवं वाणियों का ध्वन्यांकन तथा फिल्मांकन कराया जायेगा। भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरक कथाओं और चित्रों का चित्रांकन, उत्कीर्णन एवं शिल्पकला की विधा के माध्यम से प्रस्तुतिकरण किया जायेगा। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भारत सरकार, राज्य सरकार, गैर शासकीय संस्थाओं, संगठनों, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के निकायों तथा व्यक्तियों से समन्वय, सहयोग तथा सम्पर्क स्थापित कर वित्तीय एवं अन्य गतिविधियों का क्रियान्वयन किया जायेगा। साथ ही साथ श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के अंतर्गत सभागारों, सामुदायिक केन्द्रों (कम्युनिटी सेंटर) और धर्मशालाओं का निर्माण एवं व्यवस्थापन कार्य किया जायेगा। चयनित 209 स्टॉफ नर्सों को नियुक्ति दिये जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड, भोपाल (वर्तमान में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल) द्वारा 27 जनवरी, 2022 को घोषित परीक्षा परिणाम के आधार पर स्टॉफ नर्स के पद पर चयनित 209 अभ्यार्थियों को विभाग के अधीन संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों में वर्तमान में उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति दिये जाने के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान की गई है। उज्जैन मे 127 करोड़ 63 लाख रूपये लागत की इंगोरिया-उन्हेल सड़क मार्ग की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने उज्जैन जिला अंतर्गत इंगोरिया-उन्हेल (लंबाई 23.71 कि.मी.) 2-लेन मय पेव्हड शोल्डर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति दी है। यह सड़क 23.71 कि.मी. लंबी होगी एवं 127 करोड़ 63 लाख रूपये की लागत से म.प्र. सड़क विकास निगम के माध्यम से विकसित की जायेगी।   recent visitors 135

प्रदेश में जैविक खेती के लिए तीन हजार से अधिक क्लस्टर बने, एक लाख से अधिक किसानों द्वारा organic farming की जा रही

भोपाल  देश में कुल जैविक उत्पाद का 40 प्रतिशत हिस्सा देने वाला मध्य प्रदेश जैविक खेती के मामले में नए कीर्तिमान की ओर है। इसका रकबा 17 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 20 लाख हेक्टेयर करने की तैयारी चल रही है। जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने प्रति हेक्टेयर पांच-पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। इसमें भारत सरकार से भी मदद मिलेगी। साथ ही जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए बाजारों में स्टाल लगाने के साथ खुदरा व्यापारियों से जोड़ने की पहल भी की जाएगी। बता दें, देश में कुल 65 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती होती है। मध्य प्रदेश के मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, सिंगरौली सहित अन्य कई जिलों में परंपरागत रूप से जैविक खेती होती है। खेतों में डाले जा रहे रासायनिक उवर्रक और कीटनाशकों के कारण खाद्यान्न और भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि जैविक उत्पादों की मांग बढ़ती जा रही है। किसानों के लिए फायदेमंद जैविक खेती किसानों के लिए आर्थिक तौर पर लाभदायक भी है, इसलिए इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए वर्ष 2011 में जैविक खेती नीति बनाई गई। जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण के साथ अन्य व्यवस्थाएं बनाई गईं। अब इसे प्राकृतिक खेती से जोड़कर और आगे बढ़ाने की कार्ययोजना बनाई गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में जैविक खेती के लिए तीन हजार से अधिक क्लस्टर बने हैं। अब इसे और विस्तार दिया जाएगा। जैविक उत्पादों का कराया जाएगा प्रमाणीकरण जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने प्रति हेक्टेयर पांच-पांच हजार रुपये तीन वर्ष तक दिए जाएंगे। उन्हें कहीं से भी सामग्री लेने की छूट रहेगी। तीन वर्ष तक किसान द्वारा की जाने वाली खेती का पूरा रिकार्ड रखा जाएगा। जैविक उत्पाद का प्रमाणीकरण भी करवाया जाएगा, ताकि उपज का अच्छा मूल्य मिले। साथ ही उपज विक्रय के लिए अन्य राज्यों के बाजारों में स्टाल लगाने के साथ खुदरा व्यापारियों से किसानों को जोड़ने की पहल की जाएगी। जैविक खाद की आवश्यकता की पूर्ति के लिए सहकारी स्तर पर समिति बनाना भी प्रस्तावित है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें गोपालन से जोड़ने की भी तैयारी है। प्राकृतिक खेती करने पर देसी गाय पालन के लिए 900 रुपये प्रतिमाह देने की योजना बनाई गई है। ये फसलें उगाई जा रहीं प्रदेश में अभी एक लाख से अधिक किसानों द्वारा जैविक खेती की जा रही है। प्रमुख उपज में सोयाबीन, गेहूं, धान, चना, मसूर, अरहद, उड़द, बाजरा, रामतिल, मूंग, कपास, कोदो-कुटकी आदि शामिल हैं। इन जिलों में अधिक जैविक खेती मंडला, डिंडौरी, शहडोल, सिंगरौली, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, कटनी, उमरिया, अनूपपुर, उमरिया, दमोह, सागर, आलीराजपुर, झाबुआ, खंडवा, सीहोर, श्योपुर और भोपाल recent visitors 74

