श्रीनगर में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरा, मुठभेड़ जारी

श्रीनगर मध्य कश्मीर के श्रीनगर जिले के जबरवान वन क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेर लिया है और दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ चल रही है। पुलिस ने रविवार को बताया कि पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम को उस क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में सूचना मिलने के बाद अभियान शुरू किया गया। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों ने 3-4 आतंकियों को घेर लिया है, वहीं इस दौरान दोनों ओर से गोलीबारी हो रही है। हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच कई मुठभेड़ हुई, जिनमें कई आतंकवादी और उनके कमांडर मारे गए हैं। वहीं, कुछ सुरक्षा बलों के जवान भी हताहत हुए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि आतंकवादी गतिविधियां अब जम्मू-कश्मीर के उन इलाकों में भी हो रही हैं, जो इस तरह की घटनाओं से मुक्त माने जा रहे थे। इसमें कश्मीर में श्रीनगर और जम्मू में चेनाब घाटी, उधमपुर और कठुआ के इलाके शामिल हैं। जम्मू में अत्यधिक प्रशिक्षित आतंकवादी वाहनों पर घात लगाकर हमला कर रहे हैं और ग्रेनेड और गोलियों के साथ-साथ एम4 असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि बढ़ते आतंकवाद और आतंकवादियों द्वारा अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल से खतरे के स्तर में वृद्धि का संकेत मिलता है। लगातार हो रहे हमलों ने राजनीतिक आलोचना को जन्म दिया है और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की है। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कश्मीर घाटी को जम्मू से विभाजित करने वाले पीर पंजाल क्षेत्र में आतंकवाद में बढ़ोतरी को देखा गया है। कश्मीर में लगातार आतंकवाद विरोधी अभियानों ने आतंकवादियों को पहाड़ों और उन क्षेत्रों में धकेल दिया है, जो आतंकवाद से मुक्त थे और जहां वे छिपते हैं। recent visitors 90

रीवा में तीन ग्रीन एनर्जी प्लांट लगाने के लिए सरलता से मिलेगी पराली : उप मुख्यमंत्री

