पटेल नगर और रोहित नगर के रहवासियों की समास्याओं के निराकरण को लेकर मंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों के साथ की बैठक

बिल्डर के बंधक भू-खण्ड की नीलामी से होगा पटेल नगर कॉलोनी का विकास: मंत्री श्रीमती गौर रोहित नगर के रहवासियों को मिलेगा नर्मदा जल, सीवेज, सड़क, बिजली और पार्क आदि की व्यवस्था: मंत्री श्रीमती गौर पटेल नगर और रोहित नगर के रहवासियों की समास्याओं के निराकरण को लेकर मंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों के साथ की बैठक राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने दिये अधिकारियों को निर्देश भोपाल रायसेन रोड पटेल नगर में बिल्डर के बंधक भू-खण्ड को नगर निगम नीलाम करेगा। नीलामी से प्राप्त राशि से पटेल नगर कॉलोनी में पेयजल, सीवेज, सड़क, बिजली और पार्क आदि की व्यवस्था की जायेगी। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर के पटेल नगर के रहवासियों की मांग पर दिये निर्देशों के अनुक्रम में आयुक्त नगर निगम हरेन्द्र नारायण ने उक्त बात कही। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने मंगलवार को निवास कार्यालय पर पटेल नगर और रोहित नगर के रहवासियों की समास्याओं के निराकरण को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि पटेल नगर के रहवासियों को बिल्डर द्वारा मुलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। बार बार अवश्वासन देने के बाद भी बिल्डर कॉलोनी का अपेक्षित विकास नहीं कर रहा है। पटेल नगर की यह समस्या दशकों पुरानी है। उन्होंने कहा कि बिल्डर द्वारा विकास नहीं करने पर बिल्डर के बंधक भू-खण्ड को नगर निगम नीलामी से प्राप्त राशि विकास कार्य करने के प्रावधान है। इस प्रावधान के तहत आयुक्त नगर निगम ने कहा कि बिल्डर के बंधक भू-खण्ड की नीलामी से कॉलोनी के विकास के लिये अनुमानित आवश्यक राशि 20 से 25 करोड़ रूपये प्राप्त किये जायेंगे। इससे कॉलोनी के विकास कार्यों को नगर निगम द्वारा किया जायेगा। इस निर्णय से पटेल नगर के 750 आवासों के 5 हजार से अधिक रहवासी लाभान्वित होंगे। रोहित नगर में रहवासियों को पेजजल के लिये नर्मदा जल की सप्लाई दिये जाने के ‍लिये कार्य योजना बनाई जायेगी। कॉलोनी में सिंगल कनेक्शन देने के लिये प्राक्लन तैयार किया जायेगा। यह निर्देश नगर निगम आयुक्त द्वारा दिये गये है। बैठक में एसडीएम एल.के. खरे सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 164

