प्रधानमंत्री मोदी ने रॉयल थिएटर ऑफ लुआंग प्रबांग में रामायण का मंचन भी देखा, कलाकारों से की मुलाकात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21वें आसियान-भारत और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए लाओस पहुंचे। जहां पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए वियनतियाने के होटल डबल ट्री में भारतीय समुदाय के लोग बड़ी संख्या में जुटे थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यहां के प्रमुख रॉयल थिएटर ऑफ लुआंग प्रबांग में रामायण का मंचन भी देखा। इसे 'फरा लक फरा राम' के नाम से भी जाना जाता है। इससे समझा जा सकता है कि प्रभु श्रीराम की कहानी पूरे आसियान क्षेत्रों को आपस में जोड़ती है। जैसा कोई अन्य ग्रंथ नहीं कर सकते। सनातन धर्म की जड़ें ना केवल भारत, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों में गहरी हो चली है। लाओस में रामायण सदियों से मनाई जाती रही है, जो दोनों देशों के बीच साझा विरासत और सदियों पुरानी सभ्यताओं के संबंधों को दर्शाती है। 'फ्रा लॉक फ्रा राम' लाओ संस्करण है। लाओस रामायण की कहानी यहां के मेकांग नदी के किनारे आसपास घूमती है। जो यहां पर गंगा के समान पवित्र मानी जाती है। इसमें लाओस की बौद्ध संस्कृति की बेहद शानदार झलक देखने को मिलती है। लाओस के अलावा यहां फ्रा राम को गौतम बुद्ध का अवतार माना जाता है। जो भगवान श्रीराम के रास्तों पर चलते थे। इसके अलावा लाओ में रावण को राक्षस मारा का अवतार माना जाता है। जो गौतम बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति में बाधा डालने का प्रयास करता है। पीएम मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसका वीडियो शेयर किया है। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ''विजयादशमी कुछ ही दिन दूर है और आज मैंने लाओ पीडीआर में लाओ रामायण का एक हिस्सा देखा, जिसमें रावण पर प्रभु श्री राम की जीत पर प्रकाश डाला गया है। यह देखकर बहुत खुशी होती है कि यहां के लोग रामायण से जुड़े हुए हैं। प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद हम पर सदैव बना रहे।'' कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी ने रामायण के कलाकारों से मंच पर मुलाकात भी और उनके संग फोटो भी खिंचवाई। उन्होंने फोटो शेयर करते हुए लिखा, ''लाओ पीडीआर में मेरे द्वारा देखे गए फलक फलम या फ्रा लाक फ्रा राम के यादगार प्रकरण की कुछ झलकियां।'' इससे पहले वियनतियाने में होटल डबल ट्री में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए भारतीयों और लाओस समुदाय के लोगों ने गायत्री मंत्र का पाठ किया। पीएम मोदी के सामने भारतीयों ने हाथ में तिरंगा लेकर गायत्री मंत्र का जाप भी किया। इस दौरान पीएम मोदी भी उनके सामने हाथ जोड़कर गायत्री मंत्र का पाठ करते दिखे। पीएम मोदी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में लाओस समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी का हिंदी में अभिवादन करते हुए ग्रैंड वेलकम किया। recent visitors 77

