रेल कर्मियों को बड़ी राहत, रेलवे के पैनल में शामिल हुई 13 निजी अस्पताल, होगा फ्री इलाज

बरेली रेल कर्मियों को गंभीर बीमारी होने पर इमरजेंसी की स्थिति में वह रेलवे के पैनल में शामिल निजी अस्पताल में उम्मीद कार्ड के आधार पर भर्ती हो सकेंगे। उन्हें रेलवे अस्पताल पहुंचकर रेफर कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। निजी अस्पताल 24 घंटे में रेलवे अस्पताल को ऑनलाइन इमरजेंसी रेफर लेटर भेजेगा। रेलवे अस्पताल की सहमति के बाद निश्शुल्क उपचार जारी रहेगा। यह सुविधा इमरजेंसी की स्थिति में ही मिलेगी। सामान्य स्थिति में रेलवे अस्पताल से चयनित निजी अस्पताल के लिए रेफर की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। एलएनएम का 13 निजी अस्पतालों के साथ करार जारी ललित नारायण मिश्र केंद्रीय रेलवे अस्पताल (एलएनएम) का 13 निजी अस्पतालों के साथ करार जारी रहेगा। एलएनएम प्रशासन ने मेदांता, द मेडिसिटी सेक्टर- 38, गुड़गांव के साथ 30 सितंबर 2025 तक कैशलेस उपचार के लिए करार कर लिया है। महाप्रबंधक सौम्या माथुर की सहमति के बाद चिकित्सा निदेशक डॉ. मो. असगर अली खान ने लखनऊ, वाराणसी, इज्जतनगर और गोंडा के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को मेदांता में रेफर करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।   रेलवे के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों की लिस्ट मेंदाता, द मेडिसिटी, सेक्टर- 38, गुडगांव यशोदा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, गाजियाबाद सर्वोदय हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, फरीदाबाद- हरियाणा फोर्टिस एस्कोर्ट हर्ट इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर- नई दिल्ली नियो हास्पिटल- सेक्टर- 50 नई दिल्ली विजिटेक आई सेंटर- नई दिल्ली बत्रा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली न्यू प्रकाश क्लीनिक, निकट कौवाबाग पुलिस चौकी, गोरखपुर श्रीराम जानकी नेत्रालय एडी चौक जुबिली रोड, गोरखपुर श्री साईं नेत्रालय दस नंबर बोरिंग सोनौली रोड, गोरखपुर फातिमा हास्पिटल, पादरी बाजार- गोरखपुर न्यू उदय हास्पिटल, गोलघर- गोरखपुर सावित्री हास्पिटल, दिलेजाकपुर- गोरखपुर बुजुर्गों की मदद को आगे आ रही बरेली पुलिस वहीं जिले की पुलिस को लेकर भी एक गर्व करने वाली बात सामने आई है। बरेली पुलिस अब बुजुर्गों की मदद को आगे आ रही है। एसएसपी के आदेश पर एसपी सिटी और एसपी नार्थ अपने-अपने क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्ग दंपती या एकल बुजुर्ग की लिस्ट तैयार करा रहे हैं। जिससे यदि उन्हें कोई समस्या होती है तो उनके दरवाजे तक स्वयं पुलिस मदद लेकर पहुंचे। उन्हें किसी भी तरह की कोई समस्या न हो। यहां ऐसे बहुत से बुजुर्ग हैं जो अपना बसर गुजर अकेले कर रहे हैं। उनकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं हैं। इन्हीं लोगों की मदद को एक बार फिर से पुलिस आगे आ रही है। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि लिस्ट फाइनल होने के बाद जिन बुजुर्गों या दंपतियों की कोई देखरेख करने वाला कोई नहीं हैं। उनकी देखरेख के लिए संबंधित बीट आरक्षी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। संबंधित थाना या चौकी का बीट सिपाही बुजुर्गों से संपर्क कर उनका नंबर लेगा और अपना नंबर उन्हें देकर आएगा। जिससे यदि उन्हें कभी कोई आवश्यकता होती है तो वह फोन कर सकें। recent visitors 128

