अब रतलाम-चंदेरिया, नागदा-भोपाल सेक्शन में कवच लगने से नीमच, मंदसौर, उज्जैन, भोपाल तक ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी

रतलाम  ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के साथ ही सुरक्षा को लेकर रेलवे संसाधन मजबूत कर रहा है। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग के साथ ही रतलाम रेल मंडल में रतलाम से चंदेरिया और नागदा से भोपाल तक का सेक्शन भी कवच युक्त होगा। इसके लिए रेल मंडल से टेंडर जारी हो गए हैं। काम पूरा करने के लिए दो साल की समय सीमा रखी गई है। इससे नीमच, मंदसौर के साथ ही उज्जैन, भोपाल तक ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई जा सकेगी। रतलाम-चंदेरिया और नागदा-भोपाल सेक्शन पर कवच संस्करण 4.0 का प्रावधान किया जाएगा। इसमें 120.72 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रतलाम रेल मंडल के 427.83 किलोमीटर के पूर्ण ब्लाक सेक्शन में यह प्रणाली लगाई जाएगी। चार दिसंबर तक टेंडर भरे जा सकेंगे। मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग के 789 किमी में से 503 में ट्रायल पूरा     इधर मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग पर ट्रेनों की स्पीड 160 किमी प्रति घंटा करने के लिए मिशन रफ्तार में ब्रिजों के मरम्मत, ओएचई का रख-रखाव, सिगनलिंग सिस्टम में सुधार, कर्व का री-अलाइनमेंट, एचबीम स्लीपर लगाए गए हैं।     वर्तमान में वडोदरा-अहमदाबाद खंड सहित मुंबई सेंट्रल-नागदा खंड पर 90 लोको के साथ 789 किलोमीटर पर कवच का काम चल रहा है। इसमें से 503 किलोमीटर तक लोको परीक्षण हो चुका है।     90 में से 73 लोकोमोटिव पहले ही कवच प्रणाली से लैस किया जा चुका है। वडोदरा-रतलाम-नागदा सेक्शन के 303 किलोमीटर में 173 पर लोको ट्रायल पूरा हो चुका है। मार्च 2025 तक काम पूरा होने की संभावना है। क्या है कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा तकनीक 'कवच' ट्रेन सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बढ़ाती है। इसमें इंजन पर लगे सेंसर, जीपीएस सिस्टम से एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आमने-सामने आने पर स्वचालित ब्रेक लग जाते हैं। आरडीएसओ द्वारा विकसित कवच को ट्रेन टकरावों को रोकने, खतरे में सिगनल पासिंग से बचने में लोको पायलटों को सहायता मिलती है। इससे 200 किमी प्रति घंटे तक की गति को समायोजित किया जा सकता है। ट्रेनें तय गति सीमा के भीतर चले और इसकी रियल टाइम निगरानी भी होगी। यह काम भी किए ट्रैक पर पशु आदि न आए, इसके लिए नागदा-गोधरा खंड में लगभग 56 करोड़ की लागत से रेलवे ट्रैक के दोनों ओर कुल 160 किलोमीटर बाउंड्रीवाल का निर्माण होना है। करीब 100 किमी की बाउंड्रीवाल बनाई जा चुकी है। recent visitors 122

