CG लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष 45 लाख की रिश्वत लेने में गिरफ्तार, जानें क्या मामला

रायपुर छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर सीबीआई ने सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पॉवर एंड इस्पात के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया है। पीएससी घोटाले में यह पहली गिरफ्तारी की गई है। गिरफ्तारी बजरंग इस्पात के डायरेक्टर पर अपने रिश्तेदार को नौकरी लगवाने के नाम पर 45 लाख रुपए रिश्वत देने के मामले में हुई है। सीबीआई का ताबड़तोड़ एक्शन  बताया जाता है कि राज्य सेवा परीक्षा के जरिए नौकरी लगाने के नाम पर लेनदेन हुई थी। जांच के दौरान इसकी पुष्टि होने पर बजरंग इस्पात के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि विधानसभा चुनाव के दौरान आयोजित रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए पीएससी में हुए घोटाले पर कार्रवाई की गारंटी दी थी। जिसके बाद विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री बनते ही मामले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए। सीबीआई सोमवार को प्रदेश में एक्शन मोड में दिखी। सीबीआई ने सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को पीएससी घोटाले में गिरफ्तार कर लिया। दूसरी ओर शराब घोटाले में आबकारी विभाग के विशेष सचिव एपी त्रिपाठी से सीबीाई की पूछताछ का रास्ता साफ हो गया है। वहीं कोरबा में सीबीआई की टीम ने श्रमिक नेता के घर आर्थिक गड़बड़ी के मामले में छापा मारा।  ईओडब्ल्यू ने सीबीआई को सौंपी थी फाइल पीएससी घोटाले में एफआईआर दर्ज करने के बाद ईओडब्ल्यू वर्ष 2019 से 2022 में आयोजित सीजीपीएस परीक्षा में अफसर, नेताओं तथा प्रभावशाली लोगों के 18 रिश्तेदार, परिजन तथा करीबियों से रिश्वत लेकर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी सहित अन्य पदों पर चयन करने के आरोप के बाद एफआईआर की थी। इसके अलावा सीजीपीएसी के एक प्रतिभागी ने बालोद, अर्जुंदा थाने में फरवरी में एफआईआर दर्ज कराई थी। मिली अनुमति: एपी त्रिपाठी से होगी पूछताछ रायपुर में सीबीआई 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा के शराब घोटाले में आबकारी विभाग के विशेष सचिव एपी त्रिपाठी से पूछताछ करेगी। राज्य सरकार की अनुमति मिलने के बाद जल्दी ईडी और ईओडब्ल्यू के बाद सीबीआई भी एफआईआर दर्ज कर सकती है। साथी इस प्रकरण में बनाए गए अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ करने रिमांड पर लिया जा सकता है। बता दे कि आबकारी विभाग के विशेष सचिव रहे एपी त्रिपाठी के खिलाफ झारखंड में शराब घोटाला करने के अपराध दर्ज है। इस समय एपी त्रिपाठी को रायपुर से जगदलपुर जेल शिफ्ट किया गया है। कोरबा: श्रमिक नेता के घर सीबीआई की रेड सीबीआई की टीम ने कोरबा के हरदीबाजार और दीपका क्षेत्र में छापेमारी की। इंटक के जिलाध्यक्ष श्यामू (खुशाल जायसवाल) के निवास व दीपका के एक व्यवसायी राजेश जायसवाल के घर व दुकान में दबिश दी। उनके संपत्ति सहित आय के अन्य स्रोतों की जांच की। सीबीआई की यह कार्यवाही सुबह 6 बजे से शुरू हुई जो दोपहर बाद तक जारी रही। लेकिन सीबीआई ने इस मामले को लेकर दोनों ही स्थानों पर कई घंटे तक तलाशी ली और परिवार की आय और संपत्ति के स्रोत का पता लगाया। मुआवजा वितरण में गड़बड़ी का मामला बताया जाता है कि यह पूरा मामला एसईसीएल की दीपका खदान के लिए अधिग्रहित गांव सुआभोड़ी और मलगांव की जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा वितरण से जुड़ा है। कई पात्र लोगों