हर आदमी पर ₹84,30,591 कर्ज, चुकाते-चुकाते निकल जाएगा दम! किस देश का है ऐसा हाल

वाशिंगटन  दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका का कर्ज 35.83 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है। देश के हर नागरिक पर 106,132 डॉलर यानी ₹84,30,591 कर्ज है। प्रति टैक्सपेयर यह कर्ज 271,888 डॉलर पहुंच गया है। पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका का कर्ज 33.68 ट्रिलियन डॉलर था। दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका का कर्ज पिछले 24 साल में छह गुना बढ़ गया है। साल 2000 में अमेरिका पर 5.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था जो 2010 में 12.3 ट्रिलियन डॉलर और 2020 में 23.2 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा था। यूएस कांग्रेस के बजट दस्तावेजों के मुताबिक अगले दशक तक देश का कर्ज 54 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है। तीन महीने में ही इसमें एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का इजाफा हो चुका है। यह देश की जीडीपी का करीब 125% पहुंच है। पिछले तीन साल में ही देश का कर्ज 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक बढ़ा है। स्थिति यह हो गई है कि अमेरिका को रोजाना 1.8 अरब डॉलर ब्याज के भुगतान में खर्च करने पड़ रहे हैं। सरकार को सालाना $1 ट्रिलियन से ज्यादा केवल ब्याज देना पड़ रहा है। यानी फेडरल टैक्स रेवेन्यू का 23% ब्याज चुकाने में जा रहा है। देश का कर्ज अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में देश का कर्ज एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। सरकार की कमाई कम हो रही है और खर्च बढ़ गया है। जानकारों की मानें तो अमेरिका की इकॉनमी और नेशनल सिक्योरिटी के लिए अच्छी बात नहीं है। अगर कर्ज इसी तरह के बढ़ता गया तो अगले कुछ साल में अमेरिका का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 200% तक पहुंच सकता है। देश का कर्ज इकॉनमी से दोगुना पहुंच जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो कर्ज चुकाते-चुकाते ही अमेरिका का दम निकल जाएगा। इससे सरकार को रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा पर होने वाले कुल खर्च से ज्यादा पैसा ब्याज चुकाने में देना होगा। इससे सरकार को सोशल सिक्योरिटी पर खर्च में कटौती करनी पड़ सकती है। चिंता यह है कि अमेरिका का कर्ज ऐसे वक्त में बढ़ रहा है जब देश की इकॉनमी अच्छी स्थिति में है और बेरोजगारी कम है। अमूमन जब इकॉनमी कमजोर होती है तो सरकार खर्च बढ़ाती है ताकि ग्रोथ को हवा दी जा सके। recent visitors 217

पैराग्लाइडिंग विश्व कप के दौरान साहसिक गतिविधियों का प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों की रहेगी विशेष सुरक्षा

धर्मशाला पैराग्लाइडिंग साइट बीड़-बिलिंग में दूसरी बार दो नवम्बर से नौ नवम्बर तक आयोजित होने वाले पैराग्लाइडिंग विश्व कप के दौरान साहसिक गतिविधियों का प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों की सुरक्षा के मद्देनजर 9 टीमों सहित एक हेलिकॉप्टर आयोजन स्थल में तैनात रहेगा। इसके साथ ही तिब्बती समुदाय के लोगों का भी आयोजन के दौरान सहयोग लिया जाएगा। जानकारी के अनुसार आयोजन को लेकर तैयारियों का दौर तेजी से चल रहा है। विश्व कप में भाग लेने को लेकर अब तक 25 देशों के 80 पायलटों ने अपना पंजीकरण करवा लिया है। जबकि स्लॉट बुक करवाने को लेकर अभी भी ऑनलाइन मेल आ रही हैं। इसके अलावा प्रतियोगिता के दौरान यहां आने वाले पायलटों और पर्यटकों को प्रदेश की संस्कृति से रूबरू करवाने को लेकर पर्यटन विभाग की ओर से सांस्कृतिक संध्याओं के आयोजन को लेकर मंथन किया जा रहा है। साथ ही इस बार सेना जवानों की ओर से आयोजन के दौरान डेयर डेविलज शो का आयोजन किया जाएगा। इससे पहले भी बीड़-बिलिंग साइट पर साल 2015 में पैराग्लाइडिंग विश्व कप का आयोजन किया जा चुका है। टेक ऑफ प्वाइंट ग्रीन मैट से होगा कवर विभाग जल्द ही बिलिंग के टेक ऑफ पॉइंट को ग्रीन मैट से कवर करेगा। मैट को बिछाने के साथ साथ टेक ऑफ पॉइंट के साथ लगते एरिया को सुंदर बनाया जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व में नई मंजिल नई राहें योजना के तहत 28 लाख की मैट टेक ऑफ पॉइंट पर बिछाई गई थी, लेकिन उचित रख रखाव न होने के कारण इस मैट की हालत खस्ता है। पर्यटन अधिकारी जिला कांगड़ा विनय धीमान ने बताया कि बीड़-बिलिंग में पैराग्लाइडिंग विश्व कप आयोजन को लेकर तैयारियों का दौर जोरों पर है। आयोजन के दौरान पायलटों के साथ होने वाले हादसों की संभावना को लेकर उनकी सुरक्षा के नजरिए से नौ टीमों का गठन किया गया हे। इसके अलावा एक हैलिकॉप्टर भी आयोजन स्थल पर तैनात रहेगा। recent visitors 79

