प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0: अफोर्डेबल हाउसिंग पालिसी होगी तैयार, सस्ती दर पर मिलेगी जमीन

भोपाल शहरों को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 लागू की है। अन्य योजनाओं को मिलाकर इसमें काम होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग पालिसी तैयार कर लागू करेगी। इस नीति के तहत मकान बनाने के लिए सस्ती दर पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। योजना में पंजीकृत आवासों के लिए एक प्रतिशत से कम स्टांप शुल्क लिया जाएगा। ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) सुविधा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए निर्मित क्षेत्र में परियोजना के समग्र फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में शामिल नहीं किया जाएगा। 31 दिसंबर तक का है समय नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना को लागू करने के लिए 31 दिसंबर, 2024 से पहले प्रदेश को केंद्र सरकार को सहमति प्रेषित करनी होगी। साथ ही अन्य सुधार 30 जून, 2025 तक पूर्ण कर लागू करने होंगे। 12 नवंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बताया गया कि प्रदेश सरकार योजना पर सहमति भेज रही है। लक्ष्य यह रखा गया है कि पांच वर्ष में इस योजना के माध्यम से प्रदेश में दस लाख आवास निर्मित किए जाएं। जारी रहेगी ढाई लाख की सब्सिडी स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये का जो अनुदान दिया जा रहा है, वह जारी रखा जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश वर्ष 2015 से वर्ष 2023 तक पहले या दूसरे स्थान पर रहता आया है। अभी तक इसमें साढ़े नौ लाख हितग्राहियों को लाभ मिल चुका है। अब शहरों को झुग्गी मुक्त करने और आवास की आवश्यकता की पूर्ति के लिए तीन स्तर पर एक साथ काम होगा। इसमें प्रधानमंत्री आवास शहरी के तहत पंजीकृत आवासों (60 वर्गमीटर तक) के लिए एक प्रतिशत या उससे भी कम स्टांप या पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा। आवास निर्माण के लिए ऐसे हितग्राही जिनके पास भूमि नहीं है, उन्हें सस्ती दर पर पट्टे दिए जाएंगे। इन्हें मिलेगी योजना में प्राथमिकता प्रधानमंत्री आवास योजना में उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास कहीं भी पक्का आवास नहीं है। नौ लाख रुपये तक की वार्षिक आय और राज्य व केंद्र सरकार की किसी भी आवास योजना में लाभ ले चुके व्यक्ति योजना के लिए अपात्र होंगे। कल्याणी (विधवा), दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक, ट्रांसजेंडर, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग, सफाई कर्मी, पथ विक्रेता, पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, निर्माण श्रमिक, मलिन बस्तियों में रहने वाले परिवारों को प्राथमिकता मिलेगी। ऐसे व्यक्ति, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक हो और उनके पास स्वयं का भूखंड हो उन्हें मकान बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से ढाई लाख रुपये की मदद की जाएगी। यह राशि तीन किस्तों में देय होगी। इसी तरह सरकारी या निजी एजेंसी की परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 30 से 45 वर्ग मीटर का फ्लैट दिलाया जाएगा। इसके लिए भी ढाई लाख रुपये तक की सहायता केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देगी।   recent visitors 102

भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध जनजातीय समाज को किया खड़ा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पूरे देश में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनायी जा रही है। जनजातीय गौरव दिवस इतिहास के एक बहुत बड़े अन्याय को दूर करने का एक ईमानदार प्रयास है। आजादी के बाद जनजातीय वर्ग के योगदान को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया, जिसके लिये वे हकदार थे। जनजातीय समाज वो है, जिसने राजकुमार राम को भगवान बनाया। भारत की संस्कृति और आजादी के रक्षा के लिये सैकड़ो वर्षों की लड़ाई का नेतृत्व दिया। आजादी के बाद के दशकों में जनजातीय वर्ग के अनमोल योगदान को मिटाने की कोशिश की गई। इसके पीछे स्वार्थ भरी राजनीति थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज के समग्र कल्याण के लिये अनेक योजनाएँ संचालित कर उनके आर्थिक और सामाजिक विकास का कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर बिहार जिले के जमुई में आयोजित राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस पर संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती पर 6 हजार करोड़ रूपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया है। इसमें जनजातीय वर्ग के बच्चों के भविष्य को संवारने वाले स्कूल और हॉस्टल, जनजातीय वर्ग की महिलाओं के लिये स्वास्थ्य सुविधा, जनजातीय क्षेत्रों को जोड़ने वाली सैकड़ों किलोमीटर की सड़कें, जनजातीय वर्ग की संस्कृति को समर्पित संग्रहालय एवं जनजातीय वर्ग के डेढ़ लाख परिवारों को पक्के घर के स्वीकृति पत्र वितरित किये गये हैं। साथ ही आज देव दीपावली के दिन 11 हजार से अधिक जनजातीय परिवारों को अपने घर में प्रवेश कराया गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश के छिन्दवाड़ा के श्री बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय एवं जबलपुर के राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वंतत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का वर्चुअली लोकापर्ण किया। मध्यप्रदेश के शहडोल जिला मुख्यालय पर आयोजित राज्यस्तरीय जनजातीय गौरव दिवस समारोह में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल, सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, अध्यक्ष कोल विकास प्राधिकरण श्री रामलाल रोतेल सहित जन-प्रतिनिधि मौजूद रहे। राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। अतिथियों का स्वागत जनजातीय परंपरा अनुसार किया गया। जनजातीय कल्याण के लिये राज्य सरकार कर रही है बेहतरीन कार्य : राज्यपाल श्री पटेल राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सम्पूर्ण देश में जनजातीय कल्याण के अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। पीएम जन मन योजना और सिकल सैल उन्मूलन मिशन, जनजाति कल्याण का महाभियान है। इस महाभियान में राज्य सरकार द्वारा जनजाति कल्याण के बेहतरीन कार्य किए जा रहे हैं। अनेक विभागों के माध्यम से अति पिछड़ी जनजातियों को विकास की मुख्यधारा में लाने के कारगर प्रयास लगातार जारी है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सिकल सैल उन्मूलन मिशन का संकल्प मध्यप्रदेश की धरती से लिया जाना प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है। केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा सिकल सैल उन्मूलन की दिशा में जाँच और जागरूकता के कार्य सघन स्तर पर किए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 82 लाख लोगों की सिकलसेल स्क्रीनिंग पूर्ण हो गई है। राज्यपाल श्री पटेल ने शहडोल ज़िले के सिकल सैल जाँच कार्यों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को सिकल सैल कार्ड वितरण का कार्य जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सिकल सैल से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय, इस रोग के प्रति जागरूकता ही है। उन्होंने कहा कि शादी के पूर्व लड़का-लड़की सिकल सैल कार्ड का मिलान ज़रूर करें। उन्होंने कहा कि गर्भधारण के दौरान और जन्म के बाद भी बच्चे के सिकल सैल की जाँच ज़रूर कराएं। राज्यपाल श्री पटेल ने सभी से आह्वान किया कि सिकल सैल की जाँच और जागरूकता हम सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। राज्यपाल श्री पटेल ने भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती पर उनका नमन किया और प्रदेश एवं देश के महान क्रांतिकारी, जनजातीय सपूतों का पुण्य स्मरण भी किया। उन्होंने जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा जबलपुर और छिंदवाड़ा के जनजातीय संग्रहालय के लोकार्पण के प्रति आभार ज्ञापित किया।   recent visitors 117