को अफसरों ने अलग-अलग कारणों का हवाला देकर अपात्र कर दिया है तो कई अपात्र लोगों को ज्यादा मुआवजा मिला है। ये है विवाद CGPSC 2019 से 2022 तक की भर्ती में कुछ अभ्यर्थियों के चयन को लेकर विवाद है। EOW और अर्जुंदा पुलिस ने भ्रष्टाचार-अनियमितता के आरोप में केस दर्ज किया है। PSC ने 2020 में 175 पदों पर और 2021 में 171 पदों पर परीक्षा ली थी। इन्हीं भर्तियों को लेकर ज्यादा विवाद है। आरोप है कि तत्कालीन चेयरमैन सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों समेत कांग्रेसी नेता और ब्यूरोक्रेट्स के बच्चों की नौकरी लगवाई है। 171 पदों के लिए हुई थी भर्ती परीक्षा CGPSC परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया। इसमें 2 हजार 565 पास हुए थे। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की सिलेक्शन लिस्ट जारी हुई। recent visitors 74

साइबर सुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम बनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश बनेगा आईटी और साइंस का नया हब: मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश की टेक्नोलॉजी में मध्यप्रदेश दे रहा है महत्वपूर्ण योगदान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव साइबर सुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम बनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव शासकीय विभागों में हुआ 105 मुख्य सूचना अधिकारियों का पंजीकरण भारत भी अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में बन रहा है महाशक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकौशल विज्ञान मेले को किया वर्चुअली संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश आने वाले समय में विज्ञान प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी और इन क्षेत्रों से जुड़ी सेवाओं का नया हब बनकर देश में उभरेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में फार्मिंग से लेकर फायनेंस तक, मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर मेडिसिन तक, एजुकेशन से लेकर कम्यूनिकेशन तक विज्ञान का उपयोग किया जा रहा है। देश की टेक्नोलॉजी में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सुशासन के माध्यम से जन-कल्याण पर जोर दिया जा रहा है इसके लिए राज्य सरकार के विभागों में डिजिटलाइज्ड प्रणाली संचालित है। अनेक नवाचार भी हुए हैं। मध्यप्रदेश में आईटी और आईटीईएस क्षेत्र में निवेश भी बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश विज्ञान परिषद विद्यार्थियों को स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए मंच प्रदान कर रही है। सेटैलाइट इमेजरी एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली के उपयोग से जन-कल्याण के कई कार्य हो रहे हैं। किसानों के खसरे, नामांकन, बटांकन आदि के कार्य और दस्तावेज पंजीयन साइबर तहसील के माध्यम से हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को जबलपुर में चार दिवसीय महाकौशल विज्ञान मेला और आरोग्य एक्सपो-2024 के समापन समारोह को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराष्ट्र भ्रमण पर रहते हुए जबलपुर के आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं। डिजीटल नवाचार, सुशासन और जन-कल्याण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में साइबर सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश कम्प्यूटर एमरजेंसी रिस्पांस टीम(MP-CERT) का गठन किया गया है। सभी शासकीय विभाग मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी का पंजीकरण करवा चुके हैं। इस तरह के 105 अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जहां जबलपुर में 17 करोड़ से अधिक लागत से साइंस सेंटर की पहल हुई है वहीं उज्जैन में 230 करोड़ लागत से साइंस सिटी का निर्माण हो रहा है। आईआईटी जैसी संस्थाओं के विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे। वर्ष 2013 में प्रथम तारामंडल प्रारंभ हुआ था जिसे अपग्रेड किया गया है। अत्याधुनिक थ्रीडी 4K तकनीक से विकसित नई व्यवस्था में इस वर्ष 400 सफल शो किए जा चुके हैं। इसी तरह अत्याधुनिक प्लेटोरियम, स्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन के उपयोग और नल-जल योजनाओं से लेकर सम्पत्ति की प्रक्रिया में नई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल हो रहा है। उज्जैन के डोंगला स्थित अंतर्राष्ट्रीय स्तर की वेधशाला के निर्माण से एस्ट्रोनामी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को नई पहचान मिली है। भारत बन रहा महाशक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत साइकिल और बैलगाड़ी से प्रारंभ हुई अपनी अंतरिक्ष यात्रा को चंद्रमा, मंगल और सूर्य की तरफ बढ़ा चुका है। प्रधानमंत्री मोदी जैसे सक्षम नेता वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाने में साथ हों तो सफलता मिल ही जाती है। प्रधानमंत्री ने अनुसंधान के मार्ग को प्रशस्त किया है। आज इसरो ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रगति से दुनिया को परिचित करवा दिया है। एक महाशक्ति के रूप में भारत अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने जय-जवान- जय किसान का नारा दिया। भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने जय विज्ञान का नारा दिया। वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी ने जय अनुसंधान के मूल मंत्र पर जोर दिया है। एक समय था जब अनुसंधान को महत्वपूर्ण नहीं माना जाता था। प्रत्येक अनुसंधान कार्य सफल हो, यह आवश्यक नहीं लेकिन हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों के मनोबल को बढ़ाया है। डोंगला की वेधशाला अब अंतर्राष्ट्रीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा वर्तमान में समय की गणना ग्रीनविच से हो रही है। डोंगला स्थित वेधशाला से शुद्ध समय की गणना संभव होगी। उज्जैन में वैदिक घड़ी की स्थापना की गई है। आने वाले समय में इस तरह के कई टास्क मध्यप्रदेश द्वारा लिए जाएंगे। प्रदेश में नव वैज्ञानिकों के सम्मेलन भी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर की धरती नवाचारों के लिए जानी जाती है। यहाँ वीरांगना दुर्गावती की स्मृतियां भी जुड़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महाकौशल विज्ञान मेले के माध्यम से इस सार्थक आयोजन से जुड़े सभी व्यक्तियों को बधाई दी और उनका अभिवादन किया। समापन समारोह में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह, मध्यप्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद के अध्यक्ष अनिल कोठारी, महाकौशल विज्ञान परिषद के अध्यक्ष एस.पी. गौतम सहित परिषद के पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। एक्सपो स्थल पर विज्ञान एवं नवाचारों संबंधी प्रदर्शनी में विभिन्न स्टाल लगाए गये। अतिथियों द्वारा उन्हें पुरस्कृत किया गया।   recent visitors 110

15 हजार करोड़ में बनेगा मध्य प्रदेश -छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस-वे, 300 KM लंबा हाईवे रायपुर से बालाघाट, लखनादौन तक आएगा.