दुनिया में होने वाली हर आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण, वायु प्रदूषण तंबाकू से भी ज्यादा खतरनाक होता

नई दिल्ली क्या आपको पता है कि दुनिया में होने वाली हर आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण होता है? एक तरह से वायु प्रदूषण तंबाकू से भी ज्यादा खतरनाक होता है. स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2024 की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में दुनियाभर में तंबाकू की वजह से अनुमानित 75 से 76 लाख मौतें हुई होंगीं. जबकि, वायु प्रदूषण के कारण 81 लाख मौतें. यानी, दुनिया में 12% मौतों का कारण जहरीली हवा है. वहीं, दुनियाभर में हर साल एक करोड़ से ज्यादा मौतें हाई ब्लडप्रेशर के कारण होती हैं. ये बातें इसलिए चिंता बढ़ाती हैं, क्योंकि राजधानी दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर 500 के करीब पहुंच गया है. यानी अब यहां AQI 'गंभीर' की श्रेणी में आ गया है. जब ये 'गंभीर' की श्रेणी में आ जाता है तो अच्छे-खासे तंदरुस्त लोग भी बीमार पड़ सकते हैं. ये रिपोर्ट बताती है कि सबसे बड़ा रिस्क PM2.5 है. PM2.5 का मतलब है 2.5 माइक्रोन का कण. ये बहुत ही महीन कण होता है. इसे ऐसे समझिए कि ये इंसान के बाल से भी 100 गुना ज्यादा पतला होता है. ये इतना छोटा है कि नाक और मुंह के जरिए हमारे शरीर में घुस जाता है. जैसे ही ये हमारे शरीर में आता है तो दिल और फेफड़ों को प्रभावित करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में PM2.5 के कारण 78 लाख मौतें हुई थीं. यानी, वायु प्रदूषण के कारण जितनी मौतें हुई थीं, उनमें से 96 फीसदी से ज्यादा की वजह यही कण था. इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण के कारण होने वाली 90 फीसदी से ज्यादा बीमारियों का कारण भी यही छोटा सा कण होता है. सबसे खतरनाक PM2.5 2024 की स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण जहरीली हवा ही थी. सबसे ज्यादा खतरा साउथ एशियाई और अफ्रीकी देशों पर है. रिपोर्ट से पता चलता है कि 81 लाख मौतों में से 58 फीसदी की वजह वातावरण में मौजूद प्रदूषण रहा. जबकि, 38 फीसदी मौतें घरों के अंदर मौजूद प्रदूषण की वजह से हुई थीं. चिंता बढ़ाने वाली बात ये है कि पांच साल से छोटे बच्चों की मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण भी वायु प्रदूषण ही है. इतने छोटे बच्चों की मौतों की सबसे बड़ी वजह है. जबकि, वायु प्रदूषण के कारण 2021 में पांच साल से छोटे 7 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी. इतना ही नहीं, साउथ एशिया और अफ्रीकी देशों में जन्म के बाद पहले महीने में होने वाली 30 फीसदी से ज्यादा मौतों का कारण भी जहरीली हवा ही है. भारत के लिए कितना बड़ा खतरा? एक अनुमान के मुताबिक, भारत में हर साल तंबाकू की वजह से 10 लाख के आसपास लोग मारे जाते हैं. जबकि, वायु प्रदूषण के कारण 21 लाख लोग मारे गए थे. यानी, लगभग दोगुना. इस हिसाब से देखा जाए तो भारत में हर महीने औसतन 1.75 लाख और हर दिन 5,753 लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हो जाती है. अकेले भारत में ही पांच साल से कम उम्र के 1.69 लाख बच्चों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हो गई थी. ये आंकड़ा दुनिया में सबसे ज्यादा था. दूसरे नंबर पर नाइजीरिया था, जहां 1.14 लाख बच्चों की मौत हुई थी. पाकिस्तान में 68 हजार से ज्यादा बच्चे मारे गए थे. रिपोर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण के कारण होने वाले अस्थमा 5 से 14 साल की उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है. 15 फरवरी 2013 को लंदन की रहने वालीं 9 साल की एला किस्सी-डेब्रा की मौत अस्थमा अटैक से हो गई थी. वो दुनिया की पहली शख्स हैं, जिनके डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह 'वायु प्रदूषण' दर्ज है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे जहरीली हवा साउथ एशियाई देशों में है. वायु प्रदूषण के कारण दुनिया में जितनी मौतें हुई थीं, उनमें आधी से ज्यादा सिर्फ भारत और चीन में हुई थी. चीन में 23 लाख तो भारत में 21 लाख लोगों की मौत का कारण वायु प्रदूषण था. हवा में मौजूद PM2.5 सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि इससे बेमौत ही लोग मारे जा रहे हैं और हार्ट डिसीज, लंग कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं. भारत में हर एक लाख आबादी में से 148 की मौत का कारण वायु प्रदूषण है. ये वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा है. PM2.5 में नाइट्रेट और सल्फेट एसिड, केमिकल, मेटल और धूल-मिट्टी के कण होते हैं. ये कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों में काफी अंदर तक घुस सकते हैं और गंभीर रूप से बीमार कर सकते हैं. इस कारण दिल और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों की मौत भी हो सकती है. जबकि, स्वस्थ लोगों को इससे हार्ट अटैक, अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी बीमारी हो सकती है. इसी साल जनवरी में एक स्टडी आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि दुनियाभर में PM2.5 की सबसे ज्यादा मात्रा भारत में है. वहीं, दिल्ली में इसकी मात्रा सबसे ज्यादा है. इस स्टडी में दावा किया गया था कि सर्दी के मौसम में भारत में घर के अंदर की हवा बाहर की हवा से 41% ज्यादा प्रदूषित होती है. हाल ही में साइंस जर्नल लैंसेट में एक स्टडी छपी थी. स्टडी में बताया गया था कि शहरी इलाकों में वायु प्रदूषण नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर के खतरे को बढ़ा रहा है. recent visitors 157