जन मन योजना और सिकलसेल उन्मूलन मिशन जनजाति कल्याण का महाभियान : राज्यपाल पटेल

जनजातीय गौरव दिवस, इतिहास के एक बड़े अन्याय को दूर करने का है ईमानदार प्रयास : प्रधानमंत्री मोदी भगवान बिरसा मुंडा ने मातृभूमि के गौरव और सम्मान की रक्षा के लिये अपना सर्वस्व बलिदान दिया प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश के दो जनजातीय संग्रहालय राष्ट्र को किये समर्पित जन मन योजना और सिकलसेल उन्मूलन मिशन जनजाति कल्याण का महाभियान : राज्यपाल पटेल भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध जनजातीय समाज को किया खड़ा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय समाज आज भी हमारी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखे है देश में चल रहा है जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को समक्ष लाने का अभियान बाणसागर बांध से शहडोल जिले के लोगों को भी मिलेगा पानी शहडोल में बनाया जायेगा स्थाई हेलीपेड जनजातीय गौरव दिवस का राज्यस्तरीय कार्यक्रम शहडोल में हुआ आयोजित भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पूरे देश में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनायी जा रही है। जनजातीय गौरव दिवस इतिहास के एक बहुत बड़े अन्याय को दूर करने का एक ईमानदार प्रयास है। आजादी के बाद जनजातीय वर्ग के योगदान को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया, जिसके लिये वे हकदार थे। जनजातीय समाज वो है, जिसने राजकुमार राम को भगवान बनाया। भारत की संस्कृति और आजादी के रक्षा के लिये सैकड़ो वर्षों की लड़ाई का नेतृत्व दिया। आजादी के बाद के दशकों में जनजातीय वर्ग के अनमोल योगदान को मिटाने की कोशिश की गई। इसके पीछे स्वार्थ भरी राजनीति थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज के समग्र कल्याण के लिये अनेक योजनाएँ संचालित कर उनके आर्थिक और सामाजिक विकास का कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर बिहार जिले के जमुई में आयोजित राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस पर संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती पर 6 हजार करोड़ रूपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया है। इसमें जनजातीय वर्ग के बच्चों के भविष्य को संवारने वाले स्कूल और हॉस्टल, जनजातीय वर्ग की महिलाओं के लिये स्वास्थ्य सुविधा, जनजातीय क्षेत्रों को जोड़ने वाली सैकड़ों किलोमीटर की सड़कें, जनजातीय वर्ग की संस्कृति को समर्पित संग्रहालय एवं जनजातीय वर्ग के डेढ़ लाख परिवारों को पक्के घर के स्वीकृति पत्र वितरित किये गये हैं। साथ ही आज देव दीपावली के दिन 11 हजार से अधिक जनजातीय परिवारों को अपने घर में प्रवेश कराया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश के छिन्दवाड़ा के बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय एवं जबलपुर के राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वंतत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का वर्चुअली लोकापर्ण किया। मध्यप्रदेश के शहडोल जिला मुख्यालय पर आयोजित राज्यस्तरीय जनजातीय गौरव दिवस समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, अध्यक्ष कोल विकास प्राधिकरण रामलाल रोतेल सहित जन-प्रतिनिधि मौजूद रहे। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। अतिथियों का स्वागत जनजातीय परंपरा अनुसार किया गया। जनजातीय कल्याण के लिये राज्य सरकार कर रही है बेहतरीन कार्य : राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सम्पूर्ण देश में जनजातीय कल्याण के अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। पीएम जन मन योजना और सिकल सैल उन्मूलन मिशन, जनजाति कल्याण का महाभियान है। इस महाभियान में राज्य सरकार द्वारा जनजाति कल्याण के बेहतरीन कार्य किए जा रहे हैं। अनेक विभागों के माध्यम से अति पिछड़ी जनजातियों को विकास की मुख्यधारा में लाने के कारगर प्रयास लगातार जारी है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सैल उन्मूलन मिशन का संकल्प मध्यप्रदेश की धरती से लिया जाना प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है। केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा सिकल सैल उन्मूलन की दिशा में जाँच और जागरूकता के कार्य सघन स्तर पर किए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 82 लाख लोगों की सिकलसेल स्क्रीनिंग पूर्ण हो गई है। राज्यपाल पटेल ने शहडोल ज़िले के सिकल सैल जाँच कार्यों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को सिकल सैल कार्ड वितरण का कार्य जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सैल से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय, इस रोग के प्रति जागरूकता ही है। उन्होंने कहा कि शादी के पूर्व लड़का-लड़की सिकल सैल कार्ड का मिलान ज़रूर करें। उन्होंने कहा कि गर्भधारण के दौरान और जन्म के बाद भी बच्चे के सिकल सैल की जाँच ज़रूर कराएं। राज्यपाल पटेल ने सभी से आह्वान किया कि सिकल सैल की जाँच और जागरूकता हम सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। राज्यपाल पटेल ने भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती पर उनका नमन किया और प्रदेश एवं देश के महान क्रांतिकारी, जनजातीय सपूतों का पुण्य स्मरण भी किया। उन्होंने जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जबलपुर और छिंदवाड़ा के जनजातीय संग्रहालय के लोकार्पण के प्रति आभार ज्ञापित किया। जल, जंगल और जमीन का अधिकार जनजातीय समाज का है मूल अधिकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल, जंगल और जमीन का अधिकार जनजातीय समाज का मूल अधिकार है। इसे अंग्रेज उनसे छीनना चाहते थे। भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के अत्याचार, अनाचार के खिलाफ जनजातीय समाज को खड़ा किया और अंग्रेजों के खिलाफ दो स्तरों पर लड़ाई लड़ी। एक ओर उन्होंने जनजातीय समाज के मूल अधिकार की रक्षा की और दूसरी ओर ईसाई मिशनरियों द्वारा हमारे धर्म के साथ छेड़छाड़ कर हमारे जनजातीय भाइयों को ईसाई बनाने के कुत्सित प्रयासों को ध्वस्त किया। आज हम भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उन्हें हृदय से स्मरण और नमन करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को देश के समक्ष लाने का अभियान चलाया है। उन्होंने प्रतिवर्ष देश भर में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय मध्यप्रदेश में ही लिया। आज पूरे देश में भगवान बिरसा मुंडा जयंती मनाई जा रही है। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन हम सबके लिए मार्गदर्शक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा … Read more

लाहौर में सांस लेना भी हुआ मुहाल, AQI 1900 के पार; मंत्री ने भारत को लेकर दिया अजीबोगरीब तर्क

लाहौर पाकिस्तान का ऐतिहासिक शहर इन दिनों एक बड़ी परेशानी से गुजर रहा है. लाहौर में वायु प्रदूषण चरम सीमा पर पहुंच गया है. यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हाल ही में 1900 तक पहुंच गया है. लाहौर में रिकॉर्ड स्तर के वायु प्रदूषण ने गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है, जिससे अस्पतालों और प्राइवेट क्लिनिकों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर लोगों ने मास्क नहीं पहना और प्रशासनिक आदेशों का पालन नहीं किया, तो पूरे शहर में लॉकडाउन की स्थिति बन सकती हैं. ऑलामा इकबाल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल फैसल असगर नकी ने यहां की प्रदूषण की स्थिति को चिंताजनक बताया. वहीं, एक मरीज हसन अख्तर ने बताया कि उन्हें फ्लू और सीने में इंफेक्शन है. उनका मानना है कि इसकी वजह तेजी से घट रहे पेड़-पौधे और वाहनों से निकलता धुआं है. हसन ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार को हरियाली बढ़ाने, वाहन सुधारने और तकनीकी