बालाघाट/रायपुर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए एक और खुशखबरी है. क्योंकि रायपुर से लखनादौन के बीच 6 लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे ग्रीन सिग्नल मिल गया है. बताया जा रहा है कि इस नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए 15 हजार करोड़ रुपए की लागत लगेगी. इसका सर्वे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तरफ से पूरा हो चुका है. करीब 300 किलोमीटर लंबा यह हाईवे रायपुर से बालाघाट होते हुए सिवनी जिले के लखनादौन तक आएगा. इस हाईवे के निर्माण से दोनों राज्यों के बीच आने जाने में और फायदा होगा. मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी कनेक्टिविटी नए हाईवे के निर्माण से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी. 300 किलोमीटर लंबा बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे लखनादौन, छबारा, सिवनी, बालाघाट होते हुए रजेगांव तक निकला जाएगा. नव निर्माण योजना की रिपोर्ट दिल्ली भेजी जाएगी. इसमें छोटे से छोटे रूट को प्राथमिकता मिलेगी. इसे बनाने में लगभग पांच साल का वक्त लग सकता हैं. दिल्ली से लखनादौन और रायपुर तक बनने वाला एक्सप्रेस-वे विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे से भी जुड़ेंगे. इसके अलावा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHI) ऐसा मार्ग चुनते हैं, जहां जंगल कम होते है और जहां पर सरकारी जमीन ज्यादा हो, निजी घर आदि ज्यादा न तोड़ने पड़ें. किसी की निजी जमीन का ज्यादा अधिग्रहण नहीं करना पड़े. ऐसी जगह का ज्यादा चयन किया जाता है. लखनादौन और रायपुर आना-जाना होगा आसान लखनादौन से रायपुर तक बनने वाला एक्सप्रेस-वे जबलपुर के लोगों के लिए फायदेमंद होने वाला हैं. जबलपुर के लोगों के लिए एक्सप्रेस-वे निर्माण से जबलपुर से मंडला तक एक नई सड़क निकलेगी. जिससे रायपुर के लोगों का आवाजाही आसान हो जाएगी. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के व्यापारियों का व्यवसाय बढ़ेगा. नए एक्सप्रेस-वे के बन जाने के बाद समय की बचत होगी. जहां 8 घंटे लगते थे वहीं 5 घंटे में सफर पूरा हो जाएगा. लखनादौन से रायपुर से NHI का सर्वे छत्तीसगढ़ के रीजनल आफिसर ने जानकारी देते हुए कहा कि लखनादौन से रायपुर तक नए एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा. 15 हजार करोड़ के बजट को  सहमति मिली गई है. लखनादौन से रायपुर के बीच 6 लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का सर्वे का काम चल रहा है. सर्वे रिपोर्ट हेडक्वार्टर भेजी जाएगी.    इंदौर से सीधा और महाराष्ट्र और हैदराबाद कनेक्ट होंगे मध्यप्रदेश में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर दिनों-दिन अच्छा होता जा रहा है। केंद्र सरकार के द्वारा चलाए जा रहे बड़े-बड़े एक्सप्रेस-वे, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, इकोनॉमिक कॉरिडोर और हाईवे प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में बड़े शहरों की कनेक्टिविटी एमपी से हो रही है। इधर, इंदौर अगले साल तक देश की हाईटेक सिटी हैदराबाद से एक्सप्रेस-वे (Indore-Hyderabad Expressway) के जरिए जुड़ जाएगा। इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे का 70 फीसदी काम पूरा इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे के शुरू से इंदौर और हैदराबाद की दूरी 150 किलोमीटर कम हो जाएगी। इस 713 किलोमीटर प्रोजेक्ट का काम 70 फीसदी पूरा हो चुका है। इसे पूरा करने का लक्ष्य 2025 रखा गया है। इस प्रोजेक्ट के बनते ही एमपी एक बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में सामने आएगा। इतने रूपए में तैयार हो रहा इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य अगले साल तक पूरा होने की संभावना है। सरकार की ओर से 713 किलोमीटर लंबे इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस वे के निर्माण में 15 हजार करोड़ रूपए खर्च कर रही है। महाराष्ट्र और हैदराबाद से सीधा कनेक्ट होगा एमपी इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेस-वे इंदौर को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से जोड़ने का काम करेगा। जिससे इंदौर और हैदराबाद की दूरी 150 किलोमीटर कम हो जाएगी। इस एक्सप्रेस-वे को इच्छापुर, मुक्ताईनगर, जलगांव और अकोला जाने की जरूरत नहीं पडेगी। यह सीधा बुरहानपुर, जलगांव और नांदेड़ होते हुए हैदराबाद को कनेक्ट करेगा। recent visitors 190

