आज के समय में नौकरी कर रहा पारिवारिक जीवन को ख़तम

आज के जमाने में बढ़ रहे काम के बोझ के साथ पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना एक चुनौती बन गई है. जहां एक तरफ बढ़ती प्रतिस्पर्धा और जरूरतें के कारण लोग अपने करियर पर सबसे ज्यादा ध्यान देने पर मजबूर हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पारिवारिक जीवन की जरूरतें अनदेखी होती जा रही हैं. सुबह से रात तक की व्यस्त दिनचर्या, देर से घर लौटने और काम से संबंधित तनाव का असर न केवल व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि यह पारिवारिक संबंधों में भी दरार पैदा कर सकता है. इस संकट का मुख्य कारण है "वर्क-लाइफ बैलेंस" का अभाव. कई लोग अपनी नौकरी को प्राथमिकता देते हुए परिवार के सदस्यों के साथ बिताने वाले समय को कम करते जा रहे हैं. यह स्थिति बच्चों के विकास, दांपत्य संबंधों और परिवार के सामूहिक खुशी पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है. शोध बताते हैं कि लंबे समय तक काम करने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी खतरनाक तरीके से प्रभावित कर सकता है. कैसे नौकरी कर रही है पारिवारिक जीवन, 5 प्वाइंट में समझिए 1. कार्य का तनाव और मानसिक स्वास्थ्य काम का तनाव एक सामान्य समस्या बन गई है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो उच्च-प्रेशर वाले वातावरण में काम कर रहे हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, यह तनाव व्यक्ति की मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है. तनाव के कारण व्यक्ति में चिंता, अवसाद, और थकान जैसे लक्षण विकसित हो सकते हैं. जब कोई व्यक्ति तनाव में होता है, तो उसकी मानसिक स्थिति सीधे तौर पर उसके पारिवारिक जीवन को प्रभावित करती है. तनावग्रस्त व्यक्ति अक्सर अपने भावनात्मक और मानसिक संसाधनों को काम में लगाने के कारण घर लौटने पर थका हुआ महसूस करता है. इस थकान का नकारात्मक प्रभाव परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत पर पड़ता है. तनावग्रस्त व्यक्ति अक्सर अपने परिवार के साथ संवाद करने में संकोच करता है. वे ज्यादातर चुप रहना पसंद करते हैं या केवल जरूरत पड़ने पर ही बातें किया करते हैं, जिससे पारिवारिक बातचीत की गुणवत्ता घट जाती है.  इसके अलावा जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो वह अपने परिवार के सदस्यों से भावनात्मक रूप से भी दूरी बना लेता है. यह स्थिति रिश्तों में दरार का कारण बन सकती है. परिवार के सदस्यों को यह अनुभव हो सकता है कि उनका प्रिय व्यक्ति उन्हें सुन नहीं रहा या उनके प्रति उदासीन है, जिससे अवसाद और नकारात्मक भावनाएं बढ़ सकती हैं. 2. समय की कमी साल 2022 में किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 70% कामकाजी माता-पिता अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहे हैं. यह समय की कमी परिवारों में असंतोष और संघर्ष को जन्म देती है. काम के कारण देर से घर लौटना, छुट्टियों का न लेना और परिवार के आयोजनों में भाग न लेना, सभी पारिवारिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं. 3. सामाजिक जीवन का अभाव काम की व्यस्तता के कारण लोग अपने सामाजिक जीवन को भी अनदेखा करने लगते हैं. एक रिसर्च में पाया गया कि 60% लोग काम के कारण अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलने की योजना नहीं बना पाते. इससे व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे अकेलापन और अवसाद बढ़ सकता है. 4. बच्चों पर प्रभाव एक अन्य अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ कि जिन माता-पिता की नौकरी अत्यधिक मांग वाली होती है, उनके बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ने की संभावना अधिक होती है. शोध से पता चला है कि ऐसे बच्चे ज्यादा समय तक अकेले रहते हैं और यह उनके सामाजिक विकास को प्रभावित करता है. 5.रिश्तों में तनाव काम के दबाव के चलते दांपत्य संबंधों में भी तनाव बढ़ता है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि काम के कारण होने वाली समस्याएं विवाहित जोड़ों के बीच आपसी संघर्ष को बढ़ाती हैं. लगभग 50% जोड़े जो काम के तनाव का सामना कर रहे थे, उन्होंने बताया कि यह उनके रिश्ते में दरार का कारण बन रहा है. तो क्या है इसका समाधान वर्क-लाइफ बैलेंस: लचीलापन प्रदान करना- गलूप 2022 की एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 82% कर्मचारी लचीले काम के घंटे को प्राथमिकता देते हैं और इसे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार का एक प्रमुख कारक माना जा रहा है. कंपनियां भी वर्क फ्रॉम होम और फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स जैसी नीतियां अपनाकर अपने कर्मचारियों की उत्पादकता और संतोष बढ़ा सकती हैं. पारिवारिक अवकाश- अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिएशन 2021 की एक रिपोर्ट में अलग अलग शोधों के आधार पर बताया है कि पारिवारिक छुट्टियों में भाग लेने से कर्मचारियों की मानसिक स्वास्थ्य में 30% सुधार होता है. ऐसे में कंपनियां अपने कर्मचारियों को साल में या 6 महीने में इस तरह की छुट्टियां देने पर विचार कर सकती हैं जो कर्मचारियों को अपने परिवार के साथ समय बिताने की अनुमति दें. संवाद को बढ़ावा: नियमित पारिवारिक बैठक- जर्नल ऑफ फैमली साइकोलॉजी, 2020 की एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन परिवारों में नियमित संवाद होता है, वहां तनाव और अवसाद की दर 50% तक कम हो जाती है. ऐसे में हर व्यक्ति को कोशिश करनी चाहिये कि भले ही पूरा दिन वो अपने परिवार के सदस्यों से नहीं कर पाए हों. लेकिन, सुबह का नाश्ता या रात का खाना एक साथ खाएं और इस बीच आपस में दिनभर की बातें साझा करें. फैमली रिलेशन 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार भावनाओं को व्यक्त करने वाले परिवारों में आपसी समझ 70% अधिक होती है, जिससे रिश्तों में तनाव कम होता है. यह परिवार के सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और समर्थन को बढ़ावा देता है. recent visitors 90