बदलाव लाने की जरूरत है. ये तो हो गई पाकिस्तान के अस्पतालों की हालत. अब जानेंगे कि आखिर पाकिस्तान में ये हालात कैसे पैदा हो गएं. लाहौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स लाहौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स लोगों की सेहत के लिए काफी खराब है. वहीं इसपर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ते प्रदूषण से अस्पतालों में मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, जो सांस संबंधी बीमारियों से काफी परेशान हैं. वहीं इस पर पंजाब सरकार ने लोगों को फेस मास्क पहनने, अनावश्यक बाहर न निकलने और बच्चों व बुजुर्गों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी है. ग्रीन लॉकडाउन की स्थिति लाहौर में स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है, और वाहनों व निर्माण कार्यों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं. इसके अलावा, सरकारी दफ्तरों के 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ‘ग्रीन लॉकडाउन’ के तहत घर से काम करने की अनुमति दी गई है. सरकार ने यह भी कहा है कि जो क्षेत्र “ग्रीन लॉकडाउन” का पालन नहीं करेंगे, वहां पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. क्या कह रहें विशेषज्ञ? वहीं विशेषज्ञों की मानें तो लाहौर का प्रदूषण स्तर इतनी तेजी से बढ़ने का कारण आसपास के इलाकों में होने वाली पराली जलाने की घटनाएं हैं. पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी ने इस पर कहा कि भारत से आने वाली हवाएं लाहौर में प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रही हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय शहर अमृतसर और चंडीगढ़ की ओर से आने वाली हवाओं के कारण वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, और आने वाले कुछ दिनों तक यह स्थिति बने रहने की संभावना है. लाहौर प्रशासन उठा रहा ये कदम लाहौर प्रशासन ने प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए कृत्रिम वर्षा कराने की योजना पर भी विचार किया है ताकि वायु की गुणवत्ता में सुधार हो सके. साथ ही, पंजाब के मुख्यमंत्री ने भारत के पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री के साथ मिलकर प्रदूषण की इस गंभीर समस्या पर चर्चा करने की योजना बनाई है. लाहौर को कभी हरियाली और बाग-बागीचों का शहर माना जाता था, लेकिन तेजी से शहरीकरण और हरियाली में गिरावट के कारण यहां वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन गया है. WHO के लिमिट से भी 122 गुना ज्यादा     कई दिनों से शहर के 1.4 करोड़ लोग धुंध से प्रभावित हैं। स्विस वायु गुणवत्ता मानीटर आइक्यूएयर घातक पीएम 2.5 प्रदूषकों के स्तर 613 पर पहुंच गया।     यह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्वास्थ्य के लिए खराब माने जाने वाले स्तर से 122.6 गुना अधिक है। अब हरकत में आई सरकार पंजाब की वरिष्ठ मंत्री मरियम औरंगजेब ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सरकार ने एक सप्ताह के लिए प्राथमिक स्कूलों को बंद कर दिया है और अभिभावकों को सलाह दी है कि वे सुनिश्चित करें कि बच्चे मास्क पहनें, क्योंकि शहर में धुंध की मोटी चादर छाई हुई है। औरंगजेब ने कहा कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 50 फीसद कार्यालय कर्मचारी घर से काम करेंगे। लाहौर में वायु प्रदूषण का अब तक का रिकॉर्ड सरकार ने एक एडवाइजरी भी जारी की जिसमें लोगों से घर के अंदर रहने, दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने और जब तक आवश्यक न हो यात्रा करने और घर से बाहर जाने से बचने का आग्रह किया गया। भारत पर फोड़ा ठीकरा मंत्री औरंगजेब ने वायु प्रदूषण की इतनी खराब स्थिति का कारण पड़ोसी भारत को बताया। उन्होंने कहा कि इस वायु प्रदूषण का कारण भारत से आने वाली हवाएं हो सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत के साथ बातचीत के बिना इसे हल नहीं किया जा सकता है। प्रांतीय सरकार पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के माध्यम से अपने बड़े पड़ोसी के साथ बातचीत शुरू करेगी। recent visitors 58