भोपाल कमिश्नर कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा, सतना और मऊगंज जिलों में बाणसागर बाध की नहरों से सिंचाई के बाद धान और गेंहू का विपुल उत्पादन हो रहा है। ग्रीन एनर्जी प्लांट में धान के पैरे (पराली) से बिजली और जैविक खाद बनायी जायेगी। रीवा जिले में तीन ग्रीन एनर्जी प्लांट लगाने के लिए पराली पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। गुढ़ में प्रस्तावित ग्रीन एनर्जी प्लांट का कार्य तत्काल शुरू करें। इस प्लांट के लिए कच्चा माल पराली और कम उपजाऊ क्षेत्र में नेवियर घास उगाकर आसानी से उपलब्ध हो जायेगा। ग्रीन एनर्जी प्लांट स्थापित होने से किसानों की कम उपजाऊ और परती जमीनों से भी लाखों की आय होगी। कंपनी सर्वे का कार्य शीघ्र पूरा करके वास्तविक निर्माण कार्य शुरू करायें। इस प्लांट की स्थापना से जिले में नरवाई जलाने और पराली के समस्या का भी समाधान होगा। किसान के लिए अब धान के साथ-साथ उसका पैरा भी आमदनी देगा। मऊगंज जिले में प्लांट के लिए एक हजार हेक्टेयर की जमीन उपलब्ध है। जमीन प्राप्त करने तथा प्लांट के लिए 7 दिन में आवेदन करें। गुढ़ में दो और सिरमौर में एक प्लांट लगाने की कार्य योजना को मूर्त रूप दें। बैठक में कलेक्टर मऊगंज ने बताया कि ग्रीन एनर्जी प्लांट के लिए बदवार सीतापुर रोड में एक हजार हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। इसमें से 95 प्रतिशत जमीन निजी भूमि है। किसान अच्छी आय प्राप्त होने पर सरलता से दे देगें। किसानों से अनुबंध के आधार पर जमीनें मिल जायेगी। बैठक में कलेक्टर रीवा श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया कि तीन प्लांट लगाने के लिए पर्याप्त पराली उपलब्ध है। गेंहू के फसल अवशेष तथा वनों से प्राप्त अनुपयोगी पौधों का भी ग्रीन एनर्जी प्लांट में उपयोग किया जा सकता है। गुढ़ प्लांट को सीधी जिले के धान उत्पादक चुरहट और रामपुर नैकिन क्षेत्र के रीवा से जुड़े हुए गांव से भी पराली मिल जायेगी। कलेक्टर सतना अनुराग वर्मा ने बताया कि नगौद में ग्रीन एनर्जी प्लांट का कार्य जारी है। बैठक में रिलायंस ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट के प्रतिनिधि अशोक खरे तथा विजित झा ने बताया कि हमारी कंपनी रीवा और सतना जिले में दस ग्रीन एनर्जी प्लांट स्थापित करना चाहती है इसके लिए सर्वे किया जा रहा है। इस प्लांट में कच्चे माल के रूप में गेंहू और धान के फसल अवशेष पराली का उपयोग किया जायेगा। एक प्लांट के लिए 22 हजार मैट्रिक टन पराली की आवश्यकता होगी। पराली के साथ परती तथा अनुपयोगी जमीन पर आसानी से उगने वाली नेपियर घास का भी कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जायेगा। ग्रीन एनर्जी प्लांट से कम्प्रेस, बायोगैस, हाइड्रोजन तथा मैथेलान का उत्पादन होगा। साथ ही इससे जैविक खाद का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा। किसानों की पराली को कम्प्रेस करके कच्चा माल के रूप में बनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता होगी। इससे रोजगार का सृजन होगा। किसानों की परती और कम उपजाऊ जमीन भी अच्छा लाभ देगी। किसानों से अनुबंध के आधार पर नेपियर घास की खेती करायी जायेगी। ग्रीन एनर्जी प्लांट ऊर्जा उत्पादन के साथ किसानों की तकदीर भी बदल देगा। बैठक में कमिश्नर बीएस जामोद, डिप्टी कलेक्टर श्रेयस गोखले, उप संचालक पशुपालन डॉ. राजेश मिश्रा, क्षेत्रीय प्रबंधक औद्योगिक विकास निगम यूके तिवारी, परियोजना अधिकारी जिला पंचायत संजय सिंह तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। recent visitors 71

CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनाया अंतिम फैसला?, ‘बुलडोजर जस्टिस मंजूर नहीं’