दिवाली पर दिल्ली में डबल मर्डर की पूरी कहानी, मिठाई लेकर आया, फिर पैर छूकर बरसा दीं गोलियां

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के शाहदरा के फर्श बाजार इलाके में दो हथियारबंद लोगों ने गुरुवार शाम अपने घर के बाहर दिवाली मना रहे एक चाचा-भतीजे की गोली मारकर हत्या कर दी। वहीं, एक बच्चा घायल हो गया। इस घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी अब सामने आ गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 17 दिन पहले ही हत्या की योजना बना ली थी। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि घटना में आकाश शर्मा उर्फ ​​छोटू (40) और उसके भतीजे ऋषभ शर्मा (16) की मौत हो गई, जबकि कृष शर्मा (10) गोली लगने से घायल हो गया। उन्होंने बताया कि पीड़ित शाहदरा के फर्श बाजार इलाके में अपने घर के बाहर दिवाली मना रहे थे, तभी रात लगभग 8 बजे उन पर हमला हुआ। यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी ने 17 दिन पहले ही हत्या की योजना बना ली थी। हिरासत में लिए गए नाबालिग और मृतक आकाश और उसके परिवार के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं। जांच के अनुसार मृतक और आरोपी के बीच पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। प्रारंभिक जांच में आपसी रंजिश का मामला सामने आया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया, पूछताछ जारी है। मिठाई देने के बहाने आया हत्यारा मृतक आकाश की मां ने कहा, "लक्ष्य नाम का एक लड़का पिछले 3-4 दिनों से हमारी गली में चक्कर लगा रहा था। कल वह मिठाई का डिब्बा लेकर हमारे घर आया और मुझसे कहा कि मैं वो डिब्बा ले लूं। जिस समय मेरा बेटा पटाखे फोड़ने की तैयारी कर रहा था, उसी समय लक्ष्य सहित दो लोग आए और फिर मैंने गोलियां चलने की आवाज सुनी। इसके बाद मैंने देखा कि मेरे बेटे को गोली मार दी गई।'' अधिकारी ने बताया, ‘‘रात लगभग साढ़े 8 बजे पीसीआर कॉल आने पर पुलिस की एक टीम भेजी गई। टीम को घटनास्थल पर खून के धब्बे मिले।’’ प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने आकाश शर्मा पर गोली चलाने से पहले उसके पैर छुए थे। सभी पीड़ितों को अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने बताया कि पास में खड़े आकाश शर्मा के बेटे कृष और भतीजे ऋषभ को भी गोलियां लगीं। अधिकारी ने बताया कि आकाश शर्मा और ऋषभ शर्मा को अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि कृष शर्मा का इलाज चल रहा है। सीसीटीवी वीडियो में आकाश शर्मा, अपने भतीजे ऋषभ शर्मा (16) और बेटे कृष शर्मा (10) अपने घर के बाहर पतली सी सड़क पर पटाखे फोड़ते नजर आ रहे हैं। इसके बाद एक व्यक्ति दोपहिया वाहन पर आता है और आकाश शर्मा के पैर छूता है, जबकि दूसरा वहीं खड़ा रहता है। कुछ सेकेंड बाद, दूसरा व्यक्ति आकाश पर करीब पांच राउंड गोलियां चलाता है, जिससे उसकी मौत हो जाती है और उनका बेटा घायल हो जाता है। जब आकाश का भतीजा हमलावरों के पीछे भागा, तो बदमाशों ने उसे भी गोली मार दी। पुलिस ने बताया कि प्रथमदृष्टया यह आपसी दुश्मनी का मामला लगता है। रिपोर्ट के अनुसार, आकाश की पत्नी ने कहा कि वह हमलावरों को जानती है और उनके बीच कई सालों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस ने बताया कि पीड़ित परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए जाएंगे और इस संबंध में जांच जारी है। recent visitors 73

