साल 2023 में सड़क हादसों में 1.73 लाख से ज्यादा लोगों की मौत, हर तीन मिनट में एक जान गई

नई दिल्ली साल 2023 में सड़क हादसों में 1.73 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। यानी हर दिन औसतन 474 और हर तीन मिनट में एक जान गई। ये आंकड़े राज्यों ने केंद्र सरकार को दिए हैं। जब से केंद्र सरकार ने सड़क हादसों के कारणों और उनकी गंभीरता को समझने के लिए आंकड़े जमा करने शुरू किए हैं, तब से लेकर अब तक सबसे ज्यादा मौतें इसी साल हुई हैं। डरा रहे हैं ये आंकड़े पिछले साल सड़क हादसों में करीब 4.63 लाख लोग घायल हुए थे। यह 2022 के मुकाबले 4% ज्यादा है। इन आंकड़ों से साफ है कि सड़क हादसों में घायल होने वालों की संख्या बढ़ रही है। साल 2022 में सड़क हादसों में 1.68 लाख लोगों की मौत हुई थी। यह जानकारी सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट में दी गई थी। वहीं एनसीआरबी के मुताबिक 2022 में सड़क हादसों में 1.71 लाख लोगों की जान गई थी। इन दोनों ही एजेंसियों ने अभी 2023 के लिए अपने आंकड़े जारी नहीं किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब, असम और तेलंगाना समेत कम से कम 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2022 के मुकाबले 2023 में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़ी है। हालांकि आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, केरल और चंडीगढ़ जैसे राज्यों में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में मामूली गिरावट आई है। सड़क हादसों में सबसे ज्यादा यूपी में मौतें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में हुई हैं। यहां पिछले साल सड़क हादसों में 23,652 लोगों की जान गई। इसके बाद तमिलनाडु में 18,347, महाराष्ट्र में 15,366, मध्य प्रदेश में 13,798 और कर्नाटक में 12,321 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। हालांकि सड़क हादसों में घायल होने वालों की लिस्ट में तमिलनाडु सबसे ऊपर है। यहां 72,292 लोग सड़क हादसों में घायल हुए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 55,769 और केरल में 54,320 लोग सड़क हादसों का शिकार हुए। सूत्रों का कहना है कि पिछले साल मरने वाले करीब 44% लोग (करीब 76,000) दोपहिया वाहन सवार थे। यह ट्रेंड पिछले कुछ सालों से जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल मरने वाले करीब 70 फीसदी दोपहिया सवारों ने हेलमेट नहीं पहना था। सड़क सुरक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें दोपहिया सवारों की मौतों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं। शहरों और गांवों में ज्यादातर लोग आने-जाने के लिए दोपहिया वाहनों का ही इस्तेमाल करते हैं। recent visitors 157

ग्वालियर में 137 लोकेशन जहां पर गाइडलाइन से अत्यधिक मूल्य पर रजिस्ट्री हो रही

ग्वालियर  ग्वालियर जिले में जिन स्थानों पर अचल सम्पत्ति के बाजार मूल्य की वर्तमान गाइडलाइन से ज्यादा कीमत पर दस्तावेजों की रजिस्ट्री हो रही है। जिला मूल्यांकन समिति ने उन स्थानों के लिए मिड टर्म गाइडलाइन (2024-25) में मूल्य वृद्धि प्रस्तावित की है। कलेक्टर रुचिका चौहान की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में पंजीयन विभाग की गाइडलाइन में अचल सम्पत्तियों के पंजीकरण के लिये कुल 2321 लोकेशन (स्थान) निर्धारित हैं। गाइडलाइन से ज्यादा दाम पर रजिस्ट्री इनमें से 137 लोकेशन ऐसी हैं जहां पर गाइडलाइन से अत्यधिक मूल्य पर रजिस्ट्री हो रही हैं। इन लोकेशन पर गाइडलाइन