कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जलवायु परिवर्तन के लिए वैश्विक प्रयास: भारत की प्रतिबद्धता में राज्यों का योगदान पर विमर्श और राष्ट्रीय संगोष्ठी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पर्यावरण आज सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय है। वसुधा को बचाने का कर्तव्य हम सभी को निभाना है। भारत की पहचान दुनिया में प्रकृति और पर्यावरण को बचाने के संदर्भ में भी बनी है। प्रकृति और प्रगति में समन्वय आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री मोदी सारे विश्व में अपने सक्षम नेतृत्व से भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं। पर्यावरण के प्रति उनकी चिंता इस बात से सिद्ध होती है कि वे वर्ष 2030 तक भारत द्वारा 500 गीगावाट नवकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को लेकर चल रहे हैं। निश्चित ही हम कार्बन उत्सर्जन में एक बिलियन टन की कमी लाने में सफल होंगे। पर्यावरण की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण संकल्प है। इसकी पूर्ति के लिए राष्ट्रवासी भी सहयोग कर रहे हैं। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प के अनुसार सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रदेश अधिक से अधिक योगदान देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में "जलवायु परिवर्तन के लिए वैश्विक प्रयास: भारत की प्रतिबद्धता में राज्यों का योगदान" विषय पर आयोजित विमर्श सत्र एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रह थे। इसका आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन और नीति विश्लेषण संस्थान (एग्पा) और मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद ने नर्मदा समग्र संस्था पैरवी और सिकोइडिकोन संगठन के सहयोग से किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उसमें हमारी भारतीय जीवन पद्धति, हमारी मान्यताओं और परमात्मा एवं प्रकृति से जुड़ने के हमारे मूल दृष्टिकोण का अपना महत्व सामने आता है। एक श्रेष्ठ जीवनशैली के लिए भारतीय जाने जाते हैं। खान-पान और जल की शुद्धता के लिए हम गंभीर हैं। मध्यप्रदेश पर परमात्मा की विशेष कृपा है। जहाँ हमारा देश मानवता प्रेमी है, वहीं पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता के लिए भी भारत सक्रिय है। विश्व के कल्याण के लिए भारत के उदात्त भाव से सभी परिचित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी विश्व के देशों के लिए आशा की किरण हैं। जहाँ रूस और यूक्रेन के युद्ध की परिस्थितियां सभी के सामने हैं, वहीं इजराइल जैसे राष्ट्र जो तकनीक के उपयोग और अस्मिता के संघर्ष के लिए जाने जाते हैं, भारत के लिए इन सभी राष्ट्रों का सम्मानजनक रूख है। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि 21वीं सदी भारत की होगी। आज प्रधानमंत्री श्री मोदी और भारत की सामर्थ्य एवं पर्यावरण प्रेमी होने के दृष्टिगत हमारी प्रतिष्ठा विश्व में बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी और उसके तटों की पर्यावरणीय संरक्षण के लिए आवश्यक निर्णय लिए हैं। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। सभी नदियों की स्वच्छता और हमारे ईको सिस्टम का संतुलन बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। हमारी सोन नदी, पुण्य सलिला गंगा को बलिष्ठ बनाती है। गंगा बेसिन के लिए यमुना के माध्यम से चंबल और क्षिप्रा भी यही भूमिका निभाती हैं। बेतवा भी यमुना जी में जाकर मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा विश्वास "जियो और जीने दो" में है। भोपाल के पास रातापानी टाइगर अभ्यारण्य है। भोपाल के पास सड़कों पर दिन में मनुष्य और रात्रि में टाइगर दिखाई देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी और विमर्श-सत्र से पर्यावरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आएंगे। उन्होंने इस वैचारिक कार्यक्रम की सफलता की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप जलाकर विमर्श-सत्र का शुभारंभ किया। सत्र को नार्वे के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय विकास और पर्यावरण मंत्री और यूएनडीपी के पूर्व कार्यकारी निदेशक श्री एरिक सोलहेम ने वर्चुअल रूप