अगस्त के मुकाबले सितंबर महीने में खुदरा महंगाई में 1.38 फीसदी बढ़ सकती है

नई दिल्ली खाने-पीने की वस्तुओं और खासकर प्याज-टमाटर की कीमतों में तेज उछाल से खुदरा महंगाई सितंबर, 2024 में बढ़कर दो महीने बाद फिर आरबीआई के 4 फीसदी के दायरे बाहर निकलकर 5.03 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है। इससे पहले जून में खुदरा महंगाई 5.08 फीसदी रही थी, जबकि जुलाई और अगस्त में यह घटकर क्रमशः 3.60 फीसदी एवं 3.65 फीसदी रही थी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के मुकाबले सितंबर में यानी एक महीने में खुदरा महंगाई में 1.38 फीसदी बढ़ सकती है। खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर भी 2.3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 8 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है। अगस्त में खाद्य महंगाई 5.7 फीसदी रही थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर, 2023 से जून, 2024 के बीच सब्जियों की महंगाई दर 27-30 फीसदी के दायरे में बनी हुई थी। इस साल जुलाई और अगस्त में यह घटकर क्रमशः 6.8 फीसदी और 10.7 फीसदी रह गई। इससे इन दोनों महीनों में खुदरा महंगाई में गिरावट देखने को मिली थी। सरकार 14 अक्तूबर को सितंबर के लिए खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी कर सकती है। सितंबर के दूसरे पखवाड़े में टमाटर 10% महंगा सीएमआईई के मुताबिक, जून से लगातार बढ़ रहे प्याज के दाम सितंबर में 13.4 फीसदी और बढ़ गए हैं। इस दौरान खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 36 रुपये से बढ़कर 51 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पहुंच गई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग (डीसीए) की ओर से जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि टमाटर की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन सितंबर के पहले पखवाड़े की तुलना में दूसरे में यह 10 फीसदी से अधिक महंगा हो गया है। सब्जियों की कीमतों में आएगी मामूली गिरावट रिपोर्ट में कहा गया है कि खुदरा महंगाई में 1.2 फीसदी का योगदान देने वाली सब्जियों की कीमतों में सितंबर में मामूली कमी आने की उम्मीद है। कुछ सब्जियों के दाम घटे हैं। आलू की खुदरा कीमत कम हुई है। बैंगन, गोभी और भिंडी जैसी सब्जियों की मंडी कीमतों में भी सात फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। हालांकि, प्याज और टमाटर की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से अन्य सब्जियों के दाम में गिरावट का असर कम हो सकता है। दाल-फल के घटे हैं दाम रिपोर्ट के मुताबिक, खरीफ की अच्छी फसल के कारण दालों की महंगाई घटने की उम्मीद है। इसकी महंगाई दर सितंबर में पिछले महीने के 13.6 फीसदी से घटकर 9.5 फीसदी रह सकती है। अनाज, मांस, फल, मसाले और चीनी पर महंगाई का दबाव कम हुआ है। तेल-वसा की महंगाई दर बढ़ सकती है।     recent visitors 132

देश कैसे तय करते हैं कि युद्ध करना है या नहीं? क्या ये देश शुरू कर चुके हैं तीसरा World War?