में 5 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी प्रस्तावित की गई है। सरकार द्वारा हाल ही में पंजीयन के लिए लागू की गई संपदा 2.0 व्यवस्था के बारे में विस्तृत प्रजेंटेशन भी इस अवसर पर दिया गया। उप जिला मूल्यांकन समिति ग्वालियर, डबरा एवं भितरवार से प्राप्त प्रस्तावों पर जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान यह बात सामने आई कि जिले में कहीं-कहीं पर 400 प्रतिशत अधिक कीमत तक भी रजिस्ट्री हो रहीं हैं। जिला मूल्यांकन समिति ने इस स्थिति को ध्यान में रखकर और उप जिला मूल्यांकन समितियों के प्रस्तावों के आधार पर राजस्व में बढ़ोत्तरी व क्षेत्रीय निवासियों के हित में 137 लोकेशन के दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए अचल सम्पत्तियों की गाइडलाइन में बढ़ोत्तरी प्रस्तावित की गई है। 24 अक्टूबर तक आप दे सकते हैं सुझाव     बैठक में गाइडलाइन में प्रस्तावित आंशिक वृद्धि के संबंध में क्षेत्रवार स्थानीय निवासियों से दावे-आपत्तियां व सुझाव प्राप्त करने का निर्णय भी लिया गया। वरिष्ठ पंजीयक श्री दिनेश गौतम ने बताया कि दावे, आपत्तियाँ व सुझाव शुक्रवार 24 अक्टूबर को शाम 6 बजे तक कलेक्टर कार्यालय एवं जिला पंजीयक कार्यालय में दिए जा सकते हैं। मूल वृद्धि संबंधी प्रस्ताव जिला पंजीयक कार्यालय, उप पंजीयक कार्यालय ग्वालियर वृत-1 व वृत-2 एवं एनआईसी की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।     आम जन से प्राप्त दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद मूल्य वृद्धि संबंधी गाइडलाइन के प्रस्ताव राज्य स्तरीय समिति के अनुमोदन के लिये भेजे जायेंगे। बैठक में वरिष्ठ जिला पंजीयक दिनेश गौतम व जिला पंजीयक अशोक शर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं जिले के सभी उप पंजीयक मौजूद थे। कहां कितनी लोकेशनों पर बढ़ोत्तरी प्रस्तावित     उप जिला का नाम शहरी ग्रामीण कुल     ग्वालियर-1 40 9 49     ग्वालियर-2 62 14 76     डबरा 4 3 7     भितरवार 00 5 5 कहां कितनी कुल लोकेशन     ग्वालियर-1- 837     ग्वालियर-2-675     डबरा-476     भितरवार-333 48 लोकेशन ऐसी जहां 11 से 20 प्रतिशत होगी वृद्वि     1 से 10 प्रतिशत- 14 लोकेशन     11 से 20 प्रतिशत- 48 लोकेशन     21 से 30 प्रतिशत- 32 लोकेशन     41 से 50 प्रतिशत-16 लोकेशन     50 प्रतिशत से अधिक- 9 लोकेशन     कुल लोकेशन जिले में- 2321 यदि रजिस्ट्री करानी है तो अपना आधारकार्ड अवश्य अपडेट कराएं पंजीयन विभाग में लागू किए गए नए सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 में आधारकार्ड के माध्यम से अचल सम्पत्तियों के दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है। इसलिए जिलेवासी अपने एवं अपने परिजनों के आधारकार्ड में फोटो व थंब इंप्रेशन इत्यादि सहित सभी प्रकार की जानकारी अपडेट करा लें, जिससे संपदा 2.0 से दस्तावेजों का पंजीकरण कराते समय कठिनाई न आए। कलेक्टर रुचिका चौहान की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में जिलेवासियों से यह अपील की गई है। recent visitors 93

बिश्नोई समाज में हिन्दूओं कि तरह अग्नि दाग नहीं होता, मृतक के शव को जमीन में कच्ची कब्र खोदकर मिट्टी डालकर दफनाया