मध्य प्रदेश के नए डीजीपी के लिए ये नाम हुए फाइनल! कौन है रेस में सबसे आगे?

भोपाल  मध्य प्रदेश को नया मुख्य सचिव मिलने के बाद अब प्रदेश में नए पुलिस महानिदेशक (New DGP Appointment) को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं हैं, क्योंकि वर्तमान डीजीपी सुधीर सक्सेना 30 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं. प्रदेश में नए डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए कई दावेदारों के नाम चर्चाओं में हैं, इनमें अरविंद कुमार रेस में सबसे आगे हैं. राज्य के 30वें डीजीपी के तौर पर सुधीर सक्सेना का कार्यकाल 30 नवंबर को समाप्त हो रहा है. 30 नवबर को सुधीर सक्सेना की विदाई तय है. लगभग ढाई साल से डीजीपी पद पर तैनात रहे सक्सेना के विदा होने के बाद प्रदेश का नया डीजीपी कौन होगा, इसकी चर्चाएं जोरों पर हैं.  रेस में आगे हैं अरविंद कुमार और कैलाश मकवाना गौरतलब है सेवानिवृत हो रहे पुलिस महानिदेशक सक्सेना का स्थान लेने वालों में कई नाम चर्चा में हैं. इनमें सबसे ऊपर होमगार्ड डीजी अरविंद कुमार और हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष कैलाश मकवाना का नाम है. इसके अलावा ईओडब्ल्यू के डीजी अजय शर्मा और प्रतिनियुक्ति पर गए आलोक रंजन, योगेश मुद्गल और पवन श्रीवास्तव भी रेस में है. 1988 और 1989 बैच के आईपीएस ही बन सकेंगे डीजीपी डीजीपी के रेस में शामिल सभी अधिकारी वर्ष 1988 और 1989 बैच के आईपीएस है. माना जा रहा है कि वरिष्ठता के आधार पर उनमें से कोई एक ही डीजीपी बनेगा, लेकिन शेष के सपने अधूरे रहने की संभावना ज्यादा है, ऐसा इसलिए क्योंकि सभी का सेवाकाल उस अवधि में पूरा हो जाएगा. राज्य को अक्टूबर माह में ही नया मुख्य सचिव मिला है. यह जिम्मेदारी अनुराग जैन के हाथ में है और अब राज्य को नया पुलिस महानिदेशक मिलने वाला है. इस तरह राज्य की सरकारी मशीनरी की कमान नए लोगों के हाथ में रहने वाली है. सक्सेना की विदाई परेड की कमांडर होगी डीजीपी की बेटी मौजूदी डीजीपी सुधीर सक्सेना 30 नवंबर को रिटायर होंगे. इस मौके पर होने वाली परेड की कमांडर सक्सेना की पुत्री आईपीएस सोनाक्षी होंगी. संभवत मध्य प्रदेश के पुलिस इतिहास में पहला ऐसा मौका होगा जब डीजीपी को विदाई देने वाली परेड की कमांडर उनकी ही बेटी होगी. इस आयोजन को भव्य रूप दिए जाने की तैयारी जारी है. अक्टूबर महीने में मध्य प्रदेश को मिला नया मुख्य सचिव उल्लेखनीय है राज्य को अक्टूबर माह में ही नया मुख्य सचिव मिला है. यह जिम्मेदारी अनुराग जैन के हाथ में है और अब राज्य को नया पुलिस महानिदेशक मिलने वाला है. इस तरह राज्य की सरकारी मशीनरी की कमान नए लोगों के हाथ में रहने वाली है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एमपी की मोहन सरकार ने केंद्र की भाजपा सरकार को नौ नामों का पैनल भेजा है. इसमें पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन अध्यक्ष से लेकर एडीजी लेवल के अधिकारियों के नाम शामिल हैं. इन नामों में से केंद्र सरकार तीन नामों को फाइनल करेगी. फिर उन तीन नामों में से एक नाम को राज्य सरकार डीजीपी के पद पर नियुक्त करेगी. recent visitors 105