करोड़ों बहनों के खाते में 20 वीं किस्त के 1250 रु कब होंगे जारी, अब दिसंबर में अगली किस्त, जानें अपडेट्स

भोपाल मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही बड़ी योजनाओं में से एक है। इसे पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू किया गया था, पहले 1000 रुपए दिए जाते है लेकिन अबवर्तमान में इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं। जून 2023 से नवंबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 18 किश्तों का अंतरण किया गया है।अब योजना की 19वीं किस्त 10 दिसंबर को आएगी।चुंकी आमतौर पर हर महीने की 10 तारीख को योजना की किस्त जारी की जाती है, हालांकि त्यौहारों को देखते हुए समय से पहले भी किस्त जारी कर दी जाती है।इधर, सीएम के राशि बढ़ाने के संकेत के बाद संभावना जताई जा रही है नए साल 2025 में योजना की राशि में इजाफा किया जा सकता है।हालांकि अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।     दरअसल, हाल ही में इंदौर और श्योपुर की विजयपुर विधानसभा में अपने भाषण के दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाने के संकेत दिए थे। इंदौर में अपने संबोधन में सीएम ने कहा था कि योजना की शुरूआत में पात्र लाड़ली बहनों को 1000 रूपये दिये गये। इसके बाद यह राशि बढ़ाकर 1250 रूपये की गई। इस राशि में आगे और भी वृद्धि की जायेगी।     इसके अलावा उपचुनाव की वोटिंग से पहले भी विजयपुर में सीएम ने कहा था कि अभी सरकार 1,250 रुपये जमा कर रही है, इसे (मासिक सहायता) तीन हजार रुपये से बढ़ाकर 5 हजार रुपये भी किया जाएगा,यह सरकार की नीति है। इससे पहले अक्टूबर में विजयपुर विधानसभा में सीएम ने कहा था कि हमने 1000/- रुपये महीना लाड़ली बहना को देना शुरू किये, फिर इसे बढ़ाकर 1250/- कर दिए। आने वाले समय में हम इसे 3000/-रुपये महीना तक लेकर जायेंगे, ये हमारा संकल्प है। मई 2023 में शुरू हुई थी     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     इसमें 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से अक्टूबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 17 किश्तों का अंतरण किया गया है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। किसे मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। कैसे चेक करें लिस्ट में अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी। recent visitors 153

सिकल सेल एनीमिया रोग के जड़ से उन्मूलन के लिए 2 केंद्र की मिली केंद्र’ की मंजूरी

भोपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद-275(1) के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के तहत विशेष विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिये शत-प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में दी जाती है। यह राशि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के जरिये राज्य सरकारों को सीधे आवंटित की जाती है। सिकल सेल एनीमिया रोग के जड़ से उन्मूलन (Root Out) के लिये केन्द्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 275(1) के तहत प्रदेश में 2 उच्च स्तरीय देखभाल केंद्र (Centre Of Competence For Sickle Cell Disease) या कहें 'सिकल सेल रोग के लिए सक्षमता केंद्र' को मंजूरी दी गई है। भोपाल में सिकल सेल रोग के लिये पहला सक्षमता केन्द्र