प्रदेश में धार्मिक स्थलों में खुलेंगे वृद्धाश्रम, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुजुर्गों संग मनाई दिवाली

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को दीपावली के पावन पर्व पर राजधानी के शिवाजी नगर में स्थित सेवा भारती आनंद धाम पहुंचकर वृद्धजनों के साथ दीपोत्सव का जश्न मनाया। सीएम ने बुजुर्गों को दीपावली की बधाई दी और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने बुजुर्गों के साथ फुलझड़ी भी जलाई और उन्हें मिष्ठान एवं उपहार भेंट कर दीप-पर्व की खुशियां बांटी। इस अवसर पर अनेक बच्चों के साथ-साथ अनेक समाजसेवी भी उपस्थित थे। इस दौरान बुजुर्गों ने सुरीले भजन भी गाए। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कि ईश्वर के पश्चात माता-पिता का स्थान होता है। हमारी प्राचीन संस्कृति श्रवण कुमार वाली संस्कृति है। मेरे माता-पिता देवलोक गमन कर चुके हैं। लेकिन आज आनंद धाम में आकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अपने माता-पिता के बीच में आया हूं। मध्य प्रदेश सरकार सबको साथ लेकर चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एमपी में डबल इंजन की सरकार है। बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएगी सरकार इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के धार्मिक महत्व के स्थान पर इस तरह के धाम और आश्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे बुजुर्गजन इन कार्यक्रमों से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही वृद्धजन की सहायता और उपचार में मदद के लिए विशेष पहल की जाएगी। जिन बुजुर्गों के बच्चे विदेश में नौकरी कर रहे, उन्हें यहां आनंद धाम या वृद्धाश्रम में रहने पर यदि स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होती है तो उनके लिए व्यवस्था की जाएगी। ऐसे बुजुर्गों को अस्पताल में दाखिल करवाया जा सके, इसके लिए अस्पताल में बेड भी आरक्षित किए जाएंगे। इन जगहों पर खुलेंगे वृद्धाश्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के आयुक्त को उज्जैन, ओरछा, ओंकारेश्वर एवं चित्रकूट में वृद्धजन के लिये वृद्धश्रम संचालित करने तथा उनमें वृद्धजन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। 80 से ज्यादा वृद्धाश्रम चला रहा विभाग यहां पर यह बता दें कि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा प्रदेश में 83 वृद्धाश्रमों का संचालन किया जा रहा है। इन वृद्धाश्रमों में वृद्धजन को आवास, भरण-पोषण, मनोरंजन, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। वृद्धजन के लिये प्रदेश में 11 नवीन 50 सीटर वृद्धाश्रम भवन बैतूल, गुना, झाबुआ, मुरैना, सिंगरौली, उमरिया, सतना, जबलपुर, खरगौन, टीकमगढ़ एवं सीधी में संचालित हैं। उज्जैन के कुष्ठ धाम भी पहुंचे सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने गृहनगर उज्जैन में कुष्ठ धाममें आयोजित दीपावली उत्सव कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया और दीपोत्सव मनाया। उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। वृद्धजनों की मुस्कराहट और उनके आशीर्वाद ने आज दीपोत्सव के पावन पर्व दीपावली का आनंद दोगुना कर दिया। recent visitors 69