करंट से बचने विद्युत कर्मियों को बांटे गए हॉट सूट, बिजली लाइन पर काम करने वाले के लिए मददगार बनेगा

 जबलपुर  अब मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने ऐसा सूट बनाया है जिसे पहनकर बिजली कंपनी चालू लाइन पर भी काम कर लेंगे लेकिन उन्हें करंट नहीं लगेगा। इस सूट को कंपनी ने 'हॉट सूट' नाम दिया है। मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश भर के 100 से ज्यादा कर्मचारियों को हॉट सूट पहनकर चालू लाइन में काम करने की ट्रेनिंग दिलाई है। ये कर्मचारी बेंगलुरु से ट्रेनिंग लेकर आए हैं। हॉट सूट को पहनने वाले लाइनमैन को 'हॉट मैन' भी कहा जाता है। हाई वोल्टेज करंट में काम करना मुश्किल मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी की लाइनों पर उच्च क्षमता का विद्युत प्रवाह होता है। बिजली उत्पादन इकाई से सीधे ग्रिड के माध्यम से ट्रांसमिशन लाइन पर 400 केव्ही, 220 केव्ही और 132 केव्ही वोल्टेज पर लाइन में करंट दौड़ता है। बिजली कर्मी उच्च दाब क्षमता की लाइनों पर काम कर पाएंगे     कई बार बिजली आपूर्ति बंद होने के बावजूद करंट दौड़ने लगता।     वजह से बिजली कर्मी करंट लगने की हादसे का शिकार हुए थे।     हॉट सूट पहनकर उच्च दाब क्षमता की लाइनों पर काम कर पाएंगे। 132 केवी से लेकन 400 केवी की लाइन पर बिना शटडाउन लिए काम कर सकते हैं बेंगलुरु में 20 दिन तक चली ट्रेनिंग अब तक प्रदेश के करीब 100 बिजली कर्मचारियों को हॉट सूट दिए गए हैं। पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के चीफ इंजीनियर (सीई) संदीप गायकवाड़ के मुताबिक- हॉट सूट पहनकर लाइनमैन 132 केवी से लेकन 400 केवी (किलो वोल्ट) तक की लाइन पर बिना शटडाउन लिए काम कर सकते हैं। बेंगलुरु से आए कर्मचारियों को ट्रेनिंग करीब 20 दिन तक चली अभी जो कर्मचारी बेंगलुरु से आए हैं, उनकी ट्रेनिंग करीब 20 दिन तक चली थी। आगे अब और भी कर्मचारियों को फिर से बेंगलुरु भेजने की तैयारी की जा रही है। हॉट लाइन सूट बना आकर्षण का केंद्र विज्ञान मेला में विशेष तकनीक और मटेरियल से बना इंसूलेटेड सूट के साथ प्रदर्शित एक मॉडल बेहद आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसे पहनकर बेयर हैंड तकनीक के द्वारा ट्रांसमिशन लाइनों के 400 के व्ही, 220 के व्ही ,132 के व्ही वोल्टेज लेवल पर चालू लाइन में सुधार कार्य किया जा सकता है। इसके अलावा सब स्टेशन में उपयोग आने वाले विभिन्न उपकरणों के माडल भी प्रदर्शित किए गए हैं । recent visitors 96