11 नवंबर से प्रक्रिया शुरू होगी, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा परीक्षा 2022 के इंटरव्यू की तारीख घोषित की

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने राज्य सेवा परीक्षा 2022 के इंटरव्यू की तारीख घोषित कर दी है। 11 नवंबर से प्रक्रिया शुरू होगी। 1551 उम्मीदवार को बुलाया गया है। आयोग ने घंटेभर पहले उम्मीदवारों को कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। गाइडलाइन के आधार पर उम्मीदवारों को शैक्षणिक योग्यता सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करना है। उधर, आयोग की वेबसाइट पर 29 अक्टूबर से उम्मीदवार एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे। आयोग ने 7 जून को राज्य सेवा मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। 457 पदों के लिए 1599 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिसमें 1286 मुख्य भाग और 313 प्रावधिक भाग में शामिल थे। इन्हें इंटरव्यू के लिए एक जुलाई तक अभ्यर्थियों को दस्तावेज व अभिलेख प्रस्तुत करना थे, लेकिन 48 अभ्यर्थियों ने समय पर दस्तावेज जमा नहीं किए, जिसमें 27 उम्मीदवारों ने इंटरव्यू के लिए आवेदन नहीं किया था। 21 उम्मीदवारों की दावेदारी की निरस्त 21 उम्मीदवारों ने समयावधि निकलने के बाद दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। इसके चलते आयोग ने इनकी दावेदारी निरस्त कर दी। आयोग के मुताबिक 11 नवंबर से इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवारों को सुबह 10 बजे कार्यालय में उपस्थित होना है। recent visitors 83

रूस ने भारत को बमवर्षक विमानों टीयू-22एम3 और टीयू-160 वॉइट स्वान देने की पेशकश

मॉस्को/ नईदिल्ली  रूस ने भारत को अपने भारी बमवर्षक विमानों टीयू-22एम3 और टीयू-160 वॉइट स्वान देने की पेशकश की है। रिपोर्ट के मुताबिक सोवियत संघ काल में डिजाइन किए गए टीयू-22एम3 को पहले भी भारतीय नौसेना को दिया गया था, लेकिन महंगी कीमत और आधुनिकीकरण के चलते डील फाइनल नहीं हो सकी थी। अब रूस भारत को टीयू-160एम उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, जो उसकी मारक क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा। टीयू-160 वॉइट स्वान का टीयू-160एम अपग्रेडेड वर्जन है और इसके उत्पादन का काम अभी भी जारी है। 2018 में रूसी वायु सेना ने इसके 10 यूनिट का ऑर्डर दिया था, जिसे 2027 तक डिलिवर किया जाएगा। इस नए मॉडल में व्यापक एवियानिक्स और नेविगेशन को जोड़ा गया है। रूसी कंपनी का दावा है कि टीयू-160एम का नया अपग्रेड पिछले मॉडल की तुलना में 60 फीसदी ज्यादा प्रभावी है। रिपोर्ट के मुताबिक एक टीयू-160एम की संभावित कीमत करीब 16.5 करोड़ डॉलर है। यह विमान एक साथ 12 लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल या छोटी दूरी की न्यूक्लियर मिसाइल ले जाने में सक्षम है। इसके अलावा, यह बमवर्षक बिना ईंधन भरे 12 हजार किमी की दूरी तय कर सकता है। भारत के बेड़े में टीयू-160एम शामिल हो जाता है, तो भारतीय वायु सेना को हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे तक शक्तिशाली प्रतिरोध और हमले करने की क्षमता हासिल हो जाएगी। हालांकि, भारतीय वायु सेना पारंपरिक रूप से भारी बमवर्षकों के बजाय मल्टीरोल फाइटर जेट पर ज्यादा ध्यान दिया है और वर्तमान में इसके पास एक भी स्ट्रैटेजिक बॉम्बर नहीं है। टीयू-160एम को हासिल करने से भारत की दीर्घकालिक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाएगी। हालांकि इसकी भारी अधिग्रहण और परिचालन लागत चिंता का विषय हो सकती है। भारी बमवर्षकों के रखरखाव के लिए समर्पित ढांचे और ठोस निवेश की जरुरत होती है। इसके अलावा पायलटों के विशेष प्रशिक्षण और इन बमवर्षकों को रखने के लिए भारतीय वायु सेना के अड्डों को विशेष रूप से तैयार करने की जरुरत होगी।     recent visitors 125