नईदिल्ली इन दिनों इजरायल चौथरफा युद्ध लड़ रहा है वहीं रूस और यूक्रेन युद्ध भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में कई लोग तीसरे विश्व युद्ध की संभावना जता रहे हैं, लेकिन इसे लेकर भी कई सवाल उठते हैं कि क्या सच में तीसरा विश्व युद्ध होना इतना आसान है? क्या विश्व युद्ध में कई देश आपस में लड़ते हैं तभी शुरु माना जाता है और विश्व युद्ध होने की परिस्थितियां क्या होती हैं. चलिए इन सवालों के जवाब जान लेते हैं. क्या होते हैं विश्व युद्ध के कारण? विश्व युद्ध कई कारणों से शुरू हो सकते हैं. जैसे राष्ट्रवाद यानी अपने देश के प्रति अत्यधिक लगाव और अन्य देशों के प्रति घृणा. जब राष्ट्रवाद चरम पर पहुंच जाता है तो युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. या फिर एक शक्तिशाली देश दूसरे देशों पर अपना अधिकार जमाना चाहता है, तो इससे युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. इसके अलावा देशों के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा भी युद्ध का कारण बन सकती है. साथ ही धार्मिक मतभेद भी युद्ध का कारण बन सकते हैं और किसी देश में राजनीतिक अस्थिरता होने पर पड़ोसी देशों में भी अशांति फैल सकती है और युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. क्या विश्व युद्ध में हर देश को भाग लेना होता है? नहीं, हर देश को विश्व युद्ध में भाग लेना जरूरी नहीं होता है. कई बार देश तटस्थ रहने का फैसला करते हैं, लेकिन अगर कोई देश किसी युद्ध में शामिल हो जाता है तो उसके पड़ोसी देशों पर भी युद्ध का असर पड़ सकता है. विश्व युद्ध के होते हैं ये भयानक परिणाम विश्व युद्ध के परिणाम बहुत ही विनाशकारी होते हैं. इसमें लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. युद्ध से देशों की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचता है. साथ ही युद्ध से समाज में अस्थिरता फैल जाती है और युद्ध के बाद देशों के राजनीतिक नक्शे में बदलाव आ सकता है.         अगर नाटो-यूक्रेन हमला करते हैं तो रूस क्या करेगा? तो रूस के पास क्या-क्या विकल्प हैं. – रूस मार्शल लॉ लगाकर अपने टारगेट्स को यूक्रेन तक पहुंचा दे. इसके बाद यूक्रेन के कई शहर गाजा की तरह दिखने लगेंगे. इसके लिए रूस टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन यानी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. – यमन के हूती और अन्य विद्रोही-आतंकी संगठनों को एडवांस हथियार देकर जंग में शामिल करे. इन लड़ाकों के जरिए रूस यूक्रेन और नाटो की सेना पर हमला करे. इससे यूक्रेन और नाटो के बीच Chaos पैदा होगा. – तीसरा रास्ता है रूस के ऊपर घूम रहे दुश्मन के सैटेलाइट्स को मार गिराया जाए. जिसमें अमेरिकी रईस एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट्स भी हैं. – चौथा रास्ता है कि रूस नाटो के बाल्टिक और रोमानिया में मौजूद हथियार डिपो और लॉजिस्टिक्स पर हमला करके उसे बर्बाद कर दे. एक तरीका हो सकता है साइबरअटैक का. जिससे नाटो और यूक्रेन परेशान हो सकते हैं. परमाणु परीक्षण कर सकता है रूस ये भी सुनने में आ रहा है कि रूस इस समय एक परमाणु परीक्षण करने की तैयारी में है. ये परीक्षण उसकी अपनी जमीन पर होगा. लेकिन कहां और कब इसका खुलासा नहीं हुआ है. यह परीक्षण किसी भी समय हो सकता है. यह पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाने का एक तरीका है, ताकि जंग को रोका जा सके. अमेरिका में मौजूद रूस के एंबेसडर ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ये दूसरा विश्व युद्ध नहीं है कि अमेरिकी पनडुब्बियां पानी के अंदर से आकर अचानक हमला कर देंगी. न उसमें छिप पाएंगी. हम हर जगह से नजर रखे हुए हैं. अगर अमेरिका या नाटो ने हमला किया तो हम परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. रूस समंदर के अंदर खोज रहा है इंटरनेट केबल नाटो ने कहा है कि रूस इस समय समंदर के अंदर मौजूद इंटरनेट केबल्स को खोज रहा है. नाटो को लगता है कि रूस इन केबल्स पर हमला करना चाहता है. अगर रूस इन केबल्स को काटता है तो इसका असर पश्चिमी देशों समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.     इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है. ईरान शांत बैठा है लेकिन वह अपने समर्थन वाले आतंकी समूहों से इजरायल पर ताकतवर हमला करवा रहा है.  ईरान और अमेरिका के तनाव ने मध्य पूर्व में शांति को खतरे में डाल दिया है. उत्तर कोरिया की बढ़ती गतिविधियां उत्तर कोरिया लगातार अपनी मिसाइलों की ताकत बढ़ा रहा है. उनके परीक्षण कर रहा है. उसे चीन और रूस का समर्थन हासिल है. वह भी यूक्रेन को हराने में रूस का साथ दे रहा है. साथ ही यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह सीधे तौर पर रूस के साथ खड़ा होगा. रूस के दुश्मन से जंग लड़ने को तैयार है. अक्सर ही तानाशाह किम जोंग उन अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइलों की धमकी देता रहता है. चीन ताइवान पर घुसपैठ की तैयारी में लगा चीन ताइवान से सिर्फ 350 किलोमीटर दूर एक बड़े पैमाने का एंफिबियस ऑपरेशन कर रहा है. मकसद है ताइवान पर घुसपैठ. इसमें चीन की सेना, वायुसेना और नौसेना के जवान शामिल हैं. फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, हेलिकॉप्टर्स, जंगी जहाज, टैंक्स, बख्तरबंद गाड़ियां और सिविलियन नावें भी शामिल की गई हैं. इस मिलिट्री एक्सरसाइज की वजह से इलाके में तनाव है. recent visitors 135