ग्वालियर पहुंची दिल्ली की खतरनाक हवा, AQI लेवल 382 पार

ग्वालियर  दिल्ली से होते हुए कश्मीर के साथ आई सर्द हवा अपने साथ दिल्ली का प्रदूषण भी ले आई है, इससे ग्वालियर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 382 पर पहुंच गया है, जबकि ग्वालियर में प्रदूषण पहले से ही 200 पर था, बीते 12 घंटे के अंदर ही ग्वालियर में प्रदूषण का स्तर 200 से बढकऱ सीधा 382 तक पहुंच गया है, जो कि शहरवासियों के लिए किसी भी लिहाज से सही नहीं है।  यदि बात मध्यप्रदेश की कि जाए तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के समीर एप पर ग्वालियर 382 एक्यूआई के साथ प्रदेशभर में टॉप पर है, जबकि सिंगरोली 224 के साथ दूसरे और भोपाल 200 एक्यूआई के साथ तीसरे स्थान पर है। इसी तरह कटनी 186, उज्जैन 176, इंदौर व सागर 139, जबलपुर 127 एक्यूआई पर है। वहीं तेजी से बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों ने भी शहरवासियों से अपील की है कि वह आसपास कचरा न जलाने दें, मास्क लगाकर रखें और जरूरत होने पर ही मास्क लगाकर घर से बाहर निकलें। क्या होता है एक्यूआई वातावरण में वायु प्रदूषण की मात्रा को मापने के लिए एक्यूआई यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाता है। एक्यूआई की वैल्यू जितनी अधिक होती है वायु प्रदूषण का स्तर उतना ही ज्यादा होता है। कई मशीन के माध्यम से हवा का सैंपल लिया जाता है और उसमे से ओजोन, पीएम 10 व 2.5, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फरडाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइडल व अमोनिया की मात्रा को निकालकर एक फॉर्मूले में रखा जाता है। उससे जो वैल्यू आती है उसे एक्यूआई कहा जाता है। शहर की हवा एकदम से बदल गई है। ग्वालियर में एक्यूआई काफी बढ़ गया है जो कि चिंताजनक है। शहरवासी इस समय अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और मास्क पहनकर ही निकले, आसपास कचरा न जलाने दें और अधिक जरूरत होने पर ही घर से बाहर निकलें। आरआर सेंगर, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड कई बीमारियों का खतरा प्रदूषण का बढ़ना चिंता का विषय है। क्योंकि प्रदूषण अधिक होने से आमजन को हवा में सांस लेने से प्रदूषित हवा से श्वास संबंधी रोग, ब्रोंकाइटिस, गले का दर्द, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर, हदय रोग व मधुमेह सहित अन्य बीमारियों का खतरा बना रहता है। प्रदूषण बढ़ने के कारण दिल्ली में प्रदूषण काफी खराब होने से हवा अपने साथ दूषित हवा भी ले आई है। शहर की जर्जर सडक़ें। भवन सहित अन्य निर्माण कार्य। पराली व कचरे का लगातार जलाए जाना। सड़कों पर पानी का छिडक़ाव कम होना। लैंडफिल साइट व बरा में लगातार आग का लगना। बचाव के उपाय अधिक से अधिक पौधे लगाए जाए। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जलविद्युत ऊर्जा का उपयोग किया जाए। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग अधिक करें और वाहनों का उपयोग कम। धूम्रपान कम से कम किया जाए। उद्योगों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित किया जाए। शहर में निर्माण कार्य कम हो या ढंककर ही करें। शहरवासी मास्क पहनकर ही निकलें। एक्यूआई का पैमाना 0 से 50 होने पर गुड श्रेणी 51 से 100 पर संतोषजनक 101 से 200 तक मॉडरेट 201 से 300 में पुअर श्रेणी 301 से 400 पर सीवर श्रेणी 400 से 500 पर काफी खतरनाक   recent visitors 62

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है उज्जैन में प्रदेश की पहली मेडिसिटी बनने जा रही

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन में प्रदेश की पहली मेडिसिटी बनने जा रही है। राज्य सरकार चिकित्सा सेवा और चिकित्सा शिक्षा के लिए गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में चिकित्सा सेवा और आयुष के माध्यम से स्वास्थ्य और चिकित्सा को समग्रता में देखते हुए नई अवधारणा पर कार्य हो रहा है। इसके चलते उज्जैन में बनने वाली मेडिसिटी में न केवल मेडिकल कॉलेज रहेगा अपितु नर्सिंग, पैरामेडिकल, अनुसंधान सुविधा, चिकित्सक-विशेषज्ञ और स्टॉफ के आवास सहित संपूर्ण व्यवस्था होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं इस कैंपस का भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन में मीडिया से चर्चा में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले 20 साल में मध्यप्रदेश सरकार ने चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाएं हैं। वर्ष 2004-05 में प्रदेश में मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे, वर्तमान में प्रदेश में 17 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और 8 निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ अवधि में लगभग 15 करोड़ की आबादी उज्जैन में होगी। सामान्य समय में भी लगभग 5 से 7 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष उज्जैन पधार रहे हैं। अतः यहां मेडिसिटी का बनना उपयोगी और महत्वपूर्ण है। उज्जैन में आकार ले रही मेडिसिटी के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।   recent visitors 60

पहाड़ों में बर्फबारी से प्रदेश में बढ़ी सर्दी, भोपाल का तापमान सामान्य से 2.4 डिग्री कम