महाराष्ट्र – झारखंड विधानसभा चुनाव जल्द ऐलान, साथ ही देश की 50 सीटों पर उपचुनाव

नई दिल्ली देश में 'एक देश एक चुनाव' के मुद्दे पर बात हो रही है। पीएम नरेंद्र मोदी समेत केंद्र सरकार इस पर जोर दे रही है और मंथन चल रहा है। लेकिन इस बीच देश चुनाव में ही बिजी है। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे मंगलवार को ही आए हैं और अब इलेक्शन के नए राउंड का ऐलान एक सप्ताह के अंदर हो सकता है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार 18 अक्टूबर तक कभी भी महाराष्ट्र से लेकर झारखंड तक विधानसभा चुनाव कराने का ऐलान हो सकता है। इसके साथ ही यूपी, बंगाल, असम और राजस्थान समेत देश की 50 सीटों पर उपचुनाव हो सकता है। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर तक है। ऐसे में नई राज्य सरकार का गठन इससे पहले ही हो जाना चाहिए। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने अपील की है कि 15 नवंबर के बाद ही चुनाव का आयोजन हो। इसलिए क्योंकि 31 अक्टूबर को चुनाव है और फिर अगले कुछ दिन तक अन्य त्योहार हैं। यही नहीं देव दीपावली भी बड़े पैमाने पर मनाई जाती है। इसलिए 15 नवंबर के बाद ही चुनाव हो। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग के पास कम ही दिन का समय होगा और उसे 20 नवंबर तक किसी भी तरह मतदान कराना होगा ताकि अगले कुछ दिनों में नई सरकार का गठन हो सके। इसके लिए एक ही राउंड में महाराष्ट्र में चुनाव कराए जा सकते हैं। आमतौर पर राज्य में चुनाव कई राउंड में होते रहे हैं। लेकिन इस बार पुलिस प्रशासन और सरकार का दावा है कि हम एक राउंड में ही चुनाव करा लेंगे। इसके लिए सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था भी हो जाएगी। दरअसल महाराष्ट्र में 2019 में भी एक ही राउंड में मतदान हुआ था। महाराष्ट्र के साथ ही झारखंड में भी चुनाव हो सकता है। हालांकि झारखंड के लिए फिलहाल वक्त है और वहां 5 जनवरी तक मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल है। इनके अलावा 50 सीटों के उपचुनाव भी आयोग को कराने होंगे। दरअसल 18वीं लोकसभा में कई लोग सांसद बन गए हैं, जो विधायक थे। नियम के अनुसार 6 महीने के अंदर ही खाली सीटों पर चुनाव हो जाना चाहिए। इस लिहाज से नवंबर तक रिक्त सीटों पर नए सदस्य चुने जाने चाहिए। रिक्त सीटों की बात करें तो यूपी में सबसे ज्यादा 10, बंगाल में 6, असम और राजस्थान में 5-5 सीटें खाली हैं। इसके अलावा बिहार और राजस्थान में 4-4 सीटें खाली हैं। कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में भी तीन सीटें खाली हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन चुनावों के बाद दिल्ली में भी इलेक्शन की तैयारी शुरू हो जाएगी। वहां 5 फरवरी तक ही विधानसभा का कार्यकाल है। recent visitors 62

अवैध कॉलोनी में रहने वालो के लिए सरकार ने सुगम विद्युत योजना बनाई, परमानेंट बिजली कनेक्शन मिलेगा आसानी से

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए बड़ी खबर है. अब अवैध कॉलोनी में रहने वाले लोग भी परमानेंट बिजली कनेक्शन ले सकेंगे. हालांकि, उन्हें सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट देनी होगी. ये कीमत वे किश्तों में दे सकते हैं. इससे पहले इन कॉलोनी के रहवासियों के लिए परमानेंट बिजली कनेक्शन लेना आसान नहीं था. उन्हें इसके लिए बहुत बड़ी कीमत एक साथ देनी होती थी. इस वजह से वे इस तरह का बिजली कनेक्शन नहीं ले पाते थे. ऐसे लोगों को सरकार ने बड़ी राहत दी है. सरकार ने इन लोगों के लिए सुगम विद्युत (सुविधा) योजना बनाई है. ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए ही यह योजना लाई गई है. यह योजना दो साल तक लागू रहेगी. इस योजना का लाभ लेने वाले लोगों को इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट देनी होगी. वे इस कॉस्ट को किश्तों में दे सकेंगे. दो साल बाद इस योजना का रिव्यू किया जाएगा. उसी के आधार पर फैसला किया जाएगा कि इस योजना को जारी रखें या नहीं. भोपाल से प्रकाशित अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, सरकार की इस योजना में नए ग्राहक भी शामिल हो सकते हैं. जिन लोगों की कॉलोनियां रेरा में रिजस्टर्ड नहीं हैं वे भी इसका लाभ ले सकते हैं. इसके अलावा वे लोग भी लाभ ले सकते हैं जो एक साथ इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट नहीं दे सकते. दो साल में चुकाना होगा सारा रुपया सूत्रों ने बताया कि इस योजना में लोग व्यक्तिगत रूप से और सामूहिक रूप से शामिल हो सकते हैं. यह योजना हाउसिंग सोसायटी, बिल्डर और कॉलोनाइजर के लिए नहीं है. लोगों को योजना की शुरुआत में आवेदन के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट का 25 फीसदी रुपया देना होगा. उनका बिजली कनेक्शन चालू होने के बाद उन्हें बिल के साथ-साथ ब्याज भी देना होगा. उन्हें दो साल में सारा रुपया सरकार को चुकाना होगा. recent visitors 78