आईसीएमआर के भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, भोपाल में जनजातीय अनुसंधान संस्थान के सहयोग से स्थापित यह केंद्र 'राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन' में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के दूरदर्शी लक्ष्य के साथ स्थापित यह अत्याधुनिक सुविधा, सिकल सेल के रोगियों को आधुनिक निदान, उन्नत उपचार और समग्र पुनर्वास सेवाओं सहित व्यापक देखभाल प्रदान करती है। यहां विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम के साथ यह केंद्र न केवल रोग के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि प्रभावित व्यक्तियों, विशेष रूप से जनजातीय समुदायों के भीतर जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सुरक्षित पुनर्वास पर भी जोर देता है। इस केन्द्र के जरिये सभी सिकल सेल मरीजों के लिए एक स्वस्थ, उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने की लक्ष्यपूर्ति के मिशन को बल मिलेगा। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इसके लिये करीब 2 करोड़ रूपये मंजूर किये हैं। दूसरा इंदौर में स्थापित हो रहा है महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, इंदौर के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग एवं अत्याधुनिक मॉडल ब्लड सेंटर को सिकल सेल उन्मूलन मिशन- 2047 के तहत उच्च स्तरीय देखभाल केंद्र (सक्षमता केंद्र) के रूप में मंजूरी मिली है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई है। इस परियोजना के तहत यहां गुणवत्तापूर्ण इलाज किया जायेगा। इस सेंटर में चिन्हित किए गए रोगियों में आधुनिक मशीनों से पुनः रोग की पुष्टि करना (फाइनल डायग्नोसिस बनाना), रोग की गंभीरता एवं प्रकार का पता लगाने के अलावा सिकल सेल रोग के रोगियों की उच्च स्तरीय एवं आधुनिक उपचार एक ही छत के नीचे प्रदान की जायेंगी। इसी प्रकार सिकल सेल एनीमिया के पेशेंट को विश्वस्तरीय, लुकोरिड्यूस्ड नेट टेस्टेड, रेडिएट रक्त एवं उसके घटक प्रदान करना। डे केयर सेंटर्स को सुसज्जित करना ताकि जिन रोगियों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन होना है उन्हें सुरक्षित एवं सरल तरीके से रक्त और उसके घटक प्रदान किया जा सके। स्वैच्छिक रक्तदान शिवरों का आयोजन करना जिससे रक्त और इसके घटकों की आपूर्ति बनी रहे। जीवन रक्षक पद्धति के रूप में बहुत गंभीर मरीजों में एफरेंस तकनीकी से रेड सेल एक्सचेंज करना। प्रसवपूर्व मामले में कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) की मदद से गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे में सिकल सेल रोग का पता लगाना, मॉलिक्यूलर प्रयोगशाला की स्थापना, नवजात शिशु में सिकल सेल का शीघ्र पता लगाना, सिकल सेल रोग के बारे में जनसाधारण, खासकर जनजातीय क्षेत्रों में जन जागरूकता अभियान चलाना, सिकल सेल से पीड़ित रोगियों में बोनमैरो ट्रांसप्लांट एवं जीन थेरेपी की संभावनाओं का पता लगाना एवं उन्हें इस हेतु तैयारियां करना सहित सिकल सेल के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रशिक्षण भी दिये जायेंगे। इस केन्द्र से इंदौर के समीपस्थ अलीराजपुर, धार, झाबुआ, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, उज्जैन, देवास आदि जिलों के मरीजों को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 1 करोड़ 91 लाख रुपये राशि आवंटित की है। यहां के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के परिसर में पहले से ही बुनियादी ढांचा मौजूद है, जिसमें नवीनीकरण और अन्य आवश्यक कार्य पूर्ण हो चुके हैं। अन्य आवश्यक उपकरणों के लिए शॉर्ट टेंडर जारी किया गया है। टेक्नीशियन और चिकित्सा कर्मचारियों के लिए ओरिएंटेशन का पहला भाग पूरा हो चुका है। यहां सिकल सेल कंसोर्टियम की स्थापना भी कर ली गई है और सभी विभागों से सम्पर्क स्थापित कर सिकल सेल रोग के रोगियों का उच्च स्तरीय इलाज देना भी शुरू कर दिया है। 