महाराष्ट्र : महायुति और MVA के 150 बागी बने सिर दर्द, जानें कैसे बढ़ाई टेंशन

मुंबई टिकट न मिलने पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कूदने वाले बागी महायुति और विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) के लिए सिरदर्द बन गए हैं। राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए 20 नवंबर को होने वाले चुनाव के वास्ते नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 29 अक्टूबर थी और उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच 30 अक्टूबर को की जाएगी। चुनावी जंग से नाम वापस लेने की अंतिम तिथि चार नवंबर है और इसके बाद मैदान में बचे बागियों की संख्या पर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। महायुति ने जहां 80 बागियों की पहचान की है, वहीं विभिन्न दलों के करीब 150 नेताओं ने अपनी पार्टी या बहुदलीय गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ नामांकन दाखिल किया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 4 नवंबर है, इसलिए मोर्चों के पास मतभेदों को सुलझाने और बागियों को मैदान से हटने के लिए मनाने के लिए करीब एक सप्ताह का समय है। एमवीए के 286 प्रत्याशियों का नामांकन एमवीए और महायुति दोनों ने कहा कि उन्होंने सभी 288 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। नामांकन बंद होने के बाद, एमवीए के 286 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए (कांग्रेस से 103, उद्धव ठाकरे की शिवसेना 96 और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी से 87 प्रत्याशियों ने नामांकन कराया है। तीनों दलों ने अपने-अपने कोटे से छोटे सहयोगियों को सीटें दीं। महायुति से कितने प्रत्याशी? महायुति में 284 प्रत्याशियों ने नामांकन कराया है। बीजेपी, शिवसेना 80 और अजित पवार की एनसीपी से 52 प्रत्याशी हैं। जिसमें छोटे सहयोगी भी शामिल हैं। दोनों गठबंधनों ने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से जानकारी आने के बाद शेष सीटों का हिसाब लगाया जाएगा। हालांकि, महायुति सूची से ऐसा प्रतीत होता है कि इसने 5 निर्वाचन क्षेत्रों में दो उम्मीदवारों की घोषणा की है, और दो सीटों पर कोई भी उम्मीदवार नहीं हैं। इसने कुल 289 उम्मीदवारों की घोषणा की है। बागियों से निपटना चुनौति महायुति और एमवीए के प्रमुख नेताओं ने स्वीकार किया कि बागियों की मौजूदगी चिंता का विषय है और उन्हें इस मामले से निपटना होगा। ऐसा करने के लिए अभी भी समय है। उम्मीदवारों के कागजात बुधवार को जांचे जाएंगे और 4 नवंबर को उम्मीदवारी वापस लेने की आखिरी तारीख है। इसके बाद, यह स्पष्ट हो जाएगा कि अभी भी कितने बागी मैदान में हैं। महा विकास अघाड़ी में शुरू से रहा विवाद कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा, इस पर पखवाड़े भर से चल रहा असमंजस मंगलवार को खत्म हो गया। लेकिन कई दौर की बातचीत के बावजूद महायुति ने सीट बंटवारे के अपने फॉर्मूले को पूरी तरह से गुप्त रखा, जबकि एमवीए का फॉर्मूला सार्वजनिक रूप से बदलता रहा। शुरू में यह प्रस्ताव था कि कांग्रेस 103 सीटों पर, यूबीटी शिवसेना 90 सीटों पर और एनसीपी (एसपी) 85 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बाद में, यूबीटी शिवसेना सांसद संजय राउत ने 85-85 सीटों का फॉर्मूला प्रस्तावित किया और चूंकि इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई, इसलिए कांग्रेस विधायक दल के नेता बालासाहेब थोराट ने एक नया फॉर्मूला प्रस्तावित किया, जिसमें एमवीए के सभी घटक 90-90 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। यदि बागी चुनाव मैदान में डटे रहते हैं, तो वे आधिकारिक उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती पैदा करेंगे। इतना ही नहीं वे महायुति और एमवीए के चुनावी गणित को बिगाड़ने का काम करेंगे। महायुति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं, जबकि विपक्षी एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी शामिल हैं।   