जयपुर  काला हिरण , सलमान खान , बाबा सिद्दीकी,  लॉरेंस बिश्नोई और बिश्नोई समाज पिछले कुछ दिन से इन कुछ शब्दों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है ।‌बिश्नोई समाज से जुड़ा हुआ लॉरेंस बिश्नोई सलमान खान को मारने की धमकी दे चुका है और बाबा सिद्दीकी के मर्डर का जिम्मा ले चुका है । कई आरोपी पकड़े जा चुके हैं , कई अभी भी फरार हैं।  दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में हड़कंप मचा हुआ है । राजस्थान से भी बिश्नोई समाज के बड़े नेता लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं । बिश्नोई समाज का ना शमशान घाट ना  कब्रिस्तान और ना ही मोक्ष धाम हम सभी जानते हैं बिश्नोई समाज पेड़ , पौधे और जीव जंतुओं के  संरक्षण के लिए हमेशा प्रयासरत रहा है, लेकिन समाज से जुड़े कुछ ऐसे नियम है जो बिल्कुल अलग और हैरान करने वाले हैं । उनमें सबसे ज्यादा अलग प्रथम अंतिम संस्कार की है।  बिश्नोई समाज के पास खुद के शमशान घाट,  कब्रिस्तान या मोक्ष धाम नहीं है , फिर वे लोग कैसे अंतिम संस्कार करते हैं । 29 नियमों का पालन करता है बिश्नोई समाज बिश्नोई समाज, जो प्राकृतिक संरक्षण और वन्य जीवों के प्रति अपनी निष्ठा के लिए जाना जाता है, अपने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए भी विशिष्ट पहचान रखता है। इस समाज के लोग गुरु जम्भेश्वर के 29 नियमों का पालन करते हैं, जिनमें वन और जीव संरक्षण पर जोर दिया गया है। अंतिम संस्कार के लिए चिता नहीं बनाई जाती बिश्नोई समाज में अंतिम संस्कार के लिए चिता नहीं बनाई जाती। इसके बजाय, मृतक को दफनाने की परंपरा है, जिसे "मिट्टी लगाना" कहा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत, शव को पैतृक भूमि पर गड्ढा खोदकर दफनाया जाता है। समाज का मानना है कि शव को जलाने से लकड़ी की आवश्यकता पड़ती है, जिससे हरे पेड़ों की कटाई होती है और पर्यावरण को हानि पहुंचती है। शव को गंगाजल मिलाकर नहलाया जाता जब किसी सदस्य का निधन होता है, तो शव को जमीन पर रखा जाता है और उसे छने पानी में गंगाजल मिलाकर नहलाया जाता है। फिर, शव को कफन पहनाया जाता है, जिसमें पुरुषों के लिए सफेद और महिलाओं के लिए लाल या काले कपड़े का उपयोग किया जाता है। शव को अर्थी पर नहीं ले जाया जाता; इसके बजाय, मृतक के बेटे या भाई शव को कांधे पर लेकर अंतिम संस्कार स्थल तक जाते हैं। शव को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके दफनाया जाता गड्ढा खोदने की प्रक्रिया में, शव को घर में ही दफनाया जाता है। शव को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके दफनाया जाता है, और मृतक के बेटे द्वारा कहा जाता है, “यह आपका घर है।” इसके बाद, शव को मिट्टी से ढक दिया जाता है। अंतिम संस्कार के बाद, गड्ढे के ऊपर पानी डालकर बाजरी बरसाई जाती है। शव को कंधा देने वाले लोग उस स्थान पर स्नान करते हैं, जिससे शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी होती है। इस अनोखे अंतिम संस्कार के जरिए बिश्नोई समाज अपने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। पूरे देश में करीब 13 लाख से ज्यादा बिश्नोई समाज के लोग बिश्नोई समाज की मौजूदगी की बात करें तो पूरे देश में करीब 13 लाख से ज्यादा बिश्नोई समाज के लोग रह रहे हैं । इनमें सबसे ज्यादा 9 लाख राजस्थान में और करीब 2 लाख हरियाणा में रह रहे हैं । उसके बाद अन्य राज्यों का नंबर आता है।   recent visitors 114

त्योहारी सीजन में फ्लाइट में बम की फर्जी धमकी के मामले बढ़े, आखिर क्यों बढ़ रहे ऐसे केस