भोपाल मध्य प्रदेश में शीतलहर का दौर शुरू हो गया है। इसकी वजह सर्द हवाएं हैं। हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल का तापमान सामान्य से 2.4 डिग्री कम है। मौसम विभाग के मुताबिक, पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण अगले कुछ दिनों में एमपी में ठंड और बढ़ने की उम्मीद है। मंगलवार सुबह ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में कोहरा छाया रहा। आईएमडी के अनुसार, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया में घना कोहरा छाया रहा, जबकि निवाड़ी-टीकमगढ़ में मध्यम कोहरा छाया रहा। इससे विजिबिलिटी भी कम रही। बर्फबारी हुई शुरू     दरअसल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में बर्फबारी शुरू हो गई है। इसके साथ ही जेट स्ट्रीम हवाएं भी चल रही हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश में भी उत्तरी हवाएं आएंगी, जो ठंड बढ़ाएंगी। आने वाले दिनों में पारा और गिर सकता है। अभी दिन के तापमान में औसतन 2 डिग्री की गिरावट आई है। वहीं, 15 से ज्यादा शहरों में रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया जा रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में बढ़ती ठंड के चलते स्कूलों के समय में भी बदलाव किया गया है। भोपाल में कई स्कूलों का समय 30 मिनट तक बढ़ाया गया है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी स्कूलों का समय बदला जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले तीन-चार दिनों में कई शहरों में रात के टेम्प्रेचर में 2 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो सकती है। उत्तरी हिस्से यानी ग्वालियर-चंबल संभाग में ठंड का असर ज्यादा बढ़ा रहेगा। बता दें कि रविवार-सोमवार की रात पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां पारा 8.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिसंबर में कड़ाके की Cold/कोहरा/ Coldwave एमपी मौसम विभाग की मानें तो दिसंबर-जनवरी में कड़ाके की ठंड और कोहरे के साथ कोल्ड वेव की स्थिति रहने का अनुमान है।दिसंबर की शुरुआत में पूरे प्रदेश में न्यूनतम तापमान में 11 से 12 डिग्री तक गिरने की संभावना है।दिसंबर में सागर संभाग के जिले निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना, रीवा संभाग के मउगंज सीधी और सिंगरौली, जबलपुर संभाग के मंडला और डिंडोरी, इंदौर संभाग के झाबुआ, इंदौर और धार के उत्तरी हिस्से और पूरे ग्वालियर-चंबल संभाग में जबरदस्त ठंड पड़ेगी।निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मंडला, डिंडोरी, झाबुआ, धार, उज्जैन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़ और ग्वालियर चंबल में ठिठुरन बढ़ेगी। पिछले 24 घंटे का मौसम का हाल     प्रदेश के पचमढ़ी शहर में सोमवार को रात का तापमान 9 डिग्री से कम दर्ज किया गया, जो कि 8.2 डिग्री सेल्सियस रहा।     मंडला में 10.2 डिग्री, मजालखंड में 11.4 डिग्री और उमरिया में 11.6 डिग्री दर्ज हुआ।     सोमवार को ग्वालियर में दिन का अधिकतम तापमान 26.3 डिग्री दर्ज किया गया।     इंदौर में 28.5 डिग्री, जबलपुर में 29.6 डिग्री, भोपाल में 30 और उज्जैन में 30.2 डिग्री दर्ज हुआ।     सोमवार को भोपाल का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।     भोपाल में न्यूनतम तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस कम रहा। प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान     पचमढ़ी: 8.6°C     मंडला: 10.8°C     बालाघाट: 12°C     उमरिया: 12.6°C     सिवनी: 15°C     नौगांव: 12.5°C     जबलपुर: 14.5°C     भोपाल: 13.4°C प्रमुख शहरों का अधिकतम तापमान     भोपाल: 30.5°C     ग्वालियर: 32°C     इंदौर: 29.9°C     उज्जैन: 30.7°C recent visitors 86

मोहन सरकार के प्लान से झूम उठेंगे बेरोजगार युवा, पांच साल में मिलेंगी ढाई लाख नौकरियां,कैडर वार भरे जाएंगे पद