चीन ने HLACM 4 हजार किलोमीटर तक 6100 km/hr की तेज गति से हमला करने वाली मिसाइल

बीजिंग 17 नवंबर 2024 को सिर्फ भारत ने ही हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण नहीं किया. बल्कि चीन ने अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल DF-100 यानी डॉन्गफेंग-100 का भी रेंज बढ़ा लिया. यह मिसाइल कहने को तो सुपरसोनिक है, लेकिन चीन चाहे तो इसे हाइपरसोनिक लैंड अटैक क्रूज मिसाइल – HLACM बना सकती है. HLACM यानी 4 हजार किलोमीटर तक 6100 km/hr की तेज गति से हमला करने वाली मिसाइल. इसकी सटीकता ही इसे सबसे ज्यादा घातक बनाती है. इसकी एक्यूरेसी 1 मीटर है. यानी टारगेट से सिर्फ एक मीटर ही इधर-उधर होगी. इससे ज्यादा नहीं. इसकी लॉन्चिंग के लिए चीन अपने H-6K बॉम्बर का इस्तेमाल भी करता है. पहले चीन के इस मिसाइल की रेंज 2 से 3 हजार किलोमीटर थी. जिसे अभी चीन ने बढ़ाकर 4 हजार कर दिया है. इसे लॉन्च करने के लिए 10×10 ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन बमवर्षक से भी लॉन्च की जा सकती है. अब यह मिसाइल 4700 km/hr की स्पीड से उड़ान भरते हुए 4 हजार किलोमीटर तक जा सकती है. सबसे आधुनिक गाइडेंस सिस्टम से लैस यह मिसाइल लॉन्च होने के बाद 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाती है, उसके बाद यह टारगेट की तरफ घूम जाती है. इसके उड़ान की ऊंचाई ऐसी रखी गई है ताकि इसे एटमॉस्फियरिक दबाव कम झेलना पड़े. साथ ही राडार की पकड़ में न आए. इसके गाइडेंस सिस्टम में इनर्शियल नेविगेशन है. टरेन मैचिंग, सीन मैचिंग और सैटेलाइट पोजिशनिंग जैसी सुविधा है. यानी दुश्मन टारगेट के बचने का कोई चांस ही नहीं. सटीकता और हथियार ही बनाता है इसे खास 9 मीटर लंबी यह मिसाइल अपने साथ 0.7 से 1 मीटर व्यास और 500 किलोग्राम वजन वाले हथियार को ले जा सकती है. इस मिसाइल में रैमजेट इंजन लगा है, जो इसे 6100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार देता है. जैसे ही मिसाइल का वेपन ग्लाइड फेज में आता है ये तेज गति में भी दिशा और दशा बदल सकती है. इसकी वजह से इसे एयर डिफेंस सिस्टम इंटरसेप्ट नहीं कर पाते. यह चलते-फिरते टारगेट पर भी हमला कर सकती है. अमेरिका-जापान के सैन्य अड्डे निशाने पर पहले इसकी रेंज सिर्फ ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, फिलिपींस जैसी जगहों तक ही थी. लेकिन रेंज बढ़ने के बाद अब यह गुआम में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस पर भी हमला कर सकती है. यानी अमेरिका और जापान के दूसरे सैन्य अड्डों को भी इस मिसाइल से खतरा है. यह मिसाइल रुके हुए और चलते हुए किसी भी जहाज पर भी हमला कर सकती है. ऐसे में पश्चिमी प्रशांत महासागर में इस मिसाइल का खतरा बना रहेगा.   recent visitors 165

आंध्र प्रदेश में पैदा कर सकेंगे 2 से ज्यादा बच्चे, 30 साल बाद सरकार ने वापस लिया ये आदेश

 हैदराबाद आंध्र प्रदेश सरकार ने बच्चे पैदा करने को लेकर एक बड़ा फैसला किया है. सरकार ने यह नियम खत्म कर दिया है कि दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले उम्मीदवार स्थानीय निकाय चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि है कि अब ज्यादा बच्चे पैदा करने की जरूरत है. सरकार ने एपी पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2024 और एपी नगरपालिका कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित करते हुए यह फैसला पास किया. 1994 में लागू हुई थी व्यवस्था ख्याल रहे कि तीस साल पहले, मई 1994 में, तत्कालीन आंध्र प्रदेश विधानसभा ने एक संशोधन विधेयक पारित किया था, जिसके तहत ग्राम पंचायतों, मंडल प्रजा परिषदों और जिला परिषदों के चुनाव लड़ने वालों के लिए 2 बच्चों का मानदंड अनिवार्य कर दिया गया था. दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवारों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य या अयोग्य माना जाता था. इसका मकसद जनसंख्या पर नियंत्रण रखना था. चंद्रबाबू का बयान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस बात की वकालत कर रहे हैं कि परिवार नियोजन के पिछले सफल क्रियान्वयन के बाद अब वक्त आ गया है कि महिलाओं और परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. नायडू ने तर्क दिया है कि यह एक आर्थिक अनिवार्यता है. विधेयक में क्या है? विधेयकों के अनुसार, "चूंकि प्रजनन दर में गिरावट, जनसंख्या स्थिरीकरण और बदलती सामाजिक-आर्थिक स्थितियां पुरानी और प्रतिकूल साबित हुईं, इसलिए सरकार ने महसूस किया कि जनसंख्या को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाए गए प्रावधानों को निरस्त करने से समावेशी शासन को बढ़ावा मिलेगा." recent visitors 71