नई दिल्ली बीते 14 अक्टूबर यानी सोमवार को मुंबई से न्यूयॉर्क स्थित JFK एयरपोर्ट के लिए एयर इंडिया की एक फ्लाइट ने उड़ान भरी। ये बोइंग 777 विमान लगभग 130 टन जेट फ्यूल के साथ 16 घंटे की नॉन-स्टॉप यात्रा के लिए न्यूयॉर्क रवाना हुआ। उड़ान भरने के तुरंत बाद, एयरलाइन को एक कॉल आई जिसमें कहा गया कि फ्लाइट में बम है। JFK एयरपोर्ट जा रहे AI 119 को तुरंत डायवर्ट किया गया। उड़ान भरने के दो घंटे में ही वह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने की तैयारी कर रहा था। हालांकि, इसमें एक समस्या थी। फ्लाइट में बम की फर्जी धमकी के मामले बढ़े एक वरिष्ठ पायलट ने बताया कि B777 (बोइंग 777) का अधिकतम लैंडिंग वजन 250 टन है। इस तरह की पूरी उड़ान का वजन यात्रियों, सामान और कार्गो के साथ उड़ान भरने पर लगभग 340-350 टन होता है। दो घंटे के भीतर उतरने का मतलब है लगभग 100 टन ईंधन बर्बाद करना। लगभग एक लाख रुपये प्रति टन पर, अकेले ईंधन की बर्बादी की लागत 1 करोड़ रुपये बैठती है। इसमें IGI एयरपोर्ट पर अप्रत्याशित लैंडिंग और पार्किंग शुल्क जैसे अन्य खर्च, दिल्ली के होटलों में 200 से अधिक यात्रियों और क्रू मेंबर्स को रखना, छूटे हुए कनेक्शन के लिए बाद में उन्हें मुआवजा देना जैसे खर्च शामिल हैं। झूठी अफवाह से 3 करोड़ का नुकसान झूठी अफवाह पर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग फिर पूरी तरह से जांच के बाद विमान को सेवा में वापस सेवा में लाने से पहले ऑपरेटिंग क्रू की नई जोड़ी की व्यवस्था करना शामिल होता है। अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेटिंग क्रू, फ्लाइट के JFK एयरपोर्ट तक नहीं पहुंचने से यात्रियों को परेशानी होती है। इसके साथ इस एक फर्जी धमकी से एयरलाइन कंपनी को करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है। पिछले रविवार से ऐसा लग रहा फर्जी धमकियों की बाढ़ आ गई है। गुरुवार देर रात तक करीब 40 धमकी भरी अफवाहों के चलते का एयरलाइंस पर भारी वित्तीय प्रभाव पड़ा है। एयरलाइन अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्त खर्च लगभग 60-80 करोड़ रुपये है।   एअर इंडिया के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग एअर इंडिया B777 (VT-ALM) का मामला लें, जिसने इस मंगलवार (15 अक्टूबर) को दिल्ली से शिकागो के लिए उड़ान भरी थी। बारह घंटे बाद, 200 से अधिक यात्रियों के साथ फ्लाइट बम की धमकी के चलते कनाडा के दूर-दराज वाले शहर इकालुइट में उतर गया। विमान 15 अक्टूबर को सुबह 5.21 बजे वहां उतरा। इस विमान की अगली व्यावसायिक उड़ान साढ़े तीन दिन बाद हुई। पहले यह एक फेरी फ्लाइट के रूप में इकालुइट से शिकागो पहुंचा। उस समय इसमें कोई यात्री नहीं थे। ऐसा इसलिए क्योंकि फंसे हुए यात्रियों को पहले ही कनाडाई वायु सेना A330 से शिकागो ले जाया गया था। इसके लिए एअर इंडिया भुगतान करेगा। और फिर विमान ने 18 अक्टूबर को शाम 5.15 बजे दिल्ली के लिए एक व्यावसायिक उड़ान के रूप में उड़ान भरी।   बोइंग 777 का एक दिन का खर्च जानिए B777 का औसत मासिक किराया 400,000 डॉलर और 600,000 डॉलर के बीच है। यह लगभग 17,000 डॉलर के औसत डेली किराए पर काम करता है। उड़ान न भरने का मतलब है हर दिन 17,000 डॉलर का नुकसान। अब, अगर झठी धमकी नहीं दी गई होती, तो ये विमान शिकागो पहुंच जाता और फिर कुछ घंटों के बाद, एक नियमित उड़ान के रूप में दिल्ली के लिए रवाना हो जाता। लेकिन शिकागो नहीं पहुंचने का मतलब था कि इकालुइट में 200 से अधिक यात्री और क्रू मेंबर्स फंसे हुए थे। इनके लिए एक दूरदराज के शहर में रहना, खाना और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं की व्यवस्था करना पड़ा।   