Railway का बड़ा ऐलान, 650 ट्रेनों में जोड़े जाएंगे 1000 डिब्बे, 1 लाख यात्रियों को होगा फायदा

भोपाल  रेलवे ने बीते तीन माह में ही विभिन्न ट्रेनों में सामान्य श्रेणी (जीएस) के लगभग छह सौ नए अतिरिक्त कोच जोड़े हैं। ये सभी कोच नियमित ट्रेनों में जोड़े गए हैं। नवंबर माह में जीएस श्रेणी के एक हजार से ज्यादा कोच लगभग साढ़े छह सौ नियमित ट्रेनों में जोड़े जाएंगे। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सूचना व प्रचार) दिलीप कुमार ने बताया कि सामान्य श्रेणी के यात्री रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। इस श्रेणी के यात्रियों को अधिकतम सुविधा मुहैया कराने की दिशा में रेलवे विभिन्न दिशाओं में कार्य कर रहा है। इसके तहत जुलाई से अक्टूबर के तीन माह के दौरान जीएस श्रेणी के कुल 583 नए कोचों का निर्माण किया गया। साथ ही इन नवनिर्मित कोचों को 229 नियमित ट्रेनों में जोड़ा गया है। इससे रोजाना हजारों अतिरिक्त यात्रियों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इस नवंबर माह तक जीएस श्रेणी के कुल एक हजार से ज्यादा नए कोच तैयार होकर रेलवे के बेड़े में जुड़ जाएंगे। इन्हें 647 नियमित ट्रेनों में जोड़ा जाएगा। इन डिब्बों के शामिल होने से रोजाना करीब एक लाख अतिरिक्त सवारी रेल यात्रा के सफर का लाभ उठा पाएंगे। नए जीएस कोचों का निर्माण तेजी से चल रहा कार्यकारी निदेशक ने बताया कि सामान्य श्रेणी के यात्रियों की सुविधाओं के मद्देनजर नए जीएस कोचों का निर्माण तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों में रेलवे के बेड़े में ऐसे गैर-वातानुकूलित सामान्य श्रेणी के दस हजार से ज्यादा जीएस कोचों को शामिल कर लिया जाएगा। इनमें छह हजार से ज्यादा जीएस कोच होंगे, जबकि बाकी डिब्बे स्लीपर श्रेणी के होंगे। इतनी बड़ी संख्या में नान एसी कोचों के शामिल होने से सामान्य श्रेणी के करीब आठ लाख अतिरिक्त यात्री रोजाना रेल यात्रा का सफर कर पाएंगे। जीएस श्रेणी के ये नवनिर्मित तमाम कोच एलएचबी के होंगे। हादसे की स्थिति में इन कोचों में नुकसान भी कम से कम होगा। यात्रियों की सुविधाओं में विस्तार सर्वोच्च प्राथमिकता रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सूचना और प्रचार) दिलीप कुमार ने सामान्य श्रेणी के यात्रियों की नई सुविधाओं को लेकर जानकारी दी है। कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि सामान्य कोच में यात्रा करने वाले यात्री रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल हैं। यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में रेलवे लगातार कार्य कर रहा है। इसके तहत जुलाई से अक्टूबर तीन महीने में 583 नए जनरल कोच का निर्माण किया गया। इन कोचों को नियमित 229 ट्रेनों में जोड़ा गया है। ट्रेनों में जनरल कोच की संख्या बढ़ने से यात्रियों का सफर आसान हुआ है। साथ ही हर दिन अतिरिक्त यात्रियों की यात्रा सुखद हो रही है। एक हजार से ज्यादा नए सामान्य कोच होंगे तैयार     रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सूचना और प्रचार) दिलीप कुमार ने आगे योजनाओं को लेकर बताया कि बताया कि नवंबर तक सामान्य श्रेणी के एक हजार से ज्यादा नए कोच तैयार होंगे। ये नए कोट जल्द रेलवे के बेड़े में शामिल हो जाएंगे। इन कोचों को नियमित 647 ट्रेनों में लगाया जाएगा। इन कोच के ट्रेनों में लगने से रोजाना करीब 1 लाख अतिरिक्त यात्री सफर का लाभ उठा पाएंगे। सामान्य कोच के यात्रियों का सफर होगा आसान कार्यकारी निदेशक ने आगे बताया कि सामान्य कोच से सफर करने वाले यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नए जनरल कोच का निर्माण तेजी से किया रहा है। अगले दो साल में रेलवे के बेड़े में गैर-वातानुकूलित सामान्य श्रेणी के 10 हजार से ज्यादा जनरल कोच शामिल होंगे। इनमें छह हजार से ज्यादा सामान्य कोच और बाकी डिब्बे स्लीपर श्रेणी के होंगे। इतनी बड़ी संख्या में नॉन एसी कोचों के शामिल होने से सामान्य श्रेणी के करीब आठ लाख अतिरिक्त यात्री रोजाना रेल यात्रा का सफर कर पाएंगे। LHB डिजाइन के नए जनरल कोच रेलवे के बेड़े में शामिल नए जनरल कोच LHB डिजाइन के होंगे। इन डिब्बों से सफर आरामदायक और सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ सुरक्षित बनाने में भी मदद करेगी। पारंपरिक आईसीएफ रेल बोगी के मुकाबले ये नए LHB कोच हल्के और बेहद मजबूत हैं। हादसे की स्थिति में इन बोगियों को नुकसान कम होगा। recent visitors 76