वर्षवार भर्ती कैलेंडर जारी, युवाओं को मिलेंगे शासकीय सेवा में नौकरियों के अवसर

भोपाल राज्य शासन अगले 5 वर्षों में 2 लाख 50 हजार सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराने प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के सीधी भर्ती के रिक्त पदों की पूर्ति करने के आदेश जारी कर दिए हैं। रिक्त पदों पर भर्ती के लिए हर साल सरकारी परीक्षा कैलेंडर जारी किया जायेगा। पदों की गणना करने के दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने संकल्प पत्र 2024 के बिन्दु “रोजगार के अवसर” में युवाओं को सरकारी नौकरियों में सेवा का अवसर देने संकल्प दोहराया है। इस संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकारी नौकरियों में भर्ती की सभी औपरिकताएं पूरी की जा रही हैं और जल्दी ही भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जायेगी। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सभी विभागों को भर्ती की प्रक्रिया संबंधी औपचाकिताएं पूरी करने के निर्देश दिये हैं, जिससे वर्षवार भर्ती की प्रक्रिया बिना रूकावट पूरी की जा सके। राज्य शासन के इस निर्णय से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पहले जारी निर्देश एवं आदेश निष्प्रभावी होंगे। लेकिन पहले जारी आदेशों, परिपत्रों के आधार पर ऐसे रिक्त पदों पर, जिन पर विभागों द्वारा दिनांक 30 अक्टूबर, 2024 तक भर्ती की कार्यवाही कर दी गई है, वह निरस्त नहीं मानी जायेगी। इनमें सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कार्यवाही कर्मचारी चयन मण्डल, म.प्र. लोक सेवा आयोग/ अन्य संस्था को प्रेषित किये गये हैं। इसके अलावा नियुक्ति की जा चुकी है परंतु कार्यभार ग्रहण किया जाना शेष है या परीक्षा परिणाम के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी किया जाना शेष है। मुख्य रूप से संवर्ग में स्वीकृत पदों के आधार पर 5% पदों की ही सीधी भर्ती से पदपूर्ति करने के लिए प्रशासकीय विभाग को अधिकृत किया गया है। यह परिपत्र वर्ष 2028-29 तक के लिये स्थगित किया जाता है। राज्य शासन द्वारा प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी एवं तृतीय श्रेणी के सीधी भर्ती के रिक्त पदों की पूर्ति गणना के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया है। इसके अनुसार सर्वप्रथम प्रत्येक संवर्ग में 1 अप्रैल 2024 की स्थिति में सीधी भर्ती के रिक्त पदों की गणना की जायेगी। इनमें ऐसे पद जिनके संबंध में कार्यवाही कर्मचारी चयन मंडल/ एमपीपीएससी या अन्य संस्थाओं में प्रचलन में है, रिक्त पदों की गणना में शामिल नहीं किए जायेंगे। ऐसे 13% पद जो पिछड़ा वर्ग के लिए अंतिम परीक्षा परिणाम के बाद रोके गए हैं, इनको भी रिक्त पदों की गणना में नहीं लिया जायेगा। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 1 से 50 तक है, की पद पूर्ति दो चरणों में की जायेगी (अर्थात 50% पद वित्तीय वर्ष 2024-25 में एवं शेष 50% पद वित्तीय वर्ष 2025-26 में भरे जायेंगे)। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 51 से 200 तक है, उनमें पद पूर्ति तीन चरणो में आधार पर की जायेगी। यदि 33% से कम है, तो एक बार में रिक्त पदों की पूर्ति, यदि 33% अथवा अधिक है पर 66% से कम है तो वर्षवार पदपूर्ति होगी। प्रथम वर्ष 2024-25 में 8% द्वितीय वर्ष 2025-26 में 46% और तृतीय वर्ष 2026-27 में 46% की पदपूर्ति होगी। यदि रिक्त पदों की संख्या यदि 66% अथवा अधिक है तो वर्षवार पदपूर्ति में, प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, द्वितीय वर्ष 2025-26 में 31%, तृतीय वर्ष 2026-27 में 31%, चतुर्थ वर्ष 2027-28 में 30% भर्ती होगी। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 200 से अधिक है वहां पदपूर्ति के संबंध में निम्न सिद्धांत अपनाए जायेंगे। सीधी भर्ती के रिक्त पदों की संख्या यदि 25% से कम है, तो एक बार में रिक्त पदों की पूर्ति होगी। यदि 25% अथवा अधिक है, पर 50% से सीधी भर्ती के रिक्त पद कम है तो वर्षवार पदपूर्ति होगी। इसमें प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, दूसरे साल 2025-26 में 46% और तीसरे साल 2026-27 में 46% पदों की पूर्ति होगी। रिक्त पद यदि 50% या उससे अधिक या 75% से कम है, तो प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, दूसरे साल 2025-26 में 31%, तीसरे साल 2026-27 में 31% और चौथे साल 2027-28 में 30% पदों की पूर्ति होगी। इसी प्रकार यदि रिक्त पर 75% या उससे ज्यादा है, तो प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, सीधी भर्ती के कुल पद द्वितीय वर्ष 2025-26 में 23% तृतीय वर्ष 2026-27 में 23%, चतुर्थ वर्ष 2027-28 में 23%, और वर्ष 2028-29 में 23% पदों पर भर्ती होगी। डाईंग संवर्गों में भर्ती नहीं राज्य शासन द्वारा डाईंग संवर्ग घोषित किये जा चुके संवर्गों में किसी भी प्रकार से कोई भर्ती नहीं की जायेगी। अनुबंधित वाहन के लिए वाहन चालको के पद पर सीधी भर्ती आवश्यक नहीं है। जिन विभागों के पास स्वयं के वाहन है, वे भी वाहन चालक के कार्य हेतु सेवायें आउटसोर्स के माध्यम से प्राप्त करने पर विचार करें। विशिष्ट विभाग जहाँ वाहन चालकों के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती अतिआवश्यक है, वे वित्त विभाग को तथ्यों सहित प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुये स्वीकृति प्राप्त करें। राज्य शासन के विभिन्न कार्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के पदों के विरूद्ध कार्य करने के लिये व्यक्तियों की पूर्ति आउटसोर्स पर करने के लिए चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों की सेवायें प्राप्त करने संबंधी नीति-निर्देश के अनुसार कार्यवाही की जायेगी। विशिष्ट विभाग जहाँ चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती अतिआवश्यक है, वे वित्त विभाग को तथ्यों सहित प्रस्ताव प्रेषित करते हुये स्वीकृति प्राप्त करेंगे। इस बात का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये गये हैं कि रिक्त पदों की पूर्ति के समय कैडर मेनेजमेंट प्रभावित न हो।   recent visitors 84