100 होम-स्टे को मिली मंजूरी अनुच्छेद-275(1) के तहत ही केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को जनजातियों के आजीविका विकास से जुड़ी विशेष परियोजनाओं के लिये सहायता दी जाती है। इसके तहत प्रदेश में 100 जनजातीय ग्रामों में होम स्टे विकास के लिये केन्द्र सरकार द्वारा राशि आवंटित की गई है। इन 100 जनजातीय ग्रामों में प्रत्येक ग्राम में 5 लाख रूपये की लागत से होम-स्टे निर्माण के लिये जरूरी राशि जनजातीय कार्य विभाग को प्राप्त हो गई है। होम-स्टे के लिये शत-प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार द्वारा वहन की जा रही है। 8 वन्या रेडियो स्टेशन के विकास के लिये मिली राशि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 275(1) के तहत प्रदेश में 8 वन्या रेडियो स्टेशन्स के सुदृढ़ीकरण के लिये भी विकास राशि प्रदान की गई है। इससे प्रदेश की सभी जनजातीयों की क्षेत्रीय बोली (Local Dialect) के विकास एवं संवर्द्धन में मदद मिलेगी। ये वन्या रेडियो स्टेशन जनजातियों की क्षेत्रीय बोली में ही संचालित किये जायेंगे। "वन्या संस्थान" जनजातीय कार्य विभाग के अधीन एक प्रकाशन प्रतिष्ठान है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश के जनजाति समुदायों की संस्कृति, जीवनशैली और कलाओं का विभिन्न माध्यमों से अभिलेखीकरण, प्रकाशन और प्रसारण करना है। इसी श्रृंखला में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना के पालन में जनजातीय क्षेत्रों में सामुदायिक रेडियो केन्द्रों का संचालन किया जायेगा। इससे विभिन्न जनजातीय समुदाय को अपने-अपने जिलों में चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी उनकी ही बोली में प्रदान की जायेगी। वन्या संस्थान द्वारा 8 सामुदायिक रेडियो केन्द्रों नालछा जिला-धार, भाबरा जिला-अलीराजपुर, मेघनगर जिला झाबुआ, बिजौरी जिला-छिन्दवाड़ा, चांड़ा जिला डिण्डौरी, खालवा जिला-खण्डवा, चिचौली जिला-बैतूल एवं सेसईपुरा जिला श्योपुर कला में लगभग 13 वर्षों से संचालित किये जा रहे हैं। इन केन्द्रों में विभिन्न विभागों से प्राप्त विज्ञापन, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का समुचित प्रचार-प्रसार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि संबंधी विभिन्न जन-उपयोगी कार्यक्रमों का प्रसारण स्थानीय बोलियों गोंडी. भीली, बैगानी, कोरकू एवं सहरिया में स्थानीय जनजातीय कलाकारों को आमंत्रित कर कार्यक्रम तैयार किये जाते हैं, जिससे भाग लेने वाले जनजातीय कलाकारों को मानदेय/पारिश्रमिक भी दिया जाता है। इन वन्या रेडियो केन्द्रों का अब सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। शासकीय भवन होने के कारण इनकी मरम्मत … Read more

बाइडेन ने जाते-जाते कर डाला तीसरे विश्वयुद्ध का इंतजाम ? यूक्रेन को रूस के हथियार चलाने की मंजूरी

न्यूयॉर्क अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जाते-जाते यूक्रेन को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने रूस में अंदर तक मार करने के लिए अमेरिका द्वारा सप्लाई की जाने वाली लॉन्ग रेंज मिसाइलों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी अधइकारियों का कहना है कि युद्ध को और उलझाने से बचाने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है। बता दें कि उत्तर कोरिया ने रूस की तरफ से युद्ध करने के लिए अपने हाजरों सैनिक भेज दिए हैं। इसके अलावा उत्तर कोरिया हथियार भेजकर भी रूस की मदद करने में लगा है। इसको लेकर यूक्रेन कई बार आपत्ति जता चुका है। वहीं बताया जा रहा है कि जो बाइडेन प्रशासन ने उत्तर कोरिया के दखल को देखते हुए ही यह फैसला किया है। वहीं नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह राष्ट्रपति बनने के बाद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म करवा देंगे। अमेरिका से मंजूरी के बाद अब यूक्रेन आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल रूस के खिलाफ कर पाएगा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और उनके पश्चिमी देशों के सहयोगी कई महीने से जो बाइडेन प्रशासन पर दबाव डाल रहे थे कि लॉन्ग रेंज मिसाइलों के इस्तेमाल की इजाजत दे दी जाए ताकि रूस में अंदर तक प्रहार किया जा सके। कहा जा रहा था कि अमेरिका के प्रतिबंध की वजह से ही यूक्रेन अपने शहरों और इलेक्ट्रिकल ग्रिड को रूसी हमले से बचा नहीं पा रहा था। यह भी खबर है कि इस मंजूरी से NATO के सभी देश सहमत नहीं हैं। यह भी दबाव है कि अमेरिका और नाटो सदस्य इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल ना हों। लेकिन उत्तर कोरिया ने युद्ध को बढ़ाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत यह दिया था कि वह यूक्रेन को कुछ जमीन छोड़ने के लिए राजी करेंगे और इसके बाद युद्ध को खत्म करने का दबाव बनाएंगे। जानकारी के मुताबिक उत्तर कोरिया से 12 हजार सैनिक रूस पहुंचे हैं। इसके अलावा उत्तर कोरिया ने रूस को घातक हथियार भी दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन की मदद को लेकर बाइडेन प्रशासन की आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद यूक्रेन चिंतित है। उन्हें लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने से ब्लादिमीर पुतिन को फायदा होगा और यू्क्रेन पर शर्त मनवाने का दबाव बनाया जाएगा। इस युद्ध में अमेरिका ही यूक्रेन के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी था। अमेरिका यूक्रेन को 56 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दे चुका है। recent visitors 74

प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत केंद्र ने बड़े स्तर पर शहरी क्षेत्र के पात्र लोगों को आवास उपलब्ध कराने की शुरुआत

भोपाल प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत महंगी कॉलोनियों में पात्र हितग्राही सस्ते मकान खरीद सकेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार ने रिडीमेबल हाउसिंग वाउचर का विकल्प दिया है। इसके तहत राज्य को संबंधित हितग्राही के बदले की राशि बिल्डर को चुकानी होगी। शेष राशि का भुगतान हितग्राही को करना होगा। इस तरह महंगी कॉलोनी में सस्ते मकान के लिए पात्र हो जाएंगे।  असल में केंद्र और राज्य के बीच मेमोरेंडम एग्रीमेंट (एमओए) साइन हुए हैं। जिसमें एमपी ने केंद्र की उक्त रिफार्म शर्त को मानने की सहमति दे दी है। इसके अलावा केंद्र द्वारा बताए कई और सुधारों को मध्य प्रदेश ने मानने की सहमति दे दी है, जिसके आधार पर भोपाल, इंदौर समेत अन्य शहरों में शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 गति पकड़ेगी। असल में शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत केंद्र ने बड़े स्तर पर शहरी क्षेत्र के पात्र लोगों को आवास उपलब्ध कराने की शुरुआत की है। राज्यों से कहा है कि यदि वे अपने राज्य की जनता को रियायती आवास उपलब्ध कराना चाहते हैं तो जरूरी सुधार का पालन करना होगा। जिसमें सबसे बड़ी शर्त मास्टर प्लान के दायरे में रहकर उक्त आवास बनाने की शर्त शामिल है। केंद्र ने शहरों को झुग्गी मुक्त बनाकर उन्हें व्यवस्थित विकास के दायरे में लाया जा सके। इसके लिए राज्य को शहरों में अलग-अलग जोन चिह्नित करने होंगे, वहां उक्त योजना के तहत काम होंगे और हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इन पर सहमति परियोजनाओं को मास्टर प्लान में शामिल करना होगा। पात्र हितग्राहियों को वैधानिक शुल्क में अधिकतम छूट देनी होगी। स्टाम्प शुल्क, पंजीकरण शुल्क में छूट को जारी रखना होगा। परियोजनाओं में हरित क्षेत्र के दायरे को बढ़ाना होगा। निर्माण संबंधी अनुमतियां आवेदन के 60 दिन में। 5 प्रतिशत आवास ईडब्ल्यूएस, एलआइजी बनाने की शर्तों का पालन। आवास खरीदने, निर्माण करने वाले भूमिहीन हितग्राहियों को पट्टा भूमि के दस्तावेज देने होंगे। recent visitors 53