से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश बहुत सुंदर राज्य है। इसकी हेरिटेज देखने लायक है। मध्यप्रदेश में होने वाले जलवायु संरक्षण के कार्यों का वैश्विक महत्व होगा। एग्पा के सीईओ श्री लोकश शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश ने गत दो दशक से प्रगति के अनेक आयाम छुए हैं। पर्यावरण के प्रति मध्यप्रदेश सरकार गंभीर है। आगामी माह अजरबैजान में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। इस परिप्रेक्ष्य में राज्य स्तरीय प्री-सीओपी विमर्श-सत्र का आयोजन महत्वपूर्ण है। भारत की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता के संबंध में राज्यों की भागीदारी के संबंध में यह अपनी तरह का प्रथम विमर्श कार्यक्रम है। सरकार के साथ समाज की भागीदारी बढ़ाने और पर्यावरण के लिए प्रहरी के रूप में कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के साथ विचार-विमर्श के लिए इस विमर्श कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई गई। कार्यक्रम को पैरवी संस्था के संचालक श्री अजय झा ने कहा कि सदी के अन्त तक तापमान 2.5 डिग्री तक बढ़ने की संभावना है। विज्ञान भारती, केरल के डॉ. विवेकानंद पई ने कहा कि भारत में कार्बन उत्सर्जन 1.8 टन पर केपिटा है, जो कि विश्व की एवरेज केपिटा पर 4.5 टन से कम है। सिकोईडीकोन की सचिव श्रीमती मंजूबाला जोशी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की विभीषका को रोकने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री आर.एस. प्रसाद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से संबंधित सभी कार्यक्रम सेल्फ ड्रिबेन हो। क्लाइमेट जस्टिस जरूरी है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिक परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने आभार व्यक्त किया। recent visitors 73

पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कल आयोजित हो रहे ‘रन फॉर यूनिटी’ में शामिल हो और बनाएं सफल: जेपी नड्डा

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से देश के पहले उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती से पहले मंगलवार को आयोजित हो रहे 'रन फॉर यूनिटी' में शामिल होने की अपील की है। भाजपा अध्यक्ष ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि इस साल भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती के दिन ही दीपावली होने के कारण 'रन फॉर यूनिटी' कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को हो रहा है। भाजपा के सभी चुने हुए जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी एवं पार्टी कार्यकर्ता 'रन फॉर यूनिटी' कार्यक्रम में भाग लेकर इस आयोजन को सफल बनाएं। उन्होंने सरदार पटेल की जयंती से जुड़े कार्यक्रम के बारे में कहा कि भाजपा "भारत के लौह पुरुष, आजादी के बाद भारतवर्ष के एकीकरण के सूत्रधार, दूरद्रष्टा एवं देश के पहले उपप्रधानमंत्री भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पूरे हर्षोल्लास के साथ देश भर में मनाती है"। साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्र सरकार पूरे देश में आदर एवं सम्मान के साथ उनकी जयंती मनाती है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की 143वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण किया था। इस दिन केंद्र सरकार की ओर से ‘रन फॉर यूनिटी' सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और सरदार पटेल को नमन कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। पीएम मोदी के आह्वान पर वर्ष 2014 से सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। जे.