एयरलाइन के साथ यात्रियों को होती है परेशानी फिर इस फ्लाइट के यात्रियों को कनाडा वायुसेना के विमान से शिकागो ले जाना पड़ा। इस बीच, शिकागो के ओ'हारे हवाई अड्डे में दिल्ली जाने वाले यात्रियों को मुश्किलें हुईं। उनसे एयरपोर्ट कर्मियों को निपटना पड़ा, जिनका विमान इसलिए नजर नहीं आया क्योंकि वह इकालुइट में फंसा हुआ था। इस एक धमकी की कुल लागत 15-20 करोड़ रुपये से अधिक होगी, जिसमें इतने लंबे समय तक बोइंग 777 को रोकने की लागत भी शामिल है।   त्योहारी सीजन में बढ़े धमकी भरे कॉल के मामले पिछले कुछ दिनों में इन धमकियों का शिकार बनी किसी भी बड़ी एयरलाइन ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। एयरलाइन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह त्योहारों की भीड़ का पीक सीजन है और हम यात्रियों के बीच डर पैदा नहीं करना चाहते हैं। इतना कहना पर्याप्त है कि यह एयरलाइंस के खिलाफ एक तरह का वित्तीय आतंकवाद है और इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।   लगातार आ रही ऐसी शिकायतें इंडिगो को भी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की कई उड़ानों के लिए धमकियां मिली हैं। बहुत बार जब किसी उड़ान को धमकी का संदेश मिलता है और उसे डायवर्ट नहीं किया जाता। डेस्टिनेशन एयरपोर्ट उसे होल्ड करने या मंडराने के लिए कहता है। लंदन में एअर इंडिया, सिंगापुर में AI एक्सप्रेस और शायद दूसरों के साथ भी ऐसा हुआ है। एक पायलट ने बताया कि बोइंग 777 हर घंटे 7-8 टन ईंधन जलाता है और एक A320 2.5 टन। 1 लाख रुपये प्रति टन और दो घंटे के होवरिंग पर, अकेले ईंधन जलने की लागत सभी प्रभावित एयरलाइंस के लिए कई करोड़ से अधिक है।   धमकियों को नजरअंदाज भी नहीं कर सकते एक बड़ी एयरलाइन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हवा में बिताए गए अतिरिक्त समय के कारण, बहुत बार वही क्रू मेंबर्स अगली उड़ान संचालित नहीं कर सकता है। वहीं ये फ्लाइट सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जांच के बाद क्लीयर होने पर ही उड़ान के लिए संचालित होगा। उन्हें आराम करने और उस शहर के होटल में रहने की सुविधा देने की आवश्यकता होगी। हालांकि यह हमारे नियंत्रण से परे एक अप्रत्याशित घटना है, लेकिन कई यात्री जो विमान में देरी होने पर अपने कनेक्शन मिस कर जाते हैं वे हमें अदालत में घसीटने की धमकी देते हैं। ऐसे में हमें अंततः हर्जाना देकर समझौता करना होता है।   कैसे लगे लगाम इस मामले को और भी बदतर बनाने वाली बात यह है … Read more

जूनियर डॉक्टरों से भूख हड़ताल खत्‍म करने की अपील, आमरण अनशन वापस ले लें: ममता बनर्जी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को मुख्य सचिव मनोज पंत के मोबाइल फोन पर जूनियर डॉक्टरों से अपील की कि वे आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की जूनियर महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या के विरोध में अपनी मांगों के समर्थन में आमरण अनशन वापस ले लें। पंत, गृह सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और कोलकाता पुलिस की केंद्रीय संभाग की उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी के साथ अचानक मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड में सात जूनियर डॉक्टरों की भूख हड़ताल के मंच पर पहुंच गए। वहां मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क किया और मुख्‍यमंत्री ने स्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों से भूख हड़तान खत्‍म करने की अपील की। बनर्जी ने कहा, "मैं आपसे भूख हड़ताल वापस लेने का अनुरोध करती हूं। कृपया चर्चा के लिए आएं। आपकी अधिकांश मांगें पहले ही पूरी हो चुकी हैं। कृपया मुझे तीन से चार महीने