मुंबई में सबसे ज्यादा मुसीबत प्रमुख दलों के बीच सबसे अधिक संख्या में उम्मीदवार उतारने वाली बीजेपी को मुंबई के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में बागियों से संभावित नुकसान को रोकने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। भाजपा के बागियों में एक बड़ा नाम गोपाल शेट्टी का है। वह दो बार विधायक और मुंबई से लोकसभा सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने मुंबई की बोरीवली विधानसभा सीट से पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार संजय उपाध्याय के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है।   इसलिए बढ़ी परेशानी राजनीतिक पर्यवेक्षक अभय देशपांडे के अनुसार, सत्तारूढ़ गठबंधन में एनसीपी के प्रवेश ने भाजपा और शिवसेना के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा, 'विधानसभा चुनाव आम तौर पर उम्मीदवारों की छवि पर लड़ा जाता है। दोनों पक्षों (महायुति और एमवीए) में कम से कम तीन प्रमुख राजनीतिक दल हैं, और यह स्पष्ट है कि प्रत्येक पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए सीमित संख्या में सीट मिली हैं। भाजपा और शिवसेना के पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी एनसीपी के साथ हाथ मिलाए जाने से उनके समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए जमीन पर एक बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।' ऐसे मामले भी हैं, जहां सहयोगी दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए हैं। उदाहरण के लिए, सोलापुर दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस ने दिलीप माने को नामांकित किया, लेकिन उन्हें आधिकारिक उम्मीदवार का दर्जा नहीं मिला। उसकी सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) ने अमर पाटिल को टिकट दिया है। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में माने ने कहा, 'मुझे बताया गया था कि कांग्रेस की ओर से एबी फॉर्म मुझे दिया जाएगा। वह कभी नहीं आया, इसलिए मैंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल करने का फैसला किया।' सोलापुर जिले के पंढरपुर-मंगलवेधा निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस और इसकी सहयोगी एनसीपी (एसपी) ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी (पीडब्ल्यूपी) एमवीए की एक घटक है, फिर भी इसके बाबासाहेब देशमुख ने सोलापुर जिले के सांगोला निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार के खिलाफ अपना नामांकन दाखिल किया है। अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को भी बगावत का सामना करना पड़ रहा है। एनसीपी नेता छगन भुजबल के भतीजे समीर ने नासिक जिले के नंदगांव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। वह शिवसेना उम्मीदवार और मौजूदा विधायक सुहास कांडे को चुनौती दे रहे हैं। एनसीपी की नासिक शहर इकाई के अध्यक्ष रंजन ठाकरे ने भी मौजूदा भाजपा विधायक देवयानी फरांडे के खिलाफ निर्दलीय के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे … Read more