पी. नड्डा ने कहा कि इस वर्ष सरदार पटेल की जन्म जयंती का 150वां वर्ष शुरू हो रहा है। इस अवसर पर मोदी सरकार द्वारा अनेकों कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित अपने बयान में कहा, "मेरा पार्टी के कार्यकर्ताओं से विनम्र अनुरोध है कि आप इन कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। साथ ही, भारत रत्न सरदार पटेल से जुड़े विचार और कार्य भी आप सोशल मीडिया पर 'सरदार150' के हैशटैग के साथ साझा कर उनके विचारों एवं आदर्शों को प्रचारित एवं प्रसारित करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' के 115वें संस्करण में कहा है कि इस बार 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती के दिन ही दीपावली का पर्व भी है। हम हर साल 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' पर 'रन फॉर यूनिटी' कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। दीपावली की वजह से इस बार 29 अक्टूबर यानी मंगलवार को 'रन फॉर यूनिटी' का आयोजन किया जाएगा। मेरा आग्रह है, ज्यादा से ज्यादा संख्या में इसमें हिस्सा लीजिए, देश की एकता के मंत्र के साथ ही फिटनेस के मंत्र को भी हर तरफ फैलाइए। पार्टी कार्यकर्ता 29 अक्टूबर को 'रन फॉर यूनिटी' का कार्यक्रम सफल बनाने के लिए कार्य करें। recent visitors 80

मोदी और पेड्रो सांचेज ने दिव्यांग छात्रा दीया से मिलने के लिए रोका काफिला

वडोदरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि देश में रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम नई ऊंचाई छू रहा है और इससे भविष्य में ‘मेड इन इंडिया नागरिक विमानों’ के बनाये जाने का मार्ग प्रशस्त होगा।मोदी ने सोमवार को यहां स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ के साथ टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) परिसर में सी-295 सैन्य परिवहन विमान के निर्माण के लिए टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। ये विमान वायु सेना की परिवहन जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस अवसर पर प्रदर्शित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि वह आज के कार्यक्रम को परिवहन विमान के निर्माण से परे देख रहे हैं। उन्होंने पिछले दशक में भारत के विमानन क्षेत्र की अभूतपूर्व वृद्धि और परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत देश के सैकड़ों छोटे शहरों को हवाई कनेक्टिविटी प्रदान कर रहा है, साथ ही देश को विमानन का केंद्र बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह पारिस्थितिकी तंत्र भविष्य में मेड इन इंडिया नागरिक विमानों के लिए भी मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न भारतीय एयरलाइनों ने 1200 नए विमानों का ऑर्डर दिया है, इसका मतलब केवल यह है कि नव उद्घाटन कारखाना भविष्य में भारत और दुनिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए नागरिक विमानों के डिजाइन से लेकर निर्माण तक प्रमुख भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्पेन के प्रधानमंत्री सांचेज़ की भारत की पहली यात्रा है और दोनों देशों के बीच साझेदारी आज एक नई दिशा पा रही है। उन्होंने कहा कि सी-295 विमान निर्माण के लिए टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन न केवल दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा बल्कि ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के मिशन को भी गति देगा। मोदी ने इस अवसर पर एयरबस और टाटा की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं और स्वर्गीय रतन टाटा जी को भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा कि सी-295 विमान का कारखाना नए भारत की नई कार्य संस्कृति का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि देश में किसी भी परियोजना के विचार से लेकर कार्यान्वयन तक भारत की गति यहां देखी जा सकती है। उन्होंंने अक्टूबर 2022 में कारखाने की आधारशिला रखने को याद करते हुए कहा कि यह सुविधा अब सी-295 विमानों के उत्पादन के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन में बेहिसाब देरी को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर देते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वडोदरा में बॉम्बार्डियर ट्रेन कोच विनिर्माण सुविधा की स्थापना को याद किया और कहा कि कारखाना उत्पादन के लिए रिकॉर्ड समय में तैयार हो गया था। उन्होंने कहा, ‘इस फैक्टरी में बने मेट्रो कोच आज दूसरे देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।’ उन्होंंने विश्वास जताया कि आज की उद्घाटन सुविधा में बने विमानों का निर्यात भी किया जाएगा। प्रसिद्ध स्पेनिश कवि, एंटोनियो मचाडो को उद्धृत करते हुए, प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की कि जैसे ही हम लक्ष्य की ओर बढ़ना शुरू करते हैं, लक्ष्य की ओर रास्ता अपने आप बन जाता है। उन्होंंने कहा कि भारत का रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अगर 10 साल पहले ठोस कदम नहीं उठाए गए होते तो आज इस मंजिल तक पहुंचना असंभव होता। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले रक्षा विनिर्माण की प्राथमिकता और पहचान आयात को लेकर थी और कोई सोच भी नहीं सकता था कि भारत में इतने बड़े पैमाने पर रक्षा विनिर्माण हो सकता है। प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की कि सरकार ने एक नए रास्ते पर चलने का फैसला किया, भारत के लिए नए लक्ष्य निर्धारित किए, जिसके परिणाम आज स्पष्ट हैं। मोदी ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र में बदलाव इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक सही योजना और साझेदारी संभावनाओं को समृद्धि में बदल सकती है। उन्होंने रेखांकित किया कि रणनीतिक निर्णयों ने पिछले दशक में भारत में एक जीवंत रक्षा उद्योग के विकास को बढ़ावा दिया है। मोदी ने कहा, “हमने रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी का विस्तार किया, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को अधिक कुशल बनाया, आयुध कारखानों को सात प्रमुख कंपनियों में पुनर्गठित किया और डीआरडीओ तथा एचएएल को सशक्त बनाया।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा गलियारे स्थापित करने से इस क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार योजना पर बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इसने पिछले पांच से छह वर्षों में लगभग 1,000 रक्षा स्टार्टअप के विकास को प्रेरित किया है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत का रक्षा निर्यात 30 गुना बढ़ गया है, देश अब 100 से अधिक देशों को उपकरण निर्यात कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कौशल और रोजगार सृजन पर जोर दिया और कहा कि एयरबस-टाटा फैक्टरी जैसी परियोजनाओं से हजारों नौकरियां पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि फैक्टरी 18,000 विमान भागों के स्वदेशी विनिर्माण का समर्थन करेगी, जिससे पूरे भारत में एमएसएमई के लिए अपार अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंंने कहा कि भारत आज भी दुनिया की प्रमुख विमान कंपनियों के लिए कलपुर्जों के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। मोदी ने कहा कि नई विमान फैक्टरी भारत में नए कौशल और नए उद्योगों को बड़ा बढ़ावा देगी। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आज का कार्यक्रम भारत और स्पेन के बीच कई नई संयुक्त सहयोग परियोजनाओं को प्रेरित करेगा। उन्होंने स्पेनिश उद्योग और नवप्रवर्तकों को निमंत्रण दिया और उन्हें भारत आने तथा देश की विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्रालय ने सितम्बर 2021 में वायु सेना के लिए 56 मालवाहक विमानों की खरीद के वास्ते स्पेन की कंपनी एयरबस डिफेंस एंड स्पेस एस ए के साथ 21 हजार 935 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था। इनमें से 16 विमान पूरी तरह से तैयार स्थिति में मिलने हैं जबकि 40 भारतीय कंपनी टाटा एडवांस सिस्टम लिमिटेड द्वारा देश में ही वडोदरा में बनाये जायेंगे। पूरी तरह से तैयार 16 विमानों … Read more

MP में ठंडे हुए दिन धनतेरस से पहले जबलपुर, रीवा, शहडोल में गरज-चमक, नवंबर से बढ़ेगी ठंड, जानें मौसम का हाल

भोपाल मध्यप्रदेश में अक्टूबर के आखिरी दिनों में मौसम में बदलाव के तीन अलग-अलग रंग देखने को मिल सकते हैं। राज्य के पूर्वी जिलों जैसे जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा, भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में दिन के वक्त गर्मी का प्रभाव बना रहेगा, जबकि ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में रातें ज्यादा ठंडी रहेंगी। सबसे ठंडा रहा पचमढ़ी प्रदेश में अभी रात के समय सर्दी का असर महसूस किया जा रहा है, जबकि दिन में तेज धूप निकल रही है। हालांकि, रविवार को कई जिलों में दिन का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़का है। अधिकांश जिलों में पारा 32 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया है, जिसमें बैतूल, खंडवा, खरगोन, पचमढ़ी, रायसेन, शिवपुरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, नौगांव, रीवा, सिवनी, सीधी, उमरिया