पाक में नहीं होगी चैम्पियंस ट्रॉफी? भारतीय टीम के कारण में ICC ने बनाए ये 3 प्लान

 लाहौर  पाकिस्तान में अगले साल होने वाली ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. भारतीय टीम के चक्कर में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को इस टूर्नामेंट के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. आईसीसी ने चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए तीन खास प्लान तैयार किए हैं. आज तक को मिली बड़ी जानकारी में आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी को लेकर पूरा प्लान सामने आ गया है. इसमें खुलासा हुआ है कि अब आईसीसी इस बड़े टूर्नामेंट को लेकर खास तैयारी कर रहा है. इस रिपोर्ट में भारतीय टीम के पाकिस्तान दौरे पर जाने और टूर्नामेंट को किसी अन्य देश में खेले जाने समेत तमाम जानकारी शामिल है. ICC ने बनाए ये तीन बड़े प्लान दरअसल, चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 की आधिकारिक मेजबानी पाकिस्तान के पास है. मगर BCCI ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वो अपनी भारतीय टीम को पाकिस्तान दौरे पर नहीं भेजेंगे. ऐसे में पाकिस्तान समेत ICC का सिरदर्द बढ़ गया है. आज तक को मिली जानकारी के अनुसार अब ICC 3 ऑप्शन पर काम कर रही है. आइए जानते हैं क्या हैं वो 3 प्लान…     पहला ऑप्शन: पूरा टूर्नामेंट पाकिस्तान में ही कराया जाए. हालांकि इसके लिए भारतीय टीम का मामला फंसता दिखाई दे रहा है.     दूसरा ऑप्शन: चैम्पियंस ट्रॉफी को हाइब्रिड मॉडल के आधार पर कराया जाए. इसके तहत भारतीय टीम अपने सभी मैच दुबई में खेल सकती है. इसके तहत सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले भी दुबई में होंगे.     तीसरा ऑप्शन: आखिरी विकल्प यही है कि चैम्पियंस ट्रॉफी को पूरी तरह से शिफ्ट कर दिया जाए. यानी पूरे टूर्नामेंट को पाकिस्तान से बाहर कराया जा सकता है. इसमें दुबई, श्रीलंका और साउथ अफ्रीका में से किसी एक देश में चुना जा सकता है, जहां यह टूर्नामेंट कराया जा सके. आखिरी 2 ऑप्शन पर हो सकता है काम बता दें कि भारत सरकार ने अब तक BCCI को अनुमति नहीं दी है कि वो भारतीय टीम को पाकिस्तान भेज सके. ऐसे में ICC के पास आखिरी 2 ऑप्शन पर काम करने के अलावा कोई दूसरा विकल्म दिख नहीं रहा है. हालांकि, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) पूरी तरह से टूर्नामेंट को अपने घर में कराए जाने पर अडिग है. जिस पर अंतिम फैसला नवंबर में आ सकता है क्योंकि एक दिसंबर से जय शाह ICC चेयरमैन का पद संभालने वाले हैं. अगले साल कब होगा ये टूर्नामेंट? ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 का आधिकारिक शेड्यूल अब तक सामने नहीं आया है. जबकि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चैम्पियंस ट्रॉफी का आगाज 19 फरवरी से होगा और इसका फाइनल मुकाबला 9 मार्च को खेला जा सकता है.   recent visitors 71

रतन टाटा के बाद अब कौन संभालेगा टाटा ग्रुप, जानें कैसे चुना जाएगा उत्तराधिकारी, कौन है रेस में सबसे आगे