16 अक्टूबर को मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पूरे साल भर में 12 पूर्णिमा तिथियां होती हैं, जिसमें शरद पूर्णिमा को विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा और कोजागर पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं. शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के संग महारास रचाया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा कहते हैं. वहीं शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं, जिसे कोजागर पूर्णिमा के नाम से जानते हैं. शरद पूर्णिमा की रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि इस साल शरद पूर्णिमा कब है? शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में खीर रखने का समय क्या है? शरद पूर्णिमा 2024 तारीख वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा के लिए जरूरी अश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर बुधवार की रात 8 बजकर 40 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि अगले दिन 17 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 55 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में शरद पूर्णिमा का पर्व 16 अक्टूबर बुधवार को मनाया जाएगा. रवि योग में है शरद पूर्णिमा 2024 इस साल शरद पूर्णिमा को रवि योग बन रहा है. शरद पूर्णिमा को रवि योग सुबह में 6 बजकर 23 मिनट से बनेगा, जो शाम को 7 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. उस दिन ध्रुव योग प्रात:काल से लेकर सुबह 10:10 बजे तक रहेगा. उसके बाद व्याघात योग है. शरद पूर्णिमा वाले दिन उत्तर भाद्रपद नक्षत्र शाम को 07:18 बजे तक है, उसके बाद से रेवती नक्षत्र है. हालांकि शरद पूर्णिमा पर पूरे दिन पंचक भी रहेगा. शरद पूर्णिमा 2024 खीर रखने का समय 16 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का चंद्रोदय शाम में 5 बजकर 5 मिनट पर होगा. शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की किरणों में खीर रखते हैं. इस साल शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का समय रात में 08 बजकर 40 मिनट से है. इस समय से शरद पूर्णिमा का चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होकर अपनी किरणों को पूरे संसार में फैलाएगा. शरद पूर्णिमा की रात क्यों रखते हैं खीर? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है और उस रात अमृत की वर्षा होती है. चंद्रमा की किरणें औषधीय गुणों वाली होती हैं, जो शीतलता भी प्रदान करती हैं. इस वजह से शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर कुछ समय के लिए रखा जाता है, ताकि वह चंद्रमा की किरणों से औषधीय गुणों वाली हो जाए. उसे खाने से सेहत ठीक होती है. recent visitors 100

प्रदेश में दिवाली मनाएगा संघ परिवार: प्रचारकों का ग्वालियर में होगा प्रशिक्षण वर्ग, संघ प्रमुख मोहन भागवत होंगे शामिल