और मलाजखंड शामिल हैं। पचमढ़ी सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  इस समय रात में हल्की ठंड असर है, जबकि दिन में सूरज की तेज किरणों के कारण गर्मी है। हाल ही में, कई जिलों में दिन का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरा है, और अधिकांश जगहों पर पारा 32 डिग्री से कम दर्ज किया गया। प्रदेश में सबसे ठंडी जगह पचमढ़ी रही, जहां अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस रहा। बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक गतिविधियों के चलते मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्सों में मौसम का असर दिखेगा, जिससे हल्की बारिश हो सकती है। बाकी हिस्सों में मौसम साफ रहने और धूप खिलने की उम्मीद है। रात में पचमढ़ी का तापमान सबसे कम 14.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि भोपाल, बैतूल और रायसेन में तापमान 17 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है।   अक्टूबर को संक्रमण काल के रूप में देखा जाता है, जब मानसून की विदाई हो रही होती है और पश्चिमी विक्षोभ की वजह से उत्तर भारत में बारिश होती है। इस साल भी 23 अक्टूबर के बाद से बारिश में कमी और ठंडक में वृद्धि देखी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों का रुझान भी इसी तरह का रहा है, जब अक्टूबर के अंत में रातों का तापमान गिरता है। कई शहरों में रात का तापमान 17 डिग्री के नीचे अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में रात  के समय ठंड का असर बढ़ने लगता है और पिछले 10 सालों से यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। इस साल भी मौसम इसी दिशा में है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और अन्य कई शहरों में रात का तापमान 17 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। वहीं, पचमढ़ी हिल स्टेशन सबसे ठंडा बना हुआ है, जहां दिन और रात दोनों ही ठंडे हैं। दूसरी ओर दिन के समय तापमान में वृद्धि देखी जा रही है। प्रदेश से मानसून हो चुका विदा प्रदेश से 15 अक्टूबर को मानसून की विदाई  हो चुकी है, लेकिन मौसमी सिस्टम की सक्रियता के कारण कई जिलों में बारिश का सिलसिला जारी है। पिछले 24 घंटों के दौरान देवास, सीहोर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा, अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी और छिंदवाड़ा में हल्की बारिश दर्ज की गई है। कल रहेगा ऐसा मौसम प्रदेश के जबलपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल और कटनी में गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी। कहीं-कहीं बूंदाबांदी भी हो सकती है।   recent visitors 113

साल 2025 में शुरू हो सकता है जनगणना का काम, संप्रदाय को लेकर भी पूछे जाएंगे सवाल

नई दिल्ली केंद्र सरकार की तरफ से जनगणना कराए जाने को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार चार साल की देरी के बाद 2025 में जनगणना शुरू करने जा रही है। इस जनगणना के आंकड़े साल 2026 में जारी किए जा सकते हैं। आमतौर पर हर दस साल में होने वाली जनगणना 2021 के लिए तय थी, लेकिन कोराना महामारी की वजह से इसे टालना पड़ा था। जनगणना के बाद लोकसभा सीटों का परिसीमन शुरू होगा और यह प्रक्रिया 2028 तक पूरी होने के आसार हैं। अब जनगणना के चक्र में भी बदलाव की उम्मीद है। अब हर 10 साल में होने वाली जनगणा अगली बार 2035 में होगी। अभी तक जो चक्र था उसमें हर 10 साल में होने वाली जनगणना दशक के शुरुआत में होती आई थी जैसे 1991, 2001 और 2011। हालांकि, अब 2025 के बाद अगली जनगणना 2035, 2045, 2055 में होगी। हर 10 साल में होने वाली जनगणना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक अगले साल (2025 में) जनगणना की शुरुआत होगी, जो एक साल (2026 तक) चलेगी. इसके बाद से 10 साल में होने वाली जनगणना अब अगली बार 2035 में होगी. बता दें कि अब तक हर दस साल में होने वाली जनगणना दशक के शुरुआत में होती आई थी जैसे 1991, 2001, 2011. इसी तरह जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड महामारी के कारण टालनी पड़ी. इसके बाद अब जनगणना का चक्र भी बदलने वाला है. अब 2025 के बाद 2035 और फिर 2045, 2055 में जनगणना होगी. 