मुंबई टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं रहे। 86 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके साथ ही टाटा समूह की कमान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि रतन टाटा के बाद अब अगुवाई कौन करेगा। हालांकि, इस रेस में कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन सबसे आगे उनके सौतेले भाई नोएल टाटा का नाम है। हालांकि, अब तक समूह की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कौन हैं नोएल टाटा नवल एच टाटा और सिमोन एन टाटा के बेटे हैं। टाटा इंटरनेशनल की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नोएल टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। वह टाटा समूह से 40 सालों से जुड़े हुए हैं और टाटा ग्रुप की कई कंपनियों में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। वह ट्रेंट, टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन हैं। साथ ही वह नोएल स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड के वाइस चेयरमैन हैं। वह सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड के ट्रस्टी भी हैं। उन्होंने ब्रिटेन की ससेक्स यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की है। साथ ही INSEAD से इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम पूरा किया है। नोएल टाटा के 3 बच्चे टाटा ट्रस्ट्स में हैं शामिल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा समूह ने नोएल टाटा के 3 बच्चों को परोपकारी संस्थाओं के बोर्ड में शामिल किया था। इनमें लेह, माया और नेविल का नाम शामिल है। खास बात है कि इन नियुक्तियों से ट्रस्ट्स की 132 साल पुरानी परंपरा में भी बदलाव के संकेत मिलते हैं, जहां पहले आमतौर पर दिग्गजों को ट्रस्टीशिप दी जाती थी। लेह, माया और नेविल टाटा की कई कंपनियों में मैनेजर लेवल के पदों पर भी हैं। इन ट्रस्टों में शामिल अन्य लोगों ने सिटी इंडिया के पूर्व सीईओ परमीत झावेरी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और रतन टाटा के छोटे भाई जिमी टाटा और जहांगीर अस्पताल के सीईओ जहांगीर एचसी जहांगीर सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं. कैसे चुने जाते हैं इन ट्रस्टों के चेयरमैन टाटा ट्रस्ट के प्रमुख का चुनाव ट्रस्टियों में से बहुमत के आधार पर होता है. विजय सिंह और वेणु श्रीनिवास इन दोनों ट्रस्टों के उपाध्यक्ष हैं. लेकिन इनमें से किसी एक के प्रमुख चुने जाने की संभावना अपेक्षाकृत कम है. जिस व्यक्ति को टाटा ट्रस्ट का प्रमुख बनाए जाने की अधिक संभवाना है, वो है 67 साल के नोएल टाटा. नोएल की नियुक्ति से पारसी समुदाय भी खुश होगा. रतन टाटा पारसी थे. इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि एक पारसी है इस संगठन का नेतृ्त्व करे. इस ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2023 में 470 करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया था. पारसी को प्राथमिकता एक ऐतिहासिक तय्थ यह भी है कि केवल पारसियों ने ही टाटा ट्रस्ट की कमान संभाली है. हालांकि कुछ के नाम में टाटा नहीं लगा था और उनका ट्रस्ट के संस्थापक परिवार से कोई सीधा रिश्ता नहीं था. अगर नोएल टाटा इन ट्रस्टों के प्रमुख चुने जाते हैं तो वे सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के 11वें अध्यक्ष और सर रतन टाटा ट्रस्ट के छठे अध्यक्ष बनेंगे. नोएल चार दशक से अधिक समय से टाटा समूह से जुड़े हुए हैं. वो ट्रेंट, टाइटन और टाटा स्टील समेत छह प्रमुख कंपनियों के बोर्ड में हैं. उन्हें 2019 में सर रतन टाटा ट्रस्ट का ट्रस्टी नियुक्त किया गया था. वो 2022 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल किए गए थे. टाटा का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद माना जाता था कि वो टाटा संस के चेयरमैन का पद संभालेंगे. लेकिन उस पर नोएल के बहनोई साइरस मिस्त्री को बैठा दिया गया. टाटा संस से साइरस मिस्त्री के निकाले जाने के बाद टाटा संस के अध्यक्ष की कमान टीसीएस के सीईओ एन चंद्रशेखरन ने संभाली.नोएल और रतन टाटा कभी एक साथ नजर नहीं आए. दोनों ने अपने बीच दूरी बनाए रखी.हालांकि रतन टाटा के अंतिम दिनों में अपने सौतेले भाई से रिश्ते काफी मधुर हो गए थे. recent visitors 197