महाकुंभ कब होगा शुरू, कुंभ पर्व में ग्रह-राशियों के योग की भूमिका

कुंभ पर्व दुनियाभर का सबसे धार्मिक, पवित्र, सांस्कृतिक और विशाल मेला है, जोकि पूरे 45 दिनों तक चलता है. इसका आयोजन 12 वर्ष के अंतरात में होता है. यह मेला आध्यात्मिक और एकता का प्रतीक है. इस दौरान करोड़ों की संख्या में भक्त पवित्र नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं. साल 2025 में कुंभ का आयोजन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होगा, जिसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं. हाल में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ 2025 के लोगो का भी अनावरण किया. कुंभ पर्व समय-समय पर भारत के चार प्रमुख स्थानों (प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन) में आयोजित किया जाता है, जिसमें सबसे विशाल मेला प्रयागराज में होता है. लेकिन कुंभ मेला कब और कहां आयोजित होगा, इसमें ग्रहों और राशियों की खास भूमिका होती है. सूर्येन्दुगुरु संयोगस्तद्राशौ यत्र वत्सरे। सुधा सुंभ प्लवे भूमो कुंभो भवतिनान्यथा।। अर्थ है: अमृत बिंदु पतन के समय जिन राशियों में सूर्य-चंद्रमा-गुरु की स्थिति रही, उन्हीं राशियों में सूर्य-चंद्रमा और गुरु के संयोग होने पर कुंभ का आयोजन होगा. इन योगों के अभाव में कुंभ का आयोजन नहीं हो सकता. प्रयागराज में कुंभ पर्व का आयोजन कब? कुंभ पर्व के लिए सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह की भूमिका महत्वपूर्ण है. जब सूर्य और बृहस्पति एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तब कुंभ मेले का आयोजन होता है. वहीं जब बृहस्पति वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में होता है. 2025 में महाकुंभ कब? महाकुंभ की शुरुआत पौष पूर्णिमा स्नान के साथ होती है, जोकि 13 जनवरी 2025 को है. वहीं महाशिवरात्रि के दिन 26 फरवरी 2024 को अंतिम स्नान के साथ कुंभ पर्व का समापन होगा. कुंभ पर्व 2025 शाही स्नान तिथियां पौष पूर्णिमा स्नान- 13 जनवरी 2025 मकर संक्रांति- 14 जनवरी 2025 मौनी अमावस्या- 29 जनवरी 2025 बसंत पंचमी- 3 फरवरी 2025 माघी पूर्णिमा- 12 फरवरी 2025 महा शिवरात्रि – 26 फरवरी, 2025 12 कुंभ पर्व में केवल 4 कुंभ ही मान्य क्यों? देवानां द्वादशाहोभिर्मर्त्यै द्वादश वत्सरे:। जायन्ते कुम्भपर्वाणि तथा द्वादश संख्यया।। तत्राध्रुतात्तयेनूपांचत्वरों भुवि भारते। अष्टौलोकान्तरे प्रोक्तादेवैर्गम्यानचेतरै:।। पृथिव्यां कुम्भायोगस्य चतुर्धा भेद उच्यते। विष्णु द्वारे तीर्थराजेवन्त्यां गोदावरी तटे, सुधा बिंदु विनिक्षेपात् कुम्भपर्वति विश्रुत:।। अर्थ है: देवताओं के 12 दिन और मनुष्यों के 12 वर्ष में कुल 12 कुंभ पर्व होते हैं. लेकिन अमृत बिंदु के पतन से पृथ्वी पर मनुष्यों के लिए केवल 4 कुंभ ही होंगे. शेष 8 कुंभ पर्व देवताओं के लिए लोकांतर में होते हैं. recent visitors 197

पांच सौ वर्ष की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्री राम अयोध्याधाम में अपने भव्य मंदिर में विराजमान है, यह दिवाली ‘बहुत खास है: मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बार की दिवाली को ‘बहुत खास’ बताया है और कहा है यह पहली दिवाली है जब पांच सौ वर्ष की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्री राम अयोध्याधाम में अपने भव्य मंदिर में विराजमान है। श्री मोदी ने मंगलवार को सरकार के रोजगार मेला कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुये प्रारंभ में देशवासियों को धनतेरस की बधाई दी और गुरुवार को होने वाले दीपावली पर्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस बार की दिवाली का साक्षी होना बड़े सौभाग्य की बात है। श्री मोदी ने कहा, “…. इस साल की दीपावली बहुत खास है, बहुत विशेष है। आपको होगा की भई दिवाली तो हर बार आती है, इस बार विशेष क्या हो गया, मैं बताता हूं, विशेष क्या है। 500 वर्षों के बाद प्रभु श्री राम अयोध्या के अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं और उस भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद ये पहली दीपावली है।” श्री मोदी ने कहा, “इस दीपावली की प्रतीक्षा में कई पीढ़ियां गुजर गईं, लाखों लोगों ने बलिदान दिये, यातनायें झेलीं। हम सभी बहुत सौभाग्यशाली हैं, जो ऐसी विशेष, खास, भव्य दिवाली के साक्षी बनेंगे।” उन्होंने उत्सव के इस वातावरण में…आज के पावन दिन पर रोजगार मेले में सरकारी कार्यालयों और सरकारी संगठनों के नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले 51 हजार युवक एवं युवतियों को बधाई और शुभकामनायें दीं। आज धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व प्रारंभ हुआ है। कल रूपचतुर्दशी, गुरुवार को दीपावली, उसके बाद अन्नकूटन और भाईदूज का पर्व मनाया जायेगा।   recent visitors 69