महाराष्ट्र और झारखंड में अगली सरकार किसकी बनेगी, आज जनता कर रही मताधिकार का इस्तेमाल

नई दिल्ली  महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है।आज  20 नवंबर यानी बुधवार को हो रही वोटिंग । इसी के साथ लोगों को चुनाव नतीजों का इंतजार रहेगा। हर कोई ये जानना चाहता है कि आखिर महाराष्ट्र और झारखंड में अगली सरकार किसकी बनेगी। आखिर दोनों ही राज्यों की जनता के मन में क्या है? क्या दोनों राज्यों में मौजूदा सरकार की वापसी होगी या फिर आवाम बदलाव को लेकर वोट करेगी? इन सभी सवालों के जवाब 23 नवंबर को मिल जाएंगे। जी हां… 23 नवंबर, यही वो दिन है जब दोनों राज्यों की जनता का फैसला सबके सामने आएगा। आज 20 को वोटिंग, 23 नवंबर को नतीजे 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र और 81 सीटों वाले झारखंड राज्य में बाकी बची 38 विधानसभा सीटों के लिए बुधवार को मतदान है। सोमवार को दोनों राज्यों के साथ ही उपचुनाव के लिए भी चुनाव प्रचार थम गया। अब कोई भी उम्मीदवार, पार्टी या नेता कोई चुनावी रैली या किसी भी तरह से प्रचार नहीं कर सकता। दोनों राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 15 राज्यों की 48 विधानसभा और दो लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भी वोटों की गिनती 23 नवंबर को की जाएगी। महाराष्ट्र-झारखंड में कौन बनाएगा सरकार? महाराष्ट्र और झारखंड में नई सरकार किसकी बनेगी ये 23 नवंबर यानी शनिवार को फाइनल हो जाएगा। इसी के साथ करीब महीनेभर से ज्यादा समय से जारी चुनावी घमासान थम जाएगा। जनता का फैसला इस बार किसके हक में जाएगा, चुनाव परिणाम में कौन बाजी मारेगा ये सब कुछ 23 नवंबर को सुबह 8 बजे वोटों की गिनती शुरू होने के साथ ही साफ हो जाएगा। दोपहर तक कौन नई सरकार बनाएगा ये भी स्पष्ट हो जाएगा। क्या है जनता का मूड, 23 नवंबर को हो जाएगा साफ महाराष्ट्र की बात करें तो यहां बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन की सरकार है। इसमें भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (पवार गुट) शामिल हैं। इस चुनाव में भी महायुति गठबंधन एक साथ चुनावी रण में उतरी है। उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), एनसीपी (शरद पवार गुट) के महा विकास अघाड़ी गठबंधन से हैं। वहीं झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी गठबंधन की सरकार चल रही। इस चुनाव में प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी का सीधा मुकाबला इंडिया गठबंधन यानी कांग्रेस-जेएमएम-आरजेडी गठबंधन से है। देखना होगा कि दोनों राज्यों की जनता किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाती है। बस करिए 23 नवंबर का इंतजार। recent visitors 93