2028 तक पूरा होगा परिसीमन लोक सभा सीटों का परिसीमन जनगणना पूरी होने के बाद शुरू होगा. परिसीमन प्रक्रिया 2028 तक पूरी होने की संभावना है. दरअसल, कई विपक्षी दलों की तरफ से जातिगत जनगणना की मांग भी की जा रही है, लेकिन सरकार ने अभी इस बारे में फैसला नहीं किया है. संप्रदाय को लेकर भी किया जाएगा सवाल कुछ राजनीतिक दलों द्वारा जाति जनगणना की मांग के बावजूद फिलहाल सरकार की जाति जनगणना की इजाजत देने की कोई प्लानिंग नहीं है। जब जनगणना होती है तो धर्म और वर्ग के बारे में सवाल किया जाता है। जनरल, एससी और एसटी कैटेगरी की भी गणना होती है। इस बार लोगों से यह भी सवाल किया जा सकता है कि वे किस संप्रदाय के अनुयायी हैं। उदाहरण के तौर पर कर्नाटक में सामान्य वर्ग में आने वाले लिंगायत खुद को अलग संप्रदाय का मानते हैं। कांग्रेस, आरजेडी और कई अन्य दल जाति जनगणना की मांग काफी टाइम से कर रहे हैं। बिहार में जेडीयू जैसे बीजेपी के गठबंधन सहयोगियों ने भी इस बारे में बात की है, लेकिन केंद्र पर कोई दबाव नहीं डाला है। केंद्रीय स्तर पर आखिरी फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल पर छोड़ दिया गया है। बीजेपी की दूसरी सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी भी इस बात पर सहमत है कि जनगणना होनी चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी जाति जनगणना के पक्ष में है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसका राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश ना की जाए। उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य 2011 के आंकड़ों के अनुसार, भारत की जनसंख्या 121.1 करोड़ है, जिसमें 52 प्रतिशत पुरुष और 48 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस जनगणना के दौरान ही भारत के इतिहास में पहली बार ट्रांसजेंडर की संख्या को भी ध्यान में रखा गया था। उत्तर प्रदेश लगभग 20 करोड़ लोगों के साथ सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है और लिस्ट में दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है जिसकी आबादी 11 करोड़ से ज्यादा है। लगभग छह लाख के साथ सिक्किम सबसे कम आबादी वाला राज्य है। जातिगत जनगणना पर अभी फैसला नहीं! केंद्र सरकार ने फिलहाल जनगणना के साथ जातिवार जनगणना कराने को लेकर औपचारिक फैसला नहीं किया है. लेकिन विपक्ष की ओर से जातिवार जनगणना को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश को देखते हुए मोदी सरकार जातिवार जनगणना कराने का फैसला ले सकती है. क्योंकि सरकार भी चाहती है कि एक तो इस मुद्दे पर NDA में कोई मतभेद न हो साथ ही सभी धर्मों की आबादी में मौजूद जाति व्यवस्था की जड़ों का भी पता चल सके. फिर अगर आरक्षण सहित किसी भी सुविधा के लिए कोई विशेष योजना चलानी हो तो ट्रिपल टेस्ट का पहला और अहम टेस्ट इसी मुहिम के साथ पूरा हो जाएगा. recent visitors 76

हाथी और मानव के बीच द्वंद्व रोकने के लिए राज्य सरकार एआई का उपयोग करेगी

भोपाल जंगली हाथियों से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए नवीन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। हाथी और मानव के बीच द्वंद्व रोकने के लिए राज्य सरकार एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) का उपयोग करेगी। इसके लिए ट्रेन और मालगाड़ी में ऐसे कैमरे लगाए जाएंगे, जो ड्राइवर को दूर से ही हाथियों की हलचल बता देंगे। इसके अलावा एक ध्वनि यंत्र भी लगाया जाएगा जो ऐसी आवाजें निकालेगा, जिससे ट्रेन या मालगाड़ी आते समय हाथी रेललाइन से दूर भाग जाएं। वन चौकियों में भी होगा प्रयोग इस तरह का प्रयोग जंगल में वन चौकियों में भी किया जाएगा, यहां जंगल से सटे गांव के नजदीक कैमरे और ध्वनि यंत्र लगाए जाएंगे, जिससे हाथी अगर ग्रामीण क्षेत्र में प्रवेश करते हैं तो उनके आवागमन का पहले से ही वन रक्षकों को पता चल जाए और हाथियों को ग्रामीण क्षेत्र में प्रवेश न करने देने के उपाय किए जा सकें। इसके साथ ही जंगली हाथियों को मानव फ्रेंडली बनाने के लिए हाथियों के नियमित रहवास क्षेत्र में पर्यटकों को प्राकृतिक रूप से हाथी दिखाए जाएंगे। वन विभाग हाथी-मानव द्वंद्व रोकने के संबंध में रणनीति बना रहा है। इसके तहत कर्नाटक राज्य की तर्ज पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। हालांकि वन विभाग