नई दिल्ली। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (Justice DY Chandrachud) चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पद से रिटायर हो गए। अब सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के आखिरी फैसले में CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने 'बुलडोजर जस्टिस' की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, 'बुलडोजर न्याय' कानून के शासन के तहत अस्वीकार्य है। अदालत ने कहा कि बुलडोजर न्याय न केवल कानून के शासन के विरुद्ध है, बल्कि यह मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। अगर इसे अनुमति दी गई तो अनुच्छेद 300ए के तहत संपत्ति के अधिकार की संवैधानिक मान्यता एक डेड लेटर बनकर रह जाएगी।' कोर्ट ने कहा, बुलडोजर के माध्यम से न्याय न्यायशास्त्र की किसी भी सभ्य प्रणाली के लिए अज्ञात है। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, 'एक गंभीर खतरा है कि यदि राज्य के किसी भी विंग या अधिकारी द्वारा उच्चस्तरीय और गैरकानूनी व्यवहार की अनुमति दी जाती है, तो नागरिकों की संपत्तियों का विध्वंस बाहरी कारणों से चुनिंदा प्रतिशोध के रूप में होगा।' अदालत ने किसी भी संपत्ति को ढहाने से पहले छह आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है – 0- अदालत ने कहा,अधिकारियों को पहले मौजूदा भूमि रिकॉर्ड और मानचित्रों को सत्यापित करना होगा। 0- दो, वास्तविक अतिक्रमणों की पहचान करने के लिए उचित सर्वे किया जाना चाहिए। 0- कथित अतिक्रमणकारियों को तीन लिखित नोटिस जारी किए जाने चाहिए। 0- आपत्तियों पर विचार किया जाना चाहिए और स्पष्ट आदेश पारित किया जाना चाहिए 0- स्वैच्छिक हटाने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए । 0- यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त भूमि कानूनी रूप से अधिग्रहित की जानी चाहिए। बता दें कि ये दिशानिर्देश सितंबर 2019 में यूपी के महाराजगंज जिले में पत्रकार मनोज टिबरेवाल आकाश के घर को ध्वस्त करने के मामले में सुनाए गए हैं, यह मानते हुए कि राज्य द्वारा अपनाई गई पूरी प्रक्रिया 'क्रूर' थी। अधिकारियों ने दावा किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तार के लिए विध्वंस आवश्यक था, वहीं जब इस मामले की जांच की गई तो जांच में उल्लंघन का एक पैटर्न सामने आया जिसे अदालत ने राज्य शक्ति के दुरुपयोग का उदाहरण बताया। यूपी सरकार को 25 लाख का मुआवजा अदालत ने राज्य को याचिकाकर्ता को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया और यूपी के मुख्य सचिव को अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने और घर को ध्वस्त करने के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया। recent visitors 43

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- कांग्रेस और उसके साथी आदिवासियों को ऊंचाई पर नहीं देख सकते

गुमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को झारखंड के गुमला हवाई अड्डा मैदान में आयोजित चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस, झामुमो और राजद को आदिवासियों का दुश्मन करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके साथी आदिवासियों को ऊंचाई पर नहीं देख सकते। भाजपा ने आदिवासी समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मू को देश का राष्ट्रपति बनाया, पर द्रौपदी मुर्मू के साथ कांग्रेस का क्या व्यवहार रहा है, ये पूरा देश जानता है। कांग्रेस ने उन्हें राष्ट्रपति चुनाव में हराने के लिए पूरी ताकत लगा दी। झारखंड में चंपई सोरेन के साथ जो हुआ, ये उनकी इसी सोच का नतीजा है। पीएम मोदी ने कहा कि इस चुनाव में झारखंड में मुझे जहां-जहां जाने का अवसर मिला, वहां हर रैली पहले वाली रैली का रिकॉर्ड तोड़ देती है। गुमला की रैली में आए लोगों की भीड़ बताती है कि हवा का रुख क्या है। उन्होंने कहा कि झारखंड में घुसपैठ रोकने और झारखंड की पहचान बचाने के लिए यहां भाजपा सरकार चाहिए। नौजवानों को नौकरी और महिलाओं को सुरक्षा मिले, इसके लिए भाजपा की सरकार चाहिए। आज आदिवासी, ओबीसी और दलितों की पहली पसंद भाजपा और एनडीए है। उन्होंने झामुमो और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दोनों पार्टियों ने झारखंड को हमेशा पिछड़ा रखा है, जबकि भाजपा और एनडीए ने झारखंड को बड़ी-बड़ी योजनाओं का केंद्र बनाया है। पहले दिल्ली से योजनाएं शुरू होती थी। हमने बिना गारंटी के लोन देने वाली मुद्रा योजना दुमका से शुरू की थी। आयुष्मान भारत योजना रांची और पीएम जन मन योजना खूंटी से शुरू हुई थी। आदिवासी गांवों में भाजपा सरकार 80,000 करोड़ खर्च करने वाली है। इन पैसों से अच्छे स्कूल बनेंगे, अच्छे अस्पताल बनेंगे, यहां के बच्चों के लिए ट्रेनिंग सेंटर बनेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा और एनडीए की सरकार सबका साथ, सबका विकास इस मूल मंत्र पर चल रही है। इसी रास्ते पर चलकर झारखंड और भारत विकसित होगा, लेकिन झामुमो-कांग्रेस के इरादे कुछ अलग हैं। कांग्रेस का शाही परिवार दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज की एकता को तोड़ना चाहता है। वे एससी-एसटी और ओबीसी को मिला आरक्षण छीनना चाहते हैं। कांग्रेस चाहती है कि आदिवासी समुदाय आपस में लड़ें और कमजोर हो जाएं। ये उरांव को मुंडा से और चीक-बड़ाइक को महली से लड़वाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने झारखंड में कांग्रेस नेताओं के यहां छापेमारी में बरामद रकम का जिक्र करते हुए कहा कि आपने तो झामुमो और कांग्रेस के मंत्रियों के नोटों के पहाड़ देखे हैं, पर मोदी आपके पैसों को लूटने नहीं देगा। जिन्होंने आपका पैसा लूटा है, उन्हें लौटाना पड़ेगा और जिंदगी जेल में गुजारनी पड़ेगी। झारखंड के नौजवानों का नुकसान झामुमो-कांग्रेस ने सबसे ज्यादा किया है। बीते पांच सालों में कोई ऐसा पेपर नहीं है, जो लीक नहीं हुआ है। ऐसी कोई सरकारी भर्ती नहीं है, जिसमें धांधली नहीं हुई है। भाजपा-एनडीए की सरकार इनके हर भ्रष्टाचार का हिसाब चुकता करेगी। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने बीते दस सालों में छोटे किसानों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि गुमला के किसानों के खाते में पीएम सम्मान निधि के 500 करोड़ पहुंचे हैं। गुमला में रागी जैसा ‘श्री अन्न’ उगाया जाता है। हम ‘श्री अन्न’ के रूप में पूरी दुनिया में रागी की फसल को पहुंचाने जा रहे हैं। झारखंड भाजपा ने किसानों के लिए जो घोषणाएं की हैं, वो बहुत ही प्रशंसनीय हैं। 23 नवंबर के बाद एनडीए सरकार सभी गारंटियों को पूरा करेगी, ये मेरी गारंटी है। भारत तभी विकसित होगा जब नारी विकसित होगी। यही बात झारखंड की माताओं-बहनों के लिए भी है। पीएम मोदी ने कहा कि झारखंड भाजपा ने भी 'गोगो दीदी योजना' का ऐलान किया है। 'गोगो दीदी योजना' के तहत महिलाओं के खाते में हर महीने हजारों रुपये जमा होने वाले हैं। उन्होंने लोगों से भाजपा, आजसू, जदयू और एलजेपी के उम्मीदवारों को विजयी बनाने की अपील करते हुए कहा कि आपका हर वोट 'विकसित भारत, विकसित झारखंड' के सपने को गति देगा। मुझे झारखंड में हर गरीब को पक्का घर देना है। यह आपके वोट की ताकत है कि मोदी हर गरीब को घर दे पा रहा है। recent visitors 75

‘हम हिजबुल्ला के खिलाफ हैं, लेबनान के नहीं’, इस्राइल ने लेबनानी झंडा जलाने पर की सैनिकों की आलोचना