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के संघ सदस्यों के लिए इस बार दीपावली पर्व कुछ खास रहेगा।दरअसलराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी सम-वैचारिक संगठनों के संगठन मंत्री और अन्य पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रचारकों का चार दिवसीय अखिल भारतीय प्रशिक्षण वर्ग इस बार ग्वालियर में आयोजित किया जा रहा है। 1 से 4 नवंबर तक यह वर्ग चलेगा। इसके लिए 30 अक्टूबर को सभी प्रचारक ग्वालियर के केदारधाम सरस्वती शिशु मंदिर में एकत्र होंगे। इसमें संघ प्रमुख डॉ  मोहन भागवत और अखिल भारतीय टोली के सभी प्रमुख सदस्य शामिल होंगे। संगठन के पदाधिकारी रहेंगे मौजूद ग्वालियर में आयोजित किए जा रहे इस कैंप में संघ के 3 दर्जन से अधिक अनुषांगिक संगठनों के नगर प्रचारक से लेकर अखिल भारतीय स्तर के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। जनवरी 2025 से शुरू होने वाले संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम की रूपरेखा इसी कैंप के दौरान बनाई जाएगी। नए पाठ्यक्रम की बनेगी रूपरेखा संघ की स्थापना के अगले वर्ष 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यही वजह है कि संघ इस वर्ग में अपने सम-वैचारिक संगठनों में भेजे गए प्रचारकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने जा रहा है। संघ की अखिल भारतीय टोली की मौजूदगी में ही नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी। इसमें संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित अन्य सहसरकार्यवाह भी उपस्थित रहेंगे। स्वयंसेवकों के लिए संघ शिक्षा वर्ग की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने प्रचारकों के लिए भी समय-समय पर प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन करता है। आमतौर पर हर पांच वर्ष में संघ की ओर से सभी सम-वैचारिक संगठनों के उन संगठन मंत्रियों का प्रशिक्षण वर्ग किया जाता है, जो पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, आरोग्य भारती, प्रज्ञा प्रवाह, चित्र भारती जैसे संगठनों में काम कर रहे हैं। इसी क्रम में ग्वालियर में संघ के सम-वैचारिक संगठनों में कार्यरत प्रचारकों को संघ चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। संघ की स्थापना के अगले वर्ष 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यही वजह है कि संघ इस वर्ग में अपने सम-वैचारिक संगठनों में भेजे गए प्रचारकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने जा रहा है। संघ की अखिल भारतीय टोली की मौजूदगी में ही नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी। इसमें संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित अन्य सहसरकार्यवाह भी उपस्थित रहेंगे। वर्ग के लिए संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत 30 अक्टूबर को ग्वालियर पहुंचने की संभावना है। 31 अक्टूबर को अखिल भारतीय टोली की बैठक हो सकती है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। recent visitors 131

रिपोर्ट के मुताबिक देश में 6 वर्षों में ग्रामीण व शहर, दोनों जगह महिला कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ

नई दिल्ली  देश में जॉब करने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी आ रही है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक लेबर फोर्स में काम करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले 6 साल में यानी 2017-18 से लेकर 2023-24 तक बेरोजगारी दर में 50 फीसदी तक की कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इन 6 वर्षों में ग्रामीण हो या शहर, दोनों जगह महिला कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ है। दोगुने से ज्यादा हुई मुस्लिम महिलाओं की संख्या जॉब करने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या में भी 6 साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में सिर्फ 9 फीसदी मुस्लिम महिलाएं नौकरी करती थीं। अब इसमें 2.3 गुना की बढ़ोतरी हुई है। यानी अब 20.7 फीसदी मुस्लिम महिलाएं जॉब करती हैं। मुस्लिम महिलाओं के बाद सिख महिलाओं के जॉब करने की संख्या में तेजी आई है। 6 वर्षों में यह 11 सिर्फ से बढ़कर 24.6 फीसदी हो गया है। इसमें 124 फीसदी की तेजी आई है। इसके बाद हिंदू महिला कामगारों की संख्या बढ़ी है। इसमें करीब 84 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन 6 वर्षों में यह आंकड़ा 17.6 फीसदी से बढ़कर 32.3 फीसदी हो गया है। क्रिश्चियन महिलाओं की संख्या 80 फीसदी बढ़ी है। 6 साल पहले 20.2 फीसदी क्रिश्चियन महिलाएं जॉब करती थीं। अब यह आंकड़ा 36.3 फीसदी है। एसटी वर्ग की महिलाएं सबसे आगे सबसे ज्यादा जॉब अनुसूचित जनजाति महिला की महिलाएं करती हैं। आंकड़ों के मुताबिक इनकी संख्या 46 फीसदी है। अनपेड जॉब करने वाले भी कम नहीं रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो बिना सैलरी या भत्ते के नौकरी करते हैं। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इन 6 वर्षों में 16 करोड़ नौकरियां पैदा हुई हैं यानी 2.8 करोड़ हर साल। इनमें से सालाना एक करोड़ ऐसी नौकरियां हैं जो परिवार के बिजनस से जुड़ी हैं। या फिर ऐसे लोग हैं जो सेल्फ एम्प्लॉइड हैं। इनमें काम करने वालों को कोई सैलरी नहीं मिलती। यानी ये अनपेड जॉब करते हैं। recent visitors 61