दो साल पहले 11 जनवरी 2023 को मानव-हाथी द्वंद्व के प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। इसमें हाथियों को प्राकृतिक रहवास में लौटाने के प्रयास सहित उनकी मौजूदगी के लिए सूचना तंत्र बनाने, हाथी मित्र दल बनाने, हाथियों से जुड़ी घटनाओं की लगातार निगरानी, रैपिड रिस्पॉस टीम बनाने, स्थानीय लोगों के संपर्क में रहने, हाथियों को सुरक्षित रास्ता देने, हाथियों को खदेड़ने के लिए पटाखों, रबर बुलेट और कंडे जलाकर आग के प्रयोग जैसे उपाय थे। अब समय व परिस्थिति को देखते हुए नई रणनीति बनाई जा रही है। मप्र के शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी के अलावा नरसिंहपुर, नर्मदापुरम और रायसेन जिलों में भी हाथियों की मौजूदगी देखी गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों की राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला भी होगी मध्य प्रदेश में बाघ, तेंदुआ एवं हाथी की बढ़ती संख्या को देखते हुए वन्यजीव विशेषज्ञों को आमंत्रित कर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला भी की जाएगी। कार्यशाला में वन्यजीवों के प्रबंधन पर आवश्यक रणनीति तैयार की जाएगी। इसमें देशभर के विशेषज्ञ अपने-अपने सुझाव देंगे और अपने राज्यों में किए गए प्रयोग भी साझा करेंगे। मुआवजा राशि भी बढ़ाने की तैयारी वन विभाग वन्यप्राणियों के हमले से होने वाली जनहानि पर मुआवजा बढ़ाने की तैयार कर रहा है। इसके लिए प्रस्ताव बना लिया है और राज्य शासन को भेजा गया है। अभी जनहानि पर आठ लाख रुपये प्रति व्यक्ति मुआवजा राशि है। जिसे महाराष्ट्र राज्य की तर्ज पर 25 लाख रुपये प्रति व्यक्ति किए जाने की तैयारी है, प्रस्ताव पर मंजूरी राज्य सरकार देगी। 24 घंटे होगी निगरानी एआई तकनीक के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों पर रात में थर्मल इमेज और दिन में कैमरा वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए नजर रखी जाएगी। इससे हाथियों की गतिविधियों को लगातार रिकॉर्ड किया जाएगा। ड्रोन की मदद से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। एआई आधारित निगरानी प्रणाली में थर्मल और सामान्य दोनों कैमरों ऊंचाई पर बने टावर में लगाया जाएगा। इस एआई-आधारित निगरानी प्रणाली में रियल-टाइम आपरेटिंग सिस्टम के जरिए डेटा आटोमैटिक तरीके से नियंत्रण कक्ष में ट्रांसफर होगा। कर्नाटक में है ऐसी व्यवस्था कर्नाटक में हम्पी जिले में हाथी अस्तबल एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। राज्य में पर्यटकों के लिए कई हाथी कैंप बनाए गए हैं। सकरबाइल और कूर्ग का डूबारे हाथी कैंप विख्यात है। यहां बने रिसोर्ट और लॉज में जाकर हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास में नजदीक से देखा जा सकता है। recent visitors 56

अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान रामनगरी दिखेगी डिजिटल नगरी के रूप में, साकार होते दिखेंगे रामायण के प्रसंग

अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आठवें दीपोत्सव के दौरान रामनगरी डिजिटल नगरी के रूप में नजर आने वाली है। आस्था और प्रकाश का दीपोत्सव में ऐसा संगम दिखने वाला है कि हर कोई निहारता ही रह जाएगा। खास तौर से अयोध्या का धर्मपथ और लता चौक। इनकी आभा देखते ही बनेगी क्योंकि यहां डिजिटल पिलर लगाए जा रहे हैं। इंटेलिजेंट लाइटिंग के मीम प्रोडक्शन के असद बताते हैं कि प्रकाश की व्यवस्था के लिए उन्हें चयनित किया गया है। नेशनल हाईवे से अयोध्या में प्रवेश मार्ग धर्मपथ पर 15-15 फीट के 24 पिलर लगाए जा रहे हैं। डिजिटल पिलर पर रामायण के प्रसंग चलेंगे व स्वागतम द्वार तक 28 से 30 अक्तूबर तक इन्हें चलाया जाना है। इन स्थलों पर की जा रही लाइटिंग पिलर के ऊपर आकर्षक लाइटिंग की भी व्यवस्था रहेगी। लता चौक पर भी डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम से श्री राम के अयोध्या आगमन प्रसंग का दर्शन भक्त एवं श्रद्धालु कर सकेंगे इसके अलावा रामकथा पार्क, राम की पैड़ी, हनुमान गढ़ी, बिड़ला मंदिर, भजन संध्या स्थल, तुलसी उद्यान, सरयू ब्रिज इत्यादि स्थलों पर लाइटिंग की जा रही है। इसके अलावा धर्मपथ पर सड़के के दोनों ओर लाइटिंग लगाकर इसे भव्य रूप में सजाया गया है। संध्या होते ही यहां का दृश्य देखने लायक होता है।  recent visitors 62