भगवान राम और हनुमान को मुस्लिम बताकर नमाज पढ़वाना पड़ा भारी, बिहार-बेगूसराय में शिक्षक पर मामला दर्ज

बेगूसराय. बेगूसराय में एक मुस्लिम शिक्षक के द्वारा भगवान राम और हनुमान पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला अब गहराता ही जा रहा है। आज भाजपा नेता सह वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर के नेतृत्व में सिंहपुर गांव के राजेश कुमार पोद्दार ने बछवाड़ा थाने में आरोपी शिक्षक जियाउद्दीन के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया है दरअसल जियाउद्दीन के द्वारा सप्तम वर्ग में पढ़ाई के दौरान बच्चों को यह सिखाया जा रहा था कि हनुमान एवं भगवान राम मुसलमान थे और भगवान राम के कहने पर हनुमान जी नमाज पढ़ा करते थे। यही बात जब बच्चों ने अपने अभिभावकों को बताई थी तो अभिभावक आक्रोशित हो गए थे और स्कूल पर जाकर हो हंगामा किया था। बाद में बेगूसराय के सांसद सह केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी आपत्ति दर्ज करते हुए सामाजिक सौहार्द को बिगड़ने का आरोप लगाया था। आज आरोपी शिक्षक जियाउद्दीन के विरुद्ध बछवारा थाने में मामला दर्ज करवाया गया है। पूरा मामला बछवारा थाना क्षेत्र के कद्राबाद सिंहपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय का है। इसी क्रम में अमरेंद्र कुमार अमर ने बताया कि आज वामपंथी विचारधारा के कुछ लोग इस बात का खंडन करते फिर रहे हैं। उन्होंने बिना नाम लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह एवं बछवारा के भाकपा पूर्व विधायक अवधेश राय पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्ल आम किया गया तब यह लोग चुप थे और फिलिस्तीन की घटना के बाद तख्ती लगाकर प्रदर्शन कर रहे थे । लेकिन आज जब एक मुस्लिम शिक्षक के द्वारा हिंदुओं की भावना पर आघात किया गया है तो वोट के लिए यह लोग घूम घूम कर उल्टी राजनीति कर रहे हैं। recent visitors 70

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में है : मंत्री कुशवाह

भोपाल उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में है। प्रदेश की इस उपलब्धि के दृष्टिगत केन्द्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि एक वर्ष बढ़ाई गई है। मंत्री कुशवाह ने केन्द्र सरकार के इस निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय खाद्य प्र-संस्करण मंत्री चिराग पासवान के प्रति आभार व्यक्त किया है। प्रमुख सचिव उद्यानिकी अनुपम राजन ने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए केन्द्रीय खाद्य प्र-संस्करण मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश में योजना के क्रियान्वयन अवधि को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है। इस योजना के तहत मध्यप्रदेश में 420 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिये बैंकों द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है, जो एक रिकार्ड है। प्रमुख सचिव राजन ने बताया कि मध्यप्रदेश में पीएमएफएमई योजना वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक 5 वर्षों के लिए लागू की गई थी। पीएमएफएमई योजना के माध्यम से खाद्य प्र-संस्करण उद्योग इकाइयों की स्थापना के लिए निजी और समूह को 35 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रूपये का अनुदान दिया जाता है। इससे प्रेरित होकर प्रदेश में कृषि/उद्यानिकी के क्षेत्र में युवा स्वयं की औद्योगिक यूनिट स्थापना के लिए प्रेरित हुए है। राजन ने बताया कि प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी के माध्यम से प्रस्तावों का परीक्षण किया जाता है, इसके उपरांत ही केन्द्रीय इंटरमिनिस्ट्रियल इम्पावर कमेटी को प्रस्ताव भेजे जाते है। योजना में प्राप्त 917 प्रकरणों में से 420 प्रकरणों की स्वीकृति प्राप्त कर मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी राज्य बना है। उल्लेखनीय है कि अपर सचिव, केन्द्रीय खाद्य प्र-संस्करण मिनहाज आलम ने पत्र लिखकर प्रमुख सचिव उद्यानिकी अनुपम राजन और उनकी टीम के कार्य की सराहना की है।   recent visitors 69