यरुशलम. बीते एक साल से ज्यादा समय से इस्राइल और हमास के बीच जंग जारी हैं। वहीं, इस युद्ध की लपटें लेबनान और ईरान तक पहुंच चुकी हैं। इस बीच, इस्राइली सेना ने शनिवार को सैनिकों के एक समूह पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समूह ने दक्षिणी लेबनान में लेबनानी झंडा जलाया, जहां वे ईरान समर्थित समूह हिजबुल्ला से लड़ रहे हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद सेना ने इसकी आलोचनी की। वीडियो में इस्राइल की वर्दी पहने करीब आधा दर्जन लोग धार्मिक नारा लगाते और नाचते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनमें से एक लाइटर से झंडे में आग लगा रहा है। हमारी जंग आंतकवादी हिजबुल्ला के खिलाफ: अद्रेई सेना के प्रवक्ता अविचय अद्रेई ने कहा, 'हम दक्षिणी लेबनान में कुछ सैनिकों द्वारा लेबनानी झंडे को जलाने के कृत्य को आदेशों का उल्लंघन, रक्षा बलों के मूल्यों के साथ असंगत तथा लेबनान में हमारी सैन्य गतिविधियों के लक्ष्यों के साथ गलत संरेखण के रूप में देखते हैं। हमारी जंग आंतकवादी हिजबुल्ला के खिलाफ है, जो पंथ, विचारधारा या पहचान में कभी भी सही मायने में लेबनानी नहीं रहा है।' प्रतिबंध का कोई उल्लेख नहीं सोशल मीडिया पर दी गई प्रतिक्रिया में सैनिकों के खिलाफ किसी भी संभावित प्रतिबंध का उल्लेख नहीं किया गया था। हालांकि, एक वीडियो को जारी किया गया था, जिसमें कथित तौर पर हिजबुल्ला के एक आतंकवादी ने लेबनान के झंडे को फाड़कर उसकी जगह समूह का बैनर लगा दिया था। ""#هام منذ بدء الحرب على حزب الله، قلناها بوضوح: حربنا ليست ضد الشعب اللبناني، بل ضد من ينتهك أرض لبنان، ويحرق سيادته، ويدنس رموزه.     حربنا ضد حزب الله الإرهابي، الذي لم يكن يومًا لبنانيًا لا في العقيدة، ولا الفكر، ولا الهوية. ومن هنا، نعتبر قيام بعض الجنود على حرق العلم اللبناني في… pic.twitter.com/A1KtAcyOcn— افيخاي ادرعي"" – (@AvichayAdraee) November 9, 2024 recent visitors 96

विशेष अभियानों ने स्क्रैप के निपटान के जरिए 2,364 करोड़ रुपये का राजस्व पैदा किया है, पीएम मोदी ने की सराहना

नई दिल्ली कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 31 अक्टूबर, 2024 को समाप्त हुए विशेष अभियान 4.0 के कार्यान्वयन चरण के सफल समापन की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा 2021-24 तक चलाए गए विशेष अभियानों ने स्क्रैप के निपटान के जरिए 2,364 करोड़ रुपये का राजस्व पैदा किया है। पीएम मोदी ने भी इन नतीजों की सराहना की है। जितेंद्र सिंह ने बताया कि विशेष अभियान 4.0 स्वच्छता को संस्थागत बनाने और सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों को कम करने के लिए देश का सबसे बड़ा अभियान था और इसने कई बेहतरीन प्रथाएं और उपलब्धियां देखी हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशों से प्रेरित होकर, स्वच्छता और लंबित मामलों को कम करने के लिए 'विशेष अभियान 4.0' में संतृप्ति दृष्टिकोण को अपनाया गया और देश के दूरदराज के हिस्सों में 5.97 लाख से अधिक कार्यालयों को कवर किया गया। जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए भी जानकारी दी, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, विशेष अभियान 4.0, जो कि अपने प्रकार का भारत का सबसे बड़ा अभियान है, ने कई महत्वपूर्ण परिणाम हासिल किए हैं। 2021 से कबाड़ को हटाकर राज्य कोष में लगभग 2,364 करोड़ रुपये जोड़े गए हैं।" पीएम मोदी ने इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "सही प्रबंधन और सक्रिय कदमों पर ध्यान देकर इस प्रयास ने बेहतरीन नतीजे हासिल किए हैं। यह दिखाता है कि मिलकर किए गए प्रयास स्थायी परिणाम दे सकते हैं, जिससे साफ-सफाई और आर्थिक बचत दोनों को बढ़ावा मिलता है।" जितेंद्र सिंह ने बताया कि विशेष अभियान 4.0 ने 2-31 अक्टूबर, 2024 की अवधि में 650 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया। विशेष अभियान 4.0 के तहत 5.97 लाख से अधिक स्थलों पर स्वच्छता अभियान चलाया गया और इसके परिणामस्वरूप कार्यालय उपयोग के लिए 190 लाख वर्ग फुट जगह खाली हुई। हर साल के साथ विशेष अभियान का आकार और पैमाना बढ़ता जा रहा है। विशेष अभियान 4.0 की समीक्षा कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और केन्द्र सरकार के सचिवों द्वारा की गई और इन्होंने कार्यान्वयन के मामले में नेतृत्व और मार्गदर्शन प्रदान किया गया। पोर्टल पर मंत्रालयों द्वारा रिपोर्ट किये गए अभियान के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के परिणाम निम्नलिखित हैं: स्वच्छता अभियान स्थल (लाख में)- 5.97 अर्जित राजस्व (करोड़ रुपए में)- 650.10 मुक्त स्थान (लाख वर्ग फीट)- 190 रिकॉर्ड प्रबंधन फाइलों की समीक्षा की गई (भौतिक फाइलें + ई-फाइलें) (लाखों में)- 45.10 रिकॉर्ड प्रबंधन (भौतिक फाइलें हटाई गईं + ई-फाइलें बंद की गईं) (लाखों में)- 25.19 लोक शिकायतें + निपटाई गई अपीलें (लाखों में)- 5.55 recent visitors 75