34 शब्दों के एक तार के बाद भोपाल बना भारत का हिस्सा, घुटने टेकने को मजबूर हुए नवाब

भोपाल  भारत की आजादी के दौरान कई रियासत ऐसी थी, जिनका पाकिस्‍तानी प्रेम उफान मार रहा था और वे भारत में शामिल नहीं होना चाहती थी। हालांकि कुछ रियासतें स्वतंत्र रहने के पक्ष में थी। भोपाल भी इनमें से ही एक ऐसी रियासत थी, जो भारत में शामिल होने के पक्ष में नहीं थी। हालांकि तत्कालीन उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के हस्तक्षेप और भोपाल के लोगों के विरोध के बाद 1 जून 1949 को भोपाल का भारत में विलय हुआ। ऐसा चला था घटनाक्रम दरअसल, भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान पाकिस्तान के समर्थक थे, ऐसे में वे भारत में शामिल होने के पक्ष में नहीं थे और हैदराबाद की तरह ही भोपाल रियासत को स्वतंत्र रखना चाहते थे। हालांकि लार्ड माउंटबेटन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और 14 अगस्त 1947 तक इसको लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया। नवाब जिन्‍ना और नेहरु के थे दोस्त पंडित जवाहल लाल नेहरु और जिन्‍ना नवाब के अच्‍छे दोस्‍त थे। जिन्‍ना ने नवाब को प्रस्‍ताव दिया कि वे पाकिस्‍तान आते हैं तो उन्‍हें वहां सेक्रेटरी जनरल पद दिया जाएगा। नवाब इसके लिए तैयार भी थे और इसके लिए उन्‍होंने बेटी आबिदा को भोपाल रियासत का शासक बनने के लिए कहा, लेकिन आबिदा ने इंकार कर दिया। भोपाल में भड़का विरोध मार्च 1948 में नवाब द्वारा भोपाल को स्वतंत्र रियासत घोषित करने और मई 1948 में भोपाल मंत्रिमंडल के गइन के बाद सियासत में विरोध भड़क गया। जिसे देखते हुए भोपाल मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री चतुरनारायाण मालवीय भी नवाब के विरोध में खड़े हो गए। दिसंबर 1948 के दौरान डा शंकरदयाल शर्मा, भाई रतन कुमार गुप्ता जैसे नेताओं के नेतृत्व में भोपाल के भारत में विलय के लिए 'विलीनीकरण आंदोलन' की शुरुआत हुई। जिसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं जनवरी 1949 में डा शंकर दयाल शर्मा को भी जेल भेज दिया गया। सरकार पटेल के पास पहुंचा तार विरोध के बीच सकर संक्रांति के मेले में गोलीकांड हो गया जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद कांग्रेस के प्रांतीय सदस्य बालकृष्ण गुप्ता ने सरदार पटेल को एक तार भेजकर हस्‍पक्षेप करने का अुनरोध किया। उन्‍होने तार में लिखा-     ‘भोपाल राज्य के बोरास घाट में संक्रांति मेले में 14 जनवरी को गोली चली। 10 की मृत्यु हुई। 250 घायल हुए। कई लापता हैं। सशस्त्र पुलिस मृतकों के शव नहीं सौंप रही है। तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। जांच बिठाई जाए, क्योंकि यहां जीवन असुरक्षित है।' -बालकृष्ण गुप्ता, प्रांतीय कांग्रेस सदस्य भोपाल में चल रहे प्रदर्शन और गिरफ्तारियों के साथ तार मिलने के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सख्त रुख अपनाया और नवाब को संदेश भेजा कि भोपाल स्‍वतंत्र नहीं बन सकता और इसे मध्य भारत का हिस्सा बनना होगा। फिर भारत में मिला भोपाल इन विरोध प्रदर्शनों के बावजूद नवाब नहीं माना और 29 जनवरी 1949 को नवाब ने मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर सारे अधिकार अपने हाथ में ले लिए। हालांकि भोपाल में हो रहे प्रदर्शन और सरदार पटेल के दबाव के बाद नवाब हमीदुल्लाह खान ने 30 अप्रैल 1949 को विलीनीकरण के पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए और 1 जून 1949 को भोपाल भारत का अंग बन गया। recent visitors 60