BCCI की आपत्ति के बाद PCB के मंसूबों पर ICC ने डाला ठण्डा पानी, PoK नहीं जाएगी चैंपियंस ट्रॉफी

मुंबई चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का आयोजन पाकिस्तान में होना है. आईसीसी ने इससे पहले ट्रॉफी को पाकिस्तान भेज दिया है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ट्रॉफी के साथ टूर करना चाह रहा था. पीसीबी इसको लेकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) भी जाने के प्लान में था. लेकिन आईसीसी ने पाकिस्तान के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. अब पीसीबी ट्रॉफी के साथ पीओके नहीं जा सकेगी. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड 16 नवंबर से 24 नवंबर तक ट्रॉफी को पूरे देश में घुमना चाह रहा था. इसे दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी के2 पर भी ले जाने का प्लान है. इसके साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के तीन शहर स्कार्दु, मुर्री और मुजफ्फराबाद में ले जाने का प्लान है. लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इसको लेकर आपत्ति जताई थी. आईसीसी ने इस पर संज्ञान लिया है. आईसीसी ने पीसीबी को ट्रॉफी को पीओके न ले जाने के लिए कहा है. चैंपियंस ट्रॉफी पर मचा बवाल – चैंपियंस ट्रॉफी पर अब तक काफी बवाल हो चुका है. टीम इंडिया टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान नहीं जाएगी. इसको लेकर पीसीबी में काफी हलचल मची हुई है. टूर्नामेंट का आयोजन अगले साल 19 फरवरी से 9 मार्च तक होगा. लेकिन अभी तक शेड्यूल जारी नहीं हुआ है. हालांकि इससे पहले ही चैंपियंस ट्रॉफी पाकिस्तान पहुंच गई है. recent visitors 70

मध्यप्रदेश के 73% सरकारी कर्मचारी हो रहे उम्रदराज, सरकार की बढ़ी टेंशन !

भोपाल मध्यप्रदेश के 73 फीसदी क्लास-वन अधिकारी और 53 फीसदी क्लास-टू अफसरों की उम्र 45 साल से ज्यादा है। इसके अनुपात में क्लास-वन युवा अफसरों की संख्या 27% तो क्लास टू कैटेगरी के अधिकारी 47% हैं।  प्रदेश के 73 फीसदी क्लास वन अधिकारी तो 53 फीसदी क्लास टू अधिकारियों की उम्र 45 साल से ज्यादा है। इसके अनुपात में क्लास वन युवा अधिकारियों की संख्या 27% तो क्लास टू कैटेगरी के अधिकारी 47% हैं। आने वाले 5 साल में सभी कैटेगरी के एक लाख से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी रिटायर होने वाले हैं।इस स्थिति ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। पिछली कैबिनेट मीटिंग में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विभागों से खाली पदों का ब्योरा मांगा है। ब्योरा मिलने के बाद सीएम मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ इसी महीने बैठक करेंगे। क्यों बन रही ऐसी स्थिति ? जानकारों की मानें तो ऐसी स्थिति इसलिए बनी क्योंकि भर्ती प्रक्रिया के प्रति सरकार गंभीर नहीं है। इसका असर आने वाले समय में सरकार के कामकाज पर पड़ना तय है। जानकार ये भी मानते हैं कि युवाओं की भर्ती नहीं होने से आने वाले समय में नवाचार और नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में कमी आएगी।मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में सिर्फ डॉक्टर्स की रिटायरमेंट उम्र 65 साल है। बाकी विभागों में 62 साल में कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं।  क्लास वन अधिकारियों की बात की जाए तो इनकी कुल संख्या 8 हजार 49 हैं। इनमें से 2135 यानी 27 फीसदी अधिकारी 45 साल से कम उम्र के हैं। 46 से 61 साल से ज्यादा उम्र वाले अधिकारियों की संख्या 5 हजार 914 है, जो कुल अधिकारियों की संख्या का 73 फीसदी है।