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार युवाओं को सौगात देने जा रही है। नौकरी के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए सरकारी खुशखबरी है। अगले पांच सालों में सरकार ने सभी विभागों में रिक्त पड़े ढाई लाख पदों पर भर्ती का फैसला किया है। ये भर्तियां सरकार सीधी भर्ती प्रक्रिया से करेगी। अपने संकल्प को दोहराते हुए मोहन सरकार ने यह घोषणा की है। इसके लिए सरकार हर साल भर्ती कैलेंडर जारी करेगी, जिसमें अलग-अलग पदों पर भर्ती की समय-सीमा तय होगी। बेरोजगारी की समस्या से निपटने में मदद मिली वहीं, सरकार के इस फैसले से उन युवाओं को फायदा होगा जो सरकारी नौकरी की तलाश में हैं। इससे बेरोजगारी की समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी। यह फैसला 22 नवंबर 2022 को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए उस आदेश को वित्त विभाग द्वारा 31 अक्टूबर 2024 से रद्द करने के बाद लिया गया है, जिसमें विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। चल रहीं नियुक्तियां प्रभावित नहीं हालांकि, वित्त विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि जिन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है या नियुक्तियां हो चुकी हैं, वे इस आदेश से प्रभावित नहीं होंगी। जहां भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है उन पदों की भर्ती को निरस्त नहीं किया गया है। वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 16 और 22 नवंबर 2022 को जारी किए गए सर्कुलर में जिन पदों पर 30 अक्टूबर 2024 तक नियुक्तियां हो चुकी हैं, उन्हें भी रद्द नहीं माना जाएगा। आने वाले सालों में होने वाली भर्ती को लेकर वित्त विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग के 22 नवंबर 2022 को जारी आदेश में 31 अक्टूबर 2024 से प्रभाव शून्य घोषित कर दिया है। जिसमें पदों की भर्ती के लिए आदेश जारी किए गए थे। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है उन पदों की भर्ती को निरस्त नहीं किया गया है। ये भर्तियां नहीं होंगी निरस्त वित्त विभाग ने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि, 16 नवंबर 2022 और 22 नवंबर 2022 को जारी किए गए सर्कुलर में निकाली गई भर्तियों में से ऐसे रिक्त पदों पर जिन विभागों ने 30 अक्टूबर 2024 तक नियुक्तियां कर दी हैं, वह निरस्त नहीं मानी जाएंगी। इसके साथ ही सीधी भर्ती के जिन रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कार्यवाही संबंधी पत्र कर्मचारी चयन मंडल और एमपी पीएससी या अन्य भर्ती संस्था को भेजे गए हैं या नियुक्ति की जा चुकी है पर कार्यभार ग्रहण करना शेष है तथा परीक्षा परिणाम के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी किया जाना शेष है। ऐसी भर्ती भी निरस्त नहीं मानी जाएगी। 5 प्रतिशत पद ही सीधी भर्ती से भरने का आदेश स्थगित वित्त विभाग के निर्देशों में कहा है कि 3 जनवरी 2013 और 13 अगस्त 2021 को जारी निर्देशों में संवर्ग में स्वीकृत पदों के आधार पर 5 प्रतिशत पदों को ही सीधी भर्ती से भरने के लिए निर्णय लिया है। 18 नवंबर को जारी सर्कुलर में पूर्व में तय लिमिट की प्रभावशीलता को वर्ष 2028-29 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। MPPSC के भर्ती के लिए भेजे पत्र इसके अलावा, जिन पदों पर कर्मचारी चयन मंडल या MPPSC को भर्ती के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं या नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं, पर उम्मीदवारों ने अभी तक जॉइन नहीं किया है, उन पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी। '50 पद रिक्त तो यह फॉर्मूला लागू होगा' वहीं, जिन संवर्गों में 51 से 200 पद रिक्त हैं, वहां रिक्त पदों की संख्या के आधार पर भर्ती की जाएगी। अगर 33% से कम पद रिक्त हैं, तो उन्हें एक ही बार में भरा जाएगा। अगर 33% से ज्यादा लेकिन 66% से कम पद रिक्त हैं, तो 8% पदों को 2024-25 में, 46% पदों को 2025-26 में और 46% पदों को 2026-27 में भरा जाएगा। ऐसे भरे जाएंगे पद ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 51 से 200 तक है, उनमें पदों की पूर्ति तीन चरणों में की जाएगी। यानी सीधी भर्ती के यदि कुल पदों में से रिक्त पद 33 प्रतिशत से कम है तो एक बार में भरे जाएंगे। यदि 33 प्रतिशत से अधिक अथवा 66 प्रतिशत से कम हैं तो वर्षवार प्रथम वर्ष 2024-25 में 8 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष 2025-26 में 46 प्रतिशत और तृतीय वर्ष 2026-27 में 46 प्रतिशत भरे जाएंगे। 66 प्रतिशत से अधिक रिक्त पद रिक्त पद 66 प्रतिशत से अधिक हैं तो वर्षवार चार वर्ष में प्रथम वर्ष आठ प्रतिशत, द्वितीय वर्ष 31 प्रतिशत, तृतीय वर्ष 31 प्रतिशत और चतुर्थ वर्ष 30 प्रतिशत भरे जाएंगे। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 200 से अधिक है, वहां गणना के अनुसार रिक्त पद 25 प्रतिशत से कम होने पर एक बार में भरे जाएंगे। 25 प्रतिशत से अधिक व 50 प्रतिशत से कम है तो वर्षवार प्रथम वर्ष 2024-25 में 8 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष 2025-26 में 46 प्रतिशत और तृतीय वर्ष 2026-27 में 46 प्रतिशत भरे जाएंगे। 50 प्रतिशत से अधिक व 75 प्रतिशत से कम होने पर प्रथम वर्ष 2024-25 में 8 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष 2025-26 में 31 प्रतिशत, तृतीय वर्ष 2026-27 में 31 प्रतिशत और चतुर्थ वर्ष 2027-28 में 30 प्रतिशत पद भरे जाएंगे। 75 प्रतिशत से अधिक रिक्त पद होने पर वर्षवार पांच वर्ष में 2024-25 में 8 प्रतिशत, 2025-26 में 23 प्रतिशत, 2026-27 में 23 प्रतिशत, 2027-28 में 23 प्रतिशत और पांचवें वर्ष 2028-29 में 23 प्रतिशत पद भरे जाएंगे। – वाहन चालकों की नहीं होगी सीधी भर्ती, आउटसोर्स पर रखे जाएंगे मप्र में वाहनों चालकों की सीधी भर्ती नहीं की जाएगी। इसकी जगह वाहन चालक आउटसोर्स पर रखे जाएंगे। विशिष्ट विभाग जहां वाहन चालकों के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती अति आवश्यक है, वे वित्त विभाग को तथ्यों के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत कर भर्ती की स्वीकृति ले सकेंगे। इसी तरह चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर भी सीधी भर्ती नहीं की जाएगी। इनकी जगह आउटसोर्स पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखें जाएंगे। recent visitors 64