का समय दें। मैं सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में विभिन्न परिषदों के लिए चुनाव कराने की व्यवस्था करूंगी। कृपया भूख हड़ताल वापस लें।" स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को हटाने की जूनियर डॉक्टरों की मांग पर उन्होंने कहा कि यदि एक महत्वपूर्ण विभाग के सभी प्रमुख अधिकारियों को एक ही समय में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, तो प्रशासनिक कठिनाइयां आएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने पहले ही कोलकाता पुलिस आयुक्त और कुछ अन्य अधिकारियों को हटा दिया है।" उन्होंने कहा कि अगर आम लोगों को सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं नहीं मिलती हैं, तो वे खुद को असहाय महसूस करते हैं। मैं मानवता के पक्ष में हूं। मैं भी न्याय चाहती हूं। लेकिन साथ ही आम लोगों का इलाज भी सुनिश्चित करना होगा। इसलिए मैं आपसे फिर से अनुरोध करती हूं कि आप भूख हड़ताल खत्‍म कर दें और काम पर वापस लौट आएं। शुक्रवार रात को ही जूनियर डॉक्टरों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर उनकी लंबित मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे अगले मंगलवार से पूर्ण रूप से काम बंद कर देंगे। मुख्यमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है जब कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अपनी सहकर्मी के साथ हुए बलात्कार और हत्या के खिलाफ जूनियर डॉक्टरों के एक समूह का आमरण अनशन 15वें दिन में प्रवेश कर गया है।   recent visitors 92

नक्सलियों ने एक बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया जिसमें भारत आईटीबीपी के दो जवान शहीद हो गए

रायपुर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में नक्सलियों ने शनिवार को एक बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया, जिसमें भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के दो जवान शहीद हो गए और जिला पुलिस के दो जवान घायल हुए। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कोडलियर गांव के निकट एक जंगल में यह विस्फोट हुआ, जिसमें आईटीबीपी की 53वीं बटालियन के दो जवान अमर पनवार (36) और के राजेश (36) शहीद हो गए। उन्होंने बताया कि इस घटना में नारायणपुर जिला पुलिस के दो अन्य जवान घायल हुए हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नारायणपुर जिले के ओरछा, मोहंदी और ईरकभट्टी पुलिस शिविर से आईटीबीपी, सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) और जिला रिजर्व गार्ड के संयुक्त दल को नक्सल विरोधी अभियान के लिए धुरबेड़ा गांव की ओर रवाना किया गया था। उन्होंने बताया कि दल की वापसी के दौरान शनिवार दोपहर लगभग 12 बजे एक बारूदी सुरंग में विस्फोट हुआ, जिसमें आईटीबीपी के दो जवान तथा जिला पुलिस के दो जवान घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि घटना के कुछ देर बाद आईटीबीपी के घायल जवानों को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि जिला पुलिस के घायल दो अन्य जवानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत स्थिर है। राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आईटीबीपी के जवानों को तैनात किया गया है। चार अक्टूबर को राज्य के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा-नारायणपुर जिले की सीमा में अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 38 नक्सलियों को मार गिराया था।   recent visitors 75