क्लास वन अधिकारी राजपत्रित अधिकारी होते हैं। प्रशासनिक मशीनरी को चलाने में इनका अहम रोल होता है। इस स्थिति ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। पिछली कैबिनेट मीटिंग में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विभागों से खाली पदों का ब्योरा मांगा है। ब्योरा मिलने के बाद सीएम मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ इसी महीने बैठक करेंगे। जानकारों की मानें तो ऐसी स्थिति इसलिए बनी क्योंकि भर्ती प्रक्रिया के प्रति सरकार गंभीर नहीं है। इसका असर आने वाले समय में सरकार के कामकाज पर पड़ना तय है। जानकार ये भी मानते हैं कि युवाओं की भर्ती नहीं होने से आने वाले समय में नवाचार और नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में कमी आएगी। मध्यप्रदेश में लोकसेवा आयोग (पीएससी) और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से की जाने वाली सरकारी भर्ती में होने वाली देरी आने वाले समय में फजीहत की वजह बन सकती है। साथ ही युवाओं की घटती संख्या का असर सरकार की एफिशिएंसी पर भी पड़ रहा है।इन स्थितियों को देखते हुए अब मोहन सरकार इस ओर गंभीर हुई है और पिछली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागों के रिक्त पदों का ब्योरा विभाग प्रमुखों से मांगा है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इसी माह सभी विभागों का रिक्त पदों का डिटेल आने के बाद सीएम के साथ बैठक करने की बात भी कही है। किस कैटेगरी में कितने अधिकारी युवा और कितने उम्रदराज प्रदेश सरकार की 31 मार्च 2023 को जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में नियमित सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या कुल 5 लाख 90 हजार 550 है। मौजूदा साल में ये आंकड़ा और घट गया है, जिसकी रिपोर्ट इस वित्तीय वर्ष के खत्म होने के बाद जारी की जाएगी। एमपी में 45 साल से कम उम्र वाले कुल अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या 3 लाख 7 हजार 315 है, जो कुल कर्मचारियों का 52 फीसदी है। 46 से 61 साल की उम्र के कर्मचारियों की संख्या 2 लाख 83 हजार 235 हैं, जो कुल कर्मचारियों का 48 फीसदी है। युवा और उम्रदराज कर्मचारियों के बीच केवल 4 फीसदी का अंतर है। जानकारों के मुताबिक, ये रेश्यो 60:40 का होना चाहिए यानी 60 फीसदी युवा और 40 फीसदी उम्रदराज कर्मचारी-अधिकारी होने चाहिए। recent visitors 73

मुख्यमंत्री साय ने कीर्तन दरबार में मत्था टेका और छत्तीसगढ़ वासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के खालसा स्कूल प्रांगण में गुरुनानक जयंती के अवसर पर आयोजित प्रकाश पर्व में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कीर्तन दरबार में मत्था टेका और सभी छत्तीसगढ़ वासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री  साय ने प्रकाश पर्व पर सभी को बधाई देते हुए कहा कि आज इस पवित्र दिन सिख समुदाय के अपने भाइयों-बहनों के बीच आकर मैं बहुत खुशी का अनुभव कर रहा हूँ। गुरु नानक देव जी का जीवन न केवल सिख समुदाय के लिए प्रेरक है अपितु सभी भारतीयों के लिए उनका जीवन प्रेरणादायी है। गुरु नानक जी के वचनों में सामाजिक एकता पर जोर दिया गया है। उन्होंने एक समतामूलक समाज के निर्माण पर जोर दिया। देश की आज़ादी में सिख समाज का बहुत बड़ा योगदान है। सिख समाज का इतिहास बहुत ही गौरवशाली और समृद्ध है। धर्म के प्रति समर्पण और सेवा की भावना सिख समाज की अभिन्न पहचान है।   मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जब हम गुरु गोविंदसिंह जी का जीवन देखते हैं तो हमें पता चलता है कि उनके पुत्र साहेबजादे बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी पर धर्म बदलने का दबाव आया। उन्होंने शहादत कबूल की लेकिन धर्म नहीं बदला। ऐसा इतिहास सिख समाज का रहा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने साहेबजादों के शहादत दिवस 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया और हर साल हम गर्व के साथ यह दिन मनाते हैं। इस अवसर पर विधायक पुरन्दर मिश्रा, श्री संजय श्रीवास्तव, श्री भूपेंद्र सवन्नी, श्री मनमोहन चावला व गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग उपस्थित थे। recent visitors 64