NCPCR की मांग, मदरसों को राज्यों से मिलने वाला पैसा बंद हो, जाने कारण

नई दिल्ली राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मदरसों को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद करने और मदरसा बोर्ड को बंद करने की सिफारिश की है। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को निर्देश जारी किया है। यह निर्देश 'धर्म के संरक्षक या अधिकारों के उत्पीड़क बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसे' शीर्षक वाली रिपोर्ट से जुड़ा है। रिपोर्ट में मदरसों द्वारा बच्चों के शैक्षिक अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव और उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर चर्चा की गई है। मदरसा बोर्ड को बंद करने की सिफारिश इस रिपोर्ट में 11 अध्याय हैं। यह रिपोर्ट मदरसों की ऐतिहासिक भूमिका और बच्चों के शैक्षिक अधिकारों पर उनके प्रभाव पर चर्चा करती है। NCPCR ने सिफारिश की है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मदरसों को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जाए। मदरसा बोर्ड को भी बंद कर देना चाहिए। आरटीआई एक्ट के महत्व पर जोर NCPCR प्रमुख, प्रियांक कानूनगो ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत समावेशी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009, इस विश्वास पर आधारित है कि समानता, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र जैसे मूल्यों को प्राप्त करना सभी के लिए समावेशी शिक्षा के प्रावधान के माध्यम से ही संभव है। हालांकि, बच्चों के मौलिक अधिकार और अल्पता समुदायों के अधिकार के बीच एक विरोधाभासी तस्वीर बनाई गई है।' सभी बच्चों को मिले औपचारिक शिक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि आरटीआई एक्ट के तहत सभी बच्चों को औपचारिक शिक्षा मिले, यह सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है। एनसीपीसीआर ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बोर्ड या यूडाइस कोड होने का मतलब यह नहीं है कि मदरसे आरटीआई एक्ट का पालन करते हैं। 'सरकारी फंडिंग बंद करनी चाहिए' एनसीपीसीआर ने सिफारिश की है कि मदरसों और मदरसा बोर्ड को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जाए। उत्तर प्रदेश के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन इन बोर्डों को बंद कर देना चाहिए। आयोग ने यह भी सिफारिश की कि गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकालकर आरटीआई एक्ट के अनुसार औपचारिक स्कूलों में दाखिला कराया जाए। इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि फिलहाल मदरसों में पढ़ रहे मुस्लिम बच्चों को औपचारिक स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें निर्धारित शिक्षा और पाठ्यक्रम मिले। recent visitors 66