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- युवाओं को समाज सुधार, विकास और जन-कल्याण के लिए आगे आना होगा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जन अभियान परिषद जन-जन के कल्याण के लिए समर्पित है। स्वैच्छिक, सामूहिक और सामुदायिक सहभागिता से स्वावलंबन के दृष्टिकोण से पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. अनिल माधव दवे ने प्रत्येक प्रदेशवासी को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से परिषद के गठन की प्रेरणा दी थी। सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर समाज भी चले इस उद्देश्य से जन अभियान परिषद को एक कड़ी के रूप में विकसित किया गया। शासकीय योजनाओं को जन-जन तक ले जाने में जन अभियान परिषद उत्प्रेरक की भूमिका निभा रही है। परिषद भू-जल भण्डारण सहित समाज कल्याण और विकास गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समन्वय भवन में समृद्धि योजना अंतर्गत "समग्र ग्राम विकास के विभिन्न आयाम" विषय पर मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा राज्य, संभाग और जिला स्तरीय समन्वयकों के उन्मुखीकरण सह-प्रशिक्षण कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर, प्रमुख सचिव श्री संजय कुमार शुक्ला उपस्थित थे। भगवान श्रीकृष्ण ने संस्कृति में आ रही विकृतियों से संघर्ष के लिए समाज को संगठित करने का दिया संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने संस्कृति में आ रही विकृतियों से संघर्ष के कई प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किए। साथ ही कंस रूपी बुराई से संघर्ष के लिए स्त्री-पुरूषों के साथ बच्चों को भी संगठित कर समाज की संगठन क्षमता और जन-कल्याण के लिए उसके सार्थक उपयोग का संदेश दिया। यह दर्शाता है कि संगठन की शक्ति से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गांव और सामान्य जन से प्रेम का संदेश दिया। भारत का मूल स्वरूप गावों में ही विद्यमान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत का मूल स्वरूप गावों में ही विद्यमान है। ग्राम स्तर पर व्यवस्थाओं को सशक्त करने की आवश्यकता है और इस दिशा में जन अभियान परिषद द्वारा किए जा रहे कार्य सराहनीय हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ग्राम स्तर पर जल संरक्षण, नवकरणीय ऊर्जा, दुग्ध उत्पादन, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन, ग्रामीणों की आय में वृद्धि के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गतिविधियां जारी हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का उदाहरण देते हुए कहा कि युवाओं को समाज सुधार, विकास और जन-कल्याण के लिए आगे आना होगा। कार्यशाला में संभाग, जिला और विकासखंड स्तर के समन्वयक हुए शामिल परिषद के उपाध्यक्ष श्री नागर ने कहा कि भारत की आत्मा ग्रामों में बसती है। ग्रामों और उनकी आत्मा का स्वरूप प्रभावित न हो इस उद्देश्य के लिए जन अभियान परिषद समर्पित है। समाज को समरस सामुदायिक और संगठित नेतृत्व प्रदान करने के लिए जन अभियान परिषद प्रतिबद्ध है। गांव-गांव में नेतृत्व विकास के लिए परिषद द्वारा सघन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कार्यक्रम के आरंभ में वंदे-मातरम गान के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ तथा शॉल, श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया। प्रशिक्षण सह-कार्यशाला, जन अभियान परिषद के संभाग, जिला और विकासखंड स्तर के समन्वयकों के उन्मुखीकरण पर केंद्रित है।   recent visitors 67