मुख्यमंत्री के समक्ष सरकारी आवास पर उच्चस्तरीय बैठक में नाइट सफारी पार्क एवं जू का प्रस्तुतिकरण किया गया

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि दिसंबर 2026 में उत्तर प्रदेश देश को पहली नाइट सफारी का उपहार देगा। राजधानी लखनऊ में बनने जा रही यह नाइट सफारी देश और दुनिया के प्रकृति प्रेमियों के लिए एक नया गंतव्य होगा। यह दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी होगी। मुख्यमंत्री के समक्ष मंगलवार को उनके सरकारी आवास पर उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी पार्क एवं जू का प्रस्तुतिकरण किया गया। सीएम योगी ने कहा कि निर्माण कार्य हर हाल में जून 2026 तक पूरा कर लिया जाए। नाइट सफारी और जू के लिए वन्य जीवों के लाने की समुचित व्यवस्था प्रारंभ कर दी जाए। नाइट सफारी और जू की इकोनॉमी के लिए सस्टेनेबल मॉडल विकसित किया जाए। 72 फीसदी एरिया में ग्रीनरी विकसित की जाए और यहां सौर ऊर्जा प्रकल्पों को भी स्थान दिया जाए। सीएम योगी ने कहा कि नाइट सफारी प्रोजेक्ट राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है, इसके निर्माण के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली से अनुमति प्राप्त हो गई है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में दिसंबर 2026 में देश को पहली नाइट सफारी का उपहार मिल जाएगा। नाइट और डे सफारी का निर्माण चरणबद्ध रूप से होगा। लखनऊ में यह लगभग 900 एकड़ से अधिक में फैली होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुकरैल नाइट सफारी का निर्माण हो जाने के पश्चात यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर आ जाने के फलस्वरूप विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी। कुकरैल नाइट सफारी परियोजना को लखनऊ स्थित अन्य पर्यटन स्थलों से भी जोड़ा जाएगा। नाइट सफारी के 72 फीसदी एरिया को ग्रीनरी में विकसित किया जाए। सीएम योगी ने कहा कि जानवरों को चिह्नित करने, यहां लाने व क्वारंटीन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाए। कुकरैल नाइट सफारी परियोजना के अंतर्गत ईको टूरिज्म जोन भी विकसित किया जाएगा। सौर ऊर्जा के प्रकल्पों को स्थान दिया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि यहां क्वारंटीन सेंटर, वेटनरी हॉस्पिटल, पोस्ट ऑपरेशन व ऑपरेशन थियेटर की भी समुचित व्यवस्था हो। यहां कैफेटेरिया, 7 डी थियेटर, ऑडिटोरियम, पार्किंग आदि की भी सुविधा हो। एडवेंचर जोन के तहत सुपरमैन जिपलाइन, आर्चरी, जिप लाइन, बुरमा ब्रिज, पैडल बोट, स्काई रोलर, फाउंटेन, किड्स एक्टिविटी के लिए जंगल एनिमल थीम, स्काई साइकिल आदि विकसित किया जाए। डे सफारी का विस्तार दूसरे चरण में होगा। बैठक में प्रदेश सरकार के वन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, शासन व वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। नाइट-डे सफारी की विशेषता :- नाइट सफारी क्षेत्र में इंडियन वॉकिंग ट्रे, इंडियन फुटहिल, इंडियन वेटलैंड, एरिड इंडिया व अफ्रीकन वेटलैंट की थीम पर विकसित किए जाने वाले क्षेत्र मुख्य आकर्षण होंगे। पर्यटकों द्वारा नाइट सफारी पार्क के अवलोकन हेतु 5.5 किमी. ट्रामवे तथा 1.92 किमी. का पाथवे माध्यम से किया जाएगा। नाइट सफारी में मुख्यत: एशियाटिक लॉयन, घड़ियाल, बंगाल टाइगर, उड़न गिलहरी, तेंदुआ, हॉयना आदि मुख्य आकर्षण होंगे। कुकरैल नााइट सफारी परियोजना के अंतर्गत विश्व स्तरीय वन्य जीव चिकित्सालय व रेस्क्यू सेंटर का निर्माण भी प्रस्तावित है। कुकरैल वन क्षेत्र में स्थापित होने वाले जू में कुल 63 इनक्लोजर बनाए जाएंगे। जू में सारस क्रेन, स्वांप डियर, हिमालयन भालू, साउथ अफ्रीकन जिराफ, अफ्रीकन लॉयन व चिंपाजी मुख्य आकर्षण होंगे। जू को अफ्रीकन सवाना, इनक्रेडिबल इंडिया, इंजीनियर्ड वेटलैंड नामक थीम क्षेत्रों पर विकसित किया जाएगा। recent visitors 85