प्रमुख धार्मिक स्थलों में संचालित किए जाएंगे वृद्धाश्रम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रमुख धार्मिक स्थलों में संचालित किए जाएंगे वृद्धाश्रम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिन बुजुर्गों के बच्चे विदेश में हैं, उनके लिए अस्पतालों में बेड आरक्षित करेंगे मुख्यमंत्री ने आनंद धाम में बुजुर्गों के साथ मनाई दीपावली भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिवाजी नगर भोपाल में सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित आनंद धाम आश्रम में बुजुर्गों के साथ दीपावली मनाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन, ओरछा, ओंकारेश्वर एवं चित्रकूट में वृद्धजन के लिये वृद्धश्रम संचालित करने तथा उनमें वृद्धजन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुजुर्गों को दीपावली की बधाई दी और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुजुर्गों के साथ फुलझड़ी भी जलाई और उन्हें मिष्ठान एवं उपहार भेंट कर दीपावली मनाई। इस अवसर पर अनेक समाजसेवी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आनंद धाम की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ईश्वर के पश्चात माता-पिता का स्थान होता है। मेरे माता-पिता देवलोक गमन कर चुके हैं। लेकिन आज आनंद धाम में आकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अपने माता-पिता के बीच में आया हूं। बुजुर्ग जन से भेंट और चर्चा के पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आनंद धाम के पदाधिकारी गण से चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के धार्मिक महत्व के स्थान पर इस तरह के धाम और आश्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे बुजुर्ग जन इन कार्यक्रमों से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही बुजुर्ग जन की सहायता और उपचार में मदद के लिए विशेष पहल की जाएगी। जिन बुजुर्गों के बच्चे विदेश में नौकरी कर रहे, उन्हें यहां आनंद धाम या वृद्धाश्रम में रहने पर यदि स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होती है तो उनके लिए व्यवस्था की जाएगी। ऐसे बुजुर्गों को अस्पताल में दाखिल करवाया जा सके, इसके लिए अस्पताल में बेड भी आरक्षित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष काफी प्रसन्न हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आनंद धाम आने के लिए धन्यवाद देते हुए आशीर्वाद भी दिया। आनंद धाम आश्रम में बुजुर्ग जन ने बड़ी देर भई नंदलाला.. और अन्य भजन गाकर भी सुनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा आनंद धाम में बुजुर्गजन से आशीर्वाद प्राप्त करने और उनसे आत्मीय भेंट एवं चर्चा के अवसर पर सेवा भारती संस्था के पदाधिकारी उपस्थित थे। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा प्रदेश में वरिष्ठजन के समग्र कल्याण एवं पुनर्वास के लिये 83 वृद्धाश्रमों का संचालन किया जा रहा है। वृद्धाश्रमों में वृद्धजन को आवास, भरण-पोषण, मनोरंजन, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। वृद्धजन के लिये प्रदेश में 11 नवीन 50 सीटर, वृद्धाश्रम भवन बैतूल, गुना, झाबुआ, मुरैना, सिंगरौली, उमरिया, सतना, जबलपुर, खरगौन, टीकमगढ़ एवं सीधी में संचालित हैं।   recent visitors 666

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में10 हाथियों की मौत, MP से दिल्ली तक हड़कंप

भोपाल मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की रहस्यमयी मौत से हर कोई हैरान है। एक के बाद एक हो रही मौतों ने वन विभाग की नींद उड़ा दी है। वहीं शासन ने भी इस मामले में कार्रवाई की बात कही है। लेकिन आखिर यह हत्या है या हादसा, इसकी अब तक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस राज से पर्दा उठाने के लिए मध्य प्रदेश के साथ दिल्ली की SIT जांच कर रही है और बांधवगढ़ नेशनल टाइगर रिजर्व में डेरा डाला है। वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने एसआईटी गठित की है। वहीं मध्य प्रदेश में भी इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ है। मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक विजय अंबाडे ने राज्य शासन के निर्देश पर 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। पार्क में आने-जाने वालों का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड नेशनल टाइगर कंजरवेटर अथॉरिटी (एनटीसीए) के सेंट्रल जोन के एआईजी नंदकिशोर काले टीम के साथ बांधवगढ़ में डेरा डाला है। रिसॉर्ट संचालकों पर भी संदेह जताया जा रहा है। हालांकि, अभी स्पष्ट तौर पर कोई सबूत कोई साक्ष्य नहीं मिला है। 5 कि.मी. के दायरे में जांच की जा रही है। साथ ही पार्क में आने-जाने वालों का भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। गौरतलब है कि खितौली और पतौर रेंज में 13 हाथियों के झुंड में से 10 की मौत हुई है। recent visitors 46