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में एक और हाथी की मौत, मां से बिछडने के बाद हो गया था बीमार

बांधवगढ़ मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में एक और हाथी की मौत हो गई। कुछ दिनों पहले पथपना में एक छोटा हाथी मां से बिछड़ गया था, इसके बाद वह बीमार हो गया था। वन विभाग ने हाथी को उसके झुंड से अलग करके उसका रेस्क्यू किया और उसका उपचार शुरू किया था। रेस्क्यू करने के बाद छोटे जंगली हाथी को बांधवगढ़ के ताला स्थित रामा कैंप पहुंचा दिया गया था। जहां उसे डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया। बीमार हाथी के बारे में यह जानकारी सामने आई थी कि वह अपनी मां से बिछड़ गया है और भूख के कारण बीमार हो गय। बीमार हाथी की आयु तीन से चार महीने की बताई गई है। ताला कैंप में रखकर की जा रही थी देखभाल उमरिया जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों के ऊपर आपदा का क्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार की सुबह पार्क प्रबंधन को पनपथा बफर इलाके के छतवा जमुनिहा के जंगल में जंगली हाथी शावक बीमार अवस्था में मिला था। बेहाल अवस्था में मिले जंगली हाथी को पार्क प्रबंधन ने रेस्क्यू कर अपने कब्जे में लिया है और उसका उपचार किया था। हाथी शावक को पार्क के ताला हाथी कैंप में रखकर देखभाल की जा रही थी। तेरह हाथियों का झुंड बताया गया था कि जिस झुंड का छोटा हाथी बीमार हुआ था, वह भी तेरह हाथियों का ही था। तेरह हाथियों में से बाकी के 12 हाथी स्वस्थ्य बताए जा रहे हैं। हालांकि उन पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि छोटा जंगली हाथी किसी वस्तु को खाने से बीमार हुआ है या फिर किसी और कारण से वह अस्वस्थ्य हुआ था। यह जानकारी जरूर सामने आ रही है कि बीमार हुए छोटे हाथी के शरीर में कंपन हो रहा था। उसने कई जगह लीद भी भी की थी। बीमार हुए जंगली हाथी की जानकरी मिलने के बाद जब वन प्रबंधन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सबसे ज्यादा समय छोटे हाथी का रेस्क्यू करने में लगा था। दरअसल बीमार हाथी को उसके झुंड से अलग करना मुश्किल काम था। recent visitors 44