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों और संपदा से संपन्न राज्य है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों और संपदा से संपन्न राज्य है। प्रदेश की हर काल और युग में विशेष सांस्कृतिक पहचान रही है। आधुनिक काल में औद्योगिक समृद्धि के आधार पर देश का नंबर वन राज्य बनाने के संकल्प के साथ प्रदेश में रोजगारपरक उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश की समृद्ध प्राचीन संस्कृति और कलात्मक धरोहर को संजोए रखते हुए जन-कल्याणकारी नीतियों के माध्यम से उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार कर प्रदेश में व्यापार, उद्योग और सेवा क्षेत्रों का वृहद विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चल रहे 43वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग स्थित है। यह नदियों का मायका है, जहां पावन नर्मदा और शिप्रा नदियां बहती हैं। प्रदेश वन्य-जीव से संपन्न एकमात्र टाइगर स्टेट, तेंदुआ स्टेट और चीता स्टेट राज्य है। प्रदेश में खनिज संपदा भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और यह एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है। इसके अलावा प्रदेश की सदियों से कला, संस्कृति और सभ्यता की विशेष पहचान रही है। इसका 5 हजार साल पुराना समृद्ध इतिहास रहा है और यह भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम की कर्मभूमि और तपोभूमि रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐतिहासिक काल से ही प्रदेश की व्यापार और व्यावसायिक समृद्धि की भी विशेष पहचान रही है। इसी क्रम में वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार संभागीय स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और औद्योगिक केंद्रों में रोड-शो कर प्रदेश में उद्योगपतियों को निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है। प्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूह को भी प्रोत्साहित किया जा रही है। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ भारी उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश को सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। मध्यप्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद को अगले 5 साल में दोगुना करने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पित है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि विकसित भारत की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तत्परता के परिणामस्वरुप मध्यप्रदेश औद्योगीकीकरण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की परिकल्पना से रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन के माध्यम से हर जिले में युवा उद्यमी आगे बढ़ रहे है। प्रमुख उद्योगपतियों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. यादव विदेश यात्रा पर भी जाने वाले हैं। विकसित मध्यप्रदेश बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेले में मध्यप्रदेश मंडप का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। उन्होंने मध्यप्रदेश मंडप में लगे विभिन्न स्टॉल का अवलोकन भी किया और शिल्पकारों का मनोबल बढ़ाया। मंडप को ‘विकसित भारत@2047’ की थीम पर विकसित किया गया है, जिसमें प्रदेश की धरोहर के साथ स्टार्ट-अप्स और उद्यमों का कलात्मक प्रदर्शन किया गया है। मंडप में युवा, गरीब, नारी और किसान कल्याण के मिशन को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार भी वितरित किए। मध्यप्रदेश मंडप में बेस्ट स्टॉल डिस्प्ले के लिए पर्यटन विभाग और हस्तकला के लिए मध्यप्रदेश माटीकला बोर्ड को पुरस्कृत किया गया। मंडप में सर्वश्रेष्ठ सजीव कला प्रदर्शन के लिए श्री मोहम्मद यूसुफ खत्री को सम्मानित किया गया। साथ ही मध्यप्रदेश मंडप के अन्य प्रतिभागियों को भी श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश दिवस समारोह में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक कार्यक्रम की झलक देखने को मिली। डॉ. शिप्रा सुल्लेरे के संगीत निर्देशन और श्री दविंदर सिंह ग्रोवर के संयोजन में जबलपुर के श्री जानकी बैंड की प्रस्तुति दी गई। सुश्री पूजा श्रीवास्तव के निर्देशन में बुंदेलखंड के अखाड़ा लोक नृत्य की भी मनमोहक प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी और मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम के प्रबंध संचालक श्री दिलीप कुमार भी उपस्थित थे।   recent visitors 84