मुख्यमंत्री साय बोले – छत्तीसगढ़ में नक्सल आपरेशन में मिल रही सफलता की पूरे देश में हो रही है प्रशंसा

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सीआरपीएफ के जवानों से कहा कि पिछले 11 महीनों के दौरान आप लोगों ने जिस तरह नक्सली आतंक को खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलताएं हासिल की हैं, उसकी पूरे देश में प्रशंसा हो रही है। आप लोग परिवार से दूर रहकर और सुख-सुविधाओं को त्याग कर बस्तर के विकास में जो योगदान दे रहे हैं, उससे आप लोगों ने यहां के जनजातीय समुदायों के हृदय में अपने लिए हमेशा हमेशा के लिए जगह बना ली है। श्री साय बस्तर जिले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल  के सेडवा कैंप में जवानों को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अचानक सीआरपीएफ कैंप पहुंचने पर आश्चर्यमिश्रित खुशी के साथ ही जवानों ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने सुरक्षा बलों के जवानों से आत्मीयतापूर्वक संवाद करते हुए कहा कि जब मैं बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में चित्रकोट आया था, तो मेरी बड़ी इच्छा थी कि मैं आप सब जवानों से मिलूं। पिछले 11 महीनों में छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर जो सफलता मिली है, उसमें आप सभी का अत्यधिक महत्वपूर्ण योगदान है। मैं आप सभी के साहस को नमन करता हूं। नक्सल अभियान में आप सभी को जो सफलता मिल रही है, उसकी पूरे देश में प्रशंसा हो रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से जब भी मेरी मुलाकात होती है तो वे नक्सल अभियान में छत्तीसगढ़ को मिल रही सफलता का जिक्र जरूर करते हैं। गृह मंत्री श्री अमित शाह का नक्सल ऑपरेशन में सतत मार्गदर्शन और सहयोग मिलते रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में हमने नक्सलवाद को वर्ष 2026 तक समूल नष्ट करने का संकल्प लिया है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री श्री अमित शाह का भी यही संदेश है। बस्तर में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने अल्प अवधि में ही 200 से ज्यादा नक्सलियों को ढेर कर दिया है। 740 से ज्यादा माओवादी कैडर्स ने आत्मसमर्पण कर दिया है। वे हिंसा त्याग कर लोकतंत्र की मुख्य धारा में शामिल हो गए हैं।शासन ने हिंसा का त्याग करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए ऐसी नीति बनाई है कि आने वाले दिनों में और भी बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे। सुरक्षा बल के जवानों द्वारा कैंप में रात्रि विश्राम करने के आग्रह पर उन्होंने कैंप में रात्रि विश्राम भी किया। recent visitors 62