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पदयात्रा के चलते मध्य प्रदेश की पुलिस सहित उत्तर प्रदेश की पुलिस भी अलर्ट

छतरपुर बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा बागेश्वर धाम से ओरछा तक 160 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली जाएगी. उनकी यात्रा की शुरुआत आज  21 नवंबर से शुरू होगी. यात्रा मप्र सहित यूपी के जिले में भी प्रवेश करेगी, जिसके चलते मध्य प्रदेश की पुलिस सहित उत्तर प्रदेश की पुलिस भी यात्रा को लेकर अलर्ट है. बता दें हिंदू एकता की अलख जगाने के लिए बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री द्वारा बागेश्वर धाम से ओरछा तक 160 किलोमीटर पदयात्रा निकाली जा रही है. पदयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह का माहौल बना हुआ है. बागेश्वर धाम से लेकर ओरछा तक के रास्ते भर के गांव के श्रद्धालु पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. यात्राआज 21 नवंबर से बागेश्वर धाम से शुरू होगी, जो कि 29 नवंबर को ओरछा में समाप्त होगी.   यात्रा में ये संत होंगे शामिल यात्रा में मूलक पीठाधीश्वर राजेन्द्र दास महाराज, जगत गुरू रामभद्राचार्य महाराज, हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास महाराज, इन्द्रशेश महाराज, सुदामा कुटी के सतीक्ष्णदास, संजीव कृष्ण ठाकुर, अनुरुद्धाचार्य महाराज, जगतगुरू वल्लभाचार्य महाराज, गोरीलाल कुंज के महंत किशोर दास महाराज शामिल होंगे. यात्रा का 7 दिवसीय प्लान • पहला दिन: 21 नवंबर को यात्रा बागेश्वर धाम से शुरू होगी, इसके बाद फोर लेन रोड होते हुए पहला स्टॉप कदारी गांव में होगा. • दूसरा दिन: दूसरे दिन यात्रा करीब 18 किलोमीटर चलकर छतरपुर जिले के पेप्टेक टाउन पहुंचेगी. • तीसरा दिन: 23 तारीख को यात्रा का नौगांव में विश्राम होगा. • चौथा दिन: चौथे दिन पं. धीरेन्द्र शास्त्री देवरी डेम में विश्राम करेंगे. • पांचवां दिन: यात्रा मऊरानीपुर में विश्राम करेगी. • छठवां दिन: यात्रा निवाड़ी में विश्राम करेगी. • सातवां दिन: अंतिम दिन यात्रा यादव ढाबा होते हुए ओरछा धाम पहुंचेगी, जहां यात्रा का समापन होगा. • सनातनी हिंदू एकता पदयात्रा को लेकर जबरदस्त तैयारियां की गई है. छतरपुर की सड़कें और यात्रा मार्ग पोस्टरों से पट गए हैं. recent visitors 78