दोस्त रूस ने अत्‍याधुनिक आइसब्रेकर शिप निर्माण के लिए भारत को चुना, चीन को दिया झटका

मास्‍को यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की चीन पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच रूस को भारत से भी जमकर मदद मिली है। भारत ने रूस से बहुत बड़े पैमाने पर तेल खरीदा है। वह भी त‍ब जब रूस पर पश्चिमी देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इस बीच रूस ने भारत को बड़ी खुशखबरी दी है। रूस ने अत्‍याधुनिक गैर परमाणु आइसब्रेकर शिप निर्माण के लिए भारत को चुना है। रूस ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है जब राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन चाहते हैं कि आर्कट‍िक क्षेत्र में नादर्न सी रूट का विकास किया जाए और पश्चिमी देशों के लगाए हुए प्रतिबंधों को मात दी जाए। इस समुद्री रास्‍ते के लिए भी रूस ने भारत को ऑफर दिया है। रूस के इस ऑफर से न केवल दोनों देशों के बीच रिश्‍तों में मजबूती आएगी बल्कि इससे भारत आर्कटिक क्षेत्र में बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। भारत सरकार दो जहाज बनाने वाली कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है ताकि गैर परमाणु आइसब्रेकर को तैयार किया जा सके। इस पूरे सौदे की कीमत 6000 करोड़ रुपये होगी। इस पूरे सौदे को रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोस्‍टोम का भी साथ म‍िल रहा है। रूसी कंपनी अच्‍छे माहौल वाली और क्षमता से लैस भारतीय कंपनी की तलाश कर रही है। वह भी तब जब अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। नादर्न सी रूट से क्‍या होगा फायदा ? यूरेशिया टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2023 में रूस ने खुलासा किया था कि उसने भारत को गैर परमाणु आइसब्रेकर बनाने का प्रस्‍ताव दिया है। इनका संयुक्‍त उत्‍पादन किया जाना है। दरअसल, रूस चाहता है कि जहाजों के जरिए होने वाले वैश्विक व्‍यापार के लिए नादर्न सी रूट को विकसित किया जाए जो एक वैकल्पिक रास्‍ता होगा। इससे स्‍वेज नहर की तुलना में उत्‍तरी यूरोप और पूर्वी एशिया के देशों को ज्‍यादा जल्‍दी से सामान पहुंचाया जा सकेगा। रूस का लक्ष्‍य है कि इस रास्‍ते से कम से कम 15 करोड़ टन कच्‍चा तेल, एलएनजी, कोयला और अन्‍य सामान साल 2030 तक हर साल पहुंचाए जाएं। रूस चाहता है कि इसके लिए कम से कम 50 आइसब्रेकर और बर्फ में चलने वाले जहाज इस रास्‍ते में तैनात किए जाएं। साथ ही नए बंदरगाहों, टर्मिनल और आपातकालीन जहाज बनाए जाएं। आर्कटिक का समुद्री इलाका 6 महीने बर्फ में ढंका रहता है। यही वजह है कि आइसब्रेकर की आगे बहुत जरूरत पड़ेगी। पुतिन और पीएम मोदी के बीच मुलाकात में जहाजों के निर्माण को लेकर सहमति बनी थी। असल में अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से यूरोपीय शिपयार्ड रूस के लिए जहाज नहीं बना पा रहे हैं। वहीं चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के शिपयार्ड कम से कम साल 2028 तक के लिए बुक हैं। चीन की चाल को मात देगा भारत इसी वजह से रूस को अब विकल्‍प के रूप में भारत की मदद लेनी पड़ रही है जो उसका भरोसेमंद पार्टनर है। वहीं विश्‍लेषकों का कहना है कि रूस भारत के साथ दोस्‍ती बढ़ाकर चीन को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस बुरी तरह से चीन पर निर्भर हो गया है। चीन चाहता है कि नादर्न सी रूट पर उसकी पकड़ बढ़े और वह रूस के साथ दोस्‍ती बढ़ा रहा है। वह इसे बीआरआई का हिस्‍सा बता रहा है। वहीं यह पूरा इलाका तेल और गैस से भरा हुआ है जिससे आने वाले समय में व्‍यापार बहुत ज्‍यादा बढ़ने की संभावना है। recent visitors 104