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ‘The Sabarmati Report’ की टैक्स फ्री, बोले- ‘दूध का दूध पानी का पानी होना चाहिए’

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने द साबरमती रिपोर्ट (The Sabarmati Report) को प्रदेश में टैक्स फ्री करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह फिल्म देखने जाएंगे। उनके साथ-साथ सांसद और विधायक भी फिल्म देखेंगे। सीएम ने कहा कि घटना का दूध का दूध पानी का पानी होना चाहिए। वोटों की राजनीति के लिए गंदा खेल खेला गया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि साबरमती बहुत अच्छी फिल्म बनी है। टैक्स फ्री इसलिए की गई ताकि अधिकांश लोग देख सकें। यह एक काला अध्याय है। इस फिल्म को देखने से दूध का दूध पानी का पानी होना चाहिए। वोटों की राजनीति के लिए गंदा खेल खेला गया। हमारे प्रधानमंत्री ने उस समय मुख्यमंत्री रहते हुए गुजरात की इज्जत बचाई, देश की इज्जत बचाई। यह सच सामने आना ही चाहिए। सीएम ने की भारत के इतिहास की तारीफ मुख्यमंत्री आज भोपाल में आयोजित AUAP के 17 वें सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि इतिहास देखेंगे तो हिंदुस्तान के अतीत में। बांग्लादेश भी अपने ही करीब है। भारत का इतिहास शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा है। 1000 से 2000 साल तक देश-दुनिया के लोगों ने भारत आकर शिक्षा ग्रहण की। जीवन मूल्य और मेरिट का सबसे बेहतर तालमेल भारत में रहा है। नैतिक मूल्य का अंतर कौरव-पांडव में दिखाई देता है। रावण की महारथी था, लेकिन नैतिक मूल्य नहीं थे। रावण ने पूरी लंका ही सोने की बना ली थी। जिस बात की कमी थी वह हमारे सामने है। राम जी आम लोगों के साथ नैतिक मूल्य स्थापित करते हैं। 2 हजार साल से अपनी जमीन ढूंढ रहा इजरायल मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इजरायल लगातार संघर्ष कर रहा है। 2 हजार साल से अपनी जमीन ढूंढ रहा है। इसकी भी बात होनी चाहिए। लड़ कौन रहा है लड़वा कौन रहा है? मर कौन रहा है मरवा कौन रहा है? यह भी हमें देखना पड़ेगा। इस बीच जीवन मूल्य और शांति की बात कौन कर रहा है? यह सिर्फ भारत कर रहा है। जनता की योजनाओं के लिए भागीदारी का भाव लेकर चलना, यह भाव लेकर कौन आया? मनमोहन सिंह पर साधा निशाना मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मैं यहां राजनीति के लिए नहीं कह रहा। मेरे अंदर भाव आ रहा है इसलिए कह रहा। जो वित्त मंत्री रहे, जिनके पास फाइनेंस की डिग्रियां रहीं, लेकिन उनसे क्या चूक हुई? एक चाय वाले के दिमाग में आई कि बगैर पैसे के खाता खुल सकता है। यह शिक्षा व्यवस्था की चूक है? व्यवस्था की चूक है? भाव की चूक है या नैतिकता की चूक है? मुझे लगता है यह अंदर के आग की चूक है। ज्ञान की कोई सीमा नहीं सीएम ने आगे कहा कि हमारे देश का संबंध बांग्लादेश से अलग ही प्रकार का है। हमारे देश की गंगा बहते हुए बांग्लादेश से होते हुए समुद्र में मिलती है। मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू की गई। ज्ञान की कोई सीमा नहीं, इसलिए डिग्री की बाध्यता और उम्र की बाध्यता को खत्म किया। मध्य प्रदेश में किसी भी उम्र में चाहे जितनी डिग्री चाहे उतनी कर सकते हैं। recent visitors 73